नशे की गिरफ्त से मुक्त हों बंदी सरकार ने उठाया बड़ा कदम, अब जेल में खुलेगा ‘नशा मुक्ति केंद्र’

भोपाल बंदियों को नशे की कैद से छुटकारा दिलाने के लिए प्रदेश की जेलों में नशा मुक्ति केंद्र बनाए जाएंगे। इस सिलसिले में भारत सरकार ने प्रत्येक केंद्र के लिए 20 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं। जेल मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि पहले केंद्रीय जेलों में यह व्यवस्था प्रारंभ की जाएगी। बाद में जिला जेलों में भी नशा मुक्ति केंद्र शुरू करने के प्रयास किए जाएंगे। जेल अधिकारियों के मुताबिक अपराधों की बड़ी वजह नशा होता है, इसलिए कैदियों को नशे से दूर करने की कोशिश की जा रही है, जिससे वह जेल से बाहर आने पर फिर नशे की गिरफ्त में न आने पाएं। इन नशा मुक्ति केंद्रों में मुख्य रूप से काउंसलिंग के माध्यम से बंदियों को समझाकर नशे से छुटकारा दिलाया जाएगा। सामाजिक न्याय विभाग जेलों में यह केंद्र बनाएगा। मनोचिकित्सक रहेंगे तैनात इन केंद्रों में सबसे मुख्य मनोचिकित्सकों की उपस्थित रहेगी। दरअसल, नशे की लत वाले बंदियों को जेल आने के बाद नशे की चीजें नहीं मिलतीं। नशा छूटने की वजह से उन्हें कई मनोवैज्ञानिक समस्याएं होने लगती हैं। इन्हें 'विड्राल सिम्पटम्स' कहा जाता है। इसमें अनिद्रा, चिंता, भूख नहीं लगना और सिरदर्द जैसी समस्याएं होती हैं। मनोचिकित्सक ऐसे बंदियों को उपचार देंगे। इतना होगा स्टाफ हर एक केंद्र में एक परियोजना समन्वयक, एक मनोचिकित्सक या क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, काउंसलर और अकाउंटेंट के पद होंगे। इसका प्रस्ताव लगभग एक वर्ष से शासन के पास लंबित था, पर एक जनवरी 2025 से सुधारात्मक सेवाएं एवं बंदीगृह अधिनियम लागू होने के बाद यह केंद्र भी जल्दी प्रारंभ करने की तैयारी है। केंद्र के लिए मानव संसाधन की भर्ती सामाजिक न्याय विभाग कर रहा है। प्रदेश में कहां-कहां केंद्रीय जेल मप्र में फिलहाल 11 केंद्रीय कारागार हैं। ये कारागार भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, सतना, सागर, नरसिंहपुर, बड़वानी और नर्मदापुरम जिलों में स्थित हैं। recent visitors 135

अब मप्र में ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप चलाने की तैयारी, शिकारियों पर कसेगा शिकंजा

भोपाल वन्य प्राणी प्रबंधन-संरक्षण में असफल रहने, बाघ और 10 हाथियों की मौत से हुई किरकिरी के बाद अब मध्य प्रदेश में ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप चलाया जाएगा। यह एक दिसंबर से अगले साल 31 जनवरी तक चलेगा। इसमें उन स्थानों पर दिन और रात में गश्त होगी, जो शिकार के मामले में संवेदनशील हैं। वन मुख्यालय से लेकर वन क्षेत्र के अधिकारी-कर्मचारी इसमें जुटेंगे। इस ऑपरेशन के तहत गश्ती के दौरान शिकार के लिए प्रयुक्त फंदे में वन्यप्राणी फंसा हुआ पाए जाने की स्थिति में तत्काल निकटतम रेस्क्यू स्क्वाड की सहायता से वन्यप्राणी के उपचार की उचित व्यवस्था की जाएगी और अपराध प्रकरण पंजीबद्ध किया जाएगा। आरोपित का पता लगाकर तत्काल कार्रवाई करना सुनिश्चित किया जाएगा। वन भूमि या वन्यप्राणी विचरित क्षेत्र से जाने वाली विद्युत लाइन के नीचे और आसपास विद्युतकर्मियों के साथ मिलकर गश्त की जाएगी। यदि किसी वन या कृषि क्षेत्र में शिकार के लिए फंदा लगा हुआ पाया जाता है तो उसे हटाया जाएगा। शिकार पर नजर रखने के लिए 15 डाग स्क्वायड दस्ते लेकर गश्त की जाएगी। मैटल डिटेक्टर उपकरण का भी उपयोग होगा। गश्त के दौरान वन-राजस्व सीमा से लगे वन क्षेत्र एवं कृषि क्षेत्र की बागड, फेंसिंग में सर्चिंग की जाएगी। गश्त के दौरान संबंधित ग्राम, नगर में पूर्व में गिरफ्तार आरोपितों की जानकारी लेकर उसे वन परिक्षेत्र में की आरोपित निगरानी पंजी में भी दर्ज किया जाएगा। शीत ऋतु में बढ़ जाती हैं शिकार की घटनाएं शिकार की घटनाएं मुख्यत: शीत ऋतु में अधिक संख्या में घटित होती हैं। इसलिए अगले दो माह ऑपरेशन वाइल्ड ट्रैप चलाया जाएगा। इसके पहले वन विभाग फंदा लगाकर शिकार को लेकर प्रदेश भर में अलर्ट जारी कर चुका है। वहीं फंदा, विद्युत करंट, खटका (लेग होल्ड ट्रैप) जैसे साधनों का उपयोग कर वर्ष 2014 से 2024 तक 885 वन्यजीवों का शिकार किया गया। जिससे 311 जंगली सूअर, 116 नीलगाय, 91 तेंदुए, 77 चीतल, 48 सांभर, 36 भालू, 35 बाघ एवं 17 मोर आदि सहित अन्य वन्यप्राणियों की मृत्यु हुई है। ये करेंगे गश्त प्रदेश में सात टाइगर रिजर्व, 63 सामान्य वनमंडल एवं 11 परियोजना मंडल हैं। वनमंडल, टाइगर रिजर्व, वन विकास मंडल इकाई में सघन गश्त दिन व रात्रि में की जाएगी। न्यूनतम तीन दिन परिक्षेत्र अधिकारी एवं अधीनस्थ, दो दिन वनमंडल अधिकारी, उप वनमंडल अधिकारी, एक दिन क्षेत्र संचालक, मुख्य वन संरक्षक अनिवार्य रूप से गश्त करेंगे। recent visitors 67

शासकीय सेवकों के आश्रितों के लिए आय की अधिकतम बढ़ाकर 7 हजार 750 रुपये प्रतिमाह की

रायपुर वित्त विभाग ने शासकीय सेवकों पर आश्रितों की अधिकतम आय सीमा में वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब शासकीय सेवकों के आश्रितों के लिए आय की अधिकतम सीमा 3 हजार 50 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 7 हजार 750 रुपये प्रतिमाह करने को स्वीकृति प्रदान की गई है। उल्लेखनीय है कि साल 2014 के बाद से शासकीय सेवकों के आश्रितों के लिए आय की अधिकतम सीमा में कोई वृद्धि नहीं की गई थी, जबकि राज्य में श्रमिकों की आय में लगातार वृद्धि हो रही है। अर्द्ध कुशल श्रमिकों के लिए दैनिक मजदूरी की दर अब 10,900 रुपये प्रति माह तक पहुंच गई है। ऐसे में शासकीय सेवकों के आश्रित सदस्य 3 हजार 50 रुपये प्रतिमाह से अधिक आय प्राप्त कर रहे थे, उन्हें परिवार पेंशन का लाभ नहीं मिल पा रहा था। अब, आय सीमा बढ़ाने के साथ जिन आश्रितों की आय 3,050 रुपये से अधिक थी, वे सभी परिवार पेंशन का लाभ प्राप्त करने के पात्र हो सकेंगे। इस कदम से शासकीय सेवकों के आश्रितों की स्थिति सुधरेगी और आर्थिक-सामाजिक सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। इससे उन परिवारों को राहत मिलेगी, जो शासकीय सेवक के निधन के बाद परिवार पेंशन पर निर्भर रहते हैं। आय सीमा में इस वृद्धि से उन्हें भी अब परिवार पेंशन का लाभ मिलेगा। recent visitors 103

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 21 नवंबर को उज्जैन में शासकीय मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए पूजन करेंगे

उज्जैन मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में लंबे समय से शासकीय मेडिकल कॉलेज की मांग उठ रही थी, लेकिन यह इंतजार अब खत्म होने वाला है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 21 नवंबर को उज्जैन में शासकीय मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए पूजन करेंगे. यह कॉलेज सिंहस्थ के पहले शुरू हो जाएगा. उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने बताया कि भूमि पूजन कार्यक्रम में शहर की जनता, युवा, विद्यार्थी और विभिन्न वर्गों को सम्मिलित करने के प्रयास किए जा रहे है. सभी स्वास्थ्य संस्थाओं को कार्यक्रम के निमंत्रण पत्र भेजे गए हैं. साथ ही शहर के प्रमुख स्थानों पर एलईडी स्क्रीन के माध्यम से संदेश का प्रसारण करवाया जाएगा. हो रही हैं ये तैयारियां इसके अलावा भूमि पूजन कार्यक्रम के पहले विभिन्न संगोष्ठियां आयोजित की जाएंगी. साथ ही नर्सिंग महाविद्यालय और स्कूल शिक्षा विभाग के द्वारा रैलियों का आयोजन भी किया जाएगा. आगामी 20 नंवबर को बाइक रैली के आयोजन की भी तैयारी की जा रही है. बता दें मेडिकल कॉलेज खोले जाने को लेकर उज्जैन को लंबे समय से आश्वासन मिल रहा था, लेकिन मेडिकल कॉलेज की सौगात नहीं मिल पा रही थी.मेडिकल कॉलेज की घोषणा होने के बाद भूमि को लेकर प्रश्न चिन्ह लग गया था. ऐसे में अब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने स्पष्ट कहा है कि सिंहस्थ 2028 के पहले मेडिकल कॉलेज शुरू हो जाएगा. वर्तमान में उज्जैन में एक निजी मेडिकल कॉलेज है. मिलेंगी ये सुविधाएं इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार की ओर से 592.33 करोड़ रूपए दिए गए हैं. इसमें 600 बेड की आधुनिक बिल्डिंग जिसमें जी 13 मंजिल होंगी. यह सभी मॉडर्न उपकरणों से लैस होगी. मेडिकल से संबंधित सभी आवश्यक सुविधाएं और विशेषज्ञ चिकित्सकों के द्वारा रोगियों का इलाज किया जाएगा. इसमें टेली मेडिसिन की सुविधा से अंतर्राष्ट्रीय डॉक्टरों की सुविधा भी मिल सकेगी. आपात स्थिति में भी विशेष स्वास्थ्य सुविधाएं 24 घंटे उपलब्ध रहेगी. शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय का निर्माण जिला चिकित्सालय परिसर और राजे परिसर के पुराने भवनों को तोड़कर किया जाए‌गा. महाविद्यालय में 150 सीटों का 9 मंजिला कॉलेज भवन, 605 बिस्तरों का 10 मंजिला चिकित्सालय भवन के साथ संख्या राजे परिसर में बालक और बालिका छात्रावास, नर्स छात्रावास और रेसिडेंट डॉक्टर्स के लिए छात्रावास और तीन 13 मंजिला भवन और दो 10 मंजिला भवन का निर्माण किया जाना है. recent visitors 64

मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ और व्यापक बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता: डॉ. मोहन यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ और व्यापक बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का मानना है कि आत्मनिर्भर और सशक्त भारत की नींव स्वस्थ नागरिकों से ही सुदृढ़ होगी। प्रधानमंत्री श्री मोदी के विचार को साकार करने के लिए राज्य सरकार हर नागरिक को सुलभ और उन्नत चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इस दिशा में 21 नवंबर को एक और इतिहास रचने की ओर प्रदेश अग्रसर है जब मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन मेडिकल कॉलेज का भूमिपूजन करेंगे, जो प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को नए आयाम प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ-2028 की आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए प्रोजेक्ट को प्राथमिकता से पूर्ण किया जायेगा। इससे उज्जैन और आसपास के जिलों के मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी । मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2003 तक प्रदेश में केवल 5 शासकीय मेडिकल कॉलेज थे, जो अब बढ़कर 17 हो चुके हैं। प्रदेश में एम.बी.बी.एस. सीटें भी 720 से बढ़कर 2,575 हो गई हैं। श्योपुर, सिंगरौली, मंडला और राजगढ़ में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों के साथ-साथ छतरपुर, दमोह और बुधनी में स्ववित्तीय अनुदान से मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं। साथ ही 12 अन्य जिलों में सार्वजनिक जनभागीदारी नीति के तहत मेडिकल कॉलेज खोलने की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 20 नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से एम.बी.बी.एस. सीटों में 2,000 से अधिक की वृद्धि होगी। भोपाल और ग्वालियर में अस्पताल की बेड कैपेसिटी को 2,500 तक बढ़ाने के साथ-साथ इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और रीवा में सुपरस्पेशलिटी अस्पताल संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जबलपुर में स्कूल ऑफ एक्सीलेंस इन पल्मोनरी मेडिसिन और इंदौर में स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई जैसी योजनाएं प्रदेश को चिकित्सा क्षेत्र में अग्रणी बना रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 14 मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं। वर्तमान में 24 शासकीय नर्सिंग कॉलेज संचालित हो रहे हैं, जो जल्द ही 37 हो जाएंगे। प्रदेश में 250 पैरामेडिकल कॉलेजों में लगभग 25,000 छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इसके साथ ही, मध्यप्रदेश देश का एकमात्र राज्य है, जहां मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में प्रारंभ की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को उन्नत चिकित्सा सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है, ताकि ये जिला अस्पतालों के समान उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर सकें। इसके साथ ही इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड (IPHS) के मानकों के अनुरूप 30,000 से अधिक चिकित्सकीय और सहायक चिकित्सकीय पदों पर भर्ती की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ नागरिकों से ही आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश का निर्माण संभव है। 592 करोड़ रुपये की लागत से होगा मेडिकल कॉलेज का निर्माण उज्जैन मेडिकल कॉलेज 14.97 एकड़ भूमि पर निर्मित किया जाएगा। निर्माण क्षेत्र 1 लाख 42 हज़ार 34 वर्ग मीटर प्रावधानित है। इसकी कुल लागत 592.3 करोड़ रुपए है। इसमें फायर सेफ्टी के लिए आधुनिक तकनीकों, ऊर्जा दक्षता के लिए एलईडी लाइटिंग, सौर ऊर्जा और ऊर्जा-कुशल एचवीएसी सिस्टम का उपयोग किया गया है। वर्षा जल संग्रहण और अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग के साथ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का भी प्रावधान किया गया है। मेडिकल कॉलेज में फुट ओवर ब्रिज, ग्रंथालय भवन, सर्विस ब्लॉक, एमजीपीएस ब्लॉक और ईएसएस ब्लॉक की सुविधा शामिल हैं। 550 बिस्तरों वाला आधुनिक शिक्षण अस्पताल उज्जैन मेडिकल कॉलेज शिक्षण अस्पताल की क्षमता 550 बेड की है। अस्पताल में 24×7 आपातकालीन सेवाओं, फार्मेसी, रेडियोलॉजी (CT, MRI, X-RAY, फ्लोरोस्कोपी, अल्ट्रासाउंड), जनरल एवं सुपर स्पेशलिटी ओपीडी जैसी सेवाओं से सुसज्जित है। अस्पताल में 550 आई.पी.डी. बिस्तर, ICU और CCU के लिए 70 बिस्तर, 11 मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, 1 कैथ लैब और 2 एंडोस्कोपी यूनिट उपलब्ध हैं। इसके अलावा, परमाणु चिकित्सा विभाग और 2 रेडियोथेरेपी बंकर (ब्रैकीथेरेपी और सीटी सिम्युलेटर) जैसी उन्नत सुविधाएं भी प्रदान की गई हैं। डॉक्टरों, स्टाफ और जनता के लिए कैफेटेरिया की व्यवस्था भी है। निर्माण कार्य मध्यप्रदेश भवन विकास निगम द्वारा किया जायेगा। 100 एम.बी.बी.एस. सीट की प्रवेश क्षमता उज्जैन मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस छात्रों की प्रवेश क्षमता 100 प्रावधानित है। मेडिकल कॉलेज में 4 अत्याधुनिक लेक्चर थियेटर (प्रत्येक की क्षमता 180) और 2 परीक्षा हॉल (प्रत्येक की क्षमता 250) रहेगी। सेंट्रल लाइब्रेरी, शिक्षण और फैकल्टी क्षेत्र, प्रयोगशाला और कौशल प्रशिक्षण केंद्र के साथ प्रशासनिक भवन, सामान्य कक्ष और मनोरंजन सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। 380 नर्सिंग विद्यार्थियों के लिए छात्रावास सुविधा का प्रावधान है। इसमें स्टिल्ट पार्किंग, सामान्य कक्ष, मनोरंजन क्षेत्र, डायनिंग हॉल और किचन की सुविधाएं उपलब्ध हैं। यूजी और इंटर्न छात्र एवं छात्राओं के लिए छात्रावास उज्जैन मेडिकल कॉलेज में छात्रों के लिए 329 यूजी और 70 इंटर्न तथा छात्राओं के लिए 286 अंडरग्रेजुएट और 58 इंटर्न की क्षमता वाला छात्रावास रहेगा। इनमें स्टिल्ट पार्किंग, सामान्य कक्ष, मनोरंजन क्षेत्र और डायनिंग सुविधाएं रहेंगी। 145 विद्यार्थियों की क्षमता वाला आरडीएच छात्रावास जिम, डायनिंग हॉल और स्टिल्ट पार्किंग जैसी सुविधाओं से युक्त रहेगा।   recent visitors 62

मॉक ऑक्शन में ऋषभ पंत को बेस प्राइस से कई गुना ज्यादा दाम मिला, पंजाब ने ऋषभ पंत को 29 करोड़ में खरीदा

नई दिल्ली आईपीएल 2025 का मेगा ऑक्शन जेद्दा में 24 और 25 नवंबर को होगा. इससे ठीक पहले कई मॉक ऑक्शन हो रहे हैं. टीम इंडिया के पूर्व खिलाड़ी कृष्णम्माचारी श्रीकांत ने भी एक मॉक ऑक्शन करवाया. इसमें ऋषभ पंत को बेस प्राइस से कई गुना ज्यादा दाम मिला. पंत को पंजाब किंग्स ने 29 करोड़ रुपए में खरीदा. वहीं राजस्थान रॉयल्स के पूर्व खिलाड़ी जोस बटलर पर कोलकाता नाइट राइडर्स ने बड़ा दांव लगाया. अर्शदीप सिंह को भी मोटी रकम मिली. दरअसल श्रीकांत ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक मॉक ऑक्शन करवाया. इसमें पंत सबसे महंगे बिगे. उन्हें पंजाब ने खरीदा. ऋषभ पंत को दिल्ली कैपिटल्स ने रिलीज कर दिया था. जोस बटलर की बात करें तो उन्हें राजस्थान ने रिटेन नहीं किया. बटलर और पंत को मेगा ऑक्शन में मोटी रकम मिल सकती है. हालांकि ये कहना मुश्किल कि उन्हें कौनसी टीम खरीदने में कामयाब होगी. लेकिन ये दोनों ही खिलाड़ी मॉक ऑक्शन में काफी महंगे बिके. बटलर को 15.50 करोड़ में खरीदा गया. शमी से महंगे बिगे अर्शदीप सिंह – मॉक ऑक्शन में तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह, शमी से ज्यादा महंगे बिके. अर्शदीप सिंह को चेन्नई सुपर किंग्स ने 13 करोड़ रुपए में खरीदा. जबकि शमी को गुजरात टाइटंस ने 11 करोड़ रुपए में खरीदा. गुजरात ने शमी को इस बार के लिए रिटेन नहीं किया है. शमी इंजरी की वजह से बाहर चल रहे थे. लेकिन अब वे मैदान पर वापसी कर चुके हैं. उन्होंने हाल ही में एक घरेलू मैच में घातक गेंदबाजी की. अय्यर-राहुल को भी मिली मोटी रकम – श्रीकांत के मॉक ऑक्शन में श्रेयस अय्यर को दिल्ली कैपिटल्स ने खरीदा. उन्हें 16 करोड़ रुपए मिले. वहीं राहुल पर रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने दांव लगाया. केएल राहुल को आरसीबी ने 20 करोड़ रुपए में खरीदा. श्रीकांत के मॉक ऑक्शन में किसे-कितना मिला दाम –     ऋषभ पंत – पंजाब किंग्स – 29 करोड़ रुपए     केएल राहुल – रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर – 20 करोड़ रुपए     श्रेयस अय्यर – दिल्ली कैपिटल्स – 16 करोड़ रुपए     जोस बटलर – कोलकाता नाइट राइडर्स – 15.50 करोड़ रुपए     अर्शदीप सिंह – चेन्नई सुपर किंग्स – 13 करोड़ रुपए     मोहम्मद शमी – गुजरात टाइटंस – 11 करोड़ रुपए   recent visitors 84

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नई दिल्ली से वर्चुअली देवास में किया सिंथेटिक एथेलेटिक ट्रैक का भूमि-पूजन

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में खेल अधोसंरचना का निरंतर विकास हो रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में इस दिशा में जिस प्रकार कार्य जारी है, उससे प्रदेश के खिलाड़ी विक्रम अवार्ड प्राप्त करने के साथ-साथ एशियाड और ओलंपिक में अवार्ड प्राप्त करने की ओर भी अग्रसर हो रहे हैं। देवास में कुशाभाऊ ठाकरे स्टेडियम और श्रीमंत तुकोजीराव पवार स्टेडियम से कई प्रतिभावान खिलाड़ी प्रदेश व देश को मिले हैं। श्रीमंत तुकोजीराव पवार की जयंती पर देवास को मिल रही सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक की सौगात से खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने के अधिक अवसर प्राप्त होंगे। देवास में खेल सुविधाओं के विस्तार के लिए निरंतर प्रयास जारी रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कुशाभाऊ ठाकरे स्टेडियम देवास में सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक के भूमि पूजन कार्यक्रम को नई दिल्ली से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। विविध विशेषताओं से समृद्ध है मालवा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देवास, उज्जैन धार और इंदौर को जोड़ते हुए क्षेत्र को वृहद महानगर के रूप में विकसित किया जा रहा है। औद्योगीकरण की दिशा में राज्य सरकार तेज गति से कार्य कर रही है। बदलते दौर में इस क्षेत्र की देश में विशिष्ट पहचान होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देवास में मां तुलजा भवानी और चामुंडा माता दो देवियों का वास है साथ ही क्षेत्र को कैला देवी का भी आशीर्वाद प्राप्त है। अपनी विविध विशेषताओं से समृद्ध मालवा, छत्रपति महाराज शिवाजी के बाद होलकर-पवार-सिंधिया और बाजीराव जी महाराज के माध्यम से हिंदवी सेना द्वारा साम्राज्य पुनर्स्थापित करने के समय से ही स्वाधीन हो गया था। इससे मालवा क्षेत्र के देव-स्थानों की आभा भी बढ़ी। पं. कुमार गंधर्व की उपस्थिति और बैंक नोट प्रेस ने देवास को विशेष महत्व प्रदान किया है। प्रदेश में 114 खेल अधोसंरचना निर्मित, 30 निर्माणाधीन उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में खेल और युवा कल्याण विभाग द्वारा 114 खेल अधोसंरचना (स्टेडियम/खेल परिसर/इंडोर हॉल) निर्मित किये गये है, 30 खेल अधोसंरचना निर्माणाधीन है। प्रदेश मंव कुल 8 सिंथेटिक एथेलेटिक ट्रैक निर्मित किये गये है। देवास में 9वॉ सिंथेटिक एथेलेटिक ट्रैक कुशाभाऊ ठाकरे स्टेडियम में स्थापित किया जा रहा है। इसके अलावा 3 और एथेलेटिक ट्रैक – इंदौर, रतलाम और छतरपुर में भी स्वीकृत किये गये है। प्रदेश में खेल और युवा कल्याण विभाग द्वारा 12 सिंथेटिक हॉकी टर्फ की स्थापना की गई है तथा 6 सिंथेटिक हॉकी टर्फ निर्माणाधीन है। राज्य सरकार द्वारा "वन डिस्ट्रिक्ट-वन स्पोर्टस काम्पलेक्स" अन्तर्गत सभी जिलों में खेल स्टेडियम का निर्माण किया जावेगा और मुख्यमंत्री खेल अधोसंरचना योजना के तहत सभी विकासखंडो में खेल स्टेडियम बनाने की योजना है। देवास में 9 करोड़ 18 लाख की लागत बनेगा सिंथेटिक एथेलेटिक ट्रैक देवास का कुशाभाऊ ठाकरे स्टेडियम 10.00 एकड़ भूमि में स्थित है। स्टेडियम में बैडमिंटन के 4 सिंथेटिक कोर्ट, बास्केटबॉल के 2 कोर्ट, 25 मीटर स्वीमिंग पुल, ओपन जिम, साफ्टबॉल और शतरंग खेल के अतिरिक्त महिला आत्मरक्षा के लिए कराते प्रशिक्षण संचालित है। स्टेडियम में एथेलेटिक खिलाड़ियों के लिए खेल और युवा कल्याण विभाग द्वारा सिंथेटिक एथेलेटिक ट्रैक की स्थापना 9 करोड़ 18 लाख रुपए की लागत से की जा रही है, जिसमें 400 मीटर सिंथेटिक एथेलेटिक ट्रेक 8 लेन की सुविधा उपलब्ध रहेंगी। खिलाड़ियों के फिटनेस के लिए 26 लाख रुपए के जिम उपकरण भी उपलब्ध कराये जायेंगे। कार्यक्रम से उप मुख्यमंत्री तथा देवास जिले के प्रभारी श्री जगदीश देवड़ा, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास सारंग वर्चुअली जुड़े। देवास में हुए कार्यक्रम में देवास सांसद श्री महेन्द्र सिंह सोलंकी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती लीला अटारिया, विधायक श्रीमती गायत्रीराजे पवार, महापौर श्रीमती गीता दुर्गेश अग्रवाल तथा अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।   recent visitors 120