होली विशेष : श्रीकृष्ण और पूतना की पौराणिक कथा

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार वर्ष के अंतिम माह फाल्गुन माह पूर्णिमा को होलिका दहन होता है। होली की पौराणिक कथा चार घटनाओं से जुड़ी हुई है। पहली होलिका और भक्त प्रहलाद, दूसरी कामदेव और शिव, तीसरी राजा पृथु और राक्षसी ढुंढी और चौथी श्रीकृष्ण और पूतना। आओ इस बार जानते हैं श्रीकृष्ण और पूतना की पौराणिक और प्रामाणिक कथा। वसुदेव का विवाह कंस की बहन देवकी से हुआ। कंस जब देवकी और वसुदेव को रथ पर बैठाकर उनके घर छोड़ने जा रहा था तो रास्ते में आकाशवाणी द्वारा उसे पता चला कि वसुदेव और देवकी का आठवां पुत्र उसकी मृत्यु का कारण बनेगा। बस फिर क्या था कंस ने दोनों को मथुरा के कारागार में डाल दिया। देवकी के छ: पुत्रों को कंस ने मार दिया था और सातवें पुत्र जो कि शेष नाग के अवतार बलराम थे। उनके अंश को योगमाया ने जन्म से पूर्व ही वसुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया था। फिर श्रीकृष्ण का अवतार आठवें पुत्र के रूप में हुआ। उसी समय वसुदेव ने रात में ही श्रीकृष्ण को गोकुल में नंद और यशोदा के यहां पहुंचा दिया और उनकी नवजात कन्या (योगमाया) को अपने साथ ले आए। परन्तु कंस उस कन्या का वध नहीं कर सका और फिर से आकाशवाणी हुई कि तुझे मारने वाला तो गोकुल मैं पहुंच गया है। इसी कारण कंस ने उस दिन गोकुल में जन्में सभी बच्चों को मारने के आदेश दे दिया। परंतु कोई भी श्रीकृष्‍ण के पास तक नहीं पहुंच सका। तब बालकृष्ण की हत्या करने का काम राक्षसी पूतना को सौंपा गया। उल्लेखनीय है कि पूर्व जन्म में पूतना राजा बलि की पुत्री रत्नबाला थी। वह राजकन्या थी। राजा बलि से तीन पग भूमि दान में मांगने के लिए भगवान वामन आए तो उनका रूप सौन्दर्य देखकर उस राजकन्या को हुआ कि 'मेरी सगाई हो गई है। काश, मुझे ऐसा ही बेटा हो तो मैं गले लगाऊं और उसको अपना खूब दूध पिलाऊं।' परंतु जब नन्हा मुन्ना वामन विराट हो गया और उसने बलि राजा का सर्वस्व छीन लिया तो वह क्रोधित हो गई "मैं इसको दूध पिलाऊं? नहीं इसको तो मैं जहर पिलाऊं, जहर!'… भगवान ने उसकी मंशा जान ली और कहा तथास्तु। बाद में वही राजकन्या पूतना बनी। पूतना सुंदर नारी का रूप बनाकर बालकृष्ण को विष का स्तनपान कराने गई लेकिन बालकृष्ण के द्वार उसका स्तनपान करने से उसको भयंकर पीड़ा उत्पन्न हुई और वह बालकृष्ण को अपने स्तन से छुड़ाने लगी परंतु यह संभव नहीं हो पाया। कराहते हुए उसने अपना असली रूप धारण किया और चीखती हुई श्रीकृष्ण को लेकर आकाश में पहुंच गई। यह दृश्य देखकर माता यशोदा और माता रोहिणी सहित नगर के सभी लोग घबरा गए और उसके पीछे दौड़े। पूतना कराहते हुए चीखती रहती है। अंतत: वह भूमि पर गिरकर मर जाती है। दूध पीने के बाद बालकृष्ण उसकी छाती पर बैठ जाते हैं। सभी लोग वहां पहुंचते हैं। यशोदा और रोहिणी कहती हैं कोई बचाओ मेरे लल्ला को। तब एक ग्रामीण पूतना की छाती पर चढ़कर जैसे-तैसे लल्ला को नीचे उतार लाता है। यशोदा लल्ला को गले लगा लेती है। बाद में नंद आते हैं तो उनको इस घटना का पता चलता है। फिर एक बूढ़ी महिला कहती है कि ऐसी राक्षसी के हाथों बच जाना तो कोई दैवीय चमत्कार है। ऋषि शांडिल्य से कहकर पूजा और दान करवाओ और उत्सव मनाओ। जिस दिन राक्षसी पूतना का वध हुआ था उस दिन फाल्गुन पूर्णिमा थी। अत: बुराई का अंत हुआ और इस खुशी में समूचे नंदगांववासियो ने खूब जमकर रंग खेला, नृत्य किया और जमकर उत्सव मनाया। तभी से होली में रंग और भंग का समावेश होने लगा। recent visitors 54

मिडिल ईस्ट के हथियार बाजार में चीन को बड़ा झटका, शी जिनपिंग की स्ट्रैटजी की क्राउन प्रिंस ने निकाली हवा

रियाद  चीन की मिडिल ईस्ट स्ट्रैटजी को तगड़ा झटका देते हुए सऊदी अरब ने J-35 स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने से इनकार कर दिया है। शी जिनपिंग के लिए ये बहुत बड़ा झटका है। क्योंकि शी जिनपिंग की स्ट्रैटजी के मुताबिक खाड़ी के ताकतवर देशों में चीनी हथियारों से अमेरिकी हथियारों को रिप्लेस करना था। शी जिनपिंग चाहते थे कि सऊदी अरब जैसे ताकतवर देश अगर J-35 स्टील्थ फाइटर खरीदते हैं, तो ना सिर्फ चीनी जेट्स की बिक्री बढ़ेगी, बल्कि रणनीतिक तौर पर मिडिल ईस्ट में अमेरिकी हथियारों के लिए भी वो दरवाजे बंद कर सकता है। लेकिन IDRW की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब ने चीन को उस वक्त झटका दिया है, जब पिछले साल नवंबर में जी-20 शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया था और चीनी अधिकारी झुहाई एयर शो के कामयाब होने का जश्न मना रहे थे। चीन ने बार बार दावा किया था कि सऊदी अरब चीनी स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने वाला है। लेकिन जी-20 शिखर सम्मेलन ने एक कहानी के एक नये अध्याय को ही खोलकर रख दिया है। नई रिपोर्ट में कहा गया है की सऊदी अरब अब छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के निर्माण के लिए ब्रिटेन, इटली और जापान के साथ मिलकर काम करने वाला है और इन देशों के बीच प्रोजेक्ट को लेकर बातचीत एडवांस स्तर तक पहुंच चुकी है। माना जा रहा है कि इस साल के अंत तक ये सौदा पक्का हो जाएगा। इस दौरान प्रोजेक्ट की रूपरेखा तय कर ली जाएगी। चीन को सऊदी ने दिया बहुत बड़ा झटका चीन के लिए ये पैरों तले जमीन खिसकाने वाला झटका है। मिडिल ईस्ट में उसकी रणनीति पश्चिमी देशों के प्रभुत्व को कमजोर करने की थी। इसके अलावा वो J-35 स्टील्थ फाइटर के लिए बड़े बाजार की तलाश कर रहा है। अभी तक J-35 स्टील्थ फाइटर को खरीदने के लिए सिर्फ पाकिस्तान तैयार हुआ है। एक्सपर्ट्स लगातार J-35 स्टील्थ फाइटर की क्षमता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि पाकिस्तान भी चीनी प्रेशर की वजह से इस फाइटर को खरीदने के लिए तैयार हुआ है। लेकिन सऊदी अरब के सामने ऐसी कोई दिक्कत नहीं थी। सऊदी अरब के इनकार के बाद कई और देश, जिनके साथ चीन J-35 स्टील्थ फाइटर की बिक्री को लेकर बातचीत कर रहा था, वो सौदे से पीछे हट सकते हैं। इसकी टेक्नोलॉजी पर अब शक के बादल और गहरे हो गये हैं। IDRW की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब ने ये फैसला अचानक नहीं लिया है। बल्कि चीन की तरफ से करीबी संबंध बनाने के बावजूद बीजिंग की मानसिकता को लेकर सतर्क रहा है। उसने चीनी सैन्य हार्डवेयर को लेकर संतुलित रवैया अपनाया है। उसने कुछ चीनी हथियार जरूर खरीदे हैं, लेकिन स्ट्रैटजिक हथियार अभी तक नहीं खरीदे हैं। लिहाजा एक्सपर्ट्स इसे सिर्फ सऊदी अरब की हथियार खरीद में विविधिता के नजरिए से ही देख रहे हैं। IDRW ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सऊदी अरब और पश्चिमी देशों के अधिकारी पहले से ही गोपनीय स्तर पर इस नये प्रोजेक्ट पर बातचीत कर रहे हैं। पश्चिमी देशों के बीच फाइटर जेट निर्माण के लिए हाई टेक्नोलॉजी है, जो सऊदी और पश्चिमी देशों के बीच दीर्घकालिक रणनीति का संकेत देता है। जे-35 लड़ाकू विमान को नहीं मिल रहा खरीददार? पाकिस्तान के अलावा किसी भी और देश ने अभी तक जे-35 लड़ाकू विमान को लेकर दिलचस्पी नहीं दिखाई है। चीनी फाइटर जेट हालांकि एफ-35 जैसे अमेरिकी फाइटर जेट्स की तुलना में काफी सस्ता है और इसका मेटिनेंस भी कम खर्चीला है, लेकिन ये प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहा है। फरवरी 2024 में सऊदी अरब में आयोजित ग्लोबल एयरशो के दौरान चीन ने FC-31 को प्रदर्शन के लिए भेजा था। FC-31 लड़ाकू विमान, J-35 का पूर्व वैरिएंट है। लेकिन FC-31 भी डिफेंस एक्सपर्ट्स को प्रभावित नहीं कर पाया। चीन की डिफेंस इंडस्ट्री ने बहुत शानदार तरक्की की है और देश की रक्षा जरूरतों को पूरा किया है। लेकिन बावजूद इसके चीन को विदेशी ग्राहकों की तलाश के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। मध्य-पूर्व से चीन को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन वहां भी उसे कामयाबी नहीं मिल पा रही है। इन बातों के अलावा भी साल 2019 से 2023 तक चीन के हथियार कंपोनेंट्स में 77% हिस्सा रूस से आयात किया गया था। वहीं चीन कई क्रिटिकल हथियारों के लिए फ्रांस और रूस पर भी निर्भर था, लिहाजा यह निर्भरता चीन के आत्मनिर्भरता और तकनीकी कौशल के दावों पर सवाल उठाती है। recent visitors 44

जमीन की खरीदी-बिक्री की सोच रहे हैं, तो जल्दी करें, एक अप्रैल से महंगी हो जाएगी जमीन रजिस्ट्री

रायपुर जमीन की खरीदी-बिक्री की सोच रहे हैं, तो इंतजार मत किजिए. एक अप्रैल से रजिस्ट्री दर में 10 प्रतिशत इजाफे के आसार हैं. ऐसी स्थिति में आपके साथ-साथ दूसरे पक्ष को भी कार्रवाई के लिए ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ेगा. दरअसल, पिछले 6 साल से गाइडलाइन दरें नहीं बढ़ाई गई है. इसके साथ ही सालभर पहले रजिस्ट्री में मिलने वाली 30 फीसदी की छूट भी खत्म कर दी गई है. अबकी बार या करें इस साल इसे करीब 10 फीसदी बढ़ाने की तैयारी है. गाइडलाइन दरें बढ़ने से जमीनों का रेट बढ़ेगा. रजिस्ट्री कार्यालय में भीड़ गाइडलाइन दर बढ़ने की आशंका में अभी से रजिस्ट्री कार्यालय में पक्षकारों की भीड़ नजर आने लगी है. मार्च महीने के अंत तक तो कार्यालय में पैर रखने की भी जगह नहीं मिलेगी. हालांकि, भीड़ बढ़ने के चलते ही रजिस्ट्री का समय वो घंटे बढ़ा दिया गया है. बुकिंग स्लॉट भी बढ़ा दिया गया है. लेकिन प्रकरणों की संख्या ज्यादा होने से समय ज्यादा तो लगेगा ही लगेगा, साथ में गड़बड़ी की भी आशंका बढ़ जाएगी. इसलिए बेहतर है कि समय रहते कागजों की ठीक जांच-पड़ताल कर रजिस्ट्री करा लें. इन इलाकों में ज्यादा कारोबार राजधानी रायपुर के जिन इलाकों में जमीन का कारोार ज्यादा हो रहा है उनमें विधानसभा, कचना, रिंग रोड नंबर-3, धमतरी रोड, वीआईपी रोड, सेजबहार, माना, अभनपुर, खरोरा रोड शामिल. रियल इस्टेट कारोबारी और लोग में इन इलाकों में जमीन खरीदने की होड़ मची हुई ​है. recent visitors 33

वैष्णो देवी मंदिर ने वित्त वर्ष 24 में 683 करोड़ रुपये कमाए, प्रसाद और धार्मिक समारोह जीएसटी से मुक्त

श्रीनगर दुनिया में भारत मंदिरों का देश है, यहां मंदिरों की संख्या लाखों में है. लेकिन, क्या आप जानते हैं देश का सबसे अमीर मंदिर कौन-सा है? दरअसल, मंदिरों की कमाई और उस पर टैक्स को लेकर इन दिनों एक सियासी बहस छिड़ी हुई है. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बीजेपी सरकार मंदिरों को जीएसटी बकाया का नोटिस भेज रही है. उधर, बीजेपी ने इस मामले में कांग्रेस पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया है. आइये आपको बताते हैं देश के सबसे अमीर मंदिर की कमाई और टैक्स के बारे में… कहां है स्थित है सबसे दौलतमंद मंदिर मनीकंट्रोल ने अपनी रिपोर्ट में एक विश्लेषण के बाद पाया है कि भारत का सबसे अमीर मंदिर ट्रस्ट तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTS) है, जो वित्त वर्ष 2025 में अपनी 4,774 करोड़ रुपये की वार्षिक आय पर 1.5 प्रतिशत से कम वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का भुगतान करेगा. नवंबर 2024 में, देश के सबसे धनी मंदिरों में से एक तिरुवनंतपुरम के श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर को बकाया टैक्स भुगतान के लिए नोटिस भेजा गया था. मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि 7 साल की अवधि के लिए मांग केवल 1.57 करोड़ रुपये की थी, जबकि मंदिर ने अकेले 2014 में 700 करोड़ रुपये कमाए हैं. करोड़ों का चढ़ावा, ब्याज से भी कमाई जम्मू के कटरा में स्थित वैष्णो देवी मंदिर ने वित्त वर्ष 24 में 683 करोड़ रुपए कमाए, जिसमें से 255 करोड़ रुपए चढ़ावे से आए, जो टैक्स-फ्री हैं और 133.3 करोड़ रुपए ब्याज से आए. टीटीडी के मामले में, 4,800 करोड़ रुपए की कमाई में से एक तिहाई से अधिक हुंडी संग्रह से आए. इस मामले में जीएसटी के तहत टैक्स लायबिलिटी वित्त वर्ष 21 से पांच वर्षों में लगभग 130 करोड़ रुपये रही है. हालांकि, इस मामले में मंदिरों के डिटेल विवरण उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन भारत के दो सबसे बड़े मंदिर ट्रस्टों की आय पिछले सात वर्षों में दोगुनी हो गई है. साल दर साल बढ़ी मंदिरों की आय -तिरुपति ट्रस्ट का वित्त वर्ष 2017 में बजट 2,678 करोड़ रुपये था, जो इसकी वेबसाइट के अनुसार वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर 5,145 करोड़ रुपये हो गया. -वैष्णो देवी ट्रस्ट की आय वित्त वर्ष 2017 में 380 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2024 में 683 करोड़ रुपये हो गई है. जीएसटी भुगतान की रकम संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, तिरुपति मंदिर ने वित्त वर्ष 2017 में 14.7 करोड़ रुपये, वित्त वर्ष 2022 में 15.58 करोड़ रुपये, वित्त वर्ष 2023 में 32.15 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2024 में 32.95 करोड़ रुपये का जीएसटी भुगतान किया. धार्मिक समारोह और प्रसाद होते हैं ‘टैक्स फ्री’ -प्रसाद और धार्मिक समारोह जीएसटी संग्रह से मुक्त हैं. टीटीडी और वैष्णो देवी के मामले में यह आय एक तिहाई से अधिक थी. -वित्त वर्ष 24 में वैष्णो देवी मंदिर ट्रस्ट ने अपनी आय का 37 प्रतिशत दान से अर्जित किया. वहीं, वित्त वर्ष 25 में टीटीडी को दान से लगभग 4,800 करोड़ रुपये अर्जित करने की उम्मीद है. -यदि कमरे का शुल्क 1,000 रुपये से अधिक है और यदि सामुदायिक हॉल या खुले क्षेत्र का शुल्क 10,000 रुपये से अधिक है, तो परिसर के किराये पर जीएसटी लगाया जाता है. -व्यवसाय के लिए किराए पर दी गई दुकानों और अन्य स्थानों पर भी जीएसटी नहीं लगता है, यदि मासिक किराया 10,000 रुपये से कम है. -ट्रस्ट द्वारा संचालित स्मारिका दुकानों और अन्य वाणिज्यिक उपक्रमों पर जीएसटी लागू है. वैष्णो देवी ट्रस्ट एक हेलीकॉप्टर सेवा और स्मारिका दुकानें चलाता है. -ट्रस्ट ने वित्त वर्ष 24 में बिक्री से 19 प्रतिशत या 129.6 करोड़ रुपये और किराये की आय से 84 करोड़ रुपये या 12 प्रतिशत कमाए. recent visitors 55

ऐतिहासिक ग्वालियर किले का आधा हिस्सा निजी हाथों में, 5 साल सौंदर्यीकरण और देखरेख के लिए दिया गया

 ग्वालियर  मध्यप्रदेश में हुए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट Memorandum of understanding (MOU) पर वर्क शुरू हो गया है। इसी कड़ी में ऐतिहासिक ग्वालियर किले का आधा हिस्सा निजी हाथों में चला गया। राज्य पुरातत्व अधीन हिस्सा निजी हाथों में सौंपा गया है। 5 साल के लिए सौंदर्यीकरण और देखरेख के लिए दिया गया है। दरअसल कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के तहत अब राज्य पुरातत्व की देखरेख में काम होगा। जनभागीदारी का MP में यह पहला कदम है। पर्यटन-संस्कृति विभाग ने इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड (इंडिगो एयरलाइंस) के साथ MOU किया है। आगा खान कल्चरल सर्विसेज फोरम (एकेसीएसएफ) को शामिल किया है। समझौते के तहत फंडिंग इंडिगो एयरलाइंस करेगी और एकेसीएसएफ संरक्षण करेगी। समझौते की शर्तें समझौते के अनुसार, किले के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए पांच साल का करार किया गया है। यदि कार्य संतोषजनक रहा, तो इसे पांच साल और बढ़ाया जा सकता है। फंडिंग इंडिगो एयरलाइंस करेगी और संरक्षण कार्य AKCSF संभालेगी। पहले से जारी संरक्षण कार्य ग्वालियर किले का संरक्षण पहले से चल रहा है। राज्य पुरातत्व विभाग ने 2016-17 में इस पर लगभग डेढ़ करोड़ रुपए खर्च किए थे। वर्तमान में भी 75 लाख रुपए से अधिक की लागत से नवीनीकरण कार्य जारी है। विरोध और विवाद कुछ इतिहासकार और स्थानीय लोग किले के निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। वे इसे ऐतिहासिक धरोहर का व्यावसायीकरण मानते हैं। 2022-23 में भीमसिंह राणा की छत्री पर होटल बनाने की योजना को जनता के विरोध के कारण रद्द करना पड़ा था। ग्वालियर किले की आय ग्वालियर किला पर्यटन का बड़ा केंद्र है। हर महीने यहां से 50 लाख रुपए की आय होती है। विशेष अवसरों पर यह राशि और बढ़ जाती है। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि निजी कंपनियों को ऐतिहासिक धरोहरों की पूरी समझ नहीं होती। ऐसे में क्या वे सही तरीके से संरक्षण कार्य कर पाएंगी, यह सवाल बना हुआ है। recent visitors 54

आज पूर्ण चंद्र ग्रहण के रूप में पहला ग्रहण रहेगा, करीब साढ़े तीन घंटे तक चलेगा

उज्जैन खगोलीय गणना के अनुसार आज साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। वर्ष 2025 में चार ग्रहण होंगे। इनमें दो चंद्र ग्रहण तथा दो सूर्य ग्रहण रहेंगे। इनमें से केवल 7 सितंबर को होने वाला चंद्र ग्रहण ही भारत में दिखाई देगा। ज्योतिषाचार्य पं.अमर डब्बावाला ने बताया कि जो ग्रहण दिखाई नहीं देते हैं, उनका सूतक मान्य नहीं होता है। शासकीय जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक प्रो.राजेंद्र प्रकाश गुप्त ने बताया वर्ष 2025 में चार ग्रहण होंगे। आज पूर्ण चंद्र ग्रहण के रूप में पहला ग्रहण रहेगा। यह ग्रहण सुबह 10 बजकर 39 मिनट पर शुरू होगा। दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर ग्रहण का मध्य रहेगा। इस दौरान चंद्रमा पूरी तरह ग्रस्तोदित दिखाई देगा।   इन देशों में दिखाई देगा ग्रहण दोपहर 2 बजकर 18 मिनट पर ग्रहण का मोक्ष होगा। यह ग्रहण अमेरिका, पश्चिम यूरोप, पश्चिम अफ्रीका, अटलांटिक महासागर में रहेगी। इसी प्रकार 29 मार्च को आशंकि सूर्यग्रहण रहेगा। इसकी शुरुआत दोपहर 2 बजकर 20 मिनट पर होगी। यह ग्रहण अमेरिका, ग्रीनलैंड, आइस लैंड, यूरोप व उत्तर पश्चिम रसिया में दिखाई देगा। तीसरी खगोली घटना 7 सितंबर को पूर्ण चंद्रग्रहण के रूप में होगी। यह ग्रहण पूरे भारत सहित उज्जैन में भी दिखाई देगा। रात 9 बजकर 56 मिनट पर चंद्र ग्रहण की शुरुआत होगी। रात 11 बजकर 41 मिनट पर ग्रहण का मध्य तथा रात 1 बजकर 26 मिनट पर ग्रहण का मोक्ष होगा। यह ग्रहण काफी लंबा है, इसकी अवधि 3 घंटा 30 मिनट की रहेगी। साल 2025 का आखिरी ग्रहण 21 सितंबर को आंशिक सूर्यग्रहण के रूप में रहेगा।   recent visitors 30

दिल्ली में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना लागू करने की तैयारी पूरी हो चुकी, जल्द मिलेंगे आयुष्मान कार्ड

नई दिल्ली राजधानी में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएमजेएवाई) लागू करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। 18 मार्च को केंद्र सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) और दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग के बीच समझौते पर हस्ताक्षर होगा।इसके साथ ही दिल्ली में यह योजना लागू हो जाएगी और लाभार्थियों का आयुष्मान कार्ड जारी करने का काम शुरू हो जाएगा। इसके दायरे में आएंगे साढ़े छह लाख परिवार बताया जा रहा है कि वर्ष 2011 में हुई सामाजिक आर्थिक जनगणना के आधार ही अभी गरीब लोगों को इस योजना का लाभ दिया जाएगा। ऐसे में दिल्ली में अभी करीब साढ़े छह लाख परिवार इसके दायरे में आएंगे। इन सभी को मिलेगा लाभ इसके अलावा 70 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों, आशा वर्कर और आंगनबाड़ी वर्करों को इस योजना का लाभ मिलेगा। पीएमजेएवाई के तहत पांच लाख रुपये तक निशुल्क इलाज का प्राविधान है। सरकारी अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा इसके अलावा पांच साल रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा दिल्ली सरकार उपलब्ध कराएगी। इस तरह लाभार्थियों को दस लाख रुपये तक का नि:शुल्क इलाज मिल सकेगा। इससे गरीब व 70 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को बड़ी राहत मिल सकेगी। उन्हें इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। निजी अस्पतालों में वे आसानी से इलाज करा सकेंगे। किन्नरों को भी मिलना चाहिए महिला सम्मान योजना का लाभ : ओपी शर्मा पूर्वी दिल्ली में विश्वास नगर से भाजपा विधायक ओपी शर्मा ने कहा कि महिला सम्मान योजना का लाभ दिल्ली के किन्नरों को भी मिलना चाहिए। यह समाज का उपक्षित वर्ग है। यह योजना महिलाओं से ज्यादा किन्नरों के लिए जरूरी होनी चाहिए। विधायक ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता व भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा को पत्र लिखा है। विधायक ने कहा कि किन्नर लोगों के सामने हाथ फैलाकर मांगते हैं, जिससे वह अपना गुजर बसर करते हैं। उनके उत्थान के लिए कोई सरकारी योजनाएं नहीं है। दिल्ली में 27 वर्ष बाद भाजपा की सरकार आई है। सरकार महिलाओं को सम्मान राशि दे रही है, उस योजना पर किन्नरों का भी हक बनता है। recent visitors 60