ईआरसीपी समेत एक लाख करोड़ के हो सकते हैं ऐलान, राजस्थान सरकार की पहली वर्षगांठ पर आएंगे प्रधानमंत्री

जयपुर. राजस्थान में भजनलाल सरकार का पहला साल पूरा होने के अवसर पर 17 दिसंबर को जयपुर के ददिया में पीएम नरेंद्र मोदी की सभा होने जा रही है। मुख्यमंत्री इसकी तैयारियों को लेकर ददिया का दौरा भी कर चुके हैं। सभा में भीड़ लाने के लिए सभी विधायकों को टारगेट भी दे दिए गए हैं। करीब 3 लाख लोगों को सभा स्थल तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र मोदी के हाथों से करीब 1 लाख करोड़ रुपये की बड़ी घोषणाएं करवाई जाएंगी, इनमें सबसे बड़ा ऐलान ईआरसीपी योजना की घोषणा होगी। इसके अलावा किसानों के खातों में राज्य सरकार की तरफ से आने वाले 1 हजार रुपये की किश्त भी इसी दिन जारी की जानी है। इनके अलावा करीब 60 हजार नई नौकरियों का ऐलान भी किया जाएगा। तीन दिन चलेगा कार्यक्रम जानकारी के मुताबिक सरकार की पहली वर्षगांठ का कार्यक्रम तीन दिन चलेगा। इसमें पहले दिन युवाओं के लिए जिलों में कार्यक्रम, दूसरे दिन महिलाओं के लिए कार्यक्रम और तीसरे दिन पीएम की सभा रखी गई है। हाल में पीएम की सभा की तैयारियों को लेकर सीएम भजनलाल शर्मा खुद ददिया पहुंचे थे, जहां उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कार्यक्रम की सुरक्षा तैयारियों को लेकर विस्तृत चर्चा भी की थी। इस दौरान उनके साथ बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, पूर्व अध्यक्ष अशोक परनामी, पूर्व सांसद रामचरण बोहरा सहित कई अन्य नेता भी मौजूद थे। ईआरसीपी पर विपक्ष को जवाब देने की तैयारी ईआरसीपी प्रोजेक्ट को लेकर भजनलाल सरकार लगातार विपक्ष के निशाने पर है। इस सभा के जरिए सरकार ईआरसीपी प्रोजेक्ट को लॉन्च कर विपक्ष के हमलों का जवाब भी देगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विधानसभा चुनावों के दौरान दौसा में ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना की श्रेणी में शामिल करने की बात कही थी। क्या है ईआरसीपी? पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) में कालीसिंध, पार्वती, मेज और चाकन उप-बेसिनों में उपलब्ध व्यर्थ बहने वाले मानसून के पानी का उपयोग किया जाना है। इसे बनास, गंभीरी, बाणगंगा के पानी की कमी वाले उप-बेसिनों में मोड़कर चंबल बेसिन के भीतर पानी के इंटर बेसिन ट्रांसफर की परिकल्पना की गई थी। योजना के पूरा होने पर पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों को पीने और औद्योगिक पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। परियोजना में लगभग 2.82 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई को लेकर दृष्टिकोण रखा गया है। विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने 13 जिलों के 83 विधानसभा क्षेत्र में इस प्रोजेक्ट को चुनावी मुद्दा बनाया था। सबसे पहले ईआरसीपी प्रोजेक्ट की परिकल्पना पूववर्ती वसुंधरा सरकार के समय की गई थी।  योजना से लाभान्वित होने वाले जिलों में अलवर, दौसा, जयपुर, अजमेर, टोंक, सवाई माधोपुर, बूंदी, कोटा, बारां, झालावाड़, भरतपुर, धौलपुर और करौली शामिल हैं। recent visitors 58

आठ महीनों से एडहॉक के जिम्मे कामकाज: चांदना, राजस्थान-जयपुर में कौन करवाएगा आईपीएल मैच?

जयपुर. राजस्थान में इस बार होने वाले आईपीएल मैचों का आयोजन क्रिकेट संघ करवाएगा या सरकार? यह एक बड़ा सवाल है, जिसका फिलहाल कोई जवाब नहीं मिल रहा है। इसकी वजह यह है कि क्रिकेट एसोसिएशन में होने वाले चुनाव को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। बीते 8 महीनों से राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन का संचालन सरकार की बनाई गई एडहॉक कमेटी ही कर रही है। राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष पद से वैभव गहलोत को हटाने के बाद एसोसिएशन में नागौर जिला क्रिकेट संघ से ताल्लुक रखने वाले और प्रदेश के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के पुत्र धनंजय सिंह खींवसर को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया था लेकिन कुछ समय बाद ही सरकार ने राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन पर एडहॉक कमेटी बना दी, जो फिलहाल राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन को संचालित कर रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि एक बार फिर राजस्थान में आयोजित होने वाले आईपीएल के मुकाबले सरकार की ओर से ही आयोजित किए जाएंगे, मामले को लेकर पूर्व खेलमंत्री अशोक चांदना का कहना है कि भाजपा सरकार चुनाव में विश्वास नहीं रखती, उन्होंने कहा कि जब वैभव गहलोत राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के चुने हुए अध्यक्ष थे तो उन्हें बिना चुनाव करवाए क्यों हटाया गया? यदि सरकार को राजस्थान के क्रिकेट चलानी थी तो चुनाव करवाने चाहिए थे। चांदना ने यह भी कहा कि मौजूदा समय में राजस्थान में खेलों के हालात कुछ अच्छे नहीं हैं, राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन में कार्यकारिणी नहीं बनने से खिलाड़ियों को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। सिर्फ 3 महीने के लिए बनाई थी एडहॉक सरकार ने 28 मार्च 2024 में राजस्थान क्रिकेट संघ की कार्यकारिणी को भंग करके एडहॉक कमेटी का गठन कर दिया था, उस समय यह कमेटी सिर्फ 3 महीने के लिए बनाई गई थी और इसका काम राजस्थान क्रिकेट संघ के चुनाव करवाना था लेकिन सरकार ने इस कमेटी को दो बार एक्सटेंशन दे दिया यानी बीते 8 महीने से राजस्थान में क्रिकेट का संचालन एडहॉक कमेटी द्वारा किया जा रहा है। राजस्थान के क्रिकेट इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है, जब एडहॉक कमेटी ने इतने लंबे समय तक राजस्थान के क्रिकेट को चलाया है। मौजूदा कमेटी का कार्यकाल 28 दिसंबर को खत्म होगा लेकिन माना जा रहा है कि सरकार एक बार फिर कमेटी को एक्सटेंशन देने की तैयारी कर रही है, फिलहाल बीजेपी से विधायक जयदीप बिहानी को कमेटी का संयोजक बनाया गया है। फंड की कमी से जूझ रहे हैं एडहॉक कमेटी के गठन के बाद राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के वित्तीय हालत लगातार बिगड़ने लगे हैं। फंड की उपलब्धता नहीं होने के कारण राज्य स्तरीय टूर्नामेंट समय पर आयोजित नहीं हो पाए, ऐसे में कमेटी के सदस्य जब बीसीसीआई के पदाधिकारी से मिले तब कुछ फंड उपलब्ध करवाया गया। इतना ही नहीं दिवाली के मौके पर राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के कर्मचारियों को 4 महीने बाद तनख्वाह दी गई। मौजूदा समय में राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के हालात जयपुर जिला क्रिकेट एसोसिएशन की तरह हो गए हैं क्योंकि जयपुर जिला क्रिकेट एसोसिएशन में भी पिछले 3 सालों से एडहॉक कमेटी काम कर रही है और अभी तक इसके चुनाव नहीं हो पाए हैं। सदस्यों पर सवाल उठे इस दौरान एडहॉक कमेटी पर कई तरह के सवाल भी उठने लगे हैं। गंगानगर जिला क्रिकेट संघ के पदाधिकारी ने कमेटी के कुछ सदस्यों पर आरोप लगाए थे और कहा था कि खिलाड़ियों के सिलेक्शन में भेदभाव किया जा रहा है। सिर्फ उन्हीं खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी जा रही है, जो कमेटी के सदस्य हैं। साथ ही कोच के सिलेक्शन के समय भी कमेटी पर कई तरह के सवाल उठाए गए थे। recent visitors 74

जवाहर सिंह बेढम ने आस्था और संस्कृति बचाने के लिए बताया जरूरी, राजस्थान-भजनलाल कैबिनेट का ऐतिहासिक धर्मांतरण बिल

जयपुर। राजस्थान कैबिनेट में धर्मांतरण रोकने के लिए बिल को मंजूरी मिल गई है। इस विषय पर प्रदेश के गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने रविवार को आईएएनएस से करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की प्रशंसा की। जवाहर सिंह बेढम ने कहा, धर्मांतरण पर कानून बनाने को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्णय का स्वागत और अभिनंदन करता हूं। इसकी आवश्यकता थी, क्योंकि बहला-फुसला कर, प्रलोभन देकर या जबरदस्ती धर्मांतरण की शिकायत जगह-जगह से आ रही थी। भाजपा नेता ने कहा कि किसी की आस्था और संस्कृति बचाने के लिए इसकी आवश्यकता थी। ऐसे में कल भजनलाल शर्मा की कैबिनेट ने जो ऐतिहासिक निर्णय लिया है, वो स्वागत योग्य है। यह बिल भजनलाल शर्मा के स्वयं के विवेक, सोच और राज्य के हित में लिए गए फैसले का आधार है। बता दें कि राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अगुवाई में शनिवार को हुई कैबिनेट बैठक में ‘द राजस्थान प्रोहिबिशन ऑफ अनलॉफुल कन्वर्जन बिल 2024’ को मंजूरी दी गई। कानून मंत्री जोगाराम पटेल इस बिल को राजस्थान के आगामी विधानसभा सत्र में पेश करेंगे। उन्होंने इस संबंध में पत्रकार वार्ता कर कहा, “ जिस तरह प्रदेश में धर्मांतरण के मामले प्रकाश में आए हैं, उसके मद्देनजर यह बिल विधानसभा में पेश किए जाने का फैसला किया गया है। इससे पहले उत्तर प्रदेश में 2021, मध्य प्रदेश में 2021, उत्तराखंड में 2018, गुजरात में 2021, हिमाचल प्रदेश में 2019, झारखंड में 2017 में, कर्नाटक में 2022, ओडिशा में 1967 में धर्मांतरण के विरुद्ध कानून बनाया जा चुके हैं। इसके अलावा, कई अन्य प्रदेशों में भी धर्मांतरण के विरुद्ध कानून बनाए गए हैं। इसे देखते अब हमने भी यह कदम उठाने का फैसला किया है।” उल्लेखनीय है कि इससे पहले 2008 में वसुंधरा सरकार में धर्मांतरण बिल लाया गया था। 16 साल से यह बिल केंद्र के पास अटका हुआ था। जिसे अब तक राष्ट्रपति ने मंजूरी नहीं दी थी। लेकिन, अब वसुंधरा सरकार में पारित हुआ धर्मांतरण बिल भी भजनलाल सरकार वापस लेगी और धर्मांतरण पर नया बिल पेश करेगी। recent visitors 89

38160 परिक्षार्थी देंगे परीक्षा, राजस्थान-पशु परिचर भर्ती परीक्षा में कड़ी जांच के बाद एंट्री

नागौर. नागौर जिला मुख्यालय पर राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड जयपुर द्वारा आयोजित पशु परिचय भर्ती परीक्षा 2023 के नागौर जिला मुख्यालय पर कुल 21 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षा 9:00 बजे से शुरू होगी वहीं परीक्षा के 1 घंटे पहले यानी 8 बजे परीक्षा केंद्र का मुख्य दरवाजा बंद कर दिया गया है। नागौर में आज पहले दिन कुल 6360 परीक्षार्थी परीक्षा देंगे। वहीं कल 3 दिनों तक कुल 38160 परीक्षार्थी परीक्षा देंगे। वहीं सुबह 8:00 बजे पुलिस के कड़ी सुरक्षा के बीच जिला ट्रेजरी से पेपर अतिरिक्त जिला कलेक्टर की मौजूदगी में रवाना किया गया। अतिरिक्त कलेक्टर चंपालाल जीनगर ने बताया है कि हमने यहां से पेपर रवाना कर दिया गया है। नागौर जिला मुख्यालय पर 21 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं और परीक्षा 9 बजे से शुरू होगी। एंट्री 8:00 बजे बंद हो जाएगी। 8:00 बजे के बाद किसी भी परीक्षार्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। वहीं अजमेर से भर्ती बोर्ड परीक्षा से ऑब्जर्व अभी यहां पर आए हुए हैं और जिला प्रशासन यहां पूरी तरह मुस्तैद हैं। recent visitors 66

इन्वेस्टरों की समस्या और पेपर लीक पर होगी बगावत!, राजस्थान-किरोड़ी ने बढ़ाई बीजेपी-अफसरों की टेंशन

जयपुर. राजस्थान की भजनलाल सरकार इन दिनों इनवेस्टमेंट समिट की तैयारियों में व्यस्त है। लेकिन इसी बीच उनके कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने एक बड़ा बयान दे दिया है कि वे उपचुनावों की हार के लिए जिम्मेदार लोगों का जल्द खुलासा करेंगे। किरोड़ी के इस बयान ने निश्चित रूप से बीजेपी की टेंशन बढ़ा दी है। सियासी जानकार कह रहे हैं कि ‘बाबा’ किरोड़ी का धमका होगा तो इसकी जद में सरकार के कई अफसर और मंत्री भी आ सकते हैं। इनवेस्टमेंट समिट से पहले किरोड़ी लाल के इस खुलासे से प्रदेश के सियासी माहौल पर बड़ा असर आएगा। किरोड़ी के पास मुद्दों की कमी नहीं किरोड़ी लाल मीणा के पास मुद्दों की कोई कमी नहीं है। दौसा उपचुनाव में भाई जगमोहन मीणा की हार के बाद किरोड़ी का यह बयान काफी चर्चाओं में आया था जिसमें उन्होंने कहा था -'गैरों में कहां दम था, मुझे हमेशा जयचंदों ने ही मारा।’ वह इस बात के स्पष्ट संकेत दे चुके हैं कि उनके भाई की हार के पीछे बीजेपी के लोग ही जिम्मेदार हैं। इनवेस्ट में समिट से पहले पीड़ित निवेशकों को सामने ला रहे वहीं इनवेस्टमेंट समिट से ठीक पहले किरोड़ी लाल मीणा शुक्रवार को एक एनआरआई निवेशक को लेकर एसीबी दफ्तर पहुंच गए। जहां उन्होंने एसीबी पर भी बड़े आरोप लगा दिए। एसीबी हैड डीजी रवि प्रकाश मेहरड़ा से मुलाकात के बाद किरोड़ी लाल मीणा ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि हमारी सरकार इस मामले को लेकर संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि कहा मैंने सीएम भजनलाल शर्मा से कह दिया। इसके बाद भी 92 साल का बुजुर्ग एसीबी के दरवाजे पर खड़ा है। मैं इसे उचित नहीं मानता, यह बिल्कुल भी ठीक नहीं है। हमारी सरकार संवेदनशील है, लेकिन यहां पर न जाने संवेदन शून्यता क्यों है? यह मेरे भी समझ से बाहर है। पेपर लीक, डीओआईटी में एफआईआर को लेकर भी सक्रिय इसके साथ ही किरोड़ी लाल मीणा डीओआईटी और पेपर लीक मामलो को लेकर भी सक्रिय नजर आ रहे हैं। डीओआईटी में भ्रष्टाचार को लेकर वे गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेड़म से मुलाकात कर चुके हैं। हालांकि सरकार की तरफ से उनके ज्ञापन पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पेपर लीक में भी किरोड़ी एसआई भर्ती निरस्त करने की मांग कर रहे हैं। ऐसे तमाम मुद्दे किरोड़ी लाल मीणा के पास हैं। जिन्हें लेकर आने वाले दिनों में वे अपने चिरपरिचित सियासी अंदाज में नजर आएंगे। recent visitors 70

वन स्टेट-वन इलेक्शन पर कोर्ट जाएगी कांग्रेस, राजस्थान-निकाय चुनावों पर सरकार चुप

जयपुर. राजस्थान में भाजपा वन स्टेट, वन इलेक्शन के फार्मूले पर आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। प्रदेश में 59 निकायों का कार्यकाल पूरा हो चुका है। यहां चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं किए गए हैं बल्कि सरकार ने प्रशासक लगा दिए हैं। सरकार ने पिछले साल संकेत दिए थे कि वे पंचायत और निकाय चुनाव एक साथ करवाना चाहते हैं लेकिन कानून में कोई संशोधन नहीं हुआ। ऐसे में कांग्रेस अब इस मामले को कोर्ट से निपटाने पर भी विचार कर रही है। शहरी विकास एवं आवास (यूडीएच) मंत्री झाबरसिंह खर्रा ने दो महीने पहले संकेत दिया था कि शहरी स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव 2025 में एक साथ कराए जाएंगे। प्रदेश की भाजपा सरकार ने पिछले बजट में घोषणा की थी कि राज्य भर में स्थानीय निकाय चुनाव एक साथ कराए जाएंगे। हालांकि राज्य सरकार की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है न ही आयोग को इस बारे में कोई चिट्ठी लिखी गई है। ऐसे में अब कांग्रेस इस मामले को लेकर कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है। मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था में जो कानून है, उसमें पंचायत और निकाय चुनाव 6 महीने से ज्यादा टाले नहीं जा सकते। सूचियां तैयार करने में जुटा राज्य निर्वाचन आयोग हालांकि राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिला चुनाव अधिकारियों (डीईओ) को निर्देश दिया है कि वे प्रत्येक वार्ड के लिए आवश्यक समझे जाने वाले मतदान केंद्रों का चयन करें और आगामी नगर निकायों के चुनावों के लिए मतदान केंद्रों की सूची प्रकाशित करें लेकिन कांग्रेस का कहना है कि चुनाव करवाने हैं तो अब तक मतदाता सूची प्रकाशित हो जानी चाहिए थी। अभी तक वोट लिस्ट ही नहीं बनी- डोटासरा इधर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा का कहना है कि मौजूदा लोकसभा में केंद्र सरकार कानून में बदलाव करती है तो अलग बात है नहीं तो हम चुनाव करवाने के लिए जनता के बीच भी जाएंगे, हाईकोर्ट भी जाएंगे और जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे। डोटासरा ने कहा- बीजेपी इस मामले में पूरी तरह से फेल है। प्रदेश में 59 नगर परिषदों के चुनाव हो जाने चाहिए थे लेकिन अभी तक वोट लिस्ट ही नहीं बनी, आरक्षण की कोई बात भी नहीं हुई। वन स्टेट, वन इलेक्शन की मुंह जुबानी बातें हो रही हैं, कानून में कोई संशोधन नहीं हुआ। ये दिल्ली की पर्ची की तरफ देख रहे हैं, दिल्ली की पर्ची अभी आई नहीं। डोटासरा ने कहा कि जब तक दिल्ली की पर्ची नहीं आएगी तब तक ये प्रशासक लगाकर बैठे रहेंगे। जनवरी में ग्राम पंचायतों के जो चुनाव होने हैं, उसमें भी ये प्रशासक लगा देंगे। आज की तारीख में सरकार का सबसे बड़ा फेल्योर है तो वह यह कि सरकार में ब्यूरोक्रेसी हावी है और जनता की बात कोई नहीं सुन रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 महीने से राजस्थान में जो अनिर्णय की स्थिति है, वह जनता के लिए घातक है। कानून में संशोधन किया नहीं, निर्वाचन आयोग पंगू बना बैठा है। अब तक सरकार को कह देना चाहिए था कि वोटर लिस्ट तैयार कर ली है, हम चुनाव करवाएंगे। उन्होंने कहा कि जो मौजूदा लोकसभा का सत्र है, इसमें कोई कानून में बदलाव करते हैं तो अलग बात है, नहीं तो हम चुनाव करवाने के लिए हाईकोर्ट भी जाएंगे और जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे। recent visitors 100

राइजिंग राजस्थान का सौर ऊर्जा से संचालित होगा उद्घाटन दिवस, राजस्थान-मुख्यमंत्री 10 दिनों तक लेंगे नव संकल्प

जयपुर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि आगामी 9-11 दिसम्बर तक आयोजित होने वाले राइजिंग राजस्थान समिट के माध्यम से राज्य में औद्योगिक परिदृश्य को एक नई दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की आर्थिक उन्नति के संकल्प को पूरा करने के लिए जी जान से जुटी हुई हैं। हम राइजिंग राजस्थान के सफल आयोजन के लिए आगामी 10 दिनों तक प्रत्येक दिन एक नया संकल्प लेंगे। शर्मा ने कहा कि इन संकल्पों के माध्यम से अगले 5 वर्षों में प्रदेश को 350 बिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाया जाएगा। विकसित राजस्थान-2047 के संकल्प सिद्धि में राइजिंग राजस्थान का आयोजन मील का पत्थर साबित होगा। मुख्यमंत्री ने समिट के सफल आयोजन में सभी महत्वपूर्ण वर्गों को भागीदार बनने का आह्वान किया। श्री शर्मा ने आज पहला संकल्प लेते हुए कहा कि राइजिंग राजस्थान समिट का उद्घाटन दिवस पूरी तरह से सौर ऊर्जा से संचालित होगा। उन्होंने कहा कि यह समिट सूरज की ताकत से प्रदेश के विकास में नया सवेरा लाएगा। उन्होंने कहा कि हमारी प्राथमिकता है कि प्रदेश में निर्बाध बिजली की आपूर्ति के लिए अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा दिया जाए। राज्य सरकार की अनुकूल निवेश नीतियों से राजस्थान अक्षय ऊर्जा में निवेशकों की पसंद बना हुआ है तथा आज राजस्थान भारत में अक्षय ऊर्जा उत्पादन में पहले स्थान पर है। उन्होंने कहा कि हम प्रदेश को 2027 तक ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य के साथ काम कर रहे हैं। recent visitors 70