भोपाल मेट्रो को मिलेगी नई दिशा, 32 किमी विस्तार और 27 रैक मिलने का फैसला

 भोपाल  एमपी के भोपाल शहर में मेट्रो का काम चल रहा है। इसी बीच मेट्रो रैक की वडोदरा से आपूर्ति फिलहाल रोक दी गई है। यहां से तीन-तीन कोच के 27 रैक मिलने तय हुए हैं। आठ रैक की आपूर्ति हो चुकी है। अभी कमर्शियल रन में महज दो रैक का ही उपयोग किया जा रहा है। छह रैक अभी डिपो में ही हैं। ऐसे में जब तक प्रोजेक्ट में 32 किमी की लाइन नहीं बन जाती, तब तक नए रैक की आपूर्ति रोक दी गई है। गौरतलब है कि मेट्रो ट्रेन की रैक को बनाने का काम वडोदरा के पास स्थापित प्लांट में हो रहा है। देरी से बढ़ेगी कीमत मेट्रो रैक के लिए अनुबंध किया हुआ है। अब तब रैक भेजा जाएगा, जब लाइन पूरी होगी। उस समय की स्थिति के अनुसार कीमत होगी। 2023 में पहला रैक यहां आया था। 2024 तक आठ रैक आ गए। इस समय इनकी कीमत दस फीसदी तक बढ़ गई है। 2028 तक ये करीब 20 फीसदी महंगी होगी। यानी प्रोजेक्ट में जितनी देरी होगी, रैक उतना महंगा होगा। एमडी मेट्रो रेल चैतन्य कृष्णा के अनुसार प्रोजेक्ट की शुरुआती दो लाइनों पर फोकस किया जा रहा है। अब तेजी से इसे पूरा किया जा रहा है। देरी का असर यहां पर भी -भोपाल मेट्रो परियोजना की लागत 2017- 18 में 6,941 करोड़ रुपए तय थी -प्रति किमी 249 करोड़ रुपए की लागत आंकलित की थी वर्ष 2025 में बढ़कर ये 10,033 करोड़ रुपए हो गई -प्रति किमी खर्च 371 करोड़ रुपए पहुंच गया -ये बढ़ोतरी 43 प्रतिशत है। देरी से कीमत बढऩे और प्रोजेक्ट के वित्तीय संकट के तौर पर होगा शहर को मिलेगी बड़ी सौगात केंद्रीय बजट में भोपाल मेट्रो समेत नेशनल हाइवे और ब्रिज की उम्मीद बेहतर हुई। टियर दो- तीन शहरों के लिए 12.02 लाख करोड़ रुपए आवंटित हुए हैं, इसमें भोपाल की भागीदारी होगी। मेट्रो की मौजूदा 32 किमी की लाइन को पूरा करने 5000 करोड़ रुपए की जरूरत है। इसी तरह टियर 2 शहरों में सिटी इकोनॉमिक रीजन का प्रावधान किया है, जिसमें पांच साल में 5000 करोड़ रुपए मिलेंगे। भोपाल को लाभ मिला तो यहां लॉजिस्टिक व हाइवे कनेक्टिविटी के लिए काम शुरू हो सकता है। recent visitors 22

MP में स्मार्ट पंचायतें: ग्रामीणों को मोबाइल पर 2100 सेवाओं का फायदा, अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

भोपाल  पंचायतों में ई-सेवा ऐप व पोर्टल लागू होगा। इसके तहत पंचायत स्तर की सेवाओं की कम से कम समय में डिलीवरी होगी। अभी लोगों को इन सुविधाओं के लिए जनपद से लेकर जिला पंचायत तक चक्कर लगाने पड़ते हैं। इस ऐप पर 2100 तरह की सेवाएं उपलपध कराई जानी हैं, इनमें से करीब 600 सेवाओं को उपलब्ध कराया जाने लगा है। इनमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की सेवाएं भी शामिल हैं। इन सभी सेवाओं की नियमित डिलीवरी हो, पंचायतों के स्तर पर किए जाने वाले कामों में गति आए और पंचायत स्तर पर पर गड़बडिय़ां का स्तर जीरो हो जाए, इसके लिए सरकार ई-ऑफिस की तरह ई-पंचायत मॉडल लागू करने जा रही है। अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने की कवायद असल में केंद्र व राज्य सरकार का बड़ा फोकस शहरों पर रहा है। अब ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को भी मजबूत करने की कवायद की जा रही है। इसका रास्ता पंचायतों से ही होकर गुजरता है। ऐसा इसलिए क्योंकि राज्य की बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में ही रहती है। इन सभी बातों को देखते हुए पंचायतों को सशक्त बनाने के प्रयास तेज किए हैं। इसके साथ ही ऐप के जरिए पंचायत से मिलने वाली सेवाओं को और अधिक पारदर्शी भी बनाया जा सकेगा। खाली जमीनों से हटाया जाएगा अतिक्रमण मध्यप्रदेश में ज्यादातर पंचायतों के पास खाली जमीनों का एक बड़ा लैंडबैंक है, जिसका उपयोग नहीं हो रहा है। कई पंचायतों में तो अतिक्रमण करने वालों बेशकीमती जमीनों पर कव्जा कर रखा है। अब सरकार उक्त खाली जमीन का उपयोग पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए करने जा रही है। इसके तहत पंचायतों की जमीनों के एक हिस्से का भविष्य में व्यावसायिक उपयोग हो सकता है। खाली जमीन पर सभी तरह की प्लानिंग से पहले लैंडबैंक तैयार किया जा रहा है, जो यह बताएगा कि किस पंचायत में कुल कितनी जमीन हैं, उसमें से कितनी का उपयोग हो रहा है, कितनी खाली है और कितने क्षेत्र में अतिक्रमण है और उसको हटाने की कार्रवाई किस स्तर पर है। एक बगिया मां के नाम… बनेगी आय का जरिया पंचायतों में बड़े स्तर पर एक बगिया मां के नाम विकसित की जा रही हैं। इनका मकसद पंचायतों में फलदार व छायादार पेड़ों वाला ह्रश्वलांटेशन विकसित करना है, ताकि पंचायतों के लिए आय का जरिया बन सके और पंचायतें आत्मनिर्भर बनने के साथ पर्यावरण को भी लाभ हो। इन पर भी फोकस आपदाओं से बचाने की पहल: अभी पंचायत स्तर पर प्राकृतिक आपदा से बचने और उससे होने वाले नुकसानों की वैज्ञानिक आधार पर गणना करने के कोई विकल्प नहीं है। पहली बार सरकार ने पंचायतों में मौसम केंद्र व वर्षामापी यंत्र लगाने की पहल की है। इसके लिए 23 हजार पंचायतों पर 350 करोड़ रुपए खर्च किए जाने का प्रावधान किया है। इससे स्थानीय स्तर पर मौसम में बदलाव की जानकारी समय पूर्व मिलेगी। इससे  किसानों व ग्रामीणों को बचाव करने में लाभ होंगे। वर्षामापी यंत्र: बारिश को रेकॉर्ड करने में मदद मिलेगी। अभी यह काम जिला स्तर पर होता है लेकिन कई मौके ऐसे आ चुके हैं जब एक या कुछ पंचायतों में ही अतिवृष्टि हो जाती है, पूरा जिला प्रभावित नहीं होता। इसके कारण संबंधित अफसर और एजेंसियां नुकसान नहीं मानती। इस तरह संबंधित पंचायतों के लोगों को नुकसान की भरपाई नहीं होती। recent visitors 23

दुश्मन की सोच से परे प्लान! चिकन नेक क्षेत्र में जमीन के नीचे बनेगा 40 KM का कनेक्शन

नई दिल्ली बंगाल सिलीगुड़ी के पास ‘चिकन नेक’ भारत की वह नब्ज है, जो शेष भारत को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है. यह एक संकरा क्षेत्र है, जिसकी चौड़ाई मात्र 20 किलोमीटर है. इसकी संकरापन देखते हुए कई लोगों ने तोड़ने की धमकी दी, हालांकि, उनको समय पर उचित जवाब दिया जाता रहा है. केंद्र की सरकार इसकी सुरक्षा को लेकर लेकर काफी गंभीर है. इसकी सुरक्षा के लिए केंद्र ना केवल आसमान और धरती पर पैनी नजर रख रही है बल्कि अब धरती के अंदर से भी इसकी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी चल रही है. सरकार चिकन नेक की सुरक्षा के लिए फूल-प्रूफ प्लान लेकर आई है. अब चिकन नेक से होते हुए 40 किलोमीटर लंबे रेलवे टनल बनाने की तैयारी चल रही है. सोमवार को केंद्रीय रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने सोमवार को टनल के बारे में जानकारी देते हुए बताया, ‘केंद्र नॉर्थ-ईस्ट को बाकी भारत से जोड़ने वाले 40 किलोमीटर लंबी स्ट्रेटेजिक कॉरिडोर पर अंडरग्राउंड रेल ट्रैक बनाने की योजना बना रहा है. इससे नॉर्थ-ईस्ट और बाकी भारत के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत और सुरक्षित किया जा सकेगा.’ अश्विनी वैष्णव ने क्या कहा देखिए कहां से कहां तक ? प्रस्तावित अंडरग्राउंड हिस्सा टिन माइल हाट और रंगापानी रेलवे स्टेशनों के बीच संकरे सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर चलेगा. इसे आमतौर पर चिकन नेक के नाम से जाना जाता है. यह नॉर्थ-ईस्ट के आठ राज्यों अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा को मुख्य शेष भारत को जोड़ने का काम करता है. चिकन नेक जमीन नॉर्थ ईस्ट को जोड़ने वाली संकरी पट्टी है. इसकी लंबाई 60 किलोमीटर और चौड़ाई मुश्किल से 20 किलोमीटर है. इसकी सीमा नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से लगती है. भौगोलिक स्थिति और स्ट्रेटेजिक संवेदनशीलता के कारण, इस कॉरिडोर को लंबे समय से राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा माना जाता रहा है. बजट पर बात करते हुए जानकारी दी रेलवे के लिए यूनियन बजट में हुए आवंटन के बारे में वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए रिपोर्टरों से बात की. वैष्णव ने कहा, ‘नॉर्थ ईस्ट को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले 40 किलोमीटर के स्ट्रेटेजिक कॉरिडोर के लिए खास प्लानिंग है. अंडरग्राउंड रेलवे ट्रैक बिछाने और मौजूदा ट्रैक को चार-लाइन करने की भी प्लानिंग चल रही है.’ डिफेंस के लहजे से अहम अंडरग्राउंड रेल का प्रस्ताव इंडियन रेलवे की लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजी का हिस्सा है. ताकि कॉरिडोर पर भीड़ कम हो, जरूरत के हिसाब से सामान बेहतर हो. यात्रियों, के साथ-साथ सामान और डिफेंस लॉजिस्टिक्स की बिना रुकावट आवाजाही पक्की हो सकेगी. अभी, सिलीगुड़ी कॉरिडोर में कई रेलवे लाइनें, हाईवे, तेल पाइपलाइन और कम्युनिकेशन नेटवर्क हैं, जो इसे देश के सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले और सेंसिटिव ट्रांजिट जोन में से एक बनाता है. सुरक्षा के लिए जरूरी नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) के जनरल मैनेजर चेतन कुमार श्रीवास्तव ने इसे लेकर अहम जानकारी दी. उन्होंने बताया अंडरग्राउंड रेलवे लाइनें पश्चिम बंगाल में तीन मील हाट-रंगापानी सेक्शन पर बनाई जाएंगी. श्रीवास्तव ने कहा, ‘यह अंडरग्राउंड हिस्सा सुरक्षा के नज़रिए से ज़रूरी है.’ उन्होंने कॉरिडोर की स्ट्रेटेजिक अहमियत और ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत पर ज़ोर दिया जो कुदरती और इंसानों की बनाई, दोनों तरह की रुकावटों को झेल सके. recent visitors 33

लाइन-2 की पीएम मोदी रखेंगे आधारशिला!, जयपुर मेट्रो का बदलेगा नाम

जयपुर. जयपुर मेट्रो पर नया अपडेट आया है। जल्द ही जयपुर मेट्रो को नाम मिल सकता है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वित्तीय वर्ष के अंतिम महीने में जयपुर मेट्रो लाइन-2 की आधारशिला रख सकते है। मेट्रो अधिकारियों ने बताया कि आधारशिला समारोह के बाद जयपुर मेट्रो रेलवे निगम (जेएमआरसी) का नाम बदलकर राजस्थान मेट्रो रेलवे निगम (आरएमआरसी) हो जाएगा। अंतिम मंजूरी अभी बाकी है जयपुर मेट्रो रेलवे निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार इस बारे में राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री कार्यालय से अनुरोध किया है। हालांकि, केंद्रीय मंत्रिमंडल से परियोजना को अंतिम मंजूरी अभी बाकी है। अधिकारियों ने कहा कि वे पीएमओ से अंतिम मंजूरी और शिलान्यास समारोह की निश्चित तिथि दोनों की एक साथ मिलने की उम्मीद है। जयपुर मेट्रो को जल्द मिलेगा नया नाम मेट्रो के एक अधिकारी के अनुसार जयपुर मेट्रो (कोलकाता मेट्रो के अलावा) एकमात्र मेट्रो है, जिसका निर्माण और संचालन राज्य सरकार ने किया है। अब, हम निगम को केंद्र और राज्य के बीच एक संयुक्त उद्यम इकाई में बदलकर आरएमआरसी का गठन करेंगे। recent visitors 34

शिव-विवाह उत्सव की तैयारियां पूरी, उज्जैन में बाबा महाकाल नौ स्वरूपों में देंगे दर्शन

उज्जैन  महाशिवरात्रि में कुछ ही दिन का समय शेष बचा है। लेकिन शिव और पार्वती के विवाह के इस त्योहार को लेकर उज्जैन के बाबा महाकाल मंदिर में तैयारियां अभी से शुरू हो चुकी हैं। मंदिर की दीवारों से लेकर शिखर पर रंग-रोगन किया जा रहा है। इसी के साथ 6 फरवरी से मंदिर में 9 दिनों तक चलने वाले उत्सव की शुरुआत होगी, जिसमें बाबा भक्तों को नौ अलग-अलग रूपों में दर्शन देंगे। बाबा महाकाल की नगरी में महाशिवरात्रि का त्योहार 9 दिन तक चलता है, जो 6 फरवरी से शुरू होगा और 15 फरवरी तक चलेगा, जिसमें रोजाना भगवान का रुद्राभिषेक, 24 घंटे निराकार रूप में दर्शन और जलधारी, रात के समय स्नान और वस्त्र धारण का कार्यक्रम रहेगा। साथ ही अलग-अलग नौ विग्रहों की स्थापना और पूजा की जाएगी। ये नौ दिन भगवान की पूजा नवरात्रि के नौ दिनों जैसी होती है। भक्तों के लिए मंदिर भी खुले रहेंगे और भक्त बाबा महाकाल पर जलधारी अर्पित कर पाएंगे। महाकाल मंदिर के पुजारी पं महेश शर्मा ने बताया कि पहले दिन बाबा का दुशाला ओढ़ाकर श्रंगार होता है और फिर दूसरे दिन बाबा को शेषनाग धारण कराए जाते हैं। तीसरे दिन घटाघटा स्थापित किया जाता है, जो शिवलिंग के समान ही होता है। चौथे दिन प्रभु के छवि दर्शन होते हैं और पांचवें दिन बाबा को मन-महेश, उमा महेश, शिव तांडव और होलकर के रूप में सजाया जाता है। इस वर्ष 15 फरवरी को होने वाली खास पूजा और अनुष्ठान पर पुजारी पं महेश शर्मा ने बताया कि 15 फरवरी को जलधारी के साथ चारों पहर की पूजा और आरती होगी और रात के समय स्नान के साथ बाबा को दूल्हे के रूप में श्रंगार कर सजाया जाएगा और रात को विशेष श्रंगार पूजा होगी, जिसे सेहरा दर्शन भी कहा जाता है। इस दौरान नौ दिनों तक मंदिर परिसर में भजन और कीर्तन का आयोजन होगा और भक्तों के आगमन के लिए तैयारियां की जा रही हैं क्योंकि महाशिवरात्रि के दिन मंदिर में भीड़ बढ़ जाती है। मंदिर में हो रही तैयारी पर उन्होंने कहा कि गर्भगृह की सफाई, मंदिर के कुंड़ों की सफाई और रंग-रोगन का काम शुरू हो चुका है, जिसे 6 फरवरी तक खत्म करने की कोशिश रहेगी। अधिकारियों ने देखी व्यवस्था महापर्व 2026 के अवसर पर ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर जी के दर्शन हेतु आने वाले श्रद्धालुओं की संभावित अत्यधिक संख्या को दृष्टिगत रखते हुए दर्शन व्यवस्था को सुव्यवस्थित, सुरक्षित एवं सुगम बनाए जाने के उद्देश्य से कलेक्टर एवं श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह द्वारा आज श्री महाकालेश्वर मंदिर परिक्षेत्र एवं श्री महाकाल लोक के आंतरिक एवं बाह्य क्षेत्रों का विस्तृत भ्रमण एवं निरीक्षण किया गया।निरीक्षण के दौरान रोशन कुमार सिंह ने दर्शन मार्ग, श्रद्धालुओं की आवाजाही, सुरक्षा व्यवस्था, मूलभूत सुविधाओं तथा भीड़ प्रबंधन की व्यवस्थाओं का अवलोकन करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। साथ ही मंदिर परिसर एवं श्री महाकाल लोक में चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति का भी जायजा लिया गया तथा संबंधित निर्माण एजेंसियों को कार्यों को समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने हेतु आवश्यक निर्देश दिए गए, जिससे महापर्व के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इस अवसर पर मंदिर प्रशासक एवं अपर कलेक्टर प्रथम कौशिक, अतेंद्र सिंह एडीएम उज्जैन अभिलाष मिश्रा आयुक्त नगर पालिका निगम एवं संबंधित निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि, मंदिर अधिकारी एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। recent visitors 37

धान खरीदी को लेकर बड़ा फैसला, छत्तीसगढ़ में 2 दिन और बढ़ी तारीख

रायपुर राज्य सरकार ने धान खरीदी की समय अवधि दो दिन बढ़ा दी है। अब चार और पांच फरवरी को भी धान खरीदी की जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंगलवार को इसकी घोषणा की। पत्रकारों से चर्चा में उन्होंने कहा कि समीक्षा में जानकारी मिली कि कुछ किसानों के टोकन नहीं कट पाए हैं, कुछ पंजीयन नहीं कर पाए। इसलिए समय अवधि बढ़ाई जा रही है। राज्य के ऐसे किसान जो पंजीकृत है और जिनका टोकन कट चुके है, उन किसानों का धान खरीदा जाएगा। मुख्यमंत्री ने धान खरीदी के दिवस में बढ़ोतरी की  ने अपनी पड़ताल के बाद खबर प्रकाशित कर सरकार को चेताया था कि टोकन कट जाने के बाद भी प्रदेश के लगभग ढाई लाख किसानों का धान नहीं बिक पाया है। इसके बाद राज्य सरकार ने मामले को संज्ञान में लिया। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने भी जिलों से जानकारी मांगी थी और इसके बाद मुख्यमंत्री ने धान खरीदी के दिवस में बढ़ोतरी कर दी। अब तक 140 लाख टन धान की खरीदी 15 नवंबर 2025 से शुरू धान खरीदी का महाभियान के तहत 31 जनवरी 2026 तक 25 लाख 11 हजार से अधिक किसानों से लगभग 140 लाख टन धान की खरीदी की गई है। धान खरीदी के एवज में इन किसानों को 33 हजार 149 करोड़ रुपये का भुगतान बैंक लिकिंग व्यवस्था के तहत किया जा चुका है। राज्य में इस वर्ष 27 लाख 43 हजार 145 किसानों ने पंजीयन कराया है। 2,740 धान उपार्जन केंद्रों के माध्यम से खरीदी की प्रक्रिया हुई है। शासन की यह व्यवस्था सुनिश्चित कर रही है कि वास्तविक किसान को ही लाभ मिले और बिचौलियों अथवा फर्जी प्रविष्टियों की कोई गुंजाइश न रहे। यह भी पढ़ें- रायपुर-दुर्ग के बीच सफर होगा और भी आसान, सिरसा गेट और खुर्सीपार में बनेंगे ग्रेड सेपरेटर, ₹77 करोड़ मंजूर ये किसान होंगे धान बेचने के पात्र   ऐसे किसान जिन्होंने 10 जनवरी 2026 के बाद टोकन के लिए आवेदन तो किया था, लेकिन उनका भौतिक सत्यापन अभी तक पूरा नहीं हो पाया है।  वे किसान जिन्होंने 10 जनवरी 2026 के बाद आवेदन किया और सत्यापन के दौरान जिनके पास वास्तव में धान का स्टॉक (बचा हुआ धान) पाया गया है।  ऐसे किसान जिन्हें 28, 29 या 30 जनवरी 2026 के लिए टोकन जारी किया गया था, लेकिन वे किसी भी कारणवश निर्धारित तिथि पर अपना धान नहीं बेच पाए थे। हमने धान खरीदी की समीक्षा की है। कुछ किसान जिनका टोकन कट गया था और धान नहीं बेच पाए थे और कुछ किसानों का पंजीयन नहीं हो पाया था। इसलिए दो दिन और किसानों का धान खरीदेंगे। – विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़     recent visitors 32

होटल कर्मचारी की साजिश नाकाम, 75 लाख की लूट में 4 आरोपी गिरफ्तार

 नरसिंहपुर.  जिला मुख्यालय के मुशरान पार्क चौराहा के समीप स्थित होटल कुसुम वैली में हुई करीब 75 से 80 लाख रुपये की सनसनीखेज लूट के 4 आरोपियों को पुलिस ने चंद घंटों में गिरफ्तार कर लिया। 2-3 जनवरी की दरमियानी रात्रि करीब 2.30 बजे जिला मुख्यालय में मुशरान पार्क चौराहा के पास स्थित होटल कुसुम वैली के कर्मचारियों ने थाना में सूचना दी कि 3–4 नकाबपोश बदमाशों ने होटल में जबरन प्रवेश कर वहां रखी नकद राशि लूट ली है। सूचना मिलते ही सुबह 4 बजे पुलिस अधीक्षक डा. ऋषिकेश मीणा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप भूरिया के साथ स्वयं घटनास्थल पहुंचे और मौके का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। होटल में रखी रकम बना लालच की वजह जांच के दौरान सामने आया कि होटल कर्मचारी अनुज कुमार वाल्मीकि को होटल में रखी नकदी की पूर्व जानकारी थी। लालच में आकर उसने यह जानकारी रात्रिकालीन मैनेजर चंद्रेश रजक एवं राकेश कुमार शुक्ला को दी। फिर अनुज ने अपने साथी मोनू उर्फ डइया वंशकार निवासी रिप्टापार से संपर्क कर इस राशि को हड़पने की साजिश रची। इसके तहत मोनू अपने अन्य तीन साथियों के साथ होटल में पहुंचा और वहां मौजूद अनुज, राकेश शुक्ला व चंद्रेश रजक से दिखावटी मारपीट की और ड्राज में रखी हुई रकम निकालकर वहां से फरार हो गए।     पुलिस ने घटनास्थल से महत्वपूर्ण भौतिक एवं तकनीकी साक्ष्य एकत्र किए गए।     सीसीटीवी फुटेज लूट की साजिश उजागर करने में अहम कड़ी साबित हुई, जिसके आधार पर पुलिस ने तेजी से आरोपियों तक पहुंच बनाई। 4 गिरफ्तार, 3 फरार पुलिस अधीक्षक ऋषिकेश मीणा ने देर शाम पत्रकारवार्ता आयोजित कर वारदात के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि मामले में आरोपी चंद्रेश रजक निवासी यादव कॉलोनी नरसिंहपुर, राकेश कुमार शुक्ला निवासी लखीमपुर खीरी उ.प्र., हाल निवास नरसिंहपुर, अनुज कुमार वाल्मीकि निवासी लखीमपुर खीरी उ.प्र., हाल निवास नरसिंहपुर एवं मोनू उर्फ डइया बंशकार निवासी रिपटा पार, नरसिंहपुर को गिरफ्तार कर लिया है। घटना में संलिप्त 3 अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।   recent visitors 52