उपचुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी पार्टी बीजेपी ने पहले ही अपने प्रत्याशियों के नाम की घोषणा कर दी

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल की 6 विधानसभा सीटों पर 13 नवंबर को उपचुनाव होने जा रहे हैं। इस उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हो गई हैं। सभी प्रमुख दल अपने-अपने उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देने और प्रचार-प्रसार में जुट गए हैं। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और विपक्षी पार्टी बीजेपी ने पहले ही अपने प्रत्याशियों के नाम की घोषणा कर दी है। राजनीतिक दलों के बीच की प्रतिस्पर्धा और मतदाता जुटाने के लिए उनकी रणनीतियों का खुलासा अब आने वाले चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। TMC ने घोषित किए उम्मीदवार सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपने प्रत्याशियों के नाम का ऐलान कर दिया है। टीएमसी ने निम्नलिखित प्रत्याशियों को टिकट दिया है:     मेदिनीपुर: सुजॉय हाजरा     नैहाटी: सनत देय     सिताई: संगीता रॉय     तालडांगरा: फालगुनी सिंहबाबू     हाड़वा: रबिउल इस्लाम     मदारीहाट: जय प्रकाश टोप्पो उपचुनाव के कारण इन सीटों पर उपचुनाव होने का कारण विभिन्न विधायक चुनावी प्रक्रिया के दौरान सांसद बन गए हैं, जिससे ये सीटें खाली हुई हैं:     मेदिनीपुर: TMC की विधायक जून मालिया 2021 में विधायक बनीं थीं और अब लोकसभा चुनाव 2024 में सांसद बनीं, इसलिए यह सीट खाली हुई है।     मदारीहाट: बीजेपी के मनोज तिग्गा 2021 में विधायक बने थे और लोकसभा चुनाव में अलीपुदुआर से सांसद बने।     हाड़वा: तृणमूल कांग्रेस के हाजी नुरु इस्लाम विधायक थे, जो हाल ही में 2024 लोकसभा चुनाव में बरीशहाट से सांसद बने, लेकिन उनका निधन हो गया।     नैहाटी: तृणमूल कांग्रेस के पार्थ भौमिक ने 2024 में बैरकपुर से लोकसभा चुनाव लड़ा और सांसद बने, जिसके बाद यह सीट खाली हुई।     सिताई: टीएमसी के जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया विधायक थे, जो इस बार कूचबिहार से सांसद बने, जिससे यह सीट भी खाली हुई।     तालडांगरा: टीएमसी के अरूप चक्रवर्ती 2021 में विधायक बने थे और 2024 लोकसभा चुनाव में बांकुड़ा से सांसद बने, जिसके कारण यह सीट खाली हुई। इन उपचुनावों में उम्मीदवारों के चयन के साथ-साथ चुनावी रणनीतियों की तैयारी भी जोरों पर है। दोनों प्रमुख पार्टियाँ अपनी-अपनी ताकत को आजमाने के लिए तैयार हैं।   recent visitors 75

ममता सरकार पर बरसा कलकत्ता हाई कोर्ट, पूछा- 7000 लोगों की भीड़ अस्पताल में कैसे घुसी, इतने लोग वॉक पर नहीं आ सकते

कोलकाता  आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामला बढ़ता ही जा रहा है। पूरा देश महिला डॉक्टर के साथ हुई हैवानियत पर उबल रहा है। इसी बीच मेडिकल कॉलेज के अंदर घुसकर गुरुवार को तोड़फोड़ भी की गई। मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने हस्तक्षेप किया है और सख्त टिप्पणी की है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में हाल ही में हुई बर्बरता की घटना पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। हाई कोर्ट ने कहा कि यह सरकार की नाकामी है और मेडिकल कॉलेज को बंद कर देना चाहिए। हाई कोर्ट ने डॉक्टरों के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण प्रदान करने की बंगाल सरकार की क्षमता पर सवाल उठाया है। हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाएं हेल्थ प्रफेशनल्स के बीच भय और अनिश्चितता का माहौल पैदा करती हैं। 'गिरता है मनोबल' अपनी टिप्पणियों में, न्यायालय ने अस्पताल पर हमले को रोकने में 'राज्य मशीनरी की पूर्ण विफलता' की ओर इशारा किया। इस घटना में अस्पताल के महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरण नष्ट कर दिए गए। जमकर तोड़फोड़ की गई। न्यायाधीशों ने जोर देकर कहा कि ऐसी घटनाओं का डॉक्टरों और अस्पताल के कर्मचारियों के मनोबल और आत्मविश्वास पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। हाई कोर्ट ने कहा कि इस तह की घटना से डॉक्टर्स का मनोबल टूटता है और उनका आत्मविश्वास कमजोर पड़ जाता है। तोड़फोड़ के मामले में 19 लोग गिरफ्तार कोलकाता पुलिस ने शुक्रवार को कहा कि उसने आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में तोड़फोड़ और हिंसा के मामले में अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों को शहर की एक अदालत ने 22 अगस्त तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। आपको बता दें कि अज्ञात बदमाशों ने कोलकाता के सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के परिसर में घुसकर उसके कुछ हिस्सों में तोड़फोड़ की। इसी अस्पताल में पिछले सप्ताह महिला चिकित्सक का शव मिला था। अस्पताल में चिकित्सक के साथ कथित बलात्कार और फिर उसकी हत्या किए जाने की घटना के विरोध में महिलाओं के विरोध प्रदर्शन के बीच आधी रात को यह तोड़फोड़ की गई। इस दौरान कुछ पुलिसकर्मियों सहित कई लोग घायल हो गए। परास्नातक प्रशिक्षु के साथ कथित दुष्कर्म और फिर उसकी हत्या की घटना के विरोध में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में जूनियर डॉक्टर की हड़ताल शुक्रवार को भी जारी रही। प्रदर्शन कर रहे चिकित्सक दोषियों को कड़ी सजा दिए जाने और कार्यस्थल पर सुरक्षा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। विपक्षी दलों ने पुलिस पर आरोप लगाया है कि जब सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में तोड़फोड़ और हिंसा हुई तो पुलिस ने उचित कार्रवाई नहीं की। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार शाम को कहा था कि अस्पताल के आपातकालीन वार्ड की दो मंजिलों में तोड़फोड़ की गई, दवाइयां लूट ली गई हैं और बुनियादी ढांचे तथा उपकरणों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। सरकार को दिए निर्देश कोलकाता हाई कोर्ट की आलोचना राज्य के चिकित्सा कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की तत्काल आवश्यकता पर प्रकाश डालती है। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसा माहौल बनाना सरकार की जिम्मेदारी है, जहां स्वास्थ्य पेशेवर हिंसा या धमकी के डर के बिना अपने कर्तव्यों का पालन कर सकें। न्यायाधीशों ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तत्काल और प्रभावी उपाय किए जाने का आह्वान किया। सरकार को एक्शन का आदेश हाई कोर्ट ने जोर देकर कहा कि यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह एक ऐसा वातावरण बनाए जहां हेल्थ प्रफेशनल्स हिंसा या धमकी के डर के बिना अपने कर्तव्यों का पालन कर सकें। न्यायाधीशों ने भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए तत्काल और प्रभावी उपाय करने का आह्वान किया। सरकारी मशीनरी पर उठाए सवाल हाई कोर्ट ने सवाल किया कि पुलिस 7,000 लोगों की बड़ी भीड़ से अनजान क्यों थी? इंटेलिजेंस विंग क्या कर रहा था? हाई कोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कि कानून प्रवर्तन को इतनी महत्वपूर्ण मीटिंग के बारे में कोई जानकारी नहीं थी?   recent visitors 80

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया अस्पताल में तोड़फोड़ में सीपीआई और भाजपा कार्यकर्ता शामिल

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को दावा किया कि कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हुई तोड़फोड़ में सीपीआई (एम) और भाजपा कार्यकर्ता शामिल थे। राज्यपाल से मुलाकात के बाद ममता बनर्जी ने प्रेस को बताया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान अस्पताल में तोड़फोड़ करने वाले लोग "बाहरी" थे। रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने कहा, "मुझे जानकारी मिली है कि बाहरी लोग थे। 'बाम और राम' के कुछ राजनीतिक पार्टी कार्यकर्ताओं ने यह किया है। इसमें छात्रों की कोई भूमिका नहीं है। मैं इस घटना की निंदा करती हूं और कल (बलात्कार के आरोपियों के लिए) फांसी की सजा की मांग को लेकर एक रैली निकालूंगी।" पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को कहा, "जहां तक ​​मेरी जानकारी है, मैं (अस्पताल में तोड़फोड़ के लिए) छात्रों को दोष नहीं दूंगी… घटना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। हम अभी भी कहते हैं कि उन्हें फांसी होनी चाहिए… हमने सारे दस्तावेज दे दिए हैं, जब तक हमारी पुलिस जांच कर रही थी, तब तक कुछ भी लीक नहीं हुआ… मेरी और बंगाल की जनता की संवेदनाएं पीड़ित परिवार के साथ हैं… यह बहुत बड़ा अपराध है, और इसकी एक ही सजा है कि आरोपियों को फांसी हो, अगर अपराधी को फांसी होगी तभी लोगों को इससे सबक मिलेगा लेकिन किसी निर्दोष को सजा नहीं मिलनी चाहिए।" ममता बनर्जी ने पहले भी वामपंथियों और भाजपा पर अपनी सरकार के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, "मैंने वामपंथियों और भाजपा के झंडे देखे… जिस तरह से उन्होंने पुलिस पर हमला किया। मेरे एक प्रभारी अधिकारी एक घंटे तक लापता रहे। बाद में उन्हें घायल अवस्था में पाया गया। लेकिन पुलिस ने मरीजों की सूची नहीं बनाई। उन्होंने बल प्रयोग नहीं किया। हमने बहुत सारे आंदोलन किए हैं और अस्पताल के अंदर कभी इस तरह की हरकत नहीं की।" बुधवार की रात, पश्चिम बंगाल में हजारों महिलाएं 31 वर्षीय ट्रेनी डॉक्टर के लिए न्याय मांगने के लिए 'रिक्लेम द नाइट' विरोध प्रदर्शन में शामिल हुईं। डॉक्टर की आरजी कर अस्पताल में बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी। हालांकि विरोध प्रदर्शन ज्यादातर शांतिपूर्ण थे, लेकिन आरजी कर अस्पताल के बाहर हिंसा भड़क उठी। एक भीड़ ने जबरदस्ती अस्पताल में प्रवेश किया, आपातकालीन वार्ड में तोड़फोड़ की और बाहर खड़ी पुलिस की गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया। पुलिस ने कहा कि करीब 40-50 लोग, प्रदर्शनकारियों का नाटक करते हुए, अस्पताल में घुस गए और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। जवाब में, पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और लाठियों का इस्तेमाल किया। recent visitors 100

बंगाल सरकार के वकील ने उच्च न्यायालय पर ही तीखा हमला करते हुए कहा-HC ही राज्य को चलाना चाहता है, हम क्या करें मीलॉर्ड

कोलकाता पश्चिम बंगाल में कई जातियों का ओबीसी दर्जा खत्म करने वाले हाई कोर्ट के फैसले को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इस पर सोमवार को सुनवाई हुई, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस दौरान बंगाल सरकार के वकील ने उच्च न्यायालय पर ही तीखा हमला बोल दिया। ओबीसी कोटे को लेकर बनी जातिवार सूची पर उच्च न्यायालय की तीखी टिप्पणियों पर राज्य सरकार ने ऐतराज जताया। यही नहीं दलीलों के दौरान बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि क्या उच्च न्यायालय ही राज्य को चलाना चाहता है। बंगाल सरकार की वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा, 'ऐसा क्यों हो रहा है। इसलिए क्योंकि वे मुस्लिम हैं? वे कहते हैं कि ये धर्म का मामला है। जो पूरी तरह से गलत है। यह कहा जा रहा है कि उन लोगों को इसलिए आरक्षण दिया गया क्योंकि वे मुस्लिम हैं। हमारे पास रिपोर्ट्स हैं कि सभी समुदायों पर विचार किया गया है। मंडल आयोग की सिफारिशों के आधार पर काम हुआ है। सरकार राज्य चलाना चाहती है। लेकिन अदालत ऐसा करना चाहती है तो फिर करे। आखिर हम क्या कर सकते हैं। कृपया बताएं।' इन दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने याचिका पर सुनवाई को लेकर सहमति जताई। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि जातियों की पहचान बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग का जिक्र किए बिना हुई। यह दलील है। ऐक्ट को खारिज करने के गंभीर असर हैं। फिलहाल बंगाल में कोई आरक्षण लागू नहीं हो पा रहा है। यह मुश्किल स्थिति है। इस पर इंदिरा जयसिंह ने कहा कि राज्य में पूरी आरक्षण व्यवस्था ही अटक गई है। दरअसल हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि किस जाति को कौन सा दर्जा देना है, यह आयोग का काम है। राज्य सरकार का नहीं है। आयोग 1993 में बना था और राज्य सरकार की ओर से 2012 में ऐक्ट लाया गया। इसमें बताया गया कि कैसे जाति प्रमाण पत्र मिलेगा और उसका आधार क्या होगा।   recent visitors 97