बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के काम ने पकड़ी तेजी, 300 किलोमीटर लंबा पुल तैयार, 27 कास्टिंग यार्ड फाइनल

मुंबई गुजरात के सूरत में 40 मीटर लंबे गर्डर के बनने के साथ ही बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के 300 किलोमीटर लंबे पुल का निर्माण पूरा हो गया है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन (NHSRCL) ने  यह जानकारी दी। एनएचएसआरसीएल ने बताया कि 300 किलोमीटर लंबे सुपरस्ट्रक्चर में से 257 किलोमीटर पुल का निर्माण फुल स्पैन लॉन्चिंग मैथड से की गई है। अभी क्या है काम की स्थिति एनएचएसआरसीएल के अनुसार, बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत अभी तक नदियों पर 14 ब्रिज बनाए गए हैं। 37 किलोमीटर लंबा पुल स्पैन बाय स्पैन तकनीक से बनाया गया है। 0.9 किलोमीटर लंबा स्टील का पुल बनाया गया है और 1.2 किलोमीटर लंबा पीएससी पुल बनाया गया है। साथ ही 2.7 किलोमीटर में स्टेशन बिल्डिंग का निर्माण हुआ है। 300 किलोमीटर के अलावा 401 किलोमीटर में नींव का काम और 326 किलोमीटर में गर्डर कास्टिंग का काम पूरा हो चुका है। बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 508 किलोमीटर है। बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य में तेजी आई है। खासकर फुल स्पैन लॉन्चिंग मैथड से इसमें उल्लेखनीय विकास हुआ है। रेल मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया। इस पोस्ट में उन्होंने बताया कि इस बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का कितने किमी लंबा ट्रैक तैयार हो गया है। उन्होंने पोस्ट में लिखा, '300 किमी वायडक्ट पूरा हुआ।' इसका मतलब है कि बुलेट ट्रेन के रास्ते का 300 किलोमीटर का हिस्सा अब खंभों पर बन चुका है। वायडक्ट का मतलब है, पुल जैसा ढांचा जिस पर ट्रेन चलेगी। मुंबई स्टेशन का कितना काम पूरा? मुंबई बुलेट ट्रेन स्टेशन बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में बन रहा है। यह स्टेशन जमीन के नीचे होगा। यहाँ पर 76 प्रतिशत खुदाई का काम पूरा हो चुका है। एक खबर के अनुसार, 14.2 लाख क्यूबिक मीटर खुदाई हो चुकी है। कुल 18.7 लाख क्यूबिक मीटर मिट्टी वहां से निकालनी है। यानी मिट्टी निकालने का करीब आधा काम पूरा हो गया है। साइट पर कंक्रीट लैब साइट पर 120 cum/hr क्षमता के तीन बैचिंग प्लांट लगाए गए हैं। बैचिंग प्लांट का मतलब है, वह जगह जहां कंक्रीट (सीमेंट, रेत, गिट्टी का मिश्रण) बनाया जाता है। बैचिंग प्लांट में आइस प्लांट और चिलर प्लांट भी हैं। ये कंक्रीट के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। गर्मी में कंक्रीट जल्दी सूख जाता है। इसलिए उसे ठंडा रखना जरूरी है। साइट पर एक आधुनिक कंक्रीट लैब भी है। यहां पानी की पारगम्यता और रैपिड क्लोराइड पेनिट्रेशन टेस्ट जैसी सुविधाएं हैं। इन टेस्ट से कंक्रीट की क्वालिटी पता चलती है। सारे कंक्रीट टेस्ट साइट पर ही होते हैं। कुछ सैंपल अच्छे लैब में भी भेजे जाते हैं। क्या होगा स्टेशन में खास?     प्लेटफॉर्म जमीन से लगभग 26 मीटर नीचे होगा।     यह लगभग 10 मंजिला इमारत जितना गहरा है।     स्टेशन में तीन फ्लोर होंगे: प्लेटफॉर्म, कॉनकोर्स (प्रतीक्षालय) और सर्विस फ्लोर।     खुदाई का काम लगभग 32 मीटर (100 फीट) की गहराई तक किया जा रहा है।     स्टेशन में छह प्लेटफॉर्म होंगे। हर प्लेटफॉर्म लगभग 415 मीटर लंबा होगा। यह 16 कोच वाली बुलेट ट्रेन के लिए काफी है। स्टेशन मेट्रो और सड़क से भी जुड़ा होगा।     स्टेशन में दो एंट्री/एग्जिट पॉइंट होंगे। इससे लोगों को स्टेशन में आने-जाने में आसानी होगी। स्काईलाइट होगी प्राकृतिक रोशनी के लिए एक स्काईलाइट भी बनाई गई है। स्काईलाइट से दिन में स्टेशन में सूरज की रोशनी आएगी। इससे बिजली की बचत होगी और स्टेशन सुंदर भी दिखेगा। बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इससे देश में यातायात और तेज होगा। स्वदेशी तकनीक और उपकरणों का हो रहा इस्तेमाल बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए 27 कास्टिंग यार्ड बनाए गए हैं। स्टील ब्रिज के लिए सात वर्कशॉप स्थापित की गई हैं, जिनमें से तीन गुजरात में और एक उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में स्थापित की गई हैं। एजेंसी ने बताया कि पुल पर तीन लाख से ज्यादा आवाज अवरोधक लगाए गए हैं। बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत बुलेट ट्रेन स्टेशनों की सड़क और रेल मार्ग से कनेक्टिविटी बनाई जा रही है ताकि यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो। बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में स्वदेशी तकनीक और उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट से भारत की रेल तकनीक में बढ़ती क्षमताओं का भी प्रदर्शन हो रहा है। मुंबई अहमदाबाद रेल प्रोजेक्ट की कुल लागत करीब 1.08 लाख करोड़ रुपये है, इसमें से 10 हजार करोड़ रुपये केंद्र सरकार देगी और पांच-पांच हजार करोड़ रुपये गुजरात और महाराष्ट्र सरकार देंगी। वहीं बाकी जापान की सरकार कर्ज के रूप में देगी।  recent visitors 56

स्मार्ट पीडीएस व्यवस्था लागू होने के बाद केंद्र सरकार सीधे मॉनिटरिंग कर सकेगी

 ग्वालियर  मध्य प्रदेश में सार्वजनिक राशन वितरण प्रणाली (PDS System) को मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए स्मार्ट पीडीएस सिस्टम अब एक जून से लागू हो जाएगा। पहले इसे एक मई से लागू होना था, लेकिन ई-केवाईसी (eKYC ) का काम पूरा न हो पाने के कारण देरी हुई। प्रदेश में 87 प्रतिशत उपभोक्ताओं की ई-केवाईसी हो चुकी है। 31 मई तक बचे हुए उपभोक्ताओं की ई-केवाईसी पूरा कर लेने का लक्ष्य है। ई-केवाईसी के लिए यही अंतिम तिथि भी है। केंद्र सीधे मॉनिटरिंग कर सकेगा     इस प्रणाली के लागू होने के बाद केंद्र सीधे मॉनिटरिंग कर सकेगा। स्मार्ट पीडीएस के तहत पारदर्शिता को बढ़ाया जा रहा है, ताकि सभी राज्यों में खाद्यान्न वितरण को लेकर एक जैसी स्थिति रहे। अब राज्यों की स्थिति के आधार पर राशन देना होगा कुछ राज्य अपने स्तर पर बदलाव कर लेते थे, लेकिन अब राज्यों की स्थिति के आधार पर राशन देना होगा। अभी भी कुछ राज्यों में एपीएल को राशन दिया जाता है, जिसे अब बंद कर दिया जाएगा। वैसे पहले से ही वन नेशन वन राशन कार्ड लागू है, जिसके तहत पात्र हितग्राही देश में कहीं से भी राशन ले सकता है। मदरसा बोर्ड के मान्यता नवीनीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन 23 मई से होंगे इस बीच, भोपाल से खबर है कि मदरसा बोर्ड द्वारा शिक्षा सत्र 2025-26 में मदरसा मान्यता नवीनीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन 23 मई से 30 जून तक के लिए उपलब्ध कराई जा रही है। इसमें वर्ष 2025 तक मान्यता प्राप्त सामान्य मदरसों के अतिरिक्त वर्ष 2022 तक मान्यता प्राप्त मदरसों के लिए यह अंतिम अवसर है। इसके बाद ऐसे मदरसों की मान्यता नवीनीकरण के ऑनलाइन आवेदन करने की पात्रता समाप्त कर दी जाएगी। ऑनलाइन आवेदन से संबंधित विस्तृत जानकारी मदरसा बोर्ड की अधिकृत वेबसाइट पर एवं एमपी ऑनलाइन के पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई है। मान्यता प्राप्त मदरसों में निर्धारित तिथियों में आवेदन करना सुनिश्चित करें एवं आवेदन की एक प्रति समस्त दस्तावेजों के साथ अविलम्ब बोर्ड में भेजना एवं एक प्रति अपने जिले के जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जमा करना सुनिश्चित करें। इसके बाद ही प्रकरण पर अग्रिम कार्रवाई की जा सकेगी। recent visitors 44

सोलर पंप के लिए मोहन यादव सरकार किसानों को देगी सब्सिडी, स्थाई बिजली कनेक्शन नहीं होने वाले किसानों को मिलेगा लाभ

भोपाल  मध्य प्रदेश के किसानों को भी अब केन्द्र सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना का लाभ मिल सकेगा. राज्य सरकार ने सिंचाई के लिए सोलर पंप लगाने की इस योजना में संशोधन कर इसे राज्य में लागू कर दिया है. इस योजना के तहत सभी किसानों को सोलर पंप लगाने का मौका फिलहाल नहीं मिल सकेगा. राज्य सरकार ने इसमें संशोधन किया है. इसके तहत योजना के पहले चरण में चुनिंदा किसानों को ही इस योजना का लाभ मिल सकेगा. अभी सिर्फ उन्हीं किसानों के खेतों पर सोलर पंप लगाए जाएंगे, जिन खेतों पर बिजली का स्थाई कनेक्शन मौजूद नहीं है. इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को अपनी जेब से कितनी राशि खर्च करनी होगी यह भी साफ कर दिया है. शुरूआत में किन किसानों को मिलेगा लाभ राज्य सरकार ने योजना में संशोधन कर इसे लागू करने अधिसूचना जारी कर दी है. इसमें प्रावधान किया गया है कि योजना के लिए वह किसान पात्र होंगे, जिनकी भूमि पर अभी स्थाई बिजली कनेक्शन नहीं है. सोलर पंप लगाए जाने के पहले कृषि भूमि पर टैगिंग किया जाएगा, ताकि किसान को सोलर पंप और बिजली कनेक्शन दोनों के अनुदान का लाभ न मिल सके. इस योजना के दूसरे चरण में उन सभी किसानों के खेतों पर सोलर पंप लगाने के लिए अनुदान का लाभ दिया जाएगा, जिसके खेतों पर स्थाई बिजली कनेक्शन मौजूद है. विभाग बनाएगा किसानों का डाटा बेस नवीन एवं नवकरणीय विभाग बिजली कंपनियों की मदद से प्रदेश के किसानों का डाटाबेस तैयार करेगी. इसमें किसानों द्वारा लिए गए अस्थायी और स्थायी बिजली कनेक्शन उससे लिंक किए गए किसानों के समग्र, आधार का डाटा प्राप्त करेगी और उसे मध्य प्रदेश भू लेख की मदद से खसरा नंबर से लिंक किया जाएगा. इसके आधार पर ही किसानों को सोलर पंप के लिए ऋण और अनुदान दिया जाएगा. सोलर पंप लेने वाले किसानों से हितग्राही अंश की राशि पोर्टल के जरिए ही जमा कराई जाएगी. इससे किसानों का डाटा वैरीफाई किया जाएगा. सोलर पंप के साथ ड्रिप, स्प्रिंकलर सिस्टम भी जोड़ा जाएगा राज्य सरकार ने तय किया है कि सोलर पंप की इस योजना के साथ किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा. इसमें भी किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, उद्यानिकी विभाग द्वारा अनुदान दिया जाता है. इससे किसानों को पानी की बचत होगी. ऐसे कर सकेंगे योजना के लिए आवेदन इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम के वेब पोर्टल पर सोलर पंप के लिए आवेदन करना होगा.     हितग्राही का नाम, पता, आधार नंबर और मोबाइल नंबर भरना होगा.     भू -स्वामित्व संबंधी दस्तावेज का विवरण जैसे खसरा नंबर, ग्राम, आर.आई सर्कल, तहसील एवं जिला का नाम भरना होगा.     उस खसरे, खसरे के बटांकन पर सिंचाई का वर्तमान स्त्रोत बताना होगा.     कृषि भूमि के खसरों पर बिजली कनेक्शन है या नहीं ? यदि है, तो वह स्थाई या अस्थाई है?     आवेदन के बाद विभाग प्राथमिकता के आधार पर हितग्राहियों की सूची तैयार करेगी और इसके बाद सोलर पंप लगाए जाएंगे. कितना मिलेगा अनुदान     3 एचपी सोलर पंप पर केन्द्र सरकार का अनुदान 30 फीसदी, कृषक ऋण 65 फीसदी और किसान द्वारा दी जाने वाली मार्जिन मनी 5 फीसदी.     3 एचपी सोलर पंप पर केन्द्र सरकार का अनुदान 30 फीसदी, कृषक ऋण 60 फीसदी और किसान द्वारा दी जाने वाले मार्जिन मनी 10 फीसदी. सोलर पंप योजना के लाभ     प्रदेश में जिन किसानों के पास स्थायी विद्युत कनेक्शन नहीं है, वे इस योजना के पात्र होंगे। सोलर पंप की लागत का 5-10 प्रतिशत हिस्सा किसान को देना होगा, जिसमें तीन हार्स पावर से कम के पंप के लिए 5 प्रतिशत और उससे अधिक के लिए 10 प्रतिशत अंशदान निर्धारित है। 30 प्रतिशत अनुदान भारत सरकार द्वारा कुसुम योजना के तहत दिया जाएगा। शेष 60-65 प्रतिशत राशि बैंक ऋण के रूप में उपलब्ध होगी, जिसका भुगतान राज्य सरकार करेगी। ऊर्जा विकास निगम का सर्विस चार्ज भी किसानों से नहीं लिया जाएगा। सोलर पंप की दरें निविदा के आधार पर तय होंगी, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। recent visitors 29

उत्तराखंड के मदरसों में गूंजेगा सेना का पराक्रम, ऑपरेशन सिंदूर की कहानी, मौलाना की जुबानी

देहरादून  पाकिस्तान की कायराना हरकत के जवाब में भारतीय सेना का पराक्रम 'ऑपरेशन सिंदूर' के जरिए सबने देखा। अब उत्तराखंड की धामी सरकार ने बड़ा फैसला किया है। मदरसों में अब छात्र-छात्राओं को 'ऑपरेशन सिंदूर' के बारे में पढ़ाया जाएगा। उत्तराखंड मदरसा बोर्ड ने यह फैसला लिया है। बोर्ड चाहता है कि बच्चे सेना के पराक्रम की कहानियों से परिचित हों। उत्तराखंड मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात के बाद यह जानकारी दी। उत्तराखंड में कुल 451 मदरसे हैं, जिनमें लगभग 50 हजार बच्चे पढ़ते हैं। मुफ्ती शमून कासमी ने नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। उनके साथ कुछ शिक्षाविद और बुद्धिजीवी भी मौजूद थे। उन्होंने रक्षा मंत्री को 'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता के लिए बधाई दी। कासमी ने बताया कि उत्तराखंड सैनिकों की भूमि है। ऑपरेशन सिंदूर में हमारे सशस्त्र बलों ने बेजोड़ शौर्य का परिचय दिया। इसका मतलब है कि उत्तराखंड वीरों की धरती है और 'ऑपरेशन सिंदूर' में हमारी सेना ने अद्भुत बहादुरी दिखाई। उन्होंने यह भी कहा कि देश की जनता ने सेना के शौर्य को सराहा है। कासमी ने आगे कहा कि मदरसों के बच्चों को भी सैनिकों की बहादुरी के बारे में बताया जाएगा। उन्होंने बताया कि नए पाठ्यक्रम में 'ऑपरेशन सिंदूर' का चैप्टर शामिल किया जाएगा। इसके लिए जल्द ही पाठ्यक्रम समिति की बैठक बुलाई जाएगी। रक्षा मंत्री से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में कई लोग शामिल थे। इनमें रक्षा विशेषज्ञ कमर आगा, इस्लामिक सेंटर के पूर्व अध्यक्ष सिराज कुरैशी और आईसीएफए के अध्यक्ष एमजे खान जैसे लोग मौजूद थे। 'ऑपरेशन सिंदूर' भारतीय सेना द्वारा चलाया गया एक महत्वपूर्ण अभियान था। इसकी सफलता की कहानी अब मदरसों के बच्चों को पढ़ाई जाएगी। इससे बच्चों को देश के सैनिकों के बलिदान और शौर्य के बारे में पता चलेगा। यह फैसला उत्तराखंड मदरसा बोर्ड ने लिया है। बोर्ड चाहता है कि बच्चे देश के इतिहास और सेना के पराक्रम से परिचित हों। ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेना ने तबाह किए आतंकी ठिकाने भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपने रुख को एक बार फिर दुनिया के सामने स्पष्ट करते हुए 6 और 7 मई की दरमियानी रात को एक साहसिक सैन्य अभियान 'ऑपरेशन सिंदूर' को अंजाम दिया. इस ऑपरेशन के तहत भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के कुल 9 ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए. ये सभी ठिकाने जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे भारत-विरोधी आतंकवादी संगठनों से जुड़े थे. इस सुनियोजित और रणनीतिक कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया गया. यह सभी आतंकी गुट भारत के खिलाफ आतंकी हमलों की योजना बना रहे थे और इन्हीं ठिकानों से उन्हें प्रशिक्षण, हथियार और दिशा-निर्देश दिए जा रहे थे. भारतीय खुफिया एजेंसियों से मिली पुख्ता जानकारी के आधार पर इन ठिकानों की पहचान की गई थी, जिसके बाद सेना ने सटीक लक्ष्य साधकर ऑपरेशन को अंजाम दिया. भारत के सैन्य इतिहास में गौरवपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होगा ऑपरेशन सिंदूर ऑपरेशन सिंदूर की सबसे खास बात यह रही कि इस पूरे अभियान में भारत ने सिर्फ और सिर्फ आतंकी अड्डों को ही निशाना बनाया. पाकिस्तान के किसी भी सैन्य प्रतिष्ठान या नागरिक ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया. यह ऑपरेशन न केवल भारतीय सेना की तकनीकी दक्षता और सटीकता का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ 'नो टॉलरेंस' नीति पर पूरी मजबूती से कायम है. ऑपरेशन सिंदूर, भारत के सैन्य इतिहास में एक और गौरवपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है. इस अध्याय के बारे में उत्तराखंड के मदरसों के छात्र विस्तार से पढ़ेंगे. उत्तराखंड में कितने मदरसे हैं? BBC की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में 451 मदरसे मदरसा शिक्षा परिषद (मदरसा बोर्ड) से पंजीकृत हैं, लेकिन करीब 500 मदरसे बिना पंजीकरण के चल रहे हैं. recent visitors 65

मुंबई से गोरखपुर जा रही काशी एक्सप्रेस की एक बोगी के पहियों में लगी आग, यात्रियों ने ट्रेन से कूदकर बचाई जान

खंडवा मंगलवार दोपहर लोकमान्य तिलक टर्मिनस मुंबई से गोरखपुर जा रही 15017 काशी एक्सप्रेस में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब ट्रेन के एक डिब्बे के पहियों से अचानक आग और धुआं निकलने लगा। यह घटना खंडवा जिले के चारखेड़ा रेलवे स्टेशन के पास स्थित तवा ब्रिज पर हुई।   यात्रियों ने खुद को बचाया यात्री धुआं उठते देख घबराकर तुरंत डिब्बे से बाहर कूद गए। सूचना मिलते ही ट्रेन को वहीं रोक दिया गया। संबंधित बोगी की जांच की गई। आग पर तुरंत काबू पा लिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। ब्रेक जाम से हुआ हादसा चारखेड़ा स्टेशन मास्टर ने बताया कि प्राथमिक जांच में ब्रेक जाम होने के कारण पहिए से धुआं उठने की बात सामने आई है। घटना के चलते दो से तीन ट्रेनें निर्धारित समय से देरी से रवाना हुईं। काशी एक्सप्रेस को आवश्यक जांच के बाद आगे रवाना कर दिया गया। recent visitors 32

जब तक नेतन्याहू सरकार इन जघन्य कार्रवाइयों को जारी रखेगी, हम चुप नहीं बैठेंगे:UK-फ्रांस-कनाडा

 गाजा इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शपथ ली है कि वे पूरे गाजा को 'नियंत्रण' में लेकर रहेंगे. लेकिन नेतान्याहू के प्लान पर ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा ने आंखें तरेर ली है. बेंजामिन नेतान्याहू की सेना ने कहा है कि उन्होंने पूरे गाजा शहर को कॉम्बैट जोन घोषित कर दिया है. इस बीच गाजा में एयरस्ट्राइक में 60 लोग मारे गए हैं. इजरायल के वित्त मंत्री बेजलेल स्मॉट्रिच ने कहा कि इजरायल की सेना फिलिस्तीनी गाजा के बचे हुए हिस्से को “समाप्त” कर देगी. इस बीच  ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा ने सोमवार को कहा है कि, "जब तक नेतन्याहू सरकार इन जघन्य कार्रवाइयों को जारी रखेगी, हम चुप नहीं बैठेंगे. अगर इजरायल ने नए सिरे से सैन्य हमले बंद नहीं किए और मानवीय सहायता पर अपने प्रतिबंध नहीं हटाए, तो हम जवाब में और ठोस कदम उठाएंगे." नेतन्याहू का टोटल कंट्रोल का प्लान क्या है? इजरायल की गाजा पर पूर्ण नियंत्रण की योजना में सैन्य कब्जा, हमास को खत्म करना, बंधकों की रिहाई, और पूरे क्षेत्र को इजरायल के लिए सुरक्षित बनाना शामिल है. यह योजना सैन्य अभियानों, मानवीय सहायता पर नियंत्रण, और संभावित विस्थापन नीतियों के माध्यम से लागू की जा रही है. बता दें कि इजरायली संसद और सुरक्षा कैबिनेट ने मई 2025 में गाजा पट्टी पर पूर्ण सैन्य नियंत्रण की योजना को मंजूरी दी है. इस योजना का उद्देश्य हमास को सैन्य और प्रशासनिक रूप से पूरी तरह से खत्म करना और गाजा में बंधकों को रिहा कराना है. इजरायल पहले से ही गाजा के लगभग 50% हिस्से पर नियंत्रण रखता है, और इस योजना के तहत पूरे क्षेत्र को अपने कब्जे में लेने की रणनीति बनाई गई है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को कहा कि बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद इजरायल पूरे गाजा पर कंट्रोल करेगा. शुक्रवार को एक नए ऑपरेशन की शुरुआत की घोषणा करने वाली इजरायली सेना ने सोमवार को दक्षिणी शहर खान यूनिस के निवासियों को तुरंत समुद्री तट पर जाने की चेतावनी दी, क्योंकि वह "अभूतपूर्व हमले" की तैयारी कर रही है. इजरायल ने गाजा में सैन्य अभियानों को तेज करने का फैसला किया है, जिसमें हवाई हमले, जमीनी ऑपरेशन, और हमास के ठिकानों को निशाना बनाना शामिल है.  मार्च 2025 में युद्धविराम टूटने के बाद से इजरायली सेना ने सैकड़ों लोगों को मार गिराया है और बड़े भूभाग पर कब्जा किया है. प्रतिबंधों, मौतों और बमबारी से सिसक रहा है गाजा गाजा की स्थिति बहुत दयनीय है. गाजा की स्वास्थ्य एजेंसियों ने कहा है कि सोमवार सुबह तक 72 घंटों में इजरायली बमबारी में 300 से अधिक लोग मारे गए है. दक्षिणी शहर खान यूनिस में हवाई हमलों की एक सीरीज में मरने वालों में बच्चे भी शामिल हैं. यह हमला तब हुआ जब नेतन्याहू ने कहा था कि उनकी सेना अकाल के जोखिम से बचने के लिए सीमित मात्रा में भोजन की अनुमति देगी. इजरायल ने हमास के कब्जे से 58 बंधंकों की रिहाई के लिए लगातार दबाव बना रहा है. इजरायल इसके लिए सारे उपाय अपना रहा है. इजरायल ने गाजा में खाद्य, पानी, ईंधन, और अन्य जरूरी सामानों की आपूर्ति को रोक दिया है. इस नाकेबंदी के कारण गाजा में भयावह मानवीय संकट पैदा हो गया है, और भुखमरी का खतरा बढ़ गया है. हालांकि, मई 2025 में इजरायल ने सीमित मात्रा में मानवीय सहायता की अनुमति देने का फैसला किया, लेकिन यह सहायता आतंकवादियों तक न पहुंचे, इसके लिए सख्त निगरानी की योजना है. कनाडा, ब्रिटेन और फ्रांस की एंट्री ने इजरायल को उलझाया इजरायल के इस प्लान पर यूरोप के बड़े देशों और पश्चिमी लॉबी ने घोर असंतोष जताया है. ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा ने इजरायल के युद्ध विस्तार को असंगत बताया है. इन्होंने गाजा की स्थिति को "असहनीय" बताया और धमकी दी कि यदि इजरायल का अभियान जारी रहा तो "ठोस" जवाब दिया जाएगा. "जब तक नेतन्याहू सरकार इन जघन्य कार्रवाइयों को जारी रखेगी, हम चुप नहीं बैठेंगे. अगर इजरायल ने नए सिरे से सैन्य आक्रमण बंद नहीं किया और मानवीय सहायता पर अपने प्रतिबंध नहीं हटाए, तो हम जवाब में और ठोस कदम उठाएंगे." ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा ने गाजा में अनाज न आने देने के फैसले की तीखी आलोचना की है. इन देशों ने कहा है कि ये अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है. इसके अलावा, इन देशों ने इजरायली सरकार के कुछ मंत्रियों द्वारा गाजा की नागरिक आबादी के "जबरन विस्थापन" की धमकी देने वाले बयानों की निंदा की और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करार दिया. प्रतिबंध की धमकी पर नेतन्याहू का जवाब ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा के बयानों पर इजरायल ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि लंदन, ओटोवा और पेरिस के नेता 7 अक्टूबर को इज़रायल पर नरसंहार हमले के लिए एक बड़ा इनाम दे रहे हैं. प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने ट्वीट कर कहा, "हमारी सीमा पर हमास आतंकवादियों के नष्ट होने से पहले हमारे अस्तित्व के लिए किए जा रहे रक्षात्मक युद्ध को समाप्त करने के लिए इज़रायल से अनुरोध करके और फ़िलिस्तीनी राज्य की मांग करके, लंदन, ओटोवा और पेरिस के नेता 7 अक्टूबर को इज़राइल पर नरसंहार हमले के लिए एक बड़ा इनाम दे रहे हैं, ऐसा करके ये देश इस तरह के और अधिक अत्याचारों को आमंत्रित कर रहे हैं." नेतन्याहू ने कहा कि युद्ध 7 अक्टूबर को शुरू हुआ जब फिलिस्तीनी आतंकवादियों ने हमारी सीमाओं पर हमला किया, 1,200 निर्दोष लोगों की हत्या की और 250 से अधिक निर्दोष लोगों को किडनैप कर गाजा की काल कोठरी में ले गए. नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के दृष्टिकोण से सहमति जताते हुए कहा कि यूरोप के नेता भी ऐसा ही विचार रखें. युद्ध कल समाप्त हो सकता है यदि शेष बंधकों को रिहा कर दिया जाए, हमास अपने हथियार डाल दे, उसके हत्यारे नेताओं को निर्वासित कर दिया जाए और गाजा को सैन्य विहीन कर दिया जाए. उन्होंने खरी-खरी कहा कि किसी भी देश से इससे कम कुछ भी स्वीकार करने की उम्मीद नहीं की जा सकती है और इज़रायल निश्चित रूप से ऐसा नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि यह बर्बरता पर सभ्यता का युद्ध है. इजरायल तब तक न्यायपूर्ण तरीकों से अपना बचाव करना जारी रखेगा जब तक कि पूर्ण विजय प्राप्त नहीं … Read more

बारिश का साया के चलते कोलकाता नहीं अहमदाबाद में होगा IPL फाइनल, प्लेऑफ के मैचों का वेन्यू भी बदला

नई दिल्ली इंडियन प्रीमियर लीग 2025 का फाइनल 3 जून को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जाएगा। एक रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गया है। मशहूर स्पोर्ट्स वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार अहमदाबाद 1 जून को क्वालीफायर 2 की मेजबानी भी करेगा जबकि न्यू चंडीगढ़ के मुल्लानपुर में पहले दो प्लेऑफ मैच जिसमें 29 मई को क्वालीफायर 1 और 30 मई को एलिमिनेटर के मेजबानी की उम्मीद है। इससे पहले फाइनल कोलकाता में होना था। यह निर्णय भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) द्वारा आयोजित उच्च स्तरीय बैठकों की एक श्रृंखला के बाद लिया गया है। ये शेड्यूलिंग और स्थल परिवर्तन मुख्य रूप से बरसात के मौसम की शुरुआत और भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पार तनाव के बीच टूर्नामेंट के हाल ही में एक सप्ताह के निलंबन के कारण लागू किए गए थे। लीग को 9 मई को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया था और 17 मई को ही फिर से शुरू किया गया। मूल रूप से 25 मई के लिए निर्धारित फाइनल को एक सप्ताह से अधिक समय के लिए 3 जून तक टाल दिया गया था। यह संभावित रूप से तीसरी बार होगा जब दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट क्षेत्र नरेंद्र मोदी स्टेडियम आईपीएल फाइनल की मेजबानी करेगा। प्रतिष्ठित मैदान ने पहले 2022 और 2023 में फाइनल की मेजबानी की थी। विशेष रूप से 2022 में गुजरात टाइटन्स के डेब्यू सीजन के दौरान अहमदाबाद को COVID-19 प्रोटोकॉल के कारण केवल दो मैचों तक सीमित रखा गया था, वे दो क्वालीफायर और फाइनल थे। टाइटन्स ने उस वर्ष खिताब जीता और स्थल ने 2023 में फाइनल बरकरार रखा। मई के अंत में देश के कई हिस्सों में मानसून के पैटर्न को प्रभावित करने के साथ बोर्ड ने निर्बाध नॉकआउट मैचों को सुनिश्चित करने के लिए ऐतिहासिक रूप से शुष्क जलवायु वाले शहरों को चुना। अब तक तीन टीमों ने प्लेऑफ में अपनी जगह पक्की कर ली है जिसमें गुजरात टाइटन्स, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और पंजाब किंग्स। अंतिम स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा जारी है, जिसमें मुंबई इंडियंस और दिल्ली कैपिटल्स के बीच कड़ी टक्कर है। recent visitors 46