प्रदेश में खूब बिक रहा गेहूं का बिजवारा, अब तक हो चुकी 50 फीसदी बोवनी, लोकवन पूर्णा, 513 जैसी किस्म का जोर

उज्जैन  इस वर्ष मालवा की माटी में गेहूं की बंपर पैदावार होने की संभावना है। करीब 4.5 लाख हेक्टेयर में बोवनी की जा रही है। चने की बोवनी का रकबा कम बताया जा रहा है। किसान तेजस, पोषक, 322 किस्म के गेहूं का बीज ज्यादा पसंद कर रहे हैं। बीते तीन वर्षों से किसानों को सोयाबीन भाव ठीक नहीं मिल रहे हैं, जबकि गेहूं के भाव काफी अच्छे मिल रहे हैं। यही कारण है कि किसानों का रुझान चने की बनिस्बत गेहूं की बोवनी पर अधिक है। अब तक हो चुकी 50 फीसदी बोवनी     कृषि विभाग के अनुसार, इस वर्ष 4.50 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बोवनी की जा रही है। अब तक 50 फीसद बोवनी हो चुकी है। किसान अधिक उत्पादन के किस्म का गेहूं अधिक बो रहे हैं।     व्यापारी अखिलेश जैन के अनुसार, किसानों ने पोषक, तेजस, 322 किस्म का बिजवारा अधिक खरीदा। इस किस्म के गेहूं का उत्पादन काफी अच्छा बताया जा रहा है।     बीज कंपनी से लेकर व्यापारिक क्षेत्र में यह गेहूं 3300 से 4500 रुपया क्विंटल तक बिक गया। इसके बाद किसानों ने पर्याप्त पानी के चलते लोकवन पूर्णा, 513 जैसी किस्म को बोया है। इनके भाव भी ऊंचे में 4000 रुपया क्विंटल तक रहे। देशावर में खूब बिक रहा गेहूं का बिजवारा इस वर्ष देशावर में गेहूं के बीज की आपूर्ति मालवा क्षेत्र से हो रही है। 322, लोकवन, पूर्णा, पोषक गेहूं के बीजवारे की मांग महाराष्ट्र, पंजाब, बिहार में काफी चल रही है। इस कारण गेहूं के भाव भी ऊंचे हैं। शरबती की बोवनी नगण्य किसी समय में मालवा की माटी का शरबती की मिठास देश के महानगरों में काफी पसंद की जाती थी। मुंबई में इस गेहूं की कीमत 5 से 8 हजार रुपये क्विंटल तक होती थी, लेकिन जिले के सभी क्षेत्र में पानी पर्याप्त मात्रा में होने से किसानों ने शरबती गेहूं की बोवनी से किनारा कर लिया। बता दें इस किस्म का गेहूं काफी कम पानी की पैदावार है। उत्पादन भी अन्य गेहूं की बनिस्बत कम है। अब अधिक उत्पादन पर किसान ध्यान देता है। recent visitors 113

जनकपुर-अयोध्या के ऐतिहासिक संबंधों का साक्षी बनेगा श्रीराम का तिलकोत्सव

अयोध्या अयोध्या में भगवान श्रीराम का तिलकोत्सव 18 नवंबर सोमवार को रामसेवकपुरम में भव्य आयोजन के साथ सम्पन्न होगा। यह आयोजन प्रभु श्रीराम और जनकपुर के ऐतिहासिक संबंधों को पवित्रता को पुनः जीवंत करने का एक विशेष अवसर का साक्षी बनने जा रहा है। आयोजनकर्ता ने बताया कि सोमवार दोपहर दो बजे विधि विधान पूर्वक प्रारम्भ होने वाले इस धार्मिक अनुष्ठान में जनकपुर से आए लगभग 300 से अधिक तिलकहरू (शुभचिंतक) और विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति रहेगी। यह आयोजन न केवल धार्मिक परंपराओं को सजीव करेगा, बल्कि भारत और नेपाल के बीच सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूती प्रदान करेगा। इसकी तैयारियां जोरों पर हैं। रामसेवक पुरम परिसर को इस विशेष अवसर के लिए भव्य रूप से सजाया गया है। परंपरागत रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक धरोहर को ध्यान में रखते हुए सभी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। जनकपुर से तिलकहरुओं का आगमन 16 नवंबर से ही प्रारंभ हो गया है। उनकी आवभगत और ठहरने की व्यवस्था कारसेवकपुरम, अभयदाता हनुमान आश्रम, विवेक सृष्टि, माता सरस्वती देवी मंदिर और तीर्थ क्षेत्र भवन में की गई है। रामसेवक पुरम के मंच पर 18 वर्षीय युवक को प्रभु श्रीराम के स्वरूप में सज्जित किया जाएगा। श्रीराम स्वरूप को आटे से बने चौक या सिंहासन पर विराजमान किया जाएगा। जनकपुर से आए तिलकहरू परंपरागत वस्तुएं जैसे कांसे के बर्तन, पीली धोती, गमछा, करधनी, हल्दी, चंदन, धान, दूब, पान, इलायची, सुपारी, जनेऊ और चांदी के सिक्के लेकर आएंगे और इन्हें तिलक समारोह के दौरान प्रभु श्रीराम के स्वरूप को भेंट करेंगे। तिलक समारोह में सीता जी के छोटे भाई के रूप में तिलक चढ़ाने की भूमिका जानकी मंदिर, जनकपुर के छोटे महंत रामरोशन दास जी निभाएंगे। वे वेदज्ञ आचार्यों के मंत्रोच्चार के बीच प्रभु श्रीराम के स्वरूप को तिलक अर्पित करेंगे। इस भव्य आयोजन में जनकपुर, मधेश प्रदेश के मुख्यमंत्री सतीश कुमार सिंह अपने आधा दर्जन मंत्रियों के साथ उपस्थित रहेंगे। जनकपुर के महापौर मनोज कुमार शाह और नेपाल के अन्य तीन महापौर भी इस धार्मिक आयोजन के साक्षी बनेंगे। तिलकोत्सव के दौरान अयोध्या की महिलाओं की टोली अवध क्षेत्र के परंपरागत मांगलिक लोकगीत गाएगी, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाएगा। तिलकहरुओं के स्वागत में विशेष भोज का आयोजन किया जाएगा। इसमें स्वादिष्ट आलू टिक्की, पापड़ी चाट, छोला, चावल, पूड़ी, मिक्स सब्जी, रायता, पापड़ और हलवा जैसे व्यंजन परोसे जाएंगे। recent visitors 96

दिल्ली LG ने पुलिस को दिए अवैध प्रवासियों की पहचान के आदेश, एक महीने तक स्पेशल ड्राइव चलाने के निर्देश

 नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशियों पर अब जल्द ही कोई बड़ा ऐक्शन हो सकता है। दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) वी.के. सक्सेना ने दिल्ली पुलिस को राजधानी में अवैध अप्रवासियों की पहचान करने को कहा है। एलजी ने इसके लिए पुलिस को एक महीने तक स्पेशल ड्राइव चलाने का भी निर्देश दिया है। जानकारी के अनुसार, उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने दिल्ली में अवैध अप्रवासियों की संख्या में इजाफा होने की खबरों का संज्ञान लेकर पुलिस को अतिरिक्त सतर्कता बरतने और उनकी पहचान के लिए एक महीने तक अभियान चलाने के निर्देश जारी किए हैं। एलजी ने शुक्रवार को दिल्ली पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिए कि वे राजधानी में अवैध प्रवासियों की पहचान कर केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर उन पर कार्रवाई करें। एलजी ऑफिस द्वारा दिल्ली के मुख्य सचिव, पुलिस कमिश्नर, एमसीडी कमिश्नर और एनडीएमसी अध्यक्ष को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए अलर्ट रहने का निर्देश दिया है। पत्र में कहा गया है कि ऐसी खबरें हैं कि अवैध अप्रवासियों के पहचान दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड आदि को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तैयार करने और हेरफेर करने की प्रक्रिया अपनाने के प्रयास चल रहे हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दिल्ली में अगले साल फरवरी में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) पर राजधानी में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को संरक्षण देने का आरोप लगा रहे हैं। ‘आप’ ने भाजपा पर बोला हमला अवैध प्रवासियों पर उपराज्यपाल की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली की ‘आप’ सरकार ने कहा, "भाजपा केवल राजनीतिक लाभ के लिए अवैध प्रवासियों के मुद्दे का इस्तेमाल करती है। इस बात की गहन जांच होनी चाहिए कि अवैध प्रवासी हमारे देश में कैसे प्रवेश कर रहे हैं। इसके लिए सीधे तौर पर अमित शाह और केंद्रीय गृह मंत्रालय जिम्मेदार हैं।" ‘आप’ ने एक बयान में कहा, "यदि अवैध अप्रवासी हैं, तो कितने हैं? यह एक बड़ी विफलता है तथा ऐसे लोगों पर कार्रवाई ना करना, इसे और अधिक स्पष्ट रूप से उजागर करता है।" ‘आप’ ने कहा, “एक तरफ भाजपा अवैध प्रवासियों को नागरिकता दे रही है और दूसरी तरफ जांच का दिखावा कर रही है। भाजपा को यह पाखंड बंद करना चाहिए और अपनी गंदी राजनीति खत्म करनी चाहिए।” एलजी के पत्र में कहा गया है कि सोशल मीडिया और अन्य विश्वसनीय स्रोतों से प्राप्त कुछ रिपोर्ट बताती हैं कि दिल्ली में अवैध प्रवासियों की संख्या में अचानक वृद्धि हुई है। पत्र में कहा गया है, "ऐसे लोगों द्वारा सार्वजनिक सड़कों, फुटपाथों और पार्कों पर अतिक्रमण भी बढ़ा है। ऐसी खबरें हैं कि उनके पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड, चुनाव पहचान पत्र आदि बनाने के लिए फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और धोखाधड़ी की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।" सक्सेना ने कहा, "यदि अवैध प्रवासियों को चुनाव पहचान पत्र जारी किया जाता है तो इससे उन्हें लोकतंत्र का सबसे शक्तिशाली अधिकार अर्थात हमारे देश में वोट देने का अधिकार प्राप्त होगा। अवैध प्रवासियों को ऐसे अधिकार देना किसी भी भारतीय नागरिक द्वारा स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस तरह के कदम राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी हानिकारक हो सकते हैं।" सत्यापन में अतिरिक्त सतर्कता बरतें उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव संभागीय आयुक्तों के माध्यम से जिलाधिकारियों को पहचान दस्तावेजों के लिए आवेदन करने वाले लोगों के सत्यापन में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश जारी करें। पत्र में कहा गया है कि पुलिस कमिश्नर क्षेत्रीय स्तर के अधिकारियों को विशेष रूप से सड़क किनारे तथा खाली सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करके बसे लोगों का निरीक्षण करते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दें। सक्सेना ने कहा कि दिल्ली पुलिस अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए एक महीने तक स्पेशल अभियान चलाएगी और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय करके आगे की कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि सभी सरकारी एजेंसियों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार राजधानी में कहीं भी सार्वजनिक स्थानों पर अनाधिकृत कब्जा न हो। recent visitors 83

इंटेलिजेंस रिपोर्ट :बालाघाट, मंडला और डिंडौरी में दाखिल होते हुए नक्सलियों ने माड़ा के जंगल को सेफ जोन बनाया

बालाघाट छत्तीसगढ़ से नक्सलियों को जड़ से उखाड़ने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। इस अभियान की वजह से माओवादियों की कमर टूटती नजर आ रही है। नक्सलियों पर हमले की वजह से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा है। कार्रवाई की वजह से नक्सली अब मध्य प्रदेश को अपना ठिकाना बना रहे हैं, जिसका खुलासा इंटेलिजेंस की रिपोर्ट में हुआ है। अब इसे ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश सरकार सतर्क हो गई है। इन तीन जिलों में नक्सली     इंटेलिजेंस रिपोर्ट के मुताबिक, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी में नक्सलियों का नया कैडर तैयार हो रहा है। नक्सली दलम-2 के नाम से इसका विस्तार कर रहे हैं। इसे देखते हुए सीएम मोहन यादव ने केंद्र से सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व बल) की 2 बटालियन की मांग की है। बटालियनों को बालाघाट, मंडला और डिंडौरी के घोर नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनात किया जाएगा।     जानकारी के मुताबिक, सीआरपीएफ बटालियन के साथ ही इन तीनों जिलों में 220 नई सड़कें बनाने की भी मांग की गई है। तीनों जिलों के नक्सल मूवमेंट वाले इलाकों में आरसीपी (रिगिड कंक्रीट पेवमेंट) से 220 नई सड़कें बनाई जाएंगी। गौरतलब है कि इससे पहले नक्सली कान्हा के रास्ते बालाघाट, मंडला और डिंडौरी में प्रवेश करते रहे हैं। अब सवाल यह उठता है कि नक्सलियों ने माड़ा के जंगल को सेफ जोन क्यों बनाया है, इससे निपटने के लिए सुरक्षा बल क्या रणनीति बना रहे हैं? आइए आपको बताते हैं। बचने के लिए सुरक्षित ठिकाने की तलाश दरअसल, 4 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के नारायणपुर-दंतेवाड़ा में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस मुठभेड़ में 31 नक्सली मारे गए थे। इसके चलते छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया था। आपको बता दें कि जब भी सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ होती है तो वे अपने सुरक्षित ठिकाने की तलाश करते हैं ताकि वे सरकार की कार्रवाई से बच सकें। डिंडोरी जिले को क्यों चुनते हैं नक्सली? नक्सल ऑपरेशन से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक एमपी के बालाघाट, मंडला और डिंडोरी जिले को नक्सली अपने सुरक्षित ठिकाने के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। इस संबंध में बालाघाट जोन के आईजी संजय कुमार का कहना है कि नक्सलियों ने साल 2015-16 में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ (एमएमसी) एरिया इसलिए बनाया था क्योंकि यह छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव, खैरागढ़, कवर्धा से लेकर मनेंद्रगढ़ और कोरिया जिले तक फैला हुआ है। संजय कुमार की मानें तो महाराष्ट्र का गोंदिया, छत्तीसगढ़ का राजनांदगांव और एमपी का बालाघाट (जीआरबी) नक्सलियों के एमसीसी एरिया का हिस्सा है, जिसके चलते नक्सली इसे चुनते हैं। केंद्र से मांग इसके अलावा नक्सलियों ने मंडला के कान्हा टाइगर रिजर्व और छत्तीसगढ़ के भोरमदेव अभ्यारण्य को विकसित कर लिया है, जिसे केबी कहते हैं। गौरतलब है कि यह इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी की रिपोर्ट का हिस्सा है, जो पिछले दिनों केंद्र सरकार को दी गई थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर एमपी सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हाल ही में हुई बैठक में सीआरपीएफ की दो बटालियन की मांग की है। recent visitors 144

रतलाम का वन विभाग सैलाना वन क्षेत्र में प्रदेश का पहला कैक्टस गार्डन तैयार करने जा रहा

रतलाम मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में वन विभाग एक नया आयाम स्थापित कर रहा है। सैलाना वन क्षेत्र में प्रदेश का पहला और एकमात्र कैक्टस गार्डन तैयार किया जा रहा है, जो न केवल पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा बल्कि शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए भी एक ज्ञानवर्धक केंद्र साबित होगा। एशिया का सबसे बड़ा कैक्टस गार्डन भी रतलाम जिले के सैलाना में बना हुआ है। लेकिन मध्य प्रदेश में वन विभाग का यह पहला कैक्टस गार्डन बन रहा है जिसमें 100 से ज्यादा प्रजातियां के कैक्टस पौधे लगाए जाएंगे इसके साथ ही यहां पर गार्डन और अन्य सुविधाएं भी मिलेगी। 100 से अधिक प्रजातियों के कैक्टस पौधे लगाए जाएंगे। वन विभाग की योजना के तहत इस गार्डन में 100 से ज्यादा प्रजातियों के कैक्टस का रोपण किया जाएगा। कैक्टस के पौधे मध्य प्रदेश सहित गुजरात से भी लाए जाएंगे। डीएफओ एन. के. दोहरे ने बताया कि यह परियोजना कैक्टस जैसे विशेष पौधों के संरक्षण के साथ-साथ उनके वैज्ञानिक अध्ययन के लिए भी अत्यंत उपयोगी होगी। आखिर कैसे हुआ चयन रतलाम जिले में सैलाना वन परिक्षेत्र 10 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है। वन विभाग द्वारा कैक्टस गार्डन का तीन माह पूर्व प्रपोजल तैयार किया। शासन स्तर पर पहले प्रपोजल भोपाल भेजा। वहां से केंद्र सरकार के पास पहुंचा। पीएम नरेंद्र मोदी की ‘सेंट्रल ग्रीन इंडिया मिशन योजना’ में इस प्रपोजल को शामिल किया। केंद्र से पूरे देश में 10 से 15 नगर वाटिका (गार्डन), नगर वन व स्माल नगर वाटिका को स्वीकृत किया। स्माल नगर वाटिका में प्रदेश में मात्र रतलाम के सैलाना वन परिक्षेत्र का चयन किया। इसके बाद से वन परिक्षेत्र में कैक्टस गार्डन के लिए कार्य शुरू हो चुका है। वन परिक्षेत्र की सफाई की जा रही है। जिस जगह गार्डन बनेगा उस जगह को समतल कर गड्‌डे खोदने का काम किया जा रहा है। कैक्टस ही नहीं बहुत कुछ देखने को मिलेगा अगर आप सोच रहे है कि सैलाना के वन परिक्षेत्र में केवल कैक्टस गार्डन ही देखने को मिलेगा। तो ऐसा नहीं है, कैक्टस गार्डन के साथ ही वन परिक्षेत्र में ऑक्सीजन पार्क, बटरफ्लाए पार्क, फ्लावर पार्क, किड्स पार्क झूलों के साथ यहां भ्रमण के लिए एक स्थान में सब कुछ आपको मिलेगा। इसके साथ ही नाम राशि अनुसार राशि वन व नौ ग्रह के नाम से नक्षत्र वन भी तैयार किया जाएगा। जिसमें नाम व नक्षत्र के अनुसार पौधे लगाए जाएंगे। स्टेच्यू पर दिखेगा मेडिसनल गार्डन पीएम नरेंद्र मोदी के सेंट्रल ग्रीन इंडिया मिशन योजना के तहत मेडिसनल गार्डन (औषध मानव) का ह्यूमन स्ट्रेक्चर खड़ा किया जाएगा। इस स्ट्रेक्टर पर मेडिसीन लगाई जाएगी। शरीर से जुड़ी बीमारी के लिए कौन सी दवा जरुरी है वह इस मेडिसीन ह्यूमन स्ट्रेक्चर के माध्यम से पता चलेगा। यह भी होगा     आयुर्वेदिक त्रिफला वन के साथ टीग सागवान (सागौन) वन भी बनेगा। इसमें सेल्फी पाइंट बनाया जाएगा। 40 लाख का प्रोजेक्ट, एक साल में होगा तैयार डीएफओ नरेश कुमार दोहरे ने बताया कैक्टस गार्डन समेत अन्य सुविधाओं को विकसीत करने के लिए केंद्र सरकार से राशि दी जाएगी। पूरा प्रोजेक्ट 40 लाख रुपए का है। पहले फेस में वन विभाग को 27.50 लाख राशि मिल चुकी है। हमने काम भी शुरू कर दिया है। इन जगहों से लाएंगे पौधे कैक्टस गार्डन के लिए गुजरात, भोपाल व इंदौर से कैक्टस के पौधे लाए जाएंगे। जिस जगह गार्डन बनेगा उस वन परिक्षेत्र में सैलाना के कैक्टस गार्डन से पौधे लाकर लगा रखे है। बस इस वन परिक्षेत्र को संवारने की जरूरत है। पौधों पर लगेंगे क्यूआर कोड कैक्टस गार्डन में लगाए जाने वालो पौधों की जानकारी के लिए तकनीकी का भी सहारा लिया जाएगा। प्रत्येक पौधों के आगे उनके नाम व प्रजाति के बारे में लिखा जाएगा। इसके साथ पौधों के आगे क्यूआर कोड भी लगाए जाएंगे। जिससे गार्डन में आने वालों को उस पौधों की जानकारी सरलता से मिल जाए। क्यूआर कोड को स्कैन करते ही पौधों की सारी जानकारी मोबाइल स्क्रीन पर आ जाएगी। डीएफओ नरेश कुमार दोहरे के अनुसार गार्डन के विकसित होने के बाद सैलाना और रतलाम क्षेत्र में पर्यावरण पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। यह गार्डन पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनेगा। साथ ही वनस्पति विज्ञान के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए भी अत्यधिक उपयोगी साबित होगा। सैलाना में पहले से है एक गार्डन सैलाना में एशिया का पहला कैक्टस गार्डन है। इस गार्डन को सैलाना के महाराजा ने अपनी निजी जगह पर सालों पहले लगाया था। छोटे से लेकर बड़े कैक्टस के पौधों कई प्रजातियों के यहां पर लगे हुए है। जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में रतलाम जिले के अलावा अन्य राज्यों से भी पर्यटक पहुंचते है। पर्यटन के रूप में जाना जाता है सैलाना रतलाम से सैलाना करीब 18 किमी दूर रतलाम-बांसवाड़ा मार्ग पर स्थित है। सैलाना पर्यटन क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। यहां पर पहाड़ियों के बीच शिवगढ़ मार्ग पर कल्याण केदारेश्वर तो बांसवाड़ा रोड पर भी पहाड़ों के अंदर भगवान भोलेनाथ विराजित है। बारिश व सावन माह में हजारों की संख्या में लोग इन दोनों स्थानों पर पहुंचते है। बारिश में बहते हुए झरने व चारों तरफ हरियाली आकर्षण का केंद्र रहती है। सैलाना का वन परिक्षेत्र भी रतलाम से जाते समय सैलाना में इंटर करते ही मुख्य रोड पर है। सैलाना की और पहचान बढ़ेगी सैलाना के पार्षद ईश्वर डिंडोर का कहना है कि कैक्टस का नया गार्डन बनने से सैलाना की और पहचान बढ़ेगी। बड़ी संख्या में पर्यटक यहां आएंगे। कमलेश राठौर ने बताया सैलाना में कैक्टस गार्डन बनने के बाद पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। इससे यहां के लोगों के व्यापार-व्यवसाय में वृद्धि होगी। 10 हेक्टेयर क्षेत्र में बॉटनिकल गार्डन का विस्तार कैक्टस गार्डन सैलाना वन क्षेत्र के 10 हेक्टेयर एरिया में विकसित किया जा रहा है। इस बॉटनिकल गार्डन में 150 प्रकार के वृक्ष लगाए जाएंगे, जिनमें से कुछ दुर्लभ और विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुकी प्रजातियां भी शामिल होंगी। तकनीकी नवाचार के माध्यम से गार्डन में लगाए गए वृक्षों के बारे में जानकारी प्राप्त करना भी सरल बनाया गया है। हर वृक्ष पर एक क्यूआर कोड लगाया जाएगा, जिसे स्कैन करने पर उस वृक्ष की विस्तृत जानकारी मोबाइल स्क्रीन पर उपलब्ध हो जाएगी। कैक्टस गार्डन के विकास पर लगभग 50 … Read more

मध्‍य प्रदेश में अफोर्डेबल हाउसिंग पालिसी होगी तैयार, सस्ती दर पर मिलेगी जमीन, एक प्रतिशत से भी कम स्टांप शुल्क

भोपाल  शहरों को झुग्गी मुक्त बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 लागू की है। अन्य योजनाओं को मिलाकर इसमें काम होगा। इसके लिए मध्य प्रदेश सरकार अफोर्डेबल हाउसिंग पालिसी तैयार कर लागू करेगी। इस नीति के तहत मकान बनाने के लिए सस्ती दर पर भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। योजना में पंजीकृत आवासों के लिए एक प्रतिशत से कम स्टांप शुल्क लिया जाएगा। ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (टीडीआर) सुविधा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और निम्न आय वर्ग के लिए निर्मित क्षेत्र में परियोजना के समग्र फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) में शामिल नहीं किया जाएगा। 31 दिसंबर तक का है समय नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि योजना को लागू करने के लिए 31 दिसंबर, 2024 से पहले प्रदेश को केंद्र सरकार को सहमति प्रेषित करनी होगी। साथ ही अन्य सुधार 30 जून, 2025 तक पूर्ण कर लागू करने होंगे। 12 नवंबर को मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में बताया गया कि प्रदेश सरकार योजना पर सहमति भेज रही है। लक्ष्य यह रखा गया है कि पांच वर्ष में इस योजना के माध्यम से प्रदेश में दस लाख आवास निर्मित किए जाएं। जारी रहेगी ढाई लाख की सब्सिडी     स्वयं की भूमि पर आवास निर्माण के लिए ढाई लाख रुपये का जो अनुदान दिया जा रहा है, वह जारी रखा जाएगा।     प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के क्रियान्वयन में मध्य प्रदेश वर्ष 2015 से वर्ष 2023 तक पहले या दूसरे स्थान पर रहता आया है। अभी तक इसमें साढ़े नौ लाख हितग्राहियों को लाभ मिल चुका है।     अब शहरों को झुग्गी मुक्त करने और आवास की आवश्यकता की पूर्ति के लिए तीन स्तर पर एक साथ काम होगा।     इसमें प्रधानमंत्री आवास शहरी के तहत पंजीकृत आवासों (60 वर्गमीटर तक) के लिए एक प्रतिशत या उससे भी कम स्टांप या पंजीकरण शुल्क लिया जाएगा।     आवास निर्माण के लिए ऐसे हितग्राही जिनके पास भूमि नहीं है, उन्हें सस्ती दर पर पट्टे दिए जाएंगे। इन्हें मिलेगी योजना में प्राथमिकता     प्रधानमंत्री आवास योजना में उन व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनके पास कहीं भी पक्का आवास नहीं है।     नौ लाख रुपये तक की वार्षिक आय और राज्य व केंद्र सरकार की किसी भी आवास योजना में लाभ ले चुके व्यक्ति योजना के लिए अपात्र होंगे।     कल्याणी (विधवा), दिव्यांग, वरिष्ठ नागरिक, ट्रांसजेंडर, अनुसूचित जाति-जनजाति एवं अल्पसंख्यक वर्ग, सफाई कर्मी, पथ विक्रेता, पीएम विश्वकर्मा योजना के कारीगर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, निर्माण श्रमिक, मलिन बस्तियों में रहने वाले परिवारों को प्राथमिकता मिलेगी।     ऐसे व्यक्ति, जिनकी वार्षिक आय तीन लाख रुपये तक हो और उनके पास स्वयं का भूखंड हो उन्हें मकान बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के माध्यम से ढाई लाख रुपये की मदद की जाएगी।     यह राशि तीन किस्तों में देय होगी। इसी तरह सरकारी या निजी एजेंसी की परियोजना में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 30 से 45 वर्ग मीटर का फ्लैट दिलाया जाएगा।     इसके लिए भी ढाई लाख रुपये तक की सहायता केंद्र और राज्य सरकार मिलकर देगी।   recent visitors 196

सरकार ने इंदौर में नए ESIC मेडिकल कॉलेज बनने की दी मंजूरी, साढ़े तीन सौ करोड़ की लागत आएगी

इंदौर इंदौर में एक और नया मेडिकल काॅलेज खुलने जा रहा है। इसका निर्माण कर्मचारी राज्य बीमा निगम करेगा। इसके सहमति सरकार से मिल चुकी है। नंदानगर स्थित ईएसआईसी परिसर में काॅलेज बिल्डिंग का निर्माण अगले साल शुरू होगा। यह बिल्डिंग 40 साल पहले अस्पताल के लिए बनाई बिल्डिंग को तोड़कर बनाया जाएगा। बीमा निगम के अफसरों के अनुसार यह मेडिकल काॅलेज जबलपुर मेडिकल विश्व विद्यालय से संबद्ध रहेगा। भविष्य में परिसर में नर्सिंग काॅलेज भी खुल सकता है। इंदौर में नया मेडिकल काॅलेज खोलने की योजना दस साल पहले बनी थी, लेकिन तब मेडिकल काॅलेज के लिए 50 एकड़ से ज्यादा की जमीन का नियम था और काॅलेज के छात्रों को प्रैक्टिस के लिए बड़े और आधुनिक अस्पताल की जरुरत भी होती है। इस कारण मामला ठंडे बस्ते में रहा। अब ईएसआईसी ने 500 बेड का अस्पताल बना लिया है। इसका निर्माण 350 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। हाल ही में इसका लोकार्पण वर्चुअली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। इस अस्पताल में तीन आपरेशन थिएटर, एक्सरे रुम, एमआरआई रुम, सोनाग्राफी, पैथलाॅजी सहित अन्य सुविधाएं भी है। इंदौर संभाग से यहां बीमा निगम से जुड़े कर्मचारी इलाज के लिए अाते है। इस कारण मेडिकल छात्रों को प्रैक्टिस में भी आसानी होगी। अगले माह से टूटने लगेगी अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग बीमा अस्पताल के नाम से पहचानी जाने वाली 40 साल पुरानी बिल्डिंग को तोड़ने का काम अगले माह से शुरू होगा। इस बिल्डिंग का मुआयना केंद्र से आए अफसर कर चुके है। बिल्डिंग के कई हिस्से खतरनाक भी हो चुके है। तोड़ने में चार से छह माह का समय लगेगा। इसके बाद मेडिकल काॅलेज की नई बिल्डिंग का काम शुरू होगा। इस काॅलेज में विभाग यह भी कोशिश कर रहा है कि बीमित कर्मचारियों के बच्चों के लिए भी चयन का कुछ कोटा रहे। इंदौर में अभी एक सरकारी और दो निजी मेडिकल काॅलेज है। अब चौथा मेडिकल काॅलेज खुलेगा। 350 करोड़ रुपये की लागत पुराना बीमा अस्पताल 40 साल पहले बना था और अब उसकी स्थिति खतरनाक हो गई है। केंद्र से आए अधिकारियों ने इसका मुआयना किया और इसे तोड़ने का फैसला लिया। इसे तोड़ने में चार से छह महीने का समय लगेगा, जिसके बाद नई मेडिकल कॉलेज बिल्डिंग का निर्माण शुरू होगा। यह मेडिकल कॉलेज जबलपुर मेडिकल विश्वविद्यालय से संबद्ध रहेगा। इसके साथ ही भविष्य में परिसर में नर्सिंग कॉलेज खोलने की भी योजना है। वर्तमान में ईएसआईसी ने 500 बेड का आधुनिक अस्पताल बनवाया है, जिसकी लागत 350 करोड़ रुपये आई है। इस अस्पताल का लोकार्पण हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअली किया था। अस्पताल में तीन ऑपरेशन थिएटर, एक्स-रे, एमआरआई, सोनोग्राफी और पैथोलॉजी जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। मेडिकल कॉलेज में छात्रों को प्रैक्टिस के लिए इस अस्पताल का लाभ मिलेगा। साथ ही बीमा निगम यह प्रयास कर रहा है कि बीमित कर्मचारियों के बच्चों के लिए चयन में कुछ कोटा तय किया जाए। खुलेगा चौथा मेडिकल कॉलेज इंदौर में पहले से एक सरकारी और दो निजी मेडिकल कॉलेज हैं। यह चौथा मेडिकल कॉलेज होगा, जो शहर की स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाएगा। ईएसआईसी देशभर में दस नए मेडिकल कॉलेज खोलने की योजना पर काम कर रहा है। इसमें इंदौर के अलावा बिहार, दिल्ली, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान और पश्चिम बंगाल भी शामिल हैं। श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने पिछले साल इन कॉलेजों की घोषणा की थी। देशभर में खुलेंगे दस नए मेडिकल काॅलेज देश में दस नए ईएआईसी अस्पताल कर्मचारी राज्य बीमा निगम खोलेगा। इनमें इंदौर शहर भी शामिल है। श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने पिछले साल दस काॅलेजों के निर्माण की घोषणा की थी। बीमा निगम के काॅलेज बिहार, दिल्ली, हरियाणा,कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान और बंगाल में है। recent visitors 177