प्रदेश में अब एक जैसी प्रकृति के विभागों के लिए एक साथ होंगी भर्तियां, भर्ती प्रक्रिया में आएगी पारदर्शिता

 भोपाल मध्य प्रदेश के युवाओं के लिए यह बड़ी खबर है. अब सरकारी नौकरी की तैयारी करने वालों को अलग-अलग विभागों की अलग-अलग परीक्षाओं से जूझना नहीं पड़ेगा. दरअसल, राज्य सरकार भर्ती प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है. सभी विभागों में भर्ती के एक जैसे नियम बनाए जाएंगे, ताकि युवाओं को नियम समझने में कोई परेशानी न हो.। इसके लिए आदर्श भर्ती नियमावली बनाई जा रही है। शासन ने इसकी जिम्मेदारी सामान्य प्रशासन विभाग को दी है। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों से इस बारे में सुझाव मांगे हैं। दरअसल, प्रदेश में विभिन्न विभागों में अगले दो-तीन साल में करीब ढाई लाख पदों पर भर्तियां होनी हैं। इसके लिए ही सभी विभागों के भर्ती नियम एक जैसे करने का निर्णय लिया गया है, ताकि कोई नियमसंगत समस्या खड़ी न हो। ऐसा इसलिए, क्योंकि अब तक कई विभागों में भर्ती के कुछ नियमों में भिन्नता है। 2.5 लाख पदों पर होंगी भर्तियां बता दें कि राज्य के अलग-अलग विभागों में आने वाले 2-3 सालों में करीब 2.5 लाख पदों पर भर्तियां की जाएंगी। इसलिए राज्य सरकार द्वारा सभी विभागों में कर्मचारियों के भर्ती नियम एक समान बनाने का फैसला किया गया है। दरअसल, अब तक कई विभागों में भर्ती के कुछ नियम काफी अलग हैं। इसकी वजह से प्रदेश लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन मंडल भर्ती नियम तैयार करते हैं और अलग-अलग विज्ञापन निकालते हैं। कुछ नियम अलग-अलग हैं मसलन, वन विभाग, शिक्षा विभाग और नगर तथा ग्राम निवेश सेवा भर्ती के कुछ नियम अलग-अलग हैं। इनके आधार पर राज्य लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन मंडल भर्ती नियम तैयार करके अलग-अलग विज्ञापन निकालते हैं। नियम अलग होने से इन चयन एजेंसियों को विभागवार भर्ती करने में परेशानी होती है और समय भी अधिक लगता है। चूंकि, अब प्रदेश में बड़े पैमाने पर भर्तियां होनी हैं, इसलिए यह निर्णय लिया गया है कि सभी विभागों के भर्ती नियमों में एकरूपता रहे ताकि भर्ती विज्ञापन जारी करने में विलंब न हो। एक जैसी प्रकृति के विभागों के लिए भर्ती एक साथ करवा दी जाएंगी। रिपोर्ट के आधार पर भर्ती नियमों को देंगे अंतिम रूप इससे समय और संसाधन की बचत होगी। इसे देखते हुए सामान्य प्रशासन विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। सेवानिवृत्त अधिकारियों की एक समिति भी बनाई गई है, जो नियमों का अध्ययन करके रिपोर्ट देगी। इस रिपोर्ट के आधार पर भर्ती नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा। सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नियमों की समानता सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए लागू की जाएगी। क्या है राज्य सरकार का प्लान? विभागों के कर्मचारियों के भर्ती नियम अलग होने के कारण राज्य की चयन एजेंसियों को भर्ती करने में परेशानी होती है। इसके अलावा, भर्ती के प्रोसेस पर भी काफी समय लगता है। प्रदेश में आने वाले सालों में पैमाने पर विभाग में भर्तियां होने वाली हैं। अगर पुराने नियम से भर्ती हुई तो उसमें काफी समय लगेगा। समय और संसाधन की बचत के लिए प्रदेश में एक नई भर्ती नियमावली बनाई जा रही है। सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नियमों की समानता सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए लागू की जाएगी। ये नियम हो सकते हैं एक समान     उम्र संबंधी।     पात्रता के मानक।     आरक्षण संबंधित मानक।     महिला अभ्यर्थियों को आरक्षण मानक।     परिवीक्षा अवधि। चयन भर्तियों में किया जा चुके हैं बदलाव बता दें कि हाल ही में राज्य लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन मंडल की परीक्षाओं को लेकर कुछ बदलाव किए गए हैं। इनके अंतर्गत अब वर्ष में केवल एक बार होंगी। इससे अभ्यर्थियों को बार-बार परीक्षा और फीस नहीं देनी होगी। जनवरी 2026 से नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। इससे भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी और समय पर होगी। यह कदम अभ्यर्थियों के हित में माना जा रहा है। recent visitors 32

अमेरिका नहीं चाहता था कि पाकिस्तान बिखर जाए, कर्ज पर टिकी इकॉनमी, भारत के सामने घुटने टेकने पड़े

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने 10 मई की शाम को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया और भारत-पाकिस्तान के बीच समझौता हो गया। इसके बाद पाकिस्तान की तरफ से आई तस्वीरों में जश्न का सा माहौल था, जबकि भारत में जैसे चुप्पी साध ली गई। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसे अपनी जीत बताते हुए पाकिस्तानी सेना को बधाई तक दे डाली। US-चीन एकमत: पाकिस्तान में मनाई जा रही खुशी समझौते की है या फिर इसलिए कि ट्रंप ने हार से बचा लिया? भारत के लोग इसे किस नजरिए से देखें? यह मसला दो देशों के बीच का था, तो ट्रंप ने इसकी घोषणा क्यों की? क्या इसका संदेश यह नहीं जाता कि ट्रंप हर हाल में पाकिस्तान को बचाना चाह रहे थे। वैसे चीन भी नहीं चाहता था कि भारत-पाकिस्तान टकराव जारी रहे क्योंकि कुछ मामलों में उसकी भी भद्द पिट रही थी, अमेरिका ने उसकी इच्छा पूरी कर दी। तो क्या पाकिस्तान मसले पर अमेरिका और चीन एकमत थे? ट्रंप की बेचैनी: सिद्धांत रूप से चीन के लिए दक्षिण एशिया में पाकिस्तान का वही महत्व है, जो पश्चिम एशिया में अमेरिका के लिए इस्राइल का। अमेरिका भी पाकिस्तान को इसी नजरिए से देख रहा है। कहीं ऐसा तो नहीं कि इसी वजह से ट्रंप इतने बेचैन थे? समझौते के बाद पूर्व सेना प्रमुख जनरल वेद प्रकाश मालिक ने जो ट्वीट किया, उसके कुछ तो मायने हैं, 'संघर्ष विराम 10 मई 2025 : हमने भारत के भविष्य को यह पूछने के लिए छोड़ दिया है कि पाकिस्तानी आतंकवादी हमले (22 अप्रैल को पहलगाम में) के बाद अपनी कार्रवाइयों से भारत ने कोई राजनीतिक या रणनीतिक लाभ हासिल किया या नहीं।' ऐसा ही कुछ पूर्व सेना प्रमुख मनोज नरवणे ने भी अपने ट्वीट की अंतिम पंक्ति में लिखा है, ' …हम हर बार घटनाओं पर आधारित प्रतिक्रिया देकर अपने लोगों की जान नहीं गंवा सकते। यह तीसरी बार है, अब आगे कोई और मौका नहीं।' अनसुनी पुकार: ट्रंप के लिए यह खुशी का अवसर हो सकता है, वह दुनिया को यह संदेश देने में कामयाब हो गए कि अमेरिका अब भी दुनिया का लीडर है। उनके विदेश मंत्री ने इसका भरपूर प्रचार भी कर दिया। अमेरिका मानव हानि से बड़ा आहत दिखा। होना भी चाहिए। लेकिन क्या भारत से अधिक कोई राष्ट्र मानवीय संवेदनाओं से संपन्न है? स्पष्टतया नहीं। 1990 के दशक से ही भारत दुनिया को पाकिस्तान की आतंकी हरकतों का सबूत देता चला आ रहा है, पर किसी ने नहीं सुना। लेकिन, जैसे ही 9/11 की घटना हुई, अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ जंग छेड़ दी। अमेरिका ने जब काबुल में तबाही फैलाई, तो क्या आम अफगानी नहीं मरा? पाकिस्तान पर मौन: काबुल के बाद अमेरिका ने बगदाद को निशाना बनाया, जिसका कोई औचित्य नहीं था। हां, उसे सद्दाम हुसैन की तरफ से कुछ खतरे दिख रहे होंगे, और उसने बगदाद का ध्वंस कर दिया। दुनिया उस समय मौन थी या तालियां बजा रही थी। दुनिया इस बात पर भी मौन रही कि दक्षिण एशिया में आतंकवाद का एपीसेंटर पाकिस्तान है, और उस पर कोई एक्शन नहीं हुआ। आतंक की जड़: यह स्थापित हो चुका है कि पाकिस्तान ही एशिया में आतंकवाद की जड़ है। लेकिन, अमेरिका ने अफगान वॉर में उसे सिपहसालार बना लिया था। यह बात तो अमेरिकी सेना के जनरल डेविड पेट्रास ने भी कही थी कि अल-कायदा, पाकिस्तानी तालिबान, अफगान तालिबान, TNSM (तहरीक-ए-नफज-ए-शरीयत-ए-मोहम्मदी) के बीच सिम्बियोटिक रिलेशनशिप है, फिर भी अमेरिका खामोश रहा। दबाव बढ़ रहा था: अंतरराष्ट्रीय मीडिया की खबरें बता रही थीं कि पाकिस्तान काफी दबाव में है। अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने लिखा था, 'भारत ने आतंकी संगठनों पर कार्रवाई कर पाकिस्तान को यह संदेश दिया है कि अब वह ऐसे हमलों को बर्दाश्त नहीं करेगा। पाकिस्तान अंदरूनी समस्याओं से जूझ रहा है। इमरान खान जेल में हैं, चुनाव विवादित रहे हैं। देश आर्थिक संकट में है…।' पाकिस्तान में घबराहट: वहां तख्तापलट या मार्शल लॉ लागू होने की आशंकाएं जोर पकड़ रही थीं। टॉप लीडर और वरिष्ठ सैन्य अफसर अपना पैसा विदेश भेजने लगे थे। पाकिस्तान के स्टेट बैंक की जांच में यह बात पता चली। दूसरी तरफ, पाकिस्तान के ओपन एक्सचेंज मार्केट से डॉलर मिलना मुश्किल होने लगा था। उसके पास 12 दिन का आयात बिल चुकाने भर का विदेशी मुद्रा भंडार ही बचा था। अगर IMF से बेलआउट पैकेज की अगली किस्त न जारी होती, तो पाकिस्तान की आर्थिक गतिविधियां ही ठप पड़ जातीं। अब सवाल है कि जिस IMF में अमेरिकी इच्छा के बिना पत्ता भी नहीं हिलता, वहां भारत के विरोध के बाद भी पाकिस्तान को कर्ज मिल जाना क्या संकेत देता है? बिखरने से बचाया: अमेरिका को अच्छी तरह मालूम था कि कर्ज पर टिकी इकॉनमी की वजह से पाकिस्तान को भारत के सामने घुटने टेकने पड़ेंगे। अमेरिका नहीं चाहता था कि ऐसा हो और पाकिस्तान बिखर जाए। ऐसे तो दक्षिण एशिया में भारत के लिए कोई चुनौती ही नहीं रह जाती। अमेरिका को यह स्वीकार नहीं था। उसे पाकिस्तान को बचाना था और इसका एक ही रास्ता था, समझौता। recent visitors 62

भारत के हमले से रहीम यार खान एयरबेस का रनवे तहस-नहस, एक सप्ताह के लिए नॉन ऑपरेशनल घोषित

लाहौर पाकिस्तान के महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठान रहीम यार खान एयरबेस अब काम नहीं कर पा रहा है. भारत की ओर से किए गए जवाबी हमले ने इस एयरपोर्ट के रनवे को तहस-नहस कर दिया है. अब पाकिस्तान ने फिलहाल एक सप्ताह के लिए इस एयरबेस को एक सप्ताह के लिए नॉन ऑपरेशनल घोषित कर दिया है. पाकिस्तान ने इस बाबत नोटम (NOTAM) नोटिस टू एयरमैन जारी किया है. ये नोटिस पाकिस्तान सिविल एविएशन अथॉरिटी ने शनिवार शाम को जारी किया है. ये नोटम 10 मई को पाकिस्तानी समय के अनुसार 4 बजे शाम से प्रभावी हो गए हैं और 18 मई 5 बजे तक प्रभावी रहेगा. यानी कि इतने समय तक रहीम यार खान नूर बेस काम नहीं करेगा. पाकिस्तान सिविल एविएशन अथॉरिटी ने कहा कि बंद करने का कारण वर्क इन प्रोग्रेस है. लेकिन पाकिस्तान ने शातिराना चालाकी करते हुए ये नहीं बताया है कि वो जंग जैसे इतने अहम समय में अपने सैन्य हवाई अड्डे पर क्या काम कर रहा है. नोटम में कहा गया है कि फिलहाल ये एयरबेस उड़ान के लिए संचालित नहीं होगा. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के दक्षिणी भाग में इस महत्वपूर्ण एयरबेस को अस्थायी रूप से बंद करना और बंद करने का समय और इसकी टाइमिंग इस एयरबेस पर भारत की ओर से किए गए तगड़े हमले की पुष्टि करती है. रहीम यार खान एयरबेस, जिसे आधिकारिक तौर पर शेख जायद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (Shaikh Zayed International Airport) के नाम से जाना जाता है, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में रहीम यार खान शहर के पास स्थित है. यह हवाई अड्डा शहर से लगभग 4.6 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में है. रहीम यार खान एयरबेस पर हमले का असर रविवार शाम को ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े एक ब्रीफिंग में, भारतीय वायु सेना ने उपग्रह चित्रों से पुष्टि की कि रहीम यार खान वायु सेना अड्डे के रनवे पर भारत ने स्ट्राइक किया था. इस हमले में ये हवाई अड्डा तबाह हो गया था. नोटम के लिए जारी इस मैसेज में लिखा गया है. “RWY NOT AVBL FOR FLT OPERATION WIP” अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के अनुसार, NOTAM में कोड ‘WIP’ का उपयोग प्रगति पर चल रहे कार्य को दर्शाता है. अमेरिकी संघीय उड्डयन प्रशासन (FAA) के अनुसार, ‘WIP’ हवाई अड्डे की सतह पर किए जा रहे किसी भी कार्य को दर्शाता है. यह देखते हुए कि NOTAM में विशेष रूप से एयरबेस पर रनवे का उल्लेख किया गया है, यह दर्शाता है कि रनवे पर ही प्रगति पर काम चल रहा है. रहीम यार खान एयरबेस में शेख जायद इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी है. फ्लाइटराडार24 पर उपलब्ध एयरपोर्ट डेटा के अनुसार, इसका एकमात्र रनवे- रनवे 01/19- बिटुमिनस सरफेस वाला है और इसकी लंबाई 3,000 मीटर या 9,843 फीट है. यूं तो इस एयरपोर्ट को पाकिस्तान सिविल एविएशन अथॉरिटी (PCAA) द्वारा संचालित किया जाता है, लेकिन इसका उपयोग पाकिस्तान वायु सेना (PAF) द्वारा भी सैन्य उद्देश्यों के लिए किया जाता है. बता दें कि 10 मई को पाकिस्तानी हमले का जवाब देते हुए भारत ने पड़ोसी मुल्क के कई सैन्य एयरपोर्ट को निशाना बनाया. भारत के मिसाइल हमले में रफीकी, मुरीद, चकलाला, सुक्कुर, रहीम खान एयरबेस, चुनियां एयरबेस, नूर खान एयरबेस, सरगोधा एयरबेस को मुख्य रूप से निशाना बनाया. भारत के हमले में रहीम खान एयरबेस को तगड़ा नुकसान पहुंचा था. और इसकी हवाई पट्टी पर बड़ा गड्ढ़ा बन गया था. अब पाकिस्तान इन मलबों को साफ कर रहा है. और गड्ढे की मरम्मत कर रहा है. एयरबेस का मुख्य रनवे जो लगभग 3,000 मीटर लंबा है, पूरी तरह से तबाह हो गया. सैटेलाइट इमेजरी और वीडियो फुटेज में रनवे पर बड़ा गड्ढा दिखाई देता है. रिपोर्ट के अनुसार भारत के हमलों में एयर ट्रैफिक कंट्रोल टॉवर और दो हैंगर तबाह हो गए. रडार यूनिट और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा, जिससे एयरबेस की संचालन क्षमता अस्थायी रूप से ठप हो गई है. पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने दावा किया कि भारत ने इन एयरबेसों पर अपने फाइटर जेट्स से एयर-टू-सरफेस मिसाइलें दागीं. भारत ने रविवार को कहा है कि पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के 100 आतंकी मारे गए हैं. जबकि 40 से 50 पाकिस्तानी जवान और अधिकारी मारे गए हैं.   recent visitors 97

भारत में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार, मृत्यु दर 130 से घटकर 93 हुई

नई दिल्ली भारत में मातृ और शिशु मृत्य दर में वर्ष 2014 से 2021 के बीच बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। स्वास्थ्य एवं परिवारण कल्याण मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2014-16 के दौरान जो मातृ मृत्यु दर प्रति एक लाख पर 130 थी वह 2021 में घटकर 93 रह गई है। इसी तरह शिशु मृत्यु दर में भी कमी आई है। 2014 में प्रति एक हजार शिशुओं में 39 की मौत होती थी जो अब घटकर 27 रह गई है। यह जानकारी भारत के रजिस्ट्रार जनरल (आरजीआई) की ओर से जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) रिपोर्ट में दी गई। यह भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि यह 2030 तक मातृ मृत्यु दर को 70 तक कम करने के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (एसडीजी) लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। आठ राज्यों केरल (20), महाराष्ट्र (38), तेलंगाना (45), आंध्र प्रदेश (46), तमिलनाडु (49), झारखंड (51), गुजरात (53), और कर्नाटक (63) ने पहले ही इस लक्ष्य को हासिल कर लिया है। इन राज्यों ने स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और मातृ देखभाल सेवाओं में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए हैं। नवजात मृत्यु दर में आई कमी नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) 2014 में 26 से घटकर 2021 में 19 हो गई, जबकि पांच वर्ष से कम आयु की मृत्यु दर 45 से घटकर 31 हो गई। ये संकेतक भारत में नवजात और बच्चों की देखभाल में महत्वपूर्ण प्रगति के दर्शाते हैं। इसके अलावा, जन्म के समय लिंगानुपात 2014 में 899 से सुधरकर 2021 में 913 हो गया। यह लैंगिक संतुलन में सकारात्मक बदलाव का संकेत है। कुल प्रजनन दर (टीएफआर) भी 2014 में 2.3 से घटकर 2021 में 2.0 पर स्थिर रही, जो जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में प्रगति को दर्शाता है। वैश्विक स्तर पर भारत का बेहतर प्रदर्शन संयुक्त राष्ट्र मातृ मृत्यु अनुमान इंटर-एजेंसी समूह (यूएन-एमएमईआईजी) की 2000-2023 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का एमएमआर 2020 से 2023 तक 23 अंक कम हुआ। 1990 से 2023 तक भारत में एमएमआर में 86 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह कमी केवल 48 प्रतिशत थी। संयुक्त राष्ट्र शिशु मृत्यु अनुमान समूह (यूएन-आईजीएमई) की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने यू5एमआर में 78 प्रतिशत, एनएमआर में 70 प्रतिशत, और आईएमआर में 71 प्रतिशत की कमी दर्ज की, जो वैश्विक औसत से कहीं अधिक है। वहीं सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरएस) के आंकड़ों के अनुसार, 2020 और 2021 में भारत की अतिरिक्त मृत्यु दर 9.3% रही। आयुष्मान भारत को क्रेडिट इस प्रगति का श्रेय सरकार की आयुष्मान भारत को दिया जा सकता है। यह विश्व का सबसे बड़ा स्वास्थ्य गारंटी कार्यक्रम है। इसके तहत प्रति परिवार 5 लाख रुपये तक की वार्षिक स्वास्थ्य कवरेज प्रदान किया जाता है। मंत्रालय ने मातृ और शिशु स्वास्थ्य इकाइयों, जैसे मातृ प्रतीक्षा गृह, मातृ-शिशु स्वास्थ्य विंग, ऑब्स्टेट्रिक हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू), और नवजात स्थिरीकरण इकाइयों (एनबीएसयू) की स्थापना पर ध्यान केंद्रित किया है। गर्भवती महिलाओं के लिए मुफ्त संस्थागत प्रसव, सिजेरियन डिलीवरी, मुफ्त परिवहन, दवाएं, निदान, और पोषण सहायता सुनिश्चित की गई है। वहीं, नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) 2014 में प्रति 1000 जन्मों पर 26 से घटकर 2021 में प्रति 1000 जन्मों पर 19 हो गई है। पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर (यू5एमआर) 2014 में प्रति 1000 जन्मों पर 45 से घटकर 2021 में प्रति 1000 जन्मों पर 31 हो गई है। जन्म के समय लिंग अनुपात 2014 में 899 से सुधरकर 2021 में 913 हो गया है। कुल प्रजनन दर 2021 में 2.0 पर स्थिर है, जो 2014 में 2.3 से उल्लेखनीय सुधार है। एसआरएस 2021 रिपोर्ट के अनुसार, देश में केरल (20), महाराष्ट्र (38), तेलंगाना (45), आंध्र प्रदेश (46), तमिलनाडु (49), झारखंड (51), गुजरात (53), कर्नाटक (63)। राज्य पहले ही एमएमआर (2030 तक <=70) का एसडीजी लक्ष्य प्राप्त कर चुके हैं। वहीं, बारह (12) राज्य/केंद्र शासित प्रदेश पहले ही यू5एमआर (2030 तक <=25) का एसडीजी लक्ष्य प्राप्त कर चुके हैं- केरल (8), दिल्ली (14), तमिलनाडु (14), जम्मू और कश्मीर (16), महाराष्ट्र (16), पश्चिम बंगाल (20), कर्नाटक (21), पंजाब (22), तेलंगाना (22), हिमाचल प्रदेश (23), आंध्र प्रदेश (24) और गुजरात (24)। इसके अलावा, 6 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश पहले ही एनएमआर का एसडीजी लक्ष्य (वर्ष 2030 तक <=12) प्राप्त कर चुके हैं, जिसमें शामिल हैं -केरल (4), दिल्ली (8), तमिलनाडु (9), महाराष्ट्र (11), जम्मू और कश्मीर (12) और हिमाचल प्रदेश (12)। दरअसल, सरकार की प्रमुख स्वास्थ्य योजनाओं को गरिमापूर्ण, सम्मानजनक और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गारंटी देने के लिए एकीकृत किया गया है। यह पूरी तरह से निःशुल्क है। इसमें देखभाल से इनकार करने के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई गई है। वहीं, आयुष्मान भारत विश्‍व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य आश्वासन पहल है जो प्रति परिवार 5 लाख रुपये तक का वार्षिक स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करती है, जिससे वित्तीय सुरक्षा और आवश्यक सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित होती है। केंद्रित सहयोग यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक गर्भवती महिला को सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में निःशुल्क परिवहन, दवा, निदान और पोषण सहायता के साथ-साथ सीजेरियन सेक्शन सहित नि:शुल्क संस्थागत प्रसव का अधिकार हो। समावेशी और न्यायसंगत पहुँच सुनिश्चित करने के लिए, मंत्रालय ने मातृत्व प्रतीक्षा गृह, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (एमसीएच) विंग, प्रसूति उच्च निर्भरता इकाइयाँ (एचडीयू)/गहन देखभाल इकाइयाँ (आईसीयू) नवजात शिशु स्थिरीकरण इकाइयाँ (एनबीएसयू), बीमार नवजात शिशु देखभाल इकाइयाँ (एसएनसीयू), माँ-नवजात शिशु देखभाल इकाइयाँ, और जन्म दोषों की जाँच के लिए समर्पित कार्यक्रम स्थापित करके स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर को काफी मजबूत किया है। वहीं, समय से पहले प्रसव के लिए प्रसवपूर्व कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स की व्यवस्‍था, निरंतर सकारात्मक वायुमार्ग दबाव (सीपीएपी) का उपयोग, और सुनने और दृष्टि की जांच के लिए संरचित अनुवर्ती जैसी प्रमुख नैदानिक ​​व्‍यवस्‍थाएं नवजात शिशु के जीवित रहने के परिणामों में सुधार करने में योगदान करती हैं। इन उपायों से सालाना लगभग 300 लाख सुरक्षित गर्भधारण और 260 लाख स्वस्थ जीवित जन्म होते हैं। recent visitors 43

मुख्यमंत्री ने कहा कि समता मूलक समाज से हम उन्नति, विकास और सबके कल्याण के मार्ग प्रशस्त कर सकते

भगवान बुद्ध के आदर्शों का अनुसरण करने वाला एकमात्र देश है भारत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव समता मूलक समाज, प्रेम ,करुणा और सत्य की आधारशिला पर ही समाज की तरक्की संभव: मुख्यमंत्री डॉ. यादव  मुख्यमंत्री ने कहा कि समता मूलक समाज से हम उन्नति, विकास और सबके कल्याण के मार्ग प्रशस्त कर सकते मुख्यमंत्री ने बुद्ध पूर्णिमा पर भगवान बुद्ध को नमन कर अर्पित किये पुष्प भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भगवान बुद्ध के जीवन से ज्ञान लेकर हम सारे भारतीय आगे बढ़ रहे हैं और विश्व बंधुत्व को अपनाते हुए प्रेम ,करुणा, सत्य, समता के भाव को आगे बढा रहे हैं। भगवान बुद्ध राज-पाट छोड़कर जब ज्ञान की खोज मे निकले थे और कठिन तप के बाद जो ज्ञान विश्व को दिया, उसका अनुसरण ही हम सबका उदेश्य होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि समता मूलक समाज से हम उन्नति, विकास और सबके कल्याण के मार्ग प्रशस्त कर सकते है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन के अशोक बुद्ध विहार में बुद्ध पूर्णिमा के पावन पर्व पर भगवान गौतम बुद्ध की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर भारती बौद्ध महासभा द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सभी को भगवान बुद्ध जयंती पर शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मप्र में सांची, बुद्ध धर्मावलंबियों के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। उनके लिए सांची आना सौभाग्य की बात है। बुद्ध सर्किट में सांची का प्रमुख स्थान है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय खगोल विज्ञान के अनुसार निर्धारित की गई तिथि, पूर्णिमा अपने आप में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। पूर्णिमा पर भगवान बुद्ध और संत रविदास जी के साथ ही अन्य बड़े संत, महात्माओं का जन्म हुआ है। पूर्णिमा पर जब चंद्रमा की 16 कलाएं पूर्ण हो जाती हैं तो एक दिव्य प्रकाश निकलता है। ऐसे महापुरुषों ने पूर्णिमा के दिन जन्म लेकर अपने ज्ञान के प्रकाश से विश्व को रौशन किया है। विश्व में भारतीय ज्ञान परंपरा ही ऐसी परंपरा है, जो ऐतिहासिक काल से लेकर वर्तमान समय तक अक्षुण्ण है। सबसे बड़ी बात है कि समाज के लिए आज भी प्रासंगिक है। 5000 साल से भी अधिक पुराने हमारे ज्ञान को आज भी कोई चैलेंज नहीं कर पाया है। भारत विश्व गुरु है, विश्व गुरु रहेगा। इस अवसर पर सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक अनिल जैन कालुहेड़ा, विधायक सतीश मालवीय, सभापति श्रीमति कलावती यादव, जनप्रतिनिधि संजय अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।   recent visitors 37

मुख्यमंत्री ने उज्जैन में संत कंवरराम जी की प्रतिमा का किया अनावरण

उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि संतो का जीवन और आदर्श हमेशा अनुकरणीय होते हैं, जैसे सूर्य स्वयं जलकर हम सबको प्रकाश देता है ,वैसे ही संत भी स्वयं तप कर हम सबके जीवन को ज्ञान और आनंद से प्रकाशित करते हैं । संत कंवरराम जी भी ऐसे ही एक महान संत थे । मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को उज्जैन की सिंधी कॉलोनी अलखधाम नगर के सार्वजनिक उद्यान में संत कंवरराम जी की प्रतिमा का अनावरण समारोह में यह बात कही। उन्होनें समर्थ सेवा संस्थान के द्वारा आयोजित दिव्यांग जनों को नि:शुल्क हवाई यात्रा करवाने पर बने गोल्डन बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड के प्रमाण पत्र का वितरण भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज का दिन अत्यंत शुभ दिन है। आज वैशाख माह की पूर्णिमा है। आज बुध्द पूर्णिमा है। संत कंवरराम जी ने लोगों को सच्चाई और नैतिकता के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। वे सबको साथ में लेकर चलने में विश्वास रखते थे । इस उद्यान में संत कंवरराम जी की प्रतिमा स्थापना से सबको उनका आर्शिवाद मिलता रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नगरपालिका निगम के अधिकारियों से कहा कि उद्यान का नियमित रुप से रख-रखाव किया जाए। उन्होंने अलखधाम नगर के उद्यान को आदर्श उद्यान बनाए जाने के लिए शासन की ओर से सहयोग राशी प्रदान करने की घोषणा भी की। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दिव्यांग जनों को नि:शुल्क धार्मिक यात्रा के प्रमाण पत्र वितरण के पश्चात मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दिव्यांग जनों की सेवा ईश्वर की सेवा के समान है। समर्थ सेवा संस्थान के द्वारा यह एक अत्यंत प्रशंसनीय कार्य किया गया है जो की सबके लिए अनुकरणीय भी है। उल्लेखनीय है की समर्थ सेवा संस्थान के द्वारा अब तक 47 दिव्यांग जनों को धार्मिक हवाई यात्रा नि:शुल्क करवाई गई है। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने अपनी ओर से संस्था के पदाधिकारीयों को शुभकामनाऐं दी। कार्यक्रम में श्याम माहेश्वरी ने संस्थान के बारे में जानकारी प्रदान की। दौलत खेमचंदानी के द्वारा संत कंवरराम जी का जीवन परिचय दिया गया। उन्होनें बताया कि संत कंवर राम जी एक प्रसिद्ध भारतीय संत और कवि थे, जिन्होंने भक्ति साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी कविताओं में जीवन के मूल्यों, प्रेम, और अध्यात्म की गहराई को व्यक्त किया गया है। संत कंवर राम जी का जन्म राजस्थान में हुआ था। उनकी कविताओं में सादगी, प्रेम, और अध्यात्म की भावना देखने को मिलती है। उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों और अंधविश्वासों के खिलाफ आवाज उठाई। संत कंवर राम जी की कविताओं में जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया गया है। उनकी रचनाओं में प्रेम, भक्ति, और अध्यात्म की भावना प्रमुख है। उनकी कविताएं लोगों को प्रेरित करती हैं और जीवन के मूल्यों को समझने में मदद करती हैं। संत कंवर राम जी की विरासत आज भी जीवित है। उनकी कविताएं और शिक्षाएं लोगों को प्रेरित करती हैं और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में मदद करती हैं। इस अवसर पर सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक अनिल जैन कालूहेडा, महापौर मुकेश टटवाल, नगर निगम सभापती श्रीमती कलावती यादव, संजय अग्रवाल, समर्थ सेवा संस्थान के अध्यक्ष श्याम माहेश्वरी, किशोर खंडेलवाल, वासु केसवानी, वट्ठिल नागर, दिपक बेलानी, रवि सोलंकी, महेश परियानी, गोल्डन बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड के पदाधिकारी मनीश विश्नोई एवं अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद थे।   recent visitors 41

सिंहस्थ-2028 के लिए अभी से विस्तृत योजना बनाना शुरू करें: CM यादव

उज्जैन मध्य प्रदेश के उज्जैन में मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने सोमवार सुबह सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर अहम बैठक ली। इस बैठक में बतौर मेला अधिकारी इंदौर कलेक्टर आशीष सिंह विशेष रूप से शामिल हुए। वहीं उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह ने विभागवार अब तक की प्रगति और आगामी योजनाओं की जानकारी प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कार्ययोजना की जानकारी ले कर कहा कि सिंहस्थ 2028 में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सभी आवश्यक तैयारियां की जा रही है। सभी कार्य समयसीमा में गुणवत्ता और मापदंडों के अनुसार हो। सभी कार्यों में समस्त निर्माण एजेंसियां समन्वय बनाकर कार्य करे जिससे श्रद्धालुओं को सिंहस्थ 2028 का अनुभव आस्थामय,भव्य और आलौकिक हो। सिंहस्थ निर्माण कार्यों में शहर के आसपास सड़कों का जाल बिछाकर यातायात सुगम किया जा रहा है।श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए संपूर्ण मेला क्षेत्र की कनेक्टविटी 4 और 6 लेन मार्गो से की जा रही है। सिंहस्थ 2028 के लिए किए जा रहे आवश्यक मार्ग चौड़ीकरण के कार्यों में सभी गणमान्य नागरिकों का भी विशेष ध्यान रख कार्य करे। आवश्यक मार्गो पर एलिवेटेड ब्रिज बनाए जाएंगे जिससे नीचे व्यापार प्रभावित ना हो और ट्रैफिक भी सुचारू रूप से चल सके। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने निर्देश दिए कि सभी सिंहस्थ कार्यों की मॉनिटरिंग आधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल कर करे जिससे कार्य की भौतिक प्रगति के साथ कार्य की गुणवत्ता का आंकलन भी हो सके। सिंहस्थ 2028 अंतर्गत रेलवे से समन्वय बनाकर शासन के सभी आवश्यक विभाग इंटीग्रेटेड कार्य योजना बनाए जिससे श्रद्धालुओं का आवागमन सुव्यवस्थित रूप से हो सके। भारत सरकार संबंधित सभी महत्वपूर्ण कार्यों की सूची बनाए।साधु,संत और श्रद्धालुओं की आस्था और सुविधा को सिरमौर रख सभी कार्य किए जाए। *श्रध्दालुओ को स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के लिए मेडिकल टुरिज्म का हब बनाया जाएगा* मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा दृष्टिगत मेले में आर्मी भी सम्मिलित रहेगी।सभी मुख्य देवस्थानों को जल्द ही देवलोक के रूप में विकसित करने की कार्य योजना बनाए।उज्जैन में न्यायपालिका द्वारा भी न्याययिक संस्था शुरू की जाएगी उसकी कार्ययोजना भी पाइपलाइन में रखे। मेडिसिटी मेडिकल कॉलेज निर्माण की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि श्रध्दालुओ को स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के लिए जिले को मेडिकल टूरिज्म का हब बनाने के लिए योगा,वेलनेस, नेचुरोपैथी ,एलोपैथी और आयुर्वेद के केंद्रों के साथ मेडिकल डिवाइस उद्योग ,फार्मा कंपनियों और मेडिकल रिसर्च संस्थाओं को साथ लेकर एकीकृत कार्ययोजना तैयार करे। नगर निगम और अन्य संस्थाएं भी अपने मद से किए जाने वाले शहर के कार्य निरंतर करे। मालवा क्षेत्र को धार्मिक पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जाएगा । बैठक में संभागायुक्त संजय गुप्ता , सिंहस्थ मेंला अधिकारी आशिष सिंह और कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने जानकारी दी की सिंहस्थ कार्य योजना में अबतक 153 कार्य स्वीक्रत व प्रगतिरत है जिनकी लागत राशी 23,332 करोड रुपए है जिसमें सिंहस्थ मद से 3,728 करोड के 78 कार्य और विभागीय मद से 19,604 करोड के राशी के कार्य है। आज दिनांक तक 27 कार्य प्रारंभ हो चुके है, 94 कार्य निविदा प्रक्रियाधीन है और 32 कार्य प्रशासकीय स्वीकृति प्रक्रियाधीन है। उक्त कार्यो में भवन विकास निगम द्वारा मेडिसिटी मेडिकल कॉलेज का निर्माण 592.3 करोड की लागत से किया जा रहा है आज दिनांक तक 4.5 प्रतिशत भौतिक कार्य पूर्ण हो चुका है । जल संसाधन विभाग के 778.91 करोड की लागत राशी से घाट निर्माण संबंद्ध कार्य , 920 करोड की लागत राशी का कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना में 31.70 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। 614.53 करोड की सेवरखेडी-सिलारखेड़ी परियोजना में 23.60 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है । संगठनात्मक कार्यक्रम में पहुंचेंगे सीएम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आस्था गार्डन में भारतीय जनता पार्टी नगर संगठन द्वारा आयोजित नव नियुक्त मंडल पदाधिकारियों के स्वागत समारोह में शामिल होंगे।बता दें, हाल ही में पार्टी के 12 मंडलों के अध्यक्षों ने अपनी-अपनी कार्यकारिणी घोषित की थी। सभी नव नियुक्त पदाधिकारियों का औपचारिक स्वागत इस अवसर पर किया जाएगा। तिरंगा यात्रा में दिखाई देशभक्ति की झलक सीएम डॉ. मोहन यादव शहीद पार्क से फव्वारा चौक तक निकलने वाली गई तिरंगा यात्रा में भी भाग लेंगे। इस आयोजन के माध्यम से देशभक्ति और जनजागरूकता का संदेश दिया जोएगा, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों की भागीदारी रही। खेलों को मिलेगा नया आयाम रविवार देर रात उज्जैन पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री क्षीरसागर स्टेडियम में अखिल भारतीय फिरोजिया ट्रॉफी 2025 टेनिस बॉल क्रिकेट प्रतियोगिता के समापन समारोह में शामिल हुए। उन्होंने राज्य में खेलों को बढ़ावा देने की दिशा में कई घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने खेल बजट को दोगुना कर दिया है। अब ओलंपिक पदक विजेताओं को 1 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, जो पहले 50 लाख रुपए थी। इसके साथ ही उन्होंने घोषणा की कि राज्य की हर विधानसभा में सर्वसुविधायुक्त खेल मैदान विकसित किए जाएंगे, ताकि युवाओं को खेल के क्षेत्र में बेहतर अवसर मिल सकें। मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पेारेशन विभाग द्वारा हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल अंतर्गत प्रगतिरत 1692 करोड राशी का 44.4 कि.मी लंबाई का इंदौर – उज्जैन 6 लेन मार्ग का 13.64 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है , 195 करोड राशी का 44.14 कि.मी लंबाई का महिदपुर-घोसला मार्ग का 80 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है । 5,017 करोड की राशी का 98.41 कि.मी लंबाई का उज्जैन – जावरा 4 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस कंट्रोल हाई वे का निर्माण किया जा रहा है। श्रध्दालुओं की सुविधा के लिए उज्जैन-मक्सी मार्ग, उज्जैन सिंहस्थ बायपास मार्ग, इंगोरिया -उन्हेल मार्ग और इंदौर उज्जैन वैकल्पिक मार्ग का भी निर्माण किया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग द्वारा 58 करोड की राशी का 8.80 कि.मी लंबाई का नागझिरी दताना मार्ग का 65 प्रतिशत कार्य और 13.45 करोड की राशी का सदावल हेलीपेड का 45 प्रतिशत कार्य पूर्ण किया जा चुका है। 225 करोड रााशी का हरिफाटक लालपुल मुरलीपूरा व्हाया शंकराचार्य चौराहा से चंदूखेडी मार्ग निर्माण , 12.5 कि.मी लंबाई का क्षिप्रा नदी पर अतिरिक्त पुल, 4.5 कि.मी लंबाई का लालपुल से चिंतामन गणेश मार्ग और 78 करोड राशी का 31.75 कि.मी लंबाई का करोहन से नईखेड़ी (पंचक्रोशी मार्ग) , 67 करोड राशी का 22.19 कि.मी लंबाई का उज्जैन बडनगर बायपास ,129.80 … Read more