मध्य प्रदेश में अब सिर्फ तीन नक्सली बचे, इन्हें पकड़ने के लिए सालाना 70 करोड़ रुपए खर्च

भोपाल मध्य प्रदेश पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में अब सिर्फ 3 नक्सली बचे हैं. ये तीनों नक्सली बालाघाट और मंडला जिले में एक्टिव हैं और इनके खात्मे के लिए राज्य में 7500 से ज्यादा सुरक्षा बल तैनात है. पुलिस के मुताबिक ये तीनों बालाघाट और मंडला में एक्टिव हैं। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने इन तीनों को पकड़ने और खत्म करने के लिए 7 हजार 500 से ज्यादा सुरक्षा बलों को तैनात किया है। हालांकि, ये अभी भी सुरक्षा बलों की पकड़ से दूर नजर आ रहे हैं। इन नक्सलियों को खत्म करने के लिए दो जिलों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 3 बटालियन समेत 7 हजार 500 से ज्यादा पुलिस बल तैनात हैं। बता दें कि इस मिशन में एक आईजी, एक डीआईजी और 6 एसपी स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इसके बाद राज्य सरकार ने केंद्र से सीआरपीएफ की दो और बटालियन मांगी हैं ताकि इन तीनों नक्सलियों को पकड़ा जा सके। 24 साल से गिरफ्तार नहीं     अधिकारियों के मुताबिक, पुलिस पिछले 24 सालों में इन 3 नक्सलियों में से एक को भी गिरफ्तार नहीं कर पाई है। आखिरी बार साल 2000 में एक नक्सली पकड़ा गया था, उसे भी 2004 में रिहा कर दिया गया था। अफसरों का कहना है कि इन नक्सलियों का ग्रामीण इलाकों में मजबूत नेटवर्क है। ये छापेमारी से पहले ही फरार हो जाते हैं। पुलिस का ये भी कहना है कि यहां छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से 60 नक्सलियों का मूवमेंट है, इसलिए भारी सुरक्षा बल तैनात हैं। केवल बालाघाट में 6 हजार जवान तैनात बता दें कि अकेले बालाघाट में 6 हजार पुलिस जवान तैनात हैं। जबकि मंडला में 1 हजार 500 पुलिस बल हैं। इन जवानों को तैनात करने की वजह यह बताई जा रही है कि बालाघाट में दूसरे राज्यों यानी छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र से करीब 60 नक्सलियों का मूवमेंट रहता है। इनके साथ मुठभेड़ होती रहती है, जिसके चलते यहां बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। किसकी कितनी टीमें तैनात     सीआरपीएफ – 3 बटालियन     एसएएफ – 1 बटालियन     हॉक फोर्स – 1 बटालियन     कोबरा – 1 कंपनी     स्टेट आईबी टीम 1     जिला पुलिस बल 2500 ये हैं तीन नक्सली जिन तीन नक्सलियों की तलाश पूरी पुलिस फोर्स कर रही है उनमें पहला नाम दीपक उर्फ ​​सुधाकर का है, जिसकी उम्र 50 साल है। उस पर 29 लाख का इनाम घोषित है। बताया जा रहा है कि वो बालाघाट के ग्राम पालागोंदी चौकी सोनावाली थाना रूपझर का रहने वाला है। दीपक पर बालाघाट में 125 मामले दर्ज हैं। दूसरी नक्सली जिसकी पुलिस तलाश कर रही है उसका नाम संगीता उर्फ ​​सेवंती पंद्रे है, जिसकी उम्र 38 साल है। इस पर 14 लाख का इनाम है। तीसरे का नाम राम सिंह उर्फ ​​संपत्ता है, जिसकी उम्र 60 साल है। पुलिस ने उस पर भी 14 लाख का इनाम रखा है। वो 1991 से सक्रिय है। उस पर करीब 60 मामले दर्ज हैं। राम सिंह उर्फ ​​संपत्ता को 2000 में गिरफ्तार किया गया था लेकिन 2004 में उसे छोड़ दिया गया था। तीन नक्सली को पकड़ने में 70 करोड़ रुपए खर्च मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन तीनों नक्सलियों को पकड़ने के लिए सालाना 70 करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं। यह खर्च नक्सल इलाकों में कैंप, हथियार, वाहन, पेट्रोलिंग, ट्रेनिंग, डीजल-पेट्रोल, बिजली-पानी आदि पर होता है। मुखबिरों का खर्च भी इसमें शामिल है। सीआरपीएफ की 3 बटालियन और दूसरे बलों के वेतन और भर्तियों पर होने वाला खर्च अलग है। recent visitors 57

पिपरईगांव से चंदेरी-ललितपुर रेल लाईन की सर्वे स्वीकृत, 12 साल पहले केंद्र सरकार ने की थी ललितपुर-चंदेरी रेल लाइन की घोषणा

 अशोकनगर रेल मंत्रालय ने अशोकनगरवासियों की बड़ी  सौगात दी है. दरअसल, ललितपुर से चंदेरी होते हुए पिपरई ब्रॉड गेज रेल लाइन के अंतिम स्थल सर्वे के लिए रेल मंत्रालय ने स्वीकृति दे दी है. 2 करोड़ की लागत से होने वाले इस अंतिम स्थल सर्वे कार्य के लिए बीते दिनों चंदेरी के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने केंद्रीय मंत्री और क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) को पत्र लिखा था. 12 साल पहले केंद्र सरकार ने की थी ललितपुर-चंदेरी रेल लाइन की घोषणा बता दें कि अशोकनगर जिले की पर्यटक नगरी चंदेरी में पिछले 15 वर्षों से रेल लाइन की मांग उठ रही थी. इस परियोजना का उद्देश्य पर्यटन क्षेत्र चंदेरी को सीधे ट्रेन रूट से जोड़ना है. वहीं करीब 12 साल पहले केंद्र सरकार ने इस रेल लाइन की घोषणा की थी, जिसके बाद रेलवे स्टेशन बनाने की भी चर्चा हुई थी, लेकिन इसके बाद रेल लाइन के निर्माण की स्वीकृति नहीं मिली. इसमें उन्होंने क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और उक्त ब्रॉड गेज रेल लाइन के डलने से रेलवे को होने वाले आर्थिक फायदे सहित यातायात की दृष्टि से क्षेत्र को मिलने वाली सुविधा से अवगत कराया गया‌ था। साथ ही क्षेत्र के नागरिकों को रेल विभाग की मिलने वाली अतिरिक्त सुविधा की भी जानकारी दी थी। सिंधिया ने पत्र के साथ अपनी ओर से अनुशंसा पत्र रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को सौंपा था। रेल मंत्रालय ने सिंधिया के पत्र पर तत्काल कार्रवाई करते हुए रेल अधिकारियों को पत्र लिखकर उक्त 80 किलोमीटर ब्रॉड गेज रेल लाइन के लिए अंतिम स्थल सर्वे की स्वीकृति प्रदान करते हुए 2 करोड़ रुपए की राशि का प्रावधान किया है। उल्लेखनीय है कि, उक्त रेलवे लाइन की लंबे समय से क्षेत्र की जनता द्वारा मांग की जाती रही, जिसे अब जाकर श्री सिंधिया के प्रयासों से पूर्ण होने की उम्मीद जगी है। उक्त लाइन का शीघ्र कार्य प्रारंभ होगा। पूर्व में भी हुए प्रयास बता दें कि, पूर्व में भी इस लाइन का सर्वे निरस्त कर दिया गया था। लेकिन, केंद्रीय मंत्री सिंधिया लगातार इसे स्वीकृत कराने के लिए प्रयास कर रहे थे। इस लाइन के निर्माण से चंदेरी के पर्यटन और कपड़ा उद्योग से साथ आस-पास के क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों को लाभ प्राप्त होगा। स्वीकृति मिलने पर अशोकनगर चंदेरी के जनप्रतिनिधि और नागरिकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए केंद्रीय मंत्री सिंधिया का आभार माना है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को सौंपा था पत्र सामाजिक कार्यकर्ता योगेश मिश्रा ने केंद्रीय मंत्री व क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को पत्र लिखा. इस पत्र में उन्होंने क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और उक्त ब्रॉड गेज रेल लाइन के निर्माण से रेलवे को होने वाले आर्थिक फायदे सहित क्षेत्र को मिलने वाली सुविधा से अवगत कराया था. साथ ही क्षेत्र के नागरिकों को रेल विभाग की मिलने वाली अतिरिक्त सुविधा की भी जानकारी दी थी, जिसके बाद सिंधिया ने उक्त पत्र के साथ अपनी ओर से अनुशंसा पत्र रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को सौंपा था. वहीं रेल मंत्रालय ने रेल अधिकारियों को पत्र लिखकर उक्त 80 किलोमीटर ब्रॉड गेज रेल लाइन के लिए अंतिम स्थल सर्वे की स्वीकृति प्रदान कर दी है. वहीं इसके लिए 2 करोड़ रुपये की राशि का भी प्रावधान किया है.   recent visitors 34

अजमेर दरगाह शरीफ का होगा सर्वे! शिव मंदिर बताने वाली याचिका मंजूर, शुरू हुई सियासत

​अजमेर अजमेर शरीफ दरगाह को हिंदू मंदिर बताने वाली याचिका को लेकर कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दरगाह पक्ष को नोटिस जारी किया है। ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह परिसर में संकट मोचन महादेव मंदिर वाली याचिका को कोर्ट ने स्वीकार किया। इस मामले की सच्चाई जानने के लिए कोर्ट ने इसे स्वीकार किया है क्योंकि लंबे समय से इसकी मांग उठ रही थी। हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने यह याचिका लगाई और न्यायाधीश जज मनमोहन चंदेल ने प्रतिवादी को नोटिस जारी किया। दरगाह कमेटी के कथित अनाधिकृत कब्जा हटाने संबंधी याचिका दो महीने पहले दायकर करी थी।याचिका में दावा किया गया था कि दरगाह की जमीन पर पूर्व में भगवान शिव का मंदिर था और वहां पूजा पाठ होता रहा है। दरगाह परिसर में जैन मंदिर होने का भी दावा किया गया है और याचिका में हरविलास शारदा द्वारा लिखी गई एक पुस्तक का हवाला दिया गया। इसमें मंदिर होने के प्रमाण का उल्लेख किया गया है कि दरगाह परिसर में बुलंद दरवाजे के निर्माण में मंदिर के अंश हैं। साथ ही एक तहखाना या गर्भ गृह होने की बात की गई और कहा गया है कि वहां शिवलिंग था, ब्राह्मण परिवार उसकी पूजा अर्चना करने का काम करता था। 1991 पूजा स्थल एक्ट यहां इसलिए लागू नहीं होता, क्योंकि दरगाह के अंदर कभी किसी इंसान को पूजा करने के लिए अंदर जाने ही नहीं दिया गया। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और अजमेर दरगाह समिति को नोटिस जारी किया। याचिका हिंदू सेना प्रमुख विष्णु गुप्ता द्वारा दायर की गई थी, जिन्होंने दावा किया था कि अजमेर शरीफ दरगाह में काशी और मथुरा की तरह एक मंदिर था। वादी विष्णु गुप्ता के अधिवक्ता योगेश सिरोजा ने अजमेर में संवाददाताओं को बताया कि वाद पर दीवानी मामलों के न्यायाधीश मनमोहन चंदेल की अदालत में सुनवाई हुई। सिरोजा ने कहा कि दरगाह में एक शिव मंदिर होना बताया जा रहा है। उसमें पहले पूजा पाठ होता था… पूजा पाठ दोबारा शुरू करवाने के लिये वाद सितंबर 2024 में दायर किया गया। अदालत ने वाद स्वीकार करते हुए नोटिस जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में अजमेर दरगाह कमेटी, अल्पसंख्यक मंत्रालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) कार्यालय-नयी दिल्ली को समन जारी हुए हैं। हालांकि, अब इसको लेकर सियासत तेज हो गई है। AIMIM सांसद असदुद्दीन औवेसी ने कहा कि यह दरगाह पिछले 800 वर्षों से वहां मौजूद है। नेहरू से लेकर कई प्रधान मंत्री दरगाह पर चादर भेजते रहे हैं। पीएम मोदी भी वहां चादर भेजते हैं। उन्होंने सवाल किया कि बीजेपी-आरएसएस ने मस्जिदों और दरगाहों को लेकर ये नफरत क्यों फैलाई है? निचली अदालतें पूजा स्थल कानून पर सुनवाई क्यों नहीं कर रही हैं? इस तरह कानून का शासन और लोकतंत्र कहां जायेगा? यह देश के हित में नहीं है। मोदी और आरएसएस का शासन देश में कानून के शासन को कमजोर कर रहा है। ये सब बीजेपी-आरएसएस के निर्देश पर किया जा रहा है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि ऐसी बातें पूरे देश में आग लगा देंगी। क्या हो रहा है? पीएम को इस मामले को देखना चाहिए और सुप्रीम कोर्ट को इस मामले पर संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने सवा किया कि आप एक पूरे समुदाय को कहां किनारे करना चाहते हैं? आप उनके धार्मिक स्थलों और संपत्तियों को नहीं छोड़ रहे हैं। आप हमें कहां दरकिनार करना चाहते हैं? किस मस्जिद के नीचे आप मंदिर ढूंढेंगे? कोई सीमा है या नहीं? उन्होंने (केंद्र सरकार) पूजा अधिनियम 1991 को किनारे रख दिया है। क्या वे (भाजपा) अपने राजनीतिक लाभ के लिए पूरे देश को जला देंगे? केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि अजमेर में कोर्ट ने सर्वे के निर्देश दिये। यदि किसी हिंदू ने याचिका दायर की है और अदालत ने सर्वेक्षण का आदेश दिया है, तो समस्या क्या है? मुगलों ने हमारे मंदिर तोड़े। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने तब तक केवल तुष्टीकरण किया। अगर नेहरू ने मंदिरों को तोड़कर मस्जिद बनाने के इस अभियान को रोक दिया होता, तो आज हम अदालत में जाने की स्थिति में नहीं होते। अजमेर शरीफ विवाद पर क्या बोल गए रामगोपाल यादव इस मामले को लेकर राजनीति भी तेज हो गई है। विवाद पर अपनी बात रखते हुए समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव ने जजों को लेकर विवादित टिप्पणी कर दी है। यादव ने एएनआई से बातचीत में कह दिया कि छोटे छोटे जज देश में आग लगवाना चाहते हैं। हाल में उन्होंने रिटायर हो चुके चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को लेकर भी विवादित टिप्पणी कर दी थी और बाद में यूटर्न ले लिया था। अजमेर शरीफ मुद्दे पर एएनआई से बातचीत में सपा नेता राम गोपाल यादव ने कहा, 'ऐसा है मैंने पहले भी कहा था, इस तरह के छोटे-छोटे जज बैठे हैं जो इस देश में आग लगवाना चाहते हैं। कोई मतलब नहीं है इसका। अजमेर शरीफ पर हमारे प्रधानमंत्री स्वयं चादर भिजवाते हैं। देश दुनिया से लोग वहां आते हैं। उसको विवादों में डालना बहुत ही घृणित और ओछी मानसिकता का प्रतीक है। सत्ता में बने रहने के लिए भाजपा समर्थित लोग कुछ भी कर सकते हैं, देश में आग लग जाए इससे इन्हें कोई मतलब नहीं है। सत्ता में बने रहें बस।' उनसे सवाल किया गया था कि नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा है कि उन्हें इस मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया है। राजस्थान के अजमेर स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में शिव मंदिर होने का दावा करते हुए एक वाद स्थानीय अदालत में दायर किया गया है। अदालत ने  याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए तीन पक्षकारों को नोटिस जारी किया। वादी विष्णु गुप्ता के वकील योगेश सिरोजा ने अजमेर में बताया कि वाद पर दीवानी मामलों के न्यायाधीश मनमोहन चंदेल की अदालत में सुनवाई हुई। सिरोजा ने कहा, 'दरगाह में एक शिव मंदिर होना बताया जा रहा है। उसमें पहले पूजा पाठ होता था… पूजा पाठ दोबारा शुरू करवाने के लिये वाद सितंबर 2024 में दायर किया गया। अदालत ने वाद स्वीकार करते हुए नोटिस जारी किए हैं।' उन्होंने बताया कि इस संबंध में अजमेर दरगाह कमेटी, अल्पसंख्यक मंत्रालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) कार्यालय-नयी दिल्ली को समन … Read more

इंजीनियरिंग की ग्लोबल बेस्ट प्रेक्टिसेस का प्रदेश में होगा क्रियान्वयन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रसन्नता है कि 60 हजार करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुये: मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंजीनियरिंग की ग्लोबल बेस्ट प्रेक्टिसेस का प्रदेश में होगा क्रियान्वयन लंदन के वार्विक मैन्युफैक्चरिंग ग्रुप का लिया जाएगा सहयोग मुख्यमंत्री डॉ. यादव का वार्विक विश्वविद्यालय पहुंचने पर हुआ आत्मीय स्वागत मुख्यमंत्री ने डबल्यूएमपी ग्रुप के विषय-विशेषज्ञों से किया संवाद भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यूके दौरे के समापन पर कहा है कि इंग्लैंड का दौरा हमारे लिए कई अर्थों में बहुत महत्वपूर्ण रहा है। सभी प्रकार के अलग-अलग क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश आए। आज बदलते दौर में मध्यप्रदेश में जो संभावनाएं हैं, उनको देखते हुये बड़े पैमाने पर नए निवेशकों ने रुचि दिखाई है, मुझे इस बात का संतोष है कि हमें 60 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव हुये हैं। इसमें सभी प्रकार के सेक्टर जैसे चिकित्सा, उद्योग, माइनिंग और सर्विस सेक्टर शामिल है। एग्रीकल्चर में भी लोगों ने रुचि दिखाई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वार्विक मैन्युफेक्चरिंग ग्रुप के भ्रमण में कहा कि विश्वविद्यालयों और अकादमिक संस्थानों द्वारा किए जाने वाले शोध और अध्ययन की सार्थकता तभी है, जब वे समाज हित में हों। विश्व के कई देशों में शिक्षा के क्षेत्र में इस दिशा में पहल हो रही है। मध्यप्रदेश सरकार ने भी नई शिक्षा नीति के माध्यम से इस ओर कदम बढ़ाए हैं। आने वाली चुनौतियों का सामना करने में विद्यार्थियों को सक्षम और समर्थ बनाना वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की प्राथमिक आवश्यकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को लंदन की वार्विक यूनिवर्सिटी पहुंचे और विशेष-विशेषज्ञों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि यह भट्टाचार्य जी के द्वारा स्थापित किया हुआ कैम्पस है, इसमें 30 हजार से अधिक विद्यार्थी पढ़ते हैं। यहाँ रिसर्च की मूल कल्पना है कि रिसर्च के साथ में इनोवशन भी करें, जिसका लाभ उद्योगों के साथ समाज को भी मिले। इससे हम बदलते दौर में स्वयं के विकास के साथ मानवता की सेवा भी कर सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में ऑटोमोटिव क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कार्य जारी है, अभी भी अपार संभावनाएं विद्यमान हैं। उन्होंने कहा कि संभावनाएँ तलाशी जायेंगी कि मध्यप्रदेश के युवा यूके के वार्विक मैन्युफैक्चरिंग ग्रुप में आकर दक्षता अर्जित करें और ग्रुप के विशेषज्ञ भी मध्यप्रदेश आकर प्रशिक्षण उपलब्ध कराएं। साथ ही विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों से डबल्यूएमपी ग्रुप को संबद्ध करने की दिशा में भी पहल होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यूके में वे अपने देश के अन्य प्रदेश के साथ मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों से भी मिले। उनसे आत्मीय संवाद हुआ। इस कैम्पस में पूरी दुनिया से विद्यार्थी पढ़ने के लिये आ रहे हैं। इस मॉडल को हम मध्यप्रदेश में भी लागू कर सकते हैं। इसके लिये यहाँ के विश्वविद्यालयों का मध्यप्रदेश के विश्वविद्यालयों के साथ एमओयू करायें। हम प्रयास करेंगे कि हमारे इंडस्ट्री के कैम्पस में भी ऐसे रिसर्च सेन्टर बने, जिनका लाभ सभी को मिले। विश्वविद्यालय और औद्योगिक समूह समन्वित रूप से करें शोध को प्रोत्साहित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कई औद्योगिक समूह शोध गतिविधियों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। विश्वविद्यालय को आत्म-निर्भर बनाने की दिशा में कार्य करते हुए उपयुक्त समूहों से समन्वय कर अपने परिसरों में शोध केंद्र स्थापित करने की दिशा में भी पहल करना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कौशल विकास और शिक्षा के क्षेत्र में जारी बेस्ट प्रैक्टिसेज का मध्यप्रदेश में क्रियान्वयन करने की बात कही। उन्होंने कहा कि डब्ल्यूएमजी और मध्यप्रदेश का परस्पर संपर्क और विशेषज्ञों एवं विद्यार्थियों का आवागमन बना रहेगा। दुनिया में अच्छाइयों को बांटते रहने से ही सबका होगा भला मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मैं यहां सनातन संस्कृति के ध्वजवाहक के रूप में आया हूं। विश्वविद्यालय और महाविद्यालय सरस्वती देवी के समान हैं। इनका लाभ समूची मानवता को मिलना चाहिए। वर्तमान यांत्रिक युग में यंत्र का अपना महत्व है, परंतु यंत्र के पीछे तंत्र और तंत्र के पीछे मंत्र है। मन की सात्विकता यंत्रों को नियंत्रित करती है। मानव मात्र के कल्याण का संस्कार ही हमारा मूल भाव होना चाहिए। वैश्विक रूप से हम बहुत छोटी दुनिया में जी रहे हैं, ऐसे में यदि सभी देश अपनी अच्छाइयों को बांटते रहेंगे तो सबका भला होगा। वार्विक मैन्युफैक्चरिंग ग्रुप, इंजीनियरिग में नवाचारों को प्रोत्साहित करने का श्रेष्ठ वैश्विक मॉडल वार्विक मैन्युफैक्चरिंग ग्रुप, पब्लिक- प्राइवेट सेक्टर के मध्य परस्पर सहयोग से विज्ञान – इंजीनियरिंग में नवाचार को प्रोत्साहित करने और अकादमिक गतिविधियों को विस्तार देने का श्रेष्ठ वैश्विक मॉडल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह यात्रा भविष्य के युवा नेतृत्व को सशक्त करने और नवाचार एवं शिक्षा के क्षेत्र को विस्तार देने के राज्य सरकार के दृष्टिकोण को व्यावहारिक रूप से क्रियान्वित करने की दिशा में एक प्रभावी कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का डबल्यूएमपी पहुंचने पर डीन द्वारा पुष्प-गुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को ग्रुप की ओर से स्मृति-चिन्ह भी भेंट किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रुप के प्रो. रॉबिन क्लार्क को चंदेरी का अंगवस्त्रम भेंट कर उनका अभिवादन किया। स्वामी नारायण संप्रदाय और इस्कॉन करेंगे प्रदेश में नये केंद्र निर्मित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लंदन यात्रा के दौरान भगवान स्वामी नारायण मंदिर जाने और स्वामी नारायण सम्प्रदाय तथा इस्कॉन के सदस्यों से भेंट का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मध्यप्रदेश में दो प्रमुख ज्योतिर्लिंग हैं, साथ ही प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में विभिन्न लोकों का निर्माण हो रहा है। स्वामी नारायण संप्रदाय और इस्कॉन भी मध्यप्रदेश में अपने नये केंद्र निर्मित करेंगे। उनकी धार्मिक मान्यताओं के आधार पर देव स्थानों की स्थापना से मंदिर संस्कृति और आध्यात्मिक संस्कारों का विस्तार होगा और प्रदेशवासियों को इन सम्प्रदायों से जुड़कर आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।   recent visitors 70

समस्त विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय के भारतीय ज्ञान परम्परा प्रकोष्ठ में स्थापित होगी जनजातीय गौरव प्रदर्शनी: मंत्री परमार

जनजातीय नायकों के पुरुषार्थ एवं कृतित्व को सही परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करने की आवश्यकता : मंत्री परमार समस्त विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय के पुस्तकालयों को जनजातीय योगदान से जुड़े साहित्य से समृद्ध करेंगे समस्त विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय के भारतीय ज्ञान परम्परा प्रकोष्ठ में स्थापित होगी जनजातीय गौरव प्रदर्शनी जनजातीय गौरव दिवस के उपलक्ष्य पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन भोपाल अतीत के कालखंडों में इतिहासकारों ने जनजातीय नायकों एवं महापुरुषों के पुरुषार्थ एवं कृतित्व के साथ न्याय नहीं किया। इतिहास के पन्नों में जनजातीय नायकों के संघर्ष, शौर्य, पराक्रम, बलिदान और त्याग को सही परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत नहीं किया गया। जनजातीय समाज के ऐतिहासिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक गौरवपूर्ण योगदान और देश की स्वाधीनता के लिए दिए उनके बलिदान को सही परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करने की आवश्यकता है। जनजातीय नायकों एवं महापुरुषों के पुरुषार्थ एवं कृतित्व से मात्र जनजातीय समाज नहीं अपितु संपूर्ण राष्ट्र लाभान्वित हुआ। राष्ट्र के लिए जनजातीय योगदान का यह समग्र विचार, जनमानस के समक्ष लाने की आवश्यकता है। इसके लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने भारतीय दृष्टि से स्वाधीनता के संघर्ष के सही इतिहास को भारतीय दृष्टिकोण के साथ भारतीय परिप्रेक्ष्य में लिखने का अवसर प्रदान किया है। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने बुधवार को भोपाल स्थित रविन्द्र भवन के गौरांजनी सभागृह में राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस के उपलक्ष्य पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला के शुभारम्भ अवसर पर कही। उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने कहा कि भारत के गौरवशाली इतिहास, श्रेष्ठ ज्ञान परम्परा, सभ्यता, संस्कृति , विरासत, शौर्य, पराक्रम एवं स्वाधीनता के नायकों का बलिदान और उपलब्धियों को, वर्तमान पीढ़ी और आने वाली पीढ़ी को सही परिप्रेक्ष्य में भारतीय दृष्टिकोण से बताने की आवश्यकता है। परमार ने कहा कि जनजातीय समाज प्रकृति पूजक समाज है। प्रकृति की पूजा में भारतीय सभ्यता का मूल भाव कृतज्ञता है। कृतज्ञता का भाव, हमारी सभ्यता और विरासत है। प्रकृति, जल स्त्रोतों एवं सूर्य सहित समस्त ऊर्जा स्रोतों के प्रति कृतज्ञता का भाव भारतीय समाज में परम्परागत रूप से आदिकाल से विद्यमान है। भारत का ज्ञान विश्व मंच पर ईसा से हजारों वर्षों पूर्व भी सर्वश्रेष्ठ था, इसलिए भारत विश्व गुरु के रूप में सुशोभित था। हम सभी को भारत के सर्वश्रेष्ठ ज्ञान पर गर्व का भाव जागृत कर, देश को पुनः विश्व मंच पर सिरमौर बनाने में सहभागिता करने की आवश्यकता है। इसके लिए भारतीय उपलब्धियों पर हीन भावना से बाहर आकर, स्वत्व का भाव जागृत करना होगा। जनजातीय नायकों के अपने अस्त्र-शस्त्र होते थे, जो वे स्वयं निर्माण करते थे। ईसा पूर्व ही जनजातीय समाज, श्रेष्ठ लोहा निर्माण करते रहे हैं। जनजातीय समाज के ऐसे कई कृतित्व, आज भी विद्यमान है। ऐसे कृतित्व का पुनः अध्ययन, शोध एवं अनुसंधान कर, तथ्यपूर्ण एवं सही परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करने की आवश्यकता है। परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में शिक्षा को भारतीय ज्ञान परम्परा से समृद्ध करने का अवसर है। इसके लिए प्रदेश के समस्त विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में पुस्तकालयों को, भारतीय ज्ञान परम्परा और जनजातीय योगदान से जुड़े साहित्य से समृद्ध करेंगे। परमार ने कहा कि ईसा के पूर्व के भारतीय ज्ञान को पुनः विश्वमंच पर प्रस्तुत करने के लिए, शोध एवं अध्ययन के आधार पर युगानुकुल परिप्रेक्ष्य में भारतीय दृष्टिकोण के साथ, शैक्षिक परिदृश्य में तथ्यपूर्ण समावेश की आवश्यकता है। परमार ने कहा कि हम सभी की सहभागिता से स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष में भारत पुनः विश्वमंच पर सिरमौर बनेगा। सौर ऊर्जा से ऊर्जा के क्षेत्र में आत्म निर्भर होकर, अन्य देशों की पूर्ति करने में सक्षम राष्ट्र होगा। खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्म निर्भर होकर अन्य देशों के भरण पोषण करने में सामर्थ्यवान देश बनेगा। वर्ष 2047 के विकसित एवं विश्व गुरु भारत की संकल्पना को साकार करने में हम सभी की सहभागिता आवश्यक है। मंत्री परमार ने राष्ट्र के जनजातीय नायकों के पुरुषार्थ एवं कृतित्व पर प्रदर्शित चित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ कर प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन ने कहा कि स्वाधीनता संग्राम में अपनी प्राणों की आहुति देने वाले जनजातीय अमर बलिदानियों के पुरुषार्थ पर आधारित प्रदर्शनी शुभारंभ किया गया है, किंतु दुर्भाग्यवश जनजाति नायकों के चित्रों की प्रदर्शनी में लगाए गए पचहत्तर प्रतिशत चित्रों को आज हम नहीं पहचानते हैं। हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है कि जिनके बलिदान से आज हम सब खुली हवा में सांस ले रहे हैं, उनके बलिदान को हम याद रखें। राजन ने कहा कि आने वाली पीढ़ी के सामने इन बातों को रखना होगा, जिससे वह अपने नायकों को जानें और पहचानें। अपर सचिव (मुख्यमंत्री सचिवालय) लक्ष्मण सिंह मरकाम ने बीज वक्तव्य में बताया कि जनजाति गौरव दिवस का बीजारोपण करने वाला पहला राज्य मध्यप्रदेश है। जनजातीय गौरव दिवस के पीछे मध्यप्रदेश की एक दशक की वैचारिक यात्रा रही है। इसके बाद वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ने सबसे पहला जनजातीय गौरव दिवस मनाया। मरकाम ने कहा कि पराधीन भारत में भी जनजातीय समाज इकलौता ऐसा समाज था, जो पराधीन नहीं रहा बल्कि अंग्रेजी पराधीनता के विरुद्ध मुखर रूप से विद्रोह करता रहा। ऐतिहासिक पाखंड को सही परिप्रेक्ष्य में सुधारते हुए, समाज के गौरव को पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता है। हमारे देश के शोधकर्ता एवं इतिहासकारों की नैतिक जिम्मेदारी है कि जनजातीय गुमनाम नायकों के पुरुषार्थ एवं योगदान को सही परिप्रेक्ष्य में भारतीय जनमानस के समक्ष प्रस्तुत करें। जनजातियों के द्वारा राष्ट्र के लिए किए गए त्याग, बलिदान को रेखांकित करना, उनके ऐतिहासिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक गौरवपूर्ण इतिहास को जानना इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य था। कार्यशाला में वीरांगना रानी दुर्गावती की 500वीं जन्म जयंती वर्ष एवं धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के 150वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य पर प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में जनजातीय नायकों के ऐतिहासिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक योगदान पर विभिन्न गतिविधियों के आयोजन पर विचार मंथन हुआ। राष्ट्र के लिए जनजातीय शूरवीरों के बलिदान एवं उनके पुरुषार्थ पर आधारित गतिविधियों के लिए भी मंथन हुआ। प्रदेश के समस्त विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में जनजातीय नायकों पर आधारित वर्ष भर के कार्यक्रम एवं विभिन्न गतिविधियों के सम्बन्ध में कार्ययोजना के सृजन के लिए विमर्श हुआ। कार्यशाला में विमर्श हुआ कि सभी विश्वविद्यालय अलग अलग समूहों के साथ मिलकर अपने विश्वविद्यालय में गतिविधियों का आयोजन करेंगे, जिसमें उनसे … Read more

16 दिसंबर से होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पार्टी विधायक निर्मला सप्रे अपने साथ नहीं बैठाएगी

भोपाल सागर जिले की बीना विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता को लेकर भले ही अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है, पर कांग्रेस ने यह मान लिया है कि वह अब भाजपा की सदस्य हैं। 16 दिसंबर से होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पार्टी उन्हें अपने साथ नहीं बैठाएगी। 15 दिसंबर को होने वाली कांग्रेस विधायक दल की बैठक में भी उन्हें आमंत्रित नहीं किया जाएगा। चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ काम लोकसभा चुनाव के समय बीना में मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव की उपस्थिति में निर्मला सप्रे के भाजपा में शामिल होने की घोषणा की गई थी। उन्होंने चुनाव में सागर लोकसभा सीट से कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी चंद्रभूषण सिंह बुंदेला के विरुद्ध काम किया। परिणाम भाजपा के पक्ष में रहे। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दलबदल कानून के अंतर्गत उनकी सदस्यता समाप्त करने के लिए आवेदन भी दिया। इस पर तीन बार नोटिस दिया जा चुका है पर निर्मला सप्रे ने अब तक कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया है। वह प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित बैठक में भी शामिल हो चुकी हैं। विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले उनकी सदस्यता को लेकर निर्णय होने की संभावना है। पटवारी ने कहा- हमें कोई भ्रम नहीं इस मामले पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का कहना है कि भाजपा का विश्वास लोकतांत्रिक व्यवस्था पर नहीं है। देशभर में लगभग 600 निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का दलबदल कराया जा चुका है। निर्मला सप्रे को लेकर हमें कोई भ्रम नहीं है। नेता प्रतिपक्ष के आवेदन पर निर्णय विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर को लेना है पर इसे टाला जा रहा है। हमने विधिक परामर्श ले लिया है और जल्द ही कोर्ट में आवेदन करेंगे। recent visitors 39

नए साल से बदले जाएंगे 124 ट्रेनों के नंबर, रेलवे ने जारी की सूची

बिलासपुर एक जनवरी से दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की 124 ट्रेनों का नंबर बदल जाएगा। जिनमें 24 ट्रेनें बिलासपुर से छूटने व गुजरने वाली ट्रेनें शामिल हैं। कोरोनाकाल से यह ट्रेनें स्पेशल बनकर चल रहीं थी। इस वजह से नंबर भी बदल दिया गया था। लेकिन, अब स्थिति सामान्य हो गई है। इसलिए रेलवे ने इन ट्रेनों को पुराने नंबर से चलाने का निर्णय लिया है। रेलवे ने यात्रियों के सुविधाओं का ध्यान रखते हुए एक महीने पहले से ही उन 124 ट्रेनों की सूची जारी कर दी है। बिलासपुर से छूटने व गुजरने वाली ट्रेनें ट्रेन इस नंबर से चलेंगी     08210 बिलासपुर-गेवरारोड पैसेंजर स्पेशल     58210 – 08261 बिलासपुर-रायपुर पैसेंजर स्पेशल     58201 – 08262 रायपुर- बिलासपुर पैसेंजर स्पेशल     58202 – 08263 टिटलागढ़ -बिलासपुर पैसेंजर स्पेशल     58213 – 08264 बिलासपुर-टिटलागढ़ पैसेंजर स्पेशल     58214 -08719 बिलासपुर-रायपुर मेमू स्पेशल     68719 – 08721 रायपुर-डोंगरगढ़ मेमू स्पेशल     68721 – 08727 बिलासपुर-रायपुर मेमू स्पेशल     68727 – 08731 कोरबा-बिलासपुर मेमू स्पेशल     68731 – 08732 बिलासपुर-कोरबा मेमू स्पेशल     68732 – 08733 गेवरारोड -बिलासपुर मेमू स्पेशल     68733 – 08734 बिलासपुर-गेवरारोड मेमू स्पेशल     68734 – 08735 रायगढ़-बिलासपुर मेमू स्पेशल     68735 – 08736 बिलासपुर-रायगढ़ मेमू स्पेशल     68736 – 08737 रायगढ़- बिलासपुर मेमू स्पेशल     68737 – 08738 बिलासपुर-रायगढ़ मेमू स्पेशल     68738- 08739 शहडोल-बिलासपुर मेमू स्पेशल     68739 – 08740 बिलासपुर- शहडोल मेमू स्पेशल     68740 – 08745 गेवरारोड -रायपुर मेमू स्पेशल     68745 – 08746 रायपुर-गेवरारोड मेमू स्पेशल     68746- 08747 बिलासपुर-कटनी मेमू स्पेशल     68747 – 08748 कटनी-बिलासपुर मेमू स्पेशल     68748 – 08861 गोंदिया -झारसुगुडा मेमू स्पेशल     68861 – 08862 झारसुगुडा-गोंदिया मेमू स्पेशल – 68862 recent visitors 94