इंदौर कलेक्टर का समस्या सुलझाने का अलग स्टाइल

Indore Collector’s unique style of problem solving इस IAS के लोग दीवाने, पत्नी भी कलेक्टर, इन्हें कहते हैं बुजुर्गों और मजबूरों का मसीहा इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा के फैन हो रहे इंदौरवासी, किसी भी समस्या का तुरंत कर देते हैं समाधान, मदद वाली कलेक्टरी चर्चा में. भोपाल/इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में इन दिनों जनसुनवाई में कुछ ऐसा ही नजारा देखने मिल रहा है, जहां कलेक्टर की मदद वाली अनोखी कलेक्टरी देखने मिल रही है। हम बात कर रहे हैं कलेक्टर शिवम वर्मा की। IAS शिवम वर्मा इन दिनों अपनी खास जनसुनवाई के लिए काफी लोकप्रिय हैं। किसी भी समस्या के समाधान के लिए अब इंदौर शहर के रहवासी सीधे कलेक्टर का रुख कर रहे हैं। क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि कोई अधिकारी या विभाग नहीं, सीधे कलेक्टर शिवम वर्मा के पास गए तो काम बन ही जाएगा। हर मंगलवार कलेक्टर से मिलने उमड़ती है भीड़ हर मंगलवार को कलेक्ट्रेट में होने वाली जन सुनवाई में कुछ ऐसा ही नजारा देखने मिलता है, जहां कलेक्टर से मिलने की आस में जमकर भीड़ लगती है.यहां लोग अपनी-अपनी परेशानियां लेकर पहुंचते हैं और बाकायदा इंदौर कलेक्टर उन्हें अपनी पास बुलाकर समस्या का समाधान तत्काल कर देते हैं। एक ओर जहां सरकारी कार्यालयों में धक्के खाए और ऐढ़ी घिसाए बिना काम नहीं होता तो वहीं, इसके ठीक उलट इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने विभिन्न समस्याओं से जूझते बुजुर्गों और मजबूर लोगों की मदद तत्काल कर रहे हैं। यही वजह है कि पूरे जिले से लोग अपनी-अपनी समस्याएं लेकर यहां जनसुनवाई में पहुंच रहे हैं। इस IAS के लोग दीवाने, मिलने के लिए लगती है लाइनअपने पास बिठाकर समस्या सुनते हैं कलेक्टरकलेक्ट्रेट के मुख्य दरवाजे से लेकर जनसुनवाई के पंजीयन और लंबी लाइन की भारी मशक्कत और धक्का मुक्की के बाद जब लोग कलेक्ट्रेट में आईएएस शिवम वर्मा के कक्ष से लगे जनसुनवाई कक्ष में पहुंचते हैं तो वहां का नजारा राहत देने वाला होता है। कलेक्ट्रेट सभागार में कलेक्टर खुद आवेदक को अपने साइड में बिठाकर इत्मिनान से उसकी समस्या सुनते हैं। इसके बाद कलेक्ट्रेट संबंधित अधिकारी को तत्काल परेशानी हल करने के निर्देश देते हैं। बुजुर्गों पर दिया जाता है सबसे ज्यादा ध्यान सबसे खास बात यह है कि यहां बुजुर्गों को विशेष तरजीह दी जाती है। उन्हें सम्मान के साथ बिठाकर उनकी हर समस्या को गंभीरता से सुना जाता है। इस दौरान यहां कलेक्टर के निर्देश पर तमाम विभाग के आला अधिकारी बुजुर्गों की मदद के लिए तैनात नजर आते हैं। इतना ही नहीं, पिछली सुनवाई में आवेदकों के निराकरण की स्थिति के साथ भी अधिकारी तैयार रहते हैं। हर मंगलवार कलेक्टर से मिलने उमड़ती है भीड़ हर वर्ग के लोग समस्याएं लेकर यहां पहुंचते हैं यहां सुबह से ही भीड़ इतनी मचती है कि यहां तैनात कलेक्ट्रेट के सहायक स्टाफ के साथ सुरक्षाकर्मी और अन्य लोग कम पड़ जाते हैं। ऐसी स्थिति में यहां कई बार भीड़ नियंत्रित करने के लिए स्वयंसेवकों अथवा स्काउट गाइड आदि की भी मदद लेनी पड़ रही है। इस जनसुनवाई में आने वाले हर व्यक्ति की कोशिश यही रहती है कि वह किसी और से नहीं बल्कि सिर्फ कलेक्टर शिवम वर्मा को मिलकर ही अपनी समस्याएं बताएंगे। मौके पर कई बुजुर्गों से जब अन्य अधिकारी उनकी समस्याएं जानना चाहते हैं, तो वह कई बार समस्याएं तो बताते हैं लेकिन पूरी बात और कागज सिर्फ कलेक्टर को ही बताना चाहते हैं। इस स्थिति में हर मंगलवार को सुबह 9:00 बजे से लेकर दोपहर से शाम तक कलेक्टर शिवम वर्मा लोगों की भीड़ से घिरे रहते हैं। काम नहीं करने वालों पर एक्शन लेते हैं कलेक्टर जनसुनवाई में खुद कलेक्टर शिवम वर्मा जितनी समस्याओं को लेकर निराकरण के अलग-अलग निर्देश देते हैं। उनकी मॉनिटरिंग पर उनकी नजर रहती है। लिहाजा टीएल बैठक और अन्य बैठकों में वह जनसुनवाई के प्रकरणों की वस्तुस्थिति की समीक्षा करते हैं। कई बार जब लोगों की अथवा बुजुर्गों की समस्या का समाधान नहीं होता तो कलेक्टर संबंधित अफसर अथवा जिम्मेदार को दंडित करने से भी नहीं चूकते। IAS शिवम वर्मा की पत्नी भी कलेक्टर वर्तमान में इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा 2013 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस ऑफिसर हैं, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश निवासी हैं। शिवम वर्मा भोपाल के मैनिट से बीटेक मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी कर चुके हैं। इसके बाद उन्होंने IAS क्लियर किया। उनकी धर्मपत्नी जयती सिंह भी आईएएस ऑफिसर होकर बड़वानी कलेक्टर हैं। इंदौर कलेक्टर से पूर्व शिवम वर्मा नगर निगम इंदौर में कमिश्नर भी रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने जिला पंचायत ग्वालियर में बतौर सीईओ काम संभाला है। अपनी इस पहले पर क्या कहते हैं कलेक्टर? अपनी इस मदद वाली कलेक्टरी पर आईएएस शिवम वर्मा कहते हैं, ” हमारा प्रयास रहता है कि माननीय मुख्यमंत्री मोहन यादव जी के नेतृत्व में सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जरूरतमंदों को पहुंचाया जाए। हम यह भी प्रयास करते हैं कि किसी भी व्यक्ति या खासतौर पर बुजुर्ग किसी भी योजना से वंचित न रह जाए और उसकी समस्या का तत्काल समाधान हो। लोगों की समस्या का समाधान करके आत्म संतुष्टि मिलती है।” recent visitors 18

35 करोड़ का गेहूं सड़ाकर 150 करोड़ का नुकसान, भाजपा सरकार की लापरवाही या संगठित भ्रष्टाचार: जीतू पटवारी

Loss of Rs 150 crore due to rotting of wheat worth Rs 35 crore, negligence of BJP government or organised corruption: Jitu Patwari भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने रायसेन जिले के दिवटिया (नूरगंज) एवं नूरगंज वेयरहाउस में हजारों टन गेहूं सड़ने और उसकी लागत 35 करोड़ रुपए से बढ़कर 150 करोड़ रुपए तक पहुंचने के मामले को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा और आक्रामक हमला बोला है। पटवारी ने कहा कि यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि प्रदेश में फैले भ्रष्टाचार, कुप्रबंधन और गैरजिम्मेदार शासन का भयावह उदाहरण है। जिस अनाज को गरीबों के घर तक पहुंचना था, वह वर्षों तक गोदामों में सड़ता रहा और अंतत: जहरीला बन गया। यह केवल अनाज की बबार्दी नहीं, बल्कि गरीबों के अधिकारों की खुली लूट है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017-18 से 2019-20 के बीच समर्थन मूल्य पर खरीदा गया यह गेहूं लगभग 20 हजार टन मात्रा में वेयरहाउस में पड़ा रहा, लेकिन सरकार और संबंधित अधिकारियों ने समय पर इसका उठाव सुनिश्चित नहीं किया। न तो वितरण की कोई ठोस योजना बनाई गई और न ही भंडारण की समुचित व्यवस्था की गई। परिणामस्वरूप, करोड़ों रुपए का अनाज पूरी तरह सड़कर अनुपयोगी हो गया। पटवारी ने कहा कि इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 35-36 करोड़ रुपए का गेहूं किराया, मेंटेनेंस, परिवहन और कीटनाशक छिड़काव जैसे खर्चों के कारण बढ़ते-बढ़ते 150 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है या फिर जानबूझकर लागत बढ़ाने और घोटाले को छिपाने का प्रयास? उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला एक संगठित आर्थिक अपराध की ओर इशारा करता है, जहां भंडारण की आड़ में वर्षों तक अनाज को सड़ने दिया गया और उसके नाम पर लगातार खर्च दिखाकर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया। यह सीधे-सीधे जनता के टैक्स के पैसे की लूट है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यह सिर्फ गेहूं नहीं सड़ा है, यह भाजपा सरकार की नीयत और व्यवस्था सड़ चुकी है। गरीब का हक गोदामों में सड़ रहा है और सत्ता के संरक्षित लोग उससे मुनाफा कमा रहे हैं। यह घोटाला नहीं, बल्कि जनता के साथ विश्वासघात है। उन्होंने आगे कहा कि कीटनाशकों के अत्यधिक छिड़काव के कारण यह गेहूं अब जहरीला हो चुका है, जिससे बीमारी फैलने का खतरा है। यह केवल आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य के साथ भी गंभीर खिलवाड़ है। यदि समय रहते इस अनाज का उचित वितरण किया जाता, तो लाखों गरीब परिवारों को राहत मिल सकती थी। पटवारी ने यह भी कहा कि यह घटना मध्यप्रदेश की भंडारण व्यवस्था की पूरी पोल खोलती है। जहां एक ओर किसान अपनी उपज बेचने के लिए संघर्ष करता है, वहीं दूसरी ओर खरीदा गया अनाज वर्षों तक गोदामों में सड़ता रहता है। यह प्रशासनिक असफलता के साथ-साथ नीतिगत विफलता का भी प्रमाण है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करना अत्यंत आवश्यक है। कौन अधिकारी इसके लिए जिम्मेदार है? किसके आदेश पर अनाज को वर्षों तक रोका गया? क्यों समय पर वितरण नहीं हुआ? इन सभी सवालों का जवाब प्रदेश की जनता मांग रही है। पटवारी ने चेतावनी दी कि यदि भाजपा सरकार ने इस गंभीर मामले में शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो कांग्रेस पार्टी प्रदेशभर में व्यापक जनआंदोलन छेड़ेगी और जनता के हक के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेगी। जनता के पैसे की बबार्दी और गरीबों के हक की लूट अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भाजपा सरकार को हर हाल में जवाब देना होगा और दोषियों को सजा दिलानी होगी। प्रदेश कांग्रेस की प्रमुख मांगें: 1. इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए। 2. जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए। 3. 150 करोड़ रुपए के नुकसान की भरपाई दोषियों से वसूली जाए। 4. प्रदेश की भंडारण एवं वितरण प्रणाली की समग्र समीक्षा कर सुधार लागू किए जाएं। 5. भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए पारदर्शी और जवाबदेह तंत्र विकसित किया जाए। recent visitors 53

MP में मत्स्यपालकों के लिए नई नीति, सरकार का बड़ा कदम, किसान कल्याण वर्ष में हर अंचल में कैबिनेट बैठक होगी

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसान कल्याण वर्ष में मध्यप्रदेश के हर अंचल में कैबिनेट की बैठक आयोजित की जाएगी। जनजातीय अंचल नागलवाड़ी (निमाड़) में आज सोमवार को कृषि कैबिनेट आयोजित की जा रही है। बीते वर्ष भी निमाड़ क्षेत्र के महेश्वर में अहिल्या माता की 300वीं जयंती पर कैबिनेट की बैठक आयोजित की गई थी। मत्स्य नीति की सौगात देगी प्रदेश सरकार-मोहन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान कल्याण वर्ष में कृषि सहित बागवानी, सहकारिता, मत्स्य उत्पादन आदि से संबंधित 17 विभागों को जोड़कर हम कार्य कर रहे हैं। नर्मदा के किनारे मत्स्य पालन की बड़ी संभावनाएं हैं। इसे देखते हुए मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और मत्स्यपालकों के कल्याण के लिए केंद्र सरकार की योजनाओं का समावेश करते हुए मत्स्य नीति की सौगात हम देने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि-पशुपालन से जुड़े क्षेत्रों के साथ मत्स्य उत्पादन में भी आत्मनिर्भरता से बढ़कर और बेहतर स्थिति पाने का हमारा प्रयास है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले हुए वंदे-मातरम के सामूहिक गान के बाद मंत्रीगण को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजाति अंचल बड़वानी-निमाड़ नर्मदा जलप्रदाय योजना से पहले सूखा और आमजन के पलायन वाला क्षेत्र हुआ करता था। अब यहां हालात बदल चुके हैं। यहां सिंचाई का रकबा बढ़ा है और कृषि के क्षेत्र में नई संभावनाएं बनी हैं। नर्मदा वैली से खेती संबंधी बेहतरीन प्रयोग एवं कार्य इस अंचल में किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यहां सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने से सामान्य तापमान में भी 2-3 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नर्मदा जी के किनारे हमारी आध्यात्मिक संस्कृति फली-फूली है। यहां भगवान भीलट देव का अद्भुत स्थान है, उनका चरित्र और इतिहास प्रेरणादायी है। इस अंचल में ऐसे महापुरुषों की एक पूरी शृंखला है। यहां संत सिंगा जी महाराज का स्थान है, खंडवा में दादाजी धूनीवाले का स्थान है, समाजसेवी संत एक रोटी वाले बाबा की कृपा भी यहां प्राप्त होती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक छोटे से परिवार में जन्म लेने वाले भीलट देव जी ने साधना के बलबूते पर भक्तिभाव के साथ,  सही अर्थ में आध्यात्म के लिए सभी को प्रेरित किया। वे सनातन धर्म के सबसे बड़े देवता और जीवित भगवान के रूप में पूजे जाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय पर्व भगोरिया को राजकीय पर्व के रूप में प्रदेश में मनाया जा रहा है। यहां होली से 7 दिन पहले से ही यह पर्व मनाया जाता है, जनजातीय भाई-बंधु टोलियों में परम्परागत वाद्य यंत्रों के साथ नृत्य-गायन से होली की अनूठी प्रस्तुति देते हैं। इसे बढ़ावा देने के लिए भगोरिया हाट का आयोजन भी किया जा रहा है। recent visitors 43

बड़वानी में हॉकी खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के लिए एस्ट्रो-टर्फ की उपलब्ध कराई जाएगी सुविधा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

ग्रामीण प्रतिभाओं के प्रोत्साहन के लिए दी जाएगी हर संभव मदद : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नागलवाड़ी में प्रबुद्धजनों से किया आत्मीय संवाद मुख्यमंत्री ने एनआरएलएम की लखपति दीदियों, नेशनल खिलाड़ियों और उन्नत किसानों से सुने अनुभव बड़वानी में हॉकी खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के लिए एस्ट्रो-टर्फ की उपलब्ध कराई जाएगी सुविधा बड़वानी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को नागलवाड़ी में आयोजित पहली कृषि कैबिनेट के अवसर पर बड़वानी जिले के प्रबुद्धजनों से भेंट की। उन्होंने एनआरएलएम की लखपति दीदियों, बड़वानी जिले के नेशनल खिलाड़ियों और उन्नत किसानों के अनुभव सुने और उन्हें शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रबुद्धजनों से भेंटकर कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं, ग्रामीणों, किसानों, खिलाड़ियों सहित समाज के सभी वर्गों की प्रगति के लिए जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से मदद उपलब्ध करा रही है। बड़वानी जिले के ग्राम भागसुर की सीमा नरगावे ड्रोन दीदी ने निमाड़ी में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बताया कि ग्रामीण आजीविका मिशन के स्व सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने जैविक खेती और ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण लिया। अब वह अन्य महिलाओं को जैविक खेती करना सिखा रही है। ड्रोन दीदी सीमा ने बताया कि स्व-सहायता समूह से जुड़कर उसकी आय में वृद्धि तो हुई ही है, साथ ही उसे एक नई पहचान भी मिली है। सीमा ने बताया कि वह गांव में ड्रोन के माध्यम से खेतों में उर्वरक और कीटनाशक का छिड़काव करती है जिससे घंटों का काम अब मिनिटों में होने लगा है और उसे नियमित रूप से आय भी प्राप्त हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से चर्चा करते हुए हॉकी की नेशनल खिलाड़ी सु स्नेहा मोहनिया ने बताया कि उसे राष्ट्रीय स्तर पर 2 गोल्ड मेडल और 1 सिल्वर मेडल मिल चुका है। स्नेहा ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से बड़वानी में एस्ट्रो-टर्फ की सुविधा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, जिसे उन्होंने स्वीकार करते हुए यह सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आश्वस्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एयर राइफल शूटिंग की नेशनल खिलाड़ी जुलवानिया निवासी सु वैष्णवी महुले से भी चर्चा की। उन्होंने सु वैष्णवी को राज्य स्तर की शूटिंग अकादमी में प्रशिक्षण दिलाने के लिए निर्देश उपस्थित अधिकारियों को दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जुलवानिया में शूटिंग क्लब प्रशिक्षण केंद्र संचालन कर रहे प्रशिक्षक  नीरज को 5 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि बालिकाओं की ट्रेनिंग के सराहनीय कार्य के लिए देने की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बड़वानी जिले के ग्राम घटवा निवासी उन्नत कृषक  महेश पाटीदार ने अपने उत्पाद "गुड़ की चाय" के बारे में बताया।  पाटीदार ने बताया कि उन्होंने पी.एम.एफ.एम.ई. योजना में 28 लाख रुपए का ऋण लिया था। इसमें उन्हें 10 लाख रुपए का अनुदान भी मिला है। वर्तमान में  पाटीदार "गुड़ की चाय" के 500 क्विंटल के पैकेट प्रतिवर्ष बेच रहे हैं। भविष्य में एक हजार क्विंटल प्रतिवर्ष "गुड़ की चाय" के पैकेट बेचने का उनका लक्ष्य है।  पाटीदार ने बताया कि उनकी गुड़ की चाय के पैकेट विक्रय के लिए अमेजॉन एवं अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध है। बड़वानी जिले के ही  अमोल महाजन ने भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव को केला उत्पादन के अपने व्यवसाय के बारे में बताते हुए कहा कि वह पहले अमेरिका में जॉब करते थे, बाद में जॉब छोड़कर अपने देश में ही केला उत्पादन का स्टार्ट-अप शुरू किया। आज उनका केला दुबई, ईरान और इराक सहित विश्व के कई देशों में निर्यात हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  महाजन की उपलब्धि की प्रशंसा की।   recent visitors 25

भगोरिया पर्व पर बड़वानी में कृषि कैबिनेट: लोक संस्कृति के सम्मान पर बोले मुख्यमंत्री डॉ. यादव

लोक संस्कृति के सम्मान के प्रकटीकरण के लिए भगोरिया पर्व पर बड़वानी में कृषि कैबिनेट: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को दी बसंत और रंगों के पर्व होली की मंगलकामनाएं देश का फूड बास्केट है मध्यप्रदेश परीक्षा के समय में तनावमुक्त रहें विद्यार्थी मध्य पूर्व की वर्तमान क्षेत्रीय स्थिति में राज्य सरकार, वहां रह रहे प्रदेश के परिवारों के साथ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को होली पर्व की मंगलकामनाएं देते हुए कहा कि ईश्वर से प्रार्थना की कि बसंत और रंगों का यह उत्सव सभी के लिए शुभ और कल्याणकारी हो। उन्होंने कहा कि आज भगोरिया पर्व का भी आखिरी भगोरिया है। राज्य सरकार वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। पर्व के समय जनजातीय भाई बहनों के साथ रहने और लोक संस्कृति के सम्मान के प्रकटीकरण के लिये पहली कृषि कैबिनेट बड़वानी में सोमवार को आयोजित की गई है। यह प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के विकास के लिए हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में किसानों सहित युवा, महिला, गरीब, सभी के कल्याण के लिए गतिविधियां संचालित हैं। राज्य सरकार ने किसान कल्याण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की हैं। फसल की सही कीमत सुनिश्चित करने के लिए भावांतर योजना में अब सरसों को भी शामिल किया जा रहा है। उड़द प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत अब किसानों को उड़द पर 600 रुपए प्रति क्विंटल का बोनस दिया जाएगा। मध्यप्रदेश दलहन-तिलहन सहित सभी कृषि उत्पादों में एक प्रकार से देश का फूड बास्केट है। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश कृषि और उससे जुड़े सभी क्षेत्रों में निरंतर उन्नति करे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह विद्यार्थियों के लिए परीक्षा का समय है, जो उनके लिए विशेष महत्व का है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों से तनावमुक्त रहते हुए और स्वयं का ध्यान रखते हुए होली पर्व का आनंद लेने और परीक्षा सहित अपने सभी कर्तव्यों का जिम्मेदारीपूर्वक निर्वहन करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यपूर्व की वर्तमान क्षेत्रीय स्थिति के संबंध में कहा कि प्रदेश के कई नागरिक इन देशों में हैं। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में हमारा प्रयास है कि किसी भी नागरिक को कष्ट नहीं हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बतया कि उन्होंने मध्यपूर्व के देशों में रह रहे प्रदेश के कई परिवारों से दूरभाष पर बात की है। राज्य सरकार इन परिवारों के साथ है।   recent visitors 29

मुख्यमंत्री डॉ. यादव और मंत्रियों ने निमाड़-मालवा के लोक देवता भीलट देव से सभी की समृद्धि की कामना की

मुख्यमंत्री डॉ. यादव और कैबिनेट मंत्रियों ने निमाड़-मालवा के लोक देवता भीलट देव से सभी की समृद्धि के लिए की कामना लोक देवता भीलट देव के आंगन नागलवाड़ी में है पहली कृषि कैबिनेट भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और कैबिनेट मंत्रियों ने सोमवार को निमाड़-मालवा के लोक देवता भीलट देव का दर्शन कर प्रदेश के किसानों की सुख समृद्धि की कामना करते हुए पूजा-अर्चना की। किसान कल्याण वर्ष में बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में आयोजित कैबिनेट बैठक के पहले दर्शन लाभ लेने के बाद सतपुड़ा की पहाडी पर विराजित लोक देवता के रमणीय स्थल की सभी ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के विकास के लिए प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रही है। भीलट देव निमाड़-मालवा क्षेत्र के आराध्य देव है। आज वे आराध्य के दर्शन के साथ ही कैबिनेट बैठक की शुरूआत करेंगे। कैबिनेट में जो भी निर्णय लिये जायेंगे वे प्रदेशवासियों एवं किसानों के हितार्थ होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा कि निमाड़वासी बड़े सौभाग्यशाली हैं जो उन्हें मां नर्मदा का आंचल मिला है। मां नर्मदा के जल से ही सिंचाई करके निमाड़ क्षेत्र के किसान समृद्ध एवं प्रगतिशील हो रहे हैं। आज निमाड़ क्षेत्र के किसान कृषि एवं उद्यानिकी की एक से अधिक फसलें लेकर आर्थिक रूप से भी उन्नति कर रहे हैं। मां नर्मदा का जल सूक्ष्म उन्नयन सिंचाई परियोजनाओं से बड़वानी जिले सहित निमाड़ क्षेत्र में किसानों को सिंचाई के लिये मिल रहा है। किसानों की आर्थिक उन्नति से ही प्रदेश की उन्नति होगी प्रदेश की सरकार ने वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष घोषित किया है, जिससे किसानों को और अधिक समृद्ध एवं संपन्न बनाया जाए। उन्होंने किसानों से यह अपील भी कि की मृदा की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए किसान भाई रासायनिक खेती के स्थान पर प्राकृतिक खेती को अपनाएं। शुरुआती वर्षों में प्राकृतिक खेती में उत्पादन कम होगा लेकिन उससे प्रारंभ में मृदा की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी और फिर धीरे-धीरे उत्पादन की क्षमता भी बढ़ती जाएगी। भीलट देव मंदिर अत्यंत रमणीय एवं सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संपूर्ण मंदिर परिसर को देखते हुए कहा कि सतपुड़ा की सुरम्य वादियों में बसा हुआ नागलवाड़ी भीलट देव मंदिर अत्यंत रमणीय एवं सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण स्थल है। भीलट देव के तपस्या स्थल पर बने मंदिर के जीर्णोद्धार में निमाड़ के संत  सियाराम बाबा का भी अमूल्य योगदान है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद सदस्यों के साथ नागलवाड़ी मंदिर दर्शन के बाद सामूहिक फोटो भी खिंचवाया। निमाड़ के खेत और बाड़ियों में उपजने वाली फसलों की प्रदर्शनी का अवलोकन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कैबिनेट से पहले निमाड़ के फार्म/खेतो और बाड़ियों में उपजने वाली फसलों का परिसर में आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी के अवलोकन के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव को किसानों ने निमाड़ की कृषि पद्धतियों के बारे में अवगत कराया। कार्यक्रम स्थल पर आयोजित प्रदर्शनी के सम्बंध में बड़वानी कलेक्टर मती जयति सिंह ने प्रस्तुतिकरण भी दिया। अलग-अलग थीम पर आधारित रही प्रदर्शनी कृषि कैबिनेट के मद्देनजर जिला प्रशासन और कृषि कार्यों से जुड़े विभागों ने प्रदर्शनी में अलग-अलग थीम पर अपना प्रस्तुतिकरण किया गया। इनमें प्राकृतिक खेती क्रियान्वयन और प्रभावी मॉडल, वोकल फ़ॉर लोकल, केले का विकास मॉडल, डॉलर चना संपूर्ण मूल्य श्रृंखला, बड़वानी मिर्च प्लास्टर, तिल उभरती हुई विकासशील फसल, गन्ना आर्थिक और प्रभावी मॉडल, मिशन सिकलसेल उन्मूलन कार्यक्रम, नवाचार वन्य ग्राम समृद्धि अभियान थीम पर आधारित थी।   recent visitors 23

सिंचाई परियोजनाओं को मिली प्रशासकीय स्वीकृति, 86 जनजातीय ग्राम होंगे लाभान्वित

कृषकों का हित और कल्याण शासन की प्राथमिकता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव बड़वानी के पानसेमल और वरला में 2 हजार 67 करोड़ रूपये लागत की माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजनाओं को मिली प्रशासकीय स्वीकृति 86 जनजातीय ग्राम होंगे लाभान्वित मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण और नर्मदा नियंत्रण मंडल की बैठक हुई भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में बड़वानी के नांगलवाड़ी में सोमवार को हुई नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की 269वीं बैठक और नर्मदा नियंत्रण मंडल की 86वीं बैठक में 1 हजार 207 करोड़ 44 लाख रुपए की लागत की पानसेमल माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना और 860 करोड़ 53 लाख रुपए की लागत की वरला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री तथा नर्मदा नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष 2026 में कृषकों का हित और कल्याण शासन की प्राथमिकता है, जिसे ध्यान में रखकर नीतियां बनाई जा रही हैं। इन माइक्रो उद्वहन परियोजनाओं से बड़वानी जिले के लाभान्वित होने वाले पानसेमल तहसील के 53 ग्राम और वरला तहसील के 33 ग्राम ऊंचाई में स्थित होने, अल्पवर्षा क्षेत्र होने और भूजल स्तर अत्यंत कम होने से सिंचाई सुविधा से वंचित रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की 11 जनवरी 2025 की घोषणा के अनुपालन में पानसेमल माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना और 14 नवंबर 2025 की घोषणा के अनुपालन में वरला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना की नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की 269वीं बैठक में प्रशासकीय स्वीकृति की अनुशंसा की गई, जिसे मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में नर्मदा नियंत्रण मंडल की 86वीं बैठक में स्वीकृति प्रदान की गई है। पानसेमल में 22 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र में उपलब्ध होगी सिंचाई सुविधा पानसेमल माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना के माध्यम से बड़वानी जिले की तहसील पानसेमल में 22 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। परियोजना में लगभग 1,207 करोड़ 44 लाख रुपए की लागत से ग्राम सोंदुल से नर्मदा नदी से 7.20 क्यूमेक (74.65 एमसीएम) जल उद्वहन किया जाएगा, जिससे 53 जनजातीय ग्राम लाभान्वित होंगे। परियोजना अंतर्गत भूमिगत प्रेशराइज्ड पाइप्ड नहर प्रणाली से पाइपलाइन बिछाकर सिंचाई व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे कृषक सीधे स्प्रिंकलर और ड्रिप इरीगेशन पद्धति से खेतों में सिंचाई कर सकेंगे। परियोजना में कोई डूब क्षेत्र नहीं है। भूमिगत पाइपलाइन, राइजिंग मेन और ग्रैविटी मेन के लिए 48.79 हेक्टेयर निजी भूमि का अस्थाई भूअर्जन, पंप हाउस और ट्रांसमिशन लाइन निर्माण के लिए 4 हेक्टेयर स्थाई भूअर्जन तथा 18 हेक्टेयर वन भूमि का अर्जन किया जाएगा। परियोजना के तहत 3 पंप हाउस से कुल 339.67 मीटर तक जल उद्वहन का प्रावधान किया गया है, जिसके लिए 5 किलोमीटर लंबी टनल का निर्माण किया जाएगा। परियोजना में कुल 34.60 मेगावाट विद्युत की आवश्यकता होगी जिस पर वार्षिक विद्युत व्यय 34 हजार 249 रुपए प्रति हेक्टेयर रहेगा। वरला के 33 जनजातीय ग्रामों में 15 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र होगा सिंचित वरला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना अंतर्गत बड़वानी जिले की तहसील अंजड़ के ग्राम मोहिपुरा से नर्मदा नदी से 4.96 क्यूमेक (51.42 एमसीएम) जल उद्वहन किया जाएगा जिससे तहसील वरला के 33 जनजातीय ग्रामों में 15 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। परियोजना की कुल लागत 860 करोड़ 53 लाख रुपए प्राक्कलित की गई है, जिसमें 4 पंप हाउस के माध्यम से 390 मीटर तक जल उद्वहन का प्रावधान किया गया है। परियोजना में 30.5 मेगावाट विद्युत आवश्यकता होगी जिस पर 33 हजार 316 रुपए वार्षिक विद्युत व्यय प्रति हेक्टेयर रहेगा। परियोजना के लिए 30 हेक्टेयर वन भूमि, 204.13 हेक्टेयर निजी भूमि का अस्थाई तथा 7.5 हेक्टेयर निजी भूमि का स्थाई भूअर्जन किया जाएगा। अपर मुख्य सचिव तथा उपाध्यक्ष, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण डॉ. राजेश राजौरा ने बताया कि पानसेमल और वरला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजनाओं से लाभान्वित होने वाले ग्राम जनजातीय बहुल होने के साथ वन से घिरे हुए हैं। इन दोनों परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद बड़वानी जिले में कुल 70 प्रतिशत क्षेत्रफल में सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी, जो वर्तमान में 60 प्रतिशत है। उन्होंने परियोजनाओं के विभिन्न घटकों का तकनीकी विवरण प्रस्तुत किया। बैठक में 10 नवंबर 2025 को आयोजित नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की 268वीं बैठक तथा नर्मदा नियंत्रण मंडल की 85वीं बैठक के कार्यवृत्त की पुष्टि भी की गई।   recent visitors 25