Thursday, July 16, 2026 1:35 pm

RC अपडेट: लोन खत्म होने के बाद बैंक का नाम हटाना अब सरल, देखें पूरा प्रोसेस

भोपाल अब तक वाहन का लोन पूरा चुकाने के बाद वाहन मालिक को संबंधित बैंक से फॉर्म-35  के तहत एनओसी (No Objection Certificate) लेनी होती थी. इसके बाद परिवहन विभाग की वेबसाइट पर आवेदन कर 75 रुपए शुल्क जमा करना पड़ता था और आरसी को कार्यालय में जमा करमा होता था. बैंक से जारी NOC  की जांच में काफी समय लगता था. वहीं आवेदनों की संख्या अधिक होने के कारण हर मामले की सही तरीके से जांच भी नहीं हो पाती थी. इससे फर्जी NOC के आधार पर हायपोथीकेशन हटाए जाने की संभावना बनी रहती थी, जिससे बैंक और वाहन मालिक दोनों को नुकसान हो सकता था. मध्य प्रदेश परिवहन विभाग ने वाहन लोन (हाइपोथेक्शन) पूरा कर चुके लाखों वाहन मालिकों को बड़ी राहत दी है।अब लोन चुकाने के बाद गाड़ी के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) से बैंक का नाम हटवाने के लिए न तो बैंक के चक्कर लगाने होंगे और न ही आरटीओ कार्यालय जाना पड़ेगा। विभाग ने यह पूरी प्रक्रिया फेसलेस, डिजिटल और पूरी तरह निःशुल्क कर दी है। पहले क्या था झंझट? अब तक वाहन लोन समाप्त होने के बाद बैंक से फॉर्म-35 और एनओसी लेना जरूरी होता था। इसके बाद परिवहन विभाग की वेबसाइट पर ₹75 की फीस जमा कर आरटीओ में फाइल लगानी पड़ती थी। बैंक की एनओसी के सत्यापन में कई बार हफ्तों या महीनों लग जाते थे, साथ ही फर्जी एनओसी का खतरा भी बना रहता था। नई स्मार्ट व्यवस्था कैसे करेगी काम? परिवहन विभाग की नई व्यवस्था में प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है। शून्य शुल्क – अब इस सेवा के लिए कोई सरकारी फीस नहीं लगेगी। ऑटो वेरिफिकेशन – parivahan.gov.in पर आवेदन करते ही पोर्टल सीधे बैंक के सेंट्रल सर्वर से लोन की जानकारी का मिलान करेगा। किसी भी फिजिकल दस्तावेज की जरूरत नहीं होगी। 7 दिन की समय-सीमा आवेदन के बाद आरटीओ अधिकारी को अधिकतम 7 दिन में निर्णय लेना होगा। यदि इस अवधि में कोई आपत्ति नहीं आती और वाहन पर कोई न्यायालयीन मामला नहीं है, तो सिस्टम आवेदन को ऑटो अप्रूव कर देगा। डिजिटल आरसी प्रक्रिया पूरी होते ही वाहन मालिक घर बैठे अपडेटेड डिजिटल आरसी डाउनलोड कर सकेंगे। कुछ मामलों में लग सकता है समय परिवहन विभाग के अनुसार, केवल 1–2 प्रतिशत मामलों में देरी हो सकती है। यह समस्या उन बैंकों के ग्राहकों को आ सकती है, जिनका सर्वर अभी परिवहन पोर्टल से लिंक नहीं है। ऐसे मामलों में प्रक्रिया फिलहाल पुराने मैनुअल तरीके से ही पूरी की जाएगी। प्रमुख बदलाव एक नजर में पहले जहां यह प्रक्रिया समय लेने वाली और झंझट भरी थी, वहीं अब यह पूरी तरह ऑनलाइन, तेज और पारदर्शी हो गई है। सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से न सिर्फ लोगों का समय बचेगा, बल्कि भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की संभावना भी कम होगी।   recent visitors 25

मध्य प्रदेश का ऋण बोझ 4.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया, अब सिर्फ 2500 करोड़ का लोन ले सकती है सरकार

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को यह बोझ राज्य के सालाना बजट से भी 10,000 करोड़ रुपये ज्यादा हो गया। सरकार ने मंगलवार को 4,400 करोड़ रुपये का एक और लोन लिया। इसके बाद राज्य पर कुल कर्ज 4.3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। यह आंकड़ा राज्य के 4.2 लाख करोड़ रुपये के बजट से भी ज्यादा है, जिसे दो हफ्ते पहले ही पेश किया गया था। फिजूलखर्ची करने का आरोप सरकार का कहना है कि वह विकास कार्यों के लिए लोन लेती है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार फिजूलखर्ची कर रही है। इसमें मंत्रियों के लिए नई कारें खरीदना और बंगलों का नवीनीकरण कराना शामिल है। राज्य सरकार को हर महीने लाडली बहना योजना के लिए 1,550 करोड़ रुपये से ज्यादा की जरूरत होती है। अब सिर्फ 2500 करोड़ का लोन ले सकती है सरकार इस महीने की शुरुआत में सरकार ने अलग-अलग तारीखों पर 10,000 करोड़ रुपये का लोन लिया था। सरकार इस वित्तीय वर्ष में 64,000 करोड़ रुपये तक का लोन ले सकती थी। उसने 61,400 करोड़ रुपये का लोन ले लिया है। अब सिर्फ 2,500 करोड़ रुपये का लोन लेने की गुंजाइश बची है। लेकिन अधिकारियों का कहना है कि इसकी जरूरत नहीं होगी। इसे अगले वित्तीय वर्ष के लिए आगे बढ़ाया जाएगा। 'विकास के लिए लेते हैं कर्ज' 31 मार्च, 2024 को मध्य प्रदेश पर 3.75 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज था। सरकार का कहना है कि वह नियमित रूप से लोन लेती है। इन पैसों का इस्तेमाल विकास योजनाओं और परियोजनाओं को पूरा करने में किया जाता है। राज्य सरकार का कहना है कि केंद्र सरकार और अन्य स्रोतों से लिए गए लोन का इस्तेमाल राज्य के विकास जैसे सिंचाई के लिए बांध, बेहतर परिवहन सेवाएं, किसानों और स्थानीय निकायों को लोन देना और बिजली उत्पादन जैसे कामों के लिए किया गया है। एमपी पर देश के कुल कर्ज का 5% से ज्यादा कर्ज मध्य प्रदेश पर देश के कुल कर्ज का 5% से ज्यादा कर्ज है। देश पर कुल 93,93,317.5 करोड़ रुपये का कर्ज है, जिसमें से मध्य प्रदेश पर 4,80,976 करोड़ रुपये का कर्ज है। कर्ज के मामले में मध्य प्रदेश नौवें स्थान पर है। कर्ज बढ़ने के बाद भी खर्चे     कर्ज बढ़ने के बावजूद सरकार ने एक राज्य विमान खरीदा है। मंत्रियों के लिए नई कारें खरीदी हैं और मंत्रियों के बंगलों का नवीनीकरण कराया है।     10 जुलाई को मध्य प्रदेश सरकार ने 230 करोड़ रुपये से ज्यादा का एक जेट विमान खरीदने का प्रस्ताव पास किया था।     पिछले साल मंत्रियों के बंगलों के नवीनीकरण पर 18 करोड़ रुपये से कम खर्च नहीं किए गए थे।     मई 2024 में सरकार ने मंत्रियों के लिए लगभग 5 करोड़ रुपये की एसयूवी (SUV) खरीदने का ऑर्डर दिया था.     सरकार की बड़ी वित्तीय जिम्मेदारियों में लाडली बहना योजना के लिए हर महीने 1,550 करोड़ रुपये से ज्यादा की जरूरत होती है। recent visitors 23

मध्यप्रदेश में विधायकों को एक सौगात मिल सकती, वेतन में बढ़ोतरी की न होकर कर्ज लेने की सीमा को बढ़ाने

 भोपाल सोमवार को केंद्र सरकार ने सांसदों और पूर्व सांसदों के वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी का आदेश जारी कर दिया है और अब जल्द ही मध्यप्रदेश में भी विधायकों को एक सौगात मिल सकती है. हालांकि, यह सौगात वेतन में बढ़ोतरी की न होकर कर्ज लेने की सीमा को बढ़ाने की है. एमपी के विधायकों को जल्द ही कर्ज लेने की सीमा दोगुनी करने पर फैसला हो सकता है. जिसके बाद विधायक घर के लिए 50 लाख और गाड़ी के लिए 30 लाख रुपए तक का लोन ले सकेंगे. दरअसल, विधानसभा की सदस्य सुविधा समिति ने विधायकों के लिए लोन की सीमा को डबल करने का प्रस्ताव शासन को भेजा है. वहां से मंज़ूरी मिलने के बाद इसे संसदीय कार्य विभाग को भेजा जाएगा और इसके बाद प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू किया जा सकता है. वर्तमान में विधायक घर के लिए 25 लाख रुपए और गाड़ी के लिए 15 लाख रुपए तक का लोन ले सकते हैं, लेकिन कैबिनेट से मंज़ूरी मिलने के बाद यह लिमिट बढ़कर सीधा डबल हो जाएगी यानी घर के लिए 50 लाख और गाड़ी के लिए 30 लाख रुपए तक का लोन विधायक ले सकेंगे. यही नहीं, विधायक अगर पुरानी लिमिट यानी 25 लाख और 15 लाख तक का लोन लेंगे तो उन्हें 4% की दर से ब्याज देना होगा और शेष ब्याज राशि का भुगतान सरकार की ओर से किया जाएगा. विधानसभा सचिवालय से जुड़े सूत्रों की मानें तो सदस्य सुविधा समिति की ओर से प्रस्ताव तो भेजा जा चुका है, लेकिन अभी इसपर जल्द निर्णय होने की संभावना कम है. बता दें कि मध्य प्रदेश में विधायकों को वेतन और भत्ते मिलाकर हर महीने 1 लाख रुपए से ज्यादा राशि मिलती है. इसके अलावा पूरे प्रदेश में वे मुफ्त यात्रा कर सकते हैं और सालाना 10 हज़ार किलोमीटर की हवाई यात्रा मुफ्त होती है. वहीं, विधानसभा सत्र के दौरान क्षेत्र से भोपाल आने का खर्चा भी दिया जाता है.   recent visitors 26