बड़ा खुलासा: ULFA उग्रवादियों को ट्रेनिंग देकर असम को दहलाने की साजिश

ढाका पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई बांग्लादेश की जमीन का इस्तेमाल कर भारत में अशांति फैलाना चाहती है। आईएसआई ने भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र को अस्थिर करने की कोशिश के तहत असम के उग्रवादी संगठन उल्फा के ट्रेनिंग कैंप दोबारा खोलने की तैयारी की है। आईएसआई के अधिकारियों ने कथित तौर पर उल्फा नेता परेश बरुआ से भी मुलाकात की है, जो हाल ही में बांग्लादेश पहुंचा है। द ट्रिब्यून ने सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में ये दावा किया है। रिपोर्ट कहती है कि बांग्लादेश बॉर्डर पर आईएसआई के लोग उल्फा के ट्रेनिंग कैंप खोल रहे हैं। खुफिया सूत्रों के अनुसार, असम और पूर्वोत्तर राज्यों के पास बांग्लादेश में कुछ ट्रेनिंग कैंप खोले जा चुके हैं। ये कैंप पहले भी सक्रिय थे लेकिन शेख हसीना के समय बंद कर दिए गए थे। बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच हसीना बीते साल 5 अगस्त को देश छोड़कर चली गईं। उनके बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने कार्यभार संभाला है। यूनुस सरकार में आईएसआई को बांग्लादेश में फिर से एंट्री मिल गई है और उसने इन कैंपों को एक्टिव कर दिया है। यह भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र को अस्थिर करने की बड़ी साजिश का हिस्सा है। बरुआ की सजा भी घटाई गई यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (ULFA) भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में सक्रिय उग्रवादी संगठन हैं। यह सशस्त्र संघर्ष के जरिए असम को एक स्वतन्त्र देश बनाने की बात कहता है। सूत्रों का कहना है कि इस गुट का सबसे अहम चेहरा परेश बरुआ अब बांग्लादेश में हैं। बांग्लादेश के कोर्ट ने पिछले महीने बरुआ की उम्रकैद की सजा को भी घटाकर 14 साल कर दिया। बरुआ का नाम भारत की NIA की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल है। खुफिया एजेंसियों को लगता है कि बांग्लादेश में हालिया घटनाक्रम को देखते हुए बरुआ जल्द ही दोषमुक्त हो सकता है। इसके बाद पूर्वोत्तर के बारे में उसकी गहरी जानकारी का इस्तेमाल आईएसआई क्षेत्र को अस्थिर करने के लिए कर सकती है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने हाल ही में इस ओर इशारा करते हुए उम्मीद जताई थी कि निर्वासन में रह रहे बरुआ अपने गृह राज्य को अस्थिर नहीं करेंगे। भारतीय सुरक्षाबलों ने हाल ही में बांग्लादेश सीमा पार से अरबी, उर्दू और बंगाली में वायरलेस संचार को इंटरसेप्ट किए जाने का दावा किया था। इससे पश्चिम बंगाल की सीमा से लगे क्षेत्रों में ISI की मौजूदगी को लेकर चिंताएं पैदा हुई हैं। यह स्थिति भारत की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। सुरक्षाबलों ने हलिया समय में सीमा पर सुरक्षा भी बढ़ा दी है। recent visitors 53

यूनिवर्सल पेंशन स्कीम के तहत 60 वर्ष की आयु के बाद पेंशन मिलेगी, मोदी सरकार लाने जा रही है स्कीम

नई दिल्ली केंद्र की मोदी सरकार अब देश में यूनिवर्सल पेंशन स्कीम लाने की तैयारी कर रही है। यह योजना लोगों को अपनी इच्छा से योगदान करने और रिटायरमेंट के बाद पेंशन  का फायदा लेने की सुविधा देगी। बताया जा रहा है कि इस स्कीम का फायदा असंगठित सेक्टर  में काम करने वाले लोग भी उठा सकेंगे। सभी लोगों को मिलेगा लाभ! यूनिवर्सल पेंशन स्कीम के तहत 60 वर्ष की आयु के बाद पेंशन मिलेगी। यह पेंशन योजना सभी नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से बनाई जा रही है, जिसमें असंगठित क्षेत्र के श्रमिक, व्यापारी, स्व-रोजगार करने वाले व्यक्ति और 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोग शामिल होंगे। हालांकि यह नई पेंशन स्कीम में कंट्रिब्यूशन स्वैच्छिक आधार पर होगा, इसमें सरकार अपनी तरफ से कोई कंट्रिब्यूशन नहीं करेगी। मौजूदा योजनाओं को किया जाएगा मर्ज!   मिडिया रिपोर्ट के अनुसार, श्रम और रोजगार मंत्रालय ने इस प्रस्तावित समग्र योजना  पर विचार-विमर्श शुरू कर दिया है, जो मौजूदा पेंशन योजनाओं  को एकीकृत करने की दिशा में बढ़ेगी। वहीं सरकार प्रधान मंत्री श्रम योगी मानधन योजना, राष्ट्रीय पेंशन योजना  और अटल पेंशन योजना जैसी मौजूदा योजनाओं को इस नई योजना में मर्ज करने पर विचार कर रही है। दरअसल, इन योजनाओं में वर्तमान में 55 से 200 रुपए तक के योगदान पर 3,000 रुपए की मासिक पेंशन मिलती है, जिसमें सरकार भी योगदान करती है। सामाजिक सुरक्षा प्रदान करेगी यह योजना विशेषज्ञों का कहना है कि आबादी का बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र में काम करता है। वह अपना कमाई का ज्यादा हिस्सी खर्च देता है और भविष्य के लिए ज्यादा बचत नहीं कर पाता। ऐसे में उम्र बढ़ने पर उसे आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यह योजना लोगों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करेगी। recent visitors 67

6 किमी लंबे ‘सुपर प्रायोरिटी कॉरिडोर’ पर इंदौर में यात्री सेवा मार्च में शुरू

इंदौर  6 किमी लंबे 'सुपर प्रायोरिटी कॉरिडोर' पर इंदौर में यात्री सेवा शुरू हो सकती है। भोपाल में भी मेट्रो का काम चल रहा है, लेकिन कुछ देरी हो रही है। इस देरी का कारण भोपाल में प्रायोरिटी कॉरिडोर का विस्तार और कुछ ज़रूरी निर्माण कार्य हैं। दोनों शहरों में एक साथ मेट्रो का काम शुरू हुआ था, लेकिन इंदौर अब आगे निकल गया है। इंदौर में सुरक्षा जांच पूरी हो चुकी है, जबकि भोपाल में अभी कुछ महीने और लगेंगे। एक साथ शुरु हुआ था प्रोजेक्ट इंदौर और भोपाल, दोनों शहरों में मेट्रो परियोजना एक साथ शुरू हुई थी। लेकिन, अब इंदौर भोपाल से आगे निकल गया है। इंदौर में 6 किलोमीटर लंबे 'सुपर प्रायोरिटी कॉरिडोर' पर अगले महीने, यानी मार्च के आखिरी हफ़्ते में यात्री सेवा शुरू होने की उम्मीद है। इस कॉरिडोर पर पांच मेट्रो स्टेशन बनाए गए हैं। इंदौर मेट्रो ने सभी ज़रूरी परीक्षण और जांच पूरी कर ली हैं। कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी की टीम ने भी निरीक्षण कर लिया है। बस अब उनकी तरफ से NOC मिलना बाकी है। लखनऊ से बोगी लेकर आती है टीम अब उम्मीद है कि अगले महीने मेट्रो कंपनी पूरे ट्रैक का परीक्षण करवाने के लिए रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन (RDSO) को बुला सकती है। RDSO लखनऊ से अपनी तकनीकी उपकरणों के साथ एक पूरी बोगी में आता है। RDSO के परीक्षण के बाद ही मेट्रो सेवा शुरू करने की अनुमति मिलती है। भोपाल में भी तेजी पकड़ रहा काम भोपाल में भी मेट्रो का काम तेज़ी से चल रहा है, लेकिन अभी कुछ समय और लगेगा। भोपाल का प्रायोरिटी कॉरिडोर 6.22 किमी लंबा है, जो इंदौर से थोड़ा बड़ा है। शुरुआत में भोपाल में सुभाष नगर से रानी कमलापति स्टेशन तक ही मेट्रो चलाने की योजना थी। लेकिन बाद में इस कॉरिडोर को एम्स तक बढ़ा दिया गया। इसके अलावा, रेलवे लाइन के ऊपर पुल बनाने का काम भी जुड़ गया। इन वजहों से भोपाल मेट्रो में देरी हो रही है। अफसरों ने बताया कि मेट्रो शुरू होने में अभी 5 महीने और लग सकते हैं। एनओसी मिलते ही शुरु हो जाएगी सेवा भोपाल मेट्रो के एमडी एस. कृष्ण चैतन्य ने एक बयान में बताया कि इंदौर में बस CMRS की NOC का इंतज़ार है। NOC मिलते ही यात्री सेवा शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि भोपाल में प्रायोरिटी कॉरिडोर का सिविल वर्क लगभग पूरा होने वाला है। सुभाष नगर डिपो में भी अभी 20% काम बाकी है। सुभाष नगर से आरकेएमपी स्टेशन तक ट्रायल रन हो चुका है। आरकेएमपी से एम्स तक ट्रैक बनाने में लगभग 17 महीने लग गए। भोपाल में आरओबी की अनुमति में लगा समय इन 17 महीनों में सबसे ज़्यादा समय गणेश मंदिर के सामने रेलवे ओवर ब्रिज (ROB) की अनुमति लेने में लगा। इसमें लगभग 9 महीने लग गए। इस दौरान रेलवे से अनुमति लेनी पड़ी और स्टील का पुल बनाना पड़ा। recent visitors 44

विदिशा में गेहूं खरीदी की तारीख बदली, 15 की जगह 1 मार्च से शुरू होगी खरीदी, 200 केंद्र तैयार

भोपाल  समर्थन मूल्य पर गेहूं विक्रय की तैयारी में जुटे किसानों के लिए यह जरूरी खबर है. प्रदेश में एक मार्च से गेहूं खरीदी शुरू होने जा रही है, लेकिन दो मार्च से प्रदेश के कई जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. प्रदेश के पश्चिम-उत्तरी हिस्सों के किन इलाकों में बारिश होगी, आज देर शाम तक मौसम केंद्र इसका आकलन जारी करेगा. मौसम केंद्र से जारी अलर्ट के अनुसार मार्च के पहले सप्ताह में मध्यप्रदेश के पश्चिम-उत्तरी हिस्से में हल्की बारिश होने के आसार हैं. वेस्टर्न डिस्टरबेंस के एक्टिव होने से ऐसी स्थिति निर्मित हुई है. दो मार्च से नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव हो रहा है. फिलहाल प्रदेश में साइक्लोनिक सर्कुलेशन का असर है. मौसम केंद्र के अनुसार प्रदेश के किन-किन हिस्सों में बारिश के आसार हैं, इसका सटिक आकलन आज देर शाम और कल जारी किया जाएगा. बता दें कि प्रदेश में गर्मी की दस्तक ने आभास करा दिया है. इस बीच बारिश का अलर्ट होने से कुछ दिन और तापमान स्थिर रहने का अनुमान है. इधर, प्रदेश में गेहूं की फसल तैयार है. किसान एक मार्च से समर्थक मूल्य पर होने जा रही गेहूं खरीदी केंद्रों पर अपनी उपज लाने की तैयारी कर रहे हैं. इस साल सरकार ने 80 लाख टन गेहूं खरीदी का लक्ष्य तय किया है. केंद्र सरकार ने 2425 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य तय किया है. विदिशा में गेहूं खरीदी की तारीख बदली विदिशा जिले में इस साल गेहूं की सरकारी खरीदी में बदलाव किया गया है। हर साल 15 मार्च से शुरू होने वाली खरीदी इस बार 1 मार्च से ही शुरू होगी। किसानों के लिए पंजीयन की प्रक्रिया 31 मार्च तक चलेगी। जिले में अभी गेहूं की कटाई शुरू नहीं हुई है। मार्च के पहले सप्ताह में कटाई तेज होने की उम्मीद है। इसके बाद किसान अपनी उपज खरीदी केंद्रों पर ला सकेंगे। प्रशासन ने इस बार 200 खरीदी केंद्र स्थापित किए हैं। किसानों के पंजीयन के लिए 728 केंद्र बनाए गए हैं। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने खरीदी की तैयारियों की समीक्षा बैठक ली थी। उन्होंने सभी खरीदी केंद्रों पर बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रति क्विंटल इतने रुपए होगा दाम  1 मार्च से समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। इस साल किसानों को प्रति क्विंटल 2600 रुपये का भुगतान किया जाएगा, जिसमें केंद्र सरकार की ओर से 150 रुपए और राज्य सरकार की ओर से 175 रुपए का बोनस शामिल है। जिले में कुल 91 खरीदी केंद्र होंगे, जहां से गेहूं की खरीदी की जाएगी। इस वर्ष 20,955 किसानों ने समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए पंजीकरण करवाया है, और अब यह प्रक्रिया पूरी तरह से तैयार है। किसानों को उनके उत्पाद का सही मूल्य मिल सके, इसके लिए मध्य प्रदेश सरकार ने सभी कदम उठाए हैं। किसानों को उनकी मेहनत का सही भुगतान सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने खरीदी केंद्रों पर आवश्यक सुविधाओं का ध्यान रखा है, ताकि किसी भी किसान को परेशानी का सामना न करना पड़े। खरीदी केंद्रों पर होंगी शानदार सुविधाएं इंदौर कलेक्टर कार्यालय में आयोजित एक बैठक में इन तैयारियों का मूल्यांकन किया गया, जिसमें अपर कलेक्टर गौरव बेनल, जिला पंचायत सीईओ सिद्धार्थ जैन, और इंदौर विकास प्राधिकरण के सीईओ आर.पी. अहिरवार सहित अन्य अधिकारियों ने हिस्सा लिया। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी किसान को समस्याओं का सामना न करना पड़े और खरीदी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से चले। मार्च से शुरू होगी समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी, प्रति क्विंटल इतने रुपए होगा दाम इस बार के खरीदी अभियान में प्रशासन ने किसानों की सुविधा को सर्वोपरि रखा है। पिछले वर्षों में किसानों को लंबी कतारों और भुगतान में देरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा था, लेकिन इस बार सभी व्यवस्थाएं पहले से सुचारू की गई हैं। खरीदी केंद्रों पर तौल कांटे, बारदाना (बोरियां), पेयजल, बैठने की उचित व्यवस्था और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। निष्पक्ष और समय पर भुगतान मध्य प्रदेश सरकार ने कृषि उपज की खरीदी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए अहम कदम उठाए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को बिना किसी देरी के उनका उचित मूल्य देना है। अधिकारियों को यह स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि खरीदी केंद्रों पर कोई भी अनियमितता न हो और भुगतान निश्चित समय पर किसानों के खाते में किया जाए। इस साल गेहूं की खरीदी प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल और सुव्यवस्थित किया गया है, जिससे किसानों को दलालों और बिचौलियों से बचाया जा सके। अब सभी किसानों की उपज का पूरी तरह से रिकॉर्ड रखा जाएगा और उनके बैंक खातों में सीधे भुगतान किया जाएगा, ताकि किसी भी तरह की परेशानी से बचा जा सके। गेहूं की खरीदी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी     खरीदी की शुरुआत: 1 मार्च 2025     कुल खरीदी केंद्र: 91 (इंदौर जिले में)     समर्थन मूल्य (MSP): ₹2,600 प्रति क्विंटल     पंजीकृत किसान: 20,955     तौल और भुगतान: तुलाई और भुगतान की प्रक्रिया उसी दिन की जाएगी   recent visitors 64

2 लाख का इनाम जीतो, रील बनाने पर सरकार देगी पैसा, बस करना होगा ये काम

भोपाल मध्यप्रदेश मे अब राज्य सरकार रील बनाने पर युवाओं को पैसा देगा. रील प्रतियोगिता के तहत सरकार युवाओं को दो लाख रुपए तक की प्रोत्साहन राशि देगी. दरअसल, राज्य सरकार की तरफ से स्वच्छ एमपी रील प्रतियोगिता की घोषणा की गई है. इसके लिए प्रतिभागियों को 15 अप्रैल तक गांवों में कचरे से जुड़ी जागरूकता पर रील बनाकर सरकार द्वारा निर्धारित लिंक पर अपलोड करनी होगी. पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने प्रतियोगिता की घोषणा करते हुए कहा कि, प्रदेशभर से प्राप्त रीलों में से सर्वश्रेष्ठ पांच प्रतिभागियों को नकद पुरस्कार दिया जाएगा. नकद पुरस्कार दिया जाएगा आपको बता दें कि MP पंचायत एवं ग्रामीण विकास ने स्वच्छता पर रील बनाने वाले को इनाम देने का ऐलान किया है। 15 अप्रैल तक गांवों में कचरे से जुड़ी जागरूकता पर रील बनाना होगा। इस प्रतियोगिता के तहत राज्य सरकार युवाओं को 2  लाख रुपए तक की प्रोत्साहन राशि देगी। प्रदेशभर से प्राप्त रीलों में से सर्वश्रेष्ठ 5  प्रतिभागियों को नकद पुरस्कार दिया जाएगा। पहला पुरस्कार 2  लाख रुपए, दूसरा पुरस्कार 1 लाख रुपए, तीसरा पुरस्कार 50 हजार रुपए और 25-25 हजार रुपए के 2  सांत्वना पुरस्कार दिए जाएंगे। रील बनाकर भेज सकते हैं आपको बतादें कि इस संबंध में कैबिनेट मिनिस्टर प्रहलाद पटेल ने जानकारी देते हुए कहा कि गांवों में कचरा न फैले, इसके लिए कचरा प्रबंधन पर सभी को साथ मिलकर काम करना होगा। इस उद्देश्य से स्वच्छ एमपी रील प्रतियोगिता शुरू कर रही है। प्रतियोगिता के तहत नौजवान बेटे-बेटियां और अभिभावक स्वच्छता और अच्छी आदतों पर रील बनाकर भेज सकते हैं। मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि, गांवों में कचरा न फैले, इसके लिए कचरा प्रबंधन पर सभी को साथ मिलकर काम करना होगा. इस उद्देश्य से स्वच्छ एमपी रील प्रतियोगिता शुरू की जा रही है. इस प्रतियोगिता के तहत नौजवान बेटे-बेटियां और अभिभावक स्वच्छता और अच्छी आदतों पर रील बनाकर भेज सकते हैं.  रील बनाने पर मिलेगा इनाम प्रहलाद पटेल ने कहा इस पहल से न केवल प्रतिभागी आर्थिक पुरस्कार प्राप्त करेंगे, बल्कि समाज को जागरूक करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. इसलिए सभी से अनुरोध है कि, एक बार कैमरा उठाएं और स्वच्छता के संदेश के साथ रील बनाने के लिए आगे आएं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन की कल्पना की थी. इसी को साकार करने के लिए सरकार ने 'कचरा नहीं, यह कंचन है' का संदेश दिया है. यदि कचरे को सही तरीके से अलग किया जाए, तो यह आय का भी स्रोत बन सकता है.  इस लिंक पर करें अपलोड स्वच्छता के प्रति जागृति संबंधी रील बनाकर https://mp.mygov.in/task/swachh-madhya-pradesh-reel-making-contest… पर रजिस्ट्रेशन कर रील अपलोड करना होगा. इसमें प्रथम पुरस्कार की राशि 2 लाख रुपए है. मंत्री प्रहलाद पटेल से आग्रह किया है कि 'स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 'स्वच्छ एमपी रील प्रतियोगिता' में भाग लेकर http://mp.mygov.in पर 15 अप्रैल तक अपलोड करें. बता दें कि पहला पुरस्कार दो लाख रुपए, दूसरा पुरस्कार एक लाख रुपए और तीसरा पुरस्कार 50 हजार रुपए दिलाएगा. इसके अलावा 25-25 हजार रुपए के दो सांत्वना पुरस्कार दिए जाएंगे. recent visitors 33

करोड़ों EPFO के सब्सक्राइबर्स को लगेगा तगड़ा झटका! इंटरेस्ट रेट पर चल सकती है कैंची

नई दिल्ली  प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले करोड़ों लोगों को झटका लग सकता है। ईपीएफओ के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की आज  मीटिंग होगी जिसमें फाइनेंशियल ईयर 2025 के लिए पीएफ पर इंटरेस्ट रेट का फैसला होगा। बिजनस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक पीएफ के लिए ब्याज दर में कटौती की जा सकती है। इसकी वजह यह है कि स्टॉक मार्केट और बॉन्ड यील्ड से ईपीएफओ की कमाई में गिरावट आई है। साथ ही ज्यादा दावों का सेटलमेंट किया गया है। पिछली बार इसे बढ़ाकर 8.25% किया गया था। उससे पहले 2022-23 में पीएफ सब्सक्राइबर्स को 8.15% ब्याज दिया गया था। ईपीएफओ के बोर्ड की इनवेस्टमेंट कमेटी की पिछले हफ्ते बैठक हुई थी। इसमें ईपीएफओ के इनकम और एक्सपेंडीचर प्रोफाइल पर चर्चा हुई ताकि बोर्ड को ईपीएफ इंटरेस्ट रेट की सिफारिश की जा सके। बोर्ड में शामिल कर्मचारियों के एक प्रतिनिधि ने बताया कि इस साल इंटरेस्ट रेट पिछले साल के मुकाबले कम हो सकता है। इसकी वजह यह है कि हाल के महीनों में बॉन्ड यील्ट में गिरावट आई है। ऐसे में अगर ज्यादा ब्याज दिया जाता है तो फिर ईपीएफओ के पास कोई सरप्लस नहीं रह जाएगा। कब मिला सबसे ज्यादा ब्याज प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोगों की बेसिक सैलरी पर 12% की कटौती ईपीएफ खाते के लिए की जाती है। साथ ही कंपनी भी इतना ही पैसा कर्मचारी के पीएफ खाते में जमा करती है। ईपीएफओ के करीब सात करोड़ सब्सक्राइबर्स हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक EPFO ने 2024-25 में 5.08 करोड़ से ज्यादा क्लेम निपटाए हैं। इन क्लेम की कुल राशि ₹2.05 लाख करोड़ है। 2023-24 में 4.45 मिलियन क्लेम निपटाए गए थे, जिनकी कुल वैल्यू ₹1.82 लाख करोड़ थी। मतलब इस साल लोगों ने अपने PF अकाउंट से पैसा ज्यादा पैसा निकाला है। साथ ही स्टॉक मार्केट और बॉन्ड से ईपीएफओ को कम कमाई हुई है। 1952-53 में ईपीएफओ की ब्याज दर 3% थी। धीरे-धीरे बढ़ते हुए 1989-90 में यह 12% तक पहुंच गई। यह अब तक की सबसे ज्यादा ब्याज दर थी। साल 2000-01 तक यही ब्याज दर रही। उसके बाद 2001-02 में यह घटकर 9.5% हो गई। साल 2005-06 में यह और गिरकर 8.5% पर आ गई। फिर 2010-11 में ब्याज दर को बढ़ाकर 9.50% किया गया। लेकिन 2011-12 में इसे फिर से घटाकर 8.25% कर दिया गया। 2021-22 में यह सबसे कम 8.10% तक पहुंच गई थी। recent visitors 76

प्रदेश अध्यक्ष की लिस्ट में सबसे आगे नरोत्तम मिश्रा, वीडी शर्मा को रिपीट करने की कम है संभावना

भोपाल  मध्यप्रदेश बीजेपी में नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री अमित शाह और कैलाश विजयवर्गीय के बीच हुई गुप्त बैठक के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है। यह बैठक भोपाल स्टेट हैंगर पर हुई। चर्चा है कि मार्च के पहले हफ्ते में मध्य प्रदेश बीजेपी के नए अध्यक्ष की घोषणा हो सकती है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव भी 20 मार्च तक होने की संभावना है। इसके लिए आधे राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव होना जरूरी है। वीडी शर्मा के वापस आने का चांस कम वीडी शर्मा को संसद की याचिका समिति में जगह मिलने से उनके दोबारा अध्यक्ष बनने की संभावना कम हो गई है। बीजेपी के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि पार्टी ने शर्मा को यह पद देकर उन्हें अध्यक्ष पद से दूर रखने का संकेत दे दिया है। ऐसे में नरोत्तम मिश्रा की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है। वे इस रेस में सबसे आगे चल रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष बनने की लिस्ट में ये भी आगे अब लिस्ट में सबसे आगे नरोत्तम मिश्रा और कैलाश विजयवर्गीय के अलावा फग्गन सिंह कुलस्ते, सुमेर सिंह सोलंकी, हिमाद्री सिंह, दुर्गादास उइके, हेमंत खंडेलवाल, अर्चना चिटनिस, रामेश्वर शर्मा और आलोक शर्मा जैसे कई नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं। अंतिम चरण में है तलाश मध्यप्रदेश बीजेपी में नए कप्तान की तलाश अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। कई दिनों से टल रहे इस चुनाव को लेकर अब तेजी आ गई है। इसका सबसे बड़ा कारण केंद्रीय मंत्री अमित शाह और बीजेपी के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय के बीच हुई एक गुप्त बैठक है। यह बैठक भोपाल के स्टेट हैंगर पर हुई, जहां शाह ने विजयवर्गीय को फ़ोन करके बुलाया था। इसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। माना जा रहा है कि इस बैठक में नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर मंथन हुआ है। हालांकि, इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सबसे ज्यादा चर्चा में नरोत्तम मिश्रा इस गुप्त बैठक के बाद से ही पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम सबसे ज़्यादा चर्चा में है। सूत्रों की मानें तो विजयवर्गीय ने शाह के सामने नरोत्तम मिश्रा के नाम का प्रस्ताव रखा है। ऐसी भी खबरें हैं कि पार्टी कैलाश विजयवर्गीय को भी यह मौका दे सकती है। मार्च के पहले हफ्ते तक प्रदेश बीजेपी को नया अध्यक्ष मिल सकता है। राष्ट्रीय अध्यक्ष का भी होना है चुनाव बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव भी 20 मार्च तक होने की संभावना है। देश के लगभग 12 राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव हो चुके हैं। अभी भी 6 राज्यों में यह प्रक्रिया पूरी होनी बाकी है। इन्हीं चुनावों के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी। देश में कुल 18 राज्य हैं, जहां बीजेपी की सरकार है या फिर प्रमुख विपक्षी दल है। इसलिए 9 राज्यों में चुनाव पूरा होना अनिवार्य है। recent visitors 54