40 सेकंड में डल्ला के गुर्गों ने जसवंत सिंह की कर दी थी हत्या, कनाडा के गैंगस्टर से जुड़ा कनेक्शन, आरोपी गिरफ्तार
ग्वालियर जसवंत सिंह गिल हत्याकांड में बड़ा खुलासा हुआ है। इस मामले में प्रो-खालिस्तान समर्थक अर्शदीप सिंह गिल उर्फ अर्श डल्ला का नाम सामने आया है। इसे भारत सरकार ने 2023 में आतंकवादी घोषित किया था। खुफिया अधिकारियों का कहना है कि अर्श डल्ला, जो प्रतिबंधित खालिस्तान टाइगर फोर्स (KTF) से जुड़ा हुआ है और वह खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर के लिए काम करता था। जून 2023 में निज्जर की हत्या हो गई थी। हाल ही में, विदेश मंत्रालय (MEA) ने अर्श डल्ला का नाम उन 'खालिस्तानी आतंकवादियों' में शामिल किया था, जिनके प्रत्यर्पण का अनुरोध कनाडा से किया गया है। डल्ला के गुर्गे ने की ग्वालियर में हत्या डल्ला के दो गुर्गे – नवजोत सिंह और अमलप्रीत सिंह, दोनों पंजाब के बरनाला के रहने वाले हैं, जिन्हें पिछले महीने फरीदकोट में सिख कार्यकर्ता गुरप्रीत सिंह हरि नौ की हत्या के आरोप में पंजाब में गिरफ्तार किया गया था। ग्वालियर पुलिस को मिली जानकारी के मुताबिक, जसवंत सिंह गिल की हत्या में भी इन्हीं दोनों ने ही गोलियां चलाई थीं। 7 नवंबर को ग्वालियर में गिल की हत्या के बाद ग्वालियर पुलिस ने कई जगहों से सबूत इकट्ठा किए थे, जिनसे इन दोनों की पहचान हुई है। पुलिस मुख्य साजिशकर्ता सतपाल की तलाश कर रही है, जिसे अर्श डल्ला का करीबी बताया जा रहा है। मोहाली से दोनों शूटर गिरफ्तार दोनों शूटरों को पंजाब पुलिस ने सिख कार्यकर्ता की हत्या के सिलसिले में मोहाली के स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल, एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स और फरीदकोट पुलिस के संयुक्त अभियान में गिरफ्तार किया था। पंजाब पुलिस के DGP गौरव यादव ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए X पर कहा कि मोहाली के स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल ने एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स और फरीदकोट पुलिस के साथ एक संयुक्त अभियान में कनाडा स्थित नामित आतंकवादी अर्श डल्ला के दो प्रमुख गुर्गों को गिरफ्तार किया है, जो गुरप्रीत सिंह हरि नौ की हत्या में शामिल था। डल्ला के निर्देश पर जसवंत की हत्या की पूछताछ के दौरान पता चला कि गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी अर्श डल्ला के निर्देश पर जसवंत सिंह गिल की हत्या में भी शामिल थे। डीजीपी यादव ने कहा कि जांच से पता चला है कि आरोपियों ने 7 नवंबर, 2024 को ग्वालियर, मध्य प्रदेश में अर्श डल्ला के निर्देश पर जसवंत सिंह गिल की भी हत्या की थी। ग्वालियर हत्याकांड के बाद आरोपी पंजाब लौट आए थे और उन्हें मोहाली के खरड़ के पास से गिरफ्तार किया गया। पंजाब पुलिस को आरोपियों के पास से दो अत्याधुनिक हथियार मिले हैं। पंजाब पुलिस की रिमांड पर हैं दोनों हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए पंजाब के डीजीपी यादव ने कहा कि दोनों पंजाब पुलिस की रिमांड पर हैं। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद हम उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर लाएंगे। गिल हत्याकांड सुलझ गया है। जैसा कि संदेह था यह बदला लेने का मामला था और साजिश कनाडा से रची गई थी। नवजोत सिंह और अमलप्रीत सिंह हत्या वाले दिन सुबह ही ग्वालियर पहुंचे थे। ग्वालियर पुलिस की छह टीमें कर रही जांच ग्वालियर पुलिस ने छह विशेष टीमों का गठन किया था और जसवंत सिंह गिल की हत्या के लिए जिम्मेदार शूटरों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए 10,000 रुपये का इनाम घोषित किया था। उनका मानना था कि यह आठ साल पहले किए गए अपराध का बदला लेने के लिए की गई हत्या है। पूरी घटना पास के सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई, जिसमें दिख रहा है कि शूटरों ने सिर्फ 40 सेकंड में जसवंत सिंह की हत्या कर दी। हमलावर तुरंत भाग गए ग्वालियर एसपी ने कहा कि हमें एक ऑडियो वाला सीसीटीवी फुटेज मिला था, जिससे यह पुष्टि होती है कि शूटर स्थानीय नहीं थे। बाद में, हमें और सबूत मिले जैसे आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज एक होटल से मिले जो उन्होंने टेहरौली क्षेत्र में चेक इन किया था। उन्होंने बताया कि शूटर अलग दिख रहे थे और उनके लहजे से लग रहा था कि वे पंजाब के हो सकते हैं। गिल की हत्या करने के बाद हमलावर तुरंत मौके से फरार हो गए थे। अपने मामा की हत्या में शामिल था जसवंत गिल 2016 में, जसवंत सिंह गिल अपने मामा सुखविंदर सिंह की हत्या में शामिल था। पारिवारिक विवाद में सुखविंदर की मौत हो गई थी और उनके माता-पिता गंभीर रूप से घायल हो गए थे। जसवंत, जो अपने मामा के परिवार के साथ रहता था, ने सुखविंदर को उसके सोते समय गोली मार दी। बाद में अपनी मामी और मामा पर हमला कर दिया। हमला इतना अचानक हुआ कि केवल 13 वर्षीय हरमन कौर ही रसोई में छिपकर बच पाई। जसवंत मौके से फरार हो गया और कई सालों तक फरार रहा। आखिरकार उसे 2018 में पकड़ लिया गया और अपने मामा की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। सुखविंदर का परिवार जो अब कनाडा में रहता है, जांच के घेरे में था। ढाई लाख रुपए में दी थी सुपारी जांच में जल्द ही पता चला कि सुखविंदर सिंह के भाई, सतपाल सिंह, जो कनाडा का निवासी है, ने अर्श डल्ला के माध्यम से 2.5 लाख रुपये का अनुबंध देकर हत्या की योजना बनाई थी। सतपाल के ससुराल वाले पंजाब में रहते हैं और उन्होंने वहां से शूटरों की व्यवस्था की। योजना को अंजाम देने के लिए, उन्होंने राय मस्तूरा गांव के अपने रिश्तेदार, जीते उर्फ जीते सरदार की मदद ली, जिन्होंने ग्वालियर में रेकी और व्यवस्था में सहायता की। जसवंत की रिहाई बाद मिले रुपए जसवंत की हत्या के लिए पैरोल पर रिहाई से पहले जीते के खाते में 1 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे। बाकी के 1.5 लाख रुपये हत्या के तुरंत बाद भेजे गए थे। जीते सरदार नहीं हुआ है गिरफ्तार फिलहाल जीते सरदार को गिरफ्तार नहीं किया गया है, जबकि सुपारी हत्या के पैसे उसके खाते में जमा किए गए थे। शाम करीब 7:00 बजे जसवंत सिंह गिल (45) डबरा के गोपाल बाग में अपने घर के बाहर खाना खाने के बाद टहल रहे थे तभी उनकी हत्या कर दी गई। कनाडा से बुक हुई थी टैक्सी हत्या के बाद शूटरों को भगाने के लिए कनाडा से एक … Read more