मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में SC ने सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें फटकार लगाई

 मंत्री विजय शाह को सुप्रीम कोर्ट ने भी लगाई फटकार, MP High Court के एफआईआर के आदेश पर रोक लगाने से इनकार विजय शाह को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार, पूछा- संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति ऐसा बयान कैसे दे सकता मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में SC ने सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें फटकार लगाई भोपाल / जबलपुर मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह द्वारा कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए विवादित बयान पर उनके खिलाफ महू के मानपुर थाने में बुधवार देर रात एफआईआर दर्ज की गई थी। मंत्री द्वारा एफआईआर रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई गई थी, जिस पर उन्हें वहां से भी फटकार मिली। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। उल्लेखनीय है कि स्वत: संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट ने विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। इस मामले में आज मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई होना है। आज हाईकोर्ट के पटल पर उस वीडियो का लिंक भी रखे जाएंगे, जिसमें मंत्री ने कर्नल सोफिया को लेकर टिप्पणी की थी। कांग्रेस कर रही मंत्री को पद से हटाने की मांग इधर कांग्रेस मंत्री विजय शाह को पद से हटाने की मांग कर रही है। प्रदेश के इंदौर, भोपाल और जबलपुर सहित कई शहरों में मंत्री शाह के खिलाफ प्रदर्शन भी किया गया था। इन धाराओं में दर्ज हुआ केस, उम्र कैद या 7 साल तक की सजा का प्रविधान बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 152 : अलगाव, सशस्त्र विद्रोह और विध्वंसक गतिविधियों को भड़काने वाले कृत्यों को अपराध मानती है। यह देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कार्यों को भी अपराध मानती है। इसमें उम्रकैद या सात साल तक के कारावास के दंड का प्रविधान है। बीएनएस 196(1)(ख) : धर्म, जाति, जन्मस्थान, निवास, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने और सद्भाव बनाए रखने के लिए हानिकारक कार्य करने से संबंधित है। इसमें पांच वर्ष के कारावास का प्रविधान है। बीएनएस 197(1)(ग) : राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचाने वाले कार्यों से संबंधित है। इसमें किसी भी समूह की भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा को संदेह में लाने वाले आरोप, दावे या कथन शामिल हैं। इसमें तीन वर्ष के कारावास का प्रविधान है। हाईकोर्ट ने कहा- “गटर जैसी भाषा”, दर्ज हुआ मामला 14 मई 2025 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले को बेहद गंभीर मानते हुए विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। अदालत ने उनकी टिप्पणी को “गटर की भाषा” कहा और इसे महिलाओं के सम्मान और सेना की गरिमा के विरुद्ध करार दिया। कोर्ट के मुताबिक, एक कैबिनेट मंत्री की ओर से इस तरह की टिप्पणी न केवल कर्नल सोफिया के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाती है, बल्कि इससे भारतीय सेना की प्रतिष्ठा पर भी सवाल खड़े होते हैं। आदेश के तहत आईपीसी की गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई, जिसमें सात साल तक की सजा का प्रावधान है। Supreme Court की फटकार, 16 मई को अगली सुनवाई विजय शाह ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए Supreme Court का रुख किया, लेकिन यहां भी उन्हें राहत नहीं मिली। 15 मई को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मंत्री की भाषा अस्वीकार्य है और उन्होंने अपने पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 16 मई की तारीख तय की है और कहा है कि मामले में कानून के तहत उचित निर्णय लिया जाएगा। सोशल मीडिया पर समर्थन, विपक्ष का हमला यह मामला तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। हजारों लोग कर्नल सोफिया के समर्थन में सामने आए हैं और विजय शाह के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं, विपक्षी दलों ने इसे महिलाओं और सेना के प्रति भाजपा सरकार के “दृष्टिकोण” का प्रतिबिंब बताया है। यह विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर गरमाया हुआ है और आने वाले दिनों में इसका असर मध्य प्रदेश की राजनीति पर भी दिख सकता है। recent visitors 34

सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान देकर फंसे मंत्री विजय शाह, अब खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा

भोपाल ‘ऑपरेशन सिंदूर' से जुड़ी जानकारी मीडिया से साझा करने वाली भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में मध्यप्रदेश के इंदौर जिले में सूबे के काबीना मंत्री विजय शाह के खिलाफ बुधवार रात प्राथमिकी दर्ज की गई है. वहीं इस मामले को लेकर विजय शाह सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं और उन्होंने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ याचिका दाखिल की है. उन्होंने याचिका पर ⁠जल्द सुनवाई की मांग की है. दरअसल कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए विवादित बयान को लेकर हाई कोर्ट ने विजय शाह के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया था. जिसके बाद मंत्री शाह पर FIR दर्ज हुई है. ये याचिका एओआर शांतनु कृष्णा के माध्यम से दाखिल की गई है. मानपुर पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने कर्नल कुरैशी पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले का मीडिया की खबरों के आधार पर बुधवार को ही खुद संज्ञान लेते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक को मंत्री के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था. पुलिस अधिकारी ने बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश पर शाह के खिलाफ मानपुर पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है. उन्होंने बताया कि यह प्राथमिकी भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 (भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने का कृत्य), धारा 196 (1) (बी) (अलग-अलग समुदायों के आपसी सद्भाव पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला ऐसा कृत्य जिससे सार्वजनिक शांति भंग होती हो या भंग होने की आशंका हो) और धारा 197 (1) (सी) (किसी समुदाय के सदस्य को लेकर ऐसी बात कहना जिससे अलग-अलग समुदायों के आपसी सद्भाव पर विपरीत असर पड़ता हो या उनके बीच शत्रुता या घृणा या दुर्भावना की भावना पनपती हो या पनपने की आशंका हो) के तहत दर्ज की गई है. इस बीच, राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव के कार्यालय ने ‘एक्स' पर लिखा, ‘‘माननीय मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए मुख्यमंत्री ने कैबिनेट मंत्री विजय शाह के बयान के संदर्भ में कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं.'' मानपुर पुलिस थाने में बुधवार रात 11:30 बजे के आस पास दर्ज प्राथमिकी में कहा गया है कि 12 मई (सोमवार) को रायकुण्डा गांव में हलमा (सामूहिक श्रमदान और सामुदायिक सहभागिता की जनजातीय परम्परा) के कार्यक्रम के दौरान शाह के संबोधन के कुछ अंश प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए. शाह ने बयान को लेकर मांगी थी माफी शाह ने सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ की गई अपनी विवादास्पद टिप्पणी के लिए बुधवार को माफी मांग ली और कहा कि वह ‘बहन सोफिया' और सेना का हमेशा सम्मान करते हैं. अगर किसी व्यक्ति को उनकी बातों से ठेस पहुंची है, तो वह 10 बार माफी मांगने के लिए तैयार हैं.  शाह ने कर्नल सोफिया को ‘देश की बहन' करार दिया और कहा कि उन्होंने राष्ट्र धर्म निभाते हुए जाति और समाज से ऊपर उठकर काम किया है. HC के आदेश के बाद FIR दर्ज मंत्री विजय शाह के खिलाफ कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश के बाद बुधवार रात इंदौर जिले में एफआईआर दर्ज की गई है. मंत्री के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की 3 अलग-अलग धाराओं में FIR दर्ज की गई है. उनके खिलाफ बीएनएस की धारा 152, 196(1) (B) और 197 (1)(C) के तहत FIR दर्ज की गई है. मंत्री ने मांगी माफी मंत्री की वीडियो वायरल होने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है. साथ ही उनके इस्तीफे की मांग भी की जा रही है. इसी बीच मंत्री ने वीडियो जारी कर के माफी भी मांगी है और सोफिया कुरैशी को अपनी बहन बताया है. उन्होंने माफी मांगते हुए कहा, हाल ही में मैंने जो बयान दिया अगर उसकी वजह से किसी भी समाज की भावना आहत हुई है, तो इसके लिए मैं दिल से न सिर्फ शर्मिंदा हूं बल्कि बेहद दुखी भी हूं और सभी से माफी चाहता हूं. उन्होंने सोफिया कुरैशी को लेकर आगे कहा, हमारे देश की वो बहन, सोफिया कुरैशी, जिन्होंने राष्ट्र धर्म निभाते हुए जाति और समाज से ऊपर उठकर जो काम किया है, उन्हें हमारी सगी बहन से भी ऊपर सम्मानित मानता हूं. सोफिया कुरैशी को बताया बहन कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर मध्य प्रदेश के मंत्री ने कहा, मैं भारतीय सेना और बहन सोफिया के उन सभी साथियों का दिल से सम्मान करता हूं, जिन्होंने हमारी बहनों का बदला लेने के लिए, हिंदुस्तान की मान-मर्यादा की रक्षा करते हुए, हमारे विरोधियों को मुंहतोड़ जवाब दिया. मेरी भावना और मंशा यही थी कि मैं उनके अदम्य साहस और बलिदान को समाज के सामने सम्मानपूर्वक रखूं, लेकिन दुख के लम्हों में मुझ से कुछ ऐसे शब्द निकल गए जो नहीं निकलने चाहिए थे. आज मैं पूरे समाज, समुदाय, बहन सौफिया और सभी आर्मी जवानों से हाथ जोड़कर माफी मांगता हूं. मैं हमेशा बहन सोफिया और हमारी सेना के वीरों का सम्मान करता हूं और एक बार फिर सभी से हाथ जोड़कर माफी मांगता हूं. मंत्री ने क्या बयान दिया था ऑपरेशन सिंदूर के बाद मंत्री लोगों के संबोधित कर रहे थे इसी दौरान मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी का जिक्र किया और कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की. मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी को उन आतंकवादियों की बहन बताया, जिन्होंने पहलगाम में निर्दोष लोगों की हत्या की. यही नहीं, मंत्री ने पीएम मोदी पर भी व्यंग्य कसते हुए कहा था कि उन्होंने आतंकवादियों की बहन को सेना में भेजा है.   recent visitors 37

अब उज्जैन और सागर में खुलेंगे पोषण केंद्र, मोटे अनाज के साथ सभी सामग्री मिलेगी

 भोपाल  मध्य प्रदेश में उचित मूल्य की दुकानों को जन पोषण केंद्रों में परिवर्तित किया जाएगा। इसकी शुरुआत इंदौर में 30 जन पोषण केंद्र खोलकर की जा चुकी है। अब इसका विस्तार उज्जैन और सागर में किया जाएगा। यहां 15-15 दुकानों को पोषण केंद्र में परिवर्तित किया जाएगा। यहां मोटे अनाज से बने उत्पादों के साथ अन्य सामग्री भी दुकान संचालक रख सकेंगे। इसका उद्देश्य है कि दुकान संचालकों को अतिरिक्त आय का माध्यम मिले और हितग्राहियों को भी सुविधा मिले। कारगर सिद्ध नहीं हुए नवाचार मध्य प्रदेश में अधिकतर उचित मूल्य राशन दुकानों का संचालन प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों द्वारा किया जाता है। समितियों की सरकार पर निर्भरता कम हो और आय में वृद्धि हो, इसके लिए इन्हें बहुउद्देश्यीय बनाने का प्रविधान रखा गया है। कुछ नवाचार भी हुए, पर वे अधिक कारगत सिद्ध नहीं हुए। इंदौर की 30 दुकानों का चयन किया गया अब भारत सरकार ने उचित मूल्य की राशन दुकानों को जन पोषण केंद्र की तरह संचालित करने का माडल लागू किया है। पहले चरण में इंदौर की 30 दुकानों का चयन किया गया। खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि इस व्यवस्था को प्रदेश में विस्तार दिया जाएगा। अगले चरण में उज्जैन और सागर में 15-15 दुकानों को जन पोषण केंद्र बनाया जाएगा। यहां सार्वजनिक वितरण प्रणाली में वितरित होने वाली सामग्री के अलावा स्थानीय आवश्यकता के अनुसार सभी वस्तुएं रखने की अनुमति होगी। इससे नागरिकों को सुविधा तो मिलेगी ही, दुकान संचालक समिति का आर्थिक सशक्तीकरण भी होगा। recent visitors 26

मुख्यमंत्री मोहन यादव मझौली में एक कार्यक्रम में लाडली बहना योजना की 24वीं किस्त की राशि जारी करेंगे

भोपाल  मध्यप्रदेश की महिलाओं के लिए एक अच्छी खबर है। मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की 24वीं किस्त 15 मई 2025 को जारी होगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव सीधी जिले के मझौली में एक कार्यक्रम में यह राशि जारी करेंगे। इस योजना के तहत, लाखों बहनों के खातों में ₹1250 की अगली किस्त डाली जाएगी। साथ ही, उज्ज्वला योजना के तहत गैस सब्सिडी की राशि भी 25 लाख से ज्यादा महिलाओं के खातों में भेजी जाएगी। 24वीं किस्त होगी जारी लाडली बहना योजना की 24वीं किस्त 15 मई 2025 को जारी की जाएगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव सीधी जिले के मझौली में राज्य स्तरीय सम्मेलन में योजना की राशि जारी करेंगे। इस दिन लाखों बहनों के खाते में ₹1250 की किस्त ट्रांसफर की जाएगी। सीधी में तैयारी तेज मुख्यमंत्री लाडली बहना सम्मेलन की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। प्रशासनिक स्तर पर इसकी पुष्टि हो चुकी है। सीएम मोहन यादव लाडली बहनों से बात भी करेंगे। उज्ज्वला योजना के तहत गैस सब्सिडी की राशि भी 25 लाख से ज्यादा महिलाओं के खातों में ट्रांसफर की जाएगी। पहले 10 तारीख को आती थी राशि लाडली बहना योजना की राशि पहले हर महीने 10 तारीख को आती थी। सरकार ने फैसला किया है कि हर महीने की 15 तारीख को लाडली बहनों को किस्त की राशि दी जाएगी। अप्रैल में 16 तारीख को 23वीं किस्त भेजी गई थी। अब मई में 15 तारीख को 24वीं किस्त जारी होने जा रही है। इस योजना के तहत महिलाओं हर महीने ₹1250 की आर्थिक मदद मिल रही है। नहीं जुड़ रहे नए नाम वहीं, लाडली बहना योजना की राशि से महिलाओं की जिंदगी में बदलाव आ रहे हैं। हालांकि योजना शुरू होने के बाद से अब तक लाभार्थियों की संख्या घटते जा रहे हैं। वहीं, नए नाम अभी इस योजना में नहीं जोड़े जा रहे हैं। अब योजना की शुरुआत के दो साल हो गए हैं लेकिन नए नाम नहीं जोड़े गए हैं। कब हुई थी शुरुआत मध्य प्रदेश सरकार की ओर से तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस योजना की शुरुआत की. इसकी घोषणा 28 जनवरी 2023 को हुई थी जिसे 5 मार्च से लागू किया गया. इसके तरह हर महीने राज्य की महिलाओं को 1250 रुपये उनके खाते में दिए जाते हैं. सरकार ने इसे महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और आर्थिक स्वावलम्बन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है. योजना का लाभ पाने के लिए क्या हैं शर्तें? महिला मध्य प्रदेश की स्थायी निवासी हो. शादीशुदा हो या विधवा, तलाकशुदा महिलाएं इसमें शामिल हैं. आवेदक की आयु 21 वर्ष से 60 वर्ष के बीच की हो. बहरहाल, महिलाओं के खाते में 24वीं किस्त सीएम मोहन यादव ट्रांसफर करने वाले हैं. बता दें कि यह राज्य की सबसे लोकप्रिय योजनाओं में से एक है. इस योजना की चर्चा पूरे देश में होती है. कई राज्यों ने मध्य प्रदेश की तर्ज पर अपने-अपने राज्यों की बहनों के लिए इस तरह की योजनाओं की शुरुआत की है. recent visitors 30

Russia और China मिलकर चांद पर बनाएंगे Nuclear Power … संयंत्र बनाने की डील तय

मॉस्को चीन और रूस ने चंद्रमा पर एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जो 2036 तक पूरा होने की उम्मीद है. यह संयंत्र अंतरराष्ट्रीय चंद्र अनुसंधान स्टेशन (ILRS) को ऊर्जा प्रदान करेगा, जिसका नेतृत्व चीन और रूस संयुक्त रूप से कर रहे हैं. यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने अपने 2026 के बजट प्रस्ताव में चंद्रमा पर एक कक्षीय स्टेशन की योजना को रद्द करने की बात कही है. यह कदम चीन और रूस की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को और मजबूत करता है, जबकि अमेरिका की आर्टेमिस कार्यक्रम में देरी और बजट कटौती ने इसे चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. चीन-रूस का चंद्र परमाणु संयंत्र: एक क्रांतिकारी कदम चीन और रूस ने हाल ही में एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत वे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर एक स्थाई, मानव-नियंत्रित चंद्र आधार (लूनर बेस) स्थापित करने के लिए एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाएंगे. यह संयंत्र ILRS को ऊर्जा प्रदान करेगा, जो वैज्ञानिक अनुसंधान और दीर्घकालिक मानव रहित संचालन के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसमें भविष्य में मानव उपस्थिति की संभावना भी शामिल है. निर्माण प्रक्रिया: रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस के महानिदेशक यूरी बोरिसोव के अनुसार, इस संयंत्र का निर्माण "मानव उपस्थिति के बिना" स्वचालित रूप से किया जाएगा. यह तकनीकी रूप से कैसे संभव होगा, इसकी विस्तृत जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन बोरिसोव ने दावा किया कि तकनीकी कदम "लगभग तैयार" हैं. समयसीमा: संयंत्र का निर्माण 2030 से 2035 के बीच शुरू होगा और 2036 तक पूरा हो जाएगा. ILRS की आधारशिला 2028 में चीन की चांग-ई-8 मिशन के साथ रखी जाएगी, जो पहली बार चीनी अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतारेगी. अंतरराष्ट्रीय चंद्र अनुसंधान स्टेशन (ILRS): एक वैश्विक परियोजना ILRS एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसे चीन और रूस ने जून 2021 में पहली बार घोषित किया था. यह स्टेशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर स्थापित किया जाएगा. इसमें 17 देश शामिल हो चुके हैं, जिनमें मिस्र, पाकिस्तान, वेनेजुएला, थाईलैंड और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं. रोडमैप: ILRS का निर्माण पांच सुपर हेवी-लिफ्ट रॉकेट लॉन्च के माध्यम से 2030 से 2035 तक किया जाएगा. इसके बाद, 2050 तक इस स्टेशन का विस्तार किया जाएगा, जिसमें एक कक्षीय अंतरिक्ष स्टेशन, चंद्रमा के भूमध्य रेखा और इसके दूर के हिस्से पर दो नोड्स शामिल होंगे. ऊर्जा स्रोत: स्टेशन को सौर, रेडियो आइसोटोप और परमाणु जनरेटरों से ऊर्जा मिलेगी. इसके अलावा, चंद्रमा-पृथ्वी और चंद्र सतह पर उच्च गति संचार नेटवर्क, चंद्र वाहन और मानवयुक्त रोवर भी होंगे. उद्देश्य: ILRS का लक्ष्य वैज्ञानिक अनुसंधान, दीर्घकालिक मानव रहित संचालन, और मंगल पर मानव लैंडिंग के लिए तकनीकी आधार तैयार करना है चीन की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाएं चीन का अंतरिक्ष कार्यक्रम पिछले एक दशक में तेजी से विकसित हुआ है. 2013 में चांग-ई-3 मिशन के साथ चीन ने चंद्रमा पर अपना पहला रोवर उतारा. इसके बाद, उसने चंद्रमा और मंगल पर और रोवर भेजे, चंद्रमा के निकट और दूर के हिस्सों से नमूने एकत्र किए और चंद्र सतह का मानचित्रण किया. 2030 का लक्ष्य: चीन का लक्ष्य 2030 तक अपने अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतारना और अंतरिक्ष अनुसंधान में वैश्विक नेता बनना है. 2050 की योजना: ILRS को 2050 तक एक विस्तृत नेटवर्क में बदलने की योजना है, जो चंद्रमा के विभिन्न हिस्सों को जोड़ेगा और मंगल मिशनों के लिए आधार प्रदान करेगा. नासा का आर्टेमिस कार्यक्रम: चुनौतियों का सामना चीन और रूस की इस घोषणा के ठीक बाद, नासा ने अपने 2026 के बजट प्रस्ताव में आर्टेमिस कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण कटौती की घोषणा की. आर्टेमिस का लक्ष्य 2027 में आर्टेमिस III मिशन के माध्यम से अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों को 50 वर्षों बाद चंद्रमा पर वापस लाना है. हालांकि बजट कटौती ने इस कार्यक्रम को जोखिम में डाल दिया है. लूनर गेटवे का रद्द होना: नासा की योजना एक कक्षीय चंद्र स्टेशन, लूनर गेटवे को 2027 तक लॉन्च करने की थी. लेकिन 2026 के बजट प्रस्ताव ने इस मिशन को रद्द कर दिया, साथ ही स्पेस लॉन्च सिस्टम और ओरियन कार्यक्रमों को भी आर्टेमिस III के बाद समाप्त करने की बात कही. बजट कटौती: नासा के बजट में 24% की कटौती प्रस्तावित है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए 500 मिलियन डॉलर की कमी शामिल है. प्रभाव: इन कटौतियों ने नासा की चंद्र महत्वाकांक्षाओं को कमजोर किया है, जिससे चीन और रूस को अंतरिक्ष दौड़ में बढ़त मिल सकती है. चीन-रूस बनाम अमेरिका: अंतरिक्ष दौड़ में नया मोड़ चीन और रूस का यह समझौता अंतरिक्ष अनुसंधान में एक नई प्रतिस्पर्धा का संकेत देता है. जहां नासा आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत चंद्रमा पर स्थायी उपस्थिति स्थापित करने की योजना बना रहा था, वहीं बजट कटौती और देरी ने इसकी गति को धीमा कर दिया है. दूसरी ओर चीन और रूस की ILRS परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है, जिसमें 17 देशों का समर्थन और स्पष्ट रोडमैप शामिल है. चीन-रूस की ताकत: दोनों देशों की परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में विशेषज्ञता ILRS को एक मजबूत आधार प्रदान करती है. चीन की चांग'ए मिशन और रूस की स्वचालित निर्माण तकनीक इस परियोजना को गति दे सकती है. अमेरिका की चुनौतियां: नासा के सामने न केवल बजट की कमी है, बल्कि तकनीकी देरी और राजनीतिक अनिश्चितता भी है। आर्टेमिस III की 2027 की समयसीमा पहले ही 2026 से स्थगित हो चुकी है. वैश्विक प्रभाव और भविष्य चीन और रूस का चंद्र परमाणु संयंत्र वैज्ञानिक और रणनीतिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है. यह न केवल चंद्रमा पर दीर्घकालिक मानव उपस्थिति को संभव बनाएगा, बल्कि मंगल मिशनों के लिए भी आधार तैयार करेगा.यह परियोजना हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को दर्शाती है. वैज्ञानिक लाभ: ILRS चंद्रमा की सतह, संसाधनों और अंतरिक्ष पर्यावरण के अध्ययन को बढ़ावा देगा. रणनीतिक प्रभाव: यह परियोजना चीन और रूस को अंतरिक्ष में वैश्विक नेतृत्व प्रदान कर सकती है, विशेष रूप से तब जब अमेरिका अपनी योजनाओं में पीछे रह रहा है. भारत की भूमिका: भारत, जो अपने चंद्रयान मिशनों के लिए जाना जाता है, भविष्य में ILRS या आर्टेमिस जैसे कार्यक्रमों में सहयोग कर सकता है, लेकिन अभी तक इस परियोजना में शामिल नहीं हुआ … Read more

ऑपरेशन सिंदूर भारतीय नौसेना के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ, कराची के निकट अरब सागर में 36 युद्धपोतों की तैनाती

नई दिल्ली भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों ने एक बार फिर दक्षिण एशिया में सैन्य शक्ति प्रदर्शन को केंद्र में ला दिया है. ऑपरेशन सिंदूर, जिसे मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया, भारतीय नौसेना के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ. इस ऑपरेशन में भारतीय नौसेना ने कराची के निकट अरब सागर में 36 युद्धपोतों की तैनाती की, जिसमें स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत, 7 विध्वंसक, 7 फ्रिगेट, पनडुब्बियां और तेज हमलावर नौकाएं शामिल थीं. यह तैनाती भारत की समुद्री ताकत का शानदार प्रदर्शन थी, जिसने पाकिस्तान को रक्षात्मक स्थिति में धकेल दिया. ऑपरेशन सिंदूर मई 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक भीषण आतंकी हमले ने भारत को निर्णायक कार्रवाई के लिए प्रेरित किया. इस हमले को पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों से जोड़ा गया. जिसके बाद भारत ने त्रि-आयामी दबाव (सेना, वायुसेना और नौसेना) के जरिए जवाबी कार्रवाई शुरू की. ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य आतंकी ठिकानों को नष्ट करना. पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश देना था कि भारत किसी भी आक्रामकता का मुंहतोड़ जवाब दे सकता है. इस ऑपरेशन में भारतीय नौसेना ने कराची के निकट अरब सागर में अभूतपूर्व तैनाती की. इस तैनाती ने पाकिस्तान नौसेना को पूरी तरह से निष्क्रिय कर दिया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया. भारतीय नौसेना की तैनाती: एक ऐतिहासिक प्रदर्शन 1971 के भारत-पाक युद्ध में भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन ट्राइडेंट और ऑपरेशन पायथन के दौरान कराची बंदरगाह पर हमला करने के लिए केवल 6 युद्धपोतों का उपयोग किया था. उस हमले ने पाकिस्तान की समुद्री रसद को तबाह कर दिया था. लेकिन ऑपरेशन सिंदूर में, भारतीय नौसेना ने 36 युद्धपोतों की तैनाती की जो 1971 की तुलना में छह गुना अधिक है. 1. INS विक्रांत और कैरियर बैटल ग्रुप INS विक्रांत भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत, इस तैनाती का केंद्रबिंदु था. 40,000 टन का यह युद्धपोत मिग-29K लड़ाकू विमान, कामोव हेलीकॉप्टर और उन्नत हवाई चेतावनी प्रणालियों से लैस है. कैरियर बैटल ग्रुप: विक्रांत के साथ 8-10 युद्धपोतों का एक समूह तैनात किया गया, जिसमें विध्वंसक, फ्रिगेट और सहायक जहाज शामिल थे. इस समूह ने अरब सागर में कराची के निकट एक अभेद्य समुद्री दीवार बनाई, जिसने पाकिस्तानी नौसेना और वायुसेना को तट पर ही सीमित कर दिया. रणनीतिक प्रभाव: मिग-29K विमानों ने हवाई निगरानी और हमले की क्षमता प्रदान की, जबकि हेलीकॉप्टरों ने पनडुब्बी-विरोधी युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 2. सात विध्वंसक: बहुआयामी ताकत भारतीय नौसेना ने सात विध्वंसक तैनात किए, जो ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों (MRSAM) और वरुणास्त्र भारी टॉरपीडो से लैस थे. ये विध्वंसक समुद्री सतह, हवा और पनडुब्बी-विरोधी लक्ष्यों को नष्ट करने में सक्षम थे. ब्रह्मोस मिसाइल, जो 450 किमी की रेंज और 2.8 मैक की गति से हमला कर सकती है. कराची बंदरगाह और अन्य रणनीतिक लक्ष्यों को तुरंत नष्ट करने की क्षमता रखती थी. उदाहरण: कोलकाता-श्रेणी के विध्वंसक जैसे INS कोलकाता और INS चेन्नई, इस तैनाती में शामिल थे, जो अपनी उन्नत रडार और हथियार प्रणालियों के लिए जाने जाते हैं. 3. सात स्टील्थ फ्रिगेट: चपलता और शक्ति सात स्टील्थ गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट, जिनमें हाल ही में शामिल INS तुशिल भी तैनात की गईं. ये फ्रिगेट उन्नत रडार, मिसाइल प्रणालियों और स्टील्थ तकनीक से लैस थीं, जो हवाई और समुद्री खतरों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकती थीं. इन फ्रिगेट्स ने पश्चिमी तट के साथ एक रक्षात्मक और आक्रामक समुद्री दीवार बनाई, जिसने पाकिस्तानी नौसेना को कोई जवाबी कार्रवाई करने से रोक दिया. INS तुशिल: यह नवीनतम तलवार-श्रेणी का फ्रिगेट है, जिसे रूस के सहयोग से भारत में निर्मित किया गया और 2024 में नौसेना में शामिल किया गया. 4. पनडुब्बियां: अदृश्य खतरा अनुमानित छह पनडुब्बियां, जिनमें परमाणु-संचालित INS अरिहंत और पारंपरिक स्कॉर्पीन-श्रेणी की पनडुब्बियां (जैसे INS कलवारी) शामिल थीं ने अरब सागर में गुप्त रूप से संचालन किया. ये पनडुब्बियां स्टील्थ ऑपरेशन्स में माहिर थीं. पाकिस्तानी नौसेना की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ-साथ संभावित हमलों के लिए तैयार थीं. रणनीतिक महत्व: INS अरिहंत की परमाणु मिसाइल क्षमता ने भारत की दूसरी हमले की क्षमता (second-strike capability) को मजबूत किया, जो परमाणु निरोध में महत्वपूर्ण है. 5. तेज हमलावर नौकाएं और मिसाइल बोट कई तेज हमलावर नौकाएं और मिसाइल बोट भी तैनात की गईं, जो त्वरित और सटीक हमलों के लिए डिज़ाइन की गई थीं. ये छोटे लेकिन घातक जहाज कराची बंदरगाह जैसे लक्ष्यों पर तुरंत हमला करने में सक्षम थे. इनकी तैनाती ने भारतीय नौसेना की ताकत को और बढ़ाया, जिससे कुल युद्धपोतों की संख्या 36 तक पहुंच गई. पाकिस्तानी नौसेना की स्थिति: रक्षात्मक मुद्रा पाकिस्तानी नौसेना की तुलना में भारतीय नौसेना की तैनाती कहीं अधिक प्रभावशाली थी. पाकिस्तान के पास वर्तमान में 30 से कम युद्धपोत हैं, जिनमें चार चीनी-निर्मित टाइप 054A/P फ्रिगेट, कुछ पुरानी फ्रिगेट, और सीमित पनडुब्बियां शामिल हैं.ऑपरेशन सिंदूर के दौरानपाकिस्तानी नौसेना के जहाज मुख्य रूप से कराची बंदरगाह के भीतर या तट के बहुत करीब सीमित रहे. NAVAREA चेतावनी: भारतीय नौसेना की भारी तैनाती के डर से पाकिस्तान ने समुद्री क्षेत्र में NAVAREA (Navigational Area) चेतावनी जारी की, जिसमें संभावित नौसैनिक हमले की आशंका जताई गई. पाकिस्तान की प्रतिक्रिया: पाकिस्तानी नौसेना ने दावा किया कि उनकी सतर्कता ने भारतीय नौसेना को उनके जल क्षेत्र में प्रवेश करने से रोका. हालांकि, भारतीय नौसेना ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य केवल निवारक मुद्रा बनाए रखना था, न कि सक्रिय हमला करना. सीमित क्षमता: पाकिस्तानी नौसेना की कमजोर समुद्री ताकत और पुराने उपकरणों ने उसे भारतीय नौसेना के सामने जवाबी कार्रवाई करने में असमर्थ बना दिया. अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय प्रभाव भारतीय नौसेना की इस विशाल तैनाती ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रभाव छोड़े… समुद्री यातायात पर असर: कराची के आसपास उच्च जोखिम वाले क्षेत्र के कारण अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों को अपने मार्ग बदलने पड़े। इससे पाकिस्तान की समुद्री अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा. वैश्विक ध्यान: इस तैनाती ने वैश्विक शक्तियों, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन का ध्यान आकर्षित किया. भारत की समुद्री ताकत ने हिंद महासागर क्षेत्र में इसकी बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया. पाकिस्तान पर दबाव: भारतीय नौसेना की तैनाती ने पाकिस्तान को न केवल सैन्य, बल्कि कूटनीतिक और आर्थिक मोर्चों पर भी दबाव … Read more

बिना गिरवी वाले कर्ज में डिफॉल्ट का खतरा बढ़ रहा, RBI नियमों को और सख्त करने की तैयारी में

मुंबई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बिना गिरवी रखे दिए जाने वाले व्यक्तिगत कर्ज, जैसे पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड के नियमों को और सख्त करने की तैयारी में है। बिना गिरवी वाले कर्ज में डिफॉल्ट का खतरा बढ़ रहा है। इससे आरबीआई चिंतित है। नवंबर 2023 में RBI ने इन कर्जों पर रिस्क वेट 100% से बढ़ाकर 125% कर दिया था, लेकिन अब और कड़े कदम जरूरी हैं। क्रेडिट स्कोर के आधार पर लोन: आरबीआई ने बैंकों को अपनी कर्ज देने की नीतियों को सख्त करने के निर्देश दिए हैं। कर्ज लेने वालों की क्रेडिट स्कोर के आधार पर ऋण की अधिकतम सीमा तय करना होगा। अगर कोई व्यक्ति पहले से होम लोन या ऑटो लोन ले चुका है, तो बैंकों को पर्सनल लोन देते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। रिटेल लोन के तेजी से बढ़ने से आरबीआई चिंतित: बैंकों से बातचीत के आधार पर एनडीटीवी प्रॉफिट को पता चला है कि RBI को रिटेल लोन के तेजी से बढ़ने और इसमें छिपे जोखिमों को लेकर चिंता है। मार्च 2024 में पर्सनल लोन में वार्षिक वृद्धि 14% रही (पिछले साल इसी समय 17.6% थी)। प्राइवेट बैंक अभी भी तेजी से ये कर्ज दे रहे हैं, जबकि सरकारी बैंकों का फोकस कम है। RBI की रिपोर्ट का अहम बिंदु: दिसंबर 2023 की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट के मुताबिक, प्राइवेट बैंकों में कर्ज माफ करने (राइट-ऑफ) की संख्या तेजी से बढ़ी है, जो जोखिम का संकेत है। आरबीआई का अगला कदम: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया जल्द ही (अगले 15 दिनों में) इन नए दिशा-निर्देशों का ड्राफ्ट जारी कर सकता है। बैंकों से अपेक्षा है कि वे इन कर्जों को लेकर अधिक सतर्कता बरतेंगे और केवल योग्य उधारकर्ताओं को ही ऋण देंगे। आरबीआई का यह कदम आम लोगों को जरूरत से ज्यादा कर्ज लेने से रोकने और बैंकिंग व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए है। एक से ज्यादा पर्सनल लोन लेना अब आसान नहीं! अब पर्सनल लोन (Personal Loan) लेने वालों के लिए मल्टीपल लोन लेना मुश्किल होने वाला है. RBI ने एक नया नियम लागू कया है, जिससे कर्ज लेने और देने दोनों में बड़ा बदलाव आने वाला है. इस नियम के मुताबिक अब लेंडर्स को क्रेडिट ब्यूरो में लोन की जानकारी 1 महीने की जगह 15 दिन के अंदर अपडेट करनी होगी. इससे कर्ज देने वालों को डिफॉल्ट और पेमेंट रिकॉर्ड की सटीक जानकारी जल्दी मिल सकेगी. इससे कर्ज लेने वालों के जोखिम का बेहतर आकलन हो सकेगा और मल्टीपल लोन लेने वालों पर लगाम लगाई जा सकेगी. मल्टीपल लोन (Multiple Loan) पर लगेगी रोक! अगस्त 2024 में जारी किए गए इन निर्देशों को 1 जनवरी 2025 से लागू किया गया है. रिजर्व बैंक का मानना है कि इससे कर्ज देने वालों को रिस्क मैनेजमेंट में मदद मिलेगी. अभी तक EMI चुकाने की तारीखें अलग-अलग होने की वजह से महीने में एक बार रिपोर्टिंग करने से पेमेंट रिकॉर्ड में 40 दिनों की देरी हो सकती थी. लेकिन अब हर 15 दिन में अपडेट होने से ये देरी खत्म हो जाएगी और कर्ज देने वालों को असल समय में जानकारी मिलेगी. कुल मिलाकर अब EMI रिपोर्टिंग में देरी कम होगी और पेमेंट-डिफॉल्ट की सही जानकारी जल्दी मिलेगी. मल्टीपल कर्ज लेने की आदत लगाम! मल्टीपल कर्ज लेने की आदत पर भी ये नियम लगाम लगाएगा. नए लोन लेने वालों को कई जगहों से ज्यादा लोन मिल जाते हैं जो उनकी चुकाने की क्षमता से ज्यादा होता है. बैंकों ने ही रिकॉर्ड को ज्यादा बार अपडेट करने का सुझाव दिया था, जिससे कर्ज लेने वालों की सही जानकारी उपलब्ध हो सके. अब अगर कोई शख्स मल्टीपल लोन लेता है और उसकी EMI अलग-अलग तारीखों पर होती है, तो उसकी आर्थिक गतिविधियां 15 दिनों के अंदर क्रेडिट ब्यूरो के सिस्टम में दिखाई देंगी. इससे कर्ज देने वालों को कर्ज लेने वालों की आर्थिक स्थिति का सटीक और ताजा डेटा मिलेगा. ‘एवरग्रीनिंग’ पर रोक लगेगी! लेंडर्स का मानना है कि इस बदलाव से ‘एवरग्रीनिंग’ जैसी हरकतों पर भी रोक लगेगी. इसमें कर्ज लेने वाले पुराने कर्ज नहीं चुका पाने पर नया कर्ज ले लेते हैं, जिससे उनकी असल स्थिति छिपी रहती है. रिपोर्टिंग समय घटाने से क्रेडिट ब्यूरो और लेंडर्स को ज्यादा भरोसेमंद डेटा मिलेगा और कर्ज देने का सिस्टम मजबूत होगा. RBI के इस नए नियम से कर्ज देने का सिस्टम और ज्यादा पारदर्शी और मजबूत बनेगा और ये देखना दिलचस्प होगा कि इससे लोन लेने वालों पर क्या असर पड़ता है. पर्सनल लोन के फायदे व्यक्तिगत ऋण (Personal Loan) का लाभ उठाना आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में एक नायाब सुविधा बन गया है. इसका प्रमुख फायदा यह है कि इसे बिना किसी गारंटी के लिया जा सकता है. पर्सनल लोन  की विशेषता यह है कि इसका इस्तेमाल अनेकों आवश्यकताओं के लिए किया जा सकता है, जैसे कि आपातकालीन चिकित्सा खर्च, शिक्षा, शादी, घर की मरम्मत या अन्य व्यक्तिगत जरूरतें. पर्सनल लोन आसानी से मिल जाता है. अधिकतर बैंकों और वित्तीय संस्थाओं में ऑनलाइन आवेदन की सुविधा होती है, जिससे समय की बचत होती है और दस्तावेजी प्रक्रिया भी सरल हो जाती है. इसके अलावा, ऋण राशि भी कुछ ही दिनों में आपके खाते में ट्रांसफर हो जाती है, जिससे आपकी आवश्यकताओं को त्वरित रूप से पूरा किया जा सकता है. Personal Loan के नकारात्मक पहलू जब पैसों की तात्कालिक जरूरत होती है, तो अधिकतर लोग पर्सनल लोन की तरफ भागते हैं, क्योंकि आसानी से मिल जाता है. पर्सनल लोन को सबसे बड़ा निगेटिव प्वाइंट्स ये है कि इसका ब्याज काफी ज्यादा होता है. पर्सनल लोन का टेन्योर बहुत कम होता है, और किसी कारण से समय पर भुगतान नहीं करने से बैंक मजबूरी का फायदा उठाता है. बिना सूझ-बूझ के पर्सनल लोन से आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है. यही नहीं, अगर आपने समय पर EMI नहीं चुकाई, तो यह आपके क्रेडिट स्कोर को भी बिगाड़ सकता है.   recent visitors 53