भोपाल में आज बनेगा वर्ल्ड रिकॉर्ड, 55 लाख सामाजिक सुरक्षा पेंशन हितग्राहियों के खाते में सीएम 334 करोड़ रुपये भेजेंगे

 भोपाल  मध्य प्रदेश में आज गीता जयंती पर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव अंतर्गत लाल परेड ग्राउंड में सुबह 10 बजे राज्य स्तरीय कार्यक्रम में पहली बार पांच हजार से अधिक आचार्यों द्वारा गीता के तृतीय अध्याय कर्म योग का सस्वर पाठ कर विश्व कीर्तिमान के रूप में दर्ज कराने की दावेदारी राज्य सरकार जताएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और पवित्र धर्मग्रंथ गीता की शिक्षा से प्रदेशवासियों के जीवन को आलोकित करने और सनातन संस्कृति से जोड़ने के लिए गीता जयंती पर बड़े स्तर पर गीता पाठ किया जा रहा है। भक्तिमय गीतों की प्रस्तुति होगी राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान श्रीमदभगवद पुराण और गौ एवं गोपाल चित्र प्रदर्शनी का संयोजन किया जाएगा। साथ ही साधो बैंड मुंबई द्वारा भक्तिमय गीतों की सुरमई प्रस्तुति दी जाएगी। मध्य प्रदेश में आ रहे पर्यटकों और आगंतुकों को गीता की महिमा से अवगत कराने के लिए प्रदेश के होटलों में श्रीमद् भगवद्गीता, वाल्मीकि रामायण और रामचरित मानस की एक-एक प्रति रखने की पहल भी की जाएगी। मोहन सरकार के कार्यकाल का एक वर्ष पूर्ण होने पर आज से मुख्यमंत्री जन-कल्याण पर्व और जन-कल्याण अभियान का शुभारंभ किया जाएगा। मुख्यमंत्री पर्व व अभियान का शुभारंभ करेंगे। लाल परेड मैदान की ओर कई मार्ग रहेंगे परिवर्तित बुधवार को लाल परेड मैदान में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान सुबह आठ बजे से कार्यक्रम स्थल के आसपास के कुछ मार्ग परिवर्तित रहेंगे। कार्यक्रम के दौरान रोशनपुरा चौराहा से गांधी पार्क, लालपरेड मैदान की ओर, डीबी सिटी तिराहे से जेल रोड, लिली चौराहे से जहांगीराबाद पर यातायात का काफी दबाव रहेगा। इसलिए टीटीनगर न्यू मार्केट से रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड की ओर जाने वाली मिनी बसें एवं बड़ी बसें लिंक रोड नंबर-एक से होते हुए बोर्ड ऑफिस चौराहा, सुभाष नगर आरओबी, बोगदापुल से होकर भारत टाकीज होते हुए अपने गंतव्य स्थान तक जा सकेंगी। रेलवे स्टेशन से आने वाली बसें होंगी डायवर्ट वहीं बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन से टीटी नगर की ओर आने वाली मिनी बसें एवं बड़ी बसें भारत टॉकीज से होते हुए पुल बोगदा, सुभाष नगर आरओबी, केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-एक, ईओडब्ल्यू आफिस के सामने, बीएसएनएल तिराहा, प्रेस कांप्लेक्स, बोर्ड ऑफिस चौराहे से होते हुए अपने गंतव्य स्थान तक जा सकेंगी। इसी तरह लोक परिवहन एवं अनुमति प्राप्त सभी प्रकार के वाहनों का प्रवेश लाल परेड की ओर आने वाले मार्गों डीबी सिटी तिराहे से जेल मुख्यालय रोटरी की ओर, लिली चौराहे से पुलिस मुख्यालय की ओर, रोशनपुरा से गांधी पार्क तिराहे की ओर पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। recent visitors 52

गीता जयंतीः सद्कर्म, स्व-धर्म और सच्चे कर्तव्य पथ की प्रेरणा

गीता जयंतीः सद्कर्म, स्व-धर्म और सच्चे कर्तव्य पथ की प्रेरणा         डॉ. मोहन यादव     आज गीता जयंती का अवसर अद्भुत और अलौकिक ऊर्जा से परिपूर्ण है। मध्यप्रदेश में पहली बार ऐतिहासिक अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। आप सभी को गीता जयंती की मंगलकामनाएं…।     यह हमारा सौभाग्य है कि 8 से 11 दिसंबर 2024 की अवधि में चलने वाले इस महोत्सव में हमें गीता के ज्ञान और इसके महत्व को जानने तथा व्यवहार में आत्मसात करने का अवसर मिला है। विरासत से विकास की संकल्‍पना के मूल विचार में सनातन परम्‍पराएं, मान्‍यताएं और उसके कल्‍याणकारी सामाजिक परिणाम रहे हैं। इसी क्रम में गीता जयंती के अवसर पर मध्‍यप्रदेश में अंतर्राष्‍ट्रीय गीता महोत्‍सव का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण के जीवन के विविध पक्षों और श्रीमद्भागवद गीता के सार्थक संदेशों से नागरिकों को अवगत करवाना है। सौभाग्य की बात है कि मध्यप्रदेश गीता के सस्वर पाठ का विश्व रिकार्ड स्थापित कर रहा है। इसी श्रृंखला में विद्यालयों में गीता पर केन्द्रित क्विज प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में लाखों विद्यार्थियों ने सहभागिता की। भगवान श्रीकृष्ण ने जीवन के रहस्य की जो बात श्रीमद्भगवद गीता में समझाई है वह हम सभी के लिये पाथेय के रूप में है जो व्यक्ति, समाज और राष्ट्र निर्माण के लिये प्रासंगिक है।     भगवान श्रीकृष्ण ने पांच हजार साल पहले महाभारत की युद्ध भूमि कुरूक्षेत्र में कौरवों और पांडवों के बीच अर्जुन को कर्मयोग की शिक्षा दी जिससे पवित्र गीता का अवतरण हुआ। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा जो बातें कही गईं वह आज भी सम-सामयिक है। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने जिस गीता भाष्य की रचना की थी उसे क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद, शहीद भगत सिंह, राजगुरु आदि क्रांतिवीर अपने पास रखते थे। गीता भाष्य से प्रेरणा लेकर क्रांतिकारियों ने देश की स्वतंत्रता के लिये संघर्ष किया। गीता हमारे लिये न केवल पवित्र ग्रंथ है बल्कि जीवन की सार्थकता सिद्ध करने का मार्ग भी है।     गीता का मध्यप्रदेश से गहरा संबंध है। भगवान श्रीकृष्ण विद्याध्ययन के लिये मध्यप्रदेश की उज्जैन नगरी आये थे। यहां महर्षि सांदीपनि आश्रम में उनकी शिक्षा-दीक्षा हुई थी, इसी धरती पर उन्हें सुदर्शन मिला। श्रीमद्भगवद गीता आज भी पूरे संसार के लिये एक अद्भुत ग्रंथ है। संसार के लगभग प्रत्येक देश ने अपनी स्वभाषा में गीता का अनुवाद किया और विश्वविद्यालयों ने शोध किया। व्यक्तित्व विकास की आधुनिक पुस्तकों में ऐसा कोई सूत्र नहीं जिसका वर्णन श्रीमद्भगवद गीता में न हो। श्रीमद्भगवद गीता भारतीय दर्शन और चिंतन का मूल आधार है, जो सत्कर्म के माध्‍यम से मनुष्‍य को अपने में ही दिव्‍यता का अनुभव करा देती है। यह समस्‍त मानव समाज को स्‍व-धर्म का आत्‍मबोध देती है और सच्‍चे कर्तव्‍य पथ की ओर प्रशस्‍त करती है।     मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की प्रेरणा से प्रदेश के प्रत्येक नगरीय निकाय में गीता भवन केन्द्र स्थापित किये जा रहे हैं। यह भवन गीता के ज्ञान को साझा करने का महत्वपूर्ण स्थान होगा। यहां होने वाले विचार-विमर्श से लोगों के जीवन और व्यवहार में बदलाव आयेगा। हमने प्रदेश के सभी विकासखण्डों में एक गांव को चयनित कर वृंदावन गांव के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इन गांवों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों और सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाया जायेगा। वृंदावन गांव में जहां एक ओर प्राचीन संस्कृति को पुष्पित और पल्लवित किया जायेगा, वहीं दूसरी ओर जैविक खेती और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दिया जायेगा।     रामायण और श्रीमद्भगवद गीता हमारी राष्ट्रीय धरोहर हैं। हमारी युवा पीढ़ी को इन धर्म ग्रंथों के बारे में जानना आवश्यक है। इनके ज्ञान से अपने व्यक्तित्व और भविष्य को परिष्कृत किया जा सकता है। भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेश करते हुए पाठ्यक्रमों में रामायण और गीता वैकल्पिक विषय के रूप में शामिल की गई हैं। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों को गीता का ज्ञान भी दिया जा रहा है, जो धरातल पर भी दिखाई दे रहा है। प्रदेश के स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के एक हाथ में श्रीमद्भगवद गीता है तो दूसरे हाथ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की पुस्तकें। यह बदलाव बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण से लेकर भविष्य निर्माण की महत्वपूर्ण कड़ी है।     श्रीमद्भगवद गीता में कुल 700 श्लोक हैं। इनमें 574 श्रीकृष्ण उवाच अर्थात् भगवान श्रीकृष्ण ने कुल 574 श्लोकों में जीवन का संदेश दिया है। व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र के साथ संपूर्ण प्रकृति और सृष्टि के जीवन के सभी विषय,हर समस्या का समाधान इन श्लोकों के सूत्रों में है। भगवान श्रीकृष्ण ने जीवन की सफलता केलिये अपने धर्म के पालन और एकाग्रता के साथ कर्मशीलता पर ही बल दिया है।                 कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।         मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥          अर्थात् तुम्हारा अधिकार केवल कर्म पर है, कर्म के फल पर नहीं… इसलिए फल की चिंता किये बिना कर्म को ही कर्तव्य मानकर कार्य करो, उसी पर तुम्हारा अधिकार है।     गीता के अध्याय दो के इस श्लोक में किसी व्यक्ति के जीवन की सफलता का ही नहीं, समाज और राष्ट्र के विकास का भी यही सूत्र है। मनुष्य को अपना पूरा ध्यान अपने कर्म और कर्तव्य पर ही लगाना चाहिए। यदि व्यक्ति का समर्पण कर्तव्य के प्रति है तो उससे कोई अनुचित कार्य नहीं होगा और यदि पूरी आयोजना के साथ कर्म आरंभ किया है तो उसकी शत-प्रतिशत सफलता निश्चित है तब क्यों परिणाम के प्रति चिंतित होना चाहिए।     मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि श्रीमद्भगवद गीता की प्रेरणा से मध्यप्रदेश ने अपनी विकास यात्रा आरंभ की है। मध्यप्रदेश सरकार का संकल्प है "विकास के साथ विरासत"। इसीलिए एक ओर जहां विकास के लिये बहुआयामी योजनाओं पर काम हो रहा है वहीं भावी पीढ़ी के निर्माण और उन्हें अपने कर्म-कर्तव्य की प्रेरणा देने के लिये विरासत को भी संजोया जा रहा है। मध्यप्रदेश के विभिन्न स्थानों में योगेश्वर और कर्मेश्वर भगवान श्रीकृष्ण की स्मृतियां बिखरी हुई हैं। उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण, महू के पास जानापाव में भगवान परशुराम से भेंट, धार जिले के अमझेरा में रुक्मणी वरण और शौर्य का प्रदर्शन आदि स्थानों में उनके स्मृति चिन्ह हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने श्रीकृष्ण पाथेय निर्माण करने … Read more

26 जनवरी 2025 तक चलेगा मुख्यमंत्री जनकल्याण अभियान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

गीता जयंती से आरंभ होगा जनकल्याण पर्व और मुख्यमंत्री जनकल्याण अभियान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव विभिन्न योजनाओं में पात्र हितग्राहियों को चिन्हित कर किया जायेगा लाभान्वित  : मुख्यमंत्री डॉ. यादव 26 जनवरी 2025 तक चलेगा मुख्यमंत्री जनकल्याण अभियान  : मुख्यमंत्री डॉ. यादव गरीब, युवा, किसान और महिलाओं पर केन्द्रित रहेंगे कार्यक्रम भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत 2047 के स्वप्न को साकार करने के लिये राज्य सरकार निरंतर प्रतिबद्धतापूर्वक कार्य कर रही है। प्रदेश सरकार एक वर्ष पूर्ण होने पर गीता जयंती के पावन पर 11 दिसम्बर से दो कार्यक्रम प्रारंभ किये जा रहे है। "जनकल्याण पर्व" 11 दिसम्बर से 26 दिसम्बर 2024 तक और 11 दिसम्बर 2024 से 26 जनवरी 2025 तक "मुख्यमंत्री जनकल्याण अभियान" चलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 11 दिसम्बर से 26 दिसम्बर आयोजित किये जा रहे जनकल्याण पर्व में विभिन्न विभागों की गतिविधियां, विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन के साथ जन-कल्याण के कार्य प्रमुखता से किये जायेंगे। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री जनकल्याण अभियान में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से वंचित नागरिकों को लाभान्वित करने के लिए मौके पर ही शिविर लगाकर जन समस्याओं का निराकरण किया जायेगा। इसमें केन्द्र और राज्य सरकार की 34 चिन्हित शत‌प्रतिशत सैचुरेशन की हितग्राही मूलक योजनाओं और 11 लक्ष्य आधारित योजनाओं के साथ विभिन्न विभागों से संबंधित 63 सेवाएं आमजन तक पहुँचाकर उन्हें लाभान्वित किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन कार्यक्रमों में आमजन की सहभागिता भी रहेगी। जन-कल्याण पर्व मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में 11 से 26 दिसम्बर 2024 तक मनाये जाने वाले मुख्यमंत्री जन-कल्याण पर्व में विभिन्न विकास गतिविधियाँ होंगी। पर्व का शुभारंभ 11 दिसम्बर को भोपाल में लाड़ली बहना योजना की राशि वितरण से किया जायेगा। साथ ही हजारों आचार्यों के द्वारा गीता का सस्वर पाठ कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड का दावा प्रस्तुत किया जायेगा। 12 दिसम्बर को अलीराजपुर जिले के चंद्रशेखर आजाद नगर (भाबरा) में सोंडवा माइक्रो सिंचाई परियोजना का भूमि-पूजन किया जायेगा। 13 दिसम्बर को भोपाल में सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा एक वर्ष की उपलब्धियों पर आधार प्रदर्शनी लगेगी। इसके अतिरिक्त भोपाल, सीहोर एवं रायसेन से युवाओं की रातापानी अभयारण्य तक बाइक रैली निकलेगी। भोपाल संभाग में 630 करोड़ रूपये से अधिक विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन होगा। 14 दिसम्बर को बच्चों को पोषण आहार किट‍वितरण (अक्षयपात्र) कार्यक्रम, तानसेन समारोह अंतर्गत सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा। ग्वालियर में कन्वेंशन सेंटर का लोकार्पण और महाराजा जीवाजी राव सिंधिया की मूर्ति का अनावरण होगा। युवा संवाद एवं विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का वितरण होगा। ग्वालियर संभाग में 242.26 करोड़ रूपये से अधिक विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन होगा। 15 दिसम्बर को उमरिया में गौ-शाला का भूमि-पूजन और जबलपुर में सरदार वल्लभ भाई पटेल की मूर्ति का अनावरण करेंगे। 16 दिसम्बर को वृहद युवा संवाद (स्व-रोजगार, रोजगार केन्द्रित कार्यक्रम), पुलिस बैण्ड द्वारा प्रस्तुतिकरण होगा। 17 दिसम्बर को वन मेले के शुभारंभ के साथ पार्वती-कालीसिंध नदी जोड़ो परियोजना का शुभारंभ भी किया जायेगा। 18 दिसम्बर को शहडोल में साधु-संतों के साथ संवाद का आयोजन किया जायेगा। शहडोल संभाग 477.39 करोड़ रूपये से अधिक के विकास कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण होगा। 19 दिसम्बर को बैतूल में राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के समूहों और प्रधानमंत्री स्व-निधि योजना के हितग्राहियों का सम्मेलन होगा। नर्मदापुरम संभाग में 151 करोड़ रूपये से अधिक विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन होगा। जनकल्याण पर्व में 20 दिसम्बर को इंदौर में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर यूनिवर्सिटी इंदौर का दीक्षांत समारोह होगा। साथ ही इंदौर संभाग के 10 हजार 474 करोड़ रूपये से अधिक विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन होगा। इसी दिन खण्डवा में फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट का लोकार्पण और खण्डवा में अन्य विकास कार्यों का भूमि-पूजन और लोकार्पण होगा। 21 दिसम्बर को उज्जैन के डोंगला वैद्यशाला का भ्रमण आईटीआई उज्जैन का भूमि-पूजन और उज्जैन संभाग में 3 हजार 361 करोड़ रूपये का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन होगा। 22 दिसम्बर को खेल प्रोत्साहन कार्यक्रम में खिलाड़ियों को किट वितरण, खिलाड़ियों का सम्मान एव अन्य खेल प्रोत्साहन की गतिविधियां होगी। 24 दिसम्बर को विभिन्न योजनाओं में हितलाभ वितरण अंतर्गत पोषण आहार की राशि का वितरण एवं गैस सिलेण्डर सब्सिडी का वितरण किया जायेगा। इसके साथ सागर संभाग में एक हजार 146 करोड़ रूपये से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन होगा। इस दिन तालाब सोंदर्यीकरण का लोकार्पण भी होगा। जनकल्याण पर्व में 25 दिसम्बर को भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर सुशासन दिवस कार्यक्रम होगा। पचमढ़ी में चिंतन शिविर का आयोजन होगा। साथ ही राजा भभूत सिंह स्मृति में पचमढ़ी में ही केबिनेट बैठक होगी। जनकल्याण पर्व के आखरी दिन 26 दिसम्बर को भोपाल के रवीन्द्र भवन में छात्र-छात्राओं से संवाद होगा।   recent visitors 31

सियाराम बाबा ने आज त्यागी देह, 100 साल से अधिक आयु के थे, आज शाम को निकलेगा डोला

खरगोन निमाड़ के संत सियाराम बाबा ने आज बुधवार को मोक्षदा एकादशी पर सुबह 6 बजकर 10 मिनट पर सुबह देह त्याग दी है। वे कुछ दिनों से बीमार थे, आश्रम में ही उनका इलाज चल रहा था। रात को उनकी हालत काफी कमजोर हो रही थी और उन्होंने कुछ भी नहीं खाया था। उनके निधन की खबर मिलते ही खरगोन के भट्यान स्थित आश्रम में भक्तों की भीड़ लग गई। दोपहर तीन बजे उनका डोला निकलेगा। रात को उनकी हालत काफी कमजोर हो रही थी और उन्होंने कुछ भी नहीं खाया था। उनके निधन की खबर मिलते ही खरगोन के भट्यान स्थित आश्रम में भक्तों की भीड़ लग गई। दोपहर तीन बजे उनका डोला निकलेगा। उनके अंत्येष्टी के लिए सेवादारों ने चंदन की लकड़ी की व्यवस्था की है। बीते तीन दिन से आश्रम में एकत्र भक्त उनके स्वास्थ्य के लिए जाप कर रहे थे और भजन गा रहे थे। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश के बाद डाक्टरों की टीम उनके स्वास्थ्य पर लगातार निगरानी रखे हुए थे। आज शाम को सीएम यादव बाबा से मुलाकात करने वाले थे, लेकिन अब वे उनके अंतिम दर्शन के लिए आ सकते हैं। शाम को नर्मदा किनारे होगी अंत्येष्टी सियाराम बाबा की अंत्येष्टी बुधवार शाम को आश्रम के समीप नर्मदा नदी किनारे की जाएगी। उनके निधन की खबर के बाद बड़ी संख्या में भक्तों के आश्रम पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। सीएम मोहन यादव की बाबा के अंतिम दर्शन के लिए  आएंगे। बता दें कि बाबा को निमोनिया हो गया था, लेकिन वे अस्पताल में रहने के बजाए आश्रम में रहकर अपने भक्तों से मिलना चाहते थे। इस कारण चिकित्सकों ने उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया था। 12 वर्षों तक मौन धारण किया संत सियाराम बाबा ने नर्मदा किनारे अपने आश्रम बनाया। उनकी उम्र 100 साल से ज्यादा थी। बाबा ने बारह वर्षों तक मौन भी धारण कर रखा था। जो भक्त आश्रम में उनसे मिलने आता है और ज्यादा दान देना चाहता थे तो वे इनकार कर देते थे। वे सिर्फ दस रुपये का नोट ही लेते थे। उस धनराशि का उपयोग भी वे आश्रम से जुड़े कामों में लगा देते थे। बाबा ने नर्मदा नदी के किनारे एक पेड़ के नीचे तपस्या की थी और बारह वर्षों तक मौन रहकर अपनी साधना पूरी की थी। मौन व्रत तोड़ने के बाद उन्होंने पहला शब्द सियाराम बाबा कहा तो भक्त उन्हें उसी नाम से पुकारने लगे। हर माह हजारों भक्त उनके आश्रम में आते है। बाबा लगातार करते थे रामायण पाठ सियाराम बाबा अपनी दिनचर्या में लगातार रामायण पाठ करते रहते थे। भक्तों के अनुसार वे 21 घंटों तक रामायण का पाठ करते थे। 95 साल की आयु में उन्हें चश्मा भी नहीं लगा था। भक्तों के अनुसार उन्होंने सियाराम बाबा को हमेशा लंगोट में ही देखा है। सर्दी, गर्मी या बरसात वे लंगोट के अलावा कोई कपड़े नहीं पहनते थे। गुजरात के भावनगर से आए थे बाबा का जन्म 1933 में गुजरात के भावनगर में हुआ था। 17 साल की उम्र में उन्होंने आध्यात्मिक मार्ग पर चलने का फैसला किया था। उन्होंने कई सालों तक गुरु के साथ पढ़ाई की और तीर्थ भ्रमण किया। वे 1962 में भट्याण आए थे। यहां उन्होंने एक पेड़ के नीचे मौन रहकर कठोर तपस्या की। जब उनकी साधना पूरी हुई तो उन्होंने 'सियाराम' का उच्चारण किया, जिसके बाद से ही वे सियाराम बाबा के नाम से जाने जाते हैं। वे भगवान हनुमान के परम भक्त हैं। ऐसी थी बाबा की दिनचर्या आश्रम पर मौजूद अन्य सेवादारों ने बताया कि उनकी दिनचर्या भगवान राम व मां नर्मदा की भक्ति से शुरू होकर यही खत्म होती थी। बाबा प्रतिदिन रामायण पाठ का पाठ करते और आश्रम पर आने वाले श्रद्धालुओं को स्वयं के हाथों से बनी चाय प्रसादी के रूप में वितरित करते थे। समीपस्थ ग्राम सामेड़ा के रामेश्वर सिसोदिया ने बताया कि बाबा की वर्तमान आयु लगभग 95 वर्ष है। बाबा के लिए गांव से पांच छह घरों से भोजन का टिफिन आता था, जिसे बाबा एक पात्र में मिलाकर लेते थे। खुद की जरूरत के अनुसार भोजन निकाल कर बचा भोजन पशु-पक्षियों में वितरित कर देते थे। मंदिरों में दान किए करोड़ों रुपये ग्राम भट्टयाण के सरपंच भूराजी बिरले ने बताया कि बाबा प्रत्येक श्रद्धालु से मात्र 10 रुपये दान स्वरूप लेते थे। बाबा ने आश्रम के प्रभावित डूब क्षेत्र हिस्से के मिले मुआवजे के दो करोड़ 58 लाख रुपये क्षेत्र के प्रसिद्ध तीर्थ स्थान नागलवाड़ी मंदिर में दान किए थे। वही लगभग 20 लाख रुपये व चांदी का छत्र जाम घाट स्थित पार्वती माता मंदिर में दान किया। आश्रम से नर्मदा तक बनाया घाट भी सियाराम बाबा ने लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से बनवाया था।   recent visitors 28

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद के निर्णय, प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पी.एम. उषा) संचालन की स्वीकृति

खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में धान की मिलिंग के लिए प्रोत्साहन और अपग्रेडेशन राशि की स्वीकृति विद्युत वितरण कम्पनियों को रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम में 40% राशि अंशपूंजी के रूप में प्रदान करने की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद के निर्णय, प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पी.एम. उषा) संचालन की स्वीकृति भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार शाम को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में प्रदेश में उपार्जित धान की मिलिंग के लिए दी जाने वाली प्रोत्साहन और अपग्रेडेशन राशि की स्वीकृति दी है। निर्णय अनुसार मिलिंग राशि 10 रूपये प्रति क्विंटल और प्रोत्साहन राशि 50 रूपये प्रति क्विंटल प्रदाय की जायेगी। साथ ही 20 % परिदान एफ.सी.आई को करने पर 40 रूपये और 40 % परिदान एफ.सी.आई को करने पर 120 रूपये प्रति क्विंटल अपग्रेडेशन राशि प्रदाय की जायेगी। इससे किसानों से उपार्जित धान की मिलिंग में तेजी आयेगी। सार्वजनिक वितरण प्रणाली एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं अंतर्गत चावल की आपूर्ति सुनिश्चित किये जाने के साथ राज्य की आवश्यकता के अतिरिक्त अतिशेष चावल की मात्रा को केंद्रीय पूल में त्वरित गति से परिदान किया जायेगा। मंत्रि-परिषद द्वारा भारत सरकार द्वारा जारी रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के अंतर्गत विद्युत वितरण कम्पनियों को राज्यांश 40% राशि लगभग 6 हजार करोड़ रूपये ऋण के स्थान पर अंशपूंजी/अनुदान के रूप में प्रदान करने की स्वीकृति दी गयी है। निर्णय अनुसार राज्य की विद्युत वितरण कंपनियों को वितरण अधोसंरचना के उन्नयन, वितरण हानियों में कमी तथा वितरण प्रणाली सुदृढीकरण एवं आधुनिकीकरण से संबंधित बुनियादी अधोसंरचना के निर्माण/विकास कार्यों के लिए राज्यांश की राशि ऋण के स्थान पर राज्य शासन द्‌वारा अंश पूंजी के रूप में प्रदान की जायेगी। योजनांतर्गत वितरण कंपनियों को अ‌द्यतन ऋण के रूप में दिये गये राज्यांश को भी अंश पूंजी में परिवर्तित किया जायेगा। योजनांतर्गत केन्द्रांश पर देय एसजीएसटी की राशि भी राज्य शासन ‌द्वारा वितरण कंपनियों को अनुदान के रूप में उपलब्ध करवाई जाएगी। इससे प्रदेश में स्थापित होने वाले स्मार्ट मीटर के कार्य में तेजी आयेगी। उल्लेखनीय है कि उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण व विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति के उ‌द्देश्य से वित्तीय रूप से साध्य एवं परिचालन में दक्ष वितरण क्षेत्र विकसित करने के लिए "रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) लागू की गयी है। योजना में केन्द्र सरकार ‌द्वारा विद्युत वितरण कंपनियों को प्री-पेड स्मार्ट मीटर व सिस्टम मीटरिंग के लिए 15% राशि और विद्युत अधोसंरचनात्मक विकास के लिए 60% राशि अनुदान के रूप में प्रदान किये जाने का प्रावधान है। शेष 40 प्रतिशत राशि राज्य शासन द्वारा अंश पूंजी के रूप में प्रदान की जायेगी। मंत्रि-परिषद द्वारा केन्द्र प्रवर्तित योजना 'प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पी.एम. उषा)' के संचालन की सैद्धांतिक सहमति दी गयी है। उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार, शिक्षा मंत्रालय, उच्चतर शिक्षा विभाग, द्वारा वर्ष 2013 से राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) चरण 1.0 एवं रूसा चरण 2.0 केंद्र प्रवर्तित योजना के रूप में लागू कर प्रारम्भ की गई थी। योजना में प्रदेश के उच्च शैक्षणिक संस्थानों को चरणबद्ध तरीके से वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। पी.एम. उषा योजना को 4 घटकों पर केन्द्रित किया गया है। जिसमें बहुसंकायी शिक्षा एवं शोध विश्र्वविद्यालय, विश्र्वविद्यालय के सुदृढ़ीकरण के लिए अनुदान, महाविद्यालयों के सुदृढ़ीकरण के लिए अनुदान और लैंगिक समावेशिता एवं साम्यता पहल शामिल है।   recent visitors 32

शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा- मध्य प्रदेश के स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल होगा यातायात का पाठ

भोपाल मध्य प्रदेश के स्कूली शिक्षा पाठ्यक्रम में नई शिक्षा नीति के मुताबिक यातायात का पाठ शामिल किए जाने की तैयारी है। राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह का कहना है कि बच्चों को यातायात का पाठ पढ़ाया जाएगा। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने मंगलवार को संवाददाताओं से बच्चों में यातायात के प्रति जागरूकता लाने की जरूरत और सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों की चर्चा करते हुए कहा कि अगर बच्चों को बचपन से ही यातायात संबंधी नियमों और उनके पालन करने की प्रक्रिया से अवगत कराएं तो वह उनके लिए जीवन भर उपयोगी होती है। उन्होंने बचपन में दी जाने वाली शिक्षा और उससे जीवन में होने वाले लाभ का जिक्र करते हुए कहा कि बच्चों को बहुत सी चीज बालपन से ही बताई जाएं तो वह बगैर किसी प्रयास के बगैर किसी दबाव के चीजों को सीख जाते हैं। जैसे संस्कृति का ज्ञान है वह स्वयमेव शिक्षण पद्धति के माध्यम से मिलता है तो परिवार के कारण और शिक्षा के कारण वह अपनी संस्कृति से जुड़ा रहता है। इसी तरह सड़क परिवहन के कायदे हैं किस तरह से नियमों का पालन करना है। यातायात के नियम का कैसे उल्लंघन होता है और कैसे पालन होता है अगर इस चीज को शैक्षणिक व्यवस्था में शामिल कर बच्चों को बताने का काम करेंगे तो बच्चे आसानी से जान लेते हैं और बच्चे उसे सीखते हुए अपने जीवन में उतारते हैं। उन्होंने आगे कहा कि बड़े होकर कोई चीज सीखने से बेहतर है कि बचपन से ही छोटे-छोटे पाठ्यक्रम के माध्यम से उनको चीजों का ज्ञान कराया जाए जो उनके लिए जीवन भर उपयोगी हो। आगामी समय में यह हमारी प्राथमिकता है। नई शिक्षा नीति यही कहती है जीवन उपयोगी चीजों को किस तरह से हम पाठ्यक्रम में शामिल करें। जो आने वाले जीवन में काम आए, कारगर हो, इसे हम पाठ्यक्रम में शामिल करने जा रहे हैं। ज्ञात हो कि यातायात पालन संबंधी नियमों का ज्ञान न होने के कारण बच्चे और किशोर दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं, अगर नियमों की जानकारी हो तो हादसों को रोका भी जा सकता है। इसी को ध्यान में रखकर राज्य सरकार स्कूली पाठ्यक्रम में यातायात संबंधी जानकारी को शामिल करने की तैयारी में है। recent visitors 161

श्रीमद् भगवद गीता एक अनूठा आध्यात्मिक मार्गदर्शी ग्रंथ है, भगवद् गीता जिसका प्रभाव पूरी दुनिया में फैल चुका है

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश में सांस्कृतिक पुनरुद्धार और आध्यात्मिक नवजागरण के लिए अनूठे प्रयासों की श्रृंखला शुरू की है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा 11 दिसम्बर को गीता जयंती के अवसर पर सभी जिला मुख्यालयों में गीता जयंती महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस विशेष अवसर पर यह जानना आवश्यक होगा कि श्रीमद् भगवद गीता एक अनूठा आध्यात्मिक मार्गदर्शी ग्रंथ है, भगवद् गीता जिसका प्रभाव पूरी दुनिया में फैल चुका है। भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य वचनों में सम्पूर्ण जीवन की व्याख्या है। संसार की समस्याओं और मनुष्य की व्यथाओं का समाधान है। “गीता” की महिमा का शाब्दिक वर्णन करना कठिन काम है। पाठकों के सुलभ संदर्भ के लिए श्रीमद् भगवद् गीता पर विश्व के महापुरुषों, महान वैज्ञानिकों, विद्वजनों और दार्शनिकों के विचारों का संकलन प्रस्तुत किया गया है। “भगवान श्रीकृष्ण की कही हुई श्रीमद् भगवद् गीता के समान छोटे वपु (काया, शरीर) में इतना विपुल ज्ञानपूर्ण कोई दूसरा ग्रंथ नहीं है’’- महामना पं. मदनमोहन मालवीय। “जब कभी संदेह मुझे घेरते हैं और मेरे चेहरे पर निराशा छाने लगती है; मैं क्षितिज पर गीता रूपी एक ही उम्मीद की किरण देखता हूं। इसमें मुझे अवश्य ही एक छन्द मिल जाता है, जो मुझे सांत्वना देता है। तब मैं कष्टों के बीच मुस्कुराने लगता हूँ’’- महात्मा गांधीजी। “गीता हमारे ग्रंथों में एक अत्यन्त तेजस्वी और निर्मल हीरा है’’- लोकमान्य बालगंगाधर तिलक। मशहूर जर्मन कवि, उपन्यासकार और पेंटर हरमन हेस के जीवन पर भी गीता का विशेष प्रभाव था। उनकी कालजयी रचना 'सिद्धार्थ' में यह स्पष्ट होता है। उनका कहना था 'गीता की सबसे अच्छी विशेषता यह है कि यह जीवन के सही मायनों को पूरी वास्तविकता के साथ सामने रखती है।' उन्नीसवीं सदी के मशहूर दर्शनशास्त्री और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता अल्बर्ट श्विट्ज़र मानते थे – 'श्रीमद भगवद् गीता मनुष्य के जीवन पर बहुत गहरा असर डालती है। यह कर्मों के माध्यम से ईश्वर प्राप्ति का संदेश देती है।' स्विस मनोवैज्ञानिक कार्ल जुंग को विश्लेषणात्मक मनोविज्ञान के लिए जाना जाता है। वे न सिर्फ मनोविज्ञान बल्कि दर्शन, साहित्य और धार्मिक अध्ययन में भी विशेषज्ञता रखते थे। उनका मानना था कि “मनुष्य को उल्टे वृक्ष के रूप में प्रदर्शन की अवधारणा बहुत पहले से ही मौजूद थी, जिसे बाद में सामने लाया गया। अपने वक्तव्यों में कही गई प्लेटो की वह बात कि “मनुष्य सांसारिक नहीं बल्कि स्वर्गीय पौधा है, जो ब्रह्माण्ड से सिंचित होता है। यह वैदिक अवधारणा है और गीता के 15वें अध्याय में इसे स्पष्ट तौर पर कहा गया है।“ उन्नीसवीं सदी के ही मशहूर अंग्रेजी साहित्यकार आल्डस हक्सले ने कहा था – “मनुष्य में मानव मूल्यों की समझ पैदा करने के लिए गीता सर्वाधिक व्यवस्थित ग्रंथ है। शाश्वत दर्शन के विषय में यह अब तक की सबसे स्पष्ट और व्यापक प्रस्तुति है। यह सिर्फ भारत के लिए नहीं है बल्कि इसका जुड़ाव पूरी मानवता से है।’’ उन्नीसवीं सदी के विख्यात अमेरिकी निबंधकार और साहित्यिक हस्ती इमर्सन के जीवन पर गीता का बड़ा प्रभाव था। उनका मानना था, “श्रीमद भगवद् गीता के साथ मेरा दिन शानदार बीता। यह अपने तरह की पहली पुस्तक है। यह किसी और समय और परिस्थितियों में लिखी गई, लेकिन यह हमारे आज के सवालों और समस्याओं के भी जवाब पूरी स्पष्टता के साथ देती है।“ ऑस्ट्रियाई दार्शनिक और साहित्यकार रुडॉल्फ स्टीनर के जीवन को गीता ने व्यापक रूप से प्रभावित किया था। उनका मानना था कि भगवद् गीता जैसी अप्रतिम रचना को समझने के लिए बस हमें स्वयं को उसके साथ लय बिठाने की जरूरत है।' मशहूर अमेरिकी दार्शनिक और साहित्यकार हेनरी डेविड थोरो पर गीता का प्रभाव उनके साहित्य और सामाजिक कार्यों में परिलक्षित होता है। वे कहते थे कि "प्राचीन भारत की सभी स्मरणीय वस्तुओं में गीता से श्रेष्ठ कोई भी दूसरी वस्तु नहीं है। गीता में वर्णित ज्ञान ऐसा उत्तम व सर्वकालिक है, जिसकी उपयोगिता कभी भी कम नहीं हो सकती।" भारतीय मनीषियों के अलावा कई विदेशी विद्वानों ने भी गीता के महत्व को समझा और अपने जीवन में इसके सिद्धांतों को लागू किया। यह महान पवित्र ग्रंथ गीता का ही असर था कि ईसाई मत मानने वाले कनाडा के प्रधानमंत्री मिस्टर पियर ट्रूडो गीता पढ़कर भारत आये। उन्होंने कहा था कि जीवन की शाम हो जाए और देह को दफनाया जाए, उससे पहले अज्ञानता को दफनाना जरूरी है। ओपेनहाइमर : भगवद् गीता से कैसे प्रभावित हुए? बीबीसी ने समकालीन इतिहास पर अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि रॉबर्ट ओपेनहाइमर ने परमाणु बम विकसित करने में अग्रणी भूमिका निभाई थी, जिसने द्वितीय विश्व युद्ध की दिशा बदल दी थी। ओपेनहाइमर ने संस्कृत भाषा सीखी और श्रीमद् भगवद गीता को अपनी पसंदीदा पुस्तकों में से एक माना। जब द क्रिश्चियन सेंचुरी के संपादकों ने उनसे पूछा कि वे कौन सी किताबें हैं, जिन्होंने उनके दार्शनिक दृष्टिकोण को सबसे ज्यादा प्रभावित किया, तो चार्ल्स बौडेलेयर की पुस्तक "लेस फ्लेर्स डू माल" को पहला और “भगवद गीता’’ को दूसरा स्थान मिला। सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी ओपेनहाइमर को बर्कले में संस्कृत के प्रोफेसर आर्थर डब्ल्यू राइडर ने संस्कृत से परिचित कराया था। उसके बाद उन्हें गीता से परिचित कराया गया था। जुलाई 1945 में न्यू मैक्सिको के रेगिस्तान में पहले परमाणु बम के विस्फोट से दो दिन पहले रॉबर्ट ओपेनहाइमर ने  गीता  का एक श्लोक सुनाया। इतिहास बदलने वाली घटना से कुछ घंटे पहले, "परमाणु बम के जनक" ने संस्कृत से अनुवादित एक श्लोक को पढ़कर अपना तनाव दूर किया, जिसका हिंदी अनुवाद इस प्रकार है – "युद्ध में, जंगल में, पहाड़ों की चोटी पर अन्धकारमय महान सागर पर, भालों और बाणों के बीच, नींद में, उलझन में, शर्म की गहराई में, मनुष्य द्वारा पहले किये गए अच्छे कर्म ही उसकी रक्षा करते हैं।“ श्रीमद् भगवद् गीता ने पश्चिम की दुनिया को गहरा प्रभावित किया है। गीता दर्शन को जानने के बाद पश्चिम के विद्वानों ने गीता के जीवन दर्शन को अपनाने के लिए अपनी बौद्धिक ऊर्जा लगा दी। दरअसल वे किसी वैज्ञानिक उपलब्धि की खोज में नहीं थे। वे इससे भी आगे विकारों से रहित मानव मन और आत्मिक शांति की खोज में थे। इसका समाधान उन्होंने श्रीमद् भगवद् गीता में पाया। इन विद्वानों में दार्शनिक इमैन्युअल कांड (1724-1804), हर्डर (1744-1805) फिटश (1762-1814), हीगल (1770-1831), श्लेगल (1772-1829) शिलर (1759-1805) … Read more