“आयुष्मान वय वंदना कार्ड“ के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाएगा

महासमुंद केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा आयुष्मान भारत योजना के तहत वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक विशेष सुविधा शुरू की गई है। “आयुष्मान वय वंदना कार्ड“ के माध्यम से 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को व्यक्तिगत रूप से 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। यह सुविधा उनके पारिवारिक आयुष्मान कार्ड से अलग होगी, जिससे वे स्वतंत्र रूप से स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे। जिले में 62,137 पात्र हितग्राहियों का वय वंदना कार्ड बनाया जाना है, जिनमें से अब तक 7,834 हितग्राहियों (12.6 प्रतिशत) का कार्ड बन चुका है। इस योजना के तहत बीपीएल परिवारों को आयुष्मान योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है। इसी प्रकार से एपीएल परिवारों को 50 हजार रुपये तक का इलाज मुफ्त उपलब्ध होता है। यदि परिवार में 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक हैं, तो वे अपना वय वंदना कार्ड बनवाकर अतिरिक्त 5 लाख रुपये तक की अलग से स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त कर सकते हैं। आयुष्मान वय वंदना कार्ड“ बनाने के लिए केवल आधार कार्ड की आवश्यकता होगी। यह कार्ड सरकारी स्पतालों और च्वाईस सेंटरों में मुफ्त में बनाया जाएगा। यदि पहले से आयुष्मान कार्ड बना हुआ है, तो ई-केवाईसी अनिवार्य होगी। वय वंदना कार्ड को मोबाइल ऐप या पोर्टल https://beneficiary.nha.gov.in/ के माध्यम से आधार लिंक मोबाइल ओटीपी, बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट, या फेस ऑथेंटिकेशन द्वारा बनाया जा सकता है। जिले में शत प्रतिशत हितग्राहियों को लाभ दिलाने कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह के निर्देशानुसार बचे हुए हितग्राहियों के लिए विशेष महाअभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत ग्राम सचिव, रोजगार सहायक, मितानिन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, बैंक सखियां, और अन्य विकासखंड स्तरीय कर्मचारी शिविर लगाकर कार्ड बनाने में सहायता करेंगे। स्वास्थ्य विभाग द्वारा 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी नागरिकों से अपील की गई है कि वे अपने आधार कार्ड के साथ नजदीकी सरकारी अस्पताल या च्वाईस सेंटर पर जाकर जल्द से जल्द वय वंदना कार्ड बनवा लें। इस कार्ड के माध्यम से उन्हें भविष्य में किसी भी स्वास्थ्य समस्या के दौरान आर्थिक कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। recent visitors 54

इंदौर के एमवायएच और जिला अस्पताल के लिए 700 करोड़ रुपए मंजूर किए, मालवा के मरीजों को मिलेगी और बेहतर सुविधाएं

 इंदौर विधानसभा में गुरुवार को एमवाय अस्पताल को आदर्श बनाने के लिए 700 करोड़ रुपये की घोषणा हुई। इस राशि से नई बिल्डिंग बनाई जाएगी, जिससे संभागभर के मरीजों को आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिलेगा। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने जिला अस्पताल और एमवायएच को आदर्श अस्पताल के रूप में उन्नयन और सुदृढ़ीकरण के लिए विभिन्न प्रविधानों की घोषणा की है। लंबे समय से इसे लेकर मांग की जा रही थी। इस घोषणा के बाद अब जिला अस्पताल के निर्माण कार्य में तेजी आ सकती है। कैबिनेट मंत्री तुलसी सिलावट ने कहा कि इस निर्णय से इंदौर की स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ होंगी और यह चिकित्सा क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। इससे मालवा क्षेत्र के मरीजों को उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। एमवायएच परिसर में बनेगा नया सात मंजिला भवन मंत्री सिलावट के अनुसार, उन्होंने एमवायएच अस्पताल के विस्तार को लेकर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से कई बार अनुरोध किया था। इसी के तहत 773 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से सात मंजिला नया भवन निर्माण किया जाएगा। भोपाल में अधिकारियों द्वारा तैयार की गई योजना के अनुसार, इंदौर और उज्जैन संभाग के मरीजों के लिए 1,450 नए बेड जोड़े जाएंगे। यह आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से युक्त होगा। नया भवन ओपीडी के पास बनाया जाएगा, जिसके लिए वर्तमान नर्सिंग हॉस्टल और अतिक्रमणों को हटाया जाएगा। इस भवन से चाचा नेहरू अस्पताल, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, एमआरटीबी और कैंसर अस्पताल तक पहुंचना भी आसान होगा। मौजूदा भवन में स्वास्थ्य सेवाएं पूर्ववत जारी रहेंगी विस्तार कार्य के दौरान वर्तमान अस्पताल भवन में सभी सेवाएं पूर्ववत जारी रहेंगी। परिसर में डॉक्टरों और मरीजों के लिए दो मल्टी-लेवल पार्किंग सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके अलावा, नर्सिंग स्टूडेंट्स के लिए 300 बिस्तरों वाला नया हॉस्टल भी बनाया जाएगा। वर्तमान में अस्पताल में 1,152 बेड हैं और हर दिन ओपीडी में औसतन 4,000 मरीजों का उपचार किया जाता है। विस्तार कार्य के पूरा होने के बाद यह क्षेत्र प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा केंद्रों में से एक बन जाएगा। सात मंजिला होगा नया एमवायएच नई बिल्डिंग तल मंजिल के साथ सात मंजिला होगी। बिल्डिंग बनाने के लिए जिस जगह का चयन किया गया है, वहां से चाचा नेहरू, सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल, कैंसर अस्पताल काफी नजदीक रहेंगे। ऐसे में मरीजों को अस्पतालों में आने-जाने में भी सुविधाएं मिलने लगेगी। नई बिल्डिंग में दो मल्टीलेवल पार्किंग भी बनाई जाएगी। उम्मीद है कि घोषणा की राशि को बढ़ाया जाएगा। वर्तमान में जिस बिल्डिंग में एमवाय अस्पताल संचालित हो रहा है, उसकी क्षमता 1152 बेड की है। यहां विभिन्न बीमारियों का इलाज किया जाता है। अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब चार हजार मरीज इलाज के लिए आते हैं। अस्पताल की बिल्डिंग की दीवारों में अब जगह-जगह सीलिंग की समस्या आने लगी है। recent visitors 44

1 मई को गढ़ाकोटा में 23वां पुण्य विवाह समारोह, एक ही विधानसभा में 25000 से अधिक कन्यादान लेने के पश्चात एक बार पुनः

 गढ़ाकोटा सागर जिले के गोपाल भार्गव ने अब तक 25,000 से अधिक कन्याओं का कन्यादान कर गिनीज बुक में नाम दर्ज कराया है. अब वे 1 मई को बुंदेलखंड स्तरीय विवाह सम्मेलन आयोजित कर रहे हैं. इस भव्य समारोह में गढ़ाकोटा में सैकड़ों जोड़े सात फेरे लेंगे. यह गोपाल भार्गव का 23वां कन्यादान विवाह समारोह है. सरकार की कन्यादान योजना के तहत मिलने वाली राशि के अलावा दूल्हा-दुल्हन को विशेष उपहार भी दिए जाएंगे. रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख 25 अप्रैल रखी गई है. मध्य प्रदेश के सागर जिले की रहली विधानसभा से नौ बार विधायक रहे पंडित गोपाल भार्गव को राजनीति से कहीं ज्यादा पहचान मिली है उनके “कन्यादान संस्कार” से. 71 साल की उम्र में भी उनका जोश और जज़्बा इतना जीवित है कि वे आज भी बेटियों की शादी में खुद पिता की भूमिका निभाते हैं. 25,000 से अधिक कन्याओं के विवाह का आयोजन कर वे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हो चुके हैं, लेकिन उनके इस मिशन का कारवां अब और बड़ा होने जा रहा है. कन्यादान नहीं, जीवन का उद्देश्य वर्ष 2001 से शुरू हुई यह यात्रा आज 23वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है. पंडित गोपाल भार्गव इस बार सिर्फ रहली विधानसभा तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए विवाह सम्मेलन आयोजित कर रहे हैं. यह ऐतिहासिक आयोजन 1 मई को गढ़ाकोटा के नटराज स्टेडियम में होगा, जहां सैकड़ों जोड़े एक ही छत के नीचे सात फेरे लेंगे. प्रत्येक वैवाहिक जोड़े को 49 हजार रुपए की राशि एवं उपहार सामग्री भेंट स्वरूप प्रदान की जाएगी। निकाह एवं विवाह एक साथ संपन्न होंगे। समारोह में पधारे सभी अतिथियों के लिए भोजन व्यवस्था रहेगी। 18 मार्च तक 4 दिन में लगभग 205 पंजीयन हो चुके हैं। पंजीयन करवाने की अंतिम तारीख 25 अप्रैल है। पंजीयन के लिए आवश्यक दस्तावेजों में मध्यप्रदेश के मूल निवासी होने का प्रमाण पत्र, वर एवं वधू की समग्र परिवार आईडी की छायाप्रति, वर एवं वधू की समग्र सदस्य आईडी की केवाईसी अनिवार्य है। वर एवं वधू के आधार कार्ड की छायाप्रति, आयु प्रमाण पत्र की छायाप्रति, पासपोर्ट साइज के चार-चार फोटोग्राफ, वधु की आयु न्यूनतम 18 वर्ष होना अनिवार्य है। वर की आयु न्यूनतम 21 वर्ष होना अनिवार्य है। कल्याणी (विधवा) होने की स्थिति में पूर्व पति का मृत्यु प्रमाण-पत्र, परित्यागता/तलाकशुदा महिला/पुरुष होने की स्थिति में कानूनी रूप से तलाक होने का न्यायालयीन आदेश अनिवार्य रूप से संलग्न करें। वर/वधु यदि दिव्यांग है तो दिव्यांगता का प्रमाण-पत्र एवं यूडीआईडी कार्ड अनिवार्य रूप से संलग्न करें। पंजीकृत श्रमिक परिवार होने की स्थिति में मध्यप्रदेश भवन एवं संनिर्माण कर्मकार मण्डल कार्ड की छायाप्रति, वधू के बैंक पासबुक की छायाप्रति, (जिसमें वधू का नाम पिता का नाम, खाता नम्बर एवं IFSC कोड स्पष्ट दिखाई दें), वधू के बैंक खाते की लिमिट 50 हजार से कम नहीं होना चाहिए। बैंक खाता बंद अथवा होल्ड लगा हुआ नहीं होना चाहिए, फार्म पूरा भरा होना अनिवार्य है। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड में दर्ज एक ही विधानसभा में सर्वाधिक 25 हजार से अधिक कन्याओं के कन्यादान लेने का रिकॉर्ड गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में रहली विधानसभा का दर्ज है। रहली क्षेत्र का यह समारोह देश और विदेश में अपनी पहचान बना चुका है। सम्मान और सुविधा, दोनों का होगा संगम यह विवाह समारोह सिर्फ एक औपचारिकता नहीं होता. इसमें सरकार की कन्यादान योजना के तहत मिलने वाली 49,000 रुपये की सहायता के साथ-साथ गोपाल भार्गव द्वारा दिया गया विशेष उपहार भी दूल्हा-दुल्हन को दिया जाता है. हल्दी, मेहंदी, संगीत जैसी हर रस्म को भव्य रूप में मनाया जाता है, और बारात भी पूरे शाही अंदाज़ में निकलती है. बेटियों के लिए बना एक पिता जो बेटियां किसी कारणवश अपने माता-पिता से ये सौभाग्य नहीं पा सकीं, उनके लिए गोपाल भार्गव एक धर्मपिता बनकर खड़े हुए. उनके द्वारा निभाई गई यह भूमिका अब एक समाजिक आंदोलन में तब्दील हो चुकी है. बुंदेलखंड स्तरीय सम्मेलन में पंजीयन शुरू इस बार छह जिलों के जोड़े पंजीयन कर इस सम्मेलन में शामिल हो सकते हैं. पंजीयन की अंतिम तारीख 25 अप्रैल है. आवेदकों को आधार कार्ड, समग्र आईडी, जन्म प्रमाणपत्र सहित अन्य दस्तावेज देने होंगे. वधू की न्यूनतम उम्र 18 और वर की 21 वर्ष होना अनिवार्य है. recent visitors 56

प्रदेश को एक और वंदेभारत की सौगात! 600 किमी के सफर में कई बड़े शहरों को जोड़ेगी नई ट्रेन

भोपाल  एमपी से यूपी के बीच सफर करनेवाले रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी है। उन्हें अब न केवल ट्रेनों की जबर्दस्त भीड़ से निजात मिलेगी बल्कि उनके सफर में समय भी बेहद कम लगेगा। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से यूपी की राजधानी लखनऊ तक का सफर जल्द ही बहुत आसान होनेवाला है। इन दोनों महानगरों के बीच नई वंदेभारत एक्सप्रेस चलाने का प्रस्ताव है। करीब 600 किमी के सफर में नई ट्रेन लखनऊ और भोपाल सहित बीच के कई बड़े शहरों को जोड़ेगी। हालांकि नियमित ट्रेनों की तुलना में इसका किराया ढाई गुना से ज्यादा होगा। लखनऊ भोपाल वंदेभारत एक्सप्रेस यूपी के लखनऊ मंडल की ही ट्रेन होगी। यूपी की ओर जानेवाली ज्यादातर ट्रेनों में इतनी भीड़ रहती है कि कई यात्री तो कोच के अंदर प्रवेश ही नहीं कर पाते। इन ट्रेनों में महीनों की लंबी वेटिंग भी बनी रहती है। प्रस्तावित लखनऊ भोपाल वंदेभारत एक्सप्रेस इन झंझटों से यात्रियों को छुटकारा दिला देगी। भोपाल लखनऊ वंदे भारत में कितने कोच होंगे? पहले मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को नई वंदे भारत ट्रेन मिलने वाली थी. लेकिन यूपी के यात्रियों की भारी संख्या को देखते हुए इस ट्रेन को भोपाल डिविजन की जगह लखनऊ डिविजन से चलाया जाएगा. लखनऊ भोपाल वंदे भारत एक्सप्रेस एकदम नए कोच वाली प्रीमियम ट्रेन होगी, जिसमें 8 कोच का रैक होगा. माना जा रहा है कि लखनऊ भोपाल वंदे भारत एक्सप्रेस में तकरीबन 564 सीटें होंगी और ये स्लीपर हो सकती है. लखनऊ भोपाल वंदे भारत का कितना होगा किराया? सूत्रों की मानें तो लखनऊ और भोपाल के बीच चलने वाली इस नई वंदे भारत एक्सप्रेस का किराया प्रीमियम ट्रेनों की तरह ही रहेगा. यानी इस ट्रेन में भी राजधानी, दुरंतो आदि ट्रेनों के बराबर या उससे ज्यादा चार्ज किया जा सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि यह सेमी हाई स्पीड होने के साथ-साथ यात्रियों को प्रीमियम सुविधाएं और कंफर्ट देगी. भोपाल से लखनऊ के बीच कितनी दूरी? मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से उत्तर प्रदेश की राजधानी भोपाल का डिस्टेंस लगभग 720 किमी है. फिलहाल इस रूट पर 10 से ज्यादा ट्रेनें चलती हैं, जिन्हें दोनों शहरों के बीच 9 से 12 घंटे तक का ट्रेवल टाइम लगता है. हालांकि, इतनी ट्रेनें होने के बाद भी इस रूट पर यात्रियों की जबर्दस्त भीड़ होती है. कब शुरू होगी लखनऊ-भोपाल वंदे भारत सीनियर डीएमई आरपी खरे ने बताया, '' भोपाल रेल मंडल से पटना और लखनउ के लिए वंदे भारत चलेगी. वंदे भारत की एक रैक बनने में करीब एक से डेढ़ महीने का समय लगता है. ऐसे में अप्रैल या शुरुआती मई तक भोपाल रेल मंडल को स्लीपर वंदे भारत की एक रैक मिल सकती है.'' गौरतलब है कि रेलवे ने हाल ही में देश को 2 और नई वंदे भारत जयपुर-उदयपुर-जयपुर और अजमेर दिल्ली अजमेर वंदे भारत दी हैं, जिसके बाद लखनऊ-भोपाल वंदे भारत के जल्द शुरू होने की उम्मीद की जा रही है. हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक घोषणा होना बाकी है. recent visitors 55

इंदौर में स्वच्छता सर्वेक्षण शुरू, सात दिन शहर में रहेगी टीम, हर बिंदू पर करेगी जांच

इंदौर इंदौर में स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग शुक्रवार से शुरू हो गई। इस बार इंदौर की सफाई व्यवस्था को बारिकी से परखा जाएगा, क्योंकि इंदौर स्वच्छता की प्रीमियर लीग में शामिल है। अन्य शहरों की तुलना में इस लीग में शामिल शहरों के आंकलन का पैमाना अलग होगा। इसमें इंदौर के अलावा सूरत और नवी मुबंई भी शामिल है। यह दोनों शहर पिछले साल दूसरे और तीसरे नंबर पर थे। इससे इस बार मुकाबला और कड़ा है। दोनों शहरों से इंदौर को टक्कर मिल रही है, लेकिन इंदौर की सबसे बड़ी ताकत डोर टू डोर कचरा कलेक्शन है। इंदौर में शत प्रतिशत कचरा घरों से निकल कर ट्रेंचिंग ग्राउंड तक जाता है। वैसे तो स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए रविवार को ही इंदौर में टीम आ गई थी। टीम ने खजराना मंदिर का दौरा भी किया, लेकिन विधिवत सर्वेक्षण शुक्रवार से शुरू किया गया है। टीम शहर की बस्तियों में पहुंचेगी और लोगों से फीडबैक भी लेगी। इंदौर आई टीम को कहां जाना है और किस क्षेत्र का मुआयना करना है, इसके निर्देश दिल्ली में बैठी टीम गूगल मेप के जरिए देगी। सुबह इंदौर की सफाई व्यवस्था आम दिनों की तुलना में बेहतर नजर आई। गलियों को विशेष तौर पर साफ किया गया और गीले और सूखे कचरे को व्यस्थित तरिके से घरों से लिया गया। मिक्स कचरे को लेने में सख्ती दिखाई गई। स्वच्छता सर्वेक्षण में देशभर के चार हजार से ज्यादा शहरों में शुरू हो चुका है। सर्वे की तैयारी इंदौर नगर निगम ने चार माह पहले से की थी, लेकिन सर्वे देरी से होने के कारण बार-बार वाॅल पेटिंग, बेकलेन सफाई करना पड़ी। इस बार इंदौर को प्रिमियर लीग में रखा है। इस लीग में सूरत और नवी मुंबई से इंदौर को कड़ी टक्कर मिल रही है। पिछली बार सूरत ने इंदौर के साथ पहला पुरस्कार संयुक्त रुप से साझा किया था। इस बार मुकाबला और कड़ा है। स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए आई टीम सुबह खजराना मंदिर से की है। इस मंदिर में फूलों से खाद बनाने का काम बीते सात वर्षों से चल रहा है और सफाई भी काफी रहती है, हालांकि इंदौर का स्वच्छता सर्वेक्षण विधिवत रुप से शुक्रवार से शुरू होगा। टीम बस्ती व काॅलोनियों में जाकर सफाई व्यवस्था का आंकलन करेगी। स्वच्छ सर्वेक्षण क्या है? स्वच्छ सर्वेक्षण दुनिया का सबसे बड़ा शहरी स्वच्छता सर्वेक्षण है, जिसे आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है। यह सर्वेक्षण स्वच्छता और कचरा प्रबंधन के विभिन्न मानकों पर शहरी क्षेत्रों का मूल्यांकन करता है, जिनमें शामिल हैं:     कचरा प्रबंधन (संग्रह, पृथक्करण और निपटान)     जनता की प्रतिक्रिया (नागरिक भागीदारी और संतोष स्तर)     स्थल निरीक्षण (स्वच्छता स्तरों का वास्तविक समय में सत्यापन)     स्वच्छता बुनियादी ढांचा (शौचालयों, जल आपूर्ति और जल निकासी प्रणालियों की उपलब्धता और रखरखाव)     प्रमाणीकरण (तृतीय-पक्ष एजेंसियों द्वारा दी गई रेटिंग)… Read more at: https://hindicurrentaffairs.adda247.com/top-cleanest-cities-in-india-indore-featured-for-the-7th-time/ इस बार इंदौर यहां कमजोर     शहर की बेकलेन में कचरा फिर नजर आने लगा है। पहले अर्थदंड के कारण लोग कचरा फेंकने से बचते थे।     शहर के पुराने हिस्से में अभी भी खुली नालियां, जलजमाव और नदियों में सीवरेज जल मिलता है। इस बार सर्वेक्षण में इसे भी जांचा जाएगा।     सफाई को लेकर लोगों में भी जागरुकता की कमी आई है। कई बस्तियों में कचरे के खुले ढेर नजर आते है।     डोर टू डोर वाहन फूल-पत्तियों के कचरे को ले जाने से मना करते है, इसलिए लोग अब उन्हें खुले में फेंकने लगे है।   recent visitors 43

नई लाइन के बनने के बाद जबलपुर से इंदौर के सफर का समय दो घंटे तक होगा कम

जबलपुर जबलपुर से इंदौर के बीच नई रेल लाइन गाडवारा-बुदनी होकर नहीं इटारसी-बुदनी-खातेगांव होकर बन रही। ये लाइन इंदौर-देवास रेल लाइन में मांगलिया गांव के पास जुड़ेगी। इस रास्ते में भोपाल नहीं पड़ेगा। इस नई लाइन के बनने के बाद जबलपुर से इंदौर के सफर का समय दो घंटे तक कम हो जाएगा। जबलपुर-इंदौर (गाडरवारा एवं बुदनी होकर) नई रेल लाइन की प्रगति पर नर्मदापुरम सांसद दर्शन सिंह चौधरी द्वारा पूछे गए सवाल पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में ये जानकारी दी। रेल मंत्री ने बताया कि बुदनी से इंदौर के बीच नई रेल लाइन निर्माण कार्य प्रक्रिया में है। इस परियोजना के गाडरवारा-बुदनी रेलखंड के दोनों अंतिम स्टेशन पूर्व से इटारसी होकर रेलमार्ग से जुड़े हुए हैं। आठ साल पुरानी परियोजना दोनों के मध्य नवीन रेल लाइन से उनकी दूरी में ज्यादा अंतर नहीं आ रहा है। इसलिए गाडरवारा-बुदनी के मध्य नई रेल लाइन बिछाना तर्कसंगत नहीं है। आठ वर्ष पुरानी परियोजना- जबलपुर(गाडरवारा)-इंदौर (मांगलियागांव) नई रेल लाइन की घोषणा वर्ष 2016-17 के बजट में हुई थी। उसके बाद मामला ठंडे बस्ते में था। वर्ष 2021-22 के बजट में एक हजार रुपये के आवंटन से परियोजना की बंद फाइल फिर खुल गई। उसके बाद के बजट में भी परियोजना को आवंटन जारी हुए। गत दो बजट में आवंटन बढ़ने के बाद परियोजना के इंदौर-बुदनी रेलखंड में रेल लाइन निर्माण प्रक्रिया ने गति पकड़ी। इंदौर-बुदनी का कार्य जारी लोकसभा में रेल मंत्री ने बताया कि इंदौर (मांगलियागांव) और बुदनी के बीच (205 किलोमीटर) नई रेल लाइन का कार्य 3261.82 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत किया गया है। मार्च-2024 तक 948.37 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं। वर्ष 2024-25 के लिए इस परियोजना को 1107.25 करोड़ रुपये आवंटित किया गया है। रेल लाइन निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया की जा रही है। चार किमी का अंतर इटारसी होकर गाडरवारा से बुदनी रेल मार्ग से जुड़ा है, जिसकी दूरी 141 किमी है। इंदौर नई रेल लाइन परियोजना में प्रस्तावित गाडवारा-बुदनी रेलखंड की दूरी 137 किमी है। मात्र चार किलोमीटर की दूरी कम करने के लिए अलग से लाइन बिछाना रेलवे को अब खर्चीला लग रहा है। recent visitors 47

बिना ब्याज पांच लाख तक लोक के लिए अब तक तीन लाख पंजीकरण हो चुके, 33 हजार ऋण स्वीकृत: योगी आदित्‍यनाथ

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने शुक्रवार को कहा कि युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत बिना ब्याज पांच लाख तक लोक के लिए अब तक तीन लाख से अधिक युवा उद्यमियों के पंजीकरण हो चुके हैं और 32 हजार से अधिक युवाओं को ऋण स्वीकृत हो चुका है। योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को यहां मुख्‍यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के अंतर्गत अयोध्या मंडल के सभी जिलों से आए युवाओं के ऋण वितरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यह ऋण व्यवसाय को आगे बढ़ाने में युवाओं का संबल बनने के लिए स्वीकृत किया गया है। उप्र में मुख्‍यमंत्री युवा उद्यमी योजना विकास अभियान (सीएम-युवा) के तहत लाभार्थी को पांच लाख रुपये तक की लागत का व्यवसाय शुरू करने के लिए ब्याज मुक्त कर्ज देने की सरकार की योजना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्याज-मुक्त ऋण युवा उद्यमियों को आगे बढ़ने के लिए एक बेहतरीन योजना है। उन्होंने कहा कि योजना शुरू होने के दो महीने के भीतर एक लाख युवाओं को इससे जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था। उन्होंने कहा कि पोर्टल लांच होने के कुछ ही समय बाद उप्र के युवाओं से इस योजना को समर्थन मिला। तीन लाख से अधिक पंजीकरण अब तक हो गये हैं जिसमें एक लाख 27 हजार से अधिक युवाओं के फार्म स्‍क्रीनिंग के बाद बैंकों को भेजे जा चुके हैं। इसमें 32 हजार से अधिक युवाओं के लिए बैंक का कर्ज स्वीकृत हो गया है। मंडलवार आयोजित होने वाले इस तरह के समारोह की चर्चा करते हुए मुख्‍यमंत्री ने कहा कि मैं इस सातवें कार्यक्रम में भाग ले रहा हूं। 25, 26, 27 मार्च तक हर जिले में निवेश मेला आयोजित होने जा रहा है, उस मेले में भी युवाओं के लिए ऐसी योजनाओं के शिविर लगेंगे। उन्होंने कहा कि एक हजार से अधिक युवा उद्यमी बैंक ऋण का लाभ लेकर एक नए जीवन की शुरुआत करना चाहते हैं। वे भी अपने जनपद, प्रदेश व देश के विकास में सहयोगी बनना चाहते हैं। कार्यक्रम में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, एमएसएमई मंत्री राकेश सचान,अयोध्‍या के महापौर गिरीश पति त्रिपाठी समेत कई प्रमुख लोग मौजूद थे। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या मंडल के 1,148 युवा उद्यमियों को मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत 47 करोड़ रुपये के ब्याज मुक्त ऋण वितरित किए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के लाभार्थियों को टूलकिट भी वितरित किए ताकि वे अपने हुनर को निखार सकें। योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश का युवा पहले अपनी पहचान छुपाता था लेकिन आज वह अपना उद्यम स्थापित कर रहा है। यह वही उत्तर प्रदेश है जहां पहले उद्यम नहीं लगते थे, आज नए-नए उद्यम भी लग रहे हैं और हमारा युवा भी अपना उद्यम लगाने के लिए तैयार हो रहा है। मुख्‍यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की आर्थिक प्रगति पर गर्व जताते हुए कहा कि पिछले आठ वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था 12.75 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 27.51 लाख करोड़ रुपये हो गई है, जो दोगुने से अधिक की वृद्धि है। योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के बदलते स्वरूप की चर्चा करते हुए कहा कि 2016-17 में पूरे साल में 2.34 से 2.50 लाख श्रद्धालु आते थे, लेकिन 2024 में 16 करोड़ से अधिक श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे। अब प्रतिदिन 2.5 लाख लोग दर्शन के लिए आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान विंध्यवासिनी धाम, काशी, गोरखपुर, चित्रकूट और नैमिषारण्य जैसे तीर्थ भी श्रद्धालुओं से भरे रहे। उन्होंने कहा कि इन धार्मिक आयोजनों ने आस्था को आजीविका से जोड़ा है। हजारों लोगों के लिए नए रोजगार का सृजन भी हुआ। उन्होंने कहा कि आस्था और संस्कृति रोजगार का पर्व भी बन सकती है। recent visitors 54