UP की गौशालाएं होंगी आत्मनिर्भर, गाय के गोबर-मूत्र का प्राकृतिक खेती में होगा इस्तेमाल: योगी सरकार

लखनऊ उत्तर प्रदेश में गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य सरकार पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों के लिए गाय के गोबर और मूत्र का इस्तेमाल करने की योजना बना रही है। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश की गौशालाएं पर्यावरण के अनुकूल खेती को बढ़ावा देंगी, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाएंगी और किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी होंगी। 'हम गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर स्तर पर काम कर रहे' पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह ने न्यूज एजेंसी से कहा कि हम गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर स्तर पर काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय दुग्ध विकास बोर्ड, कृषि विभाग और अन्य हितधारकों से बात करके हम सभी पशुशालाओं में ‘वर्मीकम्पोस्ट' बनाएंगे। इसे किसानों को बेचा जाएगा और गाय आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।" मंत्री ने कहा कि इसके लिए परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है और नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक) जैसे संगठनों से भी मदद ली जाएगी। हाल में संपन्न महाकुंभ के दौरान, पशुपालन और दुग्ध विकास मंत्रालय ने गहन विचार-विमर्श किया और पर्यावरण के अनुकूल कृषि में गौशालाओं की भूमिका को मजबूत करने के लिए रणनीतिक योजनाएं तैयार कीं। 'प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए गोबर, मूत्र का होगा इस्तेमाल' विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि योजनाओं के अनुसार गाय के गोबर और मूत्र का उपयोग पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों के लिए किया जाएगा। साथ ही, किसानों और गौशालाओं के कर्मचारियों को मवेशियों के पोषण में सुधार के लिए चारा उत्पादन और संरक्षण के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लोगों के स्वास्थ्य और भूमि एवं पानी की गुणवत्ता को प्राथमिकता दे रही है, जिसके तहत प्राकृतिक खेती पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह एक ऐसी विधि है जिसमें खेती के लिए रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक का इस्तेमाल नहीं किया जाता। अधिकारी ने कहा कि इस कृषि पद्धति में मवेशी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसमें गाय के गोबर और मूत्र को जैविक उर्वरक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को दोहरा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि उनके परिवारों को शुद्ध दूध मिलेगा और जैविक उर्वरकों के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ेगी। अधिकारी ने कहा कि समय के साथ ये प्रयास गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनने में मदद करेंगे। 'प्रदेश की 7,700 से अधिक गौशालाओं में इस वक्त साढ़े 12 लाख छुट्टा मवेशी रखे गए' विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश की 7,700 से अधिक गौशालाओं में इस वक्त साढ़े 12 लाख छुट्टा मवेशी रखे गए हैं। इसके साथ ही राज्य ने मुख्यमंत्री सहभागिता योजना भी लागू की है जिसके तहत एक लाख किसानों को 1.62 लाख छुट्टा मवेशी दिए गए हैं और उनकी देखभाल के लिए हर महीने 1,500 रुपए प्रति पशु की दर से दिये जा रहे हैं। अपने नवीनतम बजट में सरकार ने छुट्टा मवेशियों की सुरक्षा के लिए 2,000 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। यह पहले दिए गए 1,001 करोड़ रुपए के अतिरिक्त है। इसके अलावा 543 नई गौशालाओं को मंजूरी दी गई है। प्रत्येक बड़ी गौशाला के लिए 1.60 करोड़ रुपए की अतिरिक्त धनराशि दी गई है। राज्य सरकार पशुपालकों को मवेशी पालने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रही है। मवेशी पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार नंदिनी कृषक समृद्धि योजना के तहत देशी नस्लों को बढ़ावा दे रही है। साथ ही बैंक ऋण पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दे रही है। अमृत धारा योजना 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी वाले ऋण प्रदान करती है। तीन लाख रुपये से कम के ऋण के लिए किसी गारंटर की आवश्यकता नहीं होती है।   देश में जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में उठाया कदम अधिकारियों ने बताया कि देश में जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार किसानों को गाय आधारित जैविक उर्वरकों का उपयोग करके रसायन मुक्त कृषि अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने बताया कि ये पहल विशेष रूप से गंगा नदी और बुंदेलखंड क्षेत्र के गांवों में केंद्रित हैं और इनमें स्थानीय जल संसाधनों को पर्यावरण के अनुकूल खेती के मॉडल में जोड़ा जा रहा है। कोविड महामारी ने स्वास्थ्य को लेकर वैश्विक जागरूकता बढ़ाई है, जिससे जैविक और प्राकृतिक रूप से उगाए गए उत्पादों की मांग बढ़ रही है। अधिकारियों ने बताया कि खान-पान की आदतों में यह बदलाव न केवल स्थानीय बल्कि वैश्विक भी है जिससे उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं।   recent visitors 40

रियासी में दर्दनाक हादसा, पलटी बस, 22 महिला समेत 30 यात्री घायल, दो लोग गंभीर रूप से घायल

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के रियासी में रविवार को एक मिनी बस के पलट जाने से 30 लोग घायल हो गए हैं। इनमें से दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। सभी घायलों को जम्मू-कश्मीर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घायलों में अधिकतर महिलाएं थीं। बताया जा रहा है कि बस पहाड़ी रास्ते से जा रही थी। नियंत्रण खोने से बस खाई में पलट गई। अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटना तारा मोड़ के पास हुई जब बस राजौरी जिले के मुगला से रियासी के पौनी जा रही थी। दो की हालत गंभीर, जम्मू अस्पताल में रेफर उन्होंने बताया कि दुर्घटना में 22 महिलाओं समेत 30 यात्री घायल हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों ने बताया कि गंभीर रूप से घायलों में से दो रफाकत अली और गौतम शर्मा को विशेष उपचार के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल जम्मू रेफर कर दिया गया है। अधिकारी के मुताबिक, यह दुर्घटना चालक की लापरवाही के कारण हुई है। आगे की जांच के लिए मामला दर्ज किया गया है। घायलों की हुई पहचान     सपना देवी (25) पत्नी विक्की कुमार, अल्ल्या     अंजलि शर्मा (20), पुत्री अजय कुमार, मोघला     ​​बलवंत राज (54) पुत्र मुंशी राम, मंगल (तरेणु)     बलबीर सिंह (35) पुत्र राम सिंह, मल्लूरियां     अंजू देवी (45) पत्नी कमल सिंह, जुंगरियाल     मंजू देवी (45) पत्नी बलदेव सिंह, जुंगरियाल     मंत्रा देवी (33) पत्नी रमेश कुमार, जुंगरियाल     राज कुमारी (50) पत्नी शेर सिंह, जुंगरियाल     फरजाना कौसर (21) पत्नी मोहम्मद अख्तर, अल्ल्या     सुमन देवी (30) पत्नी जसबीर सिंह, मल्लूरियां     बिट्टो देवी (50) पत्नी कृष्ण लाल, मोघला     ​​कमला देवी (85) पत्नी सुरम सिंह, मोघला     ​​चंचलो देवी (55) पत्नी पूरन सिंह, जुंगरियाल     सुभाष सिंह (44) पत्नी संत राम, जुंगेरियल     रफाकत अली (25) पुत्र अब्दुल शकूर, जुंगेरियल     रीता देवी (35) पत्नी पप्पू सिंह, मोघला     ​​गणेश कुमार (37) पुत्र तेज पॉल, खेयोन     गौतम शर्मा (6) पुत्र सुनील कुमार, केरल तेरथ     बबली देवी (29) पत्नी सुनील कुमार, केरल तेरथ     गुड्डो देवी (60) पत्नी चरण दास, जुंगेरियल     कमलेश कुमारी (42) पत्नी केवल कृष्ण, जुंगेरियल     कमला देवी (30) पत्नी कृष्ण सिंह, जुंगेरियल     पुष्पा देवी (30) पत्नी केवल कृष्ण, जुंगेरियल     बिमला देवी (60) पत्नी सुरम चंद, जुंगेरियल     किशो देवी (62) पत्नी बर्फी लाल, जुंगेरियल     मोहिनी देवी (50) पत्नी स्वर्ण सिंह, उम्बलीगल्ला     तारेनू के अब्दुल रशीद के पुत्र मोहम्मद अशरफ (29)     मोहम्मद फारूक (40) अल्लिया के जिम्दी चौधरी का पुत्र     मांगल के बलवंत राज की पत्नी गुड्डो देवी (40)     मांगल के गुलशन कुमार की पत्नी अनु शर्मा (23)   recent visitors 46

राजधानी रायपुर और बिलासपुर में पारा 40 डिग्री के पार, मार्च के महीने में ही शुरू AC और कुलर

रायपुर मार्च के महीने में ही में सूरज की किरणें झुलसाने लगी हैं. राजधानी रायपुर और बिलासपुर में पारा 40 डिग्री के पार पहुंच गया है. मध्य छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में शनिवार को ग्रीष्म लहर चली. रविवार को भी मौसम विभाग ने मध्य छत्तीसगढ़ में लू चलने की चेतावनी जारी की है. रायपुर में शनिवार को अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. इसके चलते भारी गर्मी का अहसास हो रहा था. रायपुर शहर 16 मार्च को आकाश आंशिक मेघमय रहने की संभावना है. अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है. मौसम विभाग के मुताबिक छत्तीसगढ़ में अगले 48 घंटो में अधिकतम तापमान में कोई विशेष परिवर्तन नहीं होने की संभावना है. उसके पश्चात आगामी 3 दिनों में 2-3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आ सकती है. प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 40.5 डिग्री सेल्सियस बिलासपुर में दर्ज किया गया. उत्तरी पाकिस्तान और उसके आसपास के क्षेत्रों में चक्रवाती परिसंचरण के रूप में पश्चिमी विक्षोभ अब उत्तरी पाकिस्तान और उससे सटे जम्मू क्षेत्र में औसत समुद्र तल से 3.1 और 9.6 किमी ऊपर स्थित है. इसके चलते प्रदेश में मौसम शुष्क रहने की संभावना है. साथ ही मध्य छत्तीसगढ़ में एक-दो स्थानों पर ग्रीष्म लहर चलने की संभावना है. 2 दिनों के बाद प्रदेश में एक-दो स्थानों पर हल्की वर्षा होने की संभावना है. घरों में चलने लगे AC और कूलर तेजी से बढ़ना चालू हो गए तापमान के कारण पिछले तीन दिनों से लोग बेचैन हैं. शाम को हल्की ठंडक रहती है, लेकिन दोपहर और दिन ढलने के बाद कूलर और एसी की जरूरत पड़ने लगी है. मौसम विभाग ने पिछले ही महीने अपने मौसम पूर्वानुमान में चेताया था कि इस साल मार्च से ही गर्मी अपने तेवर दिखाने चालू कर देगी. प्रशांत महासागर में सक्रिय ला नीना इफेक्ट गर्मी को और बढ़ाएगा. इस वजह से मार्च से लेकर अप्रैल और मई तक जोरदार गर्मी पड़ने की संभावना है. ग्रीष्म लहर के लिए दो शर्तें है आवश्यक मौसम विभाग के अनुसार ग्रीष्म लहर के लिए अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक होना चाहिए. या अधिकतम तापमान सामान्य से 4.5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक होना चाहिए. आंकड़ों के मुताबिक में बिलासपुर  40.5 डिग्री सेल्सियस और रायपुर का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है. जो सामान्य से 5.3 डिग्री ज्यादा है. माना हवाई अड्डे पर आज दिन का अधिकतम तापमान 39.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो आज के दिन के सामान्य तापमान से छह डिग्री ज्यादा था. पेंड्रा रोड के तापमान 39.5 डिग्री था, जो सामान्य से साढ़े 7 डिग्री ज्यादा रहा. recent visitors 28

इंदौर रंगपंचमी पर मारल क्लब की गेर में बोरिंग मशीनों से गुलाल बरसाया जाएगा, गेर में होंगे श्रीनाथजी मंदिर के दर्शन

इंदौर होली के बाद अब रंगपंचमी पर 19 मार्च को इंदौर अपना रंग दुनिया को दिखाने की तैयारी में जुट गया है। पिछली बार नहीं निकली टोरी कार्नर की गेर इस बार दोगुने उल्लास के साथ निकाली जाएगी। हालांकि इस बार रसिया कार्नर की गेर नहीं निकलेगी। इधर संगम कार्नर ने चल समारोह की खास तैयारी शुरू कर दी है। इसमें बांके बिहारी के ढोल पर मिसाइल से 200 फीट ऊपर तक रंग उड़ाया जाएगा। मारल क्लब की गेर में बोरिंग मशीन से गुलाल उड़ाया जाएगा। इसके अतिरिक्त हिंद रक्षक संगठन की राधाकृष्ण फाग यात्रा भी निकलेगी। रंगपंचमी पर तीन गेर और एक फागयात्रा सुबह 9.30 से दोपहर तीन बजे तक राजवाड़ा पर जुटने वाले लाखों लोगों को रंग से भिगोएगी। संगम कार्नर की गेर के लिए आठ हजार किलो फूलों से गुलाल बनाया जा रहा है। कमलेश खंडेलवाल ने बताया कि गेर का यह 75वां वर्ष है। इस बार गेर का प्रमुख आकर्षण बरसाना की टीम लट्ठमार होली के अतिरिक्त बांके बिहारी का ढोल आकर्षण का केंद्र रहेगा। देशभक्ति ओर सद्भावना से ओतप्रोत युवाओं की टोली देशभक्ति के तरानों पर भांगड़ा करती चलेगी। रसिया कार्नर : इस वर्ष नहीं निकलेगी गेर ओल्ड राज मोहल्ला से निकलने वाली इंदौर की प्रतिष्ठित रसिया कार्नर की गेर इस वर्ष नहीं निकाली जाएगी। संयोजक पंडित राजपाल जोशी के पिताजी और गेर के प्रमुख संरक्षक पंडित क्रांतिसागर जोशी का कुछ माह पूर्व ही निधन हो गया था, जिसके कारण समिति ने इस वर्ष गेर नहीं निकालने का निर्णय लिया है। जोशी ने बताया कि पिताजी के चले जाने का दुख अभी भी हम सभी के दिलों में है, इसलिए रसिया कार्नर परिवार ने इस वर्ष गेर स्थगित की है। आने वाले वर्ष में इंदौर की जनता को रंगों से सराबोर करने के लिए और भी ज्यादा अच्छी गेर निकालेंगे। मारल क्लब : गेर में बोरिंग मशीनों से बरसाएंगे गुलाल मारल क्लब की गेर का यह 51वां वर्ष है। छीपा बाखल से निकलने वाली गेर के लिए इस बार विशेष तैयारी की जा रही है। इसमें बोरिंग मशीनों से गुलाल बरसाया जाएगा। आयोजक अभिमन्यु मिश्रा का कहना है कि इसकी तैयारी सदर बाजार में की जा रही है। भजन गायक मनीष तिवारी भी भजनों की प्रस्तुति देते चलेंगे। मशीनों को तोप का स्वरूप दिया गया है। साथ ही पानी के टैंकर भी रहेंगे। हिंद रक्षक संगठन : फाग यात्रा में नजर आएगा नाथद्वारा का श्रीनाथ मंदिर हिंद रक्षक संगठन की राधाकृष्ण फाग यात्रा नृसिंह बाजार से निकलेगी। संयोजक एकलव्य सिंह गौड़ ने बताया कि यह यात्रा का 27वां वर्ष है। पिछले वर्ष जहां अयोध्या में बने राम मंदिर की प्रतिकृति बनाई गई थी, वहीं इस बार नाथद्वारा का श्रीनाथ मंदिर नजर आएगा। इसके साथ ही भगवान कृष्ण गोवर्धन पर्वत उठाए हुए एक झांकी में दिखेंगे। 100 से अधिक भगवा ध्वजा लेकर युवक व महिलाएं चलेंगी। टेसू के फूलों का प्राकृतिक रंग उड़ाया जाएगा। टोरी कार्नर गेर : ट्राले पर नृत्य करते दिखेंगे आईआईटी के विद्यार्थी सबसे पुराने टोरी कार्नर से निकलने वाली गेर पिछले वर्ष 2024 नहीं निकली थी। संस्थापक शेखर गिरि के बड़े भाई सतीश गिरि का निधन होने से गेर निकालना रद किया गया था। हालांकि उस समय तक गेर की सभी तैयारी पूरी हो चुकी थी। संस्थापक शेखर गिरि ने बताया कि इस बार दोगुने उल्लास के साथ गेर की तैयारी की जा रही है। इसमें आईआईटी के विद्यार्थी ट्राले पर नृत्य करते नजर आएंगे। गेर की थीम 'प्यार किया तो डरना क्या' रहेगा। साथ ही अलग-अलग समाज की महिलाएं भी इसमें बड़ी संख्या में शामिल होगी। recent visitors 32

मुख्यमंत्री साय ने NCC कैडेट्स का बढ़ाया उत्साह, कहा-अब युवाओं के पायलट बनने का सपना भी होगा साकार

जशपुरनगर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज आगडीह के हवाई पट्टी में 3 सीजी एयर एसक्वीएन एनसीसी रायपुर के कैडेट्स का उत्साहवर्धन किया और उनके अनुभव जाने. मुख्यमंत्री ने कहा कि जशपुर के युवाओं को मेडिकल, इंजीनियरिंग, शिक्षा, सहित हर क्षेत्र में कैरियर बनाने के लिए बेहतर प्रयास किया जा रहा है. जशपुर के युवा पायलट में अपना भविष्य बना सके, इसके लिए छत्तीसगढ़ शासन हर संभव सहायता उपलब्ध करा रही है. उन्होंने युवाओं को जशपुर के पर्यटन स्थल का भ्रमण करवाने के निर्देश दिए हैं. साथ ही बताया कि जशपुर प्राकृतिक सौंदर्य से बहुत अच्छा जिला है. यहां काजू, चाय पत्ती, नाशपाती सहित अच्छे फलों की खेती होती है. जशपुर में सेब की भी खेती की जा रही है. मुख्यमंत्री साय ने माइक्रो लाइट एयर स्कवाड्रन विमान का अवलोकन कर तकनीकी जानकारी ली. इस अवसर पर सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष गोमती साय, विधायक रायमुनी भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, सरगुजा कमिश्नर नरेंद्र कुमार दुग्गा, आईजी अंकित गर्ग, कलेक्टर रोहित व्यास, एसएसपी शशि मोहन सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार सहित अन्य जनप्रतिनिधि व अधिकारी उपस्थित थे. उल्लेखनीय है कि जिले में 7 मार्च 2025 से हर सुबह छोटे विमान का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. विमान आसमान की सैर कर वापस जमीन पर आ जाता है. दरअसल, आगडीह हवाई पट्टी से 3 सीजी एयर स्कवाड्रन एनसीसी रायपुर के 100 चयनित कैडेट्स को हल्के विमान उड़ाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. रायपुर से बाहर जशपुर जिले में पहली बार हो रहे प्रशिक्षण को लेकर कैडेट्स में भी भारी उत्साह है. एक तरफ जशपुर का मनोरम दृश्य और प्रशिक्षण पाने का उत्साह उनके जोश को दोगुना कर देता है. लगभग एक माह तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में कैडेट्स को विमान उड़ाने की ट्रेनिंग दी जा रही है. 100 कैडेट्स को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है. ट्विन-सीटर SW-80 विमान से दी जा रही ट्रेनिंग आगडीह हवाई पट्टी की लंबाई 1200 मीटर और चौड़ाई 25 मीटर है. सिंगल इंजन ट्वीन सीटर वायरस एसडब्ल्यू 80 विमान से कैडेट्स को प्रशिक्षण दिया जा रहा है. विमान 20 हजार फीट तक उड़ान भर सकता है. फिलहाल प्रशिक्षण के लिए 1000 फीट तक ही उड़ान का संचालन किया जा रहा है. कमांडिग ऑफिसर ने बताया कि यह प्रशिक्षण कैडेट्स के सुनहरे भविष्य की नींव तैयार कर रहा है. उन्होंने बताया कि एनसीसी के एयर विंग से सी प्रमाण पत्र परीक्षा में अच्छे ग्रेडिंग से पास करने पर केडेट्स सीधे एयर फोर्स के इंटरव्यू के लिए पात्र माने जाते हैं. एयर फोर्स पायलट बनने का सपना लिए ले रहे हैं प्रशिक्षण प्रशिक्षु नितेश प्रजापति ने बताया कि जशपुर का स्वच्छ और खूबसूरत वातावरण उड़ान प्रशिक्षण के लिए बहुत उपयुक्त है. उन्होंने कहा कि मेरा सपना एयरफोर्स पायलट बनने का है, और यह प्रशिक्षण मुझे उस दिशा में आगे बढ़ने में मदद करेगा. इसी तरह प्रांशु चौहान ने बताया कि जशपुर में एयर ट्रैफिक साफ-सुथरा रहता है, जिससे उड़ान में कोई बाधा नहीं आती. रनवे भी पूरी तरह से क्लियर रहता है, जिससे प्रशिक्षण बिना किसी रुकावट के संचालित हो रहा है. उन्होंने कहा कि प्राकृतिक सुंदरता के बीच प्रशिक्षण लेना हमारे लिए हमेशा यादगार रहेगा. recent visitors 29

मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में गर्मी के तीखे तेवर के बीच छाए बादल, 15 जिलों में बारिश के आसार

भोपाल मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में गर्मी के तीखे तेवर के बीच बादल छाने लगे हैं। मौसम विभाग ने आज ग्वालियर, चंबल और उज्जैन संभाग में बारिश के आसार हैं। ऐसे में उज्जैन, देवास, आगर-मालवा, मंदसौर, नीमच, रतलाम, शाजापुर, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, दतिया, अशोकनगर, भिंड, मुरैना और श्योपुर में बारिश के कुछ इलाकों में बारिश हो सकती है। नर्मदापुरम में सबसे ज्यादा तापमान मध्य प्रदेश में गर्मी के तीखे तेवर बरकरार हैं। इसी क्रम में शनिवार को दिन का सबसे अधिक तापमान 39.8 डिग्री सेल्सियस तापमान नर्मदापुरम में दर्ज किया गया, जो सामान्य से 6.3 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। रात का सबसे कम 15.2 डिग्री सेल्सियस तापमान मंडला में रिकॉर्ड किया गया। हिल स्टेशन पचमढ़ी में रात का पारा 15 डिग्री सेल्सियस पर रहा। भिंड के अटेर में हुई बारिश पिछले 24 घंटों के दौरान शनिवार सुबह साढ़े आठ बजे तक भिंड के अटेर में एक मिलीमीटर बारिश हुई। मौसम विज्ञानियों के अनुसार अलग-अलग स्थानों पर बनी मौसम प्रणालियों के प्रभाव से हवाओं के साथ नमी आने लगी है। इससे बादल भी छाने लगे हैं। रविवार को ग्वालियर, चंबल और उज्जैन संभाग के जिलों में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है। हवा के ऊपरी भाग में बना चक्रवात मौसम विज्ञान केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार एक पश्चिमी विक्षोभ उत्तरी पाकिस्तान और उससे लगे जम्मू पर हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात के रूप में बना हुआ है। उत्तर-पूर्वी राजस्थान एवं उससे लगे दक्षिणी हरियाणा पर भी हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात बना हुआ है। दक्षिण-पश्चिमी उत्तर प्रदेश से दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान तक एक द्रोणिका बनी हुई है, जो राजस्थान और उससे लगे हरियाणा पर बने चक्रवात से होकर गुजर रही है। मौसम विज्ञानी अजय शुक्ला ने बताया कि वर्तमान में हवाओं का रुख दक्षिणी बना हुआ है। हवाओं के साथ नमी आने के कारण बादल छाने लगे हैं। आज ग्वालियर, चंबल एवं उज्जैन संभाग के जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश भी हो सकती है। recent visitors 28

भारतीय मूल की दो महिलाओं को कनाडा की नई कैबिनेट में मिली बड़ी जिम्मेदारी

कनाडा भारतीय-कनाडाई अनीता आनंद और दिल्ली में जन्मी कमल खेड़ा को कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। पूर्व केंद्रीय बैंकर मार्क कार्नी ने शुक्रवार को कनाडा के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। कार्नी (59 साल) ने प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की जगह ली है। ट्रूडो ने जनवरी में अपने इस्तीफे की घोषणा की थी। लिबरल पार्टी द्वारा नया नेता चुने जाने तक ट्रूडो सत्ता में बने रहे। भारतीय मूल की महिलाओं को अहम मंत्रालय आनंद को (58) नवाचार, विज्ञान और उद्योग मंत्री बनाया गया है जबकि 36 वर्षीय खेड़ा स्वास्थ्य मंत्री हैं। दिल्ली में जन्मी खेड़ा का परिवार उस समय कनाडा चला गया था जब वह स्कूल की शिक्षा ग्रहण कर थीं। बाद में उन्होंने टोरंटो के यॉर्क विश्वविद्यालय से विज्ञान स्नातक की डिग्री हासिल की। स्वास्थ्य क्षेत्र में काम कर चुकी हैं कमल खेड़ा कनाडा के प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर उल्लेख है कि खेड़ा को पहली बार 2015 में ब्रैम्पटन वेस्ट से संसद सदस्य के रूप में चुना गया था। इसमें कहा गया है, ‘मंत्री खेड़ा संसद के लिए चुनी गई सबसे कम उम्र की महिलाओं में से एक हैं। वह एक पंजीकृत नर्स, सामुदायिक स्वयंसेवक और राजनीतिक कार्यकर्ता हैं।’ खेड़ा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘एक नर्स के रूप में, मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता हमेशा अपने मरीजों की सहायता के लिए मौजूद रहना था और यही मानसिकता मैं स्वास्थ्य मंत्री की भूमिका में भी हर दिन अपनाऊंगी। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी द्वारा मुझे पर जताये गये भरोसे के लिए बहुत आभारी हूं।’ राजनीति में आने से पहले, उन्होंने टोरंटो के सेंट जोसेफ हेल्थ सेंटर में एक पंजीकृत नर्स के रूप में काम किया था। पीएम पद की भी दावेदार थीं अनीता आनंद ट्रूडो की जगह अगले प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे बताई गई आनंद ने जनवरी में घोषणा की थी कि वह इस दौड़ से हट रही हैं। आनंद ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा,‘‘मुझे मार्क कार्नी की सरकार में नवाचार, विज्ञान और आर्थिक विकास मंत्री के रूप में शपथ लेने पर गर्व है।’ कनाडा के प्रधानमंत्री की वेबसाइट के अनुसार आनंद को पहली बार 2019 में ओकविले के लिए संसद सदस्य के रूप में चुना गया था और इससे पहले उन्होंने ट्रेजरी बोर्ड के अध्यक्ष, राष्ट्रीय रक्षा मंत्री और सार्वजनिक सेवा और खरीद मंत्री के रूप में कार्य किया था। इसमें कहा गया है कि आनंद ने एक विद्वान, वकील और शोधकर्ता के रूप में काम किया है और वह एक कानूनी शिक्षाविद रही हैं। recent visitors 26