निर्माणी श्रमिकों को दिए 14.47 करोड़ रूपये, छत्तीसगढ़ के श्रम मंत्री ने रक्षाबंधन पर्व के उपलक्ष्य में दी सौगात

रायपुर. मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मंशानुरूप श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने राज्य के 33 हजार से अधिक निर्माणी श्रमिकों एवं उनके परिजनों को रक्षाबंधन पर्व के उपलक्ष्य में 14 करोड़ 47 लाख रूपए से अधिक सौगात दी है। यह राशि श्रम विभाग द्वारा श्रमिकों एवं उनके परिजनों के कल्याण के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत डीबीटी के माध्यम से प्रदान की जाएगी। श्रम मंत्री ने भी विभिन्न विभागीय योजनाओं के तहत श्रमिक परिवारों के हितग्राहियों के लिए 14 करोड़ 47 लाख 44 हजार 709 रूपए की स्वीकृति प्रदान की। यहां यह उल्लेखनीय है कि श्रम विभाग द्वारा निर्माणी श्रमिकों एवं उनके परिजनों के कल्याण के लिए मुख्यमंत्री श्रमिक सहायता योजना, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता, मिनीमाता महतारी जतन योजना, नोनी सशक्तिकरण योजना, निर्माण श्रमिकों के बच्चों को छात्रवृत्ति, गणवेश, पुस्तक, कॉपी, सहायता योजना, मुख्यमंत्री नोनी बाबू शिक्षा सहायता योजना, दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना, आवास सहायता योजना सहित अन्य योजनाओं के अंतर्गत सीधे लाभान्वित किए जाता है। श्रम विभाग अतंर्गत छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा निर्माण श्रमिकों हेतु संचालित विभिन्न योजनाएं जैसे- मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण योजना के अंतर्गत 885 श्रमिकों को लाभान्वित किया गया है। इसी तरह नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत 9354, मुख्यमंत्री मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना 50, मिनीमाता महतारी जतन योजना 975, मुख्यमंत्री सियान सहायता योजना 71, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास योजना 114, नोनी बाबू मेधावी छात्र-छात्रा शिक्षा प्रोत्साहन योजना 36,  एवं मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक के बच्चों हेतु निशुल्क गणवेश एवं पुस्तक कापी हेतु सहायता योजना के तहत् छात्र-छात्राएं 18028 अन्य योजनाओं में इस प्रकार कुल 33873 निर्माण श्रमिक एवं उनके बच्चों को योजनाओं के तहत् सीधे उनके खाता में ऑनलाईन के माध्यम राशि लाभान्वित हेतु राशि रूपये 14 करोड़ 47 रूपये स्वीकृत किया गया है। श्रम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ भवन निर्माण एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल द्वारा विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत गरियाबंद जिले के लिए पात्र श्रमिकों की संख्या 17, स्वीकृत राशि 24 लाख रूपए, जिला धमतरी में श्रमिकों की संख्या 33, स्वीकृत राशि 04 करोड़ 84 लाख 29 हजार रूपए, जिला महासमुंद में श्रमिकों की संख्या 2767, स्वीकृत राशि 04 करोड़ 30 लाख 07 हजार रूपए, जिला मुंगेली में श्रमिकों की संख्या 276, स्वीकृत राशि 54 लाख 80 हजार रूपए, जिला कोरबा में श्रमिकों की संख्या 324, स्वीकृत राशि 71 लाख 05 हजार 25 रूपए, जिला रायगढ़ में श्रमिकों की संख्या 225, स्वीकृत राशि 44 लाख 86 हजार रूपए, जिला बस्तर में श्रमिकों की संख्या 22, स्वीकृत राशि 03 लाख 92 हजार 628 रूपए, जिला कोण्डागांव में श्रमिकों की संख्या 328, स्वीकृत राशि 29 लाख 68 हजार 500 रूपए, जिला कांकेर में श्रमिकों की संख्या 08, स्वीकृत राशि 08 लाख रूपए, जिला दंतेवाड़ा में श्रमिकों की संख्या 735, स्वीकृत राशि 01 करोड़ 12 लाख 61 हजार 500, जिला सरगुजा में श्रमिकों की संख्या 496, स्वीकृत राशि 99 लाख 20 हजार रूपए, जिला जशपुर में श्रमिकों की संख्या 28, स्वीकृत राशि 09 लाख 60 हजार रूपए, जिला दुर्ग में श्रमिकों की संख्या 340, स्वीकृत राशि 79 लाख 20 हजार, जिला राजनांदगांव श्रमिकों की संख्या 976, स्वीकृत राशि 01 करोड़ 83 लाख 25 हजार रूपए, जिला बालोद में श्रमिकों की संख्या 200, स्वीकृत राशि 40 लाख 80 हजार एवं जिला कबीरधाम में श्रमिकों की संख्या 1326, स्वीकृत राशि 01 करोड़ 59 लाख 10 हजार रूपए शामिल है। इस तरह कुल 33 हजार 873 श्रमिकों एवं उनके परिजनों को लाभान्वित करने के लिए 14.47 करोड़ रूपए की मंजूरी दे दी गई है। यह राशि छत्तीसगढ़ भवन निर्माण एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा स्वीकृत की गई है। recent visitors 103

प्रकृति को सहेजने के आंदोलन का बनें हिस्सा, छत्तीसगढ़-मुख्यमंत्री साई ने किया ‘एक पेड़ महतारी के नाम’ महाभियान का शुभारंभ

रायपुर. पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अभिनव पहल पर ‘‘एक पेड़ मां के नाम’’ का अनुसरण करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ में ‘‘एक पेड़ महतारी के नाम’’ महाअभियान की शुरूआत की। उन्होंने इस मौके पर आम नगारिकों से प्रकृति को सहेजने के इस महती आंदोलन का हिस्सा बनने की अपील की। मुख्यमंत्री ने एक पेड़ महतारी के नाम रथ को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में वाणिज्य उद्योग एवं श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री निवास परिसर में अभियान की शुरूआत करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने 94.3 माय एफ एम को बधाई देते हुए कहा कि वह इस अभिनव पहल को जन-जन तक पहुंचाने के लिए ‘‘एक पेड़ महतारी के नाम’’ अभियान की शुरूआत कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ महतारी को हरियर बनाने के लिए माय एफ एम की पहल के साथ राज्य के आमजनों को अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी इस अभियान से जुड़े और एक पेड़ जरूर लगाएं। हमारी मातृशक्ति देवियों की पुण्य भूमि दंतेवाड़ा, रतनपुर, डोंगरगढ़, चंद्रपुर तथा कुदरगढ़ में भी हम मातृशक्ति की वंदना करते हुए पेड़ लगाएंगे। आप सभी प्रकृति को सहेजने के इस महती आंदोलन का हिस्सा बनें। आप सभी का यह प्रयास मिल का पत्थर साबित होगा। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर स्कूली बच्चों को विभिन्न किस्मों के पौधों के बीज भी वितरित किए और उन्हें वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित किया। recent visitors 97

पुलों के दोनों ओर अस्थाई बैरियर-रिफ्लेक्टर और साइन-बोर्ड लगाएं, छत्तीसगढ़-लोक निर्माण विभाग ने दिए निर्देश

रायपुर. राज्य शासन के लोक निर्माण विभाग ने नदियों पर बने पुलों के दोनों ओर अस्थाई बैरियर, रिफ्लेक्टर और साइन-बोर्ड लगाने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने मैदानी अधिकारियों को क्षतिग्रस्त पुलों की रेलिंग एवं क्रैश बैरियर का निरीक्षण कर आवश्यक सुधार कार्य कराने को कहा है। उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव के निर्देश पर प्रमुख अभियंता ने वर्षा ऋतु में अतिवृष्टि से जान-माल की सुरक्षा और सुरक्षित यातायात के लिए सभी परिक्षेत्रों के मुख्य अभियंताओं, सभी मंडलों के अधीक्षण अभियंताओं एवं संभागीय कार्यपालन अभियंताओं को परिपत्र जारी किया है। उन्होंने सभी अधीक्षण अभियंताओं को हर 15 दिनों में अनुविभागीय अधिकारियों और कार्यपालन अभियंताओं के साथ इस संबंध में की गई व्यवस्थाओं की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री के.के. पीपरी ने परिपत्र में निर्देशित किया है कि ऐसे सभी स्थानों और मार्गों जिनमें वर्षा ऋतु में आम जनता के लिए समस्या की स्थिति उत्पन्न होती है, उन पर विशेष ध्यान दिया जाए। बारिश के दिनों में अतिवृष्टि से मार्गों पर विद्यमान नदी-नालों पर बाढ़ एवं कई स्थानों में सड़क डूबने जैसी स्थिति निर्मित होती है। इन स्थितियों में जान एवं माल की सुरक्षा तथा कार्यस्थलों पर सुरक्षित कार्य के लिए समुचित व्यवस्था किया जाना सुनिश्चित करें। उन्होंने ऐसे सभी स्थानों को चिन्हांकित करने के निर्देश दिए हैं जहां वर्षा ऋतु के दौरान मार्ग एवं पुल के डूबने की स्थिति निर्मित होती है। प्रमुख अभियंता ने सभी जलमग्नी पुलों के दोनों ओर अस्थाई बैरियर, रिफ्लेक्टर और साइन-बोर्ड की व्यवस्था के निर्देश दिए हैं जिससे बाढ़ या पुल के जलमग्न होने की स्थिति में यातायात को बंद किया जा सके। जलमग्न होने वाले स्थानों के दोनों ओर आवश्यक सूचना पटल लगाकर राहगीरों को सूचित किया जाए कि मार्ग जलमग्न हो सकता है। जलमग्न होने की स्थिति में रूके। उन्होंने सभी क्षतिग्रस्त पुलों की रेलिंग एवं क्रैश बैरियर का निरीक्षण कर आवश्यक सुधार कार्य के लिए भी अधिकारियों को निर्देशित किया है। विभाग द्वारा जारी परिपत्र में अतिवृष्टि वाले क्षेत्रों की लगातार समीक्षा करने तथा बाढ़ नियंत्रण के लिए टीम गठित करने को कहा गया है। जलमग्न होने की स्थिति में टीम चौबीसों घंटे काम करेगी। विभाग के कार्यपालन अभियंताओं को अतिवृष्टि की स्थिति में जिले में गठित बाढ़ नियंत्रण प्रकोष्ठ के लगातार संपर्क में रहने को कहा गया है। बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने पर कार्यपालन अभियंता अपने अधीनस्थों के साथ तत्काल तत्परता से कार्यवाही करेंगे। प्रमुख अभियंता ने डूबान क्षेत्र में आने वाले सड़कों के आसपास संधारण के लिए पर्याप्त मटेरियल की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए हैं, ताकि मार्ग क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में तत्काल सुधार किया जा सके। लोक निर्माण विभाग ने निर्माणाधीन और चौड़ीकरण के प्रगतिरत कार्यों वाले मार्गों में भी सभी आवश्यक सावधानी सूचक चिन्ह, रिफ्लेक्टिव साइन-बोर्ड, सेफ्टी रिबन्स, गार्ड स्टोन्स, चूना पोताई हुई बोरियाँ आदि की हर समय उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। निर्माणाधीन पुल-पुलियों में किसी प्रकार की दुर्घटना की स्थिति उत्पन्न न हो, इसका भी ध्यान रखने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं। वर्षा ऋतु में किसी भी अप्रिय स्थित से बचने सभी शासकीय भवनों का सावधानीपूर्वक निरीक्षण करने कहा गया है। विभाग ने सभी संवेदनशील स्थानों तथा मार्गों के किलोमीटरों पर सतत व चैतन्य दृष्टि रखने के लिए उप अभियंताओं और अनुविभागीय अधिकारियों की नामजद ड्यूटी लगाकर प्रमुख अभियंता कार्यालय तथा राज्य शासन को अवगत कराने को कहा है। recent visitors 110

डॉक्टर रेप-मर्डर केस में बड़ा ऐक्शन, CM ममता को झटका, कलकत्ता हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए

कोलकाता  कोलकाता हाई कोर्ट ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक महिला डॉक्टर के रेप और मर्डर मामले में CBI जांच के आदेश दिए हैं। यह फैसला देशभर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बाद आया है। हाईकोर्ट ने पुलिस को मामले से जुड़े सभी दस्तावेज तुरंत CBI को सौंपने को कहा है। दरअसल शुक्रवार सुबह आरजी कर अस्पताल के एक सेमिनार हॉल में एक पोस्टग्रेजुएट ट्रेनी डॉक्टर का शव मिला था। बताया जा रहा है कि उसके साथ रेप के बाद हत्या कर दी गई थी। इस मामले में शनिवार को एक सिविक वॉलंटियर को गिरफ्तार किया गया था। हाईकोर्ट ने जताई चिंता इससे पहले दिन में हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को दोपहर 1 बजे तक मामले की केस डायरी पेश करने का निर्देश दिया था। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने अस्पताल प्रशासन की ओर से मामले को संभालने के तरीके पर गंभीर चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि अस्पताल प्रशासन की तरफ से कई खामियां रही हैं। अस्पताल प्रशासन को ही मामला दर्ज कराना चाहिए था। पीड़िता के मा-बाप पहुंचे कोर्ट ट्रेनी डॉक्टर के माता-पिता ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने मामले की अदालत की निगरानी में जांच की मांग की थी। इसके अलावा कई अन्य जनहित याचिकाएं (PIL) भी दायर की गई थीं, जिनमें CBI जांच की मांग की गई थी। देशभर में विरोध-प्रदर्शन इस घटना के विरोध में देशभर के सरकारी अस्पतालों के रेजिडेंट डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन किया। पश्चिम बंगाल और दिल्ली में रेजिडेंट डॉक्टरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी, जिससे OPD सेवाएं और गैर-आपातकालीन सर्जरी प्रभावित हुई हैं। यह हड़ताल फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (FORDA) के आह्वान पर शुरू हुई थी। FORDA ने कहा है कि जब तक न्याय नहीं मिलता और हमारी मांगें पूरी नहीं होतीं, हड़ताल खत्म नहीं होगी। कोर्ट ने क्या कहा? इससे पहले याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवज्ञानम और न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने पाया कि जांच में कुछ कमी है। खंडपीठ ने पूछा कि क्या मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन प्रधानाचार्य संदीप घोष का बयान दर्ज किया गया था, जिस पर राज्य सरकार की तरफ से पेश वकील ने ‘ना’ में जवाब दिया। यह सवाल करते हुए कि आरजी कर अस्पताल के प्रधानाचार्य पद से इस्तीफा देने वाले घोष को कुछ ही घंटों के भीतर कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के प्रधानाचार्य के रूप में कैसे बहाल कर दिया गया। पुलिस के रवैये पर उठे सवाल वकील बिल्वदल भट्टाचार्य के मुताबिक एफआईआर में देरी और उसके बाद किसी को गिरफ्तार करना, यह बताने के लिए पर्याप्त था कि पुलिस का रवैया कितना लापरवाह था. हम अदालत के आभारी हैं कि मामला अब सीबीआई को सौंप दिया गया है न्यायालय द्वारा निगरानी की जाएगी. अब कोर्ट ने सीबीआई को समय-समय पर रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया है. यदि मृत लड़की के माता-पिता को खतरा महसूस होता है, तो सीबीआई को गवाह सुरक्षा योजना के तहत उन्हें सुरक्षा देने के लिए हमेशा सभी आवश्यक कदम उठाने चाहिए. बता दें कि कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में लेडी डॉक्टर से रेप और मर्डर केस के बाद जहां देशभर में चिकित्सकों में आक्रोश है तो वहीं इस घटना के बाद एक बार फिर महिला सुरक्षा जैसे मामलों में पुलिसिया चूक को लेकर सवाल उठने लगे हैं. दुष्कर्म और हत्या के इस केस में कई खुलासे हुए हैं. वहीं, कोलकाता में रेप और मर्डर का शिकार हुई लेडी डॉक्टर के परिजनों को पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट सौंप दी है. क्या है पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में? इस रिपोर्ट में हत्या, मौत से पहले की प्रकृति और सेक्सुअल पेनेट्रेशन की बात की कही गई है. इसमें बताया गया है कि पीड़िता की हत्या गला घोंटकर हुई थी. उससे पहले उसके साथ बलात्कार हुआ था. आरोपी ने दो बार उसका गला घोंटा था. उसकी मौत सुबह 3 से 5 बजे के बीच हुई थी. पुलिस की गिरफ्त में आरोपी आरोपी भी गिरफ्त में है वहीं, पुलिस सूत्रों का कहना है कि आरोपी अपराधी संजय रॉय शराब पीते हुए अश्लील फिल्में देखने का आदी था. वारदात वाली रात वो अस्पताल के अंदर कई बार आया गया था. आरोपी से पूछताछ, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कई सनसनीखेज बातें सामने आई हैं. पुलिस पूछताछ और सीसीटीवी फुटेज के जरिए इस पूरे मामले की टाइमलाइन सामने आई है, साथ ही यह भी कि अब तक जांच किस नतीजे पर पहुंची है. 8-9 अगस्त के रात की है वारदात ये खौफनाक वारदात 8-9 अगस्त की रात की है, जब कोलकाता के 'राधा गोबिंद कर मेडिकल कॉलेज से ट्रेनी डॉक्टर की लाश मिली थी. इस डॉक्टर की उम्र 31 वर्ष थी, जो उस दिन तीन और डॉक्टर्स के साथ नाइट ड्यूटी पर थी. इनमें दो डॉक्टर चेस्ट मेडिसिन डिपार्टमेंट थे, एक ट्रेनी थी. एक कर्मचारी अस्पताल के हाउस स्टाफ से था. उस रात को इन सभी डॉक्टर्स और कर्मचारियों ने साथ में खाना खाया था. पीछे के रास्ते अस्पताल सेमिनार हॉल में आया था आरोपी इसके बाद महिला डॉक्टर रात को करीब दो बजे सोने के लिए अस्पताल के सेमिनार हॉल में चली गई. इसके बाद संजय रॉय पीछे के रास्ते से इस सेमिनार हॉल में आया और पहले उसने इस लड़की की निर्ममता से हत्या की और फिर उसका रेप किया. सबसे बड़ी बात ये है कि ये आरोपी ना तो अस्पताल के स्टाफ से था, ना ही किसी मरीज का कोई रिश्तेदार था. वो कोलकाता पुलिस के लिए सिविक वांलटियर का काम करता था. आरोपी अस्पताल में था सिविक वालंटियर इस मेडिकल कॉलेज में जब कोई पुलिसकर्मी भर्ती होता, तो वो उसकी दवाइयां लाने के लिए और उसकी दूसरी मदद के लिए सहायक के तौर पर मौजूद रहता था. लेकिन जिस दिन ये घटना हुई, उस दिन आरोपी किसी काम से अस्पताल नहीं आया था. उस दिन ये अस्पताल के पीछे वाले हिस्से में शराब पीने के लिए आया और इसने शराब पीने के बाद अपने मोबाइल फोन पर अश्लील वीडियो देखे थे. फिर वारदात को अंजाम दिया. सुबह 4ः45 बजे सेमिनार हॉल से बाहर निकला आरोपी इसके बाद सुबह करीब 4.45 बजे उसे सेमिनार हॉल से बाहर निकले हुए … Read more

स्कूल की छत पर देखने पहुंचे थे पानी का भराव, राजस्थान-दौसा में एलडीसी की करंट से मौत

दौसा. जिले के बांदीकुई में राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल, भांवता में मंगलवार सुबह बिजली का करंट लगने से एक एलडीसी की मौत हो गई। गुस्साए ग्रामीणों ने शव साथ स्कूल में ही धरना दे दिया। ग्रामीणों का कहना था कि जब तक मौके पर उच्च अधिकारी नहीं पहुंचेंगे, वे शव को नहीं उठाएंगे। स्कूल की छत पर बरसात के पानी का भराव देखने गए एलडीसी मांगीलाल सैन की छत से गुजर रही 11 हजार केवी बिजली लाइन से करंट लगने के कारण मौत हो गई। बताया जा रहा है कि स्कूल की छत पर पानी भरा था, जिसे निकालने के लिए एलडीसी छत पर चढ़ा और करंट लगने से ये हादसा हो गया। मामला दौसा जिले के बांदीकुई के भांवता राजकीय स्कूल का है, जहां छत पर बनी नाली रुकने से बरसात का पानी भर गया था, जिसे खोलने के लिए यह कर्मचारी छत पर गया, जहां करंट लगने से कर्मचारी की मौत हो गई। बांदीकुई डिप्टी एसपी रोहिताश देवेंद्र ने बताया कि छत पर नजदीक से गुजर रही 11000 केवी की लाइन टच होने से यह कर्मचारी की मौत हो गई। इधर दुर्घटना की सूचना के बाद गांव में कोहराम मच गया और मौके पर सैकड़ों की संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई, ग्रामीण अब जिला कलेक्टर को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े हैं। मौके पर पुलिस और ग्रामीण के बीच वार्ता चल रही है, जहां ग्रामीण खबर लिखे जाने तक मांगीलाल के शव को स्कूल में लेकर बैठे हुए हैं। करौली में 380 मिमी बारिश बीते 24 घंटे के दौरान राजस्थान में भारी बारिश ने रिकॉर्ड कायम कर दिया. करौली में सबसे अधिक 380 मिमी बारिश दर्ज की गई. बारिश के कारण कई जगह आवागमन ठप हो गया है. तो कई सड़कें जलमग्न हो गईं. 10 साल बाद भरतरी पुलिया पर पानी आने से करीब 3 घंटा जयपुर-अलवर मार्ग बंद रहा, जिससे सैंकड़ों वाहनों की कतार लग गई. दौसा में भारी बारिश को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है. बाढ़ एवं आपदा नियंत्रण कक्ष की स्थापना के साथ हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं. कई रास्तों पर आवागमन ठप बारिश के कारण रणथंभौर त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग पर आवाजाही पर रोक लगा दी गई. रणथंभौर स्थित त्रिनेत्र गणेश मंदिर जाने वाले मार्ग को पूरी तरह से बंद कर दिया. ऐसे में अल सुबह त्रिनेत्र गणेश मंदिर जाने वाले करीब 100 श्रद्धालु वापस आते वक्त रास्ते में तेज पानी आने के कारण जंगल में ही फस गए. इसके बाद एसडीआरएफ की टीम को मौके पर बुलाया गया और पहाड़ी पर चढ़कर के जंगल के रास्ते कुछ लोगों को बाहर निकाला. सीएम शर्मा ने अधिकारियों के साथ की बैठक राज्य में भारी बारिश के अलर्ट और मौजूदा स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अधिकारियों के साथ बैठक की. इसके बाद सीएम शर्मा ने कहा कि आज मुख्यमंत्री कार्यालय में प्रदेश में हो रही भारी बारिश के संबंध में अधिकारियों की बैठक ली व आपदा प्रबंधन से संबंधित समस्त व्यवस्थाओं को अविलंब सुदृढ़ करने हेतु आवश्यक दिशा निर्देश दिए. उन्होंने जलाश्यों व जल भराव के क्षेत्रों से दूर रहने, बारिश में बिजली के पोल व बिजली के तारों से दूरी बनाए रखने, भवनों में बने बेसमेंट का उपयोग करने से बचने की सलाह दी है. recent visitors 87

आसाराम निकले जेल से बाहर, राजस्थान HC ने दी 7 दिन की पैरोल

जोधपुर यौन उत्पीड़न के मामले में जोधपुर सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम को राजस्थान हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. अदालत ने उपचार के लिए आसाराम की 7 दिन की पैरोल मंजूर की है. वह 1 सितंबर, 2013 से जेल में बंद है और अब करीब 11 साल बाद पैरोल पर बाहर आएगा. यह पहली बार है जब आसाराम की पैरोल मंजूर हुई है. वह पुलिस कस्टडी में इलाज के लिए महाराष्ट्र जाएगा. राजस्थान हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी की खंडपीठ ने उसकी अंतरिम पैरोल को मंजूर दी. आसाराम की कुछ दिन पहले अचानक तबीयत बिगड़ गई थी. उसने सीने में दर्द की शिकायत की थी, जिसके बाद जेल प्रशासन ने उसे जोधपुर एम्स में भर्ती कराया था. यहां मेडिकल चेकअप के बाद उसे इलाज के लिए भर्ती कर लिया गया था. वह 10 अगस्त से जोधपुर एम्स में भर्ती है. आसाराम की तबीयत खराब होने और जोधपुर एम्स में भर्ती होने की खबर सार्वजनिक होते ही, अस्पताल के बाहर उसके समर्थकों की भीड़ लग गई थी. आसाराम को 2018 में जोधपुर की एक विशेष POCSO अदालत ने नाबालिग के साथ बलात्कार का दोषी ठहराया था और आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. आसाराम 2 सितंबर 2013 से जेल में है. लड़की ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि 15 अगस्त, 2013 की रात आसाराम ने उसे जोधपुर के पास मणाई स्थित अपने आश्रम में बुलाया और उसके साथ बलात्कार किया. पांच साल से अधिक समय तक चले ट्रायल के बाद पॉक्सो अदालत ने आसाराम को दोषी ठहराया था और आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. पिछले साल, गुजरात की एक अदालत ने आसाराम को 2013 में अपने सूरत आश्रम में एक महिला अनुयायी के साथ कई मौकों पर बलात्कार करने के लिए दोषी ठहराया था. आसाराम ने की थी सजा निलंबित करने की मांग इससे पहले भी 85 वर्षीय आसाराम ने बीमारी का हवाला देकर कई बार पैरोल की मांग की थी. गत 20 जून को उसने अदालत से 20 दिन की पैरोल की मांगी थी, लेकिन तब पैरोल कमेटी ने उसे राहत देने से इनकार कर दिया था. आसाराम ने मेडिकल ग्राउंड पर अपनी सजा निलंबित करने की मांग को लेकर राजस्थान हाई कोर्ट में भी एक याचिका दाखिल की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था. हाई कोर्ट के फैसले को आसाराम ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. इस साल मार्च में शीर्ष अदालत ने राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह उपचार की अनुमति मांगने के लिए राजस्थान उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है. आसाराम का बेटा नारायण साईं भी जेल में है बंद बता दें कि आसाराम का बेटे नारायण साईं भी रेप केस में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है. सूरत की रहने वाली एक महिला ने उस पर 2002 से 2005 के बीच शोषण और बार-बार बलात्कार करने का आरोप लगाते हुए जहांगीरपुरा पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई थी. वह दो महीने तक गिरफ्तारी से बचता रहा और 4 दिसंबर 2013 को दिल्ली-हरियाणा सीमा पर दिल्ली, गुजरात, पंजाब और हरियाणा पुलिस के संयुक्त अभियान में गिरफ्तार हुआ. सूरत की एक अदालत ने 26 अप्रैल 2019 को, नारायण साईं को बलात्कार, अप्राकृतिक यौन संबंध, हमला, आपराधिक धमकी और साजिश रचने का दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी.   recent visitors 78

बांग्लादेश की पूर्व PM शेख हसीना के खिलाफ किराना मालिक की हत्या का केस दर्ज

ढाका बांग्लादेश में शेख हसीना के खिलाफ केस दर्ज होने की शुरुआत हो गई है. हालांकि, उनके खिलाफ अभी एक किराना दुकानदार की हत्या का मामला दर्ज किया गया है. दरअसल, 19 जुलाई को बांग्लादेश की राजधानी ढाका के मोहम्मदपुर इलाके में पुलिस ने फायरिंग की थी. ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक गोलीबारी में मोहम्मदपुर के किराना दुकान मालिक अबू सईद की मौत हो गई थी. इस मामले में ही अब बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना को आरोपी बनाया गया है. शेख हसीना के अलावा इस केस में 6 अन्य आरोपी भी हैं. शेख हसीना की पार्टी के लीडर भी आरोपी पूर्व पीएम के अलावा शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग के महासचिव ओबैदुल कादर, पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल, पूर्व पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) चौधरी अब्दुल्ला अल मामून, डिटेक्टिव ब्रांच के पूर्व चीफ हारुनोर रशीद, डीएमपी पुलिस के पूर्व आयुक्त हबीबुर रहमान के साथ पूर्व डीएमपी संयुक्त आयुक्त बिप्लब कुमार सरकार को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया है. सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भी केस सिर्फ शेख हसीना और उनकी पार्टी के लोग ही नहीं, बल्कि पुलिस के कई अधिकारियों के अलावा सरकारी अधिकारी भी इस हत्या के मामले में आरोपी हैं. मर्डर केस का मुकदमा मोहम्मदपुर निवासी आमिर हमजा शातिल ने ढाका मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट राजेश चौधरी की अदालत में दर्ज कराया है. आरक्षण विरोधी आंदोलन पर की थी गोलीबारी हत्या से जुड़ा यह मामला आरक्षण के खिलाफ बांग्लादेश में हुए आरक्षण से जुड़ा है. दरअसल, 19 जुलाई को बांग्लादेश की राजधानी ढाका के बोसिला इलाके में आरक्षण के खिलाफ आंदोलन किया जा रहा था. आंदोलन समर्थक इस दौरान एक विशाल जुलूस निकाल रहे थे. इस जुलूस पर पुलिस ने गोलीबारी की थी, जिसमें अबू सईद की मौत हो गई थी. इस मामले में ही शेख हसीना सहित तमाम सरकारी अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है. बांग्लादेश में कैसे हुई आंदोलन की शुरुआत? बता दें कि बांग्लादेश की सरकारी नौकरियों में उन लोगों के परिवार को आरक्षण मिलता था, जिन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ आजादी की लड़ाई में भूमिका निभाई है. इस कोटे के खिलाफ ही वहां उग्र प्रदर्शन शुरू हो गए. शेख हसीना ने रणनीति और बल दोनों से इस आंदोलन को रोकने की कोशिश की, लेकिन उनके दोनों ही प्रयास विफल रहे. आखिर में उन्होंने प्रदर्शनकारियों की सभी मांगे मान लीं, लेकिन प्रदर्शनकारी उनके इस्तीफे पर अड़ गए. प्रदर्शनकारियों की मांग मानते हुए शेख हसीना इस्तीफा देकर चुपचाप भारत चली आईं, तब से लेकर अब तक वह भारत में ही हैं. 5 अगस्त को हसीना सरकार के पतन के बाद देश भर में भड़की हिंसा की घटनाओं में बांग्लादेश में 230 से अधिक लोग मारे गए, जिससे जुलाई के मध्य में आरक्षण विरोधी प्रदर्शनों के शुरू होने के बाद से मरने वालों की संख्या 560 हो गई. हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के पतन के बाद एक अंतरिम सरकार का गठन किया गया और इसके मुख्य सलाहकार, 84 वर्षीय नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने पिछले सप्ताह अपने 16 सदस्यीय सलाहकार परिषद के विभागों की घोषणा की. द डेली स्टार अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को अवामी लीग की कट्टर प्रतिद्वंद्वी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सहित सात राजनीतिक दलों ने यूनुस से अलग-अलग मुलाकात की और कहा कि अंतरिम सरकार स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए अनुकूल माहौल बनाने के लिए आवश्यक समय ले सकती है. रिपोर्ट में बीएनपी महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर के हवाले से कहा गया है कि हमने इस अंतरिम सरकार को चुनाव कराने के लिए उचित माहौल बनाने के लिए आवश्यक समय दिया है. उन्होंने कहा कि उन्होंने चुनाव पर चर्चा नहीं की और बीएनपी ने अगले चुनाव कराने के लिए कोई विशिष्ट समय सीमा का उल्लेख नहीं किया. उन्होंने कहा कि बीएनपी अंतरिम सरकार की सभी गतिविधियों को अपना पूरा समर्थन दे रही है. सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि पार्टी ने यूनुस से पार्टी अध्यक्ष खालिदा जिया और कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान सहित अपने नेताओं के खिलाफ सभी मामलों को वापस लेने का आग्रह किया. हसीना के निष्कासन के बाद 79 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री जिया को जेल से रिहा कर दिया गया था. उन्हें 2018 में भ्रष्टाचार के लिए 17 साल जेल की सजा सुनाई गई थी.   recent visitors 94