प्रधानमंत्री मोदी आज खजुराहो आएंगे, केन बेतवा लिंक परियोजना का भूमि पूजन करेंगे

 खजुराहो  देश की प्रथम नदी जोड़ो केन-बेतवा लिंक परियोजना का शिलान्यास आज 25 दिसंबर बुधवार को खजुराहो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। 44 हजार 605 करोड़ रुपये लागत वाली इस परियोजना से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के लगभग 11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। मप्र के 10 जिले और उत्तर प्रदेश के चार जिलों में पेयजल की व्यवस्था सुदृढ़ होगी। परियोजना में होने वाले व्यय का 90 प्रतिशत भार केंद्र सरकार उठाएगी। प्रदेश के ऊपर वित्तीय भार मात्र 10 प्रतिशत आएगा। इस परियोजना से 103 मेगावाट जल विद्युत एवं 27 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन होगा, जिसका पूरा लाभ मध्य प्रदेश को मिलेगा। बुंदेलखंड का आर्थिक व सामाजिक विकास होगा और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। परियोजना के प्रति लोगों को किया जा रहा जागरूक     इस बीच, प्रभावित जिलों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को परियोजना के प्रति जागरूक किया जा रहा है। गुन्नौर विधायक डॉ. राजेश वर्मा ने कहा कि यह बुंदेलखंड अंचल के लिए महत्वाकांक्षी योजना है।     उन्होंने कहा, ‘बुंदेलखंड की दो दशक पुरानी आस अब पूरी हो रही है। 18 साल से लंबित केन-बेतवा लिंक परियोजना का शुभारंभ क्षेत्र की प्यास के बुझने के साथ ही जीवन बदलने का ऐतिहासिक पड़ाव भी है।’     ‘चार दशके से बुंदेलखंड की जनता को जिस दिन का बेसब्री से इंतजार था, वह दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृढ़संकल्प से आ गया है। साथ ही भारत देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी का सपना पूरा हुआ।’     लोगों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से कलश यात्राओं का आयोजन किया जा रहा है एवं कार्यक्रम में पहुंचने के लिए निमंत्रण दिया जा रहा है। सभी जगह ग्राम पंचायतों में कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं।     इस योजना को लेकर सभी गावों में दीवार लेखन के माध्यम से भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। वहीं नुक्कड़ नाटक और गीत संगीत के माध्यम से भी लोगों में केन बेतवा लिंक परियोजना के बारे में बताया जा रहा है। खजुराहो पुलिस ने जारी किया रूट प्लान पीएम मोदी के आगमन को लेकर छतरपुर पुलिस द्वारा यातायात एवं सुरक्षा व्यवस्था को दृष्टिगत रखते हुए पार्किंग व्यवस्था एवं डायवर्सन प्लान बनाया गया है, जिसका रूट चार्ट जारी किया जा रहा है। डायवर्सन प्लान के तहत छतरपुर, दमोह, सागर, टीकमगढ़, निवाड़ी से कार्यक्रम में आने वाले वाहन की मंजू नगर रोड में फेस्टिवल ग्राउंड, लालगांव, प्रेम गिरी मंदिर, एएसआई ग्राउंड में पार्किंग रहेगी। महोबा, राजनगर, चंदला, गौरीहार, लवकुशनगर की तरफ से कार्यक्रम में आने वाले वाहन बलवंत सिंह महाविद्यालय परिसर पार्किंग, एमपीटी पार्किंग विवेकानंद चौराहा, टूरिस्ट ग्राउंड, आदिवर्त पार्किंग में पार्क करेंगे, जिला दमोह तरफ से आने वाली जो बसे छतरपुर होकर आएंगी वह गंज से राजनगर रोड एवं पन्ना तरफ से आने वाली बसें टोरिया टेक से डायवर्ट होकर आएंगी। पन्ना, चंद्रनगर तरफ से कार्यक्रम में आने वाले समस्त वाहन टोरिया टेक से सूरजपुरा रनेह फॉल, अचनार बाईपास से होते हुवे पायल तिराहा तक आएंगे, विक्रमपुर तरफ से आने वाले वाहन गोकुल धाम होते हुए खजुराहो आएंगे, रानेहफॉल चंद्रनगर से आने वाले वाहन अचनार बाईपास से पायल तिराहा तक आएंगे। पुलिस ने जारी की प्रतिबंधित सामग्री की सूची शिलान्यस समारोह हेतु सभास्थल, मार्ग एवं क्षेत्र में शांति, सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था की दृष्टि से छतरपुर पुलिस द्वारा व्यवस्थाएं की गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था एवं जनसामान्य की सुविधा हेतु छतरपुर पुलिस द्वारा कई घेरे की सुरक्षा व्यवस्था बनाई गई है। सुरक्षा कारणों से कार्यक्रम स्थल पर ड्रोन अथवा ड्रोन कैमरे पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेंगे। प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम धन्यवाद पत्र प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम छतरपुर जिले के जनपदों एवं ग्राम पंचायतों की जनता ने केन बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की सौगात के लिए 443 धन्यवाद पत्र दिए हैं। छतरपुर जिले में आगामी 25 दिसंबर को प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री, स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की 100 वीं जयंती पर केन बेतवा लिंक परियोजना के भूमिपूजन के लिए बुन्देलखण्ड की धरती पर खजुराहो में स्वयं पधार रहे हैं। यह परियोजना देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना है, जिससे बुन्देलखंड के लोगों की पानी की समस्या का निदान होगा।  recent visitors 35

प्रधानमंत्री मोदी देश की पहली ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सौर परियोजना का करेंगे लोकार्पण

प्रधानमंत्री मोदी 25 दिसंबर को खजुराहो में करेंगे देश की पहली केन-बेतवा नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना का शिलान्यास प्रधानमंत्री मोदी पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी की 100वीं जयंती पर मध्यप्रदेश को देंगे अनेक सौगातें प्रधानमंत्री मोदी देश की पहली ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सौर परियोजना का करेंगे लोकार्पण 1153 अटल ग्राम सुशासन भवनों का भूमि-पूजन और प्रथम किश्त का करेंगे वितरण पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी की स्मृति में स्टॉम्प और सिक्का करेंगे जारी भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री भारत-रत्न से सम्मानित स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती पर मध्यप्रदेश के खजुराहो में देश की पहली महत्वाकांक्षी और बहुउद्देशीय केन-बेतवा राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना का शिलान्यास करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी देश की पहली ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सौर परियोजना का लोकार्पण और 1153 अटल ग्राम सुशासन भवनों का भूमि-पूजन करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी की स्मृति में स्टॉम्प और सिक्का भी जारी करेंगे। देश को नदी जोड़ो की परिकल्पना देने वाले युगदृष्टा स्व. वाजपेयी की जयंती पर यह मध्यप्रदेश के लिए एक बड़ी सौगात होगी। प्रधानमंत्री मोदी बुधवार को दोपहर 12:10 बजे खजुराहो आयेंगे और दोपहर 2:20 बजे दिल्ली के लिये रवाना होंगे। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। सिंचाई के साथ पेयजल की सुविधा प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इस परियोजना के शिलान्यास के साथ ही स्व. वाजपेयी का नदी जोड़ो का सपना मध्यप्रदेश में मूर्त रूप लेगा। केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना, देश में भूमिगत दाब युक्त पाइप सिंचाई प्रणाली अपनाने वाली सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना है। इस परियोजना से मध्यप्रदेश के 10 जिलों छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, निवाड़ी, दमोह, शिवपुरी, दतिया, रायसेन, विदिशा और सागर में 8 लाख 11 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई की सुविधा मिलेगी और 44 लाख किसान परिवार लाभान्वित होंगे। फसलों के उत्पादन एवं किसानों की आय में वृद्धि से ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी और जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण से हरित ऊर्जा में 103 मेगावॉट योगदान के साथ रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। बेहतर जल प्रबंधन एवं औद्योगिक इकाइयों को पर्याप्त जल आपूर्ति से औद्योगिक विकास होगा और रोजगार को बढ़ावा भी मिलेगा। इस परियोजना से उत्तर प्रदेश में 59 हजार हेक्टेयर वार्षिक सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी एवं 1.92 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मौजूदा सिंचाई का स्थिरीकरण किया जायेगा, जिससे उत्तर प्रदेश के महोबा, झांसी, ललितपुर एवं बांदा जिलों में सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी। परियोजना से मध्यप्रदेश की 44 लाख और उत्तर प्रदेश की 21 लाख आबादी को पेयजल की सुविधा उपलब्ध होगी। ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सौर परियोजना प्रधानमंत्री मोदी मध्यप्रदेश के खण्डवा जिले के ओंकारेश्वर में स्थापित फ्लोटिंग सौर परियोजना का लोकार्पण करेंगे। परियोजना के प्रथम चरण में इस वर्ष अक्टूबर माह से पूर्ण क्षमता से विद्युत उत्पादन प्रारंभ हो गया है। परियोजना के द्वितीय चरण की 240 मेगावॉट क्षमता के लिये एमपीपीएसीए से आवश्यक सहमति उपरांत चयनित विकासक "सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड" से अनुबंध हस्ताक्षरित किया जाना प्रस्तावित है। पुण्य सलिला माँ नर्मदा के ऊपर ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सौर परियोजना को प्रदेश की जनता को समर्पित करना प्रदेश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और ग्रीन ऊर्जा के प्रति सरकार के सतत प्रयासों को प्रदर्शित करता है। अटल ग्राम सुशासन भवनों का भूमि-पूजन प्रधानमंत्री मोदी मध्यप्रदेश में 1153 अटल ग्राम सुशासन भवनों का भूमि-पूजन कर प्रथम किश्त का वितरण भी करेंगे। प्रदेश की 23 हजार ग्राम पंचायतों में से भवन विहीन, जीर्ण-शीर्ण भवन और अनुपयोगी 2500 ग्राम पंचायतों को नवीन भवन की स्वीकृति के लिये चिन्हित किया गया है। प्रारंभिक चरण में 1153 नवीन पंचायत भवनों के लिये 437.62 करोड़ रूपये के कार्य स्वीकृत किये गये हैं। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी का मत था कि पंचायत भवन, ग्राम पंचायत की सर्वाधिक मूल एवं महत्वपूर्ण अधोसरंचना है। इन भवनों की ग्राम पंचायतों के व्यवहारिक रूप से कार्य एवं दायित्वों के संवहन और कार्य संपादन में महत्वपूर्ण भूमिका है। मध्यप्रदेश सरकार ने पंचायतों को सशक्त करने के लिये समस्त ग्राम पंचायतों में नवीन पंचायत भवन एवं क्लस्टर स्तर पर क्लस्टर पंचायत भवन स्वीकृत करने का निर्णय लिया है।   recent visitors 56

केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना जल संरक्षण एवं जल समृद्धि की दिशा में एक नया अध्याय लिखने वाला होगा – विष्णुदत्त शर्मा

भोपाल      मध्यप्रदेश की पुण्यभूमि, जो अपनी सांस्कृतिक विविधता और ऐतिहासिक गौरव के लिए प्रसिद्ध है, अब एक और ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनने जा रही है। 25 दिसंबर 2024 को मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के खजुराहो में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना का शिलान्यानस यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र मोदी जी के कर-कमलों से होगा। यह क्षण न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे भारत के लिए विकास, जल संरक्षण एवं जल समृद्धि की दिशा में एक नया अध्याय लिखने वाला होगा, साथ ही यह भारत की जल क्रांति की नई गाथा लिखने का भी प्रतीक बनेगा। शुभ योग यह है कि परियोजना का भूमिपूजन आधुनिक भारत के स्वप्न दृष्टा पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की 100वीं जयंती के दिन हो रहा है, जिन्होंने भारत के विकास के लिए अनेक सपने देखे थे, उनमें नदियों को जोड़ना विशेष रूप से शामिल था। उन्होंने इस दिशा में प्रारंभिक कदम भी उठाए थे। प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी अब स्वप्न दृष्टा वाजपेयी जी के सपने साकार करने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं। यह परियोजना प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व, दूरदर्शिता, मध्यप्रदेश के प्रति उनके विशेष स्नेह और अटलजी के विचारों के प्रति समर्पण का एक और प्रमाण है, जो मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए जीवनदायिनी सिद्ध होगी।      प्राचीन भारतीय पौराणिक कथाओं में गंगा की धरा पर उपस्थिति का श्रेय राजा भागीरथ को दिया जाता है। राजा भागीरथ के तप और साधना से गंगा धरती पर अवतरित हुईं, जिसकी उपस्थिति से भारत का भू-भाग समृद्ध हुआ, माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी भी आधुनिक भागीरथ हैं। मोदीजी ने भी जल संकट से जूझते भारत के लिए एक नई जल क्रांति की शुरुआत की है। जल संसाधनों को भारत की विकास यात्रा का अभिन्न हिस्सा बनाया है। उनके नेतृत्व में जल केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि मानवता के भविष्य और विकास का आधार बन गया है। गुजरात में जब वे मुख्यमंत्री थे, तब उनकी जल नीतियों ने सूखे और जल संकट से जूझते गुजरात को जलसमृद्धि का अनूठा उदाहरण बनाया। गुजरात, जो कभी सूखे और जल संकट का प्रतीक था, आज नर्मदा नदी के जल से आच्छादित है। उनकी दूरदृष्टि और अदम्य साहस ने नर्मदा नदी के जल को सही दिशा में मोड़ते हुए गुजरात की प्यास बुझाई, कृषि क्षेत्र को समृद्ध किया और नर्मदा के जल से साबरमती नदी को भी नया जीवन दिया। यह उनकी नीतियों और इच्छाशक्ति का ही परिणाम है कि गुजरात में जल के अभाव का स्थान जल के सदुपयोग और समृद्धि ने ले लिया। गुजरात में उनका काम जल संकट से जूझ रहे राज्यों के लिए आदर्श बन चुका है।      माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने जल संरक्षण को केवल एक सरकारी नीति तक ही सीमित नहीं रखा। उन्होंने इसे राष्ट्रीय चेतना का हिस्सा बनाया। उनके अनुसार, जल का प्रबंधन एक पुण्य कर्म है, जिसमें वर्तमान की जरूरतें और भविष्य की पीढ़ियों का उत्तरदायित्व दोनों निहित हैं। उनका यह कथन इस सोच को सार्थक रूप देता है कि जल का सवाल केवल संसाधनों का नहीं, बल्कि मानवता के अस्तित्व का है। इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को आधुनिक राजाभोज कहना न्याय संगत है। राजा भोज ने जल संरक्षण के लिए ऐसी संरचनाएं बनाईं, जो सदियों बाद भी जल प्रबंधन की उत्कृष्ट मिसाल बनी हुई हैं। भोपाल का ऐतिहासिक बड़ा तालाब राजा भोज की जल संरक्षण क्षमता का अद्भुत उदाहरण है,जो सदियों बीत जाने के बाद भी लाखों लोगों की प्यास बुझा रहा है। दो नदियों के संगम से बनाए गए इस तालाब ने यह सिद्ध कर दिया हैकि जल संरक्षण केवल उस समय की आवश्यकता ही नहीं, बल्कि उसे पीढ़ियों के लिए उपहार के रूप में संरक्षित किया जाता है।      प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी का दृष्टिकोण भी ऐसा ही है। मोदी जी भी जल संरचनाओं के जनक राजाभोज की परंपरा को आधुनिकता के साथ मानवता के अस्तित्व के लिए आगे बढ़ा रहे हैं।      माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी का मानना है कि जल का संरक्षण केवल वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा है-“जल संचय केवल एक प्रयास नहीं, यह एक पुण्य है। इसमें उदारता और उत्तरदायित्व दोनों निहित हैं। आने वाली पीढ़ियां जब हमारा आकलन करेंगी, तो यह केवल हमारी आर्थिक उपलब्धियों या भौतिक विकास पर आधारित नहीं होगा। उनका पहला प्रश्न यही होगा कि हमने जल के प्रति क्या दृष्टिकोण अपनाया। जल का संरक्षण, प्रबंधन और इसके प्रति हमारी प्रतिबद्धता ही भविष्य में हमारी पहचान बनेगी।” यह विचार न केवल जल संरक्षण के महत्व को दर्शाता है इसीलिये उनकी जलनीतियां दीर्घकालिक हैं, जो न केवल वर्तमान समस्याओं का समाधान करती हैं, बल्कि भविष्य के लिए भी टिकाऊ मार्ग प्रस्तुत करती हैं। माननीय मोदी जी के नेतृत्व में शुरू हुए “जल शक्ति अभियान” और “हर घर जल” और कैच द रैन जैसे अभियानों ने करोड़ों भारतीयों के जीवन को परिवर्तित कर दिया है। उनकी योजनाएं यह सिद्ध करती हैं कि जल प्रबंधन में उनका दृष्टिकोण कितना प्रभावशाली और स्थायी है।      मध्यप्रदेश के प्रति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का विशेष लगाव समय-समय पर उनकी योजनाओं और निर्णयों से स्पष्ट होता है। उन्होंने हमेशा मध्यप्रदेश को अपनी प्राथमिकताओं में रखा है। उनके प्रयासों से राज्य विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। अब केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना मध्यप्रदेश के विकास में नई ईबारत लिखने जा रही है। केन-बेतवा लिंक परियोजना, जिस भूमि पर बन रही है, वह शौर्य, सम्मान और जनकल्याण के प्रतीक बुंदेलखंड की भूमि है, बुंदेलखंड की पवित्र भूमि ने ऐसे महापुरुषों को जन्म दिया है, जिन्होंने लोकहित को सर्वोपरि रखा। राजा छत्रसाल ने अपनी नीतियों और नेतृत्व से बुंदेलखंड के लोगों के कल्याण के लिए जो काम किए, उनकी गूंज आज भी सुनाई देती है। प्रधानमंत्री मोदी जी का नेतृत्व भी राजा छत्रसाल के दृष्टिकोण का आधुनिक संस्करण है। उनकी योजनाएं और प्रयास बुंदेलखंड को जल संकट से उबारने और यहां की सूखी धरती को फिर से हराभरा बनाने के लिए समर्पित हैं।      प्रधानमंत्री नरेन्द्र  मोदी जी के संकल्प का फल है कि 44,605 हजार करोड़ रूपये की केन-बेतवा लिंक जैसी बहुप्रतीक्षित परियोजना आज जमीन पर उतर रही है और … Read more

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा हमारे देश का युवा आत्मविश्वास से भरा हुआ है, आज भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप वाला देश है

नई दिल्ली देशभर में 45 जगहों पर आयोजित किए गए रोजगार मेले में 71 हजार से ज्यादा अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरियों के नियुक्ति पत्र बांटे गए हैं। इस मौके पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा, हमारी सरकार ने पिछले एक या डेढ़ साल में लगभग 10 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी है, यह एक रिकॉर्ड है। पीएम मोदी ने कहा कि चयनित सभी युवा नई सरकारी व्यवस्था का हिस्सा बनने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई लक्ष्य नहीं जिसे युवा पा ना सकें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे देश का युवा आत्मविश्वास से भरा हुआ है। आज भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप वाला देश है। युवाओं को हर सेक्टर में आगे बढ़ाने के लिए कार्य किया जा रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार कई योजनाएं चला रही है। ग्रामीण भारत में रोजगार देने के लिए बैंक सखी जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं नवनियुक्त कर्मियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के युवाओं के सामर्थ्य और प्रतिभा का भरपूर उपयोग उनकी सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, 'रोजगार मेलों के जरिए हम लगातार इस दिशा में काम कर रहे हैं। पिछले 10 वर्षों से सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और संस्थानों में सरकारी नौकरी देने का अभियान चल रहा है। आज भी 71,000 से ज्यादा युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए गए हैं।' यह रोजगार मेला देश भर में 45 स्थानों पर आयोजित किया गया। चयनित अभ्यर्थियों को केन्द्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में नियुक्त किया जाएगा। इनमें गृह मंत्रालय, डाक विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, वित्तीय सेवा शामिल हैं। रोजगार मेले की शुरुआत 22 अक्टूबर 2022 को हुई थी। हाल ही में संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार ने बताया था कि रोजगार मेले के जरिए अब तक कई लाख युवाओं को नौकरी दी जा चुकी है। recent visitors 55

प्रधानमंत्री मोदी ने 24 फरवरी को भोपाल में हो रही ग्लोबल इन्वेस्टर समिट शामिल

भोपाल भोपाल में फरवरी 2025 में इन्वेस्ट मध्यप्रदेश-ग्लोबल इन्वेस्टर समिट-2025 का आयोजन । जीआईएस-2025 समिट का उद्देश्य निवेशकों को राज्य की क्षमताओं, प्रचुर संसाधनों एवं अनुकूल औद्योगिक वातावरण से अवगत कर मध्यप्रदेश को निवेश के लिये आदर्श राज्य के रूप में स्थापित करना है। ग्लोबल इन्वेस्टर समिट को सफल बनाने के लिए औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन विभाग द्वारा देश के विभिन्न शहरों में इन्टरेक्टिव सेशन आयोजित किए जा रहे हैं।  प्रधानमंत्री मोदी ने आगामी 24 फरवरी 2025 को भोपाल में हो रही ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में आने की सहमति दी है। प्रधानमंत्री मोदी को मध्य प्रदेश में अन्य कार्यक्रमों के लिए भी आमंत्रित किया गया है। इसके लिए भी वे अपने कार्यक्रम निर्धारित कर अवगत करवाएंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि आगामी 26 दिसंबर को पचमढ़ी में चिंतन शिविर का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने मंत्रीगण को जानकारी दी कि केंद्र सरकार द्वारा मध्य प्रदेश के लिए 10 केंद्रीय विद्यालय की स्वीकृति दी गई है। इसके लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री का आभार व्यक्त किया गया है। उन्होंने बताया कि नर्मदापुरम में हाल ही में संपन्न रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव सफल रहा, जिसमें 31 हजार करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। साथ ही लगभग 40 हजार व्यक्तियों को रोजगार की संभावना भी सरकार होगी। प्रदेश में शहडोल में अगली रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव की तैयारी की जा रही है। मंत्रि-परिषद की बैठक शुरू होने के पहले राष्ट्रगीत वंदे-मातरम का सामूहिक गान हुआ। वहीं, सीएम मोहन यादव ने कहा है, "25 दिसंबर को नदी जोड़ो परियोजना का खाका देने वाले पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती (Atal Bihari Vajpayee 100th Birth Anniversary) है। इस उपलक्ष में 11 दिसंबर से 26 दिसंबर तक राज्य सरकार जन कल्याण पर्व मना रही है। सरकार हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ दिलाएगी।" रोजगार के बेहतर अवसर पर बल मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि प्रदेश में बेहतर आर्थिक वातावरण बने, लोगों को रोजगार के बेहतर अवसर मिलें, युवाओं को अपनी बौद्धिक क्षमता के अनुरूप स्थानीय स्तर पर काम मिलें, उन्हें रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना पड़े, इस दिशा में सरकार लगातार प्रयास कर रही है. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार को मुख्यमंत्री निवास से मीडिया को जारी संदेश में यह बात कही. निवेशकों के लिये उद्योग मित्र नीतियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार ने उद्योग क्षेत्र के लिये वर्ष 2024-25 में 4 हजार 190 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा है. औद्योगिक निवेश को प्रोत्सहन देने के लिये प्रदेश में सिंगल विंडो सिस्टम, निवेश प्रोत्सहन और कस्टमाइज पैकेज जैसी सुविधाएं प्रदान की गई हैं. नये निवेशकों को उद्योग मित्र नीतियों के साथ सरल और सुगम निवेश प्रक्रिया सुनिश्चित की जा रही है. उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के प्रत्येक जिले में इन्वेस्टमेंट फैसिलिटेशन सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं. कई जिलों में शुरू भी हो चुके हैं. उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये इन सेंटर में जिला कलेक्टर्स को नोडल अधिकारी बनाया गया है. मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि प्रदेश में औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन के लिए पिछले 8 माह में जो प्रयास हुए, उसमें उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर, सागर और रीवा में हुई रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव एवं मुंबई, कोयंबटूर, बैंगलुरू और कोलकाता में हुए रोड-शो के साथ हुए इंटरेक्टिव सेशन के काफी सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं. इनमें विभिन्न सेक्टर्स में 2 लाख 76 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिससे 3 लाख 28 हजार 670 रोजगार के अवसर सृजित होंगे.इस वर्ष 7-8 फरवरी 2025 को भोपाल में दो दिवसीय ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन होगा. निवेशकों की पहली पसंद बन रहा है म.प्र. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश न सिर्फ औद्योगिक हब बन रहा है बल्कि हर क्षेत्र में उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त कर रहा है. प्रदेश में बेहतर कनेक्टिविटी, उद्योग अनुकूल नीतियों और मजबूत अधोसंरचना से मध्यप्रदेश निवेशकों की पहली पसंद बन रहा है. recent visitors 59

22 फरवरी को PM MITRA पार्क की आधारशिला रखेंगे प्रधानमंत्री मोदी, टेक्सटाइल उद्योग को बढ़ावा देना है लक्ष्य

भोपाल फरवरी में भोपाल में होने वाली मोहन यादव सरकार की पहली ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट की तैयारी जारी है, दूसरी ओर पीएम मित्रा पार्क को लेकर भी हलचल बढ़ गई है। उद्योग विभाग ने पीएम के हाथों भूमिपूजन के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। केंद्र और राज्य सरकार के इस संयुक्त प्रोजेक्ट के विकास को लेकर मास्टर प्लानर की भूमिका एमपीआईडीसी (मप्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) को मिलना तय है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के पास इसका प्रस्ताव पहुंच गया है। इसी के साथ विभाग ने इस प्रोजेक्ट के इंटरनल डेवलपमेंट के लिए भी तैयारी कर ली है। यहां 400 करोड़ से ज्यादा की लागत में इंटरनल डेवलपमेंट होगा। सूत्रों की मानें तो दिसंबर अंत या जनवरी में पीएम नरेंद्र मोदी इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का भूमिपूजन करेंगे। भूमिपूजन के दिन ही 50 से 60 प्रतिशत इंडस्ट्री को जमीन का आवंटन भी कर दिया जाएगा, ताकि वे भी समय से अपने प्रोजेक्ट शुरू कर सकें। एमपीआईडीसी के कार्यकारी संचालक राजेश राठौर का कहना है कि पीएम मित्रा पार्क का बाहरी डेवलपमेंट जारी है। केंद्र की हरी झंडी मिलते ही इंटरनल डेवलपमेंट भी शुरू हो जाएगा। यहां जितनी भी बाधाएं थीं, वे पहले ही खत्म कर ली गई हैं। दरअसल, पीएम मित्रा पार्क में बाहरी विकास राज्य सरकार के जिम्मे है। इसमें एप्रोच रोड से लेकर पानी और बिजली की उपलब्धता राज्य सरकार को सुनिश्चित करना है। प्रोजेक्ट में कच्चे माल की प्रोसेसिंग से कपड़ा बनने तक की इंडस्ट्रियां होंगी।     1563 एकड़ का यह प्रोजेक्ट भैंसोला में विकसित हो रहा     500 करोड़ रुपए की फंडिंग दो चरणों में केंद्र सरकार करेगा     100 करोड़ से अधिक के निवेश वाली इकाइयों को टर्न ओवर का तीन प्रतिशत 3 वर्षों तक दिया जाएगा इंदौर के बाद दूसरा आईटी पार्क उज्जैन में बनेगा, 21 को सीएम करेंगे भूमिपूजन इंदौर में तीन तैयार हो चुके और दो निर्माणाधीन आईटी पार्क के बाद अब उज्जैन में नया आईटी पार्क बनने जा रहा है। यहां बिल्डिंग में एक लाख वर्ग फीट का स्पेस मिलेगा। 46 करोड़ की लागत से यह काम होगा। 21 दिसंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इसका भूमिपूजन करेंगे। दरअसल, उज्जैन में हुई रीजनल इन्वेस्टर्स कॉन्क्लेव में इसकी डिमांड सामने आई थी। 15 हजार करोड़ का निवेश प्रस्तावित : देश के 7 सात राज्यों में बनने वाले पीएम मित्रा मेगा टेक्सटाइल पार्क प्रोजेक्ट के तहत इंदौर संभाग के धार जिले के भैंसोला में बन रहा है। अभी यहां बेसिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के काम चल रहे हैं। एमपीआईडीसी को यहां की 881.25 हेक्टेयर क्षेत्र की प्लानिंग करना होगी। इसका डेवलपमेंट भी करवाना होगा। यहां 15 हजार करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। अब तक 9 हजार 462 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश पर बात हो चुकी है। इस प्रोजेक्ट से 50 हजार लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा।   recent visitors 33

पूर्व सीएम भैरो सिंह शेखावत, वसुंधरा राजे का जिक्र, जयपुर पहुंचे मोदी ने दिया राजस्थान के विकास और राजनीति का दिया संदेश

जयपुर. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राजस्थान के जयपुर में 46,300 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की शुरुआत की, जो राज्य के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती हैं। लेकिन इस कार्यक्रम के पीछे केवल विकास का ही संदेश नहीं था, बल्कि मोदी ने अपनी सरकार के राजनीतिक एजेंडे को भी प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया। उनकी ये परियोजनाएं केवल राजस्थान के विकास के लिए नहीं, बल्कि आगामी चुनावी मुकाबले में भाजपा की स्थिति को मजबूत करने के लिए भी रणनीतिक कदम प्रतीत होती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जयपुर में अपनी स्पीच के दौरान पूर्व उपराष्ट्रपति और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत, वसुंधरा राजे और जसवंत सिंह के किस्सों को याद किया, जो एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा सकता है। मोदी का यह बयान न केवल राजस्थान की राजनीतिक पृष्ठभूमि को उजागर करता है, बल्कि उनके द्वारा इन नेताओं को सम्मानित करने का उद्देश्य भाजपा के पुराने नेताओं और उनके योगदान को जनता के बीच फिर से प्रस्तुत करना था। प्रधानमंत्री मोदी ने जिस भावनात्मक अंदाज में भैरोंसिंह शेखावत और जसवंत सिंह के किस्से सुनाए, उसमें उनके नेतृत्व की क्षमता और राजस्थान के लिए उनके समर्पण को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। मोदी ने इन नेताओं की नर्मदा जल को लेकर भावनात्मक प्रतिक्रिया का उल्लेख किया, जिसमें शेखावत और सिंह ने गुजरात के नर्मदा पानी को राजस्थान को देने के मोदी के कदम को सराहा था। यह केवल विकास की बात नहीं थी, बल्कि यह कांग्रेस की विफलताओं और राजस्थान में जल संकट पर भाजपा के प्रयासों की ओर इशारा करता था। मोदी ने अपने भाषण में कहा, "उनकी आंखों में आंसू थे," इस वाक्य के जरिए उन्होंने यह संदेश दिया कि भाजपा और उनके नेतृत्व में दिल से काम करने का एक भावुक पहलू है, जो कांग्रेस की राजनीति से अलग है। वसुंधरा राजे का उल्लेख भाजपा के महिला नेतृत्व को मजबूती देने की दिशा में एक राजनीतिक संकेत हो सकता है। राजे की राजनीति राजस्थान में भाजपा की मजबूत चेहरा रही हैं और उनका नाम लेकर मोदी ने महिला सशक्तिकरण के पक्ष में अपनी पार्टी का रुख साफ किया। यह कदम महिला वोटरों को ध्यान में रखते हुए उनकी भूमिका को न केवल पहचान दिलाता है, बल्कि इसे भाजपा के विकासात्मक दृष्टिकोण के साथ जोड़ता है। मोदी का यह प्रयास महिलाओं के बीच भाजपा का समर्थन बढ़ाने के लिए एक सूक्ष्म रणनीति हो सकती है। 1. विकास के साथ राजनीतिक संदेश मोदी का जयपुर दौरा सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह एक सूक्ष्म राजनीतिक संदेश भी था। प्रधानमंत्री ने राजस्थान की भाजपा सरकार के एक वर्ष की उपलब्धियों की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की नेतृत्व क्षमता को प्रदर्शित किया। उन्होंने भाजपा सरकार की पारदर्शिता और विकास कार्यों की दिशा को उजागर किया, जो कांग्रेस सरकार के कार्यकाल की तुलना में एक stark contrast के रूप में प्रस्तुत किया गया। मोदी ने कांग्रेस को निशाने पर रखते हुए कहा कि राजस्थान में पेपर लीक और भर्तियों के मामले कांग्रेस के शासनकाल की छवि बने थे, जबकि भाजपा सरकार ने बम्पर भर्तियां निकाली और पारदर्शी परीक्षाएं करवाई। यह बयान एक राजनीतिक इशारा था, जिसका उद्देश्य भाजपा की सत्ता में लौटने की संभावनाओं को मजबूत करना था। 2. महिलाओं को सशक्त बनाने की रणनीति प्रधानमंत्री ने अपनी योजनाओं में महिलाओं के सशक्तिकरण को प्रमुखता दी, जो एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश है। "नमो ड्रोन दीजिए योजना" और "बीमा सखी स्कीम" जैसी योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को नए कौशल से लैस करना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। इस कदम के जरिए मोदी ने उन महिला वोटरों को अपनी तरफ आकर्षित करने का प्रयास किया है, जो पारंपरिक रूप से भाजपा से दूर रही हैं। यह योजनाएं न केवल महिलाओं को रोजगार के नए अवसर प्रदान करती हैं, बल्कि उन्हें वित्तीय निर्णयों में भी सक्षम बनाती हैं। 3. जल संकट पर जोर और राजनीतिक तंज जल संकट और नदियों को जोड़ने की योजना पर मोदी ने जो बयान दिए, वे स्पष्ट रूप से कांग्रेस सरकार की नीतियों पर हमला करते हुए भाजपा के विकासात्मक दृष्टिकोण को प्रदर्शित करने का एक तरीका थे। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेई के नदियों को जोड़ने के विजन का हवाला देते हुए यह दर्शाया कि कैसे भाजपा सरकार जल संकट के समाधान की दिशा में काम कर रही है, जबकि कांग्रेस ने कभी इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए। मोदी का यह बयान केवल कांग्रेस पर आरोप लगाने का तरीका नहीं था, बल्कि यह भाजपा की जल नीति को एक प्रभावी राजनीतिक तर्क के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास था, जिससे ग्रामीण और किसान समुदाय को भाजपा के पक्ष में खड़ा किया जा सके। 4. राजनीतिक एजेंडा और भाजपा की 'विकासवादी' छवि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में भाजपा की विकासवादी छवि को और भी मजबूत किया, विशेष रूप से सौर ऊर्जा और बिजली क्षेत्र में किए गए समझौतों का जिक्र करते हुए। उन्होंने राजस्थान में किसानों को दिन में बिजली देने की योजना का उल्लेख किया, जो कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है। इसके माध्यम से मोदी ने यह संदेश दिया कि भाजपा सरकार किसानों के लिए वास्तविक कदम उठा रही है, जबकि कांग्रेस ने केवल बयानबाजी की है। यह बयान भाजपा के 'किसान समर्थक' एजेंडे को प्रमोट करने का एक राजनीतिक प्रयास था, जो आगामी चुनावों में किसानों के वोट को अपनी तरफ खींचने के उद्देश्य से था। 5. भ्रष्टाचार और विवादों के खिलाफ भाजपा की 'परदर्शिता' मोदी ने कांग्रेस पर भ्रष्टाचार और नदियों के पानी के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया, जबकि भाजपा की सरकार को विकास और समाधान के पक्ष में बताया। उन्होंने पूर्व उपराष्ट्रपति और पूर्व मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत तथा जसवंत सिंह की चर्चा कर एक भावनात्मक एंगल भी जोड़ा, जो उनके समर्थकों को आकर्षित करने का एक तरीका था। उनका यह कदम कांग्रेस के खिलाफ एक ठोस राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा सकता है, जिसमें विपक्ष की कमजोरियों को उजागर करने के साथ भाजपा के विकासात्मक और भ्रष्टाचार मुक्त शासन की छवि को प्रस्तुत किया गया। 6. विकास और सहयोग की राजनीति मोदी ने राज्य और केंद्र … Read more