Sunday, July 5, 2026 1:20 pm

सुसाइड नोट में पत्नी-बेटे की मौत में फंसाने का आरोप, राजस्थान-झालवाड़ में युवक-बड़े बेटे सहित फांसी पर झूला

झालवाड़. झालवाड़ में एक पत्नी ने अपने पति को फंसाने के लिए पहले अपने बच्चे को मारा, फिर खुद ने फांसी लगा ली। इसके बाद पति ने अपने ससुराल वालों के डर से अपने बड़े बेटे सहित खुद को भी फांसी के फंदे पर लटका लिया। यह दिल दहलाने वाली घटना मंगलवार को झालवाड़ में सामने आई। एक परिवार के चार लोगों की मौत से गांव में मातम पसर गया। हालांकि घटनास्थल से बरामद सुसाइड नोट ने एक राज खोला है। ये नोट मृतक नागूसिंह ने फांसी लगाने से ठीक पहले लिखा। इसमें उन्होंने लिखा…जब मैं उठा तो देखा मेरी पत्नी ने छोटे बेटे को मार कर फांसी लगा ली। मैं भी फांसी लगाने को मजबूर हूं, क्योंकि मेरे बीच इस बारे में बात हुई थी। उसके माता-पिता और बेडला के गोवर्धन सिंह ने यह बात कही थी कि हमारी लड़की को कुछ हो गया तो तुम दोनों बाप-बेटे को जिंदा जला देंगे। इसकी गवाही रामसिंह पदमाखेड़ी और गोवर्धन सिंह बेडला और मेरे गांव का दशरथ सिंह, भैरूसिंह देगा। इसी बात का डर था। क्या है घटना जानकारी के अनुसार, फांसी के फंदे पर तीन शव मिले और सात साल के बच्चे का शव बिस्तर पर पड़ा मिला। बताया जा रहा है कि सबसे पहले अपने 2 वर्षीय बालक का गला घोंटा, उसके बाद दंपती नागु सिंह एवं उसकी पत्नी संतोष और एक 7 वर्षीय बालक युवराज ने फांसी का फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। मामला पारिवारिक विवाद का ही माना जा रहा था। अब सुसाइड नोट में इसका खुलासा भी हो गया। पुलिस अधीक्षक रिचा तोमर ने बताया कि गंगधार थाना क्षेत्र के जेताखेड़ी गांव निवासी नाथू सिंह पुत्र शिव सिंह उसकी पत्नी संतोष और एक 7 वर्षीय बालक युवराज एवं 2 वर्षीय बालक, एक साथ रहते थे। इनकी पैतृक जमीन को लेकर परिवार में ही विवाद चल रहा था। इसी गृह क्लेश के चलते नाथू सिंह उसकी पत्नी संतोष एवं 7 वर्षीय बालक युवराज ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। मरने पहले इन्होंने दो वर्षीय बालक का भी गला घोंट कर मौत के घाट उतार दिया। recent visitors 60

‘पीठ में छुरा घोंपने में माहिर होते हैं लोग’, राजस्थान-झालावाड़ में वसुंधरा के बधाई सन्देश से बढ़ी सरगर्मी

झालावाड़. प्रदेश में सात विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने पांच सीटें जीतकर अप्रत्याशित परिणाम हासिल किया है। इन्हीं अप्रत्याशित परिणामों को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एवं प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ की जोड़ी की जमकर तारीफें हो रही हैं। प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ की सादगी एवं संगठन और सरकार के बीच में उनके द्वारा बैठाया गया तालमेल कुछ इस तरीके से काम करता नजर आया कि इन दोनों नेताओं के आगे विपक्ष धराशायी हो गया। जिन दोनों नेताओं को चुनावी प्रचार के दौरान अनुभवहीन बताया जा रहा था, उन्हीं दोनों नेताओं ने कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाली झुंझुनू सीट को कांग्रेस के मुंह से छीन लिया और दूसरी तरफ राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की राजधानी मानी जाने वाली खींवसर सीट को जीतकर विधानसभा में हनुमान बेनीवाल और उनकी पार्टी को जीरो पर लाकर खड़ा कर दिया। इधर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने सोशल मीडिया X पर जीत की बधाई दी परंतु राजे की बधाई से ज्यादा उनका झालावाड़ में एक कार्यक्रम के दौरान दिया गया भाषण ज्यादा चर्चाओं में आ गया। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे महाराणा प्रताप की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम के दौरान महाराणा प्रताप के जीवन से जुड़ी बातों पर चर्चा करते हुए कुछ ऐसा कह गईं, जिसकी चर्चा हर तरफ चल पड़ी है। मंच से बोलते हुए उन्होंने कहा- महाराणा प्रताप के जीवन से हमें सीखना चाहिए है कि लोग पीठ में छुरा घोंपने में माहिर होते हैं। महाराणा कभी ऐसा नहीं करते थे और निहत्थे पर वार करने की बजाय अपने साथ दो तलवारें रखते थे, एक अपने लिए और एक निहत्थे के लिए। उन्होंने महाराणा प्रताप के जीवन से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए और समझना चाहिए कि समय का चक्र पहिये सा घूमता है। महलों में मखमल पर सोने वाले राजा को भी जंगल में कांटों पर भी सोना पड़ता है। महाराणा का सिद्धांत था अत्यंत विकट परिस्थिति में भी जो हार नहीं मानते हैं, जीत उन्हीं की होती है। उन्होंने कहा कि महाराणा का जीवन हमें बताता है कि सांप से कितना ही प्रेम कर लो, वह अपने स्वभाव के अनुरूप कभी न कभी तो आप पर जहर उगलेगा ही। यूं तो वसुंधरा ने अपने भाषण में महाराणा प्रताप के जीवन की खूबियों और उनसे सीख लेने की बात कही है लेकिन फिर भी उनकी बातों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है कि वह कौन है, जिसने वसुंधरा राजे के पीठ में छुरा  मारने का प्रयास किया है,  राजे इशारे-इशारे में किसी को कुछ समझाना चाह रही हैं या फिर अपनी ही बात कर रही हैं। recent visitors 71