कोई उपचुनाव नहीं लड़ेगी बसपा, मायावती की करारी हार के बाद बड़ा एलान

लखनऊ. यूपी में नौ विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने अब कोई भी उपचुनाव नहीं लड़ने का एलान किया है। उन्होंने कहा कि जब तक चुनाव आयोग फर्जी मतदान रोकने के लिए कोई सख्त निर्णय नहीं उठाता है तब तक बसपा किसी भी उपचुनाव में भाग नहीं लेगी। उन्होंने कहा कि पहले बैलेट से फर्जी मतदान होते थे अब यह ईवीएम से भी होने लगा है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि सिर्फ उपचुनाव ही नहीं लड़ेंगे। बाकी चुनाव में भाग लेंगे। वहीं, बसपा सुप्रीमो मायावती के इस बयान पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि अब यूपी में उपचुनाव होने भी नहीं हैं। हालांकि, अयोध्या की मिल्कीपुर सीट पर कोर्ट का फैसला होने के बाद उपचुनाव हो सकते हैं। recent visitors 65

मायावती ने कहा- ‘यूपी सरकार द्वारा 50 से कम छात्रों वाले बदहाल 27,764 विद्यालयों को बंद करके विलय करने का फैसला उचित नहीं

लखनऊ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने यूपी में 27,764 परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के दूसरे स्‍कूलों में विलय की तैयारियों पर सवाल उठाया है। सोशल मीडिया प्‍लेटफार्म 'एक्‍स' पर एक के बाद एक तीन ट्वीट के जरिए उन्‍होंने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। मायावती ने लिखा- 'यूपी सरकार द्वारा 50 से कम छात्रों वाले बदहाल 27,764 परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में जरूरी सुधार करके उन्हें बेहतर बनाने के उपाय करने के बजाय उनको बंद करके उनका दूसरे स्कूलों में विलय करने का फैसला उचित नहीं। ऐसे में गरीब बच्चे आखिर कहाँ और कैसे पढ़ेंगे?' उन्होंने आगे लिखा, 'यूपी व देश के अधिकतर राज्यों में खासकर प्राइमरी व सेकण्डरी शिक्षा का बहुत ही बुरा हाल है जिस कारण गरीब परिवार के करोड़ों बच्चे अच्छी शिक्षा तो दूर सही शिक्षा से भी लगातार वंचित हैं। ओडिसा सरकार द्वारा कम छात्रों वाले स्कूलों को बंद करने का भी फैसला अनुचित।' अपने तीसरे ट्वीट में बसपा प्रमुख मायावती ने लिखा-'सरकारों की इसी प्रकार की गरीब व जनविरोधी नीतियों का परिणाम है कि लोग प्राइवेट स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाने को मजबूर हो रहे हैं, जैसाकि सर्वे से स्पष्ट है, किन्तु सरकार द्वारा शिक्षा पर समुचित धन व ध्यान देकर इनमें जरूरी सुधार करने के बजाय इनको बंद करना ठीक नहीं।' recent visitors 92

हरियाणा में भाजपा सरकार के फैसले पर भड़कीं मायावती, कहा- आरक्षण समाप्त करने की साजिश

नई दिल्ली हरियाणा की भाजपा सरकार ने पहली ही कैबिनेट मीटिंग में अनुसूचित जाति आरक्षण में उप-वर्गीकरण लागू करने का फैसला लिया है। सीएम नायब सिंह सैनी का कहना है कि इससे उन दलित जातियों को लाभ मिल सकेगा, जो अब तक आरक्षण से वंचित रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को एससी आरक्षण के वर्गीकरण का अधिकार दिया था। उसी फैसले के आधार पर भाजपा सरकार ने कैबिनेट में यह निर्णय लिया है। वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती इस फैसले पर भड़क गई हैं। उन्होंने कहा कि यह आरक्षण को ही खत्म करने की साजिश का हिस्सा है। इसके अलावा समाज में बंटवारे का प्रयास है। मायावती ने भाजपा सरकार के फैसले के तुरंत बाद एक्स पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, 'हरियाणा की नई भाजपा सरकार द्वारा एससी समाज के आरक्षण में वर्गीकरण को लागू करने अर्थात आरक्षण कोटे के भीतर कोटा की नई व्यवस्था लागू करने का फैसला दलितों को फिर से बांटने व उन्हें आपस में ही लड़ाते रहने का षड्यंत्र है। यह दलित विरोधी ही नहीं बल्कि घोर आरक्षण विरोधी निर्णय है।' यही नहीं मायावती ने भाजपा हाईकमान को भी इस फैसले को लेकर आड़े हाथों लिया। मायावती ने कहा कि हरियाणा सरकार को ऐसा करने से रोकने के लिए भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के आगे नहीं आने से भी यह साबित है कि कांग्रेस की तरह बीजेपी भी आरक्षण को पहले निष्प्रभावी बनाने और अन्ततः इसे समाप्त करने के षडयंत्र में लगी है। जो घोर अनुचित व बीएसपी इसकी घोर विरोधी है। मायवाती ने कहा कि वास्तव में जातिवादी पार्टियों द्वारा एससी-एसटी व ओबीसी समाज में ’फूट डालो-राज करो’ व इनके आरक्षण विरोधी षडयंत्र आदि के विरुद्ध संघर्ष का ही नाम बीएसपी है। इन वर्गों को संगठित व एकजुट करके उन्हें शासक वर्ग बनाने का हमारा संघर्ष लगातार जारी रहेगा। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी मायावती ने ऐतराज जताया था। उन्होंने तब केंद्र सरकार से अपील की थी कि वह अदालत में सही से पैरवी करे ताकि फैसला बदला जा सके। वहीं दलितों के ही एक वर्ग ने इस फैसले को सही करार दिया है। यहां तक कि अगस्त में ही जब एक वर्ग आरक्षण पर इस फैसले के विरोध में उतरा था तो वहीं वाल्मीकि समुदाय ने कई जगहों पर इसके समर्थन में प्रदर्शन किए थे। recent visitors 84

हरियाणा विधानसभा के चुनाव परिणाम के मायावती बोली अब कभी किसी भी दल के साथ बसपा गठबंधन नहीं करेगी

नई दिल्ली  बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने शुक्रवार को गठबंधन को लेकर बड़ा निर्णय लिया। बसपा प्रमुख ने सोशल मीडिया पर इस बात के संकेत दिए हैं कि उनकी पार्टी अब भविष्य किसी दल के साथ गठबंधन नहीं करेंगी। उन्होंने कहा कि हरियाणा विधानसभा के चुनाव परिणाम और इससे पहले पंजाब चुनाव के कड़वे अनुभव के मद्देनजर क्षेत्रीय पार्टियों से भी अब आगे गठबंधन नहीं होगा। जबकि, एनडीए और इंडिया गठबंधन से दूरी पहले की तरह ही जारी रहेगी। मायावती ने सोशल मीडिया पर एक के बाद एक कई पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। बसपा चीफ मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”यूपी सहित दूसरे राज्यों के चुनाव में भी बीएसपी का वोट गठबंधन की पार्टी को ट्रांसफर हो जाने, किंतु उनका वोट बीएसपी को ट्रांसफर कराने की क्षमता उनमें नहीं होने के कारण अपेक्षित चुनाव परिणाम नहीं मिलने से पार्टी कैडर को निराशा और उससे होने वाले मूवमेंट की हानि को बचाना जरूरी है। इसी संदर्भ में हरियाणा विधानसभा के चुनाव परिणाम और इससे पहले पंजाब चुनाव के कड़वे अनुभव के मद्देनजर आज हरियाणा और पंजाब की समीक्षा बैठक में क्षेत्रीय पार्टियों से भी अब आगे गठबंधन नहीं करने का निर्णय लिया गया है, जबकि भाजपा/एनडीए और कांग्रेस/इंडिया गठबंधन से दूरी पहले की तरह ही जारी रहेगी।” एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा, ”देश की एकमात्र प्रतिष्ठित अम्बेडकरवादी पार्टी बीएसपी और उसके आत्म-सम्मान एवं स्वाभिमान मूवमेंट के कारवां को हर प्रकार से कमजोर करने की चौतरफा जातिवादी कोशिशें लगातार जारी हैं, जिस क्रम में अपना उद्धार स्वयं करने योग्य व शासक वर्ग बनने की प्रक्रिया पहले की तरह ही जारी रखनी जरूरी।” आखिर में मायावती ने लिखा, ”बीएसपी विभिन्न पार्टियों/संगठनों व उनके स्वार्थी नेताओं को जोड़ने के लिए नहीं, बल्कि ’बहुजन समाज’ के विभिन्न अंगों को आपसी भाईचारा और सहयोग के बल पर संगठित होकर राजनीतिक शक्ति बनाने और उनको शासक वर्ग बनाने का आंदोलन है, जिसे अब इधर-उधर में ध्यान भटकाना अति-हानिकारक।” बता दें कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने इंडियन नेशनल लोकदल (आईएनएलडी) के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था। जहां भाजपा 48, कांग्रेस ने 37 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं, बसपा अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी। हालांकि, इनेलो ने बसपा के साथ मिलकर दो सीटों पर जीत हासिल की। बसपा को कुल 1.82 फीसदी वोट हासिल हुए हैं।     recent visitors 106

बहुजन समाज के आत्म सम्मान की ‘सच्ची मंजिल’ है बसपा : मायावती

लखनऊ  बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) को बहुजन समाज के आत्म सम्मान और स्वाभिमान के आंदोलन की राह में बाधा करार देते हुए दावा किया कि बसपा ही उनकी ‘सच्ची मंजिल’ है जो उन्हें ‘शासक वर्ग’ का हिस्सा बनाने के लिए संघर्ष कर रही है। मायावती ने बसपा संस्थापक कांशीराम के 18वें परिनिर्वाण दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ‘एक्स’ पर सिलसिलेवार पोस्ट किया। उन्होंने कहा, ‘‘बामसेफ, डीएस4 व बसपा के जन्मदाता एवं संस्थापक बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम जी को आज उनके परिनिर्वाण दिवस पर शत-शत नमन व अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित तथा उत्तर प्रदेश एवं देश भर में उन्हें विभिन्न रूपों में श्रद्धांजलि अर्पित करने वाले पार्टी के सभी लोगों व अनुयाइयों का तहेदिल से आभार।’’ बसपा प्रमुख ने विरोधी पार्टियों पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘गांधीवादी कांग्रेस व आरएसएसवादी (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) भाजपा व सपा आदि उनकी (बहुजन समाज) हितैषी नहीं बल्कि उनके आत्म-सम्मान व स्वाभिमान आंदोलन की राह में बाधा हैं, जबकि अम्बेडकरवादी बसपा उनकी सही-सच्ची मंजिल है, जो उन्हें मांगने वालों से देने वाला शासक वर्ग बनाने के लिए संघर्षरत है। यही आज के दिन का संदेश है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘देश में करोड़ों लोगों के लिए गरीबी, बेरोजगारी व जातिवादी द्वेष, अन्याय-अत्याचार का लगातार तंग व लाचार जीवन जीने को मजबूर होने से यह साबित है कि सत्ता पर अधिकतर समय काबिज रहने वाली कांग्रेस व भाजपा आदि की सरकारें न तो सही से संविधानवादी रही हैं और न ही उस नाते सच्ची देशभक्त हैं।’’  भाजपा की हार सुनिश्चित करने के लिए जाटों ने कांग्रेस को वोट दिया, लेकिन बसपा को छोड़ दिया : मायावती  बसपा नेता मायावती ने  इस बात पर अफसोस जताया कि हरियाणा में जाट समुदाय ने विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को वोट नहीं दिया। उन्हें लगता है कि दलितों के बारे में उनकी (जाटों की) मानसिकता बदलने की जरूरत है। पार्टी संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि मनाने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में आईं मायावती ने इस बात पर अफसोस जताया कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के साथ गठबंधन उनकी पार्टी के लिए लाभदायक नहीं रहा। मायावती ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराने और उसे सत्ता से बाहर रखने के लिए हरियाणा में जाट समुदाय ने कांग्रेस को वोट दिया, लेकिन इस प्रक्रिया में उन्होंने बसपा को छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि दलित वोट जहां इनेलो की ओर चले गए, वहीं जाटों के मत उनकी पार्टी को नहीं मिले। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “बसपा उम्मीदवारों को केवल दलित वोट मिले। अगर हमें दो से तीन प्रतिशत जाट वोट भी मिल जाते तो हम कुछ सीटें जीत सकते थे।” उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में दलितों के प्रति जाट समुदाय की मानसिकता में बदलाव आया है, लेकिन हरियाणा में ऐसा होना अभी बाकी है। इनेलो ने राज्य में दो सीटें जीतीं, जबकि बसपा को एक भी सीट नहीं मिली। सत्ता विरोधी लहर के बावजूद सत्तारूढ़ भाजपा ने हरियाणा में जीत की हैट्रिक लगाई और सत्ता बरकरार रखी तथा विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की वापसी की कोशिशों को विफल कर दिया। भाजपा ने 48 सीटें जीतकर अपनी अब तक की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि हासिल की। उसकी सीटों का आंकड़ा कांग्रेस से 11 अधिक था, जबकि जननायक जनता पार्टी (जजपा) और आम आदमी पार्टी जैसे दलों का सफाया हो गया और इनेलो को सिर्फ दो सीटें ही मिल पाईं। आप ने अकेले चुनाव लड़ा था। अगले वर्ष फरवरी में दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए मायावती ने उम्मीद जताई कि उनकी पार्टी अच्छा प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ आप, भाजपा और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला बसपा को बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करेगा। मायावती ने स्वीकार किया कि उत्तर प्रदेश से इतर अन्य राज्यों में बसपा को प्रत्यक्ष मुकाबलों में नुकसान उठाना पड़ता है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बसपा अगले महीने महाराष्ट्र और झारखंड में होने वाले चुनाव भी लड़ेगी।   recent visitors 118

मायावती ने अफसोस जताते हुए कहा- जाट समुदाय ने चुनाव में बसपा को वोट नहीं दिया, अब जाटों की मानसिकता बदलने की जरूरत है

नई दिल्ली बसपा नेता मायावती ने बुधवार को इस बात पर अफसोस जताया कि हरियाणा में जाट समुदाय ने विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को वोट नहीं दिया। उन्हें लगता है कि दलितों के बारे में उनकी (जाटों की) मानसिकता बदलने की जरूरत है। पार्टी संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि मनाने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में आईं मायावती ने इस बात पर अफसोस जताया कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के साथ गठबंधन उनकी पार्टी के लिए लाभदायक नहीं रहा। मायावती ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराने और उसे सत्ता से बाहर रखने के लिए हरियाणा में जाट समुदाय ने कांग्रेस को वोट दिया, लेकिन इस प्रक्रिया में उन्होंने बसपा को छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि दलित वोट जहां इनेलो की ओर चले गए, वहीं जाटों के मत उनकी पार्टी को नहीं मिले। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “बसपा उम्मीदवारों को केवल दलित वोट मिले। अगर हमें दो से तीन प्रतिशत जाट वोट भी मिल जाते तो हम कुछ सीटें जीत सकते थे।” उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में दलितों के प्रति जाट समुदाय की मानसिकता में बदलाव आया है, लेकिन हरियाणा में ऐसा होना अभी बाकी है। इनेलो ने राज्य में दो सीटें जीतीं, जबकि बसपा को एक भी सीट नहीं मिली। सत्ता विरोधी लहर के बावजूद सत्तारूढ़ भाजपा ने हरियाणा में जीत की हैट्रिक लगाई और सत्ता बरकरार रखी तथा विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की वापसी की कोशिशों को विफल कर दिया। भाजपा ने 48 सीटें जीतकर अपनी अब तक की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि हासिल की। उसकी सीटों का आंकड़ा कांग्रेस से 11 अधिक था, जबकि जननायक जनता पार्टी (जजपा) और आम आदमी पार्टी जैसे दलों का सफाया हो गया और इनेलो को सिर्फ दो सीटें ही मिल पाईं। आप ने अकेले चुनाव लड़ा था। अगले वर्ष फरवरी में दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए मायावती ने उम्मीद जताई कि उनकी पार्टी अच्छा प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ आप, भाजपा और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला बसपा को बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करेगा। मायावती ने स्वीकार किया कि उत्तर प्रदेश से इतर अन्य राज्यों में बसपा को प्रत्यक्ष मुकाबलों में नुकसान उठाना पड़ता है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बसपा अगले महीने महाराष्ट्र और झारखंड में होने वाले चुनाव भी लड़ेगी।   recent visitors 98