अगले शैक्षणिक सत्र से प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 750 सीटें बढ़ जाएंगी

भोपाल मध्य प्रदेश में अगले शैक्षणिक सत्र से 5 नए सरकारी मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे, जो बुदनी, मंडला, श्योपुर, सिंगरौली और राजगढ़ में स्थापित होंगे। इन कॉलेजों में 150-150 सीटों की व्यवस्था होगी, जिससे राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कुल 750 सीटें बढ़ जाएंगी। इसके अलावा, 12 नए प्राइवेट मेडिकल कॉलेज जिला अस्पतालों से जुड़ने के बाद स्थापित किए जाएंगे, जिससे 1200 सीटों की वृद्धि होगी। इस प्रकार, राज्य में कुल 1950 सीटों की बढ़ोतरी की संभावना है। इन नए कॉलेजों के उद्घाटन के बाद राज्य में सरकारी कॉलेजों की संख्या 21 और निजी कॉलेजों की संख्या 15 हो जाएगी, जिससे कुल 36 मेडिकल कॉलेज स्थापित हो जाएंगे। इसके अलावा, 12 नए प्राइवेट कॉलेज पीपीपी मोड पर खोले जाने का प्रस्ताव है, जिसके बाद कुल मेडिकल कॉलेजों की संख्या 48 हो जाएगी। 12 जिलों में खुलेंगे मेडिकल कॉलेज टीकमगढ़, बालाघाट, धार, सीधी, खरगोन, पन्ना, बैतूल, भिंड, नर्मदापुरम, देवास, मुरैना और कटनी में मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे। इन कॉलेजों को पीपीपी मोड पर स्थापित किया जाएगा। 2003 तक राज्य में केवल 5 सरकारी मेडिकल कॉलेज थे, लेकिन पिछले 20 वर्षों में 12 नए मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं, और अब 12 और मेडिकल कॉलेज पीपीपी मोड पर स्थापित किए जाएंगे। इस प्रकार, राज्य में 50 मेडिकल कॉलेजों का लक्ष्य तय किया गया है। साथ ही 12 नए प्राइवेट कॉलेज भी खुलेंगे। जिला अस्पतालों से संबद्धता के बाद खुलने वाले निजी कॉलेजों में 1200 सीटें रहेंगी। 1950 मेडिकल सीटें बढ़ने से MBBS की पढ़ाई करने वाले छात्रों का भविष्य संवरेगा। MP में डॉक्टरों की कमी भी दूर होगी। लोगों को बेहतर इलाज भी मिलेगा। 17 नए कॉलेज खुलते ही MP में कुल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 47 हो जाएगी। इन जिलों में खुलेंगे प्राइवेट मेडिकल कॉलेज बता दें कि MP में 2003 तक सिर्फ 5 सरकारी मेडिकल कॉलेज थे। 20 साल में 12 नए मेडिकल कॉलेज खुले। अब एक साथ फिर 5 सरकारी और 12 निजी मेडिकल कॉलेज खुलेंगे। निजी कॉलेज पीपीपी मोड पर खोले जाएंगे। कटनी, टीकमगढ़, बालाघाट, धार, सीधी, खरगोन, पन्ना, बैतूल, भिंड, नर्मदापुरम्, देवास और मुरैना में निजी मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे। एमपी के इन जिलों में हैं मेडिकल कॉलेज बता दें कि अभी एमपी के 17 जिलों में सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, सागर, शहडोल, विदिशा, रतलाम, दतिया, खंडवा, शिवपुरी, छिंदवाड़ा, सतना, सिवनी, मंदसौर और नीमच को मेडिकल कॉलेज की सौगात मिल चुकी है। सरकारी कॉलेजों में मेडिकल की कुल 2180 सीटें हैं। प्राइवेट की 1950 सीटें मिलाकर कुल सीटों की संख्या 4130 है। नए कॉलेज खुलने पर टॉप-10 में आ जाएगा एमपी देशभर में सबसे ज्यादा 72 मेडिकल कॉलेज तमिलनाडु में हैं। 70 मेडिकल कॉलेज के साथ कर्नाटक दूसरे नंबर पर है। 68 मेडिकल कॉलेजों के साथ उत्तर प्रदेश तीसरे स्थान पर है। मध्यप्रदेश फिलहाल 30 मेडिकल कॉलेज हैं। एमपी का नंबर देश में 10वां है। अगले साल 47 मेडिकल कॉलेज होने पर एमपी इस सूची में छठवें स्थान पर पहुंच जाएगा। PPP मोड पर खोले जाएंगे यह कॉलेज कटनी, टीकमगढ़, बालाघाट, धार, सीधी, खरगोन, पन्ना, बैतूल, भिंड, नर्मदापुरम्, देवास और मुरैना में पीपीपी मोड पर कॉलेज स्थापित किए जाएंगे। बता दें कि देश में सबसे ज्यादा मेडिकल कॉलेज तमिलनाडु (72) में हैं, इसके बाद कर्नाटक (70) और उत्तर प्रदेश (68) का स्थान है। मध्य प्रदेश में वर्तमान में 36 मेडिकल कॉलेज हैं, जो देश में 10वें स्थान पर है। लेकिन अगले साल 48 कॉलेज हो जाने से प्रदेश 6वें स्थान पर पहुंच जाएगा। recent visitors 74

पीएम मोदी के सुरक्षा घेरे में पहली बार दिखी महिला कमांडो, वायरल हो रही SPG कमांडो की ये धाकड़ तस्वीर

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में कथित तौर पर शामिल एक महिला एसपीजी (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप) कमांडो की तस्वीर इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। इस तस्वीर ने ऑनलाइन बहस को जन्म दे दिया है। जहां कुछ लोगों ने दावा किया कि यह पहली बार है जब किसी महिला कमांडो को प्रधानमंत्री की सुरक्षा में देखा गया है। वहीं, अन्य ने बताया कि यह महिला कमांडो पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की सुरक्षा में भी देखी जा चुकी हैं। तस्वीर शेयर कर रहे भाजपा सांसद कई भाजपा सांसद इस तस्वीर को शेयर कर रहे हैं। मंडी से सांसद कंगना रनौत ने भी इसे अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर किया है।केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रधानमंत्री की सुरक्षा में तैनात महिला SPG कमांडो की तस्वीर शेयर करते हुए उनकी बहादुरी और प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने लिखा, "भारत की शान, नारी शक्ति की पहचान! SPG में ड्यूटी पर तैनात हमारी साहसी महिला सुरक्षा अधिकारी देश की सेवा और सुरक्षा में नया मानदंड स्थापित कर रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में नारी शक्ति हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही है। यह नया भारत है, जहां महिलाएं आत्मनिर्भरता और ताकत की मिसाल बन रही हैं।” चिक्काबल्लापुरा से भाजपा के लोकसभा सांसद डॉक्टर के सुधाकर ने भी यही तस्वीर शेयर की है। उन्होंने लिखा, "प्रधानमंत्री की एसपीजी में महिला कमांडो! अग्निवीर से लेकर लड़ाकू पायलट तक, लड़ाकू पदों से लेकर प्रधानमंत्री की एसपीजी में कमांडो तक, सशस्त्र बलों में महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और महिलाएं आगे बढ़कर नेतृत्व कर रही हैं। महिलाओं को और अधिक शक्ति मिले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को धन्यवाद।" पहले भी देखी जा चुकी हैं महिला SPG कमांडो इसके अलावा, कई अन्य लोगों ने भी सोशल मीडिया पर इस तस्वीर को शेयर करते हुए दावा किया है कि ऐसा पहली बार है जब पीएम की सुरक्षा में कोई महिला SPG कमांडो तैनात है। ऐसा ही दावा सात साल पहले भी किया गया था जब एक वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा में एक महिला कमांडो को देखा गया था। यानी ये साफ है कि महिला SPG कमांडे पहले भी पीएम मोदी के सुरक्षा घेरे में देखी जा चुकी हैं। जानकारी के अनुसार, एसपीजी ने 2013 से महिला कमांडो को अपने दस्ते में शामिल करना शुरू किया था, जिससे महिलाओं को प्रधानमंत्री की सुरक्षा में भागीदारी का अवसर मिला। कथित तौर पर यह तस्वीर संसद की है, जहां महिला एसपीजी कमांडो तैनात हैं। इन कमांडो को आम तौर पर महिला विजिटर्स की तलाशी लेने के लिए गेट पर तैनात किया जाता है और वे परिसर में प्रवेश करने या बाहर निकलने वाले लोगों की निगरानी करने में भी शामिल होती हैं। इसके अलावा, जब कोई महिला अतिथि प्रधानमंत्री से मिलती है, तो महिला एसपीजी अधिकारी ही सुरक्षा जांच, एस्कॉर्टिंग और प्रधानमंत्री तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होती हैं। हालांकि जो तस्वीर वायरल हो रही है उसमें दिख रही महिला अधिकारी PM मोदी की सुरक्षा में नहीं राष्ट्रपति मुर्मू की सुरक्षा में तैनता थीं। बताया जा रहा है कि यह फोटो 26 नवंबर को उस वक्त की है जब राष्ट्रपति मुर्मू संसद को संबोधित करने जा रही थीं। 2015 से, महिलाओं को एसपीजी की क्लोज प्रोटेक्शन टीम (CPT) में भी शामिल किया गया है। यानी अब पीएम के सबसे करीबी सुरक्षा घेरे में भी महिला कमांडो तैनात होती हैं। प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं के दौरान, महिला एसपीजी कमांडो सुरक्षा दल का हिस्सा होती हैं। वर्तमान में, एसपीजी में कथित तौर पर करीब 100 महिला कमांडो हैं। पहली बार 2013 में महिला एसपीजी कमांडो को किसी उच्च-स्तरीय हस्ती की सुरक्षा में तैनात किया गया था। उस समय दो महिला कमांडो को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पत्नी गुरशरण कौर की सुरक्षा करते देखा गया था। महिला कमांडो की उपस्थिति प्रधानमंत्री की सुरक्षा के प्रति एसपीजी की व्यापक सोच और समावेशी दृष्टिकोण को दर्शाती है। यह कदम न केवल महिलाओं को समान अवसर प्रदान करता है, बल्कि सुरक्षा क्षेत्र में उनकी बढ़ती भागीदारी को भी दर्शाता करता है। स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप क्या है? स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) भारत का एक बेहद खास और एलीट सुरक्षा बल है, जिसे देश के सर्वोच्च नेतृत्व की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गठित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री, उनके निकट परिजन, और पूर्व प्रधानमंत्रियों को संभावित खतरों से सुरक्षित रखना है। एसपीजी की स्थापना 1985 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद की गई थी। इसे संसद द्वारा 1988 में पारित एसपीजी अधिनियम के तहत कानूनी मान्यता दी गई। इस अधिनियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि प्रधानमंत्री और उनके परिवार को किसी भी आतंकी, विदेशी या अन्य खतरों से अत्यंत सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जाए।   recent visitors 188

मध्य प्रदेश में सक्रिय लगभग 75 नक्सलियों में 40 प्रतिशत महिलाएं हैं, कुछ नक्सली प्रेमी-प्रेमिका की तरह रह रहे हैं: रिपोर्ट

भोपाल मध्य प्रदेश में सक्रिय लगभग 75 नक्सलियों में 40 प्रतिशत महिलाएं हैं। यह जानकारी पुलिस की खुफिया रिपोर्ट में सामने आई है। ये सभी अलग-अलग समूह में पुरुषों के साथ काम कर रही हैं। यह भी पता चला है कि कुछ नक्सली प्रेमी-प्रेमिका की तरह रह रहे हैं। गांव के लोगों के साथ संवाद करने, उनकी समस्याएं जानने, पर्चा बांटने, लोगों को बरगलाने या किसी तरह की सहायता मांगने के लिए नक्सली महिलाओं को ही आगे करते हैं। महिलाएं गांव के लोगों के बीच आसानी से घुल-मिल जाती हैं। इससे उन्हें गांव में प्रशासनिक गतिविधियों की जानकारी भी मिलती रहती है। पुरुषों की तरह महिलाएं भी छत्तीसगढ़ या महाराष्ट्र से ही हैं। अधिकतर महिलाओं की उम्र 25 से 40 वर्ष की है।   इस बार मुठभेड़ में नहीं फेंका पर्चा अभी तक ऐसा होता रहा कि नक्सली मुठभेड़ के दौरान अपने मांगों से जुड़ा पर्चा फेंक कर जाते थे। पिछले दिनों बालाघाट में हुई मुठभेड़ में उन्होंने ऐसा नहीं किया था। यह जरूर पता चला है कि इसके पहले कुछ गांवों में उन्होंने तेंदूपत्ता की राशि बढ़ाने, बांस कटाई की दर बढ़ाने और मजदूरी बढ़ाने के लिए पर्चे फेंके थे। गांव के लोगों का समर्थन पाने के लिए वह ऐसी मांग रखते हैं। नक्सलियों की मांग के अनुसार नहीं करते काम पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने कहा कि हम उनकी मांग के हिसाब से नहीं बल्कि अन्य विभाग और एजेंसियों से मिलकर विकास की गतिविधियों पर विशेष ध्यान देते रहे हैं। प्रभावित क्षेत्र में संचार सुविधाएं बढ़ाने के लिए मोबाइल टावर का निर्माण, सड़क निर्माण, सरकारी योजनाओं का लाभ आमजन तक पहुंचाने के लिए विशेष शिविर लगाने का काम करते हैं। निजी कंपनियों से कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी (सीएसआर) से भी काम कराए जा रहे हैं। recent visitors 113

मुख्यमंत्री ने कहा- मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए नए थर्मल पॉवर स्टेशन की स्थापना की जाएगी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए नए थर्मल पॉवर स्टेशन की स्थापना की जाएगी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कोल आधारित विद्युत उत्पादन के लिए कोल आवंटन के लिए स्वीकृतिप्रदान की है। इससे 4100 मेगावॉट विद्युत उत्पादन के लिए थर्मल पॉवर स्टेशन की स्थापना की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री श्री मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने सभी विभागों को प्रगति के अवसर दिये हैं। वे जानते हैं कि बिजली के बिनाविकास की कल्पना संभव नहीं है। यह एक बड़ा अवसर है, जिससे हम प्रदेश में ही स्वयं के पॉवर प्लांट लगा सकते हैं। कोल आवंटन करेगा संजीवनी का काम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में हम आज भी सरप्लस की स्थिति में हैं, परंतु औद्योगिक विकास के लिए नए उद्योगों की स्थापना के परिणामस्वरूप बिजली की खपत में भी निरंतर वृद्धि होती जा रही है। भविष्य की दृष्टि से भी हमें नए थर्मल पॉवर स्टेशन की आवश्यकता होगी। यह कोल आवंटन उसमें संजीवनी की तरह काम करेगा। हम थर्मल पॉवर के नए स्टेशन की स्थापना के लिए उद्यमियों को प्रेरित करेंगे। मुख्यमंत्री डा. यादव ने कहा कि साथ ही राज्य नवकरणीय ऊर्जा की ओर भी समान रूप से आगे बढ़ रहा है। 25 हजार करोड़ रूपये का प्राप्त होगा निवेश उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश की आगामी लंबी अवधि की विद्युत मांग के आंकलन के आधार पर 27 नवम्बर को भारत सरकार की उच्च स्तरीय अंतर्विभागीय समिति द्वारा प्रदेश के ऊर्जा विभाग के प्रस्तुतिकरण के आधार पर कुल 4100 मेगावॉट के नए थर्मल पॉवर प्लांट लगाने के लिये कोयला आवंटन स्वीकृत किया गया है। इस संबंध में संयंत्र लगाने के लिये प्रदेश के ऊर्जा विभाग द्वारा निविदा जारी की जायेगी। इससे लगभग 25 हजार करोड़ रुपये का निवेश प्राप्त होगा। साथ ही हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिलेंगे। प्रदेश उद्योग, घरेलू एवं कृषि सिंचाई के लिये सस्ती और गुणवत्तापूर्ण ऊर्जा प्रदाय करेगा और ऊर्जा उत्पादन में आत्म-निर्भर बना रहेगा।   recent visitors 69

किसी भी देश या प्रदेश की आर्थिक, सामाजिक, और सांस्कृतिक विकास की गति किसानों के उत्थान से ही संभव हो सकती है : नारायण सिंह कुशवाह

भोपाल नारायण सिंह कुशवाह देश और प्रदेश की उन्नति सर्वोपरि है। इसके लिए किसानों को आर्थिक दृष्टि से सशक्त करना आवश्यक है, जिससे किसान संपन्न हो सकें और देश की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभा सकें। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि किसी भी देश या प्रदेश की  आर्थिक, सामाजिक, और सांस्कृतिक विकास की गति किसानों के उत्थान से ही संभव हो सकती है। इसके लिए प्रदेश के विकास में उद्यानिकी भी महत्वपूर्ण योगदान कर रहा है। इसके लिये नवाचार और तकनीकी सुधार किये जा रहे है। देश के 10% क्षेत्रफल वाले राज्य मध्यप्रदेश में देश की लगभग 7% आबादी निवास करती है। यहां 11 कृषि-जलवायु क्षेत्रों में विभिन्न फसलों का उत्पादन किया जाता है। राज्य की कृषि उपज में विविधता मुख्यतः नर्मदा नदी और उसकी सहायक नदियों पर निर्भर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में वर्तमान सरकार परिणाम देने वाली नीतियों के माध्यम से उद्यानिकी और खाद्य प्र-संस्करण के क्षेत्र में नवाचार और प्रगति के नए अध्याय लिख रही है।  मध्यप्रदेश में उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है, उद्यानिकी फसलें किसानों की आय को आसानी से दोगुना करने में सहायक होती हैं। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा खाद्य प्र-संस्करण की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। किसानों को उद्यानिकी फसलों की खेती और खाद्य प्र-संस्करण के नए तरीकों से अवगत कराया जा रहा है। वर्तमान में  मध्यप्रदेश उद्यानिकी फसलों के उत्पादन में देश में अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। प्रदेश संतरा, धनिया मसाले तथा औषधीय एवं सुगंधीय पौधे  उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। इसके अतिरिक्त प्रदेश टमाटर, लहसुन, हरी मटर, अमरूद ,फूल गोभी, मिर्च एवं  प्याज  उत्पादन में  दूसरे तथा नीबू वर्गीय फल, लाल मिर्च, बंद गोभी एवं फूल उत्पादन में तीसरे स्थान पर है । राज्य में उद्यानिकी का रकबा बढ़कर लगभग 27 लाख हेक्टेयर हो गया है। राज्य सरकार  की नीतियों से प्रदेश में उद्यानिकी के प्रति किसानों का रुझान बढ़ा है। इस कारण रकबा 2019-20 में 21.75 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2023-24 में 26.51 लाख हेक्टेयर हो गया है। लगभग 23.72 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उत्पादन भी लगभग 27 फीसदी बढ़ा है। वर्ष 2019-20 में जो उत्पादन 317.36 लाख मी. टन था, जो बढ़कर अब 404.24 लाख मी. टन हो गया है। किसानों को उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण विभाग द्वारा फूड प्रोसेसिंग इकाईयाँ स्थापित करने के लिए अनुदान दिया जाता है। सरकार से अनुदान लेकर किसान फूड प्रोसेसिंग इकाईयाँ स्थापित कर सकते हैं। साथ ही अनुदान के आधार पर किसान छोटे, मध्यम और बड़े कोल्ड स्टोर भी स्थापित कर सकते हैं। खाद्य प्र-संस्करण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश अपने समृद्ध कृषि संसाधन और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति का उपयोग कर, 8.3% की औसत /वार्षिक दर से बढ़ रहा है, जो देश की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है. उद्यानिकी उत्पादों के सुरक्षित भंडारण के लिए 21530.26 लाख रुपए की अनुदान सहायता से 183 कोल्ड स्टोरेज का निर्माण कर 8.05 लाख मीट्रिक टन भंडारण क्षमता विकसित की गई है। वहीं प्याज भंडारण के लिए 23667.71 लाख रुपए का अनुदान देकर 66500 मीट्रिक टन भंडारण क्षमता किसानों के खेतों पर निर्मित की गई है। प्रदेश में बागवानी को शिखर पर ले जाने के प्रयासों में राज्य सरकार द्वारा प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना (पी.एम.एफ.एम.सी.) पर ड्रॉप मोर क्रॉप (पी.पी.एम.सी), एकीकृत बागवानी विकास मिशन (एम.आई.डी.एच.) एवं राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आर.के.वी.वाय.) के तहत वर्ष 2024-25 में 528 करोड़ 91 लाख रुपए की कार्ययोजना मंजूर की गई है। राज्य में उद्यानिकी उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए 16 विभिन्न बागवानी उत्पादों को जी.आई. टैग के लिए पंजीयन कराया गया है। सूक्ष्म सिंचाई द्वारा राज्य में 14 हजार 900 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में ड्रिप एवं स्प्रिंकलर लगाए गए हैं, जिसमें लगभग 12 हजार 790 हितग्राहियों को 114 करोड़ 76 लाख रुपए का अनुदान दिया गया है। इजराइल तकनीक के समन्वय से प्रदेश में मुरैना में उच्च गुणवत्ता वाली सब्जी के लिए, छिंदवाड़ा में नींबूवर्गीय फसलों के लिए तथा हरदा में निर्यात करने लायक आम एवं सब्जी सेन्टर की स्थापना की जाएगी, जिसके लिए 14 करोड़ 74 लाख की योजना का अनुमोदन किया गया है। प्रदेश सरकार की नई पहल ई-नर्सरी पोर्टल से घर, गार्डन या खेतों में उत्तम गुणवत्ता के पौधे लगाने के लिये, अच्छे और स्वस्थ पौध के लिये अब नर्सरी के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं है। उद्यानिकी विभाग द्वारा ई-नर्सरी पोर्टल पर 300 से अधिक नर्सरियों की जानकारी ऑनलाईन उपलब्ध करवाई गई है। इससे पौधों का क्रय-विक्रय आसानी से किया जा सकता है। 24 बागवानी उत्पाद जिनकी खेती आमतौर पर राज्य भर में की जाती है, जिनमें कोदो-कुटकी, बाजरा, संतरा/नींबू, सीताफल, आम, टमाटर, अमरूद, केला, पान, आलू, प्याज, हरी मटर, मिर्च, लहसुन अदरक, धनिया, सरसों, गन्ना, आंवला और हल्दी शामिल हैं। छिंदवाड़ा, आगर-मालवा, शाजापुर, राजगढ़, मंदसौर, बैतूल और सीहोर जैसे जिले संतरे के उत्पादन के लिए जाने जाते हैं जो संतरे के प्र-संस्करण उद्योग स्थापित करने के लिए आदर्श हैं। इसी तरह बैतूल, कटनी, अनूपपुर, रीवा, सिंगरौली और रायसेन जिले जो आम की खेती के लिए प्रसिद्ध हैं, वहां कई आम आधारित खाद्य प्र-संस्करण उद्योग हैं जो स्थापित होने के विभिन्न चरणों में हैं। मध्यप्रदेश उद्यानिकी विभाग को उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार एवं प्रशंसा-पत्र भी प्राप्त हुए हैं। जुलाई 2024 को प्रगति मैदान नई दिल्ली में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय एग्री एवं हार्टी एक्सपो-2024 में उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण विभाग मध्यप्रदेश को सर्वोत्तम बागवानी पद्धतियों और सब्जियों एवं ताजे फलों को बढ़ावा देने के लिए प्रथम पुरस्कार मिला। एमपीएफएसटीएस पोर्टल के संचालन के लिए वर्ष 2023-24 में राष्ट्रीय स्तर पर सिल्वर स्कॉच पुरस्कार, अंतर्राष्ट्रीय कृषि तथा उद्यानिकी एक्सपो-2023 में 'एक्सीलेंस अवॉर्ड, नेशनल ओडीओपी अवॉर्ड सेरेमनी-2023 में प्रदेश के बुरहानपुर जिले को केला उत्पादन तथा प्र-संस्करण में उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कृत किया गया। वहीं वर्ष 2022-23 में 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप योजना के तहत बेहतर क्रियान्वयन के लिए उद्यानिकी विभाग को स्कॉच अवार्ड प्राप्त हुआ। प्रदेश  में फसल क्षेत्र का विस्तार और उत्पादन में सुधार के लिए उच्च गुणवत्ता वाले पौधों और उन्नत बीजों की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है। उत्पादन के पहले और बाद में प्रबंधन तकनीकों के जरिए फसल की गुणवत्ता और उत्पादन … Read more

राज्यपाल ने इन्दौर में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री के साथ ईएजी प्लेनरी देशों की बैठक का किया शुभारम्भ

इन्दौर ईएजी (यूरेशियन ग्रुप) देशों की बैठक मनी लॉन्ड्रिंग एवं आतंकवाद की फंडिंग रोकने में मील का पत्थर सिद्ध होगी। सभी बड़े देशों को एकजुट होकर मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग को रोकने के लिए एकजुट होकर बड़े कदम उठाने की आवश्यकता है। विश्व में आतंकवाद पर नियंत्रण के लिए सभी ईएजी ग्रुप सदस्यों देशों का एकजुट होना बड़ा कदम है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए गए हैं। इन्दौर में गुरूवार को 41वीं ईएजी प्लेनरी देशों की बैठक के उद्घाटन सत्र में माननीय राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कही। राज्यपाल पटेल ने कहा कि भारत में डिमॉनिटाइजेशन, डिजिटलाइजेशन से पारदर्शी वित्तीय व्यवस्था के लिए विशेष प्रयास हुए। उन्होंने कहा आधुनिक तकनीक के उपयोग से अवैध वित्तीय गतिविधियों को रोकने के लिए और अधिक विशेष प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। इसके लिए ईएजी ग्रुप देश को मजबूत कूटनीतिक और सशक्त प्रयास करने की आवश्यकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति के लिए ईएजी ग्रुप देशों के प्रयास प्रभावी परिणामकारक सिद्ध होंगे। कार्यक्रम को केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संबोधित करते हुए कहा वित्त शोधन और आतंकवाद को वित्त पोषण की रोकथाम के लिए यूरेशियन देशो का ग्रुप महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा भारत सरकार टेरर फंडिंग के खिलाफ पूरी मजबूती के साथ कार्य कर रही है। भारत में काला धन अधिनियम, आर्थिक अपराध को रोकने के लिए विशेष प्रयास  किए गए है और यह लगातार जारी हैं। भारत में साफ और पारदर्शी वित्तीय प्रणाली के लिए जीएसटी, डिजिटल इंडिया के तहत विशेष प्रयास किए गए हैं। यूपीआई डिजिटल लेनदेन को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा हैं। भारत में परिवर्तन निदेशालय लगातार सशक्त हो रहा है। भारत की सभी एजेंसियां द्वारा मिलकर आतंकवाद और उग्रवाद को धन पोषित करने वालों, मनी लांड्रिंग पर प्रभावी और कड़ी कार्रवाई हो रही हैं। भारत के इन प्रयासों को और सशक्त बनने में ईएजी ग्रुप की बैठक महत्वपूर्ण सिद्ध होगी। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने सम्बोधित करते हुए कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की नगरी में ईएजी ग्रुप की बैठक गर्व का विषय हैं। उन्होंने कहा मनी लॉन्ड्रिंग सीधे तौर पर किसी देश की अर्थव्यवस्था के लिए खतरा है, लेकिन जब यह आतंकवाद को पोषित करती है, तब विश्व शांति और सद्भाव के समक्ष गंभीर चुनौतियों को जन्म देती है। आतंकवाद को मिलने वाली वित्तीय मदद समस्त विश्व के लिए चिंता का सबब बनी हुई है इससे निपटने के लिए विश्व के बड़े देशों को एकजुट होना होगा। यह आयोजन वैश्विक अखंडता और मानवता के हित की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा नक्सलवाद और ड्रग्स का व्यापार भी मनी लॉन्ड्रिंग से बढ़ रहा हैं। इससे निपटना हमारे लिए बड़ी चुनौती हैं। भारत के प्रयास सार्थक, प्रभावी और प्रशंसनीय ईएजी ग्रुप अध्यक्ष यूरी चिकानचिन ने कहा ईएजी ग्रुपों में भारत के प्रयास सार्थक, प्रभावी और प्रशंसनीय हैं। ग्रुप देशों ने विभिन्न सत्रों में बैठक के दौरान टेरर फंडिंग रोकथाम प्रयासों, मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णयों पर चर्चा की गई हैं। उन्होंने कहा भविष्य की चुनौतियों और उनकी रोकथाम के लिए भी बैठक में चर्चा की गई है। यूरेशियन सहित अफ्रीकी देशों सहित विश्व के अन्य क्षेत्रों में आतंकवाद को फंडिंग एक गंभीर चुनौति है। ईएजी ग्रुप की बैठक में तकनीकी और प्रौद्योगिकी के बेहतर उपयोग के संबंध में चर्चा हुई हैं। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत के प्रयास प्रशंसनीय हैं। भारत को ईएजी ग्रुप देशों की बैठक की मेजबानी मिलना गर्व की बात भारत सरकार के वित्त सचिव संजय मल्होत्रा ने आतंकवाद को वित्त पोषण, मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम, पारदर्शी अर्थव्यवस्था के लिए उठाए गए कदमों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा यूरेशियन क्षेत्र में टेरर फंडिंग, मनी लांड्रिंग सहित नई चुनौतियों पर नियंत्रण के लिए ईएजी ग्रुप की महत्वपूर्ण भूमिका हैं। उन्होंने कहा यह हमारे लिए गर्व की बात है कि ईएजी ग्रुप के जो भी देश शामिल है उनमें से कोई भी ग्रे सूची में नहीं है। उन्होंने कहा ग्रुप देशों के बीच बेहतर समन्वय के लिए विशेष प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। भारत को ईएजी ग्रुप देश की बैठक की मेजबानी का अवसर मिला। यह भारत के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा आवश्यकता है कि वर्तमान समय में टेक्नोलॉजी और एआई का उपयोग सुरक्षा के बेहतर उपायों के लिए किया जाए। उन्होंने कहा मनी लांड्रिंग के साथ-साथ फाइनेंशियल फ्रॉड प्रभावित लोगों को असेट्स रिकवरी के लिए भी बेहतर कार्य करने की आवश्यकता है। भारत द्वारा इस क्षेत्र में भी प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। कार्यक्रम में महापौर इन्दौर पुष्यमित्र भार्गव ने ईएजी अध्यक्ष यूरी चिकानचिन को इंदौर में मौजूद यूरेशियन गार्डन का प्रमाण पत्र भेंट किया। उद्घाटन सत्र का शुभारंभ राज्यपाल पटेल, केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री चौधरी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। बैठक में केंद्रीय वित्त अतिरिक्त सचिव विवेक अग्रवाल ने कार्यक्रम के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम में ईएजी प्लेनरी देशों के डेलिगेट्स एवं प्रतिनिधि गण उपस्थित थे।   recent visitors 63

ईटखेड़ी में 29 नवंबर से दो दिसंबर इज्तिमा का आयोजन, ट्रैफिक व्यवस्था न बिगड़े इसके लिए भोपाल में ट्रैफिक प्लान बनाया

भोपाल राजधानी भोपाल के ईटखेड़ी के घासीपुरा में 29 नवंबर से दो दिसंबर इज्तिमा का आयोजन होने जा रहा है. इज्तिमा में शामिल होने के लिए देश सहित विदेशों से भी बड़ी संख्या में लोग आएंगे. इस दौरान भोपाल की सड़कों पर बड़ी संख्या में लोग होंगे, ऐसे में सड़कों पर ट्रैफिक पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा. ट्रैफिक व्यवस्था न बिगड़े इसके लिए भोपाल में ट्रैफिक प्लान बनाया गया है. स्टेशन-एयरपोर्ट के लिए जानें रूट भोपाल शहर के मुख्य रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले वाहन रोशनपुरा, लिंक रोड 2, बोर्ड ऑफिस, चेतक ब्रिज से प्रभात चौराहा, 80 फीट रोड होकर प्लेटफार्म-1 की ओर आ सकेंगे. वहीं एयरपोर्ट की ओर से जाने वाले वाहन भदभदा चौराहा, नीलबड़, रातीबड़, संगरिया रोड से खजूरी बाईपास, मुबारकपुर बाईपास होकर एयरपोर्ट जा सकेंगे. यात्री बसों का यह रूट सागर, छतरपुर, दमोह, रायसेन, होशंगाबाद, जबलपुर, छिंदवाड़ा और बैतूल की तरफ से आने वाली बसें 11 मील, मिसरोद, आरएसएस तिराहा, हबीबगंज नाका, सांची दुग्ध संघ होते हुए आईएसबीटी की ओर आवाजाही करेंगी. आईएसबीटी से आगे यात्री बसों का नादरा बस स्टैंड की ओर प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा. वहीं इंदौर से भोपाल आने वाली बसें हलालपुर बस स्टैंड का उपयोग करें. इंदौर और उज्जैन की ओर से आने वाली बसें खजूरी बाईपास, बैरागढ़ से हलालपुर बस स्टैंड पर अपनी यात्रा समाप्त करेंगी. हलालपुर बस स्टैंड से आगे लालघाटी की ओर प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा. इसके साथ ही गुना, राजगढ़ और ब्यावरा की तरफ से आने वाली बसें श्यामपुर, परवलिया होते हुए मुबारकपुर बाईपास से खजूरी रोड, बैरागढ़ होकर हलालपुर बस स्टैंड की ओर जा सकेगी. विदिशा की ओर से आने वाली बसें सूखी सेवनिया, चोपड़ा बाईपास से भानपुर रोटरी पर समाप्त होंगी. बैरसिया की तरफ से आने वाली बसें गोलखेड़ी से तारा सेवनिया, परवलिया रोड, मुबारकपुर बाईपास, खजूरी बाईपास से बैरागढ़ हलालपुर बस स्टैंड पर समाप्त होंगी. एक दिसंबर को भारी वाहनों की व्यवस्था एक दिसंबर रात 10 बजे से भोपाल के सीमावर्ती जिलों से शहर में सभी प्रकार के भारी मालवाहक वाहनों का प्रवेश पूरी तरह से बंद रहेगा. इंदौर और सीहोर की तरफ से आने वाली भारी मालवाहक वाहन भोपाल में प्रवेश नहीं कर सकेंगे. इन्हें सीहोर जिले की सीमा पर रोका जाएगा या डायवर्ट कर दिया जाएगा. गुना और राजगढ़ की ओर से आने वाले वाहनों को ब्यावर पर रोककर श्यामपुर और सीहोर के रास्ते डायवर्ट किया जाएगा. रायसेन, सलामतपुर और मंडीदीप से आने वाले भारी वाहनों को मंडीदीप और रायसेन सीमा पर रोका जाएगा. इंदौर की ओर से आने वाले हल्के वाहन, जो होशंगाबाद जाना चाहते हैं, वे सीहोर से झागरिया, भदभदा, डिपो चौराहा, माता मंदिर, लिंक रोड नंबर 2, बीजेपी कार्यालय और मानसरोवर होते हुए मिसरोद रोड की ओर जा सकेंगे. बैरसिया से भोपाल की तरफ आने वाले आम यात्री वाहन गुलखेड़ी, राताताल, तारा सेवनिया और परवलिया होते हुए भोपाल में प्रवेश कर सकेंगे. इज्तिमा में पार्किंग व्यवस्था     सीहोर, राजगढ़ की ओर से आने वाले वाहन मुबारकपुर चौराहा से मीना चौराहा बाईपास होकर निर्धारित इज्तिमा पार्किंग में अपना वाहन पार्क कर सकेंगे.     भोपाल शहर की ओर से आने वाले वाहन लाम्बाखेड़ा बाईपास चौराहा होकर निर्धारित इज्तिमा पार्किंग में अपना वाहन पार्क कर सकेंगे.     बैरसिया की ओर से आने वाले वाहन गोल खेड़ी जोड़ होकर निर्धारित इज्तिमा पार्किंग में अपना वाहन पार्क कर सकेंगे.   recent visitors 145