एक fit और Healthy Nation बनने के लिए हमें Obesity की समस्या से निपटना ही होगा : पीएम मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में 'मन की बात' कार्यक्रम में बढ़ते मोटापे पर चिंता जताई थी। मोटापा सिर्फ सेहत के लिए ही नहीं बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी खतरे की घंटी है। ग्लोबल ओबेसिटी ऑब्जर्वेटरी के अनुसार 2019 में भारत में मोटापे का आर्थिक बोझ लगभग 28.95 अरब डॉलर था जो देश की GDP का 1% है। अगर यही हाल रहा तो इस साल इसके 81.53 अरब डॉलर होने की आशंका है जो GDP का 1.57% होगा। माना जा रहा है कि साल 2060 तक मोटापे से देश की इकॉनमी को 838.6 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है। यह देश की GDP का करीब 2.5% है। पिछले साल जुलाई में जारी हुए आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 में चेतावनी दी गई थी कि अगर भारतीय फिट नहीं रहेंगे तो देश को डेमोग्राफिक डिविडेंड यानी युवा आबादी का पूरा फायदा नहीं मिलेगा। यानी हमारी आबादी स्वस्थ नहीं होगी तो इसका असर देश के विकास पर पड़ेगा। सर्वे के मुताबिक अगर भारत को अपने डेमोग्राफिक डिविडेंड का फायदा उठाना है, तो इसके लिए यह जरूरी है कि उसके लोगों के स्वास्थ्य मानकों में संतुलित और विविध आहार की ओर बदलाव हो। सर्वे में मोटापे को एक प्रमुख स्वास्थ्य चुनौती बताया गया था। सर्वे के मुताबिक भारत की वयस्क आबादी में मोटापा एक गंभीर चिंता का विषय बन रहा है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 5 के अनुसार 18-69 आयु वर्ग के पुरुषों में मोटापे का प्रतिशत 22.9% हो गया है जो पिछले सर्वे में 18.9% था। महिलाओं में मोटापा 20.6% से बढ़कर 24.0% हो गया है। कम शारीरिक गतिविधि इसका एक बड़ा कारण हो सकता है। साथ ही लोगों की खानपान की आदत में भी बदलाव आया है। पैकेट बंद और प्रोसेस्ड खाना खाने से मोटापा बढ़ता है। आपकी थाली में क्या है? आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 ने अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड पर चिंता जताई है। इसमें चीनी, नमक और अनहेल्दी फैट पर सख्त नियम बनाने की बात कही गई है। इसमें खाने के पैकेट पर चेतावनी लेबल लगाने और जंक फूड के विज्ञापन पर, खासकर बच्चों के लिए, रोक लगाने का सुझाव दिया गया है। स्कूलों, अस्पतालों और सार्वजनिक जगहों पर ऐसे खाने को हटाने और मिलेट्स, फल और सब्जियों जैसे स्वास्थ्यवर्धक खाने को सस्ता करने की बात भी कही गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारतीय अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संबंध परिषद (ICRIER) की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य क्षेत्र में 2011 से 2021 तक खुदरा बिक्री मूल्य में सालाना 13.37% की तेजी रही है। घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (HCES) 2022-23 के आंकड़ों से पता चलता है कि ग्रामीण परिवार अपने खाद्य बजट का लगभग 9.6% प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों पर खर्च करते हैं जबकि शहरी परिवार लगभग 10.64% खर्च करते हैं। नेशनल वेट-लॉस प्लान? इन सब चेतावनियों के बावजूद भारत में मोटापे से निपटने के लिए कोई ठोस राष्ट्रीय रणनीति नहीं है। हालांकि बच्चों और कमजोर वर्गों के पोषण के लिए नीतियां हैं लेकिन सभी आयु वर्ग के लोगों में मोटापे से निपटने के लिए कोई व्यापक योजना नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जल्द ही कदम नहीं उठाए गए तो आर्थिक बोझ बहुत बढ़ जाएगा। राष्ट्रीय पोषण संस्थान में काम कर चुके वैज्ञानिक ए लक्ष्मैया ने बताया कि मोटापे का आर्थिक प्रभाव सिर्फ इलाज की लागत तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, 'रोजगार का नुकसान, अवसरों की कमी और सोशल सपोर्ट की कमी के कारण भावनात्मक तनाव भी इस आर्थिक बोझ में काफी योगदान करते हैं।' आगे का रास्ता मोटापा सिर्फ व्यक्तिगत स्वास्थ्य का मामला नहीं है, यह राष्ट्रीय समृद्धि से भी जुड़ा है। अगर भारत अपने डेमोग्राफिक डिविडेंड का पूरा फायदा उठाना चाहता है, तो उसके पास एक स्वस्थ और उत्पादक वर्कफोर्स होना बहुत जरूरी है। आर्थिक सर्वेक्षण साफ कहता है कि अगर हमने अभी मोटापे पर नियंत्रण नहीं किया तो हम अपनी आर्थिक क्षमता का पूरा लाभ नहीं उठा पाएंगे। तो अगली बार जब आप चिप्स का एक और पैकेट खाने के लिए हाथ बढ़ाएं या व्यायाम छोड़ने का फैसला करें, तो याद रखें कि यह सिर्फ आपके स्वास्थ्य का ही नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था का भी सवाल है। recent visitors 67

प्रधानमंत्री मोदी और शरद पवार की दिल्ली वाली तस्वीर की चर्चाएं महाराष्ट्र की सियासत में खूब …..

मुंबई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और NCP (SP) प्रमुख शरद पवार की दिल्ली वाली तस्वीर की चर्चाएं महाराष्ट्र की सियासत में खूब हो रही हैं. इस बीच, राज्य की पॉलिटिक्स में दो बड़े अपडेट देखने को मिले हैं. पहला, शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता संजय राउत के सुर बदले नजर आए हैं. उन्होंने सरकार के फैसलों पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की खुलकर तारीफ की है. दूसरा, शरद पवार की पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले से मुलाकात की है. इस मीटिंग के बाद पाटिल के राजनीतिक रुख पर अटकलें तेज हो गई हैं. दरअसल, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 21 फरवरी को 98वां अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम में बतौर अतिथि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे. शरद पवार कार्यक्रम के आयोजक मंडल में शामिल थे. पीएम मोदी जब दीप प्रज्ज्वलन करने पहुंचे तो उन्होंने शरद पवार से आगे आने का अनुरोध किया. उसके बाद जब पवार अपना संबोधन खत्म करके सीट की तरफ लौट रहे थे तो PM मोदी ने सीट पर बैठने में मदद की और उनको पानी का गिलास भरकर दिया. सोशल मीडिया पर इस वीडियो की खूब तारीफ की गई. 'बैठक में राजनीति पर चर्चा नहीं हुई' इस बीच, अब खबर है कि महाराष्ट्र NCP (SP) अध्यक्ष जयंत पाटिल और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले के बीच बैठक हुई है. हालांकि, पाटिल ने सफाई में कहा कि मुंबई में बैठक के दौरान राजनीति पर चर्चा नहीं हुई. पाटिल ने कहा, हमने सांगली जिले में अपने निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित कार्यों को लेकर सोमवार शाम बावनकुले से मुलाकात की. पूर्व मंत्री पाटिल को NCP (SP) प्रमुख शरद पवार का बेहद करीबी माना जाता है. पाटिल ने कहा, हां, मैं बावनकुले से मिला. मैंने अपने क्षेत्र से संबंधित काम के लिए उनसे मुलाकात की. मेरे साथ एक प्रतिनिधिमंडल भी था और 25 मिनट की बैठक के दौरान कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई. हमने सिर्फ स्थानीय मुद्दों पर चर्चा की. 'एक दर्जन मांगें सामने रखीं' पाटिल ने बैठक में सांगली जिले के मुद्दों से संबंधित कम से कम एक दर्जन मांगें रखीं और भूमि रिकॉर्ड की ऑनलाइन प्रोसेसिंग के संबंध में बात की. पाटिल ने कहा, यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, जिसे मैंने बावनकुले के ध्यान में लाया. उन्होंने कहा, भूमि अधिग्रहण से संबंधित कई मामलों को हल करने की जरूरत है. गडकरी के साथ भी मंच साझा कर चुके पाटिल बावनकुले ने कहा कि राज्य मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल भी बैठक में उपस्थित रहे. उन्होंने कहा, करीब 400 से 500 लोग भी मौजूद थे. बैठक में कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई. पाटिल ने हाल ही में एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री और बीजेपी सांसद नितिन गडकरी के साथ मंच साझा किया था. पाटिल इस्लामपुर से विधायक हैं. राउत ने फडणवीस की तारीफ में क्या कहा? इधर, शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने 'फिक्सर' को मंत्रियों का ओएसडी या पीएस नहीं बनने देने के लिए सीएम फडणवीस की तारीफ की है. राउत ने कहा, जिन लोगों को पदों के लिए नजरअंदाज किया गया, उनमें से अधिकांश शिवसेना (शिंदे) के मंत्री थे. उन्होंने दावा किया कि कैबिनेट मंत्रियों के 16 निजी सचिवों (पीएस) या विशेष कर्तव्य अधिकारियों (ओएसडी) की नियुक्ति को फडणवीस ने मंजूरी नहीं दी, उनमें से 13 शिवसेना के मंत्री थे. 'सख्त फैसले ले रहे हैं फडणवीस' पत्रकारों से बातचीत में राउत ने 'फिक्सरों' की नियुक्ति को रोकने के लिए गृह विभाग रखने वाले फडणवीस की सराहना की. राउत ने कहा, मेरे पास 16 पीएस के नाम हैं, जिनमें से 13 शिंदे के हैं और बाकी अजित पवार खेमे के हैं. वो (फडणवीस) सख्त फैसले ले रहे हैं. हमारे बीच राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन हम राज्य के हित में लिए गए फैसलों का समर्थन करते हैं. 'फडणवीस ने लूट रोक दी' उन्होंने कहा कि फडणवीस ने महाराष्ट्र के खजाने की लूट रोक दी है. राउत का कहना था कि जब एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री थे (जून 2022-नवंबर 2024) और जिन परियोजनाओं की लागत बढ़ा दी गई थी, उन स्वीकृत प्रोजेक्ट पर काम सस्पेंड करके फडणवीस ने राज्य की लूट को रोक दिया है. 'फिक्सर' के नामों को मंजूरी नहीं फडणवीस ने सोमवार को कहा, हमने पीएस या ओएसडी के रूप में नियुक्ति के लिए कैबिनेट मंत्रियों द्वारा भेजे गए 125 नामों में से 109 को मंजूरी दे दी, लेकिन अन्य को मंजूरी नहीं दी क्योंकि वे या तो पूछताछ का सामना कर रहे हैं या फिक्सर के रूप में जाने जाते हैं. फडणवीस ने कहा, शेष (16) के नामों को मंजूरी नहीं देने के पीछे या तो उन अधिकारियों के खिलाफ कोई जांच चल रही है या उन्हें प्रशासनिक हलकों में फिक्सर के रूप में जाना जाता है.   recent visitors 95

मुंबई हमले के आरोपी तहव्वुर राणा को भारत भेजेगा अमेरिका, मोदी के साथ बैठक के बाद ट्रंप ने किया एलान

नई दिल्ली अमेरीका मुंबई आतंकी हमले के गुनहगार तहव्वुर हुसैन राणा को भारत भेजने के लिए राजी हो गया है. व्हाइट हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक के बाद अमेरिका राष्ट्रपित डोनॉल्ड ट्रंप ने कहा कि मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि अमेरिका प्रशासन ने साल 2008 के मुंबई हमले के गुनहगार तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण (Extradition) को भारत में न्यायिक प्रक्रिया का सामना करने के लिए मंजूरी दे दी है. पाकिस्तानी मूल का कनाडाई नागरिक तहव्वुर राणा फिलहाल लॉस एंजिलिस के एक मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में बंद है. माना जाता है कि वह मुंबई के 26/11 हमलों के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक पाकिस्तानी-अमेरिकी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली से जुड़ा है. अमेरिका की यात्रा पर गए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ संयुक्त पत्रकार वार्ता में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘‘आज मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि मेरे प्रशासन ने दुनिया के सबसे बुरे इंसानों में से एक और मुंबई आतंकवादी हमले के साजिशकर्ताओं में से एक को भारत में न्याय का सामना करने के लिए प्रत्यर्पित करने को मंजूरी दे दी है. इसलिए, वह न्याय का सामना करने के लिए भारत वापस जा रहा है.’’ जनवरी 2025 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राणा की समीक्षा याचिका खारिज कर दी और उसके प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी थी. भारत ने पिछले महीने कहा था कि वह राणा के शीघ्र प्रत्यर्पण के लिए अमेरिकी अधिकारियों के साथ काम कर रहा है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था, ‘‘अमेरिका के उच्चतम न्यायालय ने 21 जनवरी को आरोपी की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया. हम अब मुंबई आतंकवादी हमले के आरोपी को शीघ्र भारत प्रत्यर्पित करने के लिए प्रक्रियागत मुद्दों पर अमेरिका के साथ काम कर रहे हैं.’’ PM मोदी ने ट्रम्प का दिया धन्यवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के इस फैसले की सराहना की और राष्ट्रपति ट्रंप को धन्यवाद दिया है. मोदी ने कहा कि मुंबई हमले का एक आरोपी भारत आ रहा है, जहां उस पर मुकदमा चलेगा. मैं राष्ट्रपति ट्रंप का शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने इस प्रक्रिया को जल्दी पूरा किया.” डेविड हेडली ने दी थी राणा के खिलाफ गवाही पाकिस्तानी मूल के कारोबारी तहव्वुर हुसैन राणा 26/11 मुंबई आतंकी हमलों में दोषी पाया गया था. अब यहां भारतीय एजेंसियां उससे पूछताछ करेंगी और उस पर मुकदमा चलेगा. राणा को पहले से ही मुंबई हमले की जानकारी थी और वह पाकिस्तान के आतंकी संगठनों और उनके नेताओं के संपर्क में था. इस साजिश में उसके साथ शामिल लोगों में डेविड कोलमैन हेडली भी था. हेडली ने अपना जुर्म कबूल कर लिया था और राणा के खिलाफ गवाही दी थी. आईएसआई से करीबी संबंध रखता था तहव्वुर राणा राणा पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (Inter-Services Intelligence) से करीबी संबंध रखने का भी आरोप है. मुंबई पुलिस की 400 से अधिक पन्नों की चार्जशीट के मुताबिक तहव्वुर हुसैन राणा 11 नवंबर 2008 को भारत आया था और 21 नवंबर तक यहां रुका था. इस दौरान उसने दो दिन मुंबई के पवई इलाके के रेनेसांस होटल में बिताए थे. मुंबई हमले में मारे गए थे इतने लोग पाकिस्तान के 10 आतंकवादियों के एक समूह ने 26 नवंबर 2008 को अरब सागर के रास्ते मुंबई में घुसने के बाद एक रेलवे स्टेशन, दो आलीशान होटलों और एक यहूदी केंद्र पर समन्वित हमला किया. लगभग 60 घंटे तक जारी रहे इस हमले में 166 लोग मारे गए थे, इस हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था और यहां तक ​​कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की स्थिति भी बन गई थी. नवंबर 2012 में पाकिस्तान आतंकवादी समूह के एकमात्र जीवित आतंकी अजमल आमिर कसाब को पुणे की यरवदा जेल में फांसी पर लटका दिया गया था. भारत इस नृशंस हमले में शामिल लोगों को दंडित करने के लिए पाकिस्तान पर दबाव बना रहा है, लेकिन हमले के आरोपियों के खिलाफ अब तक मुकदमे की कार्रवाई बहुत आगे नहीं बढ़ पाई है.   recent visitors 42

भारत के प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा के दौरान भारत-अमेरिका संयुक्त वक्तव्य, हुए 9 अहम् समझौते

नई दिल्ली/वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मुंबई में 26 नवंबर 2008 के आतंकवादी हमले के साजिशकर्ता तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण किये जाने, भारतीय वायु सेना के लिए एफ 35 युद्धक विमान की खरीद का मार्ग प्रशस्त करने तथा भारत को तेल एवं गैस की आपूर्ति के एक समझौते की घोषणा की है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने व्हाइट हाउस में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ चार घंटे तक चली बैठकों के बाद ये घोषणाएं की तथा संकेत दिया कि वह भारत द्वारा खालिस्तानी आतंकवादियों के प्रत्यर्पण की दिशा में कदम उठाने वाले हैं। उन्होंने बंगलादेश के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी को समुचित कदम उठाने की भी सलाह दी। व्यापार समझौतों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ किया कि वह किसी को हराना नहीं बल्कि अमेरिका के हितों की रक्षा करने के हक में हैं। मोदी के व्हाइट हाउस पहुंचने पर ट्रंप ने बहुत गर्मजोशी स्वागत करते हुए गले मिले। ट्रंप ने कहा, “हमने आप याद आए, हमने आपको बहुत याद किया। प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करके मुझे बहुत खुशी हुई। वह लंबे समय से मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं।” दोनों नेताओं के बीच ओवल आफिस में एकांत में मुलाकात हुई और फिर प्रतिनिधिमंडल स्तर की बात हुई। राष्ट्रपति ट्रम्प ने प्रधानमंत्री को एक पुस्तक “हमारी यात्रा एक साथ” उपहार में दी। उन्हें हाउडी मोदी और नमस्ते ट्रम्प कार्यक्रम से संबंधित कई तस्वीरें तथा कई अन्य तस्वीरें दिखाईं। ट्रम्प ने पुस्तक पर हस्ताक्षर के साथ लिखा, “श्रीमान प्रधानमंत्री आप महान हैं।” बाद में मीडिया से बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “मैं व्हाइट हाउस में पीएम मोदी का स्वागत करके रोमांचित हूं। हम यहां और भारत में भी काफी समय बिताते हैं। हमने 5 साल पहले आपके खूबसूरत देश की यात्रा की थी… यह एक अविश्वसनीय समय था। अमेरिका और भारत के बीच एक विशेष संबंध है – दुनिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े लोकतंत्र का। ” उन्होंने कहा, “भारत के प्रधानमंत्री मोदी का यहां आना बहुत सम्मान की बात है। वह लंबे समय से मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं। हमारा एक अद्भुत संबंध रहा है और हमने अपने 4 साल की अवधि के दौरान रिश्ते को बनाए रखा… हमने अभी फिर से शुरुआत की है। मुझे लगता है कि हमारे पास बात करने के लिए कुछ बहुत बड़ी चीजें हैं। वे हमारे बहुत सारे तेल और गैस खरीदने जा रहे हैं। हमारे पास दुनिया के किसी भी अन्य देश की तुलना में अधिक तेल और गैस है। उन्हें इसकी आवश्यकता है, और हमारे पास है। हम व्यापार के बारे में बात करने जा रहे हैं। हम कई चीजों के बारे में बात करने जा रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि किसी और चीज से ज्यादा, हमारे और हमारे देशों के बीच में महान एकता है, हमारी बहुत अच्छी दोस्ती है। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हम देशों के रूप में एकजुट रहें। हम दोस्त हैं और हम इस तरह से रहेंगे। ट्रंप ने कहा,“… लोगों का कहना है कि पिछले तीन सप्ताह राष्ट्रपति पद की शुरुआत के लिए सबसे अच्छे तीन हफ्तों में से एक थे। ऐसा कभी नहीं हुआ। जब आप देखते हैं कि हम तीन सप्ताह में क्या करने में सक्षम हैं, तो लोग वास्तव में आश्चर्यचकित हैं। यहां तक कि प्रधानमंत्री मोदी ने भी इसका उल्लेख किया। मुझे लगता है कि अन्य देश इसे देख रहे हैं, लेकिन मैं यहां आने के लिए सभी को धन्यवाद देना चाहता हूं। ये (मोदी) एक अद्भुत व्यक्ति है। हम भारत और अमेरिका के लिए कुछ अद्भुत व्यापार सौदे करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “ आज, प्रधानमंत्री और मैं संबंधों को और मजबूत करने के लिए ढांचे की घोषणा कर रहे हैं।” ट्रंप ने कहा, “मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि मेरे प्रशासन ने 2008 के भयानक मुंबई आतंकवादी हमले के साजिशकर्ताओं में से एक (तहव्वुर राणा) और दुनिया के बहुत बुरे लोगों में से एक के प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी है, जिसका भारत में न्याय का सामना करना है। वह आतंकवादी हमले से संबंध में न्याय का सामना करने के लिए भारत वापस जा रहा है।” ट्रंप ने कहा, “इस साल से हम भारत को सैन्य बिक्री में अरबों डॉलर की वृद्धि करेंगे। हम अंततः भारत को एफ 35, युद्धक विमान प्रदान करने का मार्ग भी प्रशस्त कर रहे हैं।” ट्रंप ने कहा, “प्रधानमंत्री और मैं ऊर्जा पर एक महत्वपूर्ण समझौते पर भी पहुंचे जो अमेरिका को भारत को तेल और प्राकृतिक गैस का अग्रणी आपूर्तिकर्ता बनना सुनिश्चित करेगा। उम्मीद है कि अमेरिका नंबर 1 आपूर्तिकर्ता होगा। अमेरिकी परमाणु उद्योग के लिए अभूतपूर्व विकास की दिशा में, भारत अमेरिकी परमाणु प्रौद्योगिकी का स्वागत करने के लिए कानूनों में भी सुधार कर रहा है, जो भारतीय बाजार में हमारी परमाणु प्रौद्योगिकी की उच्चतम स्तर पर पहुंच सुनिश्चित करेगा। आईएमईसी (भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे) का उल्लेख करते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा,“हम इतिहास के सभी में सबसे महान व्यापार मार्गों में से एक बनाने के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हुए। यह भारत से इजरायल से इटली और आगे अमेरिका तक चलेगा, हमारे भागीदारों को सड़कों, रेलवे और समुद्र के नीचे के के केबलों के माध्यम से जोड़ेगा। यह एक बड़ा विकास है।” मोदी ने अपने वक्तव्य में कहा, सबसे पहले मैं अपने दोस्त डोनाल्ड ट्रम्प को गर्मजोशी से स्वागत और महान आतिथ्य के लिए धन्यवाद देता हूं। राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने नेतृत्व के माध्यम से भारत और अमेरिका के बीच संबंधों को संजोया है और इसे जीवंत बनाया है। उनके पहले कार्यकाल के दौरान, हमने एक साथ काम किया, वही उत्साह, ऊर्जा और समर्पण, मैंने आज भी अनुभव किया। आज की चर्चा में हमने उनके पहले कार्यकाल के दौरान अपनी उपलब्धियों और गहरे आपसी विश्वास के बारे में बात की और नए लक्ष्यों को प्राप्त करने का संकल्प भी था। भारत और अमेरिका मिलकर एक बेहतर दुनिया को आकार दे सकते हैं। मोदी ने कहा, “मैं आपको व्हाइट हाउस में वापस देखकर खुश हूं मैं आपको भारत के 140 करोड़ लोगों की ओर से बधाई देता हूं… भारत के लोगों ने मुझे तीसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में सेवा करने का अवसर दिया… इस कार्यकाल में, मुझे अगले 4 … Read more

ट्रंप की पीएम मोदी से आज होगी मुलाकात, कई मुद्दों पर होगी चर्चा

 वॉशिंगटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय अमेरिकी दौरे पर हैं, जहां वह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे. पीएम मोदी और ट्रंप के बीच होने वाली वार्ता में विशेष रूप से व्यापार, रक्षा और ऊर्जा सहयोग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी. इसके अलावा आतंकवाद, भारत-प्रशांत क्षेत्र, चीन, H1B वीजा और गैंगस्टर जैसे मुद्दों पर भी बात हो सकती है. वह गुरुवार तड़के वॉशिंगटन पहुंचे जहां भारतीय समुदाय के लोगों ने उनका जोरदार स्वागत किया. आज रात पीएम मोदी की ट्रंप के साथ व्हाइट हाउस में मुलाकात होगी. दोनों एक साथ डिनर भी करेंगे. पीएम मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति के गेस्ट हाउस ब्लेयर हाउस में ठहरे हुए हैं. व्हाइट हाउस में दोनों नेताओं की द्विपक्षीय वार्ता होगी. इस बैठक में दोनों नेता ट्रेड, निवेश, एनर्जी, डिफेंस और इमिग्रेशन पर चर्चा करेंगे. पीएम मोदी के डेलीगेशन की कुल 6 बैठकें होंगी. पीएम मोदी का अमेरिकी दौरा ऐसे समय पर हो रहा है, जब अमेरिका में कड़ाके की ठंड पड़ रही है. लेकिन बर्फबारी के बावजूद पीएम मोदी के दौरे को लेकर भारतीय समुदाय के लोगों का उत्साह बना हुआ है. वॉशिंगटन पहुंचने पर पीएम मोदी ने कहा कि कड़ाके की ठंड में गर्मजोशी भरा स्वागत. ठंड के मौसम के बावजूद वॉशिंगटन डीसी के भारतीय समुदाय ने मेरा विशेष स्वागत किया. मैं उनके प्रति आभारी हूं. व्हाइट हाउस में जब मिलेंगे ट्रंप और मोदी आज रात पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की व्हाइट हाउस में द्विपक्षीय वार्ता होगी. डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली मुलाकात है. पीएम मोदी चौथे ऐसे विदेशी नेता हैं, जो ट्रंप से मुलाकात करेंगे. इससे पहले इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, जापान के प्रधानमंत्री और जॉर्डन के किंग अमेरिकी राष्ट्रपति से मुलाकात कर चुके हैं. पीएम मोदी ने वॉशिंगटन पहुंचने पर कहा कि वह राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात और भारत-अमेरिका ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को लेकर आशान्वित हैं. हमारे लोगों की भलाई और हमारी पृथ्वी की बेहतर भविष्य के लिए हम मिलकर काम करते रहेंगे. पीएम मोदी आज ट्रंप के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे. इसके अलावा वे कई बिजनेस लीडर्स और भारतीय समुदाय के लोगों से भी मिलेंगे. पीएम मोदी का ट्रंप संग प्राइवेट डिनर राष्ट्रपति ट्रंप की मेजबानी में व्हाइट हाउस में प्राइवेट डिनर का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें पीएम मोदी शिरकत करेंगे. मीटिंग से पहले और बाद में दोनों नेता ओवल ऑफिस में मीडिया को संबोधित करेंगे. एलॉन मस्क समेत अमेरिकी कारोबारियों से पीएम मोदी की मुलाकातों पर भी सभी की नजरें रहेंगी. बता दें कि पीएम मोदी का ये दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब अमेरिका ने हाल ही में 104 अवैध प्रवासी भारतीयों को वापस भेजा दिया था. recent visitors 57

फरवरी में VIP मूवमेंट का बड़ा दौर, पीएम मोदी, अमित शाह और राष्ट्रपति मुर्मु पहुंचेंगे प्रदेश

छतरपुर भोपाल में आयोजित ग्लोबल इंवेस्टर समिट का उद्घाटन पीएम मोदी करेंगे. इसके लिए पीएम 24 फरवरी को भोपाल आएंगे, लेकिन इससे पहले वह बागेश्वर धाम जाएंगे. जहां पीएम बागेश्वर धाम में बनने वाले कैंसर हॉस्पिटल का उद्घाटन करेंगे. वहीं राष्ट्रपति 26 फरवरी को बागेश्वर धाम में आयोजित  251 कन्याओं के विवाह के महामहोत्सव में आ सकती हैं. 26 को आएंगी राष्ट्रपति वहीं, महाशिवरात्रि पर्व पर बागेश्वर धाम में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा आयोजित 251 कन्याओं के विवाह के महामहोत्सव में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आ सकती हैं. जिन कन्याओं का विवाह होना है, उनमें 108 कन्याएं आदिवासी वर्ग की हैं. इसलिए माना जा रहा है कि राष्ट्रपति नवविवाहित जोड़ों को सुखी दांपत्य जीवन के लिए आशीर्वाद देने के लिए पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के विशेष आग्रह पर आ रही हैं. कैंसर अस्पताल की पीएम रखेंगे आधारशिला 23 फरवरी को बागेश्वर धाम में कैंसर हॉस्पिटल का पीएम नरेंद्र मोदी भूमिपूजन करेंगे. बीते दिनों धीरेंद्र शास्त्री ने बताया था कि कार्यक्रम में कई बड़ी हस्तियां शामिल होंगी. उन्होंने बताया था कि पहले चरण में 3 साल में 100 बेड का सुविधायुक्त अस्पताल बनकर तैयार होगा. जानकारी के अनुसार, अस्पताल के उद्घाटन के लिए धीरेंद्र शास्त्री ने पीएम नरेंद्र मोदी को कैंसर हॉस्पिटल के भूम पूजन का निमंत्रण दिया था.   तैयारियां हुई तेज दो महीने के अंतराल में छतरपुर जिले में प्रधानमंत्री का यह दूसरा दौरा होगा. राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए छतरपुर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं. राष्ट्रपति के संभावित दौरे को देखते हुए छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने जिले के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं. इसको लेकर कलेक्टर ने एक आदेश भी जारी किया है.   PM मोदी का दौरा: 23 फरवरी को MP पहुंचेंगे, 24 को GIS का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 फरवरी को ही मध्यप्रदेश पहुंच जाएंगे और छतरपुर के बागेश्वर धाम में कैंसर अस्पताल की आधारशिला रखेंगे। इसके बाद 24 फरवरी को भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 का औपचारिक उद्घाटन करेंगे।  23 फरवरी: बागेश्वर धाम, छतरपुर – कैंसर अस्पताल की आधारशिला  24 फरवरी: भोपाल – ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS 2025) का उद्घाटन गृहमंत्री अमित शाह 25 फरवरी को पहुंचेंगे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 25 फरवरी को भोपाल में GIS 2025 के समापन समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। इस मौके पर देश-विदेश के निवेशकों के साथ उद्योग जगत की प्रमुख हस्तियां भी मौजूद रहेंगी।  25 फरवरी: ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का समापन समारोह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का संभावित दौरा – 26 फरवरी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का 26 फरवरी को छतरपुर के बागेश्वर धाम में प्रवास प्रस्तावित है। इसको लेकर जिला प्रशासन ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं।   26 फरवरी: बागेश्वर धाम, छतरपुर – राष्ट्रपति का दौरा संभावित छतरपुर कलेक्टर ने आदेश जारी किया है कि 11 से 26 फरवरी तक कोई भी अधिकारी या कर्मचारी अवकाश पर नहीं रहेगा। VIP दौरों को लेकर सुरक्षा और तैयारियों का जायजा इन हाई-प्रोफाइल दौरों को देखते हुए मध्यप्रदेश सरकार और जिला प्रशासन सतर्क हो गया है। भोपाल और छतरपुर में सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है और प्रशासनिक अधिकारियों को तैयारियों को लेकर निर्देश दिए गए हैं। recent visitors 52

‘पीएम मोदी को हटाना चाहता था US, रची थी बड़ी साजिश’, पूर्व विदेश विभाग अधिकारी के दावे से मची खलबली

नई दिल्ली/ वाशिंगटन अमेरिका के पूर्व विदेश विभाग के अधिकारी माइक बेंज (Mike Benz) ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने भारत के आंतरिक राजनीति में दखल दिया है। इतना ही नहीं अमेरिका ने बांग्लादेश की राजनीति में भी दखल देने की कोशिश की है।उन्होंने दावा किया है कि अमेरिका ने मीडिया प्रभाव, सोशल मीडिया सेंसरशिप और विपक्षी आंदोलनों को वित्तीय सहायता के माध्यम से भारत की राजनीति को प्रभाव डालने की कोशिश की है। एक दिन पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे ने अमेरिकी संस्था ‘यूएसएड’ (USAID) द्वारा भारत को विभाजित करने के लिए विभिन्न संस्थाओं को धन दिए जाने का दावा किया था। उन्होंने सोमवार को अपनी सरकार से मांग करते हुए कहा कि इस मामले में जांच कराई जाए और दोषी पाए गए लोगों को जेल में डाला जाए। अब दुबे के दावे को अमेरिका के एक पूर्व अधिकारी के खुलासे से और बल मिलेगा। दरअसल अमेरिका के पूर्व विदेश विभाग अधिकारी माइक बेंज ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने भारत और बांग्लादेश सहित कई देशों की आंतरिक राजनीति में दखल दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने मीडिया प्रभाव, सोशल मीडिया सेंसरशिप और विपक्षी आंदोलनों को वित्तीय सहायता के माध्यम से इन देशों की राजनीति को प्रभावित किया। बेंज का दावा है कि अमेरिकी सरकार से जुड़ी संस्थाओं ने ‘लोकतंत्र को बढ़ावा देने’ की आड़ में चुनावों को प्रभावित करने, सरकारों को अस्थिर करने और अपने रणनीतिक हितों के अनुरूप विदेशी सरकार बनाने का काम किया। 2019 के भारतीय आम चुनाव में दखल का आरोप एक रिपोर्ट के मुताबिक, बेंज ने आरोप लगाया कि अमेरिकी विदेश नीति से जुड़े इस कांड में यूएसएड, थिंक टैंक और बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियां शामिल हैं। इन्होंने भारत के 2019 के आम चुनावों को प्रभावित करने का प्रयास किया। उनका कहना है कि इन समूहों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के खिलाफ चुनावी नैरेटिव तैयार किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी संगठनों ने इस धारणा को बढ़ावा दिया कि मोदी की राजनीतिक सफलता गलत सूचनाओं की वजह से है। इसके आधार पर व्यापक सेंसरशिप का वातावरण तैयार किया गया। सोशल मीडिया पर दबाव का आरोप बेंज का कहना है कि अमेरिकी विदेश विभाग ने फेसबुक, वॉट्सऐप, यूट्यूब और ट्विटर जैसी बड़ी टेक कंपनियों पर प्रभाव डालते हुए मोदी समर्थक कंटेंट पर अंकुश लगाने का प्रयास किया। वॉट्सऐप की जनवरी 2019 में मैसेज फॉरवर्डिंग की सीमा को कम करने की नीति को भाजपा की डिजिटल पहुंच रोकने का एक सटीक उदाहरण बताया गया। बेंज के अनुसार, अमेरिका समर्थित संस्थाओं ने भारत के डिजिटल स्पेस में हस्तक्षेप को सही ठहराने के लिए मोदी के समर्थकों को ऑनलाइन फर्जी खबरें फैलाने के लिए रणनीतिक रूप से फंसाया। उनका दावा है कि यूएसएड से जुड़े संगठनों सहित कई अन्य संगठनों ने प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मीडिया और डिजिटल फोरेंसिक समूहों के साथ मिलकर ऐसी रिपोर्टें बनाईं, जिनमें भारत को गलत सूचना के गंभीर संकट से जूझते हुए दिखाया गया। उनका तर्क है कि यह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मोदी समर्थक बयानों को दबाने का एक बहाना बन गया। बेंज का दावा है कि अमेरिकी विदेश विभाग ने मोदी समर्थक कंटेंट को रोकने के लिए फेसबुक, व्हाट्सएप, यूट्यूब और ट्विटर जैसी प्रमुख तकनीकी कंपनियों पर दबाव डाला। ‘यूएसएड’ ने संस्थाओं को पैसा दिया- भाजपा सांसद भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने शून्यकाल में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि अमेरिका में नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘यूएसएड’ संस्था को पूरी तरह बंद कर दिया है क्योंकि यह वर्षों से विभिन्न सरकारों को गिराने के लिए पैसा खर्च कर रही थी। उन्होंने कहा कि विपक्ष को बताना चाहिए, ‘‘क्या यूएसएड ने जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशन को पांच हजार करोड़ रुपये भारत को विभाजित करने के लिए दिये या नहीं। उसने राजीव गांधी फाउंडेशन को पैसा दिया या नहीं।’’ दुबे ने सवाल उठाया कि क्या ‘यूएसएड’ ने तालिबान को पैसा दिया था? उन्होंने कहा कि इस अमेरिकी संस्था ने आतंकवादी और नक्सलवादी गतिविधिया बढ़ाने वाले कुछ संगठनों को पैसा दिया या नहीं, विपक्ष यह बताए। भाजपा सांसद ने देश में मानवाधिकार के नाम पर और ‘सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च’ के नाम पर विभिन्न संस्थाओं को ‘यूएसएड’ द्वारा पैसा दिए जाने का आरोप लगाते हुए सरकार से अनुरोध किया कि इनकी जांच हो और जिन्होंने देश को नुकसान पहुंचाने के लिए पैसा लिया, उन्हें जेल में डाला जाए। दुबे के इन आरोपों पर कांग्रेस सदस्यों ने नारेबाजी की। कुछ सदस्य इस संबंध में व्यवस्था का प्रश्न उठाना चाह रहे थे। हालांकि, पीठासीन सभापति संध्या राय ने कहा कि शून्यकाल में व्यवस्था का प्रश्न नहीं होता। भाजपा सांसद दुबे पहले भी सदन में इन मुद्दों को उठाते रहे हैं। बांग्लादेश में भी अमेरिकी हस्तक्षेप वहीं बेंज ने दावा किया कि अमेरिका ने बांग्लादेश की राजनीति को भी प्रभावित करने की कोशिश की, खासकर प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार को कमजोर करने के लिए यूएसएड का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि यह कदम बांग्लादेश और चीन के बढ़ते आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी के कारण उठाया गया। उनके अनुसार, अमेरिकी संगठनों ने सांस्कृतिक और जातीय तनावों का उपयोग करते हुए विभाजन पैदा करने और सरकार विरोधी प्रदर्शनों को बढ़ावा देने की योजना बनाई। रैप संगीत के जरिए सरकार विरोधी माहौल एक दिलचस्प आरोप में बेंज ने कहा कि अमेरिकी करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल बांग्लादेश में ऐसे रैप संगीत को फंड करने के लिए किया गया, जो सरकार विरोधी भावनाओं को बढ़ावा देता था। बेंज ने इन गतिविधियों को अमेरिका की वैश्विक रणनीति का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का उद्देश्य लोकतंत्र को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि चीन के प्रभाव का मुकाबला करना, सैन्य ठिकाने सुरक्षित करना और आर्थिक पहुंच बनाए रखना है। बेंज का कहना है कि ये गतिविधियां अक्सर अमेरिकी प्रशासन की अनुमति के बिना विदेश नीति प्रतिष्ठान के कुछ गुटों द्वारा की जाती हैं। उनके अनुसार, ट्रंप प्रशासन के दौरान भी इन गतिविधियों को अंजाम दिया गया, जबकि ट्रंप और मोदी के बीच अच्छे संबंध थे। बेंज ने अपनी रिसर्च के आधार पर यह दावा किया कि यह सिर्फ भारत और बांग्लादेश तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका ने वेनेजुएला, यूक्रेन, मध्य पूर्व और उत्तर अफ्रीका जैसे कई देशों में भी … Read more