Monday, July 6, 2026 1:49 pm

गीता जयंती पर भोपाल में रचा गीता पाठ का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड, साथ में कर्म योग का पाठ करेंगे 7 हजार आचार्य

भोपाल भोपाल में 7 हजार आचार्यों और प्रतिभागियों ने गीता के तीसरे अध्याय 'कर्म योग' का सस्वर पाठ किया।भोपाल में गीता जयंती के मौके पर बुधवार को 7 हजार प्रतिभागियों ने सामूहिक गीता पाठ किया। इनमें 3721 आचार्य और बटुक शामिल थे। इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी मौजूद रहे। मोतीलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में गीता के तीसरे अध्याय 'कर्म योग' का सस्वर पाठ सुबह करीब साढे़ 11 बजे शुरू होकर 9 मिनट तक चला। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के एजुकेटर विश्वनाथ ने विश्व रिकार्ड की घोषणा की। जिसके बाद सीएम यादव को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड का सर्टिफिकेट सौंपा गया। भक्तिमय गीतों की प्रस्तुति राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान श्रीमदभगवद पुराण और गौ एवं गोपाल चित्र प्रदर्शनी का संयोजन किया गया है। साथ ही साधो बैंड मुंबई द्वारा भक्तिमय गीतों की सुरमई प्रस्तुति दी गई। मध्य प्रदेश में आ रहे पर्यटकों और आगंतुकों को गीता की महिमा से अवगत कराने के लिए प्रदेश के होटलों में श्रीमद् भगवद्गीता, वाल्मीकि रामायण और रामचरित मानस की एक-एक प्रति रखने की पहल भी की जा रही है। इस दौरान सीएम ने प्रदेश की 1.28 करोड़ लाड़ली बहनों के बैंक खातों में सिंगल क्लिक से 1250 रुपए डाले। 55 लाख सामाजिक सुरक्षा पेंशन हितग्राहियों को भी 334 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए। उज्जैन में भी अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के चौथे दिन बुधवार को कॉलेज, स्कूल और संस्कृत विद्यालय के बटुक, आचार्य और विद्यार्थियों ने सामूहिक गीता पाठ किया। 5108 बच्चों ने सुबह 11 बजे गीता का पाठ शुरू किया, जो दोपहर 12 बजे तक चला। सीएम बोले-किसी पूजा पद्धति से हमारा विरोध नहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, 'किसी पूजा पद्धति से हमारा विरोध नहीं है। हमने इंद्र का दरबार नहीं देखा लेकिन आज उसका लघु रूप यहां दिखाई दे रहा है। 10 हजार श्लोक यहां पढ़े गए। 5 हजार साल पहले जो रिकॉर्ड बना था, उस समय गिनीज बुक नहीं थी। लेकिन उस समय भगवान के मुखारबिंद से निकले एक-एक शब्द लिपिबद्ध हुए थे। आज एमपी नहीं, दुनिया के अंदर पहली बार भगवान के मुंह से निकली गीता के पाठ का रिकॉर्ड बना है। आने वाले समय में इससे बड़ा कार्यक्रम कोई और करे तो हम आनंद में डूबेंगे।' मोहन सरकार के कार्यकाल का एक वर्ष पूर्ण होने पर आज से मुख्यमंत्री जन-कल्याण पर्व और जन-कल्याण अभियान का शुभारंभ किया जा रहा है। गूगल पर गीता के बारे में सबसे ज्यादा सर्च मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के दिन हमने गीता जयंती का उत्सव मनाया, आज के दिन ही भगवान ने स्वयं को सांदीपनि आश्रम में शिक्षार्थी के रूप में रखकर शिक्षा ग्रहण की थी। चारों वेद, 18 पुराण, 64 कलाएं…सबका निचोड़ समाज को देने का प्रयास किया। आजकल गूगल के सर्च इंजन के माध्यम से दुनिया में सबसे ज्यादा जिस पुस्तक के बारे में लोग जानकारी जानना चाहते हैं, वह हमारी पवित्र गीता जी हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म से लेकर मृत्यु तक अपनी लीलाओं और आदर्शों के माध्यम से समूचे समाज को प्रेरणा दी है। उनके जीवन और पवित्र धर्मग्रंथ गीता की शिक्षा से प्रदेशवासियों के जीवन को आलोकित करने और सनातन संस्कृति से जोड़ने के लिए यह प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार के एक साल पूरे होने पर जन कल्याण पर्व आज से शुरू हो रहा है। 40 दिन तक 76 प्रकार की सरकारी योजनाओं से लोगों को जोड़ने का काम चलेगा। आचार्यों और प्रतिभागियों को QR बैंड पहनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के लिए मोतीलाल नेहरू स्टेडियम के ग्राउंड पर आए हर आचार्य और प्रतिभागी के हाथ में एक बैंड पहनाया गया था। इस बैंड में एक QR कोड है, इसी से गीता पाठ करने वाले प्रतिभागियों की काउंटिंग की गई। इस मौके पर बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएं भी मौजूद रहीं। हिंदी कलेंडर के मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन गीता जयंती मनाई जाती है। इस दिन मोक्षदा एकादशी व्रत भी किया जाता है। गुना के गुरुकुल से आए 40 बटुक गुना के श्री परशुराम संस्कृत वेद विद्या गुरुकुल, कुंभराज से 40 बटुक भी कार्यक्रम में शामिल हुए। इन बटुकों को गीता के 18वें अध्याय के 70 श्लोक कंठस्थ हैं। सामूहिक गीता पाठ में शामिल हुए आचार्यों, बटुकों सहित सभी प्रतिभागियों के बैंक खातों में प्रदेश सरकार की ओर से ढाई-ढाई हजार रुपए की राशि डाली जाएगी। इस राज्यस्तरीय कार्यक्रम के दौरान श्रीमद भागवत पुराण और गौ एवं गोपाल चित्र प्रदर्शनी भी दिखाई गई। मुंबई के साधो बैंड ने भक्तिमय गीत पेश किए। उज्जैन में 5108 विद्यार्थियों ने किया गीता पाठ उज्जैन में सामूहिक गीता पाठ के लिए स्कूल, कॉलेजों और संस्कृत गुरुकुल के 5108 विद्यार्थी सुबह ही कालिदास अकादमी परिसर पहुंच गए थे। सुबह 11 बजे एक स्वर में गीता पाठ शुरू हुआ, जो दोपहर 12 बजे तक चला। यहां शाम 7 बजे सारस्वत उद्बोधन होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृति, पर्यटन धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी करेंगे। मुख्यमंत्री भी मौजूद रहेंगे। लाल परेड मैदान की ओर कई मार्ग परिवर्तित लाल परेड मैदान में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान सुबह आठ बजे से कार्यक्रम स्थल के आसपास के कुछ मार्ग परिवर्तित किए गए हैं। कार्यक्रम के दौरान रोशनपुरा चौराहा से गांधी पार्क, लालपरेड मैदान की ओर, डीबी सिटी तिराहे से जेल रोड, लिली चौराहे से जहांगीराबाद पर यातायात का काफी दबाव रहेगा। recent visitors 86

गीता जयंती विशेष: सनातन संस्कृति की ध्वजा विश्व में फहरा रही गीता प्रेस

विश्व का सबसे बड़ा प्रकाशन है गीता प्रेस हितानंद  शर्मा धर्म स्थापना के लिए मानव इतिहास में हुए सबसे भीषण महायुद्ध के बीच भगवान श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया गीता का ज्ञान आज भी अमृत रूप में प्रवाहित हो रहा है। श्रीमद्भगवत गीता केवल अर्जुन के लिए नहीं, सनातन समाज के लिए नहीं बल्कि विश्व मानवता के शुभ के लिए ईश्वरीय संदेश है। गीता के माध्यम से व्‍यक्‍त‍ि स्‍वयं को जान सकता है और ईश्वरीय सत्ता का अनुभव भी कर सकता है। गीता जयंती मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी तिथि को मनाई जाती है। यह वही दिन है जब श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। गीता के ईश्वरीय संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य ‘गीता प्रेस गोरखपुर’ द्वारा पिछले 102 वर्षो से बिना रुके पूरे श्रद्धाभाव से किया जा रहा है। भारत के घर-घर में श्रीमद्भगवत गीता और रामायण की प्रति पहुंचाने का श्रेय गीता प्रेस को ही जाता है। गीता प्रेस अब तक श्रीमद्भगवत गीता की 16 करोड़ 21 लाख प्रतियां प्रकाशित कर श्रद्धालु पाठकों तक पहुंचा चुका है। अब तक  41 करोड़ 71 लाख पुस्तकें छापकर विश्व का सबसे बड़ा प्रकाशन संस्थान होने के बाद भी आश्चर्य की बात यह है कि गीता प्रेस न तो किसी से चंदा लेता है और न ही अपने प्रकाशनों में विज्ञापन ही स्वीकार करता है। जब वर्ष 2021 में गीता प्रेस को उसके उल्लेखनीय कार्यों के लिए भारत सरकार का गरिमामय ‘महात्मा गांधी शांति पुरस्कार’ प्रदान किया गया तो संस्थान ने पुरस्कार को पूरे सम्मान के साथ ग्रहण किया, पर इसके साथ प्रदान की जाने वाली एक करोड़ रुपए की पुरस्कार राशि सरकार को वापस लौटा दी थी। इसके बाद प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी भी इस संस्थान के दर्शन के लिए आए थे। लागत मूल्य से 50 से लेकर 90 प्रतिशत तक कम कीमत पर बहुमूल्य  पुस्तकें पाठकों तक पहुंचाने वाला गीता प्रेस वास्तव में सामाजिक-धार्मिक जागरण का एक आंदोलन ही है। भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण की पावन धरा उत्तरप्रदेश का प्रवास तो पूर्व में भी होता ही रहा है किन्तु इसी वर्ष संयोग से संगठन के कार्य से मुझे गोरक्ष प्रांत यानी गोरखपुर सहित आसपास के क्षेत्रों का प्रभार सौंपा गया। ऐसे में गोरखपुर में गोरक्ष पीठ सहित एक महत्वतपूर्ण तीर्थ गीता प्रेस के दर्शन का सौभाग्य भी मिला। प्रकाशन का केंद्रीय कार्यालय गोरखपुर में ही है। हिन्दू  धर्म, अध्यात्म, दर्शन सहित मानव कल्याण के अनेक विषयों पर पुस्तकें प्रकाशित कर चुका गीता प्रेस आधुनिक समय का तीर्थ ही है। राजा भागीरथ के महान तप से पुण्य प्रवाहिनी मां गंगा का धरती पर अवतरण संभव हो सका था। इक्ष्वाकु वंश के राजा भागीरथ ने अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए गंगा को धरती पर लाने का प्रण पूर्ण किया था। इसी प्रकार गीता प्रेस के संस्थापक, ब्रह्मलीन श्री जयदयालजी गोयंदका के ऐसे ही महान तप का सुफल यह प्रकाशन है। वैसे तप तुलना का विषय नहीं है किन्तु  धर्म, संस्कृति, अध्यात्म, भक्ति एवं मानवता के उद्धार के लिए गोयंदका जी द्वारा स्थापित गीता प्रेस आज भी पुण्य प्रवाहमयी ज्ञान सरिता है। गीता प्रेस के आदि संपादक श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार ‘भाईजी’ के उल्लेख के बिना गीता प्रेस की चर्चा पूर्ण नहीं होगी।  भाईजी वीर सावरकर के निकट के क्रांतिकारी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। अपने मौसेरे भाई जयदयालजी के अगाध गीता प्रेम एवं ज्ञान को देखते हुए भाईजी ने श्रीमद्भगवत गीता को लागत मूल्य से भी कम में जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। इस संकल्प की पूर्ति के लिए अपने एक प्रकाशन की आवश्यकता थी जो गोरखपुर में प्रारंभ हुआ। प्रचार-प्रसार से दूर एक अकिंचन सेवक और निष्काम कर्मयोगी की तरह भाईजी ने सनातन संस्कृति की मान्यताओं को घर-घर तक पहुँचाने में जो अतुलनीय योगदान दिया है, इतिहास में इसका उदाहरण मिलना कठिन है।   गीता  प्रेस  का मुख्य उद्देश्य हिंदू धर्म के सिद्धांतों को गीता, रामायण, उपनिषद, पुराणों, प्रख्यात संतों के प्रवचन एवं चरित्र-निर्माण की अन्य पुस्तकें-पत्रिकाएं प्रकाशित कर इन्हें लागत मूल्य से भी कम कीमत में समाज में पहुंचाना है। गीता प्रेस मानव जीवन के उत्थायन और सभी की भलाई के लिए प्रयासरत है। इसका उद्देश्य शांति, आनंद और  मानव जाति के अंतिम उत्थान के लिए गीता में प्रतिपादित जीवन जीने की कला को बढ़ावा देना है। संस्थान का संचालन कोलकाता के गोविंद भवन द्वारा किया जाता है। इसका प्रबंधन एक गवर्निंग काउंसिल (ट्रस्ट बोर्ड) करती है। गीता प्रेस में दिन की शुरुआत सुबह की प्रार्थना से होती है। एक व्यक्ति दिनभर घूम-घूम कर प्रत्येक कार्यकर्ता को कई बार भगवान का नाम स्‍मरण कराता है। गीता प्रेस के अभिलेखागार में भगवद् गीता की 100 से अधिक व्याख्याओं सहित 3,500 से अधिक पांडुलिपियां रखी हैं। गीता प्रेस के मासिक पत्रिका ग्रंथ ‘कल्याण’ के नए संस्करण के साथ 3000 से अधिक ऑनलाइन संग्रह उपलब्ध हैं। 4 मई 1923 को गीता प्रेस की स्थापना की गई थी तब पुस्तकें छापने का काम बोस्टन कंपनी की प्रिंटिंग प्रेस से शुरू किया गया था। पैरों से चलाई जाने वाली यह मशीन 500 रुपए में अमेरिका से मंगवाई गई थी। अब संस्थान आधुनिक संसाधनों का सदुपयोग करता है इसीलिए मैनुअल और मशीन दोनों माध्यमो से प्रकाशन का काम होता है। गीता प्रेस इन अर्थों में भी विश्व का अनूठा प्रकाशन है क्योंकि यह अपनी पुस्तकों में मात्रात्मक, व्याकरणिक, शाब्दिक अथवा तथ्यात्मक त्रुटि बताने वाले को पुरस्कृत करता है हालाँकि पुस्तकों में ऐसी त्रुटियां मिलती नहीं हैं। बीते वर्षों में मीडिया में इस प्रकार के समाचार आए थे कि गीता प्रेस आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण बंद होने की कगार पर है किन्तु संस्थान के भ्रमण में यह भी जानने मिला कि स्थिति ऐसी नहीं है। समाज के सहयोग से गीता प्रेस 300 करोड़ रुपए वार्षिक टर्न ओवर वाला समृद्ध संस्थान है और प्रति वर्ष 17 भाषाओं में पुस्तकें प्रकाशित कर रहा है। संस्थान ने अपनी पुस्तकें इंटरनेट पर ऑनलाइन भी उपलब्ध कराई हैं जहां से कोई भी इन्हें  डाउनलोड कर सकता है और यह पूरी तरह निशुल्क है। संस्थान का कार्यालय भी दर्शनीय है। इसके भव्य प्रवेश द्वार के स्तंभ एलोरा के प्राचीन गुफा-मंदिर के स्तंभों की शैली में निर्मित हैं। वहीं अर्जुन के रथ के सारथी बन श्रीकृष्ण गीता का उपदेश … Read more

मध्य प्रदेश में गीता जयंती भव्य रूप में मनाई जाएगी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Dr. Mohan Yadav) ने कहा है कि प्रदेश में अनेक त्योहार जैसे जन्माष्टमी, विजयादशमी और गोवर्धन पूजा आदि सरकार और समाज ने मिलकर मनाए हैं. इसी क्रम में राज्य सरकार पूरे प्रदेश में भव्य रूप में गीता जयंती (Geeta Jayanti) मनाएगी. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पटेल नगर स्थित इस्कॉन मंदिर (Patel Nagar Iskcon Mandir) में श्री राधावल्लभ जी के श्रीविग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा और दीपदान महोत्सव में हिस्सा लिया. इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भक्त गण को बधाई दी. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज से लगभग 20 वर्ष पूर्व उज्जैन (Ujjain) में इस्कॉन मंदिर प्रारंभ होने पर उन्होंने स्वामी भक्त निवास जी के सानिध्य में कार्यक्रम में हिस्सा लिया था. आज पुनः उनके साथ इस कार्यक्रम में सम्मिलित होने का सौभाग्य मिला है जहां-जहां श्री कृष्ण के चरण पड़े…-सीएम मोहन यादव इस्कॉन मंदिर के दिव्य प्रांगण से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा, 'मध्य प्रदेश सरकार उन सभी स्थानों को तीर्थ स्थल बनाएगी, जहां भगवान श्री कृष्ण के चरण पड़े हैं.' मुख्यमंत्री ने कार्तिक पूर्णिमा पर हुए इस उत्कृष्ट आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई दी. इस दौरान डॉ. मोहन यादव ने इस्कॉन मंदिर परिसर में भक्ति में लीन एक साढ़े पांच वर्ष के बालक कृष्णप्रेम को गोद में उठाकर स्नेह दुलार भी किया. आयोजित होगी खास शिक्षा प्रतियोगिता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नवंबर के अंतिम सप्ताह में आयोजित श्रीमद् भगवत गीता के जीवन मूल्यों पर आधारित शिक्षा प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा. स्कूल शिक्षा एवं इस्कॉन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इस प्रतियोगिता के माध्यम से गीता की अमूल्य शिक्षा और जीवन मूल्यों को गहराई से समझने और उन्हें आत्मसात करने का अद्भुत अवसर मिलेगा. उन्होंने कहा कि श्रीमद् भगवत गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की महान कला सिखाने वाला मार्गदर्शक ग्रंथ भी है. दीपदान महोत्सव में पहुंचे सीएम मोहन यादव मध्य प्रदेश के सीएम डॉ. यादव ने कहा, ''आज से लगभग 20 वर्ष पूर्व उज्जैन में इस्कॉन मंदिर शुरू होने पर उन्होंने स्वामी भक्त निवास जी के सानिध्य में कार्यक्रम में हिस्सा लिया था. आज फिर उनके साथ इस कार्यक्रम में सम्मिलित होने का सौभाग्य मिला है. वे कृपा पूर्वक इंग्लैंड से यहां पधारे हैं. भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े स्थान बनेंगे तीर्थ स्थल- सीएम मोहन यादव उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े स्थलों को लेकर बड़ी बात कही. सीएम ने कहा, ''मध्य प्रदेश सरकार उन सभी स्थानों को तीर्थ स्थल बनाएगी, जहां भगवान श्रीकृष्ण के चरण पड़े हैं.'' मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कार्तिक पूर्णिमा पर हुए इस उत्कृष्ट आयोजन के लिए आयोजकों को भी बधाई दी. उन्होंने इस्कॉन मंदिर परिसर में भक्ति में लीन साढ़े पांच वर्ष के बालक कृष्णप्रेम को गोद में उठाकर स्नेह और दुलार किया. recent visitors 68