इंदौर निगम के राजस्व अधिकारी के तीन जगह स्थित आवासों पर ईओडब्ल्यू का छापा, पहले से निलंबित है अफसर

इंदौर  आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) के अधिकारियों ने आज सुबह दो-दो पत्नियों (Wives) के पति (Husband) नगर निगम (Municipal council) के राजस्व अधिकारी (Revenue Officer) के तीन आवासों पर छापामार कार्रवाई करते हुए करोड़ों की अनुपातहीन सम्पत्ति का खुलासा किया है। छापे में तीन अलग-अलग क्षेत्रों में बहुुमंजिला मकानों, प्लाट, कृषि भूमि का खुलासा हुआ है।  ईओडब्ल्यू की टीम ने शुक्रवार को इंदौर नगर निगम से सस्पेंड एआरओ राजेश परमार के घर छापा मारा है. परमार के तीन ठिकानों पर एक्शन जारी है. आय से अधिक संपत्ति के मामले में छापा मारा गया है. यहां स्पष्ट कर दें कि अनियमितता के चलते कुछ दिन पहले ही परमार नगर निगम से सस्पेंड हुए थे. इंदौर के आवास कॉलोनी में मुख्य कारवाई चल रही है. राजेश परमार जोन 16 के एआरओ थे. कार्रवाई के लिए टीम सुबह ही पहुंच गई थी, इंदौर स्थित निवास स्थान पर.   EOW की टीम को बंद मिला परमार का ऑफिस इंदौर के बिजलपुर इलाके में स्थित आवास कॉलोनी में नगर निगम के राजस्व अधिकारी राजेश परमार रहते हैं, जहां टीम ने सर्चिंग शुरू कर दी है. वहीं, आसपास के लोगों से भी लगातार पूछताछ जारी है. जानकारी के ईओडब्ल्यू की टीम जब परमार के ऑफिस पहुंची, तब वह बंद मिला. इसके बाद उनके घर पर ही सारे दस्तावेजों की छानबीन जारी है. बेलदार से राजस्व अधिकारी तक का सफर ईओडब्ल्यू से मिली जानकारी के मुताबिक राजेश परमार ने अपने करियर की शुरुआत बेलदार के पद से की थी और बाद में प्रमोशन होते हुए सहायक राजस्व अधिकारी के पद तक पहुंच गया। हाल ही में उसे वित्तीय अनियमितता के आरोप में निलंबित किया गया था। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि उनके पास करोड़ों रुपए की संपत्ति है, जो उसकी आय और करियर के अनुसार अनुकूल नहीं है। प्रारंभिक तौर पर चार मकानों के बारे में जानकारी मिली है, जिनमें से दो पर कार्रवाई चल रही है। राजेश ने एक मकान करीब 25 लाख रुपए में खरीदा था और बाद में उस पर एक आलीशान भवन बना लिया। एक मकान में माता-पिता, दूसरे में पूर्व पत्नी एसपी आरएस यादव के मुताबिक एक मकान में राजेश के माता-पिता रहते हैं, जबकि दूसरे मकान में पूर्व पत्नी रहती है। वर्तमान में उनकी संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की गहरी जांच की जा रही है और आशंका जताई जा रही है कि आने वाले समय में और भी संपत्तियों का पता चल सकेगा। दो बार निलंबित हुआ राजेश परमार राजेश परमार संपत्तिकर असेसमेंट में गड़बड़ी के कारण 10 फरवरी को सस्पेंड हो गया था। जोन 16 पर एआरओ रहते परमार ने संपत्ति कर असेसमेंट में गड़बड़ी कर कम टैक्स लिया था और उसका खुलासा तब हुआ जब निगमायुक्त शिवम वर्मा ने राजस्व वसूली को लेकर समीक्षा की थी। परमार की गड़बड़ी पकड़ में आते ही निगमायुक्त वर्मा ने उन्हें सस्पेंड कर ट्रेचिंग ग्राउंड भेज दिया। साथ ही विभागीय जांच भी शुरू कर दी थी। जो फिलहाल चल रही है। बताया जा रहा है कि परमार इससे पहले भी एक बार सस्पेंड हुआ था, जब उसने तत्कालीन अपर आयुक्त एसके चैतन्य के खिलाफ नारेबाजी की थी। जोन-8 पर एआरओ रहते उन्होंने चैतन्य के खिलाफ नारेबाजी की थई। बगैर अनुमति विदेश यात्रा भी की इंदौर नगर निगम जोन क्रमांक 8 में एआरओ रहते हुए राजेश परमार ने नए खाते खोले और राशि जमा कर नगर निगम को करोड़ों की राशि की चपत लगाई थी। वे बगैर अनुमति पांच बार विदेश यात्रा भी कर चुके हैं। परमार के बारे में कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान ने भी महापौर, निगमायुक्त, राजस्व समिति प्रभारी सहित कई अधिकारियों को शिकायत की थी बताया जा रहा है कि राजेश परमार मूलतः दरोगा है, लेकिन जोड़-तोड़ करके प्रभारी एआरओ के पद तक पहुंच गया। जोन क्रमांक 19 में भी पदस्थ रहते हुए शुल्क की वसूली में गड़बड़ी के आरोप परमार पर लगे थे। recent visitors 54

Chamoli में Glacier टूटने से भारी तबाही, 57 मजदूर इस हादसे का शिकार हुए , 10 को रेस्क्यू कर लिया गया

चमोली उत्तराखंड के चमोली में एक बड़ी दुर्घटना हो गई है. यहां माणा गांव में ग्लेशियर टूटने से भारी तबाही मच गई है, जिसकी चपेट में आने से 47 मजदूर बर्फ में दब गए हैं. बता दें कि 57 मजदूर इस हादसे का शिकार हुए थे, लेकिन 10 को रेस्क्यू कर लिया गया है. बाकी 47 की तलाश जारी है. हादसे के बाद मौके पर प्रशासन और BRO की टीम रवाना हो गई है. फिलहाल ITBP और गढ़वाल स्काउट की टीम रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई है. बताया जा रहा है कि हादसे के वक्त घटनास्थल पर बड़ी तादाद में प्राइवेट ठेकेदार के मजदूर काम कर रहे थे. सभी BRO के कांट्रेक्ट में काम कर रहे ठेकेदार के मजदूर थे. एवलांच आने पर सभी इधर-उधर भागने लगे. इनमें से कुछ बचने में कामयाब हो गए तो वहीं 57 मजदूर बर्फ की चपेट में आ गए. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ट्वीट कर इस हादसे पर दुख जारी किया है. उन्होंने कहा,'जनपद चमोली में माणा गांव के निकट BRO द्वारा संचालित निर्माण कार्य के दौरान हिमस्खलन की वजह से कई मजदूरों के दबने का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ. ITBP, BRO और अन्य बचाव दलों द्वारा राहत एवं बचाव कार्य संचालित किया जा रहा है. भगवान बदरी विशाल से सभी श्रमिक भाइयों के सुरक्षित होने की प्रार्थना करता हूं.' बता दें कि पिछले दो दिनों से पहाड़ों में मौसम काफी खराब है. उत्तराखंड के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश के भी कई इलाकों में भारी बारिश हो रही है. कहीं, नदियां उफान पर हैं तो कहीं नालों में गाड़ियां बह रही हैं. भीषण बारिश के कारण हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में तबाही मच गई है. प्रदेश के कुल्लू जिले से तो तबाही की हैरान करने वाली तस्वीरें सामने आई हैं. यहां बारिश ने ऐसा कहर ढाया है कि नदी-नाले उफान पर आ गए हैं. आज (28 फरवरी) ही हिमाचल प्रदेश के कुल्लू और मंडी जिले से भी तबाही की तस्वीरें सामने आई हैं. मंडी जिले के ओट इलाके में लैंडस्लाइड के बाद चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाइवे बंद हो गया है तो वहीं कुल्लू में नालों में बारिश के पानी के कारण आए ओवरफ्लो में गाड़ियां बह जाने का मामला सामने आया है. हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में मौसम को देखते हुए मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया है. भारी बर्फबारी के बाद कश्मीर में स्कूलों की छुट्टियां 7 मार्च तक बढ़ाई गईं भारी बर्फबारी के बाद कश्मीर में स्कूलों की छुट्टियां 7 मार्च तक बढ़ाई गईं हैं। आप को बता दें कि कश्मीर में कुछ दिन से हो रही भारी बर्फबारी के कारण स्कूलों की छुट्टियां 7 मार्च तक बढ़ा दी गई हैं। यह निर्णय मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए लिया गया है ताकि छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। अधिकारियों ने आम जनता को भी सावधानी बरतने की सलाह दी है।     recent visitors 58

CAG की रिपोर्ट ने खोली दिल्ली की वर्ल्ड क्लास स्वास्थ्य सेवाओं के दावों की पोल, मोहल्ला क्लीनिक में टॉयलेट नहीं, अस्पताल में डॉक्टर नहीं

नई दिल्ली दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कोविड-19 से निपटने के लिए केंद्र सरकार से मिले 787.91 करोड़ रुपये में से सिर्फ 582.84 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए, जबकि बाकी राशि बिना उपयोग के रह गई। इसके चलते कोरोना संकट के दौरान जरूरी सुविधाओं की भारी कमी रही। फंड की अनदेखी और भ्रष्टाचार के आरोप रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य कर्मचारियों की भर्ती और वेतन के लिए मिले 52 करोड़ रुपये में से 30.52 करोड़ रुपये खर्च ही नहीं किए गए। इससे साफ है कि सरकार ने स्वास्थ्य कर्मियों की पर्याप्त भर्ती नहीं की, जिससे महामारी के दौरान लोगों को इलाज में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इसी तरह दवाओं, पीपीई किट और अन्य मेडिकल सप्लाई के लिए मिले 119.85 करोड़ में से 83.14 करोड़ रुपये खर्च ही नहीं हुए। सरकारी अस्पतालों में बेड की भारी कमी दिल्ली सरकार ने 2016-17 से 2020-21 के बीच 32,000 नए बेड जोड़ने का वादा किया था, लेकिन सिर्फ 1,357 बेड ही जोड़े गए, जो कि कुल लक्ष्य का मात्र 4.24% है। राजधानी के कई अस्पतालों में बेड की भारी कमी देखी गई, जहां बेड ऑक्यूपेंसी 101% से 189% तक रही, यानी एक ही बेड पर दो-दो मरीजों को रखा गया या मरीजों को फर्श पर इलाज कराना पड़ा। अस्पतालों की परियोजनाओं में देरी और लागत में भारी इजाफा रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि दिल्ली में तीन नए अस्पताल बनाए गए, लेकिन सभी प्रोजेक्ट पहले की सरकार के कार्यकाल में शुरू हुए थे। इनके निर्माण में 5 से 6 साल तक की देरी हुई और लागत भी बढ़ गई।     इंदिरा गांधी अस्पताल: 5 साल की देरी, लागत 314.9 करोड़ रुपये बढ़ी।     बुराड़ी अस्पताल: 6 साल की देरी, लागत 41.26 करोड़ रुपये बढ़ी।     एमए डेंटल अस्पताल (फेज-2): 3 साल की देरी, लागत 26.36 करोड़ रुपये बढ़ी। डॉक्टरों और स्टाफ की भारी कमी-     दिल्ली के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य विभागों में 8,194 पद खाली पड़े हैं।     नर्सिंग स्टाफ की 21% और पैरामेडिकल स्टाफ की 38% कमी है।     राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल और जनकपुरी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में डॉक्टरों की 50-74% कमी पाई गई।     नर्सिंग स्टाफ की 73-96% तक भारी कमी दर्ज की गई। सर्जरी के लिए लंबा इंतजार, कई उपकरण खराब     लोक नायक अस्पताल में बड़ी सर्जरी के लिए 2-3 महीने और बर्न व प्लास्टिक सर्जरी के लिए 6-8 महीने का इंतजार करना पड़ा।     चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय (CNBC) में पीडियाट्रिक सर्जरी के लिए 12 महीने का इंतजार करना पड़ा।     CNBC, RGSSH और JSSH जैसे अस्पतालों में कई एक्स-रे, सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड मशीनें बेकार पड़ी रहीं। जरूरी सेवाओं की कमी और बदहाल मोहल्ला क्लीनिक-     27 अस्पतालों में से 14 में ICU सेवा उपलब्ध नहीं थी।     16 अस्पतालों में ब्लड बैंक की सुविधा नहीं थी।     8 अस्पतालों में ऑक्सीजन सप्लाई नहीं थी।     12 अस्पतालों में एंबुलेंस की सुविधा नहीं थी।     CATS एंबुलेंस भी जरूरी उपकरणों के बिना चलाई जा रही थीं। मोहल्ला क्लीनिकों की स्थिति भी खराब पाई गई     21 मोहल्ला क्लीनिकों में शौचालय नहीं थे।     15 क्लीनिकों में बिजली बैकअप की सुविधा नहीं थी।     6 क्लीनिकों में डॉक्टरों के लिए टेबल तक नहीं थी।     12 क्लीनिकों में दिव्यांगों के लिए कोई सुविधा नहीं थी। CAG रिपोर्ट ने दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत उजागर कर दी है। कोविड काल में सरकार द्वारा मिले फंड का सही इस्तेमाल नहीं करना, अस्पतालों में जरूरी सुविधाओं की भारी कमी, स्टाफ की भारी किल्लत और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। जनता के स्वास्थ्य से जुड़ी इस लापरवाही को लेकर अब सरकार को जवाब देना होगा। recent visitors 66

महोबा : कानपुर-सागर हाईवे पर भीषण हादसा, ट्रक की टक्कर से कार सवार महिला सहित चार की मौत, सभी मृतक भोपाल निवासी

भोपाल /महोबा  यूपी के महोबा में भीषण सड़क हादसे में महाकुंभ से लौटते 4 की मौत। यूपी के महोबा जिले में कानपुर-सागर राष्ट्रीय राजमार्ग पर शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे भीषण सड़क हादसा हो गया। इसमें महाकुंभ से श्रद्धालुओं को लेकर भोपाल को लौटती एक तेज रफ्तार ऑल्टो कार ट्रक के नीचे घुस गई।हादसे में 3 युवकों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। वहीं, कार सवार घायल महिला की जिला अस्पताल में उपचार दौरान मौत हो गई। पुलिस ने ट्रक को अपने कब्जे में लिया, जबकि चालक फरार हो गया। ट्रक में फंसी ऑल्टो जेसीबी की मदद से निकली महोबा में हुए भीषण सड़क हादसे में जान गंवाने वाले चारों लोग मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के निवासी थे। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हादसे के दौरान हुई टक्कर के बाद ट्रक कार को करीब 50 मीटर तक घसीटते हुए ले गया। मिली जानकारी के मुताबिक, भोपाल निवासी चारों लोग एक साथ कार से प्रयागराज महाकुंभ गए थे। शुक्रवार की सुबह ये लोग अल्टो कार से वापस लौटकर भोपाल जा रहे थे। रास्ते में कानपुर सागर हाईवे पर थाना कस्बा श्रीनगर के पास बने बरा नाला के पास तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी कार में टक्कर मार दी और इसे 50 मीटर तक घसीटता हुआ ले गया। नरेश नागर पुत्र सिद्धनाथ, अवधेश नागर पुत्र बाबूलाल निवासीगण हिनौती सड़क बैसरिया राेड भोपाल अन्य लोगों के साथ प्रयागराज महाकुंभ गए थे। शुक्रवार की सुबह ये लोग अल्टो कार से वापस लौटकर भोपाल जा रहे थे। रास्ते में कानपुर सागर हाईवे पर थाना कस्बा श्रीनगर के पास बने बरा नाला के पास तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी कार में टक्कर मार दी और इसे 50 मीटर तक घसीटता हुआ ले गया। ट्रक पुलिस के कब्जे में, चालक फरार     पुलिस ने ट्रक को कब्जे में ले लिया, जबकि उसका चालक फरार हो गया। शुरुआती जांच में सामने आया कि चालक को झपकी आने से कार गलत साइड में पहुंच गई जिससे टक्कर हो गई।     भोपाल के हिनौती सड़क बैसरिया राेड निवासी नरेश नागर पुत्र सिद्धनाथ, अवधेश नागर पुत्र बाबूलाल अन्य लोगों के साथ प्रयागराज महाकुंभ गए थे। शुक्रवार की सुबह सभी आल्टो कार से लौट रहे थे।     हादसे में नरेश नागर, अवधेश व चालक भूरा गुर्जर निवासी बरखेड़ी थाना नजीराबाद जिला भोपाल की मौके पर ही मौत हो गई। 23 वर्षीय पूजा नागर निवासी अरनिया माता थाना नीमच जिला राजगढ़ को गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया जहां उपचार दौरान उसने भी दम तोड़ दिया। तीन लोगों की मौके पर मौत हादसे में नरेश नागर, अवधेश व चालक भूरा गुर्जर निवासी बरखेड़ी थाना नजीराबाद जिला भोपाल की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि 23 वर्षीय पूजा नागर निवासी अरनिया माता थाना नीमच जिला राजगढ़ को गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया। यहां उपचार दौरान उसने भी दम तोड़ दिया। क्षतिग्रस्त कार को क्रेन मशीन से सड़क से अलग कराया गया। चालक को नींद आने की वजह से हुआ हादसा एसपी पलाश बंसल ने बताया क‍ि मौके पर तत्काल एंबुलेंस, पुलिस को भेजा गया था। अल्टो कार व ट्रक में भिड़ंत हुई है। इसमें चार यात्री सवार थे और चारों मप्र राज्य के निवासी थे। प्रथम दृष्टया पता चला है कि चालक को नींद आने के कारण यह दूसरे साइड में चले गए। जिससे यह दुर्घटना हुई। तीन लोगों की मौके पर मौत हो गई, जबकि महिला ने जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया। दिवंगत के स्वजन को सूचित कर दिया गया है। ट्रक को कब्जे में लेकर मुकदमा दर्ज कराकर अग्रिम कार्रवाई कराई जा रही है। चालक को झपकी आने से हुआ यह भीषण सड़क हादसा हादसे और हाईवे पर जाम लगने की सूचना मिलते ही एसपी पलाश बंसल ने मौके पर पहुंचे। एसपी ने मौके पर घटना की जानकारी ली। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर उनके स्वजन को सूचना दी है। एसपी पलाश बंसल ने बताया क‍ि मौके पर तत्काल एंबुलेंस, पुलिस को भेजा गया था। अल्टो कार व ट्रक में भिड़ंत हुई है। इसमें चार यात्री सवार थे और चारों मप्र राज्य के निवासी थे। प्रथम दृष्टया पता चला है कि चालक को नींद आने के कारण यह दूसरे साइड में चले गए। जिससे यह दुर्घटना हुई। तीन लोगों की मौके पर मौत हो गई, जबकि महिला ने जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया। दिवंगत के स्वजन को सूचित कर दिया गया है। ट्रक को कब्जे में लेकर मुकदमा दर्ज कराकर अग्रिम कार्रवाई कराई जा रही है। सड़क हादसे में पिता की मौत, बेटा गंभीर एक अन्य सड़क हादसे में महाशिवरात्रि के अवसर पर देवपूजा करने चिचोली थाना क्षेत्र के असाड़ी गांव आए हरदा जिले के निवासी पिता की सड़क हादसे में मौत हो गई जबकि बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार हरदा जिले के डहरिया गांव निवासी 68 वर्षीय भूरा पिता छन्नू अपने बेटे फूलचंद विश्वकर्मा के साथ अषाढ़ी में देवपूजा करने आए थे। पूजा के बाद बुधवार रात अपने गांव लौट रहे थे, तभी उनकी बाइक की दूसरी बाइक से भिड़ंत हो गई। हादसे में दोनों को गंभीर रूप से घायल अवस्था में चिचोली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां से प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें जिला अस्पताल बैतूल रेफर किया गया। जिला अस्पताल में उपचार के दौरान भूरा विश्वकर्मा की मौत हो गई। फूलचंद की हालत गंभीर होने पर उसे भोपाल रेफर कर दिया गया। दुर्घटना में दूसरी बाइक का चालक को भी गंभीर रूप से घायल होने पर भोपाल रेफर किया गया है। बताया जा रहा है कि वह कोमा में चला गया है। recent visitors 60

मुख्यमंत्री साय ने मनरेगा कार्यों को गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध रूप से पूरा करने के दिए निर्देश

रायपुर : ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मनरेगा की है महत्वपूर्ण भूमिका— मुख्यमंत्री साय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मनरेगा की है महत्वपूर्ण भूमिका— मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री साय ने मनरेगा कार्यों को गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध रूप से पूरा करने के दिए निर्देश मनरेगा को अन्य योजनाओं से जोड़कर ग्रामीण विकास की गति तेज करने पर दिया गया जोर रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज छत्तीसगढ़ ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद की बैठक विधानसभा परिसर स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय में संपन्न हुई। बैठक में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत चल रही परियोजनाओं की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य में मनरेगा कार्यों को सर्वोच्च गुणवत्ता और निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाए, ताकि अधिकतम ग्रामीण परिवारों को इस योजना का लाभ मिल सके। मुख्यमंत्री साय ने विशेष रूप से गांवों में धरसा पहुंच मार्ग निर्माण और अमृत सरोवर परियोजनाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए, जिससे ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूती मिले और जल संरक्षण को बढ़ावा मिले। मुख्यमंत्री साय ने बैठक में कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य केवल रोजगार देना नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों को आत्मनिर्भर बनाना है। मनरेगा के तहत चल रही योजनाओं को दीर्घकालिक दृष्टिकोण से लागू किया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए, ताकि यह योजना गरीबों के सशक्तिकरण में एक मजबूत आधार बने। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा मनरेगा को अन्य योजनाओं से जोड़कर ग्रामीण विकास की गति तेज करने पर जोर दिया जा रहा है। राज्य में मनरेगा के प्रभावशाली क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा बैठक में वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 की प्रगति, लेबर बजट 2025-26, योजना के प्रमुख इंडिकेटर्स और अभिसरण (कॉन्वर्जेंस) मॉडल पर गहन समीक्षा की गई। वर्ष 2019-20 से 2023-24 तक की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई। मनरेगा आयुक्त रजत बंसल ने जानकारी दी कि प्रदेश में कुल 38.52 लाख पंजीकृत परिवारों में से 24.89 लाख परिवारों को रोजगार प्रदान किया गया है।अमृत सरोवर योजना के तहत 2,902 जलाशयों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें से 1,095 स्वीकृत हो चुके हैं, 299 पूर्ण हो चुके हैं, और 472 पर कार्य प्रगति पर है। बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. बसवराजू एस, पी. दयानंद, राहुल भगत, मनरेगा आयुक्त रजत बंसल एवं छत्तीसगढ़ ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद के सदस्यगण उपस्थित थे। recent visitors 34

यूनियन कार्बाइड का कचरा आज 900 डिग्री के टेंपरेचर पर जलेगा, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए

पीथमपुर भोपाल के यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से पीथमपुर आया जहरीला कचरा आज सुबह 10 बजे से जलाया जाएगा। हाईकोर्ट के 18 फरवरी के निर्देश के बाद 27 तारीख से पीथमपुर की रामकी फैक्ट्री में रखे रासायनिक कचरे के निष्पादन के ट्रायल रन की तैयारी कल से ही शुरू कर दी गई थी। यहां पर 12 कंटेनर 1 जनवरी को भोपाल से पीथमपुर भेजे गए थे। इनमें विभिन्न प्रकार के अवशिष्ट मौजूद हैं। इसमें नेप्थॉल, सेवीन, रिएक्टर रेसिड्यू, पेस्टिसाइड रेसिड्यू, सेमी प्रोसैस्ड रेसिड्यू एक्सकैवेटेड सॉइल (मिट्टी) वहां की जो थी। तीन बार में जलाया जाएगा कचरा यहां मौजूद कंटेनरों में से पांच कंटेनर में रखे अवशिष्ट को आज स्टोरेज शेड में ले जाया जाएगा, जहां पांचों कंटेनर में से 10 टन प्रॉपर प्रोपोर्शन में मिलाया जाएगा। इसके बाद इसे इंसीनेटर में फीड करेंगे। फीड करने के पहले इसे टेंपरेचर में लाने के लिए 12 घंटे तक ब्लैक में चलाएंगे यानी इसमें अवशिष्ट नहीं डालेंगे। वहीं कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए उनको मास्क, गॉगल्स और हैंड ग्लव्स दिए गए हैं। 10 टन अवशेष जलाने में करीब 72 घंटे का समय लगेगा। कोर्ट ने तीन ट्रायल के लिए कहां है। पहला ट्रायल 10 टन का होगा, जिसके तहत काम किया जा रहा है। 10 टन का दूसरा ट्रायल 4 तारीख को होगा और 10 टन का तीसरा ट्रायल 10 तारीख को होगा। इसके लिए तीन फीड रेट डिसाइड की गई है। 135 किलोग्राम पर ऑवर, दूसरा 180 किलोग्राम पर ऑवर और तीसरा 270 किलोग्राम पर ऑवर, तीनों की स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट को भेजी जाएगी। 800-900 के टेंपरेचर पर जलेगा 10 टन कचरा एमपी पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड इंदौर के रीजनल ऑफिसर श्रीनिवास द्विवेदी ने बताया कि माननीय हाईकोर्ट ने जो निर्देश दिए थे कि 18 तारीख से यूनियन कार्बाइड का जो अवशिष्ट रखा हुआ है उसका डिस्पोजल शुरू किया जाए। इसके ट्रायल की कार्रवाई शुरू कर दी गई है, जिसके तहत जो कंटेनर आए थे उसमें जो अवशिष्ट थे। 5 कंटेनर खोले गए हैं, उसको स्टोरेज शेड में भंडारित किया जाएगा। पांचों कंटेनर में से 10 टन प्रॉपर प्रोपोर्शन से मिलाकर इंसीनेटर में फीड किया जाएगा। जब टेंपरेचर 850 हो जाएगा तब उसको फीड करेंगे। इंसीनेटर में प्रोसेस के समय प्राइमरी चेंबर में 850 प्लस माइनस 50 मतलब 800 से 900 के बीच में टेंपरेचर होना चाहिए। शुरू में वेस्ट डालने पर टेंपरेचर कम हो जाता है, जिसे 850 तक ले जाना होगा। सुबह 10 बजे से काम शुरू होगा। तीन दिन तक चलेगा कचरा जलाने का प्रोसेस फर्स्ट ट्रायल में तीन दिन कचरा जलाया जाएगा। इस दौरान उसमें मिट्टी निकलेगी। इसके बाद गैस आगे क्लीनिंग सेक्शन में जाएगी जो सेकेंडरी सेक्शन है। वहां टेंपरेचर 1100 से 1200 डिग्री सेंटीग्रेड होता है। वहां भी डीजल डालते हैं। वहां जलने के बाद आगे ब्लू गैस है, वह आगे बढ़ेगी जिसकी क्लीनिंग की प्रक्रिया है, जिसके तहत मल्टी साइक्लोन में जाएगी जहां बड़े पार्टिकल जो हैं वह नीचे चले जाएंगे। गैस आगे बढ़ेगी मल्टी साइक्लोन के पहले स्प्रे ड्रायर है, इससे गैस क्लीनिंग होगी। ड्राई स्क्रबर में वेट फिल्टर फिर वेट स्क्रबर इसके बाद चिमनी में जाएगा। ये पूरी प्रक्रिया करनी होगी। 4 और 10 मार्च को दूसरा और तीसरा ट्रायल इसमें प्राइमरी से ठोस अवशिष्ट की राख निकलेगी, दूसरा मल्टी साइक्लोन से ठोस अपशिष्ट निकलेगा, तीसरा ड्राई स्क्रबर से निकलेगा, चौथा वेट फिल्टर से सॉलिड पार्टिकल निकलेंगे, लास्ट में वेट स्क्रबर में पानी निकलेगा। जो सॉलिड पार्टिकल निकलेंगे। उनको स्टेबलाइज करके लैंडफिल में एक अलग सेल बनाकर उसमें डाला जाएगा और उसका डिस्पोजल होगा। कोर्ट ने तीन ट्रायल के लिए कहा है। पहला ट्रायल 10 टन का होगा जो 27 तारीख से चल रहा है, 10 टन का दूसरा ट्रायल 4 तारीख को होगा और 10 टन का तीसरा ट्रायल 10 तारीख को होगा। पिछला ट्रायल 90 टन पर किया गया था। गुरुवार रात से ड्राय रन शुरू हुआ गुरुवार दोपहर तीन से चार बजे के बीच पांच कंटेनर खोले गए। गुरुवार रात को इंसीनेटर का ड्राय रन शुरू कर उसका तापमान बढ़ाने का कार्य शुरू हो गया। यह प्रक्रिया शुक्रवार सुबह तक चलेगी। इस दौरान संयंत्र के प्रथम दहन कक्ष का तापमान कचरा जलाने के लिए निर्धारित 850 से 900 डिग्री सेल्सियस व दूसरे दहन कक्ष का तापमान 1100 से 1200 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचाया जाएगा। इसके बाद कचरे को भस्मक संयंत्र में डाला जाएगा। सुप्रीम कोर्ट की रोक नहीं यूनियन कार्बाइड का जहरीला कचरा धार जिले के पीथमपुर में ही जलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कचरा जलाने पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया है। गुरुवार सुबह हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता चाहें तो इस संबंध में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के समक्ष आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार के उस जवाब को भी रिकार्ड पर ले लिया है, जिसमें कहा है कि कचरा जलाने के दौरान सभी नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। जवाब में कचरा जलाने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया, सावधानियां व हादसे की आशंका के चलते व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम इस बीच, पीथमपुर में कचरा जलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता चिन्मय मिश्र ने दायर की थी। इसमें कहा था कि पर्यावरण और स्वास्थ्य नियमों का पालन किए बगैर जहरीला कचरा जलाने की तैयारी की गई है। सरकार ने पेश कर दिया जवाब 17 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से कहा था कि वह बताए कि कचरा जलाने के दौरान कोई हादसा होता है, तो इससे निपटने के उसके पास क्या इंतजाम हैं। गुरुवार को सरकार ने जवाब पेश कर दिया। इसे रिकार्ड पर लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिका निराकृत कर दी। चिन्मय मिश्र ने कहा कि फैसले का अध्ययन करने के बाद हाई कोर्ट में याचिका दायर करने की संभावना तलाशेंगे। recent visitors 59

मप्र का वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट चार लाख करोड़ रुपये से अधिक का रहेगा, 12 मार्च को होगा पेश

भोपाल मध्य प्रदेश का वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट 12 मार्च को विधानसभा में प्रस्तुत होगा। यह चार लाख करोड़ रुपये से अधिक का रहेगा। इसमें फोकस प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्राथमिकता वाली चार जातियों गरीब, किसान, महिला एवं युवा पर रहेगा।सिंहस्थ के लिए विशेष बजट प्रविधान किए जाएंगे तो सरकार पूंजीगत व्यय और बढ़ाकर 70 हजार करोड़ रुपये से अधिक कर सकती है। विधानसभा का बजट सत्र 10 मार्च को राज्यपाल मंगुभाई पटेल के अभिभाषण से प्रारंभ होगा। 11 मार्च को आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत किया जाएगा।   डबल इंजन की सरकार डबल इंजन की सरकार का लाभ मध्य प्रदेश को लगातार मिल रहा है। आम बजट में डेढ़ लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रविधान राज्य के लिए किए गए हैं। एक लाख 11 हजार 661 करोड़ रुपये केंद्रीय करों में हिस्सा मिलेगा तो सहायता अनुदान 45 हजार करोड़ रुपये से अधिक मिलने का अनुमान है। इस हिसाब से देखा जाए तो वर्ष 2024-25 की तुलना में वर्ष 2025-26 में 15, 908 करोड़ रुपये अधिक मिलने की संभावना है। इसके आधार पर राज्य सरकार ने अपने बजट का खाका खींचा है। इन लोगों को ध्यान में रखा जाएगा सूत्रों के अनुसार गरीब कल्याण, महिला सशक्तीकरण, युवा कल्याण और किसानों के हित में प्रविधान किए जाएंगे। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आवास निर्माण के लिए बड़ा वित्तीय प्रविधान ग्रामीण विकास, नगरीय विकास, जनजातीय कार्य और अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के बजट में रखा जाएगा। भोपाल में कन्वेंशन सेंटर बनाने की योजना औद्योगिक विकास के लिए 18 नीतियों के अंतर्गत उद्यमियों को जो विशेष प्रोत्साहन देने का वादा किया गया है, उसकी पूर्ति के लिए प्रविधान होंगे तो भोपाल में एक बड़ा कन्वेंशन सेंटर बनाने की योजना प्रस्तावित की जाएगी। अधोसंरचना निर्माण की विभिन्न परियोजनाओं को गति देने के लिए सरकार इस बार भी पूंजीगत व्यय बढ़ाएगी। यह 70 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। 15 लाख करोड़ रुपये तक हो सकता है राज्य सकल घरेलू उत्पाद 11 मार्च को सरकार आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत करेगी। इसमें वर्ष 2024-25 में राज्य सकल घरेलू उत्पाद की स्थिति, राज्य की विकास दर, प्रति व्यक्ति आय से लेकर विभिन्न क्षेत्रों में राज्य की स्थिति से अवगत कराया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि राज्य सकल घरेलू उत्पाद 15 लाख करोड़ रुपये के आसपास हो सकता है। यह वित्तीय वर्ष 2023-24 में 13 लाख 63 हजार करोड़ रुपये रहा है। कृतज्ञता ज्ञापन पर एक दिन होगी चर्चा नौ दिवसीय सत्र को देखते हुए राज्यपाल के अभिभाषण को लेकर सरकार की ओर से प्रस्तुत होने पर कृतज्ञता ज्ञापन पर एक दिन चर्चा कराई जा सकती है। recent visitors 29