नए साल के जनवरी माह में नई दिल्ली से सीधी ट्रेन श्रीनगर-बारामूला तक केंद्र सरकार जल्द शुरू करेगी

जम्मू नव वर्ष पर कश्मीर घाटी के लोगों को रेलवे बड़ा तोहफा देने की तैयारियों में जुटी है। सूत्रों के अनुसार नए साल के जनवरी माह में नई दिल्ली से सीधी ट्रेन श्रीनगर-बारामूला तक शुरू करने के लिए युद्धस्तर पर कार्य पूरा किया जा रहा है। यानी अब सालभर कोई भी मौसम हो कश्मीर घाटी रेल संपर्क से देश के अन्य राज्यों से जुड़ी रहेगी। बता दें कि 272 किलोमीटर लंबी ऊधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना पर करीब शत-प्रतिशत काम पूर्ण किए जा चुके हैं। जानकारी के अनुसार इस रेल लिंक परियोजना पर कुछ ही स्थानों पर तकनीकी कार्य 19 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक पर जारी हैं जोकि रियासी व कटड़ा के बीच का है। जानकारी के अनुसार इस साल के अंत तक सभी कार्य पूरे कर लेने की पूरी-पूरी संभावना है। इसके बाद जनवरी माह में कमिश्नर रेलवे सेफ्टी द्वारा निरीक्षण के बाद सीधी ट्रेन नई दिल्ली से बारामूला तक शुरू हो सकती है। रेलवे ट्रैक पर कई दुर्गम सुरंगें, पुल व विहंगम दृश्य यात्रियों व पर्यटकों को कुदरती नजारों से निहाल कर देंगे। जबकि ट्रेन जब श्री माता वैष्णो देवी के त्रिकुटा पर्वत के नीचे से गुजरेगी तो वह अलग ही आस्था और मां के चरणों के नीचे से गुजरने का अनुभव करवाएगी। वहीं यात्रियों और पर्यटकों को विश्व के सबसे ऊंचे रेलवे पुल चिनाब रेल ब्रिज, अंजी ब्रिज भी इसी रेलवे ट्रैक पर देखने का सुनहरा अवसर मिलेगा। recent visitors 91

अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी की कमला हैरिस और रिपब्लिकन प्रत्याशी डोनाल्ड ट्रंप के बीच कांटे की टक्कर, मतदान कल

वाशिंगटन अमेरिका अपने नए राष्ट्रपति को चुनने के लिए फिर तैयार है। वहां 5 नवंबर को वोटिंग है। कई अरबपतियों कवर स्टोरी ने वहां बेहिसाब पैसे खर्च किए हैं। आखिर अरबपतियों के लिए भी ये चुनाव इतने अहम क्यों हैं?  अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी की कमला हैरिस और रिपब्लिकन प्रत्याशी डोनाल्ड ट्रंप  के बीच कांटे की टक्कर है। चुनाव में  अरबपतियों के बीच भी कड़ा मुकाबला चल रहा  है क्योकि इन्होंने अपने-अपने पसंदीदाप्रत्याशियों पर करोड़ों डॉलर खर्च किए हैं। इन प्रत्याशियों के बहाने इन अरबपतियों का भी काफी कुछ दांव पर लगा हुआ है। दोनों मुख्य उम्मीदवारों के लिए उनके सहयोगी समूहों ने अक्टूबर के मध्य तक ही 3.8 अरब डॉलर (करीब 32 हजार करोड़ रुपए) से अधिक जुटा लिए थे।   एक विश्लेषण के अनुसार सिर्फ करोड़पतियों ने ही इस चुनाव में 69.5 करोड़ डॉलर (लगभग 5,800 करोड़ रुपए) खर्च किए हैं, जो कुल चंदे का 18 फीसदी हिस्सा है। इधर, चुनावी फंडिंग की जानकारी देने वाली साइट ओपनसीक्रेट्स ने दावा किया है कि 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव इतिहास के सबसे महंगे चुनाव होंगे। इस चुनाव पर कुल 15.9 अरब डॉलर (1.3 लाख करोड़ रुपए) खर्च हो सकते हैं। पिछले चुनाव में कुल खर्च 14.4 अरब डॉलर (1.2 लाख करोड़ रुपए) ही था।   उद्योगपति ट्रम्प के साथ क्यों? ये हैं तीन वजह    टैक्स में छूट  का लालच  अमेरिकी उद्योगपति आखिर डोनाल्ड ट्रम्प का समर्थन क्यों कर रहे हैं, इसका सीधा जवाब है टैक्स में कटौती। ट्रम्प ने कहा कि वे अधिकतम कॉर्पोरेट टैक्स को वर्तमान 21% से घटाकर 15% कर देंगे। जब ट्रम्प व्हाइट हाउस पहुंचे थे, तब अमेरिका में ये दर 35% थी। वहीं डेमोक्रेट्स इसे 28% तक बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं। ट्रम्प वेल्थ टैक्स को कम करने का भी समर्थन करते हैं। वहीं बाइडेन 10 करोड़ डॉलर से अधिक की संपत्ति वाले परिवारों पर वेल्थ टैक्स लगाने की मांग कर रहे हैं।   सरकारी फैसलों में दखल की अपेक्षा ट्रम्प का समर्थन करने से कई अमेरिकी उद्योगपतियों को व्यक्तिगत फायदा है। उदाहरण के लिए इलॉन मस्क को लेते हैं। मस्क की कंपनी स्पेसएक्स और टेस्ला अमेरिकी सरकार पर काफी निर्भर हैं। स्पेसएक्स पेंटागन के सबसे बड़े पार्टनर्स में से एक है। टेस्ला को भारी सरकारी सब्सिडी मिलती है। मस्क की दोनों कंपनियों को एक दशक में 15.4 अरब डॉलर के कॉन्ट्रैक्ट मिले हैं। यानी उनकी सफलता में सरकार का भी योगदान है। मस्क को लगता है कि ट्रम्प इसमें आगे भी काफी मददगार साबित हो सकते हैं। ऐसे में मस्क का ट्रम्प समर्थन उनके निजी फायदे से काफी हद तक जुड़ा हुआ है। टेक कंपनियों पर बाइडेन की सख्ती कई अरबपति बाइडन हैरिस प्रशासन की कार्रवाइयों से भी नाराज हैं। उदाहरण के लिए इस साल बाइडन प्रशासन ने दिग्गज टेक कंपनी एपल के खिलाफ उसके आईफोन एकाधिकार के दुरुपयोग के लिए कानूनी कार्रवाई तेज की थी। इसके अलावा गूगल मेटा के खिलाफ भी बाइडन प्रशासन ने ऐसे ही कड़े तेवर दिखाए थे। बड़ी टेक कंपनियों के सीईओ डेमोक्रेट्स को इस वजह से भी पसंद नहीं कर रहे, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी नीतियों से व्यापार को नुकसान होगा। कारोबारियों का कमला के प्रति रुझान क्यों? 1. आर्थिक नीतियों में स्थिरता अमेरिका के कई अरबपति डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रत्याशी कमला हैरिस का समर्थन कर रहे हैं और इसका एक बड़ा कारण यह है कि उनकी आर्थिक नीतियां अनेक व्यावसायिक हितों के साथ मेल खाती हैं। एक तो उन्हें डेमोक्रेट्स की नीतियों में स्थिरता नजर आती है। फिर हैरिस दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों चिप मैन्युफैक्चरिंग और रियल एस्टेट में अधिक निवेश किए जाने की पैरवी करती हैं। कई उद्योगपति इन दोनों क्षेत्रों में निवेश में लगातार बढ़ोतरी कर रहे हैं, जिससे उन्हें फायदे की उम्मीद है। 2. निजी दुश्मनी निभाते हैं ट्रम्प डोनाल्ड ट्रम्प की गिनती निजी दुश्मनी निभाने वालों में होती है। ट्रम्प के कार्यकाल में कई उद्योगपति निशाने पर थे। उदाहरण के तौर पर जब ट्रम्प टीवी चैनल सीएनएन के कवरेज से नाराज हुए थे, तब कहते हैं कि उन्होंने पिछले दरवाजें से एटी एंड एटी और टाइम वार्नर (सीएनएन की पैरेंट कंपनी) के बीच विलय को रोकने का प्रयास किया था। इससे दोनों कंपनियों को गंभीर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। इसी तरह अमेजॉन पर भी ट्रम्प ने गुस्सा निकाला था। इस वजह से पेंटागन के साथ हुआ 10 अरब डॉलर का क्लाउड- कंप्यूटिंग कांट्रैक्ट उसके हाथ से चला गया था। 3. हैरिस सामाजिक सुरक्षा में बेहतर  कई उद्योपति कमला हैरिस का समर्थन करते हैं और इसकी वजह यूबीएस सर्वे से समझी जा सकती है। इसमें कम से कम 10 लाख डॉलर की संपत्ति वाले अमीरों को शामिल किया गया था। सर्वे में सामने आया कि 57% हैरिस के लिए और 43% ट्रम्प के लिए वोट देने की योजना बना रहे हैं। सर्वे में 971 अमीरों को शामिल किया गया था। ये लोग हैरिस को सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य देखभाल के मोर्चे पर बेहतर मानते हैं। recent visitors 77

अब CJI चंद्रचूड़ के पास सुप्रीम कोर्ट में महज 5 कार्य दिवस शेष, रिटायर होने से पहले ये 5 बड़े फैसले सुनाएंगे

नई दिल्ली देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी.वाई. चंद्रचूड़ 10 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। उनके पास सुप्रीम कोर्ट में महज 5 कार्य दिवस बचा है। इन कार्य दिवसों में उन्हें कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर फैसला देना है, जिनमें अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा देने से जुड़ा विवाद, मदरसा कानून की वैधता, संपत्ति के पुनर्वितरण सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं। रिटायर होने से पहले मुख्य न्यायाधीश जिन मुद्दों पर फैसला सुनाएंगे, उनका न सिर्फ राजनीति बल्कि आम लोगों की जिंदगी पर भी प्रभाव पड़ेगा। चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ 10 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय मामला मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली 7 जजों की संविधान पीठ ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा देने से संबंधित मुद्दों पर 1 फरवरी, 2024 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। संविधान पीठ इस कानूनी सवाल पर अपना फैसला सुनाएगी कि एएमयू को संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त है या नहीं। भर्ती प्रक्रिया के बाद नियमों में बदलाव का मामला सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की संविधान पीठ इस कानूनी सवाल पर अपना फैसला सुनाएगी कि क्या भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियमों और शर्तों में बदलाव हो सकता है? इस मामले में संविधान पीठ ने 23 जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। यह कानूनी सवाल राजस्थान हाईकोर्ट में अनुवादकों की नियुक्ति से उठा था। एलएमवी लाइसेंस धारक मामला सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों के संविधान पीठ इस कानूनी सवाल पर अपना फैसला सुनाएगी कि क्या लाइट मोटर व्हीकल (एलएमवी) लाइसेंस धारक चालक 7,500 किलोग्राम तक के वजन वाले परिवहन वाहन चलाने का अधिकार है या नहीं है। इस मुद्दे पर सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ ने 21 अगस्त को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। यह मामला बेहद महत्वपूर्ण है। मदरसा कानून की वैधता का मामला मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली 3 जजों की पीठ ने अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश मदरसा अधिनियम की वैधता से जुड़े मसले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा है, जिसके तहत यूपी मदरसा अधिनियम को असंवैधानिक घोषित करते हुए रद्द कर दिया गया था। बच्चों को सरकारी स्कूलों में समायोजित करने का आदेश दिया था। संपत्ति के वितरण का मामला मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली 9 जजों की संविधान पीठ इस संवैधानिक सवाल पर फैसला सुनाएगी कि क्या सरकार को निजी संपत्ति अधिग्रहित कर उनका पुनर्वितरण करने का अधिकार है या नहीं। संविधान पीठ अनुच्छेद 39(बी) के प्रावधानों को लेकर फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस अनुच्छेद में जनहित के लिए संपत्ति के पुनर्वितरण से संबंधित है। recent visitors 77

गावों और कस्बों में धड़लले से चल रही 75 अस्पताल, मरीजों की जान खतरे में, नहीं हो रही कोई कार्यवाही

हरख कस्बों से लेकर गावों तक करीब 70 अस्पताल संचालित हैं, जिनका पंजीकरण नहीं है। बगैर अनुमति चल रहे अस्पतालों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीजों का इलाज किया जा रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अवैध अस्पतालों की जांच तक नहीं कर रहे हैं। सतरिख में एक स्वास्तिक अस्पताल का पंजीकरण है, जबकि यहां छोटे से लेकर बड़े करीब 15 अस्पताल संचालित हैं। सीएचसी में अक्सर स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों का आवागमन रहता है। कभी अधिकारियों ने इन अवैध अस्पतालों की जांच करना मुनासिब नहीं समझा। जैदपुर नगर पंचायत में अवि सर्जिकल सेंटर और फातिमा दो अस्पतालों का पंजीकरण है। इस नगर पंचायत में लगभग 25 अवैध अस्पताल संचालित हो रहे हैं। अधिकारी बने हुए हैं अंजान इसी तरह हरख, भानमऊ, बांग्ला बाजार, इब्राहिमाबाद, लखियापुर, शरीफाबाद, सुलतानपुर सहित कई अन्य गांवों में लगभग 70 ऐसे अस्पताल हैं, जो बगैर स्वास्थ्य विभाग की अनुमति के चल रहे हैं। इन अस्पतालों में कथित चिकित्सक जुकाम, बुखार से लेकर गंभीर बीमारियों का इलाज कर रहे हैं। इतना ही नहीं, भवन और दुकानों के सामने बाकायदा अस्पताल के बोर्ड लगे हैं। यह बोर्ड दूर से दिख रहे हैं, फिर भी जिम्मेदार अधिकारियों की नजरें इस ओर नहीं जा रही हैं। सतरिख में सीएचसी से करीब चार सौ मीटर दूर बगैर पंजीकरण के चल रहे एक अस्पताल में प्रसव भी कराए जा रहे हैं। इसकी जानकारी कुछ लोगों ने विभाग के अधिकारियों को दी। जांच और कार्यवाही के नाम पर अधिकारियों ने पर्दा डाल रखा है। इसी तरह शरीफाबाद में एक झोलाछाप डिग्रीधारक चिकित्सक बनकर बच्चों का इलाज कर रहा है। यह भी जांच और कार्रवाई से दूर है। हरख ब्लाक में सिर्फ चार अस्पतालों का पंजीकरण है। इसके अलावा अन्य का पंजीकरण नहीं है। अस्पतालों की संख्या कितनी है इसकी जानकारी नहीं है। जहां शिकायत मिलती है टीम भेज कर कार्रवाई कराई जाती है। भानमऊ में शिकायत पर रहमान अस्पताल सीज कराया गया था। अब उसका पंजीकरण हो गया है। डा. नितीश कुमार सिंह, अधीक्षक सीएचसी सतरिख। recent visitors 89

उप मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन ओपीडी भवन का किया निरीक्षण

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने रविवार को जिला चिकित्सालय रीवा के सभागार में अस्पताल की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला अस्पताल में उपचार की आधुनिकतम सुविधाएं उपलब्ध हैं। नए ओपीडी भवन का निर्माण पूरा होने के बाद सुविधाओं में और वृद्धि होगी। अस्पताल की सुविधाओं का पूरा उपयोग करके श्रेष्ठ उपचार का केन्द्र बनाएं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा सिविल सर्जन शासन के निर्देशों के अनुरूप 70 साल से अधिक आयु के सभी व्यक्तियों के आयुष्मान कार्ड बनाएं। इससे बुजुर्ग रोगियों को हर साल पाँच लाख रुपए के उपचार की सुविधा मिलेगी। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जिले में दो चरणों में स्वास्थ्य जाँच शिविर लगाए गए। इनमें चिन्हित गंभीर रोगियों के उपचार का लगातार फालोअप करें। प्रत्येक चिन्हित रोगी को उपचार की पूरी सुविधा दें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बाल ह्रदय उपचार योजना के तहत ह्रदय रोग से पीड़ित बच्चों का चिन्हांकन करने के लिए जिले में अभियान चलाएं। ऑपरेशन योग्य बच्चों को राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम के तहत ऑपरेशन की नि:शुल्क सुविधा दी जा रही है। उप मुख्यमंत्री ने संचारी रोगों के नियंत्रण तथा सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की उपचार सुविधाएं बेहतर करने के भी निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टर्स सहित चिकित्सा-कर्मियों के पद बड़ी संख्या में भरे जा रहे हैं। हर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में विशेषज्ञ डॉक्टर्स की तैनाती की जाएगी। नवीन अस्पतालों में डॉक्टर्स और स्टाफ नर्स के पदों की पूर्ति सुनिश्चित करें। उप मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन ओपीडी भवन का किया निरीक्षण उप मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद जिला अस्पताल परिसर में निर्माणाधीन नवीन ओपीडी भवन का निरीक्षण किया। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्माण कार्य तय समय-सीमा में पूरा करें, जिससे आमजन को समय पर उपचार सुविधाओं का लाभ दिया जा सके। सिविल सर्जन निर्माण कार्यों की प्रगति की नियमित रूप से रिपोर्ट प्रस्तुत करें। सभी ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर भी अपने क्षेत्र में निर्माणाधीन स्वास्थ्य संस्था के भवनों की प्रगति की नियमित जानकारी दें। लापरवाही करने वाली निर्माण एजेंसी के विरूद्ध कार्रवाई करें। इस अवसर पर नगर निगम अध्यक्ष श्री व्यंकटेश पाण्डेय, कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ संजीव शुक्ला, सिविल सर्जन डॉ. एम.एल. गुप्ता, डॉ. बी.के. अग्निहोत्री, कार्यपालन यंत्री अनामिका सिंह, कार्यपालन यंत्री हाउसिंग बोर्ड श्री अनुज प्रताप सिंह, निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि, सभी मेडिकल ऑफिसर तथा बीएमओ उपस्थित रहे।   recent visitors 73

देर रात लाउंज में दोस्तों के साथ की पार्टी, सुबह कमरे में मिली फ्लोर मील मालिक की लाश

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में फ्लोर मील मालिक की संदिग्ध परिस्तिथियों में मौत हो गई। बताया गया कि वह बीती रात लाउंज में दोस्तों के साथ पार्टी कर रहा था। अपने फ्रेंड्स के साथ ही वह रूम में सो गया। आज सुबह लाउंज के कमरे में उसका शव बरामद हुआ है। फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक, वैशाली नगर का रहने वाला सुमित काबूललाशी मंडीदीप में फ्लोर मील का संचालन करता था। शनिवार देर रात रातीबड़ इलाके में स्थित पीजी लाउंज में दोस्तों के साथ सुमित ने पार्टी की थी। दोस्त की शादी की बैचलर पार्टी के बाद वह रूम में हो सो गया था। आज रविवार की सुबह लाउंज से उसका घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। शव का पंचनामा बनाकर पोस्मार्टम के लिए भिजवाया। वहीं पीएम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है। सुमित की मौत कैसे हुई इसका कारण फिलहाल अज्ञात है। पुलिस ने मर्ग कामय कर जांच शुरू कर दी है। मृतक सुमित के दोस्तों से पूछताछ की जा रही है। पीएम रिपोर्ट के बाद ही खुलासा हो सकेगा। recent visitors 98

मध्य प्रदेश में उज्जैन और बुरहानपुर में जल्द ही किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू होने जा रही

भोपाल मध्य प्रदेश में अब तक लोगों को अंग प्रत्यारोपण यानी ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए भोपाल, इंदौर जैसे बड़े शहरों की ओर रुख करना पड़ता था, लेकिन अब छोटे जिलों में भी यह सुविधा शुरू होने जा रही है। इन जिलों में अंगदान के बाद प्रत्यारोपण हो सकेगा। उज्जैन और बुरहानपुर में जल्द ही किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू होने जा रही है। इसके लिए वहां के निजी अस्पतालों को स्टेट ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन (सोटो) ने अनुमति जारी कर दी है। इससे पहले रीवा और जबलपुर के अस्पतालों में भी प्रत्यारोपण शुरू हो चुका है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज में पिछले माह आयोजित प्रत्यारोपण समन्वयक प्रशिक्षण कार्यक्रम के कारण संभव हो पाया है। यहां प्रदेशभर के सभी जिलों के साथ ही छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात से भी प्रत्यारोपण समन्वयक प्रशिक्षण प्राप्त करने आए थे। इसमें नेशनल ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन (नोटो) के डायरेक्टर डा. अनिल कुमार भी शामिल हुए थे।   बढ़ेगी अंगदान की प्रवृत्ति अधिकारियों ने बताया कि छोटे जिलों में अंग प्रत्यारोपण की सुविधा होने से अंगदान को बढ़ावा मिलेगा। वहां जो भी ब्रेन डेड मरीज अस्पताल में होंगे, वहां की कोऑर्डिनेटर टीम उनके परिवार के लोगों से चर्चा करेगी। उन्हें अंगदान का महत्व समझाएगी, क्योंकि अब तक ऐसे मरीजों को अंगदान के लिए बड़े शहरों में भेजना पड़ता था। नहीं बिकते हैं अंग अधिकारियों ने बताया कि लोगों में अभी भी भ्रांतियां हैं कि अंगों को बेच दिया जाता होगा, लेकिन जागरूक होना होगा कि ऐसा नहीं होता है, क्योंकि सभी ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज होता है। यहां जो सूची बनती है, उसी के हिसाब से अंगों को दिया जाता है। सूची में जिसका नाम ऊपर है और वह कहीं दूर है तो दूसरे नंबर वाले को अंग दिया जाता है। इसलिए लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक होकर आगे आना चाहिए, ताकि बीमार व्यक्ति को नया जीवन मिल सके। इन अंगों का हो सकता है दान अगर आप चाहें तो जीवित रहते हुए यह सहमति दे सकते हैं कि मृत्यु के बाद मेरे इन अंगों का दान ले लिया जाए। दान किए जा सकने वाले अंगों में कार्निया, हृदय के वाल्व, हड्डी, त्वचा जैसे ऊतकों को प्राकृतिक मृत्यु के बाद दान किया जा सकता है। हृदय, यकृत, गुर्दे, फेफड़े और अग्नाशय जैसे अन्य महत्वपूर्ण अंगों को केवल ब्रेनडेड के मामले में ही दान किया जा सकता है। recent visitors 80