अमित शाह ने कहा – सरकार जल्द लाएगी राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक नीति

नई दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आतंकवाद निरोधक सम्मेलन को संबोधित किया। अमित शाह ने कहा कि सरकार आतंकवाद, आतंकवादियों और उनके पारिस्थितिकी तंत्र से लड़ने के लिए जल्द ही राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक नीति और रणनीति लाएगी। आतंकवाद की कोई सीमा नहीं आतंकवाद निरोधक सम्मेलन को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि कानून और व्यवस्था राज्य का विषय है और राज्यों की भौगोलिक सीमाएं और संवैधानिक सीमाएं हैं, लेकिन आतंकवाद के मामले में ऐसी कोई सीमा नहीं है और इसलिए सभी सुरक्षा एजेंसियों (केंद्र और राज्य) को निकट समन्वय में काम करना चाहिए, संयुक्त रणनीति बनानी चाहिए और खुफिया जानकारी साझा करनी चाहिए। आतंकवाद से निपटने के लिए तैयार उन्होंने कहा कि सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए आदर्श आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) और आदर्श विशेष कार्य बल (एसटीएफ) पर एक दृष्टिकोण तैयार किया है, जिसे अगर अपनाया जाता है तो यह आतंकवाद के खतरे से निपटने के लिए एक साझा ढांचे और मंच के रूप में काम करेगा। उन्होंने कहा, "हमें आतंकवाद, आतंकवादियों और उनके पारिस्थितिकी तंत्र से लड़ने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है। हम जल्द ही एक नई राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी नीति और रणनीति लाएंगे, जिसमें आप सभी की अहम भूमिका होगी। राज्यों के साथ मिलकर करेंगे काम सम्मेलन में राज्य पुलिस बलों के प्रमुख और राज्यों और केंद्र के अन्य शीर्ष सुरक्षा अधिकारी शामिल हुए। गृह मंत्री ने कहा कि नई नीति राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों को आतंकवाद से निपटने के लिए निकट समन्वय में काम करने में मदद करेगी। एटीएस और एसटीएफ मॉडल पर उन्होंने कहा कि मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) को राज्यों के साथ साझा किया जा रहा है और वे अपनी-अपनी आवश्यकताओं के अनुसार इसमें बदलाव कर सकते हैं। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना के अनुसार 2047 तक भारत को विकसित बनाने के लिए सभी को सभी सुरक्षा चुनौतियों से निपटना होगा और आतंकवाद से लड़ने के लिए एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र बनाना होगा। इससे (एटीएस और एसटीएफ मॉडल को अपनाने से) राज्यों के अधिकार कम नहीं होंगे। आतंकवाद को करेंगे जड़ से खत्म गृह मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार देश में आतंकवाद को खत्म करने और इसके खिलाफ ठोस रणनीति के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों को युवा अधिकारियों को अच्छी तरह से सुसज्जित करना होगा और आतंकवाद से निपटने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करना होगा। recent visitors 66

भोपाल aiims की बड़ी पहल, जगह-जगह लगेंगे पैनिक बटन, प्रदेश के समस्त अस्पतालों में लगेगा Pink alarm panic button

 भोपाल  मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में किसी महिला से बदसलूकी या छेड़छाड़ की घटना पर तत्काल मदद पहुंचाने की कवायद शुरू हुई है। इसके लिए सरकारी अस्पतालों में पैनिक बटन लगाए जाएंगे। यह पैनिक बटन निकटतम पुलिस थाने से कनेक्ट होंगे। आपात स्थिति में बटन दबाने पर पुलिस का अमला थोड़ी ही देर में अस्पताल पहुंच जाएगा। इन पैनिक बटन को पिंक अलार्म नाम दिया गया है। कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में इंटर्न डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना के बाद प्रदेश के अस्पतालों में भी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी थी। इसके लिए सभी अस्पतालों में सुरक्षा की समीक्षा की गई थी। अस्पताल में कई जगह लगाया जाएगा अलार्म कुछ संवेदनशील स्थानों पर कुछ दिनों के लिए सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई, लेकिन इसे एक सिस्टम का रूप नहीं दिया जा सका, लेकिन अब पैनिक बटन के तौर पर एक अलार्म सिस्टम लगाने की कवायद शुरू हुई है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, इस पिंक अलार्म को अस्पताल में ओपीडी, ड्यूटी रूम, पार्किंग, कॉरिडोर जैसी कई जगहों पर लगाया जाएगा। जेपी अस्पताल में जगह चिह्नित, 12 से 13 स्थानों पर लगेंगे पिंक अलार्म भोपाल के जेपी अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने बताया कि यहां पैनिक बटन लगने से महिलाओं के साथ अन्य मरीजों की सुरक्षा भी हो सकेगी। अस्पताल में कई प्रकार के व्यक्ति आते हैं, इससे एक डर तो बना रहता है। जगह पहले से चिह्नित कर ली है। यहां करीब 12 से 13 स्थानों पर पिंक अलार्म यानी पैनिक बटन लगाए जाएंगे। एम्स भोपाल पहले ही लगा चुका है एम्स भोपाल में रेजिडेंट डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर हड़ताल हुई थी। उसके बाद परिसर में कई स्थानों पर पैनिक बटन लगा दिए गए। एम्स में महिलाओं की सुरक्षा के लिए पैनिक बटन और सेंट्रलाइज्ड सिस्टम है। पैनिक बटन दबाते ही अस्पताल का सिक्योरिटी सिस्टम अलर्ट होता है, जिससे सुरक्षाकर्मी तुरंत ही उस जगह पहुंच जाते हैं। अब ड्यूटी रूम में डेढ़ सौ पैनिक बटन लगाने की तैयारी है। इसके अलावा यह पैनिक बटन शौचालय में भी लगेंगे।   दतिया अस्पताल में महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाने के लिए ‘पिंक अलार्म’ की शुरुआत की मध्य प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा को बढ़ाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, सरकार द्वारा संचालित दतिया जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में ‘पिंक अलार्म’ स्थापित किए गए हैं। यह पहल सार्वजनिक अस्पतालों में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं को संबोधित करती है, खासकर कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक प्रशिक्षु डॉक्टर के साथ हुए दुखद बलात्कार और हत्या की घटना के बाद इस मुद्दे पर और अधिक ध्यान दिया गया है।     ‘पिंक अलार्म’ की स्थापना भारत के सार्वजनिक अस्पतालों में महिलाओं की सुरक्षा के गंभीर मुद्दे को हल करने की व्यापक मुहिम का हिस्सा है।     हाल के दिनों में महिला स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं ने चिकित्सा संस्थानों में सुरक्षा उपायों की आवश्यकता को उजागर किया है।     ‘पिंक अलार्म’ की अवधारणा जिला कलेक्टर संदीप मकिन द्वारा पेश की गई है।     यह मध्य प्रदेश के एक सरकारी अस्पताल में स्थापित होने वाली अपनी तरह की पहली प्रणाली है। अलार्म सिस्टम की कार्यप्रणाली     अलार्म को अस्पताल के प्रसूति वार्ड, ट्रॉमा सेंटर और नए ओपीडी ब्लॉक के तीनों मंजिलों के स्टाफ ड्यूटी रूम में रणनीतिक रूप से लगाया गया है।     अलार्म सक्रिय होने पर एक सायरन बजता है, जिससे सुरक्षा कर्मियों को सतर्क किया जाता है।     सुरक्षा कर्मियों से उम्मीद की जाती है कि अलार्म बजने के पांच मिनट के भीतर संकट में पड़ी व्यक्ति तक पहुंच जाएं। पहल का महत्व     इस पहल का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों में महिलाओं के लिए एक सुरक्षित कार्य वातावरण बनाना है।     त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र प्रदान करके, यह अलार्म संभावित खतरों को रोकने और महिला कर्मचारियों की समग्र सुरक्षा को बढ़ाने के लिए बनाए गए हैं. AIIMS भोपाल की में महिलाओं की सुरक्षा के लिए पैनिक बटन और सेंट्रलाइज्ड सिस्टम लगाए जाएंगे. ड्यूटी रूम में डेढ़ सौ पैनिक बटन लगेंगे. पैनिक बटन दबाते ही अस्पताल का सिक्योरिटी सिस्टम अलर्ट होगा, जिससे सुरक्षाकर्मी तुरंत ही संबंधित कक्ष तक पहुंच पाएंगे. इसके अलावा यह पैनिक बटन शौचालय में भी लगेंगे. एम्स भोपाल में कई एक जगह पर पैनिक बटन लगे हुए हैं. recent visitors 71

लाड़ली बहनाओं को Ladli Behna Yojana की किस्त 9 नवंबर को खाते में किस्त आयेगी

भोपाल  मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना मध्य प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना के तहत राज्य सरकार प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करती है। इस योजना के अंतर्गत सरकार 17 किस्तें जारी की जा चुकी हैं। मध्य प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की किस्त जल्द ही पात्र महिलाओं के खाते में आएगी। सरकार हर महीने की 10 तारीख को और कभी इससे पहले भी लाड़ली बहनों के खाते में 1250 रुपये की किस्त जारी करती है। नवंबर की 9 तारीख को आ रही है, ऐसे में जल्द महिलाओं के खाते में योजना की किस्त आ सकती है। मध्य प्रदेश में 1 करोड़ 29 लाख से ज्यादा महिलाएं लाड़ली बहना योजना का लाभ उठा रही हैं। पिछले महीने दमोह जिले के सिंग्रामपुर से सीएम ने महिलाओं के खाते में 1574 करोड़ रुपये की राशि सिंगल क्लिक के जरिए भेजी थी। इस बार किस्त जल्दी आने के कयास थे राखी के समय में एमपी सरकार द्वारा लाड़ली बहनों को 1250 रुपये की किस्त के साथ 250 रुपये अलग से दिए गए थे। इस बार लाड़ली बहना यह कयास लगाए हुई थी कि दीपावली और छट पूजा को देखते हुए किस्त जल्दी जारी की जा सकती है। मध्य प्रदेश मार्च 2023 में हुई थी योजना की शुरुआत मध्य प्रदेश में लाड़ली बहना योजना की शुरुआत विधानसभा से पहले 5 मार्च 2023 को हुई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुधारने के साथ उनके पोषण और स्वास्थ्य में सुधार करना है। इसके जरिए परिवार में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करना भी एक उद्देश्य है। कब आएगी 18 वीं किस्त बता दें कि दिवाली का त्योहार 31 अक्टूबर को होने के कारण मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की 18वीं किस्त धनतेरस तक आने की अटकलें लगाई जा रही है। हालांकि 18वीं किस्त जारी करने को लेकर राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसलिए अब माना जा रहा है कि ये किस्त हर महीने की तरह इस बार नवंबर की 10 तारीख को ही आएगी। ये है बैलेंस चेक करने का तरीका -सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाएं। -अब मेन पेज पर जाकर आवेदन एवं भुगतान की स्थिति वाले ऑप्शन पर क्लिक करें। -इसके बाद दूसरे पेज पर आ जाएंगे, यहां पर अपना आवेदन नंबर या सदस्य समग्र क्रमांक नंबर दर्ज करें। -कैप्चा कोड को सबमिट करने के बाद, मोबाइल पर ओटीपी भेजा जाएगा। -मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी को दर्ज करके वेरीफाई कर लें। -ओटीपी को वेरिफाई करने के बाद सर्च वाले ऑप्शन को क्लिक करते ही आपका पेमेंट स्टेटस ओपन हो जाएगा। ऐसे चेक करें किस्त मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना का लाभ ले रही महिलाओं को www.cmladlibahna.mp.gov.in वेबसाइट पर जाकर अपने आवेदन की स्थिति को देखना होगा। इसे देखने के लिए आवेदन नंबर या सदस्य समग्र आईडी डालकर सबमिट करना होगा। इसके बाद समग्र आईडी से रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ओटीपी आए, जिसे साइट पर डालना होगा। इसके बाद किस्त की जानकारी सामने आ जाएगी। महिलाओं को इस योजना से मिला बल लाड़ली बहना योजना का सबसे ज्यादा लाभ ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली महिलाओं को मिला है। 1250 रुपये से वे अपनी जरूरत का सामान लेने के साथ, इन रुपयों की बचत भी कर रही हैं। सरकार द्वारा दी जा रही इस राशि से महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हुई हैं। recent visitors 89

77 बरस पुराने इज्तिमे के आयोजन में पहली बार किसी महिला मंत्री की सक्रियता बनी

भोपाल प्रदेश में जारी महिला सशक्तिकरण के सरकारी प्रयासों में आलमी तबलीगी इज्तिमा के जरिए एक और तहरीर जुड़ती दिखाई दे रही है। करीब 77 बरस पुराने इस आयोजन में पहली बार किसी महिला की सक्रियता बनी है। विभागीय मंत्री कृष्णा गौर के इज्तिमा प्रयासों को एक नई शुरुआत और इस आयोजन के बेहतर क्रियान्वयन से जोड़ा जा रहा है। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री कृष्णा गौर ने गुरुवार सुबह ईंटखेड़ी स्थित इज्तिमगाह पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया। जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों के अलावा सभी संबंधित विभागों को उन्होंने समय सीमा में काम पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने देश दुनिया से आने वाली जमातों के लिए बेहतर इंतजाम करने के लिए कहा। ताकि यहां से लौटने वाले जमाती अच्छे अनुभव लेकर लौटें। इज्तिमा प्रबंधन कमेटी के मीडिया कोऑर्डिनेटर डॉ उमर हफीज और अन्य जिम्मेदारों ने मंत्री कृष्णा गौर को तैयारियों की जानकारी देते हुए चार दिन के दौरान रहने वाली व्यवस्था से अवगत कराया। इस मौके पर शहर के उलेमा और नागरिक भी मौजूद थे। इज्तिमा और महिला : पहली बार आमतौर पर इज्तिमा आयोजन के दौरान महिलाओं की सहभागिता प्रतिबंधित होती है। इस्लाम की पर्दा प्रथा के लिहाज से यह व्यवस्था प्रचलित है। लेकिन इस समय मप्र कैबिनेट में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की जिम्मेदारी कृष्णा गौर के हाथों में है। इससे पहले तत्कालीन शिवराज सिंह चौहान की सरकार में इस विभाग की जिम्मेदारी ललिता यादव के पास रही है। लेकिन उस समय मुख्यमंत्री स्वयं ही इज्तिमा व्यवस्थाओं पर निगरानी रखा करते थे। इसके चलते ललिता यादव का इज्तिमा से सीधा ताल्लुक नहीं रहा। कहा जाता है कि चूंकि कृष्णा गौर का सीधा ताल्लुक भोपाल से है। उनके ससुर स्व बाबूलाल गौर भी ठेठ भोपाली कहे जाते थे। इसके चलते उनका मुस्लिम समुदाय और इज्तिमा आयोजन से लगाव और जुड़ाव रहा है। माना जा रहा है कि कृष्णा गौर की निगरानी में हो रहे इज्तिमा आयोजन में पहले से कुछ बेहतर व्यवस्थाएं दिखाई दे सकती हैं। 107 साल रहा बेगमों का शासन भोपाल रियासत पर रहे नवाब शासनकाल में सर्वाधिक समय बागडोर महिलाओं के हाथ रहा है। भोपाल, सीहोर और रायसेन जिलों को सहेजने वाली भोपाल रियासत में 107 साल तक नवाब शासन रहा है। इस बड़े कार्यकाल पर बेगमों की हुकूमत रही है। महिला सशक्तिकरण के लिए अग्रणीय रहीं बेगमों ने बरसों पहले 1910 में लेडिस क्लब की स्थापना कर दी थी। जिसकी पहली सेक्रेटरी मौलाना आजाद की बहन रही हैं। नवाब बेगमों ने महिला सशक्तिकरण की अवधारणा के साथ भोपाल में परी बाजार को भी आकार दिया था। जो महिलाओं की शॉपिंग के लिए मात्र महिलाओं द्वारा ही संचालित किया जाता था। recent visitors 83

अब तक 19 हजार 317 से अधिक गैस पीड़ितों के आयुष्मान कार्ड बनाये जा चुके

भोपाल राज्य सरकार द्वारा भोपाल गैस पीड़ितों और उनके बच्चों को आयुष्मान ‘निरामयम’ मध्यप्रदेश योजना का लाभ दिया जा रहा है। इसके तहत गैस पीड़ितों एवं उनके बच्चों के आयुष्मान कार्ड बनाये जा रहे हैं। अब तक 19 हजार 317 से अधिक गैस पीड़ितों के आयुष्मान कार्ड बनाये जा चुके हैं। गैस पीड़ित मरीजों एवं उनके बच्चों को भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग के अधीन संचालित 6 अस्पतालों एवं 9 औषधालयों में सभी प्रकार के उपचार एवं आवश्यकतानुसार सुविधाएँ निःशुल्क दी जा रही हैं। साथ ही आयुष्मान भारत ‘निरामयम’ मध्यप्रदेश योजना के अंतर्गत प्रदेश के सभी अनुबंधित अस्पतालों में भी गैस पीड़ितों को उपचार सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। विशेष प्रकरणों में इस योजना में निर्धारित पैकेज के अतिरिक्त इलाज पर खर्च होने पर संबंधित अस्पताल को उसकी प्रतिपूर्ति गैस राहत विभाग द्वारा की जाती है। गैस पीड़ित मरीज एवं उनके बच्चों को किडनी, लीवर ट्रॉन्सप्लांट एवं अन्य प्रकार की गंभीर बीमारियों के उपचार के लिये विशेष प्रकरण मानते हुए मरीजों को आवश्यकतानुसार इलाज की सुविधा भी दी जा रही है। भोपाल गैस पीड़ित मरीजों एवं उनके बच्चों को कैंसर के उपचार के लिये गैस राहत विभाग द्वारा तीन निजी अस्पतालों एवं एम्स भोपाल के साथ अनुबंध भी किया गया है। यहाँ पीड़ितों को कैंसर के उपचार की नि:शुल्क सुविधा दी जा रही है। गैस राहत विभाग के अधीन संचालित सभी अस्पतालों में गैस पीड़ित मरीजों एवं उनके बच्चों के उपचार के लिये अत्याधुनिक इमरजेंसी यूनिट सातों दिन 24 घंटे संचालित की जा रही हैं। गैस पीड़ित मरीजों एवं उनके बच्चों के किडनी रोग (सी.के.डी.- IV) व अतिगंभीर मरीजों के उपचार के लिये कमला नेहरू अस्पताल, भोपाल में डायलिसिस यूनिट की स्थापना भी की गई है। इसमें 13 डायलिसिस मशीनें लगाकर मरीजों का निःशुल्क उपचार किया जा रहा है। गैस पीड़ित विधवाओं (कल्याणी), (जिनको राज्य शासन द्वारा सामाजिक सुरक्षा पेंशन कार्यक्रम के अंतर्गत सामाजिक सुरक्षा पेंशन मिलती हैं), को इस पेंशन राशि के अलावा भोपाल गैस राहत विभाग द्वारा एक हजार रूपये प्रतिमाह अतिरिक्त पेंशन भी दी जा रही है। वर्तमान में करीब 4 हजार 406 गैस पीड़ित विधवाओं (कल्याणियों) को यह पेंशन दी जा रही है।   recent visitors 86

CM यादव जर्मनी और इंग्लैंंड में निवेशकों से मुलाकात करेंगे, विदेश से एमपी में निवेश लाया जा सके

भोपाल  मुख्यमंत्री बनने के बाद डॉ. मोहन यादव पहली बार विदेश यात्रा पर जाएंगे। वे नवंबर के अंतिम सप्ताह में इंग्लैंड और जर्मनी के दौरे पर रहेंगे। मध्य प्रदेश की खासियत बता विदेश से निवेश लाने का प्रयास करेंगे। वे इंग्लैंड में लंदन, जर्मनी में म्यूनिख में उद्योग जगत की हस्तियों से मिलेंगे। सीएम का पूरा फोकस फार्मास्यूटिकल, आइटी, माइंस, टूरिज्म और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में निवेश लाने पर रहेगा। दोनों देशों में कला-संस्कृति पर चर्चा होगी। वे ‘फ्रेंड्स ऑफ एमपी’ समूहों से भी भेंट करेंगे। दो रीजनल कॉन्क्लेव शेष डॉ. मोहन यादव (Dr Mohan Yadav) ने सीएम बनने के बाद से रीजनल इंडस्ट्रीयल कॉन्क्लेव (Regional Industry Conclave) का सिलसिला शुरू किया है। उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर, सागर और रीवा के बाद अब नर्मदापुरम और शहडोल में कॉन्क्लेव होना शेष है। फरवरी में भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट होगी। पूरी दुनिया को जानना चाहिए कि एमपी कितना समृद्ध हमारा प्रदेश संस्कृति के साथ ही संसाधनों में भी समृद्ध है। यह बात पूरी दुनिया को जानना चाहिए। मध्य प्रदेश में औद्योगिक निवेश लाना सरकार को लक्ष्य है और इसी क्रम में विदेश का रुख भी कर रहे हैं। -डॉ. मोहन यादव, सीएम recent visitors 81

वैज्ञानिकों ने बजाई खतरे की घंटी- 2024 दुनिया का सबसे गर्म साल होगा!

नई दिल्ली यूरोपीय जलवायु परिवर्तन एजेंसी ‘कॉपरनिकस’ ने बृहस्पतिवार को कहा कि यह लगभग तय है कि साल 2024 अब तक का सबसे गर्म वर्ष होगा और औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक काल की तुलना में कम से कम 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक रहेगा। यूरोपीय जलवायु एजेंसी ने बताया कि यह दूसरा वर्ष है जब इतिहास में सबसे गर्म अक्टूबर दर्ज किया गया है। संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन यह घोषणा संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन से पहले की गई है, जो 11 नवंबर को अजरबैजान के बाकू में शुरू हो रहा है। शिखर सम्मेलन में देशों से जलवायु संबंधी नए वित्तीय सहायता समझौते पर सहमत होने की उम्मीद है, जिसे विकसित देशों को 2025 से विकासशील देशों को प्रदान करना होगा ताकि उन्हें जलवायु परिवर्तन से निपटने और अनुकूलन में मदद मिल सके। दुनिया के लिए 'खतरे की घंटी' वैज्ञानिकों का कहना है कि इसे खतरे की घंटी की तरह देखा जाना चाहिए. अगले हफ्ते, अजरबैजान में होने वाली संयुक्त राष्ट्र जलवायु कॉन्फ्रेंस COP29 से पहले आए इस अनुमान ने चिंता बढ़ा दी है. BBC की रिपोर्ट के अनुसार, रॉयल मेट्रोलॉजिकल सोसायटी के चीफ एग्जीक्यूटिव, लिज बेंटले ने कहा, 'यह लेटेस्ट रिकॉर्ड COP29 में सरकारों को एक और कड़ी चेतावनी देता है कि आगे तापमान में और अधिक इजाफे को रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है.' तापमान में लगातार हो रही वृद्धि कॉपरनिकस के निदेशक कार्लो बुओनटेंपो ने कहा कि मैं समझता हूं कि तापमान में निरंतर वृद्धि चिंताजनक है। बुओनटेंपो ने कहा कि आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि अगर वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों की निरंतर वृद्धि के कारण ग्लोबल वार्मिंग नहीं होती, तो धरती पर रिकॉर्ड तोड़ तापमान का इतना लंबा क्रम देखने को नहीं मिलता। बुओनटेंपो और अन्य वैज्ञानिकों का कहना है कि तापमान में लंबे समय तक उतार-चढ़ाव का यह सिलसिला एक बुरा संकेत है। कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (C3S) की उप निदेशक सामंथा बर्गेस ने कहा, ‘‘2024 के 10 महीने बीतने के बाद अब यह लगभग तय है कि 2024 रिकॉर्ड पर सबसे गर्म वर्ष होगा। यह पूर्व-औद्योगिक काल के स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वाला पहला वर्ष होगा। यह वैश्विक तापमान रिकॉर्ड में एक नया मील का पत्थर है, जो आगामी जलवायु परिवर्तन सम्मेलन ‘सीओपी29’ में जलवायु संबंधी लक्ष्य को पाने की महत्वाकांक्षा बढ़ाने के लिए उत्प्रेरक के रूप में काम करना चाहिए।’’ 2023 में गर्मी का रिकॉर्ड बना, 2024 में टूट जाएगा! 2024 के शुरुआती 10 महीनों में वैश्विक तापमान इतना ऊंचा रहा है कि अब बाकी दो महीनों में अप्रत्याशित गिरावट ही रिकॉर्ड बनने से रोक सकती है. यूरोपीय कोपरनिकस जलवायु परिवर्तन सेवा का डेटा बताता है कि 2024 में तापमान पूर्व-औद्योगिक काल की तुलना में कम से कम 1.55 डिग्री सेल्सियस अधिक होगा. 'पूर्व-औद्योगिक' का मतलब 1850-1900 के मानक काल से है, जो मोटे तौर पर उस समय के बराबर है जब मनुष्यों ने ग्रह को काफी गर्म करना शुरू किया था. हालिया अनुमानों का मतलब है कि 2024 में 1.48 सेल्सियस का वर्तमान रिकॉर्ड टूट सकता है जो पिछले साल ही बना था. यूरोपीय एजेंसी के वैज्ञानिकों ने ही पिछले महीने बताया था कि 2024 का अक्तूबर पूरी दुनिया में दूसरा सबसे गर्म अक्तूबर रहा। इससे पहले 2023 का अक्तूबर भी काफी गर्म था, तब सतह पर हवा का औसत तापमान 15.25 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जो कि 1991 से 2020 के अक्तूबर के औसत तापमान से 0.80 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था। इतना ही नहीं 2024 के पहले 10 महीनों (जनवरी से अक्तूबर) में औसत वैश्विक तापमान 1991-2020 के बीच इसी दौर के मुकाबले 0.71 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा। वहीं, जनवरी-अक्तूबर 2023 के मुकाबले इस साल इसी दौर में तापमान 0.16 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा।   recent visitors 83