मुख्यमंत्री ने मऊगंज को दी स्टेडियम, सिविल अस्पताल, देवतालाब मंदिर के विकास की सौगात

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में चलाये जा रहे जनकल्याण अभियान में प्रत्येक पात्र हितग्राही को शासन की विकास योजनाओं से लाभांवित किया जायेगा। इसके लिये ग्राम पंचायत एवं नगरीय क्षेत्रों में वार्ड स्तर पर शिविर लगाकर पात्र नागरिकों को योजनाओं से जोड़ा जायेगा। उन्होंने कहा कि मऊगंज विकास की दौड़ में पीछे छूट गया था। हमारी सरकार ने मऊगंज को जिला बनाया और अब सरकार ही मऊगंज को विकास की सौगाते दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 5041 करोड़ की सीतापुर-हनुमना लिफ्ट इरिगेशन परियोजना का शिलान्यास किया। इस परियोजना से मऊगंज जिले के 400 से अधिक गांवों में सिंचाई की सुविधा मिलेगी। समारोह में 5175 करोड़ रुपए के 57 निर्माण कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण भी किया गया। मुख्यमंत्री ने खटखरी को नगर परिषद बनाने, दो सड़कों के उन्नयन, देवतालाब महाविद्यालय में 5 करोड़ रुपए की लागत से स्टेडियम के निर्माण, हनुमना में सिविल अस्पताल बनाने और देवतालाब शिव मंदिर में 5 करोड़ रुपए की लागत से विभिन्न विकास कार्य कराने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को मऊगंज में आयोजित जनकल्याण पर्व समारोह को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई शिक्षा नीति में सनातन मूल्यों को समाहित कर शिक्षा को नई दिशा दी है। सनातन मूल्यों का जो विरोध करेगा, देश उसके साथ खड़ा नहीं होगा मुख्यमंत्री ने कहा कि मऊगंज रीवा और सतना सहित पूरा विंध्य क्षेत्र सादगी, सरलता और सदभाव का क्षेत्र है। भगवान श्रीराम ने अपने जीवन के वनवास के 11 वर्ष इसी क्षेत्र के चित्रकूट में बिताये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए हर मांग पूरी की जाएगी। जन कल्याण अभियान में 16,100 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की कार्ययोजना पूरे प्रदेश के लिए बनाई गई है। इनमें से अकेले मऊगंज जिले को 5041 करोड़ रुपए की सौगात मिली है। पूरे क्षेत्र में विकास के कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। आज ही बाणसागर बांध के बीच स्थित मनोरम सरसी टापू का लोकार्पण हुआ है। इससे क्षेत्र में पर्यटन को गति मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश को दो नदी जोड़ों परियोजनाओं के लिए एक लाख 70 हजार करोड़ रुपए की मंजूरी देकर किसानों को बहुत बड़ी सौगात दी है। प्रधानमंत्री मोदी सच्चे अर्थों में आधुनिक भागीरथ हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के 60 लाख विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति की प्रथम किश्त के रूप में 332 करोड़ रुपए सिंगल क्लिक से जारी किए। मुख्यमंत्री ने पोषण आहार योजना के तहत दो गर्भवती और धात्री महिलाओं को पोषण आहार से युक्त अक्षय पात्र भेंट किए। मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं में हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण किया। कार्यक्रम स्थल पर मुख्यमंत्री का जनजातीय लोकनृत्य गुदुम बाजा के मधुर स्वरों से स्वागत किया गया। महिलाओं ने पुष्पवर्षा कर अपने लाड़ले मुख्यमंत्री की अगवानी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गौ-पूजन कर गौ-माता का सम्मान किया और गौ-संवर्धन का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने मऊगंज जिले के 100 से अधिक गायों की सेवा कर रहे सौखीलाल यादव को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने पुलिस बैण्ड की सराहना की। समारोह में मुख्यमंत्री को धातु निर्मित राधा-कृष्ण की प्रतिमा और डिजिटल गीता भेंट की गई। समारोह में विधायक देवतालाब एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम और विधायक मऊगंज प्रदीप पटेल ने मुख्यमंत्री का स्वागत कर क्षेत्र के विकास से संबंधित अपने सुझाव रखे। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, जिले के प्रभारी और पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल, विधायक मनगवां नरेन्द्र प्रजापति, विधायक त्योंथर सिद्धार्थ तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नीता कोल, कमिश्नर बी.एस. जामोद, आईजी एम.एस. सिकरवार, कलेक्टर अजय श्रीवास्तव, पुलिस अधीक्षक सुश्री रसना ठाकुर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती सपना त्रिपाठी, जनप्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे। recent visitors 43

तानसेन शताब्दी विशेष : एक शताब्दी से अक्षुण्ण परम्पराओं से सज रहा एक समारोह

भोपाल भारतीय शास्त्रीय संगीत की अनादि परम्परा के श्रेष्ठ कला मनीषी तानसेन को श्रद्धांजलि एवं स्वरांजलि देने के लिये ग्वालियर में मनाये जाने वाले तानसेन समारोह ने सौ वर्ष की आयु पूर्ण कर ली है। इस समारोह की सबसे बड़ी खूबी सर्वधर्म समभाव और इससे जुड़ी अक्षुण्ण परम्पराएं हैं। भारतीय संस्कृति में रची बसी गंगा-जमुनी तहजीब के सजीव दर्शन तानसेन समारोह में होते हैं। मुस्लिम समुदाय से बावस्ता देश के ख्यातिनाम संगीत साधक जब इस समारोह में भगवान कृष्ण व राम तथा नृत्य के देवता भगवान शिव की वंदना राग-रागिनियों में सजाकर प्रस्तुत करते हैं, तो साम्प्रदायिक सदभाव की सरिता बह उठती है। तानसेन समारोह का प्रारंभ शहनाई वादन से होता है। इसके बाद ढ़ोली बुआ महाराज की हरिकथा और फिर मीलाद शरीफ का गायन। सुर सम्राट तानसेन और प्रसिद्ध सूफी संत मोहम्मद गौस की मजार पर चादर पोशी भी होती है। ढ़ोली बुआ महाराज अपनी संगीतमयी हरिकथा के माध्यम से कहते हैं कि धर्म का मार्ग कोई भी हो, सभी ईश्वर तक ही पहुंचे हैं। उपनिषद् का भी मंत्र है "एकं सद् विप्र: बहुधा वदन्ति''। रियासतकाल में फरवरी 1924 में ग्वालियर में "उर्स तानसेन" के रूप में शुरू हुए इस समारोह का आगाज हरिकथा व मौलूद (मीलाद शरीफ) के साथ ही हुआ था। तब से अब तक उसी परम्परा के साथ तानसेन समारोह का आगाज होता आया है। इतनी सुदीर्घ परम्परा के उदाहरण बिरले ही हैं। तानसेन समारोह में नए आयाम तो जुड़े, पर पुरानी परम्पराएं अक्षुण्ण रही हैं। अब यह समारोह विश्व संगीत समागम का रूप ले चुका है। साथ ही समारोह की पूर्व संध्या पर उपशास्त्रीय संगीत का कार्यक्रम “गमक” का आयोजन भी होता है। इस साल शताब्दी समारोह होने से पूर्व रंग के रूप में मध्यप्रदेश के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों में भी संगीत सभाएं आयोजित की गईं। हर जाति, धर्म व सम्प्रदाय से ताल्लुक रखने वाले श्रेष्ठ व मूर्धन्य संगीत कला साधकों ने कभी न कभी इस आयोजन में अपनी प्रस्तुति दी है। शास्त्रीय गायक सुश्री असगरी बेगम, पं. भीमसेन जोशी व डागर बंधुओं से लेकर मशहूर शहनाई नवाज उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ, सरोद वादक अमजद अली खाँ, संतूर वादक पं. शिवकुमार शर्मा, मोहनवीणा वादक पं. विश्वमोहन भट्ट जैसे मूर्धन्य संगीत कलाकार इस समारोह में गान महर्षि तानसेन को स्वरांजलि देने आ चुके हैं। वर्ष 1989 में तानसेन समारोह में शिरकत करने आये भारत रत्न पंडित रविशंकर ने कहा था '"यहां एक जादू सा होता है, जिसमें प्रस्तुति देते समय एक सुखद रोमांच की अनुभूति होती है'"। एक बार मशहूर पखावज वादक पागलदास भी तानसेन के उर्स के मौके पर श्रद्धांजलि देने आये, लेकिन रेडियो के ग्रेडेड आर्टिस्ट नहीं होने के कारण समारोह में भाग नहीं ले सके। उन्होंने तानसेन की मजार पर ही बैठ कर पखावज का ऐसा अद्भुत वादन किया कि संगीत रसिक मुख्य समारोह से उठकर उनके समक्ष जा कर बैठ गये। "तानसेन संगीत समारोह" की यह भी खूबी रही है कि पहले राज्याश्रय एवं स्वाधीनता के बाद लोकतांत्रिक सरकार के प्रश्रय में आयोजित होने के बावजूद इस समारोह में सियासत के रंग कभी दिखाई नहीं दिये। यह समारोह तो सदैव भारतीय संगीत के विविध रंगों का साक्ष्य बना है। आधुनिक युग में शैक्षिक परिदृश्य से जहां गुरू शिष्य परम्परा लगभग ओझल हो गई है। भारतीय लोकाचार में समाहित इस महान परम्परा को संगीत कला के क्षेत्र में आज भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। तानसेन समारोह में भी भारत की इस विशिष्ट परम्परा के सजीव दर्शन होते हैं। संगीत सम्राट तानसेन की नगरी ग्वालियर के लिए कहावत प्रसिद्ध है कि यहां बच्चे रोते हैं, तो सुर में और पत्थर लुढ़कते है, तो ताल में। इस नगरी ने पुरातन काल से आज तक एक से बढकर एक संगीत प्रतिभायें संगीत संसार को दी हैं और संगीत सूर्य तानसेन इनमें सर्वोपरि हैं। लगभग 505 वर्ष पूर्व ग्वालियर जिले के बेहट गांव की माटी में मकरंद पाण्डे के घर जन्मा '"तन्ना मिसर'" उर्फ तनसुख अपने गुरू स्वामी हरिदास के ममतामयी अनुशासन में एक हीरे सा परिष्कार पाकर धन्य हो गया। तानसेन की आभा से तत्कालीन नरेश व सम्राट भी विस्मित थे और उनसे अपने दरबार की शोभा बढ़ाने के लिये निवेदन करते थे। गान महर्षि तानसेन की प्रतिभा से बादशाह अकबर भी स्तम्भित हुए बिना न रह सके। बादशाह की जिज्ञासा यह भी थी कि यदि तानसेन इतने श्रेष्ठ हैं तो उनके गुरू स्वामी हरिदास कैसे होंगे। यही जिज्ञासा बादशाह अकबर को वेश बदलकर बृन्दावन की कुंज-गलियों में खींच लाई थी। वैज्ञानिक शोधों में संगीत के प्रभाव से पशु, पक्षी, वनस्पति, फसलों आदि पर भी असर प्रमाणित हुआ है। तानसेन के समकालीन और अकबर के नवरत्नों में से एक अब्दुल रहीम खानखाना द्वारा रचित इस दोहे में कोई अतिश्योक्ति नहीं है कि "विधिना यह जिय जानि के शेषहि दिये न कान। धरा मेरू सब डोलि हैं, सुनि तानसेन की तान''। कुछ इतिहासकारों का मत है कि यह कालजयी दोहा सूरदास ने अपने मित्र तानसेन के सम्मान में रचा था। बहरहाल, यह दोहा किसी की भी रचना हो, पर इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह दोहा गान मनीषी तानसेन के उच्चकोटि के गायन को चरितार्थ करता है। आरंभ में तानसेन जब संगीत का ककहरा सीख रहे थे, तब ग्वालियर पर कलाप्रिय राजा मानसिंह तोमर का शासन था। तानसेन की संगीत शिक्षा भी इसी वातावरण में हुई। राजा मानसिंह तोमर की मृत्यु होने और विक्रमाजीत से ग्वालियर का राज्याधिकार छिन जाने के कारण यहां के संगीतज्ञों की मंडली बिखरने लगी। तब तानसेन भी वृंदावन चले गये और वहां उन्होनें स्वामी हरिदास जी एवं गोविन्द स्वामी से संगीत की उच्च शिक्षा प्राप्त की। संगीत शिक्षा में पारंगत होने के उपरांत वे शेरशाह सूरी के पुत्र दौलत खां के आश्रय में रहे। इसके पश्चात बांधवगढ़ (रीवा) के राजा रामचन्द्र की राजसभा में सम्मानजनक स्थान पर सुशोभित हुए। मुगल सम्राट अकबर ने तानसेन के गायन की प्रशंसा सुनकर उन्हें अपने दरबार में बुला लिया और अपने नवरत्नों में स्थान दिया। तानसेन प्रथम संगीत मनीषी थे, जिन्होंने राग मल्हार में कोमल गांधार और निषाद के दोनों रूपों का बखूबी प्रयोग किया। तानसेन को मियां की टोड़ी के आविष्कार का भी श्रेय है। कंठ संगीत में तानसेन अद्वितीय थे। अबुल फजल ने "आईन-ए-अकबरी'' में तानसेन के बारे … Read more

कांग्रेस ने किया विभिन्न समस्याओं को लेकर विधानसभा का घेराव करने का ऐलान, एकजुटता दिखाने की तैयारी

भोपाल मध्य प्रदेश में हुए उपचुनाव में विजयपुर में मिली जीत के बाद से कांग्रेस उत्साहित है और उसने विभिन्न समस्याओं को लेकर विधानसभा का घेराव करने का ऐलान किया है। इस घेराव के जरिए पार्टी अपनी एकजुटता और ताकत का प्रदर्शन करने की तैयारी कर रही है। राज्य का विधानसभा सत्र 16 दिसंबर से शुरू हो रहा है और इस सत्र के गहमागहमी वाले रहने के आसार हैं। कांग्रेस जहां विधानसभा के भीतर सत्ता पक्ष को घेरने की तैयारी में है तो वही सड़क पर भी उतरने का ऐलान किया जाता है। पार्टी 16 दिसंबर को विधानसभा का घेराव करने जा रही है। यह घेराव राज्य में बढ़ती मादक पदार्थ की तस्करी, जनजाति और अनुसूचित जाति वर्ग पर बढ़ते अत्याचार के अलावा महिला सुरक्षा को बड़ा मुद्दा बनाते हुए है। पार्टी के विधानसभा घेराव के ऐलान के बाद राज्य की सियासत में कांग्रेस की ओर से संभवत यह पहला अवसर है जब तमाम बड़े नेता कई दिनों से इस विरोध प्रदर्शन का समर्थन करने वाले बयान जारी करने के साथ सोशल मीडिया पर वीडियो भी जारी कर रहे हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह सहित अन्य नेता वीडियो जारी कर कार्यकर्ताओं से इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील कर रहे हैं। नेताओं द्वारा जारी किए गए बयानों में कहा गया है कि राज्य में मादक तस्करी लगातार बढ़ रही है। केंद्र सरकार और राज्य की सरकार को इन मामलों का पता ही नहीं होता जबकि गुजरात की पुलिस यहां आकर दबिश देकर तस्करी का खुलासा करती है। वही एक जनजाति वर्ग के विधायक को सिर्फ इसलिए गिरफ्तार कर लिया जाता है क्योंकि वह चिकित्सक के खिलाफ आवाज उठाता है। इतना ही नहीं महिलाओं और बालिकाओं के शोषण की घटनाएं लगातार बढ़ रही है। ज्ञात हो कि अभी हाल ही में दो विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव हुए। विजयपुर में कांग्रेस जीती तो बुधनी में भाजपा को जीत मिली। बुधनी में पिछले चुनाव के मुकाबले भाजपा का अंतर कम हुआ। इन नतीजों से कांग्रेस खासी उत्साहित है। वैसे तो कांग्रेस में खुले तौर पर गुटबाजी नजर आती है और गुटबाजी किसी से छुपी भी नहीं है। इस बार पार्टी एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रही है। यही कारण है कि तमाम नेता इस घेराव प्रदर्शन को सफल बनाने की अपील करने के साथ सरकार पर हमला बोल रहे हैं।   recent visitors 84

दूसरी छमाही में सरकारी पूंजीगत व्यय में सुधार की उम्मीद : रिपोर्ट

नईदिल्ली भारत में इंडस्ट्रियल गतिविधियों में चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में तेजी देखने को मिल सकती है। इसकी वजह उपभोग में इजाफा और निर्यात में वृद्धि होना एवं महंगाई में कमी आना है। यह जानकारी क्रिसिल द्वारा जारी रिपोर्ट में दी गई।   इस साल हो सकता है ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार रिपोर्ट में कहा गया कि अब तक अधिक महंगाई दर, बढ़ी हुई ब्याज दरों ने क्रेडिट वृद्धि दर को कम किया है। साथ ही इससे उपभोग रिकवरी भी प्रभावित हुई है। इसके अलावा रिपोर्ट में आगे कहा गया कि खाद्य महंगाई में कमी के संकेत मिले हैं। इसके कारण उपभोग बढ़ने की उम्मीद है और इस साल कृषि उत्पादन अच्छा होने के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार देखने को मिल सकता है। दूसरी छमाही में सरकारी पूंजीगत व्यय में सुधार की उम्मीद रिपोर्ट के मुताबिक, ऊंची ब्याज दरों के कारण शहरी अर्थव्यवस्था को कर्ज वृद्धि से मिलने वाले समर्थन में कमी का सामना करना पड़ रहा है। सरकार की ओर से कम व्यय का सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि पर मध्यम प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। हालांकि, इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में सरकारी पूंजीगत व्यय में सुधार की उम्मीद है, लेकिन पिछले वित्त वर्ष की तुलना में विकास दर धीमी रहने की संभावना है। निवेश की गति को बनाए रखने के लिए निजी निवेश में पुनरुद्धार काफी महत्वपूर्ण होगा।  महंगाई दर में गिरावट देखने को मिल सकती है रिपोर्ट में कहा गया कि इस साल वैश्विक व्यापार बढ़ने की उम्मीद है और इससे निर्यात वृद्धि को सहारा मिलेगा। हालांकि, वैश्विक अस्थिरताओं के कारण आपूर्ति श्रृंखला में दबाव का जोखिम बना हुआ है। निर्यात अगले साल अमेरिका-चीन टैरिफ वार की संभावना से उत्पन्न होने वाली अनिश्चितताओं से प्रभावित होने की संभावना है। क्रिसिल के मुताबिक, ऊंची ब्याज दरों और राजकोषीय समेकन से वित्त वर्ष 25 में जीडीपी विकास दर 6.8 प्रतिशत रहने की संभावना है, जो कि पिछले वित्त वर्ष में 8.2 प्रतिशत था।  खाद्य तेल की कीमतों पर नजर रखने की जरूरत रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई कि आने वाले हफ्तों में खाद्य पदार्थों की कीमतों में कमी आएगी। दिसंबर में जब खरीफ की फसल बाजार में आती है तो सब्जियों की कीमतें कम हो जाती हैं। पिछले साल का उच्च आधार भी महंगाई को कम करने में मदद करेगा। हालांकि, खाद्य तेल की कीमतों के दबाव पर नजर रखनी होगी। रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य मुद्रास्फीति में कमी आने के कारण आने वाले महीनों में महंगाई दर में गिरावट देखने को मिल सकती है। हमें उम्मीद है इस वित्त वर्ष में औसत महंगाई दर 4.6 प्रतिशत रह सकती है।   recent visitors 92

देश में कैंसर के मामलों में वृद्धि मुख्य रूप से जीवनशैली में बदलाव, पर्यावरणीय कारकों और बढ़ती उम्र की आबादी के कारण देखी जा रही: रिपोर्ट

मुंबई भारत में ऑन्कोलॉजी टेस्ट मार्केट (कैंसर डायग्नोस्टिक टेस्ट मार्केट) 2033 तक लगभग 2 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ने की उम्मीद है। आई डेटा और एनालिटिक्स कंपनी ग्लोबलडेटा की रिपोर्ट के अनुसार, देश में कैंसर के मामलों में वृद्धि मुख्य रूप से जीवनशैली में बदलाव, पर्यावरणीय कारकों और बढ़ती उम्र की आबादी के कारण देखी जा रही है। देश में कैंसर एक सामाजिक और स्वास्थ्य सेवा से जुड़ा बड़ा बोझ है दरअसल भारत में कैंसर एक सामाजिक और स्वास्थ्य सेवा से जुड़ा बड़ा बोझ है, जिससे एडवांस ऑन्कोलॉजी निदान और उपचार सेवाओं की मांग बढ़ रही है। हर साल 1 मिलियन से अधिक नए मामलों का निदान किया जाता है और हर साल लगभग 9,00,000 मौतें दर्ज की जाती हैं। रिसर्च से पता चलता है कि 2024 में, भारत एशिया-प्रशांत (एपीएसी) ऑन्कोलॉजी टेस्ट मार्केट का 3 प्रतिशत से अधिक हिस्सा होगा। लेकिन, इनोवेटिव समाधान विकसित करने और कटिंग-एज रिसर्च का समर्थन करने के प्रयासों में तेजी लाकर, देश अपनी आबादी और वैश्विक समुदायों दोनों की स्वास्थ्य सेवा आवश्यकताओं को तेजी से संबोधित करने की आकांक्षा रखता है। भारत में ऑन्कोलॉजी टेस्ट में कई चुनौतियां ग्लोबलडाटा में चिकित्सा उपकरण विश्लेषक श्रेया जैन ने कहा, “भारत में ऑन्कोलॉजी टेस्ट को पहुंच, सामर्थ्य और तकनीकी अपनाने से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। अपर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर और विशेषज्ञता के कारण, एआई-असिस्टेड निदान जैसी नई अप्रोच को अपनाना और इंटीग्रेट करना, सटीक चिकित्सा, थैरेपी को लेकर समस्या बनी हुई है।” कैलिब्रेटेड जीनोमिक टेस्ट, जोखिम के स्तर में सुधार कर सकते हैं जैन ने कहा, “भारतीय जनरेशन के अलग-अलग ग्रुप के लिए कैलिब्रेटेड जीनोमिक टेस्ट जैसे अनुकूलित निदान प्रारंभिक पहचान सटीकता को बढ़ा सकते हैं और जोखिम के स्तर में सुधार कर सकते हैं। इसी के साथ यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि ट्रीटमेंट भारतीय मरीजों के यूनिक जेनेटिक प्रोफाइल से जुड़ा हो। यह न केवल भारत में जीवित रहने की दर में सुधार करने में मदद करता है, बल्कि कैंसर बायोलॉजी की वैश्विक समझ में भी योगदान देता है।” राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम और आयुष्मान भारत योजना मार्केट रिसर्च फर्म ‘रिसर्चएंडमार्केट्सडॉटकॉम’ की एक हालिया रिपोर्ट से पता चला है कि भारत में कैंसर डायग्नोस्टिक टेस्ट मार्केट का भविष्य प्रवेश की इच्छुक कंपनियों के लिए आशाजनक बना हुआ है। यह सकारात्मक दृष्टिकोण राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम और आयुष्मान भारत योजना जैसी सरकारी पहल की वजह से बना हुआ है, जो कैंसर की रोकथाम, प्रारंभिक पहचान और उपचार पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही हैं। recent visitors 178

मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग परीक्षा: आज राज्य पात्रता परीक्षा, प्रदेशभर में बनाए गए 323 केंद्र

इंदौर मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) आज प्रदेशभर में राज्य पात्रता परीक्षा यानी सेट का आयोजन करेगा, इसके लिए एक दर्जन शहरों में परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। यहां 323 शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थी परीक्षा देंगे। उम्मीदवारों को प्रवेश पत्र पूर्व में जारी किए जा चुके हैं, जो आयोग की पोर्टल से डाउनलोड कर सकते है।   इंदौर में 70 हजार अभ्यर्थी देंगे परीक्षा सेट परीक्षा म्यूजिक, गणित, कम्प्युटर साइंस, रक्षा व रणनीतिक अध्ययन, अंग्रेजी, हिंदी, फिजिक्स, भूगोल, रसायन सहित 31 विषयों के लिए होगी। इंदौर में 27 हजार अभ्यर्थी यह परीक्षा देंगे, जिसके लिए शहर में 70 केंद्र बनाए गए हैं। वहीं, इंदौर सहित भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, सतना, सागर, उज्जैन, नर्मदापुरम, शहडोल, खरगोन, रतलाम में 323 केंद्र बनाए गए हैं। आयोग ने मार्च में विज्ञापन निकाला था, जिसमें 21 मार्च से 20 अप्रैल से आवेदन मांगवाए गए थे। लगभग 1 लाख 21 हजार अभ्यर्थियों ने परीक्षा फार्म भरे। 300 अंकों का होगा पेपर सेट आफलाइन पद्धति होगी, जो ओएमआर शीट आधारित होगी। परीक्षा एक ही सत्र में दोपहर 12 से 3 बजे तक करवाई जाएगी। प्रत्येक अभ्यर्थी को दो पेपर हल करना होंगे, जिसमें शिक्षण व शोध अभिवृत्ति और ऐच्छिक विषय रखा है। पहले पेपर में 50 और दूसरे पेपर में 100 प्रश्न होंगे। 300 अंक के दोनों पेपर होंगे। अभ्यर्थियों को तीन घंटे में 150 प्रश्न हल करना होंगे। ये सभी आब्जेक्टिव प्रश्न रहेंगे। केंद्रों पर 100-150 अभ्यर्थी होंगे। अधिकारियों के मुताबिक हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषा में पेपर होंगे। सही उत्तर पर अभ्यर्थियों को दो अंक दिए जाएंगे। गलत उत्तर पर नेगेटिव मार्किंग नहीं की जाएगी।   recent visitors 148

मृत बताकर पेंशन निरस्त करने वालो पर मुख्यमंत्री भजनलाल ने जताई नाराजगी, 5 सस्पेंड, 48 कर्मचारियों 17 सीसीए के नोटिस

जयपुर राजस्थान में मृत बताकर पेंशन निरस्त करने वाले ग्राम विकास अधिकारियों पर भजनलाल सरकार ने गाज गिरा दी है । इस मामले में मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद राजसमंद कलेक्टर ने 4 दोषी ग्राम विकास अधिकारियों को निलंबित कर दिया है, जबकि ब्यावर में एक दोषी कार्मिक को निलंबित किया गया है । वहीं अब तक कुल 48 सरकारी कर्मचारियों को 17 सीसीए के नोटिस थमाए गए है । सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग के निदेशक एवं संयुक्त शासन सचिव बचनेश कुमार अग्रवाल की तरफ से मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी गई एक रिपोर्ट से इस कार्रवाई की बात सामने आई है । आपको बता दे कि 2 दिसंबर 2024 को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग की समीक्षा बैठक में यह मामला सामने आया था। इस मामले पर मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों के सामने अपनी नाराजगी जाहिर की और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए । मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद राजसमंद और ब्यावर जिला कलेक्टर ने दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है । इसमें राजसमंद के 29 कार्मिको को आरोप पत्र जारी किए गए है । जबकि ब्यावर के 9 ग्राम विकास अधिकारियों, 5 खण्ड विकास अधिकारियों व 5 अन्य कार्मिकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इसके अलावा राजसमंद में 4 दोषी ग्राम विकास अधिकारियों और ब्यावर में एक कर्मचारी को निलंबित भी किया गया है । वहीं सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग ने इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति से बचने के लिए, सभी जिला कलेक्टरों को विभागीय पत्र जारी किए गए हैं। पत्र के जरिये यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया गया है कि भविष्य में किसी भी जीवित पेंशनधारी की पेंशन बिना वजह से नहीं रोकी जाए। साथ ही, पेंशनधारियों को समय पर उनकी पेंशन मिले, इसके लिए प्रशासन को सतर्क रहने के लिए भी कहा गया है। recent visitors 52