Wednesday, July 8, 2026 10:28 am

सरकार का बड़ा निर्णय: माउंट आबू, जहाजपुर और कामां—नाम बदलने के पीछे की ऐतिहासिक वजहें

जयपुर राजस्थान में भजनलाल शर्मा सरकार ने प्रतीकों की राजनीति की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए तीन प्रमुख नगरों के नाम बदलने की घोषणा की है। विधानसभा में विनियोग विधेयक पर उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि माउंट आबू का नाम ‘आबू राज’, जहाजपुर का ‘यज्ञपुर’ और कामां का ‘कामवन’ किया जाएगा। सरकार के अनुसार यह निर्णय स्थानीय मांग, ऐतिहासिक संदर्भ और सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखकर लिया गया है। इससे पहले भी भजनलाल सरकार में पिछली सरकार की जगहों और कई योजनाओं के नाम बदले जा चुके हैं। इस घोषणा के बाद इन स्थानों के एतिहासिक और सांस्कृतिक आधार को लेकर चर्चा तेज हो गई है। माउंट आबू (अर्बुद पर्वत) का बहुआयामी इतिहास सिरोही जिले में स्थित माउंट आबू अरावली पर्वतमाला का सर्वोच्च भाग है। प्राचीन ग्रंथों में इसे अर्बुद पर्वत कहा गया है। स्कन्द पुराण के अर्बुद खंड में इसका उल्लेख मिलता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार यह ऋषियों की तपोभूमि रहा है। कथा है कि ऋषि वशिष्ठ ने यहां यज्ञ किया, जिसके अग्निकुंड से प्रतिहार, परमार, सोलंकी और चौहान वंश उत्पन्न हुए और इन्हें अग्निकुल राजपूत कहा गया।   अचलगढ़ क्षेत्र में स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर को भी पवित्र माना जाता है। मध्यकाल में यह क्षेत्र परमार वंश और बाद में देवड़ा चौहानों के अधीन रहा। महाराणा कुम्भा ने अचलगढ़ किला का पुनर्निर्माण कराया, जिससे इसका सामरिक महत्व बढ़ा। माउंट आबू जैन स्थापत्य कला के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां स्थित दिलवाड़ा जैन मंदिर 11वीं से 13वीं शताब्दी के बीच निर्मित हुए। 1031 ईस्वी में विमल शाह द्वारा निर्मित विमल वसाही मंदिर और 1230 ईस्वी में वास्तुपाल-तेजपाल द्वारा निर्मित लूण वसाही मंदिर अपनी संगमरमर नक्काशी के लिए विश्वप्रसिद्ध हैं। औपनिवेशिक काल में इसकी जलवायु के कारण अंग्रेजों ने इसे राजपूताना एजेंसी का मुख्यालय बनाया और इसे स्वास्थ्य केंद्र के रूप में विकसित किया। जहाजपुर (यज्ञपुर) की प्राचीन और मध्यकालीन विरासत भीलवाड़ा जिले में स्थित जहाजपुर का संबंध भी प्राचीन धार्मिक परंपराओं से जोड़ा जाता है। इतिहासकारों के अनुसार इसका प्राचीन नाम यज्ञपुर या यज्ञपुरी माना जाता है। पौराणिक परंपरा के अनुसार राजा जनमेजय ने अपने पिता परीक्षित की तक्षक नाग द्वारा मृत्यु के प्रतिशोध में यहां सर्पसत्र यज्ञ कराया था, जिससे इसका नाम यज्ञपुर पड़ा। समय के साथ यह नाम अपभ्रंश होकर जहाजपुर प्रचलित हुआ।   मध्यकाल में जहाजपुर मेवाड़ राज्य का एक महत्वपूर्ण दुर्ग-नगर बना। यहां का किला ऊंची पहाड़ी पर स्थित है और दूर से देखने पर विशाल जहाज जैसा प्रतीत होता है, जिससे इसके वर्तमान नाम की व्याख्या भी की जाती है। राणा कुम्भा के शासनकाल में इस दुर्ग का महत्व बढ़ा। recent visitors 38

सर्दी ने दी दस्तक, राजस्थान-सिरोही के माउंट आबू में पारा गिरकर 12 डिग्री पहुंचा

जयपुर. राजस्थान में मौसम का मिजाज अब बदलना शुरू हो गया है। बीते 24 घंटे में दर्ज किए गए तापमान में सिरोही प्रदेश का सबसे ठंडा इलाका रहा। यहां का न्यूनतम तापमान 14.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा सीकर में न्यूनतम तापमान 15.5 डिग्री, चूरू में 16.9 डिग्री, फतेहपुर में 15.1 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं राजधानी जयपुर की बात करें तो यहां का न्यूनतम तापमान 20 डिग्री दर्ज किया गया जो सामान्य के मुकाबले 4.1 डिग्री ज्यादा है। जबकि सर्वाधिक अधिकतम तापमान बाड़मेर में 37.8 डिग्री दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार नवंबर में प्रदेश में बारिश हो सकती है। इसके बाद न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री तक की कमी आ सकती है। राजधानी जयपुर की बात करें तो बीते 24 घंटों में यहां अधिकतम तापमान 34 डिग्री व न्यूनतम तापमान 18 डिग्री रहा। मौसम विभाग के अनुसार अगले एक सप्ताह में यहां न्यूनतम तापमान में 3 डिग्री की कमी आ सकती है। recent visitors 77