इन्वेस्ट मध्यप्रदेश बैंगलुरू में लगभग 3200 करोड़ के निवेश प्रस्ताव हुए प्राप्त

मध्यप्रदेश में किये गये निवेश का मिलेगा बेहतर रिटर्न : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश में सभी सेक्टरों में समान रूप से हो रही है प्रगति मध्यप्रदेश कर रहा है उद्योग और निवेश के लिए उद्योगपतियों को आमंत्रित उद्यमियों और उद्योगों को प्रोत्साहन-सहायता और मार्गदर्शन उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता प्रदेश में निवेश के अवसरों, प्रचुर संसाधनों, कुशल कार्यबल और अनुकूल औद्योगिक वातावरण पर हुए प्रेजेंटेशन आई.ई.एस.ए., टाई ग्लोबल, इलेक्ट्रॉनिक इंडस्ट्रीज एसोसिएशन और एजीआई के साथ हुए एमओयू मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बेंगलुरु में आयोजित इन्वेस्टमेंट अर्पोच्यूनिटीज इन मध्यप्रदेश के इन्टरैक्टिव सेशन में उद्योगपतियों को किया संबोधित इन्वेस्ट मध्यप्रदेश बैंगलुरू में लगभग 3200 करोड़ के निवेश प्रस्ताव हुए प्राप्त भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अपनी उद्यमशीलता, परिश्रम, व्यवस्थित कार्य पद्धति और मानव मूल्यों को समाहित करते हुए सबको साथ लेकर चलने की क्षमता के परिणाम स्वरुप ही, भारत विश्व में सदियों से सोने की चिड़िया के रूप में विख्यात रहा है। विश्व में हमारी यह पहचान भारत की उद्यमशीलता, बौद्धिकता, कल्पनाशीलता और व्यावसायिक निपुणता की परिचायक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उपलब्ध संसाधनों और बौद्धिक क्षमता के बल पर देश को विश्व की पहली 5 अर्थव्यवस्थाओं में स्थान दिलाया है, यह प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और विजन का परिणाम है। इस उपलब्धि में उद्योगपतियों का भी विशेष योगदान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बेंगलुरु में आयोजित इन्वेस्ट मध्यप्रदेश : इन्टरेक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अर्पोच्यूनिटीज इन मध्यप्रदेश के संवाद-सत्र को संबोधित कर रहे थे। "एडवांटेज एमपी" फिल्म का हुआ प्रदर्शन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैंगलुरू में इन्वेस्ट मध्यप्रदेश के दूसरे दिन इन्टरैक्टिव सेशन का दीप प्रज्जवल और तुलसी के पौधे में जल अर्पित कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर मणिपाल समूह के अध्यक्ष मोहनदास पाई, ग्रीनको ग्रुप के अध्यक्ष अनिल चलमाशेट्टी, लैप इंडिया के मुख्य परिचालन एवं प्रौद्योगिकी अधिकारी डॉ. शिववेंकट रमानी साथ थे। मध्य प्रदेश सीआईआई के उपाध्यक्ष एवं प्रबंध संचालक इन्फ़ोबींस लिमिटेड सिद्धार्थ सेठी ने मध्य प्रदेश में निवेश के अवसरों और उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण पर प्रकाश डाला। उद्योगपतियों को राज्य में उद्योग स्थापित करने के लिए निवेश की सुविधाओं की जानकारी देती फिल्म-"एडवांटेज-एमपी" का प्रदर्शन किया गया। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश, प्रगति पथ पर है अग्रसर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बदलते परिदृश्य में देश के सम्मुख अनुकूल अवसर होने के साथ चुनौतियां भी विद्यमान हैं। अपनी क्षमताओं के आधार पर यह विश्वास है कि हमारा भविष्य उज्ज्वल है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में तीसरी बार बनी केन्द्र सरकार के मार्गदर्शन में देश प्रगति के पथ पर निरंतर अग्रसर है। उचित मार्गदर्शन, अद्यतन तकनीक के उपयोग, आगे बढ़ने की इच्छा शक्ति, लगन और परिश्रम के साथ नवीन अनुसंधान की परंपरा के बल पर भारत औद्योगिक केंद्र के रूप में विश्व में अपना स्थान बना रहा है। देश में आरंभ नवीन स्टार्ट-अप भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सभी को प्रोत्साहन और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना भारत की रही है परंपरा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत में पुरुषार्थ और पराक्रम की परंपरा रही है। शासन व्यवस्था द्वारा सभी को प्रोत्साहन और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने की परंपरा के निर्वहन के प्रतीक स्वरूप ही विक्रम संवत की शुरूआत हुई। भारतीय परंपरा में शासन का स्वरूप सहायता प्रदान करने का रहा है, जो जिस क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहता है उसे मदद उपलब्ध कराने से ही उद्यमशीलता आरंभ होती है और व्यक्ति की क्षमता-दक्षता और परिश्रम का लाभ संपूर्ण समाज को मिलता है। भारत में विद्यमान इस व्यवस्था के परिणाम स्वरुप ही भारतीय संस्कृति का विश्व में सदैव मान- सम्मान रहा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा जो उद्यमी और उद्योग जिस क्षेत्र में आगे बढ़ने के इच्छुक हैं, उन्हें प्रोत्साहन स्वरूप उपयुक्त सहायता व मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके परिणाम स्वरूप प्रदेश में सभी सेक्टरों में समान रूप से प्रगति हुई है। सरकार व्यापार-व्यवसाय के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं करने के लिए तत्पर है। मध्यप्रदेश उद्योग और निवेश के लिए उद्योगपतियों को आमंत्रित कर रहा है। उद्योगपतियों द्वारा मध्यप्रदेश में किया गया निवेश निश्चित ही अधिकाधिक रिटर्न देगा। आईटी, ऊर्जा, पर्यटन, खाद्य प्र-संस्करण सहित सभी क्षेत्रों में है पर्याप्त संभावनाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश वर्तमान में सरप्लस एनर्जी स्टेट के रूप में जाना जाता है, ऊर्जा उत्पादन में 23% नवकरणीय ऊर्जा का योगदान है। आईटी, ऊर्जा के साथ ही पर्यटन में भी पर्याप्त संभावनाएं हैं। धार्मिक, स्वास्थ्य, पर्यटन के साथ ही शिक्षा, एमएसएमई, खाद्य प्र-संस्करण के क्षेत्र में पर्याप्त संभावनाएं हैं। कृषि में मध्यप्रदेश का सर्वाधिक ग्रोथ रेट रहा है। देश में गेहूँ के सर्वाधिक उपार्जन के साथ ही मध्यप्रदेश दलहन उत्पादन में भी अग्रणी है। इसके साथ ही उद्यानिकी क्षेत्र में भी प्रदेश ने अल्प समय में बहुत अधिक प्रगति की है। प्रदेश में सभी क्षेत्रों में उद्योग स्थापित करने की पर्याप्त संभावनाएं हैं। देश की 4 बड़ी कंपनियों के साथ हुए एमओयू मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में मध्यप्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड और इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (आईईएसए), टाई ग्लोबल, इलेक्ट्रॉनिक इंडस्टरीज एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (ईएलसीआईएनए)और एसोसिएशन ऑफजियो स्पेशियल इंडस्ट्रीज (एजीआई) के मध्य एमओयू पर हस्ताक्षर भी हुए। आईईएसए, देश में इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन और विनिर्माण क्षेत्र को समर्पित है। टाई ग्लोबल मिशन, सलाह नेटवर्किंग और शिक्षा के माध्यम से उद्यमिता को प्रोत्साहन देने के क्षेत्र में गत 29 वर्षों से विभिन्न देशों में सक्रिय है। इएलसीआईएनए, व्यापार विस्तार और तकनीकी विकास पर सूचना प्रसार को सक्षम करने के लिए वैश्विक तकनीकी संस्थानों और व्यापार सहायता संगठनों के साथ नेटवर्क निर्माण के क्षेत्र में कार्यरत है। एजीआई, उद्योगों को स्थानीय सामग्री और प्रौद्योगिकी के प्रयोग को प्रोत्साहित करने की दिशा में कार्यरत है। प्रदेश में 11 बड़ी कंपनियाँ 3 हजार करोड़ से अधिक का करेंगी निवेश बैंगलुरू में आयोजित इन्वेस्ट-मध्यप्रदेश के इंटरैक्टिव सेशन में आज मध्यप्रदेश को लगभग 3200 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। बैंगलुरू में 11 कंपनियों से प्रस्ताव मिले हैं। इन कंपनी में प्रमुख रूप से लेप इंडिया, एजीआई ग्लास पैक, कोका-कोला, पूर्वाषा ग्रुप, मेटेक्नो, थियगाराजन मिल्स, प्रिंट प्वाइंट फॉर्म पैकेजिंग, फीदरलाइट इंडिया, एसआरवी नीट टेक प्राइवेट लिमिटेड, केनेस टेक्नोलॉजी और एसके मिल्स शामिल है। इन कंपनियों द्वारा इलेक्ट्रिकल, मैन्युफैक्चरिंग, फूड प्रोसेसिंग, मेटल सेक्टर, टेक्सटाइल, पैकेजिंग एवं आईटी इत्यादि सेक्टर में निवेश किया जाएगा। इन कंपनियों के … Read more

हस्तशिल्प एवं हाथकरघा उत्पादों के प्रचार-प्रसार के लिये देश के सभी प्रमुख शहरों में मृगनयनी एम्पोरियम की शाखाएं स्थापित की जाएं‍- मंत्री दिलीप जायसवाल

भोपाल कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल ने कहा है कि प्रदेश की स्थानीय कलाकृतियों, हस्तशिल्प एवं हाथकरघा उत्पादों के प्रचार-प्रसार के लिये देश के सभी प्रमुख शहरों में मृगनयनी एम्पोरियम की शाखाएं स्थापित की जाएं‍। इसके लिये हर स्तर पर प्रभावी कार्यवाही की जाये‍‍। राज्य मंत्री जायसवाल गुरूवार को मंत्रालय में विभागीय योजनाओं की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विभाग के सभी उत्पादों का उत्पादन एवं उनकी गुणवत्ता बढ़ाने और इन्हें आकर्षक तरीके से पैकेजिंग कर बेचने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि कारीगरों के कौशल उन्नयन कार्य में भी और प्रगति लाई जाये और अधिकाधिक कारीगरों को प्रशिक्षित किया जाए। बैठक में प्रमुख सचिव, कुटीर एवं ग्रामोद्योग अमित राठौर, सचिव, खादी व ग्रामोद्योग विकास बोर्ड माल सिंह, आयुक्त रेशम मदन विभीषण नागरगोजे, मप्र संत रविदास हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम के प्रबंध संचालक तथा आयुक्त, हस्तशिल्प एवं हाथकरघा मोहित बुंदस, उप सचिव कुटीर एवं ग्रामोद्योग ऋषि गर्ग, अवर सचिव जी.एस. आर्य सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। हम रोजगार मांगने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें बैठक में राज्य मंत्री जायसवाल ने कहा कि कुटीर एवं ग्रामोद्योग जरूरतमंदों की आजीविका चलाने वाला विभाग है। इसलिये विभागीय उत्पादन गतिविधियों में और तेजी लाएं। हम रोजगार मांगने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें। उन्होंने सिंहस्थ-2028 में विभागीय उत्पादों के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं विक्रय के लिये अधिकारियों को अभी से कार्ययोजना बनाकर तैयारी प्रारंभ करने के निर्देश दिये। यह भी कहा कि महाकाल लोक परिसर में कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग का स्थायी स्टाल (आउटलेट) किया जाए। प्रमुख शहरों में मृगनयनी एम्पोरियम की शाखाएं खोलने के संबंध में बताया गया कि इसके लिये दूसरे प्रदेशों से समन्वय कर मृगनयनी की ब्रांच स्थापित करने के लिये ढोस चर्चा की जा रही है। बताया गया कि हर जिले में वन भारत साड़ी वॉकथान आयोजित किया गया था। इसमें प्रदेश की करीब एक लाख से अधिक महिलाओं ने भागीदारी की। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा विगत 17 सितम्बर 2023 को प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना प्रारंभ की गई। योजना में अपने हाथों और औजारों से काम करने वाले कारीगरों एवं शिल्पकारों को हर प्रकार की सहायता दी जाएगी। योजना में 18 प्रकार के परंपरागत व्यवसायों जैसे बढ़ई, नाव निर्माता, कवच निर्माता, लोहार, हथौड़ा और टूल किट निर्माता, ताला बनाने वाले, सुनार, कुम्हार, मूर्तिकार (मूर्तिकार व पत्थर तराशने वाले), पत्थर तोड़ने वाले, मोची (चर्मकार)/जूते बनाने वाले, राज-मिस्त्री, टोकरी/चटाई/झाड़ू निर्माता/कॉयर बुनकर, गुड़िया और खिलौने निर्माता (पारम्परिक), नाई, माला निर्माता, धोबी, दर्जी और मछली पकड़ने के जाल बनाने वाले कारीगरों को शामिल किया गया है। बैठक में बताया गया कि मूलत: सू्क्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) विभाग की इस योजना के सफल क्रियान्वयन के लिये कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग “ट्रेनिंग पार्टनर” के रूप में कार्य करेगा। पीएम विश्वकर्मा प्रमाण-पत्र एवं आईडी कार्ड के जरिये कारीगरों और शिल्पकारों का पात्रता पंजीयन कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग करेगा। पात्र कारीगरों को 5 से 7 दिनों का बुनियादी प्रशिक्षण और 15 दिन या इससे अधिक दिनों का उन्नत प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान 500 रूपये प्रतिदिन की दर से शिष्यवृत्ति (Styfund) भी दी जाएगी। बुनियादी कौशल प्रशिक्षण में ई-वाऊचर के रूप में 15 हजार रूपये तक का टूलकिट प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। कारीगरों एवं शिल्पकारों को व्यवसाय/दुकान/आऊटलेट स्थापित करने के लिये बैंक लिंकेज व पात्रतानुसार लोन लिंकेज भी दिया जाएगा। योजना में 18 प्रकार के परम्परागत कामों में लगे कारीगरों एवं शिल्पकारों को विधिवत् प्रशिक्षण दे कर इनके उत्पादों को बाजार तक पहुँचाने के लिये मार्केटिंग की जिम्मेदारी भी कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग निभायेगा। बैठक में राज्यमंत्री जायसवाल ने योजना में कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग के दायित्वों का सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की लक्ष्य पूर्ति (प्रशिक्षण आदि) पर तेजी से काम किया जाए। योजना को लक्षित वर्ग के हितग्राहियों तक पहुँचाने तथा कारीगरों एवं शिल्पकारों के उत्पादों को बाजार मुहैया कराने के लिये हर स्तर पर इनकी मार्केटिंग भी की जाये। रेशम व खादी वस्त्रों का उत्पादन बढ़ाने के लिये भी हर जरूरी कदम उठाये जायें। बैठक में खादी ग्रामोद्योग विकास बोर्ड के सचिव द्वारा बताया गया कि रेशम संचालनालय द्वारा बुरहानपुर जिले के शासकीय रेशम केन्द्र जैनाबाद में उच्च कोटि के रेशम कीट (मलबरी) का उत्पादन किया जा रहा है। यहां खादी उत्पादन केन्द्र भी प्रारंभ करने के लिये बोर्ड द्वारा ठोस कार्यवाही की जा रही है। आयुक्त हाथकरघा ने बताया कि हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम द्वारा ग्रामीण हाट उज्जैन में 30 महिलाओं को भगवान के वस्त्र निर्माण करने के लिये एक माह का प्रशिक्षण दिया गया है। उज्जैन में ही पत्थर शिल्प के शिल्पियों का प्रशिक्षण सत्र 5 अगस्त से प्रारंभ कर दिया गया है। प्रदेश के अन्य क्राफ्ट क्लस्टर में धातु, पत्थर एवं लकड़ी की मूर्ति निर्माताओं को प्रशिक्षण एवं विपणन सहायता दी जा रही है। विभाग द्वारा गुणवत्ता प्रमाणन, ब्राडिंग, विज्ञापन, प्रचार-प्रसार और अन्य गतिविधियों के रूप में बुनकरों एवं कारीगरों को मार्केट सपोर्ट भी दिया जा रहा है।   recent visitors 123

आर्ता: पुत्रवत आचारेत अर्थात-रोगी से पुत्र के समान व्यवहार करने सहित अनेक सिद्धांतों के प्रतिपादक महर्षि चरक के सिद्धांत आज भी हैं प्रासंगिक : मंत्री इन्दर सिंह परमार

आर्ता: पुत्रवत आचारेत अर्थात-रोगी से पुत्र के समान व्यवहार करने सहित अनेक सिद्धांतों के प्रतिपादक महर्षि चरक के सिद्धांत आज भी हैं प्रासंगिक · मंत्री इन्दर सिंह परमार भोपाल चरक जयंती श्रावण शुक्ल नाग पंचमी 2081 संवत इस बार 9 अगस्त 2024 को है। ईसा से लगभग 200 वर्ष पूर्व चिकित्सा ग्रंथ लुप्त हो गए थे । यह पूरे भारतीय जनमानस और विश्व के लोगों के लिए अत्यंत ही संकट का दौर था। जब सारी मानवता त्राहि-त्राहि करने लगी जब सारी धरती के लोग कष्ट से मरने लगे। जब समाज अकाल मृत्यु को प्राप्त होने लगा जैसा कि भगवान ने श्रीमद्भगवद्गीता में प्रतिज्ञा की, जब-जब धर्म की हानि होगी तब तब मैं आऊंगा। जब जब अधर्म रूपी रोगों का साम्राज्य होगा। पाप का साम्राज्य होगा तब- तब मैं प्रकट होउंगा। तब भगवान शेषनाग स्वयं इस धरती पर विचरण करते हुए आये और उन्होंने देखा कि जनता कितने कष्ट में है कितनी दुखी है। उनका हृदय द्रवित हो गया, करुणा से भर उठे और उन्होंने कपिष्ठल नामक गाँव जो कश्मीर में पुंछ के पास स्थित गांव है, वहां पर वेद वेदांग नामक एक वैदिक ब्राह्मण के घर में श्रावण शुक्ल नाग पंचमी के दिन जन्म लिया। शेषनाग का पूज्य दिवस अवतरण दिवस श्वेत वाराह पुराण में स्वयं ब्रह्मदेव ने नाग पंचमी का दिन बताया है। इस कारण से महर्षि चरक के जन्मदिन को हम श्रावण शुक्ल पंचमी नाग पंचमी मनाते हैं। महर्षि चरक ने वेद उपनिषदों का अध्ययन करने के उपरांत आयुर्वेद का अध्ययन प्रारंभ किया। उन्होंने महर्षि पुनर्वसु आत्रेय के द्वारा उपदिष्ट और आचार्य अग्निवेश के द्वारा प्रणीत लिखित ग्रंथ अग्निवेश तंत्र को खोजा। उसके छिन्न-भिन्न अंशों को सहेजा सम्हाल।जो बड़ी मुश्किल से उनको प्राप्त हुए और उस ग्रंथ को अग्निवेश तंत्र को जो कि पूर्ण नहीं था उस समय उसको धीरे-धीरे करके लेखन कार्य प्रारंभ किया। औषधियों का चयन करना, औषधियों के बारे में खोजना,उनका प्रयोग किया। इस प्रकार से चरक संहिता का वर्णन लिखना प्रारंभ किया। जिसमे मानव जीवन रोग चिकित्सा का वर्णन है। सबसे महत्व की बात चिकित्सा जगत में उन्होंने चिकित्सा सिद्धांत दिए। वह अपने आप में अप्रतिम कार्य था ।पूरी मानव सभ्यता, मानव समाज, पृथ्वी उनके उपकार कभी नहीं भूल सकती। ऐसे मनीषी का जन्म भगवान के तुल्य ऐसे सर्वश्रेष्ठ चिकित्सक का जन्मदिन मनाना हम चिकित्सकों का ही नहीं इस मानव जाति का परम कर्तव्य है। आभार प्रदर्शन है। यह धन्यवाद है ऐसे व्यक्ति के लिए जिन्होंने मानव समाज को इस पूरी धरती को रोगों के भय से दूर किया। चिकित्सा सिद्धांतों की स्थापना की। विश्व के प्रथम चिकित्सक शेषावतार महर्षि चरक का परिचय अथर्ववेद के उपवेद और पंचमवेद आयुर्वेद के आदि चिकित्सक महर्षि चरक को भगवान शेषनाग का अवतार माना जाता है। उनका जन्म ईसा से 200 वर्ष पूर्व कश्मीर में पुंछ के पास कपिष्ठल नामक गांव में हुआ था। श्वेत वाराह पुराण के अनुसार उनका जन्मदिन श्रावण शुक्लपक्ष नागपंचमी (इस बार 9 अगस्त 2024) को मनाया जाता है। उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर में भगवान शेषनाग के कपाट भी आज ही के दिन खोले जाते हैं। उन्होंने महाभारत काल के पश्चात खण्डित हो चुके कायचिकित्सा(मेडिसिन) के महान ग्रंथ अग्निवेश-तंत्र का प्रतिसंस्कार (पुनर्लेखन) कर चरक-संहिता रूपी कालजयी रचना प्रदान की। बौद्ध धर्म के नास्तिक दर्शन काल में अहिंसा के सिद्धांत के कारण राजव्यवस्था द्वारा वैदिक और शल्य क्रियाओं का निषेध कर दिया गया था। दूसरी तरफ बौद्ध धर्म के "स्वभावो परमवाद" के सिद्धांत की आड़ में (यानी शरीर तो स्वभाव से ही बनता बिगड़ता है इसलिए चिकित्सा की क्या आवश्यकता है ऐसा कहकर) वैद्यों के चिकित्सा कार्यों का विरोध किया जाता था। कहा जाता है कि बौद्ध सम्राट बिम्विसार को भी बवासीर की तकलीफ़ हुई थी, लेकिन अहिंसा के सिद्धांत के चलते उन्होंने शल्य चिकित्सा को अंगीकार नहीं किया। जिस पर आचार्य जीवक ने एक लेप बनाकर अर्श को ठीक किया था। सम्राट अशोक के बाद चिकित्सा कार्यों पर शासन द्वारा ऐसा प्रतिबंध करीब 50 वर्ष तक रहा, जिसे भारत के मेडिकल-इमरजेंसी का काल कहा जा सकता है। मान्यता है कि ऐसे कालखंड में अनन्त भगवान-शेष छद्म रूप में धरती पर विचरण करने आए। रोगों से पीड़ित मानवता को देखकर करुणावश उनका हृदय द्रवीभूत हो गया और उन्होंने वेद-वेदांग नामक ब्राह्मण के घर जन्म लिया। ऐसे समय में रोगों से पीड़ित मानवता की सेवा के लिए उन्होंने भारत भर में घूमते हुए चिकित्सा का कार्य और उसका प्रचार किया। इसी कारण "चरकात् चरक:" नित्यप्रति घूमने के कारण उनका नाम चरक पड़ा। उन्होंने "आर्ता: पुत्रवत आचारेत्" यानी रोगी से पुत्र के समान व्यवहार करने सहित अनेक सिद्धांतों का प्रतिपादन कर चिकित्सक समाज के लिए एक मिशाल कायम की। आचार्य चरक ने आज से 2150 वर्ष पूर्व चरक संहिता का लेखन किया था। चरक संहिता मूल रूप से अग्निवेश तंत्र का ही परिष्कृत ग्रंथ है।पुनर्वसु आत्रेय द्वारा उपदिष्ट सूत्रों को, महर्षि अग्निवेश ने अग्निवेश तंत्र में निबंध किया था। काल क्रम से वह ग्रंथ लुप्त हुआ तथा आयुर्वेद चिकित्सा के प्रति भी समाज में उपेक्षा हुई। जिसके कारण मानवता और सारा विश्व रोगों से ग्रस्त हुआ। आचार्य चरक ने ऐसे समय में जन्म लेकर और पूरे जीवन भर परिभ्रमण करते हुए चंक्रमण करते हुए, औषधीयों के माध्यम से रोगों की चिकित्सा की और इन चिकित्सा के प्रयोगों को उन्होंने चरक संहिता के ग्रंथ में स्थान दिया। चरक सूत्र स्थान के प्रारंभ में छः पदार्थों के महत्व को प्रतिपादित किया। सामान्य, विशेष, समवाय, द्रव्य, गुण एवं कर्म के महत्व को प्रतिपादित किया। दिनचर्या का व्याख्यान विस्तार से किया। ऋतु अनुसार हमें क्या भोजन करना चाहिए, कैसे भोजन करना चाहिए, किन दोषों का प्रकोप है कैसे समान है कौन सी व्याधि किस ऋतू में हो सकती हैं इन सब बातों को उन्होंने बताया। वेगों के धारण करने से क्या नुकसान होता है, क्या व्याधियों होती है, सिद्धांत प्रतिपादित महर्षि चरक ने किया। ऐसे विषय जो वैद्य के लिए अनिवार्य हैं ऐसे गुण ऐसे कर्म जो वैद्य को करनी चाहिए,गुण जो धारण करने चाहिए,उन सभी गुणों को आचार्य चरक ने बताया। पंचकर्म चिकित्सा पद्धति जो रोगों को मूल से समाप्त करने वाली है, उस का सिद्धांत प्रतिपादन स्थापित किया जो लुप्त हो चुका था। सर्वश्रेष्ठ औषधियों की गणना,स्रोतसो के बारे में विस्तार से वर्णन शरीर रचना के सिद्धांतों का … Read more

किसानों के लिए आफत बनी लगातार, सरकार से ये मांग खेतों से पानी निकासी का इंतजाम हो

भोपाल मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh)  में लगातार मूसलाधार बारिश से विदिशा जिले के किसानों की चिंता बढ़ने लगी है. कई किसानों के खेत तालाब बन गए हैं. जिससे उनकी फसलों को अब नुकसान का खतरा सता रहा है. वहीं धान की खेती करने वाले किसान लगाकर बारिश से बेफिक्र नजर आ रहे हैं. बारिश से गर्मी से तो राहत मिलती दिख रही है लेकिन किसानों की परेशानी बढ़ती हुई नजर आ रही है. सोयाबीन की फसल में हो सकता है बड़ा नुकसान सिंध नदी में पानी आ जाने के तहसील गंजबासोदा के ग्राम सिर्नोटा के साथ कई खेतो में पानी भर गया है. जिसमें किसानों की सोयाबीन की फसल खड़ी है. अब किसान कहते हैं अगर जल्दी खेतो में से पानी नहीं निकला तो पूरी फसल खराब हो जाएगी. दूसरे किसान बताते हैं सबसे अधिक नुकसान नदी के आसपास खेती करने वाले किसानों को है. नदी से सटे अधिकतर खेत तालाब बन गए हैं. और आगे पानी बढ़ ही रहा है, पानी कम होने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है. लगातार बारिश से धान की फसल को होगा फायदा धान की खेती करने वाले किसान बताते हैं, यह बारिश धान की फसल के लिए बहुत अच्छी है. धान की फसल में ज्यादा पानी की जरूरत होती है. यह बारिश धान की फसल के लिए वरदान साबित हो सकती है. जिले में धान के साथ बड़े रकबे में होती है सोयाबीन की खेती जिले भर के एक बड़े रकबे में धान की फसल के साथ सोयाबीन की खेती भी की जाती है. किसानों की माने तो हर साल किसानों को सोयाबीन की फसल के बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है. पिछले साल बारिश की कमी से फसल खराब हो गई थी. इस साल लगता है अत्यधिक बारिश से फसल खराब हो जाएगी. दोबारा रोपना होंगे पौधे ऐसे में प्रभावित किसानों को अब अपने खेतों में दोबारा धान के पौधों को रोपना पड़ेगा। अगर जल्दी खेतों से पानी निकासी का इंतजाम नहीं हुआ तो पौधे पूरी तरह से गल जाएंगे। जिले में भारी बारिश से जिन किसानों के खेतों में पानी भरा है उन्होंने प्रशासन से नुकसान का आकलन की मांग भी रखी है। धान का रकबा बढ़ा इस बार जिलेभर में कुल 1 लाख 55 हजार हेक्टेयर में खरीफ फसल की बोनी का लक्ष्य रखा है। इस साल धान का रकवा तो 45 हजार हेक्टेयर तय किया है, पर यह बढ़कर 55 हजार हेक्टेयर पर पहुंच गया है। क्योंकि जिले में धान का रकवा लगातार बढ़ रहा है। पहले बारिश नहीं होने की वजह से धान की रोपाई लेट हो गई और जब बारिश हुई और किसानों ने धान की रोपाई की तो अब लगातार हो रही बारिश उनके लिए आफत बन गई है। पानी की निकासी नहीं जिले में लगातार हो रही बारिश के कारण बड़ौदा क्षेत्र के बरखेड़ा, राधापुर, बड़ोदिया जिंसी, ठीकरिया, सोंईकलां क्षेत्र के बगडुआ में पानी की निकासी नहीं होने के चलते सैकड़ों बीघा धान की फसल में पानी भरा हुआ है। खेत तालाब की तरह लबालब हो रहे हैं। इसके अलावा कराहल क्षेत्र में तिल्ली, बाजरा के खेतों पानी भरने से फसलों में नुकसान हुआ है। recent visitors 89

उद्यमियों और उद्योगों को प्रोत्साहन-सहायता और मार्गदर्शन उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अपनी उद्यमशीलता, परिश्रम, व्यवस्थित कार्य पद्धति और मानव मूल्यों को समाहित करते हुए सबको साथ लेकर चलने की क्षमता के परिणाम स्वरुप ही, भारत विश्व में सदियों से सोने की चिड़िया के रूप में विख्यात रहा है। विश्व में हमारी यह पहचान भारत की उद्यमशीलता, बौद्धिकता, कल्पनाशीलता और व्यावसायिक निपुणता की परिचायक है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने उपलब्ध संसाधनों और बौद्धिक क्षमता के बल पर देश को विश्व की पहली 5 अर्थव्यवस्थाओं में स्थान दिलाया है, यह प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व और विजन का परिणाम है। इस उपलब्धि में उद्योगपतियों का भी विशेष योगदान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बेंगलुरु में आयोजित इन्वेस्ट मध्यप्रदेश : इन्टरेक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अर्पोच्यूनिटीज इन मध्यप्रदेश के संवाद-सत्र को संबोधित कर रहे थे। "एडवांटेज एमपी" फिल्म का हुआ प्रदर्शन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैंगलुरू में इन्वेस्ट मध्यप्रदेश के दूसरे दिन इन्टरैक्टिव सेशन का दीप प्रज्जवल और तुलसी के पौधे में जल अर्पित कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर मणिपाल समूह के अध्यक्ष श्री मोहनदास पाई, ग्रीनको ग्रुप के अध्यक्ष श्री अनिल चलमाशेट्टी, लैप इंडिया के मुख्य परिचालन एवं प्रौद्योगिकी अधिकारी डॉ. शिववेंकट रमानी साथ थे। मध्य प्रदेश सीआईआई के उपाध्यक्ष एवं प्रबंध संचालक इन्फ़ोबींस लिमिटेड श्री सिद्धार्थ सेठी ने मध्य प्रदेश में निवेश के अवसरों और उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण पर प्रकाश डाला। उद्योगपतियों को राज्य में उद्योग स्थापित करने के लिए निवेश की सुविधाओं की जानकारी देती फिल्म-"एडवांटेज-एमपी" का प्रदर्शन किया गया। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देश, प्रगति पथ पर है अग्रसर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बदलते परिदृश्य में देश के सम्मुख अनुकूल अवसर होने के साथ चुनौतियां भी विद्यमान हैं। अपनी क्षमताओं के आधार पर यह विश्वास है कि हमारा भविष्य उज्ज्वल है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में तीसरी बार बनी केन्द्र सरकार के मार्गदर्शन में देश प्रगति के पथ पर निरंतर अग्रसर है। उचित मार्गदर्शन, अद्यतन तकनीक के उपयोग, आगे बढ़ने की इच्छा शक्ति, लगन और परिश्रम के साथ नवीन अनुसंधान की परंपरा के बल पर भारत औद्योगिक केंद्र के रूप में विश्व में अपना स्थान बना रहा है। देश में आरंभ नवीन स्टार्ट-अप भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सभी को प्रोत्साहन और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना भारत की रही है परंपरा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत में पुरुषार्थ और पराक्रम की परंपरा रही है। शासन व्यवस्था द्वारा सभी को प्रोत्साहन और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने की परंपरा के निर्वहन के प्रतीक स्वरूप ही विक्रम संवत की शुरूआत हुई। भारतीय परंपरा में शासन का स्वरूप सहायता प्रदान करने का रहा है, जो जिस क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहता है उसे मदद उपलब्ध कराने से ही उद्यमशीलता आरंभ होती है और व्यक्ति की क्षमता-दक्षता और परिश्रम का लाभ संपूर्ण समाज को मिलता है। भारत में विद्यमान इस व्यवस्था के परिणाम स्वरुप ही भारतीय संस्कृति का विश्व में सदैव मान- सम्मान रहा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा जो उद्यमी और उद्योग जिस क्षेत्र में आगे बढ़ने के इच्छुक हैं, उन्हें प्रोत्साहन स्वरूप उपयुक्त सहायता व मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके परिणाम स्वरूप प्रदेश में सभी सेक्टरों में समान रूप से प्रगति हुई है। सरकार व्यापार-व्यवसाय के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं करने के लिए तत्पर है। मध्यप्रदेश उद्योग और निवेश के लिए उद्योगपतियों को आमंत्रित कर रहा है। उद्योगपतियों द्वारा मध्यप्रदेश में किया गया निवेश निश्चित ही अधिकाधिक रिटर्न देगा। आईटी, ऊर्जा, पर्यटन, खाद्य प्र-संस्करण सहित सभी क्षेत्रों में है पर्याप्त संभावनाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश वर्तमान में सरप्लस एनर्जी स्टेट के रूप में जाना जाता है, ऊर्जा उत्पादन में 23% नवकरणीय ऊर्जा का योगदान है। आईटी, ऊर्जा के साथ ही पर्यटन में भी पर्याप्त संभावनाएं हैं। धार्मिक, स्वास्थ्य, पर्यटन के साथ ही शिक्षा, एमएसएमई, खाद्य प्र-संस्करण के क्षेत्र में पर्याप्त संभावनाएं हैं। कृषि में मध्यप्रदेश का सर्वाधिक ग्रोथ रेट रहा है। देश में गेहूँ के सर्वाधिक उपार्जन के साथ ही मध्यप्रदेश दलहन उत्पादन में भी अग्रणी है। इसके साथ ही उद्यानिकी क्षेत्र में भी प्रदेश ने अल्प समय में बहुत अधिक प्रगति की है। प्रदेश में सभी क्षेत्रों में उद्योग स्थापित करने की पर्याप्त संभावनाएं हैं। देश की 4 बड़ी कंपनियों के साथ हुए एमओयू मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में मध्यप्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड और इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (आईईएसए), टाई ग्लोबल, इलेक्ट्रॉनिक इंडस्टरीज एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (ईएलसीआईएनए)और एसोसिएशन ऑफजियो स्पेशियल इंडस्ट्रीज (एजीआई) के मध्य एमओयू पर हस्ताक्षर भी हुए।  recent visitors 106

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 13 अगस्त को उद्यमी सम्मेलन सह रक्षाबंधन कार्यक्रम में प्रदेश की महिला उद्यमियों से संवाद करेंगे

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 13 अगस्त को उद्यमी सम्मेलन सह रक्षाबंधन कार्यक्रम में प्रदेश की महिला उद्यमियों से संवाद करेंगे। कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर भोपाल में होने वाले इस कार्यक्रम में प्रदेश की 500 से अधिक महिला उद्यमी बहनें शामिल होंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ महिला उद्यमी अपने अनुभव भी साझा करेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव उद्यमियों को अनुदान भी वितरित करेंगे। सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यम मंत्री श्री चेतन्य कुमार काश्यप भी कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण क्षेत्रीय टीवी न्यूज चैनल और सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर किया जायेगा। सचिव एमएसएमई डॉ. नवनीत मोहन कोठारी ने बताया कि महिला सशक्तिकरण के राज्य सरकार के संकल्प को पूरा करने के लिये यह आयोजन किया जा रहा है। इसमें सफल महिला स्टार्ट-अप के साथ महिला संगठनों के प्रतिनिधियों द्वारा भी अपने अनुभव साझा किये जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कई इकाइयों का भूमि-पूजन और लोकार्पण भी करेंगे। महिला उद्यमी सम्मेलन में मध्यप्रदेश एसोसिएशन ऑफ वूमेन इंटरप्राइजेज, फिक्की, सीआईआई का इंडियन वूमेन नेटवर्क, लघु उद्योग भारती, डिक्की, बी.आई.सी.बी.आई., पीएचडी चेंबर, बीएनआई और आईएम स्टार्ट-अप संगठन की महिला उद्यमी और पदाधिकारी शामिल होंगे।   recent visitors 80

जनदर्शन कार्यक्रम में किया वितरण, छत्तीसगढ़-मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तीन दिव्यांगों को दीं ई-ट्राई साइकिल

रायपुर. मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज निवास कार्यालय में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम के दौरान तीन दिव्यांगों को बैटरी चलित मोटराइज्ड ट्राई साइकिल प्रदान की। इस अवसर पर दिव्यांग कोमल लहरे, सना परवीन, और ठगिया साहू ने मुख्यमंत्री श्री साय का आभार व्यक्त किया। रायपुर जिले के चौरसिया कॉलोनी की 18 वर्षीय सना परवीन, ग्राम सेरीखेड़ी की निवासी कोमल लहरे, और धमतरी जिले के ग्राम कचना के निवासी ठगिया साहू को पहले आने-जाने के लिए अपने परिजनों या किसी अन्य व्यक्ति का सहारा लेना पड़ता था। मोटराइज्ड ट्राई साइकिल मिलने के बाद अब उन्हें गांव के भीतर और बाहर आने-जाने में और अपने कामों को पूरा करने में सुविधा होगी। दिव्यांग कोमल लहरे ने बताया कि उनके पास पहले एक ट्राई साइकिल थी, जो अब खराब हो चुकी है। आज जनदर्शन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री द्वारा बैटरी चलित ट्राई साइकिल मिलने से अब उन्हें अपने व्यवसाय के जरिए अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने का मौका मिलेगा। वे ग्राम सेरीखेड़ी में आलू-प्याज बेचकर अपना जीवनयापन करते हैं। समाज कल्याण विभाग द्वारा 80 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले तीनों व्यक्तियों को ऑटोमेटिक ट्राई साइकिल प्रदान की गई है, ताकि वे अपने रोजमर्रा के कार्यों को सरलता से कर सकें और स्व-रोजगार के माध्यम से अपना जीवनयापन कर सकें। recent visitors 100