Wednesday, July 8, 2026 10:25 pm

आवास को लेकर 15 मार्च से शुरू होगा सर्वे, जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाएगी आपका घर

जम्मू शहर में रहने वाले गरीब लोगों का घर बनाने का सपना साकार होने जा रहा है। सरकार ऐसे लोगों की सूची तैयार करने जा रही है जिनके पास जमीन तो है लेकिन गरीबी के कारण घर नहीं बना पा रहे। आवास एवं शहरी विकास विभाग 15 मार्च से इसके लिए सर्वे शुरू करने जा रहा है। 3 से 9 लाख रुपये वार्षिक आमदनी वाले ऐसे परिवारों को सूचीबद्ध कर प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी)- 2.0 के तहत घर बनाने का मौका दिया जाएगा। विभाग मार्च महीने में इस सर्वे को पूरा करेगा जिसमें विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की तैनाती रहेगी। इतना ही नहीं लोग ऑनलाइन भी आवेदन कर सकेंगे। जांच-पड़ताल के बाद योग्य आवेदक को योजना का लाभ मिल पाएगा। पीएम योजना के तहत मिलेगा पक्का मकान प्रधानमंत्री आवास योजना- शहरी 2.0 योजना का उद्देश्य सभी के लिए आवास के दृष्टिकोण के साथ देश भर के सभी पात्र शहरी परिवारों को हर मौसम के अनुकूल पक्के घर उपलब्ध कराना है। आवास और शहरी मामलों का मंत्रालय शहरी क्षेत्रों में पात्र परिवारों को बीएलसी, एएचपी,आईएसएस कार्यक्रम के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए योजना को लागू करता है। पिछले वर्ष करीब 350 लाख रुपये की राशि जारी की गई थी। सरकार ने जम्मू शहर के सुंजवां क्षेत्र में इस योजना के तहत 336 फ्लैट्स भी बनाए थे जिन्हें पिछले वर्ष आवंटित किया गया। यह है कार्यक्रम 1. लाभार्थी के नेतृत्व में निर्माण (बीएलसी): योजना का बीएलसी कार्यक्षेत्र 3 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले ईडब्ल्यूएस श्रेणियों से संबंधित व्यक्तिगत पात्र परिवारों को 2.5 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान करेगा, ताकि वे अपनी उपलब्ध भूमि पर 45 वर्गमीटर तक के नए पक्के घर (एक हर मौसम के अनुकूल आवास इकाई) का निर्माण कर सकें। 2. भागीदारी में किफायती आवास (एएचपी): भागीदारी में किफायती आवास (एएचपी) कार्यक्षेत्र ईडब्ल्यूएस लाभार्थियों को पक्का घर खरीदने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करेगा। इस वर्टिकल के अंतर्गत 30-45 वर्गमीटर कार्पेट एरिया वाले किफायती मकानों का निर्माण सार्वजनिक/निजी एजेंसियों द्वारा किया जाएगा तथा उन्हें ईडब्ल्यूएस श्रेणी के पात्र लाभार्थियों को आवंटन के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। एएचपी परियोजनाओं में ईडब्ल्यूएस लाभार्थी को संपत्ति के खरीद मूल्य पर केंद्रीय और राज्य एजेंसियों द्वारा ईडब्ल्यूएस (वार्षिक आय 3 लाख रुपये तक) फ्लैट के लिए 2.5 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। 3. ब्याज सब्सिडी योजना (आईएसएस): पीएमएवाई-यू 2.0 की ब्याज सब्सिडी योजना (आईएसएस) के तहत, ईडब्ल्यूएस/एलआईजी और एमआईजी के पात्र लाभार्थियों को घरों की खरीद/पुनर्खरीद/निर्माण के लिए 01.09.2024 या उसके बाद स्वीकृत और वितरित किए गए गृह ऋण पर सब्सिडी प्रदान की जाएगी। योजना के अंतर्गत ईडब्ल्यूएस/एलआईजी/एमआईजी लाभार्थी के रूप में पहचान के लिए व्यक्तिगत ऋण आवेदक को आय का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। क्या है पीएमएवाई-यू 2.0 प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 (पीएमएवाई-यू 2.0) का उद्देश्य पात्र परिवारों, लाभार्थियों को शहरी क्षेत्रों में किफायती मकानों के निर्माण, खरीद या किराये पर लेने के लिए केंद्रीय सहायता प्रदान करना है। लाभ प्राप्त करने के लिए पात्रता मानदंड शहरी क्षेत्रों में रहने वाले ईडब्ल्यूएस/एलआईजी/एमआईजी वर्ग के परिवार, जिनके पास अपने या अपने परिवार के किसी सदस्य के नाम पर कोई पक्का मकान नहीं है, वे पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत मकान खरीदने/निर्माण करने या किराये पर लेने के लिए पात्र हैं। यह रहेगी व्यवस्था ईडब्ल्यूएस परिवारों को 3 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले परिवारों के रूप में परिभाषित किया गया है। एलआईजी परिवारों को 3 लाख रुपये से 6 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले परिवारों के रूप में परिभाषित किया गया है। एमआईजी परिवारों को 6 लाख रुपये से 9 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले परिवारों के रूप में परिभाषित किया गया है। कैसे कर सकते हैं आवेदन -योजना के तहत निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाले लाभार्थी पीएमएवाई-यू 2.0 के एकीकृत वेब पोर्टल, सामान्य सेवा केंद्रों (सीएससी) के माध्यम से या वे जिस संबंधित शहरी स्थानीय निकाय/नगर पालिका में रह रहे हैं, वहां जाकर निर्धारित प्रारूप में आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। दस्तावेज चाहिए लाभार्थी को अपने आधार कार्ड की प्रति, बैंक खाते का विवरण, निर्धारित प्रारूप के अनुसार पात्रता मानदंड को पूरा करने का वचन, बीएलसी के मामले में भूमि स्वामित्व दस्तावेज। recent visitors 59

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बताया- संगठनों में स्थानीय युवाओं की भर्ती में कमी आई है, जो एक सकारात्मक संकेत है

जम्मू-कश्मीर घाटी में आतंकी गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षाबलों ने अपनी रणनीतियों को और भी सख्त किया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार, आतंकी संगठनों में स्थानीय युवाओं की भर्ती में कमी आई है, जो एक सकारात्मक संकेत है। यह कम भर्ती दर दर्शाता है कि सुरक्षाबलों की ओर से किए जा रहे ऑपरेशन्स, खुफिया जानकारी की बेहतर सांझेदारी और स्थानीय समुदाय के साथ बेहतर संवाद के कारण आतंकी संगठनों के लिए स्थानीय समर्थन में कमी आई है। साथ ही, सुरक्षाबलों ने घाटी में आतंकवादियों के नेटवर्क को निष्क्रिय करने के लिए ऑपरेशनल सक्रियता बढ़ा दी है, जिससे आतंकियों की गतिविधियों पर अंकुश लगा है। यह स्थानीय युवाओं के लिए भी एक संदेश है कि आतंकवाद में शामिल होने के बजाय, वे विकास और शांति की दिशा में काम कर सकते हैं। इस प्रकार, सुरक्षाबलों का दबाव, बेहतर खुफिया जानकारी और स्थानीय समुदाय का सहयोग आतंकवादियों की भर्ती में कमी के कारण महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।  हाल के समय में सरकार ने आतंकवाद और ड्रग तस्करी के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। एक महीने के भीतर आतंकवादियों के समर्थकों और ड्रग डीलरों की कुल 7 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की गई है। इस प्रकार की कार्रवाइयों से आतंकवादियों को वित्तीय मदद और पनाह मिलना मुश्किल हो गया है। इसका उद्देश्य कश्मीरी युवाओं को आतंकवाद के रास्ते से दूर रखना और आतंकवादियों के नेटवर्क को खत्म करना है। इस तरह की सख्त कार्रवाई से यह संदेश भी दिया जा रहा है कि आतंकवाद के खिलाफ सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है, और कश्मीर में शांति और विकास की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।   recent visitors 66

सुरक्षाबलों को आतंकियों के छिपे होने की जानकारी मिली थी, किया एक आतंकी ढेर, मुठभेड़ जारी

जम्मू जम्मू-कश्मीर में दाचीगाम जंगल के ऊपरी इलाकों में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में एक आतंकी को मार गिराया है। सुरक्षाबलों को इस इलाके में आतंकियों के छिपे होने की जानकारी मिली थी। इसी सूचना के आधार पर सुरक्षाकर्मियों ने इलाके में घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया। आतंकियों ने खुद को गिरा देख सुरक्षाबलों पर फायरिंग कर दी। इसके बाद जवानों में भी जवाबी कार्रवाई शुरू की। जवानों ने एक आतंकी को मार गिराया है। फिलहाल, अभी दोनों ओर से गोलीबारी जारी है। इससे पहले कश्मीर जोन पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ एक पोस्ट में कहा, “विशिष्ट खुफिया इनपुट के आधार पर, सुरक्षाबलों के संयुक्त दलों ने दाचीगाम जंगल के ऊपरी इलाकों में सीएएसओ (घेराबंदी और तलाशी अभियान) शुरू किया है। ऑपरेशन जारी है।” बता दें कि आतंकवादियों द्वारा किए गए कई हमलों के बाद हाल के दिनों में सुरक्षाबलों ने आतंकवादियों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। 20 अक्टूबर को आतंकवादियों ने गांदरबल जिले के गगनगीर इलाके में एक बुनियादी ढांचा परियोजना कंपनी के श्रमिकों के शिविर पर हमला किया था। इस हमले में सात लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद 24 अक्टूबर को बारामूला जिले के गुलमर्ग के बोटापथरी इलाके में सेना के वाहन पर हमला कर आतंकवादियों ने सेना के तीन जवानों और दो नागरिक कुलियों की हत्या कर दी थी। वहीं, 2 नवंबर को श्रीनगर में पर्यटक स्वागत केंद्र के पास व्यस्त संडे मार्केट में आतंकवादियों ने ग्रेनेड फेंका था। इसमें एक 42 वर्षीय महिला की मौत हो गई थी, जबकि नौ अन्य नागरिक घायल हो गए थे। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इन दो हमलों के बाद कहा कि इन हमलों में शामिल लोगों को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।   recent visitors 64

जम्मू-कश्मीर में मौसम की स्थिति में सुधार होगा, प्रसिद्ध स्की रिसॉर्ट गुलमर्ग और गुरेज घाटी में आज बर्फबारी हुई

श्रीनगर उत्तरी कश्मीर में प्रसिद्ध स्की रिसॉर्ट गुलमर्ग और गुरेज घाटी में आज सुबह ताजा बर्फबारी हुई है, जबकि मौसम विभाग ने दोपहर से मौसम में सुधार की भविष्यवाणी की है। एक अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि सुबह से गुलमर्ग में एक इंच बर्फबारी हुई है, जबकि गुरेज घाटी में भी बर्फबारी हुई है। मौसम विभाग के निदेशक डॉ. मुख्तार अहमद ने कहा कि दोपहर से जम्मू-कश्मीर में मौसम की स्थिति में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि 17 से 23 नवंबर तक आमतौर पर मौसम शुष्क रहने की संभावना है, जबकि 24 नवंबर को ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना है। मौसम विभाग ने एक एडवाइजरी भी जारी की है, जिसमें पर्यटकों, ट्रेकर्स और यात्रियों से इसी के अनुसार योजना बनाने को कहा गया है। recent visitors 172

जम्मू-कश्मीर : सोपोर में सेना ने 2 आतंकियों को किया ढेर, हथियार और गोला-बारूद बरामद

सोपोर जम्मू-कश्मीर के सोपोर में सेना ने 2 आतंकवादियों को मार गिराया है। इनके पास से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद हुए हैं। मारे गए दहशतगर्दों की पहचान की जा रही है। छिपे हुए कुछ और आतंकियों के खिलाफ आतंकवाद विरोधी अभियान शुक्रवार को दूसरे दिन भी जारी है। अधिकारियों ने कहा कि मुठभेड़ गुरुवार शाम को उस समय शुरू हुई, जब संयुक्त बलों ने दहशतगर्दों की मौजूदगी की सूचना के बाद सोपोर के पानीपोरा इलाके में घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया। अधिकारियों ने कहा, 'तलाशी अभियान के दौरान गोलीबारी हुई। इस दौरान 2 आतंकियों को ढेर कर दिया गया।' उन्होंने बताया कि प्रारंभिक गोलीबारी के बाद अतिरिक्त बलों को क्षेत्र में भेजा गया था। पूरी रात सुरक्षा बलों ने इलाके के चारों ओर कड़ी घेराबंदी बनाए रखी और शुक्रवार तड़के भी गोलीबारी हुई थी। पुलिस ने गुरुवार को सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच गोलीबारी की पुष्टि कर दी थी। उत्तरी कश्मीर में मंगलवार के बाद से यह तीसरी मुठभेड़ है। इससे पहले 2 मुठभेड़ों में कुपवाड़ा और बांदीपोरा जिलों में अलग-अलग मुठभेड़ों में दो आतंकवादी मारे गए थे। 2 ग्राम रक्षा गार्ड को अगवा करने के बाद हत्या वहीं, जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के ऊपरी इलाकों में गुरुवार को आतंकवादियों ने दो ग्राम रक्षा गार्ड को अगवा करने के बाद उनकी हत्या कर दी। सनातन धर्म सभा संगठन ने इन हत्याओं के विरोध में शुक्रवार को किश्तवाड़ में पूर्ण बंद का आह्वान किया। हत्या की इस घटना के बाद पुलिस और सेना ने घने जंगल वाले इलाके में व्यापक संयुक्त तलाश अभियान शुरू किया। ओहली-कुंतवाड़ा निवासी नजीर अहमद और कुलदीप कुमार बृहस्पतिवार सुबह अधवारी क्षेत्र के मुंजला धार जंगल में अपने मवेशियों को चराने गए थे, लेकिन वे वापस नहीं लौटे। आतंकवादियों की ओर से उनका अपहरण कर हत्या किए जाने की खबरों के बीच पुलिस दल उन्हें खोजने निकले थे।   recent visitors 73

श्रीनगर में ड्यूटी पर तैनात सेना के जवान की गोली लगने से मौत, मामले की जांच के आदेश दिए

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर शहर में शनिवार को रोड ओपनिंग की ड्यूटी पर तैनात सेना के एक जवान की दुर्घटनावश गोली लगने से मौत हो गई। मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। अधिकारियों ने बताया, “श्रीनगर शहर के रावलपोरा हाईवे इलाके में रोड ओपनिंग पार्टी (आरओपी) के हिस्से के रूप में तैनात एक सेना के जवान की दुर्घटनावश गोली चलने से मौत हो गई। इस घटना की सभी संभावित पहलुओं की जांच के लिए आदेश दिए गए हैं।” पुलिस ने बताया कि यह दुर्घटनावश गोली चलने का मामला था, जिससे सैनिक की मौत हुई। काजीगुंड-श्रीनगर-बारामूला हाईवे पर सेना के काफिलों की सुरक्षित आवाजाही को सुनिश्चित करने के लिए सुबह की पहली किरण के साथ आरओपी को तैनात किया जाता है। सेना के काफिले इस राजमार्ग पर दोनों तरफ से हर दिन कम से कम दो बार गुजरते हैं। आतंकवादियों को दूर रखने और किसी भी दुर्घटना को अंजाम देने से रोकने के लिए रोड ओपनिंग पार्टी (आरओपी) इलेक्ट्रॉनिक निगरानी उपकरण और स्निफर डॉग्स के साथ सड़कों की सुरक्षा करती है, ताकि काफिले सुरक्षित रूप से गुजर सकें। आतंकवादियों ने सेना, सुरक्षाबलों और पुलिस के काफिलों को नुकसान पहुंचाने के लिए रिमोट-नियंत्रित इम्प्रोवाइज्ड विस्फोटक उपकरणों (आईईडी), ग्रेनेड और ऑटोमेटिक हथियारों से गोलीबारी का इस्तेमाल किया है। इसके अतिरिक्त, राजमार्गों (हाईवे) और सड़कों पर चलने वाले वीआईपी काफिले भी आतंकवादियों के निशाने पर होते हैं। वीआईपी मार्ग को सुरक्षित करने के लिए सीएपीएफ से तैयार आरओपी का इस्तेमाल किया जाता है।   recent visitors 92

केंद्र की तरफ से प्रक्रिया जल्द शुरू की जा सकती है, जल्द मिल सकता है जम्मू और कश्मीर को राज्य का दर्जा

जम्मू-कश्मीर जम्मू और कश्मीर का जल्द ही राज्य का दर्ज बहाल हो सकता है। खबर है कि केंद्र की तरफ से प्रक्रिया जल्द शुरू की जा सकती है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। बुधवार शाम मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की दिल्ली में बड़ी बैठक हुई है। सरकार बनाने के बाद पहली ही बैठक में एनसी सरकार ने राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए प्रस्ताव पारित किया था। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि केंद्र जम्मू और कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। सूत्रों के अनुसार, 'आधे घंटे तक चली बैठक काफी सौहार्दपूर्ण माहौल में रही। जम्मू और कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की प्रक्रिया शुरू करने का गृहमंत्री ने नई सरकार को भरोसा दिया है।' अब्दुल्ला ने बाद में कहा कि यह एक शिष्टाचार भेंट थी, जिस दौरान उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री को जम्मू-कश्नीर की स्थिति से अवगत कराया और राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर भी चर्चा की। जम्मू-कश्मीर के वर्ष 2019 में केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से पुलिस बल केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है। दिल्ली में अपने प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री अब्दुल्ला कई केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात करेंगे और संभावना है कि वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भी मिल सकते हैं। 90 सीटों वाली जम्मू और कश्मीर विधानसभा में एनसी ने 42 सीटों पर जीत हासिल की थी। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसमें केंद्र सरकार से राज्य का दर्ज बहाल करने का अनुरोध किया गया है। पीटीआई भाषा के अनुसार, एक आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा, 'गुरुवार को अब्दुल्ला की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में राज्य का मूल दर्जा बहाल कराने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई।' प्रवक्ता ने कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करना सुधार प्रक्रिया की एक शुरुआत होगी, जिससे संवैधानिक अधिकार पुन: बहाल होंगे तथा जम्मू-कश्मीर के लोगों की पहचान की रक्षा होगी। बुलाया जाएगा विशेष सत्र प्रवक्ता ने बताया कि मंत्रिमंडल ने चार नवंबर को श्रीनगर में विधानसभा का विशेष सत्र आहूत करने का निर्णय भी लिया है और उपराज्यपाल से सत्र आहूत करने तथा उसे संबोधित करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि पहले सत्र के लिए विधानसभा में उपराज्यपाल के अभिभाषण का मसौदा भी मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा गया, जिसके बाद मंत्रिपरिषद ने निर्णय लिया कि इस पर विचार किया जाएगा। राजनीतिक दलों ने शुक्रवार को कहा था कि प्रस्ताव में केवल राज्य का दर्जा देने का जिक्र है जबकि अनुच्छेद 370 का कोई उल्लेख नहीं है। उन्होंने इस प्रस्ताव को 'पूरी तरह आत्मसमर्पण' और सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस के रुख के विपरीत बताया। recent visitors 71

सरकार देश के कई राज्यों के राज्यपाल बदलने की तैयारी में केन्‍द्र, राम माधव बन सकते हैं जम्मू और कश्मीर के नए एलजी

श्रीनगर केंद्र सरकार जल्द ही उत्तर प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, मध्य प्रदेश समेत कई प्रदेशों के राज्यपाल बदल सकती है। हालांकि, अब तक इस संभावित फेरबदल को लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। कहा जा रहा है कि ये फेरबद इस अक्टूबर में ही या नवंबर के अंत में हो सकते हैं। इस दौरान उन नामों पर विचार किया जा सकता है, जो पहले ही 3 से 5 साल की सेवाएं दे चुके हैं। न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, फेरबदल की चर्चा इसलिए भी अहम हैं, क्योंकि कई राज्यपाल और उपराज्यपाल 3-5 सालों से सेवाएं दे रहे हैं। इनमें खासतौर से उत्तर प्रदेश, केरल, जम्मू और कश्मीर, अंडमान एंड निकोबार आइलैंड, दादर और नगर हवेली और दमन एंड दियू शामिल हैं। जम्मू और कश्मीर में हाल ही में राज्य सरकार ने कमान संभाली है। ये हो सकते हैं नए नाम रिपोर्ट के अनुसार, अटकलें हैं कि जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की जगह भारतीय जनता पार्टी के पूर्व महासचिव राम माधव ले सकते हैं। वहीं, केरल राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को भी नई भूमिका दिए जाने की चर्चाएं हैं। अंडमान और निकोबार आइलैंड के उपराज्यपाल देवेंद्र कुमार को केरल या जम्मू और कश्मीर में नई जिम्मेदारी दी जा सती है। कुमार अक्टूबर 2017 से राज्यपाल हैं। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि जम्मू और कश्मीर, हरियाणा में नई सरकार के बनने के बाद या झारखंड और महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के बाद फेरबदल किए जा सकते हैं। इसके अलावा लोकसभा चुनाव के मैदान से दूर रहे भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को भी राज्यपाल या एलजी बनाया जा सकता है। इनमें अश्विनी चौबे, वीके सिंह, मुख्तार अब्बास नकवी जैसे नाम शामिल हो सकते हैं। 3-5 साल से सेवाएं दे रहे हैं ये राज्यपाल कर्नाटक के राज्यपाल थावर चंद गहलोत, गुजरातके आचार्य देवव्रत 3 साल से ज्यादा समय से पद पर हैं। गोवा राज्यपाल पीएस श्रीधरन पिल्लई और हरियाणा के गवर्नर बंडारू दत्तात्रेय 15 जुलाई 2021 से पद पर हैं। मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगू भाई पटेल, उत्तराखंड के गुरमीत सिंह 3 साल से ज्यादा समय से राज्यपाल हैं। राज्य में उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में बनी है नई सरकार जम्मू-कश्मीर में हाल ही में विधानसभा चुनाव हुए हैं। बुधवार को वहां नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में नई सरकार ने सत्ता भी संभाल ली। भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव की रणनीति तैयार करने के लिए राम माधव को महत्वपूर्ण भूमिका में रखा था। वह पार्टी के लिए कश्मीर में हमेशा से एक महत्वपूर्ण चेहरा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के मामलों में राम माधव की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने पीडीपी और बीजेपी के गठबंधन में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। धारा 370 को हटाने की योजना भी उनके मार्गदर्शन में तैयार की गई थी, जो कश्मीर के इतिहास में एक बड़ा बदलाव साबित हुआ। उनका अनुभव और समझ कश्मीर के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में 22 अगस्त 1964 को जन्म राम माधव ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और फिर पॉलिटिकल साइंस में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। वह पहले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े और पूर्णकालिक कार्यकर्ता बने। संघ से ही वह भारतीय जनता पार्टी में प्रवेश किए और धीरे-धीरे बड़े राजनीतिक पदों पर काबिज हुए। उनका सियासी अनुभव कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों तक फैला हुआ है। वह एक नेता, लेखक और विचारक के रूप में चर्चित रहे हैं। उन्होंने कई महत्वपूर्ण किताबें लिखी हैं, जो राजनीति और सामाजिक विषयों पर आधारित हैं। वह थिंक टैंक ‘इंडिया फाउंडेशन’ के अध्यक्ष भी हैं और कई वैश्विक मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। हाल ही में उन्होंने धर्म-20 फोरम में भी भाग लिया था, जो जी-20 का हिस्सा था। राम माधव का अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी काफी विस्तृत है। उन्होंने रूस, सिंगापुर, इंडोनेशिया, कनाडा और चीन जैसे देशों में कई महत्वपूर्ण मंचों पर भारत का पक्ष रखा है। चाहे वह सुरक्षा के मुद्दे हों या फिर वैश्विक राजनीति के, राम माधव ने हर बार अपनी बेबाक राय रखी है। recent visitors 103

जम्मू-कश्मीर से 6 साल बाद हटाया राष्ट्रपति शासन, उमर अब्दुल्ला का सरकार गठन का रास्ता साफ

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन हटा दिया गया है। गृह मंत्रालय (एमएचए) के इस फैसले के साथ ही आधिकारिक तौर पर केंद्र शासित प्रदेश में सरकार गठन का मार्ग प्रशस्त हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा हस्ताक्षरित एक सरकारी आदेश में कहा गया है कि ‘भारत के संविधान के अनुच्छेद 239 और 239ए के साथ पठित जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 (2019 का 34) की धारा 73 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के संबंध में 31 अक्टूबर 2019 का आदेश, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 की धारा 54 के तहत मुख्यमंत्री की नियुक्ति से तुरंत पहले निरस्त किया जाता है। नवनिर्वाचित सरकार को शपथ लेने की अनुमति देने के लिए यूटी में राष्ट्रपति शासन को रद्द करने की आवश्यकता थी। गृह मंत्रालय ने जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 73 के आधार पर एक राष्ट्रपति आदेश लागू किया था। नेशनल कॉन्फ्रेंस-कांग्रेस गठबंधन ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव जीता और सरकार बनाने के लिए तैयार है। एनसी उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला, जिन्हें गठबंधन के नेता के रूप में चुना गया है, जम्मू-कश्मीर के अगले मुख्यमंत्री होंगे। छह साल के लंबे अंतराल के बाद, जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन हटा लिया गया है, जिससे राज्य में नई सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त हो गया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और कांग्रेस के गठबंधन ने हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की है और अब वे सरकार बनाने के लिए तैयार हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है। उमर अब्दुल्ला को सर्वसम्मति से नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक दल का नेता चुना गया है, जिससे उनके मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है। यह उमर अब्दुल्ला का दूसरा कार्यकाल होगा, इससे पहले वे 2009 से 2014 तक जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, जब राज्य एनसी-कांग्रेस गठबंधन के अधीन था। राष्ट्रपति शासन हटा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को आदेश जारी कर जम्मू-कश्मीर से राष्ट्रपति शासन समाप्त करने की घोषणा की। यह राष्ट्रपति शासन 19 जून 2018 को पीडीपी-भाजपा गठबंधन के टूटने के बाद लगाया गया था। 2019 में केंद्र सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 370 को समाप्त कर जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा खत्म कर दिया था, जिसके बाद यह क्षेत्र एक केंद्र शासित प्रदेश बन गया था। राज्य का दर्जा बहाल करने पर जोर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कहा है कि नई सरकार का प्रमुख उद्देश्य जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करना होगा। उन्होंने कहा, "हमारी प्राथमिकता जम्मू-कश्मीर को एकजुट करना और चुनाव के दौरान फैली नफरत को खत्म करना होगी। राज्य का दर्जा बहाल किया जाना चाहिए ताकि राज्य सुचारू रूप से कार्य कर सके और हम अपने कर्तव्यों का पालन कर सकें।" चुनाव परिणाम और गठबंधन इस बार के चुनावों में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 42 सीटों पर जीत हासिल की है, जबकि कांग्रेस ने 6 सीटें जीतीं। कांग्रेस की पांच सीटें कश्मीर से और एक जम्मू से हैं। दोनों पार्टियों ने चुनाव पूर्व गठबंधन किया था और चार निर्दलीय विधायकों तथा आम आदमी पार्टी (आप) के एक विधायक का समर्थन भी उन्हें मिला है। इसके अलावा, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 29 सीटें जीतकर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में अपनी जगह बनाई है। 10 साल के लंबे अंतराल के बाद संपन्न हुए चुनाव जम्मू-कश्मीर में 10 साल के लंबे अंतराल के बाद विधानसभा चुनाव संपन्न हुए हैं। यह चुनाव अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद पहली बार हुआ है, जिससे यह ऐतिहासिक महत्व रखता है। चुनाव तीन चरणों में सम्पन्न हुए, जिनमें 18 सितंबर, 25 सितंबर, और 1 अक्टूबर को मतदान हुआ। जम्मू-कश्मीर में छह साल बाद राष्ट्रपति शासन हटने और नई सरकार बनने से राज्य की राजनीतिक स्थिति में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में यह सरकार राज्य के पुनर्गठन और विकास के लिए कई अहम कदम उठाने की योजना बना रही है, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करना है। अब यह देखना होगा कि नई सरकार इस दिशा में क्या ठोस कदम उठाती है। recent visitors 74