MP में हाथियों को भी लगाया जाएगा सैटेलाइट कॉलर, जानें क्या है पूरा प्लान

भोपाल मध्य प्रदेश में चीते और बाघ की तर्ज पर अब हाथियों को भी सैटेलाइट कॉलर लगाये जायेंगे. सैटेलाइट कॉलर लगाने से हाथियों की लोकेशन का पता चल सकेगा. वन विभाग के एपीसीसीएफ एल. कृष्णमूर्ति ने बताया कि हाथी झुंड में रहते हैं. इसलिए सैटेलाइट कॉलर झुंड के किसी एक हाथी को लगाई जाएगी. इसकी मॉनिटरिंग कॉरिडोर वाले जिलों के डीएफओ और वाइल्ड लाइफ मुख्यालय स्थित कंट्रोल कमांड सेंटर से होगी. उन्होंने बताया कि हाथियों की लोकेशन पता करने के लिए नई व्यवस्था की जा रही है. यदि हाथी गांव की तरफ जाते हैं तो उन्हें मैनेज कर जंगल की तरफ हांका जाएगा. सैटेलाइट कॉलर लगाने के लिए कर्नाटक वाइल्ड लाइफ मुख्यालय ने स्वीकृति दे दी है. बताया जा रहा है कि कर्नाटक में इस तरह के प्रयोग हो रहे हैं. गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में लगभग 160 हाथी हैं. आंकड़ों के मुताबिक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 70 हाथी हैं. वहीं, संजय डुबरी नेशनल पार्क में 25 हाथियों का डेरा है. हाथियों को मैनेज करने का गुर सीखने अधिकारियों का दो दल मैसूर और कोयम्बटूर जाएगा. अब हाथियों को लगाये जायेंगे सैटेलाइट कॉलर दोनों दलों में कान्हा, संजय दुबरी, बांधवगढ़, उमरिया, मंडला, सीधी, शहडोल, अनूपपुर, मंडला सहित अन्य हाथी कॉरिडोर और प्रभावित इलाकों के डीएफओ शामिल हैं. सैटेलाइट कॉलर लगाने से जंगल के पास रहने वाली आबादी को बड़ी राहत मिलेगी. जंगली हाथी के गांव की तरफ जाने पर मैनेज कर जंगल की तरफ हांक दिया जाएगा. वन विभाग की तरफ से लोगों को भी जागरूक करने का काम किया जाएगा. बता दें कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 10 हाथियों की रहस्मयी मौत के बाद मध्य प्रदेश सरकार भी गंभीर है. हाथियों की मौत ने मध्य प्रदेश के वन्य प्राणियों की  सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के 10 हाथियों की मौत मामले फॉरेंसिक रिपोर्ट आ गयी है.  recent visitors 83

‘जिम में हो महिला ट्रेनर, पुरुष दर्जी नहीं ले सकेंगे महिलाओं का नाप’, बढ़ाई जाएगी महिलाओं की सुरक्षा

लखनऊ उत्तर प्रदेश महिला आयोग ने महिलाओं की सुरक्षा को बढ़ाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। आयोग ने प्रस्ताव दिया है कि कपड़ों की दुकानों पर महिला कर्मचारियों का होना अनिवार्य किया जाए ताकि महिलाएं सहज महसूस कर सकें। पुरुष दर्जी महिलाओं के कपड़े का नाप न लें। इसी तरह जिम और योगा केंद्रों में महिला प्रशिक्षकों की नियुक्ति अनिवार्य की जाए। ताकि महिलाएं सुरक्षित महसूस कर सकें। इसके अलावा आयोग ने सुझाव दिया है कि स्कूल बसों में भी महिला सुरक्षा कर्मियों की नियुक्ति की जाए। 28 अक्टूबर को हुई इस बैठक में यह प्रस्ताव रखा गया। जिसमें वर्तमान आयोग अध्यक्ष बबिता चौहान के साथ उपाध्यक्ष अपर्णा यादव और चारू चौधरी भी मौजूद थीं। आयोग का मानना है कि इस प्रकार के बदलाव से महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी और उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर अधिक सुरक्षा मिलेगी। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग एक वैधानिक निकाय है जिसका उद्देश्य महिलाओं के खिलाफ अपराधों को रोकना और उनके कल्याण को बढ़ावा देना है। आयोग समय-समय पर महिला सुरक्षा के विभिन्न मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने और महिला अधिकारों के बारे में जनता को सूचित करने के लिए सक्रिय कदम उठाता है। महिला आयोग द्वारा सुझाए गए प्रस्ताव?     महिला जिम/योगा सेन्टर में, महिला ट्रेनर होनी चाहिए। ट्रेनर एवं महिला जिम का सत्यापन अवश्य करा लिया जाए।     महिला जिम/योगा सेन्टर में प्रवेश के समय अभ्यर्थी के आधार कार्ड/निर्वाचन कार्ड जैसे पहचान पत्र से सत्यापन कर उसकी छायाप्रति सुरक्षित रखी जाए।     महिला जिम/योगा सेन्टर में डी.वी.आर. सहित सी.सी.टी.वी. सक्रिय दशा में होना अनिवार्य है।     विद्यालय के बस में महिला सुरक्षाकर्मी अथवा महिला टीचर का होना अनिवार्य है।     नाट्य कला केन्द्रों में महिला डांस टीचर एवं डी.वी.आर सहित सक्रिय दशा में सी.सी.टी.वी. का होना अनिवार्य है।     बुटीक सेन्टरों पर कपड़ों की नाप लेने हेतु महिला टेलर एवं सक्रिय सी.सी.टी.वी. का होना अनिवार्य है।     जनपद की सभी शिक्षण संस्थाओं का सत्यापन होना चाहिए।     कोचिंग सेन्टरों पर सक्रिय सी.सी.टी.वी. एवं वाशरूम आदि की व्यवस्था अनिवार्य है।     महिलाओं से संबंधित वस्त्र आदि की ब्रिकी की दुकानों पर महिला कर्मचारी का होना अनिवार्य है। पिछले महीने बबिता को मिली थी अध्यक्ष पद की कमान इस समय बबिता चौहान यूपी महिला आयोग की अध्यक्ष हैं. मुलायम की छोटी बहू अपर्णा यादव और चारू चौधरी उपाध्यक्ष हैं. योगी सरकार ने पिछले महीने पिछले महीने राज्य महिला आयोग का गठन करते हुए एक अध्यक्ष, दो उपाध्यक्ष और 25 सदस्यों के नामों की घोषणा की थी. बबीता को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई. इससे पहले बबिता बीजेपी महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रही थीं. बबिता चौहान के अध्यक्ष बनने के बाद यह यूपी महिला आयोग का यह सुझाव महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है. इस सुझाव की खास चर्चा भी की जा रही है. उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग एक वैधानिक निकाय है. इसकी स्थापना राज्य में महिलाओं के विरुद्ध अपराध से संबंधित मुद्दों से निपटने के लिए की गई है. इसका उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करना है. आयोग समय-समय पर राज्य में महिला-आधारित कानून के बारे में जनता को जागरूक करता है और इसके लिए खास कदम उठाता है.   recent visitors 70

EV में आग लगने की घटनाओं को कम करेगा एनपीसीसी, IIT Indore का कमाल…

इंदौर  इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने की घटनाएं आम हो चुकी हैं। इन घटनाओं के चलते जान का खतरा भी रहता है। अब आईआईटी इंदौर ने इस समस्या का समाधान खोज निकाला है। दरअसल, आईआईटी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर संतोष कुमार साहू के नेतृत्व में इलेक्ट्रिक वाहनों के थर्मल प्रबंधन में बदलाव लाने के लिए नोवेल फेज-चेंज कंपोजिट (एनपीसीसी) विकसित किया गया है। ओवरहीटिंग में कमी आएगी आईआईटी इंदौर में विकसित एनपीसीसी समान तापमान सुनिश्चित करके इस चुनौती का सामना करता है, जिससे ओवरहीटिंग के जोखिम में कमी आती है। एनपीसीसी बेहतर तापीय चालकता, आकार स्थिरता, लौ प्रतिरोध और विद्युत इन्सुलेशन प्रदान करता है, जो बैटरी माड्यूल के सुरक्षित संचालन के लिए आवश्यक है। ईवी बैटरियों की कार्यक्षमता बढ़ती है सिंगल और मल्टी-सेल बैटरी माड्यूल दोनों पर संपूर्ण रूप से परीक्षण किए जाने पर, यह चार्जिंग और डिस्चार्जिंग के दौरान बैटरी के तापमान को काफी कम करने में सक्षम साबित हुआ है, जिससे अधिक दक्षता सुनिश्चित होती है और ईवी बैटरियों की कार्यक्षमता बढ़ती है। यात्रियों को अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है यह कंपोजिट बनाने में आसान, हल्का और किफायती है, जो पारंपरिक लिक्विड-कूल्ड सिस्टम के लिए एक बेहतर विकल्प प्रदान करता है। एनपीसीसी पाइप और पंप की आवश्यकता को समाप्त करता है, जबकि असाधारण ताप अपव्यय और अग्निरोधी गुण प्रदान करता है, जिससे यात्रियों को एक अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है। लागत में कटौती आएंगी आईआईटी इंदौर के निदेशक प्रोफेसर सुहास जोशी ने कहा, इस तकनीक में ईवी के क्षेत्र को नया आकार देने की क्षमता है। गर्मी को अधिक प्रभावी ढंग से प्रबंधित करके, एनपीसीसी लिथियम-आयन बैटरियों की कार्यक्षमता को बढ़ा सकता है, दूसरी बैटरी बदलने में कमी ला सकता है और निर्माताओं और उपभोक्ताओं दोनों के लिए प्रक्रिया संबंधी लागत में कटौती कर सकता है। लंबे समय तक चलने वाली बैटरियां पर्यावरण की दृष्टि से, लंबे समय तक चलने वाली बैटरियों का मतलब है कि उत्पादन के लिए कम कच्चे माल की आवश्यकता होती है और कम अपशिष्ट होता है, जो स्थिरता लक्ष्यों में योगदान देता है। वहीं, प्रोफेसर साहू ने कहा, इस नवाचार का प्रभाव ईवी से कहीं आगे तक जाता है। जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी यह तकनीक इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करने, बैटरी की विश्वसनीयता और सुरक्षा को बढ़ाने के लिए तैयार है। इसके अपनाने से क्लीनर ट्रांसपोर्टेशन की ओर बदलाव में तेजी आ सकती है, जिससे ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम हो सकती है। बेंगलुरु की कंपनी ने की शुरुआत जैसे-जैसे यह महत्वपूर्ण तकनीक पूर्ण पैमाने पर व्यावसायीकरण की ओर बढ़ रही है, यह न केवल ईवी को बदलने का वादा करती है, बल्कि किसी भी ऐसे अनुप्रयोग को बदलने का वादा करती है जिसके लिए प्रभावी थर्मल प्रबंधन की आवश्यकता होती है। इसे पहले से ही व्यावसायीकरण के लिए तैयार किया जा रहा है और सिंपल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड, बेंगलुरु ने अपने इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों में उपयोग के लिए प्रौद्योगिकी प्राप्त कर ली है। recent visitors 88

पेटीकोट -सलवार का नाड़ा टाइट बांधने से महिलाओं में हो रहा ‘साड़ी कैंसर’, डॉ. से जानें इसके लक्षण

नईदिल्ली आजकल कैंसर कई लोगों की जिंदगी बर्बाद कर रहा है। कई तरह के खतरनाक कैंसर सामने आ रहे हैं। महिलाओं में स्तन, गर्भाशय, योनि और अंडाशय के कैंसर आम हैं। लेकिन अब दो मामलों में पेटीकोट कैंसर पाया गया है! रोज़ाना साड़ी पहनने वालों के लिए यह चिंताजनक है। वर्धा के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और बिहार के मधुबनी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के हालिया शोध के अनुसार, रोज़ाना साड़ी पहनने वाली महिलाएं इससे पीड़ित हो रही हैं। इसका कारण साड़ी के साथ पहने जाने वाला पेटीकोट है। अध्ययन में बताया गया है कि इसके धागे से खतरा बढ़ता है। हालांकि अध्ययन में सिर्फ़ साड़ी का ज़िक्र है, लेकिन चूड़ीदार और कुर्ता पहनने वालों को भी कमर पर धागा बांधना पड़ता है। इसे टाइट बांधने से कैंसर हो सकता है। पेटीकोट या पैंट का धागा टाइट बांधने से यह त्वचा से चिपक जाता है। साड़ी न खिसके इसलिए इसे टाइट बांधा जाता है। रोज़ाना साड़ी पहनने वालों में ऐसा करने से त्वचा लाल हो जाती है, सूज जाती है और बाद में घाव बनकर कैंसर का रूप ले सकती है। शुरुआत में महिलाओं में पाए गए इस कैंसर के लिए साड़ी को ज़िम्मेदार माना गया था। लेकिन बाद में पता चला कि इसका कारण पेटीकोट है, इसलिए इसे पेटीकोट कैंसर कहा गया है। 70 साल की एक महिला में यह पाया गया। उनके पेट के आसपास घाव 18 महीने तक ठीक नहीं हुआ। बाद में पता चला कि यह मार्जोलिन अल्सर नाम का त्वचा कैंसर है। फिर एक और महिला में भी यह पाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, पेटीकोट टाइट बांधने से पेट और कमर पर लगातार दबाव पड़ता है। इससे घर्षण होता है और त्वचा कमज़ोर हो जाती है। इससे घाव या छाले हो जाते हैं। इलाज न कराने पर यह कैंसर में बदल सकता है। इस तरह के घाव या छाले होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। रोज़ाना साड़ी या धागे वाला पेटीकोट पहनने वालों को इलास्टिक वाला पेटीकोट पहनने की सलाह दी जाती है। या फिर ढीले स्कर्ट पहनने को कहा गया है। कमर के आसपास हफ़्तों या महीनों तक ठीक न होने वाले घाव होने पर तुरंत जांच कराएं। 70 साल की महिला में साड़ी से हुआ कैंसर पहले मामले में, एक 70 वर्षीय महिला को अपने दाहिने हिस्से में त्वचा पर एक अल्सर विकसित हो गया, जिसमें त्वचा का रंग भी फीका पड़ गया था। पेटीकोट की तंग डोरी ने त्वचा को लंबे समय तक नुकसान पहुंचाया, जिससे मार्जोलिन अल्सर हो गया। 70 वर्षीय महिला ने अपना अनुभव शेयर करते हुए बताया कि, 'मैंने दशकों तक खूब कसी साड़ी बांधी, मुझे नहीं पता था कि ये मेरी सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। त्वचा में हल्का सा बदलाव हुआ जो धीरे-धीरे दर्दनाक और ठीक न होने वाले अल्सर में बदल गया, बाद में पता चला कि मुझे स्‍किन कैंसर हुआ है।' डॉ. दर्शना राणे के अनुसार, 'जब यह नाड़ा लगातार एक ही स्थान पर कमर पर बांधा जाता है, तो इससे त्वचा में जलन (डर्माटोसिस) होती है, जिससे आगे चलकर अल्सर (घाव) या 'मार्जोलिन अल्सर' बन सकते हैं, और बहुत ही दुर्लभ मामलों में, ये घाव कैंसर में बदल सकते हैं।' ऐसे पहचाने ‘साड़ी कैंसर’ का लक्षण ‘साड़ी कैंसर’ के शुरुआती लक्षण पेटीकोट का तंग नाड़ा लंबे समय तक जलन पैदा कर सकता है। इंडिया की गर्मी में, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, यह समस्या तेजी से बढ़ सकती है। कसी साड़ी से त्वचा का रंग बदलना या हल्की पपड़ी पड़ना गंभीर लक्षण हो सकते हैं। क्‍या कहते हैं डॉक्‍टर डॉ. दर्शना राणे बताती हैं, पेटीकोट का नाड़ा जब गर्म और आर्द्र मौसम में कसकर बांधा जाता है, तो यह पसीना और धूल के जमा होने से जलन और खुजली पैदा कर सकता है। ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित होने के कारण, महिलाएं प्रारंभिक लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं और जब हेल्‍थ खराब हो जाती है तब डॉक्‍टर को दिखाती हैं। चूड़ीदार और धोती से भी हो सकता है कैंसर जी हां, अगर आप कस कर धोती बांधते हैं और महिलाएं अगर टाइट चूड़ीदार पहनती हैं, तो आपको भी बच कर रहना चाहिए। हालांकि यह एक दुर्लभ समस्या है, लेकिन यह जागरूकता और बचाव की आवश्यकता को दर्शाती है। जानें बचाव का तरीका     पेटीकोट को बहुत कसकर न बांधें, खासकर अगर त्वचा में रंग बदलने या पपड़ी बनने जैसे डर्माटोसिस के शुरुआती संकेत दिखें।     पेटीकोट में चौड़ा कमरबंद इस्तेमाल करने से कमर पर दबाव समान रूप से बंटता है।     पेटीकोट को बांधने की ऊंचाई समय-समय पर बदलते रहें। घर पर हों तो ढीले इलास्टिक वाले पतलून पहनें ताकि हवा का संचार बना रहे।     कभी भी टाइटप कपड़ा ना पहनें। हमेशा आरामदायक कपड़ा ही पहनें। कमर पर टाइट बेल्‍ट या नाड़ा ना बांधें। स्‍किन पर अगर इलास्‍टिक से जलन और खुजली हो तो तुरंत डॉक्‍टर को दिखाएं। recent visitors 126

बाओबाब वृक्षों की कटाई के मामले में HC ने जैव विविधता बोर्ड को निर्देश दिए, तस्वीरों के साथ रिपोर्ट प्रस्तुत करें

जबलपुर मध्य प्रदेश जबलपुर हाईकोर्ट बेंच ने जैव विविधता बोर्ड को निर्देश दिया है कि प्रदेश में स्थित बाओबाब पेड़ों की तस्वीरों के साथ रिपोर्ट प्रस्तुत करें। कोर्ट मित्र अधिवक्ता की ओर से आवेदन पेश कर बताया गया कि केंद्रीय वन विभाग ने वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो का गठन किया है। सभी जांच एजेंसियां मोबाइल स्टैटिक डेटा का उपयोग कर सकती हैं, लेकिन वाइल्डलाइफ क्राइम ब्यूरो इसका उपयोग नहीं कर सकती। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति विनय जैन की युगलपीठ ने इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए समय प्रदान किया है। गौरतलब है कि धार जिले में बाओबाब पेड़ काटने, बेचने और परिवहन की अनुमति दिए जाने से संबंधित  प्रकाशित खबर पर हाईकोर्ट ने संज्ञान में लिया था। क्षेत्रीय नागरिक बाओबाब वृक्षों की कटाई का विरोध कर रहे हैं। दअरसल, बाओबाब पेड़ को अफ्रीका में 'द वर्ल्ड ट्री' की उपाधि दी गई है। अफ्रीका के आर्थिक विकास में इस पेड़ का बहुत बड़ा महत्व है। हैदराबाद के एक व्यापारी ने अपने फार्म में इन पेड़ों की खेती कर आर्थिक लाभ के लिए उनकी कटाई कर उन्हें बेचने का कार्य शुरू किया है। एक पेड़ की कीमत 10 लाख रुपये से अधिक है, जिसके कारण अन्य लोग भी अपने खेतों में लगे पेड़ को काटकर बेचने लगे हैं। हाईकोर्ट ने संज्ञान याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद धार जिले में बाओबाब पेड़ों की कटाई, बिक्री और परिवहन पर रोक लगाते हुए मुख्य सचिव, वन विभाग के प्रमुख सचिव, आयुक्त और सीसीएफ इंदौर, कलेक्टर और सीईओ जिला पंचायत को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया था कि बाओबाब वृक्षों की कटाई के मामले में प्रकरण दर्ज कर लिया गया है। याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार ने यह भी बताया कि रोपे गए 20 बाओबाब पौधों में से 9 काट दिए गए हैं और 11 जीवित हैं। धार जिले में कुल 393 बाओबाब पेड़ हैं। कोर्ट मित्र अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो को स्टैटिक डेटा का उपयोग करने की अनुमति नहीं मिलने के संबंध में आवेदन पेश किया था। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किए। recent visitors 89

पीएम मोदी ने महाराष्ट्र के धुले में कहा-दुनिया की कोई भी ताकत कश्मीर में आर्टिकल 370 की वापसी नहीं करा सकती

धुले जम्मू-कश्मीर विधानसभा में अनुच्छेद 370 को लेकर मचे कोहराम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी पहली प्रतिक्रिया दी। पीएम मोदी ने महाराष्ट्र के धुले में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस पर जोरदार प्रहार किया। उन्होंने कहा कि कश्मीर में केवल बाबा साहेब अंबेडकर का ही संविधान चलेगा। दुनिया की कोई भी ताकत कश्मीर में आर्टिकल 370 की वापसी नहीं करा सकती है। पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस और इंडी ब्लॉक वालों को जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने का मौका मिला, वो कश्मीर को लेकर फिर से नई साजिशें करने लगे हैं। दो- तीन दिन पहले आपने टीवी में देखा होगा कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में क्या कुछ हुआ। कांग्रेस-एनसी गठबंधन ने वहां फिर से आर्टिकल 370 लागू करने का प्रस्ताव पारित किया है। क्या ये देश स्वीकार करेगा। कश्मीर को तोड़ने का कांग्रेस का ये कारनामा आपको मंजूर है। पीएम मोदी ने आगे कहा कि आर्टिकल 370 के समर्थन में जम्मू-कश्मीर विधानसभा में बैनर लहराए गए। जब भाजपा के विधायकों ने जी जान से उसका विरोध किया, उन्हें उठा-उठाकर के सदन के बाहर फेंक दिया गया। कांग्रेस और उनके सहयोगी की ये घिनौनी सच्चाई पूरे देश और महाराष्ट्र को समझनी होगी। कांग्रेस-एनसी गठबंधन एक तरफ जम्मू-कश्मीर से भारत के संविधान हटाने का प्रस्ताव पास करता है। कांग्रेस जम्मू-कश्मीर में बाबा साहेब का संविधान नहीं चाहती है। कांग्रेस गठबंधन महाराष्ट्र में आकर संविधान की झूठी किताब लहराती है। पीएम मोदी ने कहा कांग्रेस और महाविकास अघाड़ी वालों से कहना चाहता हूं कि पाकिस्तान के एजेंडे को देश में बढ़ावा देने की कोशिश मत करो। कश्मीर को लेकर अलगावादियों की भाषा मत बोलो। याद रखो तुम्हारे मंसूबे कामयाब नहीं होंगे और जब तक मोदी पर जनता जर्नादन का आशीर्वाद है, कांग्रेस वाले कश्मीर में कुछ नहीं कर पाएंगे। कश्मीर पर केवल बाबा साहेब अंबेडकर का ही संविधान चलेगा। ये मोदी का फैसला है, दुनिया की कोई भी ताकत कश्मीर में आर्टिकल 370 की वापसी नहीं करा सकती है। उन्होंने कहा कि आजादी के समय बाबा साहेब दलितों और वंचितों के लिए आरक्षण चाहते थे। लेकिन, नेहरू जी इस बात पर अड़े थे किसी भी कीमत पर दलितों, पिछड़ों और वंचितों को आरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए। बहुत मुश्किल से बाबा साहेब दलितों और आदिवासियों के लिए आरक्षण का प्रावधान कर पाए थे। नेहरू जी के बाद इंदिरा जी आईं और उन्होंने भी आरक्षण के खिलाफ ऐसा ही रवैया जारी रखा था। ये लोग चाहते थे कि एससी, एसटी,ओबीसी हमेशा कमजोर रहे। इंदिरा जी के बाद राजीव गांधी ने भी ओबीसी आरक्षण का खुलकर विरोध किया था। ये लोग जानते थे कि एससी,एसटी और ओबीसी मजबूत हो गए तो उनकी राजनीति की दुकान का शटर गिर जाएगा। राजीव गांधी के बाद अब इस परिवार की चौथी पीढ़ी, इनका युवराज इसी खतरनाक भावना के साथ काम कर रहे हैं। कांग्रेस का एकमात्र एजेंडा है, किसी भी तरह एससी, एसटी समाज की एकता को तोड़ें, ओबीसी समाज की एकता को चकनाचूर कर दें। कांग्रेस चाहती है कि एससी समाज अलग-अलग जातियों में बिखरा रहे, ताकि एससी समाज की सामूहिक शक्ति कमजोर पड़ जाए। कांग्रेस ओबीसी और एसटी समाज को भी अलग-अलग जातियों में बांटने की कोशिश कर रही है। recent visitors 132

MP में 15 नवंबर से तेजी से बढ़ेगी ठंड, गिरेगा रातों का पारा, कई शहर 10 के नीचे

भोपाल मध्यप्रदेश में इस साल नवंबर की शुरुआत से ही ठंड ने अपनी दस्तक दे दी है। प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी में ठंड का असर सबसे अधिक देखा जा रहा है, जहां तापमान 12 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया है। यह जगह फिलहाल प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान बन गया है। दिन और रात दोनों समय यहां का तापमान काफी ठंडा हो चुका है। पचमढ़ी में ठंड का स्तर इतना अधिक है कि पिछले सात रातों में से छह बार पचमढ़ी प्रदेश का सबसे ठंडा क्षेत्र रहा, जबकि एक बार अमरकंटक ने भी सबसे ठंडे स्थान का दर्जा हासिल किया। बुधवार और गुरुवार की रात में पचमढ़ी का न्यूनतम तापमान 11.6 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया था। इंदौर में न्यूनतम तापमान कल 18.1 डिग्री रहा। एक्यूआई सुबह से ही खराब इंदौर में आज सुबह से ही एक्यूआई खराब स्तर पर चल रहा है। 287 का एक्यूआई सुबह 10 बजे ही दर्ज किया गया। शाम तक यह 300 पार चला जाता है। इस बार लगातार एक्यूआई 300 के आसपास ही चल रहा है। यह बेहद खराब स्तर माना जाता है। 15 से और बदलेगा मौसम मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि 15 नवंबर के बाद से प्रदेश में ठंड का असर और अधिक बढ़ सकता है। सीनियर मौसम वैज्ञानिक शिल्पा आप्टे ने बताया कि नवंबर के दूसरे सप्ताह में हवा का रुख बदलने की संभावना है। उत्तर से चलने वाली ठंडी हवाओं का असर प्रदेश में साफ दिखाई देगा। इससे विशेष रूप से ग्वालियर, चंबल और उज्जैन संभाग में ठंड में वृद्धि होने की उम्मीद है। 10 डिग्री के नीचे जाएगा तापमान प्रदेश के अन्य कई शहरों में भी रात का तापमान तेजी से गिरने का अनुमान है। मंडला, उमरिया, राजगढ़ और गुना जैसे शहरों में रात का तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे जा सकता है। राजधानी भोपाल के साथ शाजापुर, छिंदवाड़ा, शहडोल, बैतूल, टीकमगढ़, मलाजखंड, रायसेन, उज्जैन, नौगांव, खरगोन और रतलाम जैसे शहरों में भी तापमान गिरकर 18 डिग्री सेल्सियस से कम दर्ज किया गया है। वहीं, गुरुवार को दिन के समय भी पचमढ़ी समेत कई शहरों में तापमान 30 डिग्री से नीचे रहा। बर्फबारी से बढ़ेगी ठिठुरन उत्तर भारत में बर्फबारी शुरू होते ही मध्यप्रदेश में ठिठुरन बढ़ने लगती है। मौसम विभाग के अनुसार, इस बार भी नवंबर के दूसरे सप्ताह में उत्तर से ठंडी हवाएं आने की संभावना है, जिससे ठंड का प्रभाव और गहराएगा। पिछले दस वर्षों में इसी समय पर ठंड बढ़ने का यही ट्रेंड देखा गया है। मौसम में बदलाव जारी रहेगा दक्षिण-पश्चिम मानसून के समाप्त होने के बाद मौसम में बदलाव आ जाता है। आसमान में बादल छाए रहते हैं, लेकिन उमस का असर लगभग खत्म हो जाता है। अक्टूबर के बाद से ही रात के तापमान में गिरावट शुरू हो जाती है। पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) के चलते ग्वालियर, चंबल, भोपाल, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर जैसे संभागों में हल्की बारिश भी होती है, जिससे ठंड और बढ़ जाती है। इस दौरान दिन का तापमान 30 डिग्री और रात का तापमान 15 डिग्री सेल्सियस के नीचे रहने की संभावना बनी रहती है। इस तरह, मध्यप्रदेश में इस बार नवंबर के मध्य से लेकर महीने के आखिर तक ठंड का प्रभाव ज्यादा बढ़ने का अनुमान है। अगर यह मौसम का बदलाव इसी तरह जारी रहा, तो नवंबर के अंत में कड़ाके की ठंड का दौर शुरू हो सकता है। recent visitors 86