मध्यप्रदेश के वरिष्ठ कानूनविद, अधिवक्ता व समाजसेवी आनंद मोहन माथुर का निधन

इंदौर इंदौर के वरिष्ठ अधिवक्ता और समाजसेवी आनंद मोहन माथुर का 97 वर्ष की आयु में निधन हो गया। 95 वर्ष की आयु तक वे सामाजिक आयोजनों और आंदोलनों में सक्रिय थे और वकालत भी करते थे। इसके बाद से वे बीमार हो गए थे। लंबी बीमारी के चलते ही उनका निधन हो गया। आनंद मोहन माथुर ने इंदौर के लिए कई उल्लेखनीय काम किए हैं। खुद के खर्च पर उन्होंने शहर में एक सभागृह, झूला ब्रिज और ओपीडी सहित अन्य काम कराए थे। वे कई संगठनों से भी जुड़े थे। उनके निधन पर कई संगठनों और नागरिकों ने शोक व्यक्त किया है। मिल में मजदूरी भी की वरिष्ठ अधिवक्ता और समाजसेवी माथुर ने आजादी आंदोलनों में भी भाग लिया था। किशोरावस्था में वे अंग्रेजों के खिलाफ हो रहे आंदोलनों में हिस्सेदारी करने लगे थे। इसका खामियाजा उनके परिवार को भुगतना पड़ा। साथ ही उन्हें अपने परिवार का साथ भी छोड़ना पड़ा था। इसके बाद वे गांव से इंदौर आ गए। उन्होंने मालवा मिल में बदली मजदूर के रूप में काम किया। इसके अलावा उन्होंने काॅलेज में अध्यापन कार्य भी किया। उनका सपना डाॅक्टर बनने का था, लेकिन फिर बाद में उन्होंने वकील बनने का निर्णय लिया। वकील बनकर उन्होंने अपने पेशे को बड़ी निष्ठा से निभाया। वकालत कर उन्हें जो भी फीस मिलती थी, उसका बड़ा हिस्सा वे समाजसेवा से जुड़े कामों में खर्च करते थे। देश का प्रतिनिधित्व भी किया माथुर ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कानून विशेषज्ञों के रूप में देश का प्रतिनिधित्व भी किया है। उन्होंने इंदौर की कान्ह नदी पर एक झूला ब्रिज बनवाया। इसके अलावा आनंद मोहन माथुर सभागृह का निर्माण भी कराया। बाइपास पर उन्होंने बेशकीमती जमीन समाज से जुड़े कामों के लिए दे दी। समाजसेवा से जुड़े कई ट्रस्टों में वे ट्रस्टी की भूमिका में लंबे समय तक रहे। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जताया दुख सीएम ने ट्वीट करते हुए लिखा, 'वरिष्ठ अधिवक्ता और समाजसेवी श्री आनंद मोहन माथुर जी के निधन का दुखद समाचार प्राप्त हुआ। आपका सम्पूर्ण जीवन सामाजिक आंदोलनों एवं जनसेवा के लिए समर्पित रहा। इंदौर शहर के लिए किए गए आपके उल्लेखनीय कार्य हम सभी के लिए प्रेरणादायक हैं। बाबा महाकाल से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में विश्रांति दें एवं शोकाकुल परिजनों को इस कठिन घड़ी में संबल प्रदान करें।' उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में भी हिस्सा लिया था और आपातकाल (Emergency) के दौरान जेपी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी। इसके अलावा, वे मालवा-निमाड़ सहित पूरे मध्य प्रदेश में आंदोलनकारियों के लिए कानूनी सलाहकार और मेंटर रहे। उनकी सामाजिक चेतना और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर वे हमेशा मुखर रहे, जैसे कि भोपाल एनकाउंटर (2016) और विकास दुबे एनकाउंटर (2020) जैसे मामलों में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से जांच की मांग की थी। गरीब के कारण डॉक्टर नहीं बन पाए : आनंद मोहन माथुर शुरुआत से कानून नहीं बल्कि मेडिकल की पढ़ाई करना चाहते थे। उनका परिवार गरीब था। स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लेने के चलते पिता की नौकरी भी चली गई थी। इसके बाद पैसों की तंगी हुई और आनंद मोहन माथुर का डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह गया। पढ़ाई पूरी करने के लिए मजदूरी की : आनंद मोहन माथुर सामान्य व्यक्तित्व के व्यक्ति नहीं थे। उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी लेकिन उनके हौसले बुलंद थे। उन्होंने अपने संघर्ष के शुरुआती दिनों में इंदौर की मालवा मिल में बदली मजदूर के रूप में काम किया। इसके बाद मेहनत करके उन्होंने कानून की पढ़ाई पूरी की। इस दौरान उन्होंने कॉलेज में शिक्षक के रूप में भी सेवाएं दीं। बेटी को बनाया डॉक्टर : खुद डॉक्टर नहीं बन सके इसलिए अपनी बेटी को उन्होंने डॉक्टर बनाने का निर्णय लिया। मेहनत और लगन से उन्होंने अपनी बेटी को मेडिकल की पढाई करवाई। इस समय आनंद मोहन माथुर की बेटी डॉक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहीं हैं। भोपाल गैस कांड का केस भी लड़ा : आनंद मोहन माथुर की कहानी का एक अहम हिस्सा भोपाल गैस कांड से जुड़ा है। जिस दिन उनकी बेटी की शादी थी उसी दिन भोपाल में गैस कांड हुआ। बेटी को विदा कर वे तुरंत भोपाल के लिए रवाना हो गए। उन्होंने भोपाल गैस कांड मामले से जुड़ी याचिका कोर्ट में दायर की। उनके द्वारा डाउ केमिकल फैक्ट्री से पीड़ितों के लिए मुआवजे की मांग को भी प्रमुखता से उठाया गया। समाजसेवा से जुड़े काम : आनंद मोहन माथुर जितने बड़े कानूनविद थे उतने ही बड़े समाजसेवी थे। अधिवक्ता के नाते मिली फीस का बड़ा हिस्सा वे दान कर देते थे। उन्होंने अपनी जमीन भी समाजसेवा से जुड़े कामों में दी। अपने खर्च पर कान्हा नदी पर ब्रिज बनवाया और आनंद मोहन माथुर सभागृह का निर्माण भी किया। संगीत प्रेम भी थे आनंद मोहन माथुर : कानून के जानकर होने के साथ – साथ आनंद मोहन माथुर संगीत प्रेमी भी थे। उन्होंने अपने इसी प्रेम के चलते 94 साल की उम्र में हारमोनियम बजाना सीखा। recent visitors 32

बांग्लादेश में नेताओं ने किए बड़े क्रिप्टो निवेश ने मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका को जन्म दे दिया

 ढाका बांग्लादेश में कथित छात्र आंदोलन के पीछे विदेशी फंडिंग के बड़े लिंक सामने आए हैं. एक जांच में खुलासा हुआ है कि इस आंदोलन को भारी विदेशी धनराशि से समर्थन मिला था. इसके नेताओं द्वारा किए गए बड़े क्रिप्टो निवेश ने मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका को जन्म दे दिया है. एडीएसएम (ADSM) लीडर और 'जातीय नागरिक कमेटी' के संस्थापक सरजिस आलम ने 7.65 मिलियन डॉलर (65 करोड़ रुपये) क्रिप्टोकरेंसी टेथर (Tether) में निवेश किए. बेहद साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आकर इतनी बड़ी संपत्ति बनाना अवैध विदेशी फंडिंग की ओर इशारा करता है. मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका अंतरिम सरकार में आईटी एडवाइजर और एडीएसएम कोऑर्डिनेटर नाहिद इस्लाम ने 204.64 बिटकॉइन (BTC) का निवेश किया है, जिसकी कीमत 17.14 मिलियन डॉलर (147 करोड़ रुपये) है. इस भारी निवेश ने उनके पैसे के स्रोत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सीटीजी विश्वविद्यालय (CTG University) से जुड़े एडीएसएम लीडर खान तलत महमूद रफी ने 11.094 बिटकॉइन का निवेश किया जिसकी कीमत 1 मिलियन डॉलर (8.60 करोड़ रुपये) है. कोई ज्ञात संपन्न पारिवारिक पृष्ठभूमि नहीं होने के बावजूद इतना बड़ा निवेश मनी लॉन्ड्रिंग की संभावनाओं को दर्शाता है. मीडिया के लोग भी जाल में शामिल प्रधान सलाहकार के प्रेस सचिव और पत्रकार शफीकुल आलम के पास 93.06 बिटकॉइन (10 मिलियन डॉलर, 86 करोड़ रुपये) की संपत्ति है. इससे यह साफ होता है कि आंदोलन से जुड़े मीडिया के लोग भी इस विदेशी फंडिंग के जाल का हिस्सा थे. बांग्लादेश के जिस आंदोलन को कभी छात्र-नेतृत्व वाले बदलाव का प्रयास माना जा रहा था, उस पर अब विदेशी फंडिंग के आरोप लग रहे हैं. क्रिप्टो निवेशों ने इन बड़ी वित्तीय अनियमितताओं का पर्दाफाश किया है. पिछले साल शुरू हुआ था आंदोलन पिछले साल अगस्त में छात्रों ने आरक्षण के खिलाफ आंदोलन शुरू किया जो बढ़ते-बढ़ते प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिराने पर रुका. देश की बागडोर कुछ समय के लिए अंतरिम सरकार के हाथ में आ गई. उम्मीद थी कि इस बीच चुनाव होंगे और नई लोकतांत्रिक सरकार आ जाएगी लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ. सरकार गिराने वाले छात्र राजनैतिक दल बना चुके हैं.   recent visitors 24

भोपाल में मेट्रो के सेकंड फेज की मिट्टी टेस्टिंग शुरु, भोपाल में भदभदा से रत्नागिरी के बीच दौड़ेगी मेट्रो, 13Km में 14 स्टेशन बनेंगे

भोपाल भोपाल मेट्रो के अंतर्गत आने वाली ब्लू लाइन के निर्माण के लिए मिट्टी परीक्षण का कार्य शुरू कर दिया गया है। यह टेस्टिंग इसलिए की जा रही है ताकि पिलर और मेट्रो स्टेशनों की नींव मजबूत बनाई जा सके। मिट्टी की स्ट्रेंथ जांचने के लिए कई जगहों पर परीक्षण किए जा रहे हैं, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि जमीन निर्माण कार्य के लिए उपयुक्त है। इन जगहों पर हो चुकी टेस्टिंग     अब तक कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर (मिंटो हॉल) के सामने स्टेशन और आईटीआई-जेके रोड पर पिलर के लिए मिट्टी की टेस्टिंग हो चुकी है। यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी और पूरे 13 किमी लंबे रूट पर टेस्टिंग की जाएगी। कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर पर भी स्टेशन एक स्टेशन कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर पर भी बनेगा। 14वें स्टेशन के तौर पर बोगदा पुल (इंटरचेंज) सेक्शन बनाया जाएगा। जहां करोंद चौराहा से एम्स के बीच बनने वाली ऑरेंज लाइन और भदभदा चौराहा से रत्नागिरी तिराहा के बीच चलने वाली ब्लू लाइन का इंटरचेंज होगा। मिट्टी की टेस्टिंग दो तरह से हो रही है। पहला परीक्षण उन जगहों पर हो रहा है, जहां पिलर बनाए जाएंगे। वहीं, दूसरा परीक्षण मेट्रो स्टेशन के नीचे हो रहा है।   मिट्टी की टेस्टिंग दो तरह से हो रही है। पहला परीक्षण उन जगहों पर हो रहा है, जहां पिलर बनाए जाएंगे। वहीं, दूसरा परीक्षण मेट्रो स्टेशन के नीचे हो रहा है। यह एक ऐसा सेक्शन होगा, जहां यात्री एक मेट्रो से उतरकर दूसरी में सवार हो सकेंगे। पुल बोगदा के पास का हिस्सा सुभाष नगर से एम्स (प्रायोरिटी ट्रैक) के पास ही है। इसलिए इंटरचेंज सेक्शन पर भी जल्द ही काम शुरू किया जाएगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि इंटरचेंज सेक्शन को अभी से डिजाइन करना पड़ेगा। 1006 करोड़ रुपए की लागत से बनेगी ब्लू लाइन भोपाल मेट्रो ब्लू लाइन (Bhopal Metro Blue Line) का निर्माण 1006 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत भदभदा चौराहा से रत्नागिरी तिराहा तक कुल 13 किमी लंबाई में मेट्रो लाइन बनाई जाएगी। यह रूट शहर के कई प्रमुख रास्तों (Bhopal Metro Route) से होकर गुजरेगा। जिससे यातायात को सुगम और तेज बनाया जा सकेगा। ब्लू लाइन के इस रूट पर 14 स्टेशन बनाए जाएंगे। ब्लू लाइन में इंटरचेंज सेक्शन भी होगा भोपाल मेट्रो (Bhopal Metro) की ब्लू लाइन में बोगदा पुल पर एक इंटरचेंज सेक्शन बनाया जाएगा। यह सेक्शन करोंद चौराहा से एम्स तक बनने वाली ऑरेंज लाइन और भदभदा से रत्नागिरी तक की ब्लू लाइन को आपस में जोड़ेगा। इस इंटरचेंज सेक्शन की मदद से यात्री एक मेट्रो से उतरकर आसानी से दूसरी मेट्रो पकड़ सकेंगे। बोगदा पुल के पास यह सेक्शन सुभाष नगर से एम्स के प्रायोरिटी ट्रैक के करीब होगा। दो तरह से परीक्षण मिट्टी की टेस्टिंग दो तरह से हो रही है। पहला परीक्षण उन जगहों पर हो रहा है, जहां पिलर बनाए जाएंगे। वहीं, दूसरा परीक्षण मेट्रो स्टेशन के नीचे हो रहा है। रायसेन रोड स्थित आईटीआई के सामने और जेके रोड पर पिलर के लिए टेस्टिंग हो चुकी है। वहीं, मिंटो हॉल के सामने स्टेशन के लिए टेस्टिंग शुक्रवार को की गई। इन जगहों पर बनेंगे 14 स्टेशन ब्लू लाइन के लिए कुल 14 स्टेशन बनेंगे। इनमें भदभदा चौराहा, डिपो चौराहा, जवाहर चौक, रोशनपुरा चौराहा, कुशाभाऊ ठाकरे हॉल, परेड ग्राउंड, प्रभात चौराहा, गोविंदपुरा, गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र, जेके रोड, इंद्रपुरी, पिपलानी और रत्नागिरी तिराहा शामिल हैं। मिट्टी की टेस्टिंग के दौरान बेरिकेडिंग की गई है। ताकि, कोई दिक्कत न हो। मिट्टी परीक्षण दो चरणों में होगा मेट्रो (Bhopal Metro) निर्माण के लिए मिट्टी की टेस्टिंग दो चरणों में की जा रही है। पिलर के लिए मिट्टी परीक्षण: यह उन जगहों पर किया जा रहा है जहां मेट्रो के पिलर खड़े किए जाएंगे। इससे जमीन की ताकत और भार वहन करने की क्षमता का पता लगाया जाता है। मेट्रो स्टेशन के लिए मिट्टी परीक्षण: यह उन जगहों पर किया जा रहा है जहां मेट्रो स्टेशन बनाए जाएंगे। इस टेस्टिंग से यह सुनिश्चित किया जाता है कि मिट्टी की संरचना स्थिर और मजबूत है। ब्लू लाइन का निर्माण कब तक पूरा होगा? भोपाल मेट्रो की ब्लू लाइन का निर्माण काम 2024 में शुरू हुआ है और इसे 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद शहर की सार्वजनिक परिवहन प्रणाली अधिक तेज़, कुशल और सुविधाजनक बन जाएगी। recent visitors 34

मंत्री सारंग ने कहा कि पैक्स के कम्प्यूटराइजेशन में मध्यप्रदेश देश में नम्बर-1 पर

भोपाल  मध्यप्रदेश प्रत्येक विधानसभा स्तर पर खेल स्टेडियम बनाने वाला पहला राज्य बनेगा, दरअसल सहकारिता और खेल एवं युवा कल्याण मंत्री के जवाब के बाद उनके दोनों विभागों के लिये 2700 करोड़ 41 लाख 88 हजार की अनुदान मांगे सर्व-सहमति से पारित कर दी गई, यह मांगे मध्यप्रदेश के बजट सत्र में चर्चा के दौरान पारित की गई। बीज का नया ब्रॉण्ड “चीता” जल्द होगा लांच सहकारिता और खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने उनके दोनों विभागों की अनुदान मांगों पर हुई चर्चा के जवाब में कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के रूप में इस वर्ष को मनाया जा रहा है। मध्यप्रदेश सरकार बीज की दिशा में काम कर रही है। बीज संघ को उन्नत स्तर पर पहुँचाने का प्रयास है। बीज संघ के माध्यम से चीता बीज के नाम से नया ब्रॉण्ड लांच किया जा रहा है। पैक्स के माध्यम से चीता बीज का वितरण किया जायेगा। इसमें भी मध्यप्रदेश लीड करेगा। उन्होंने कहा कि पैक्स को अग्रणी बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इसके लिये एम-पैक्स की अवधारणा की गयी है। प्राथमिक समिति केवल क्रेडिट का काम न कर बहुउद्देश्यीय बनायी जा रही है। दो पैक्स को पेट्रोल की डीलरशिप भी मिली है। प्रत्येक विधानसभा स्तर पर खेल स्टेडियम बनाने वाला पहला राज्य बनेगा मध्यप्रदेश, सदन में 2700 करोड़ 41 लाख 88 हजार की अनुदान मांगे सर्व-सहमति से पारित पैक्स कम्प्यूटराइजेश में मध्यप्रदेश नम्बर-1 पर मंत्री सारंग ने कहा कि पैक्स के कम्प्यूटराइजेशन में मध्यप्रदेश देश में नम्बर-1 पर है। सभी पैक्स संस्थाओं के कम्प्यूटराइजेशन का कार्य लगभग हो चुका है। सहकारिता विभाग में भर्ती के मामले में भी मध्यप्रदेश अव्वल है। आईबीपीएस के माध्यम से विभाग द्वारा भर्ती प्रक्रिया करवायी जा रही है। इसी संस्था के माध्यम से रिजर्व बैंक और नाबार्ड में भी भर्तियाँ होती हैं। पैक्स और अपैक्स दोनों के होंगे चुनाव, सहकार सभा भी होगी मंत्री सारंग ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में पैक्स और अपैक्स दोनों के चुनाव भी होंगे। पंचायत स्तर तक जाकर खाद का वितरण करने की संभावनाओं को तलाशा जा रहा है। सहकारिता वर्ष में मध्यप्रदेश ने भी कैलेण्डर बनाकर सहकारी आंदोलन के माध्यम से लोगों को जोड़ने और पारदर्शिता लाने का काम किया है। जल्द ही सहकार सभा भी आयोजित की जायेगी, जिसमें सभी को जुड़ने का मौका मिलेगा। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के माध्यम से सेवाओं की पूर्ति हो सके, इस पर काम किया जा रहा है। कृषि विकास दर में सहकारिता का बहुत बड़ा योगदान मंत्री सारंग ने कहा कि हमने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में सीपीपीपी (को-ऑपरेटिव पब्लिक प्रायवेट पार्टनरशिप) मॉडल के माध्यम से लगभग 2300 करोड़ के 19 एमओयू किये। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की कृषि विकास दर में सहकारिता का बहुत बड़ा योगदान है। खाद-बीज, शार्टटर्म लोन और उपार्जन के माध्यम से सही दाम किसानों को मिल सके, यही सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका है। गांव की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने सहकारी आंदोलन मंत्री सारंग ने कहा कि गांव की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिये सहकारी आंदोलन मजबूत होना चाहिये। इसके लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बधाई के पात्र हैं, जिन्होंने केन्द्र में सहकारिता विभाग का गठन कर केन्द्रीय मंत्री अमित शाह जैसे कुशल नेतृत्व में सहकारिता विभाग का दायित्व दिया। केन्द्र और राज्य सरकार में बड़े और छोटे भाई की भूमिका रही है। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में काम हो रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर 3 शीर्ष स्तर की संस्थाएँ बनायी गयी हैं। विधानसभा स्तर पर खेल स्टेडियम मंत्री सारंग ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार खेल, खिलाड़ी और खेल मैदान के लिये काम कर रही है। विधानसभा स्तर पर खेल स्टेडियम बनाने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बनेगा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में नई पार्थ (पीएआरटीएच) योजना और एमपीवायपी योजना के माध्यम से मध्यप्रदेश युवा पोर्टल की शुरूआत की है। मध्यप्रदेश सरकार ज्ञान (जीवायएएन) की अवधारणा पर काम कर रही है। मंत्री सारंग के वक्तव्य के बाद विधानसभा में उनके दोनों विभाग सहकारिता और खेल एवं युवा कल्याण की 2700 करोड़ 41 लाख 88 हजार रुपये की अनुदान मांगों को सर्व-सम्मति से पारित किया गया। recent visitors 30

ईडन गार्डन्स की पिच का कैसा रहेगा मिजाज और किसे मिलेगा फायदा?, केकेआर वर्सेस आरसीबी मुकाबला आज

कोलकाता दुनिया की सबसे रंगारंग लीग आईपीएल के 18वें सीजन का आगाज आज होगा जब गत चैंपियन कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के कोलकाता के ईडन गार्डन्स में भिड़ेगी। केकेआर वर्सेस आरसीबी मुकाबला भारतीय समयानुसार साढ़े 7 बजे शुरू होना है, मगर ओपनिंग सेरेमनी के चलते मैच शुरू होने में थोड़ी देरी हो सकती है। आईपीएल 2025 के ओपनिंग मुकाबले पर बारिश का भी साया है। कोलकाता के कुछ हिस्सों में इस समय ऑरेंज अलर्ट जारी है, ऐसे में रिपोर्ट्स हैं कि यह मैच रद्द भी हो सकता है। हालांकि फैंस चाहेंगे कि यह मैच पूरा हो और उन्हें 2008 की तरह आईपीएल 2025 का भी आगाज देखने को मिले। आइए KKR vs RCB की पिच रिपोर्ट पर एक नजर डालते हैं- केकेआर वर्सेस आरसीबी पिच रिपोर्ट कोलकाता के इस एतिहासिक मैदान की पिच वैसे तो बल्लेबाजों को फेवर करने के लिए मानी जाती है, मगर शुरुआत में यहां गेंदबाजों को भी कुछ मदद मिलती है। यहां अधिकतर टीमें टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करना पसंद करती है क्योंकि इस मैदान पर रनचेज काफी आसान हो जाती है। ओस इस रन चेज में अहम भूमिका निभाती है, मगर बीसीसीआई के नए नियम के चलते कप्तानों की सोच बदल सकती है। बता दें, बीसीसीआई के नए नियम के अनुसार असर मैदान पर ओस ज्यादा हो तो अंपार्यस दूसरी पारी में 10वें ओवर के बाद बॉलिंग टीम को नई गेंद सौंप सकते हैं। ईडन गार्डन्स आईपीएल आंकड़े और रिकॉर्ड्स पहले बल्लेबाजी करते हुए जीते गए मैच- 38 (40.86%) रनचेज करते हुए जीते गए मैच- 55 (59.14%) टॉस जीतकर जीते गए मैच- 49 (52.69%) टॉस हारकर जीते गए मैच- 44 (47.31%) हाईएस्ट स्कोर इन चेज- 262/2 पहले बल्लेबाजी करते हुए औसत स्कोर- 163 केकेआर वर्सेस आरसीबी हेड टू हेड कोलकाता नाइट राइडर्स और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की भिड़ंत आईपीएल में अभी तक कुल 34 बार हुई है जिसमें केकेआर ने 20 तो आरसीबी ने 14 मैच जीते हैं। अगला मुकाबला केकेआर के घर में होने वाला है तो ऐसे में उनके पास अपनी लीड को बढ़ाने का मौका रहेगा। केकेआर वर्सेस आरसीबी स्क्वॉड केकेआर: अजिंक्य रहाणे (कप्तान), वेंकटेश अय्यर (उपकप्तान), मोइन अली, वैभव अरोड़ा, क्विंटन डी कॉक, हर्षित राणा, स्पेंसर जॉनसन, मयंक मारकंडे, सुनील नरेन, एनरिक नॉर्टजे, मनीष पांडे, रोवमन पॉवेल, अंगकृष रघुवंशी, रहमानुल्लाह गुरबाज, रमनदीप सिंह, अनुकूल रॉय, आंद्रे रसेल, चेतन सकारिया, रिंकू सिंह, लवनीथ सिसोदिया, वरुण चक्रवर्ती। आरसीबी: रजत पाटीदार (कप्तान), अभिनंदन सिंह, जैकब बेथेल, मनोज भांडागे, स्वास्तिक चिकारा, टिम डेविड, जोश हेजलवुड, विराट कोहली, भुवनेश्वर कुमार, लियाम लिविंगस्टोन, मोहित राठी, लुंगी एनगिडी, देवदत्त पडिक्कल, क्रुणाल पांड्या, रसिख सलाम, फिल साल्ट, जितेश शर्मा, रोमारियो शेफर्ड, सुयश शर्मा, स्वप्निल सिंह, नुवान तुषारा, यश दयाल।   recent visitors 42

फॉरेस्ट्स एण्ड फूड्स थीम पर आधारित है वर्ष 2025 का विश्व वानिकी दिवस

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विधानसभा के समिति कक्ष में आयोजित विश्व वानिकी दिवस संगोष्ठी में शामिल होकर प्रदेशवासियों को वन संरक्षण और संवर्धन का संदेश दिया। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का ‘ऑक्सिजोन’ बनकर पूरे भारत को ऑक्सीजन प्रदान कर रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश का 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है, जो न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और आर्थिक विरासत का अभिन्न हिस्सा भी है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्ष 2025 का विश्व वानिकी दिवस ‘फारेस्ट एंड फूड' थीम पर आधारित है, जो इस बात पर बल देता है कि वन केवल ऑक्सीजन ही नहीं, बल्कि पोषण, रोजगार और संस्कृति का भी स्रोत हैं। इसी अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘वाइल्ड एडिबल प्लांट्स इन छत्तीसगढ़ स्टेट’ पुस्तक का विमोचन किया तथा पुदीना-मिंट फ्लेवर के बस्तर काजू प्रोडक्ट को लॉन्च भी किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की 32 प्रतिशत आबादी जनजातीय भाई बहनों की है जो वनों के साथ गहराई से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार वनों में निवासरत जनजातीय भाई-बहनों को वनाधिकार पट्टे प्रदान कर रही है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और खेती की दिशा में आगे बढ़ें। उन्होंने बताया कि बस्तर की इमली, जशपुर का महुआ, चिरौंजी, हर्रा-बहेड़ा जैसे सैकड़ों लघु वनोत्पाद छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान हैं, जिनका वैल्यू एडिशन कर आदिवासी परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ की नैसर्गिक सुंदरता की सराहना करते हुए कहा कि यहां के जलप्रपात, वनवासी संस्कृति और समृद्ध जैव विविधता पूरे देश के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। बस्तर का धूड़मारास अब विश्व पर्यटन मानचित्र पर स्थान बना चुका है। पर्यटन का विस्तार हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में लगभग चार करोड़ वृक्ष लगाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर में पीपल फॉर पीपल कार्यक्रम के अंतर्गत हर चौराहे पर पीपल का रोपण किया गया है, जो भविष्य में शुद्ध ऑक्सीजन का सशक्त स्रोत बनेंगे। पीपल का पेड़ वैज्ञानिक रूप से सबसे अधिक ऑक्सीजन देने वाला वृक्ष है, और यह पहल शहरी हरियाली की दिशा में एक प्रभावी कदम है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के वन विश्व के सबसे सुंदर वनों में गिने जाते हैं। साल और सागौन के वृक्ष यहां की प्राकृतिक शोभा हैं। साल के वनों में एक अनूठा सम्मोहन है और यह गर्व की बात है कि छत्तीसगढ़ में वन क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक जंगल हैं, तब तक जीवन है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय समुदायों का पूरा जीवन वनों पर आधारित है। उनका जीवनस्तर ऊँचा उठाना हमारी सरकार की प्राथमिकता है।  उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज जैसी चुनौतियों से जूझ रही है, और इसका सबसे कारगर उपाय वन क्षेत्र का विस्तार है। उन्होंने कहा कि हमारे आदिवासी भाई-बहनों के पास प्रकृति का अनुभवजन्य ज्ञान है – उसका समुचित उपयोग कर हम विकास और संरक्षण दोनों को संतुलित कर सकते हैं। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव, विधायकगण धरमलाल कौशिक, धर्मजीत सिंह, योगेश्वर राजू सिन्हा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख व्ही. श्रीनिवास राव तथा वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे। recent visitors 41

बस्तर में अमन लौटा, और साथ लौटी खेलों की रौनक, जहां कभी डरते थे पांव भी रखने से, आज वहीं खेलते हैं हज़ारों खिलाड़ी: मुख्यमंत्री

रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया खिलाड़ियों का सम्मान, कहा “आपने छत्तीसगढ़ का सिर गर्व से ऊंचा किया” मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रीय खेल पदक विजेता खिलाड़ियों को बताया छत्तीसगढ़ का गौरव: खिलाड़ियों को दी ओलंपिक विजेता बनने की शुभकामनाएं बस्तर में अमन लौटा, और साथ लौटी खेलों की रौनक, जहां कभी डरते थे पांव भी रखने से, आज वहीं खेलते हैं हज़ारों खिलाड़ी: मुख्यमंत्री 130 खिलाड़ियों को 1 करोड़ 95 लाख 20 हजार रूपए की सम्मान राशि उनके बैंक खाते में अंतरित रायपुर आप सभी ने अपनी मेहनत, प्रतिभा और जुनून से छत्तीसगढ़ का नाम राष्ट्रीय पटल पर रोशन किया है। ये सिर्फ आपकी नहीं, पूरे प्रदेश की जीत है। आप प्रदेश के खेल जगत के हीरे हैं। सरकार आपको तराशेगी, निखारेगी और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाएगी। आपके लिए हर संभव संसाधन और समर्थन उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास में आयोजित राष्ट्रीय खेल विजेता सम्मान समारोह में गोवा और उत्तराखंड नेशनल गेम्स में पदक जीतने वाले छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को सम्मानित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री ने समारोह में गोवा में वर्ष 2023 में सम्पन्न 37वें नेशनल गेम में छत्तीसगढ़ के पदक विजेता 72 खिलाड़ियों को और वर्ष 2025 में उतराखंड में सम्पन्न 38 वें नेशनल गेम्स में छत्तीसगढ़ पदक विजेता 58 खिलाड़ियों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री साय ने खिलाड़ियों को सम्मानित करते हुए कहा कि आप सभी छत्तीसगढ़ के गौरव है। आपने न सिर्फ पदक जीते हैं, बल्कि पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है। आप सभी ने छत्तीसगढ़  का सर गर्व से ऊंचा किया है। मुख्यमंत्री साय ने खिलाड़ियों से आह्वान किया कि वे अब एशियाड, कॉमनवेल्थ और ओलंपिक जैसे वैश्विक मंचों पर छत्तीसगढ़ और भारत का नाम रोशन करें। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  अपने संबोधन में कहा कि आज गोवा और उत्तराखंड में हुए नेशनल गेम्स विजेता खिलाड़ियों का सम्मान कर हम सब बहुत गौरव का अनुभव कर रहे हैं। आप सभी ने अपने शानदार प्रदर्शन से छत्तीसगढ़ का नाम रौशन किया है इसके लिए आप सभी की जितनी भी प्रशंसा की जाए, कम है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हम लोगों ने गोवा में पदक जीतने वाले राज्य के 72 खिलाड़ियों को 1 करोड़ 7 लाख 60 हजार रुपए की राशि एवं उत्तराखंड में नेशनल गेम्स जीतने वाले 58 खिलाड़ियों को 87 लाख 60 हजार रुपए की राशि प्रदान कर सम्मानित किया है। इस प्रकार समारोह के माध्यम से छत्तीसगढ़ के 130 राष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों को कुल 1 करोड़ 95 लाख 20 हजार रुपए की सम्मान राशि हमारे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के खाते में अंतरित की जा रही  है। ओलंपिक विजेता खिलाड़ियों के लिए विशेष पुरस्कारों की हमारी सरकार ने की है घोषणा मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश के जो भी खिलाड़ी ओलंपिक खेलों में पदक लाएंगे, उनके लिए विशेष पुरस्कारों की घोषणा हमारी सरकार ने की है। ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को तीन करोड़ रुपए, रजत पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को दो करोड़ रुपए तथा कांस्य पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को एक करोड़ रुपए देने का निर्णय हमारी सरकार ने किया है। बस्तर क्षेत्र में खेलों की वापसी, नई आशा और विश्वास का प्रतीक मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बरसों तक माओवादी आतंक झेलने के बाद जब बस्तर में अमन लौटा तो खेल भी लौटा, वहां हमने बस्तर ओलंपिक का आयोजन कराया। उन्होंने कहा कि जहां कभी पांव भी रखने से लोग डरते थे, आज वहीं हज़ारों खिलाड़ी खेल रहे हैं। लोगों में जबर्दस्त उत्साह दिखा, पूरे देश में कम ही हुआ होगा कि किसी खेल आयोजन में 1 लाख 65 हजार प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और वह भी ऐसा आयोजन जो बस्तर संभाग में हुआ जहां की आबादी शेष जगहों की तुलना में काफी विरल है। इसमें ऐसे लोगों ने भी हिस्सा लिया, जो नक्सल हिंसा में अपने अंग गंवा चुके थे। आत्मसमर्पित नक्सलियों ने भी हिस्सा लिया। नक्सल हिंसा प्रभावित परिवारों ने भी हिस्सा लिया। इस आयोजन से प्रदेश के खेलप्रेमियों की उम्मीदें काफी बढ़ी हैं। खिलाड़ियों को बेहतरीन खेल अधोसंरचना उपलब्ध कराने सरकार कर रही प्रयास मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों में काफी दमखम है। हम छत्तीसगढ़ में खेलों के लिए शानदार अधोसंरचना तैयार कर रहे हैं। खेलो इंडिया के 7 नये सेंटर हमने आरंभ किये हैं। छत्तीसगढ़ में हर तरह की खेल प्रतिभाएं हैं। हमने इसे ध्यान में रखते हुए अलग-अलग तरह के खेलों के लिए कोचिंग की विशेष व्यवस्था की है। इसी साल हमने तीन नई अकादमी की शुरूआत की है। रायपुर में टेनिस, राजनांदगांव में हाकी और नारायणपुर में मल्लखंभ अकादमी हमने आरंभ की है। परंपरागत खेलों को मिलेगा नया जीवन: 20 करोड़ रूपए की छत्तीसगढ़ क्रीडा प्रोत्साहन योजना मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपने परंपरागत खेलों के लिए भी प्रसिद्ध है। इन खेलों का समुचित विकास होता रहे, इसके लिए हमने 20 करोड़ रुपए का प्रावधान छत्तीसगढ़ क्रीडा प्रोत्साहन योजना के तहत किया है। हमारी सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। खेलों में जीत के लिए कुशल रणनीति, तकनीक में महारत के साथ ही फिटनेस बहुत जरूरी मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कुछ दिनों पहले हमने मल्लखंभ के खिलाड़ियों का ढोलकल की पहाड़ियों पर अद्भुत करतब देखा, यह मंत्रमुग्ध कर देने वाला दृश्य था।  मल्लखंभ या किसी भी तरह के खेल के लिए लचीलापन बहुत जरूरी होता है और यह सब फिटनेस से आता है। खेलों में जीतने के लिए कुशल रणनीति, तकनीक में महारत के साथ ही एक अच्छे लेवल का फिटनेस भी बहुत जरूरी है। मोदी जी ने फिट इंडिया मूवमेंट चलाया है। फिटनेस के माध्यम से खेलों में तो सफलता हासिल की ही जा सकती है। फिट रहने से आप एक हेल्दी लाइफ स्टाईल भी जीते हैं जिससे कोई भी कार्य आप करें, उसमें आपको सफलता मिलती है। इस अवसर पर खेल एवं युवा कल्याण मंत्री टंकराम वर्मा ने अपने संबोधन में खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार खेल को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य के युवाओं में अपार खेल प्रतिभा है। जिसे पहचान कर तराशना हमारी प्राथमिकता है। इस अवसर पर खेल विभाग के सचिव … Read more