Thursday, July 9, 2026 2:58 pm

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बात के संकेत दिए हैं कि जीएसटी के मोर्चे पर बड़ी राहत मिल सकती है

नई दिल्ली जीएसटी (GST) के मोर्चे पर बड़ी राहत मिल सकती है, ये हम नहीं कह रहे, बल्कि खुद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बात के संकेत दिए हैं. मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए फाइनेंस मिनिस्टर ने कहा कि टैक्स स्लैब को तर्कसंगत बनाने का प्रोसेस पूरा होने के बाद जीएसटी रेट्स में और भी कमी आएगी. गौरतलब है कि जीएसटी पर 2021 में गठित मंत्रियों के समूह (GoM) निर्णय लेने के काफी करीब बताया जा रहा है. इस बीच वित्त मंत्री द्वारा दिए गए ये संकेत भी जीएसटी कटौती की उम्मीद बढ़ाने वाले हैं. 'इसे और भी घटाया जाएगा…' बिजनेस टुडे पर छपी रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक अवार्ड्स समारोह में बोलते हुए कहा कि रेवेन्यू न्यूट्रल रेट (RNR) 2017 में 15.8% से घटकर 2023 में 11.4% हो गया है. इसमें और भी कमी आने की उम्मीद है. इस बीच Nirmala Sitharaman ने भविष्य में बड़ी कर राहत के संकेत भी दिए और कहा कि GST लागू होने के बाद से दरों में बड़ा बदलाव आया है और आगे इसे आगे भी घटाया जाएगा. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जीएसटी को तर्कसंगत बनाने पर जीओएम ने महत्वपूर्ण प्रगति की है और जीएसटी काउंसिल (GST Council) प्रमुख बदलावों पर अंतिम निर्णय लेने के करीब है. वित्त मंत्री बोलीं- ये काम मैंने अपने ऊपर लिया निर्मला सीतारमण ने कहा कि GoM ने उत्कृष्ट कार्य किया है, लेकिन फिर भी मैंने जीएसटी काउंसिल के सामने प्रस्तुत किए जाने से पहले उनके निष्कर्षों की पूरी तरह समीक्षा करने का कार्य अपने ऊपर ले लिया है. टैक्स स्लैब को तर्कसंगत (Rationalisation Of Tax Slab) बनाने के प्रोसेस में दरों को सुव्यवस्थित करना और उद्योग की महत्वपूर्ण चिंताओं का समाधान करना शामिल है. बैंकों में हिस्सेदारी घटा रही सरकार   वित्त मंत्री ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सरकारी हिस्सेदारी घटाने और ज्यादा से ज्यादा खुदरा निवेशकों (Retail Investors) की भागीदारी को प्रोत्साहित करने की सरकार की प्रतिबद्धता भी दोहराई. निर्मला सीतारमण ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFCs) और माइक्रो-क्रेडिट के मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि कुछ कंपनियां बेहद आक्रामक तरीके से लोन दे थीं, लेकिन RBI के हस्तक्षेप से इन्हें नियंत्रित किया गया है और स्थिति में सुधार देखने को मिल रहा है. इन मुद्दों पर भी खुलकर बोलीं वित्त मंत्री FM Nirmala Sitharaman ने कार्यक्रम में कई अन्य मुद्दों पर भी खुलकर बात की. उन्होंने भारत की मजबूत इकोनॉमिक ग्रोथ पर भरोसा जताते हुए वित्त वर्ष 2021 के बाद से दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में इसकी स्थिति पर जोर दिया. Tariff War के बीच उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) पर कहा कि दोनों पक्ष पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौते का लक्ष्य रखते हैं. recent visitors 77

निर्मला सीतारमण ने कहा- समावेशी विकास सुनिश्चित करना है बजट का लक्ष्य

नई दिल्ली वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को केंद्रीय बजट 2025-26 पर लोकसभा में हुई आम चर्चा का जवाब दिया। उन्होंने पश्चिम एशिया से लेकर यूक्रेन तक जारी युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी अनिश्चितताओं के वातावरण में तैयार इस बजट में 'ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया' को 'विकसित भारत' बनाने की चुनौतियों को साधने की कोशिश की गई है। बजट का उद्देश्य समावेशी विकास के साथ ही अन्नदाता, गरीब, नारी और युवाओं पर फोकस करना था। निर्मला सीतारमण ने कहा, "यह बजट ऐसे समय में आया है जब काफी अनिश्चितताएं हैं और वैश्विक आर्थिक परिवेश में बदलाव ने इसे चुनौतीपूर्ण बना दिया है। इसलिए यदि ऐसी चुनौतियां हैं, जिनके कारण बजट तैयार करना और भी अधिक अनिश्चितताओं वाला हो गया है, तो मुझे कम से कम सदन के समक्ष यह बात रखनी होगी कि ऐसे मुद्दे हैं जो वैश्विक चिंता का विषय हैं और जिनका हमारे बजट निर्माण पर भी प्रभाव पड़ता है।" सीतारमण ने कहा, "बजट राष्ट्रीय विकास आवश्यकताओं को राजकोषीय प्राथमिकताओं के साथ संतुलित करता है। सरकार पूंजीगत व्यय के लिए 99 प्रतिशत उधार का उपयोग कर रही है, जो सकल घरेलू उत्पाद का 4.3 प्रतिशत है।" वित्त मंत्री ने बजट के चार मुख्य लक्ष्य बताए जिनमें जीडीपी विकास में तेजी लाना, समावेशी विकास सुनिश्चित करना, निजी क्षेत्र के निवेश को एकीकृत करना और घरेलू निवेश को बढ़ावा देना शामिल है। सीतारमण ने आगे कहा कि बजट का फोकस गरीबों, युवाओं, अन्नदाता और महिलाओं पर है। इसका उद्देश्य कृषि, एमएसएमई और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाओं और सुधारों को सामने लाना है, जो विकास और ग्रामीण समृद्धि और लचीलेपन के साथ-साथ विकास के इंजन के रूप में काम करेंगे। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में वैश्विक संघर्ष जारी है, रूस-यूक्रेन युद्ध जारी है, वैश्विक जीडीपी में स्थिरता और उभरते बाजारों में स्थिर मुद्रास्फीति सभी विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में माहौल को खराब कर रहे हैं। हमारे पास आदर्श रूप से ऐसी स्थिति है जो मुक्त व्यापार को प्रोत्साहित करे, हम कोई प्रतिबंध नहीं देख रहे हैं, हम वैश्वीकरण के लिए बहुत दृढ़ता से वचनबद्ध हैं। recent visitors 48