Friday, July 17, 2026 12:00 pm

अब RBI के कस्टमर केयर सेंटर को मिली धमकी, खुद को पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का प्रमुख बताया

नई दिल्ली हाल के दिनों में देश के एयरपोर्ट को धमकी भरे फोन कॉल आए थे। अब रिजर्व बैंक इंडिया के कस्टमर केयर में कॉल करके धमकी दी गई है। मुंबई में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के कस्टमर केयर सेंटर को रविवार को एक धमकी कॉल मिली, जिसमें कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का प्रमुख बताया। अधिकारियों के अनुसार, कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को "लश्कर-ए-तैयबा का सीईओ" बताते हुए अधिकारियों से कहा कि वे बैंक के पीछे वाले रास्ते को ब्लॉक कर दें क्योंकि एक इलेक्ट्रिक कार खराब हो गई है। इस कॉल के बाद आरबीआई अधिकारियों ने मामले को तुरंत मुंबई पुलिस को सूचित किया और पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने आसपास के क्षेत्र में तलाशी ली, लेकिन किसी भी संदिग्ध वस्तु या घटना का कोई पता नहीं चला। अधिकारियों ने कहा कि इस धमकी कॉल की जांच शुरू कर दी गई है और कॉलर की पहचान करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस ने मामले की छानबीन के लिए साइबर ट्रैकिंग तकनीकों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है, ताकि कॉल करने वाले व्यक्ति को पकड़ा जा सके। यह घटना एक गंभीर सुरक्षा खतरे के रूप में सामने आई है, क्योंकि ऐसे धमकी कॉल आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए हो सकते हैं। पुलिस और आरबीआई अधिकारियों ने इस मामले को पूरी गंभीरता से लिया है और सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। recent visitors 88

चुनाव में ट्रंप जीतते हैं तो RBI, विदेशी धन के संभावित और अचानक आई गिरावट से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार

नईदिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में अगर रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप अगले हफ्ते जीतते हैं तो भारत का केंद्रीय बैंक, RBI, विदेशी धन के संभावित और अचानक आउटफ्लो और रुपये में किसी भी तरह की भारी गिरावट से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है. बैंक से संबंधित दो सूत्रों ने इसकी जानकारी दी है. विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल करेगा रिजर्व बैंक न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, सूत्रों ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक वैश्विक बाजार में अस्थिरता और विदेशी फंड के आउटफ्लो की स्थिति में घरेलू मुद्रा की रक्षा के लिए अपने बड़े विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल करेगा. एक सूत्र ने कहा, 'ये रिजर्व अस्थिरता से निपटने में मदद करेगा. अगर आउटफ्लो तेज होता है, तो आरबीआई इसे प्रबंधित करने के लिए कदम उठाएगा, जैसा कि वह करता रहा है.' चीन से आयात पर 60 प्रतिशत शुल्क लगाने का वादा सूत्रों ने यह भी चेतावनी दी कि चीन के प्रति अमेरिकी टैरिफ में किसी भी तरह की भारी वृद्धि से भारत और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. ट्रंप ने चीन से आयात पर 60 प्रतिशत शुल्क लगाने का वादा किया है. इस महीने अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में लगभग 50 बेसिक पॉइंट्स की वृद्धि हुई है और चुनाव के दिन नजदीक आने पर डॉलर इंडेक्स 3.3% मजबूत हुआ है. भारतीय शेयरों से विदेशी फंडों में रिकॉर्ड 10 अरब डॉलर से अधिक का आउटफ्लो हुआ है, जबकि विदेशियों ने ऋण बाजार से 700 मिलियन डॉलर निकाले हैं. लगातार तीसरे हफ्ते गिरा भारत का विदेशी मुद्रा भंडार इस महीने रुपया लगातार रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिससे केंद्रीय बैंक को हस्तक्षेप करना पड़ा. हालांकि यह सबसे कम अस्थिर प्रमुख एशियाई मुद्राओं में से एक रहा है, जो प्रति डॉलर 83.79-84.09 की एक सीमा पर बना हुआ है. आरबीआई के हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार तीसरे हफ्ते गिरकर 18 अक्टूबर तक 688.27 अरब डॉलर पर आ गया है, जो कि एक महीने से अधिक में सबसे कम है. हालांकि यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा भंडार बना हुआ है. वोटर आईडी की मांग कर रहे ट्रंप बता दें कि अमेरिका में 5 नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव है. उपराष्ट्रपति कमला हैरिस और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच कड़ा मुकाबला है. पोल में बहुत कम अंतर से जीत मिलने के बाद, दोनों उम्मीदवारों ने अपना ध्यान सन बेल्ट के राज्यों पर केंद्रित कर दिया है. चुनाव से पहले ट्रंप ने देश के मौजूदा वोटिंग सिस्टम को लेकर नाराजगी जाहिर की है और वोटिंग के लिए पहचान पत्र को अनिवार्य करने पर जोर दिया है. पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि चुनावों के लिए पहचान पत्र (Voter ID) को अनिवार्य रूप से लागू करना चाहिए. लेकिन डेमोक्रेट्स वोटर आईडी कार्ड का विरोध कर रहे हैं ताकि ये लोग चुनाव में धांधली कर सकें.   recent visitors 88

दास ने कहा क्रिप्टोकरेंसी से ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है, जहां केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति पर नियंत्रण खो सकता है

वाशिंगटन/नई दिल्ली रिजर्व बैंक ऑफ अंडिया (आरबीआई) के गवर्नर शांतिकांत दास ने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी वित्तीय स्थिरता और मौद्रिक स्थिरता के लिए बहुत बड़ा जोखिम है। शक्तिकांत दास ने जोर देकर कहा कि इससे ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है, जहां केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति पर नियंत्रण खो सकता है। आरबीआई ने  ‘एक्सव’ पोस्‍ट पर जारी बयान में बताया कि शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को वाशिंगटन डीसी के पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स में आयोजित मैक्रो वीक 2024 कार्यक्रम में यह बात कही। उन्होंने कहा कि मैं वास्तव में इस राय का हूं कि ये ऐसी चीज है जिसे फाइनेंशियल सिस्टम पर हावी होने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। यह बैंकिंग प्रणाली के लिए भी जोखिम पैदा करता है। यह ऐसी स्थिति भी पैदा कर सकता है, जहां केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति से नियंत्रण खो सकता है। उन्होंने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी के लिए एक अंतरराष्ट्रीय समझ होनी चाहिए, क्योंकि लेनदेन क्रॉस-कंट्री है। इससे जुड़े बड़े जोखिमों के बारे में पूरी तरह से सचेत रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत क्रिप्टोकरेंसी के बारे में सवाल उठाने वाला पहला देश था। दास ने कहा कि भारत की अध्यक्षता में जी-20 में इस पूरे क्रिप्टो इकोसिस्टम से निपटने के संबंध में अंतरराष्ट्रीय समझ विकसित करने पर समझौता हुआ था। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कुछ प्रगति हुई है। उल्लेसखनीय है कि आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास अंतरराष्ट्रीमय मुद्रा कोष और विश्वि बैंक के सालाना बैठकों में भाग लेने के लिए अमेरिका के आधिकारिक दौर पर हैं।     recent visitors 73

दिवाली से पहले Home Loan लेने वालों को बड़ी राहत, आरबीआई गवर्नर डॉ. शक्तिकांत दास ने EMI पर बड़ा फैसला

नई दिल्ली नेशनल डेस्क आरबीआई गवर्नर डॉ. शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में हुई मौद्रिक नीति समिति (MPC) की पिछली 9 बैठकों में ब्याज दरों को स्थिर रखने का निर्णय लिया गया है। बुधवार को तीन दिवसीय मीटिंग के बाद भी समिति ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। फरवरी 2023 में आखिरी बार रेपो रेट में संशोधन किया गया था, जब इसे 6.50% पर लाया गया था, और तब से यह दर स्थिर बनी हुई है। रेपो रेट में बदलाव न होने से आम जनता के होम लोन, ऑटो लोन और अन्य कर्जों पर ब्याज दरों में कोई असर नहीं पड़ेगा। रेपो रेट वही दर है, जिस पर केंद्रीय बैंक अन्य बैंकों को अल्पकालिक कर्ज प्रदान करता है, जिससे यह देशभर में उधारी की लागत को प्रभावित करता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के मद्देनजर रेपो रेट में कोई बदलाव न करने का फैसला इसलिए लिया है, क्योंकि दरों में कटौती से रुपये की कमजोरी बढ़ सकती है। रुपये के कमजोर होने से आयात की लागत बढ़ेगी और भारतीय कंपनियों के लिए इनपुट लागत भी प्रभावित हो सकती है। ग्रोथ पर रहेगा फोकस RBI का मुख्य फोकस आर्थिक विकास पर है, और दिसंबर या फरवरी में होने वाली आगामी मौद्रिक नीति समितियों (MPC) में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स (BPS) की कटौती की संभावना अधिक है। मौजूदा समीक्षा बैठक सोमवार से शुरू हुई थी, और आज RBI दरों पर अपना फैसला सुनाएगा। 2023 के बाद से RBI ने दरों में कोई बदलाव नहीं किया है, जबकि उससे पहले दरों में तेजी से वृद्धि हुई थी। recent visitors 84

खुशखबरी – नहीं बढ़ेगी होम लोन की EM , लगातार 10वीं बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं, 6.5% पर कायम

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक की 51वीं एमपीसी बैठक के नतीजे (RBI MPC Meeting Results) आ गए हैं. केंद्रीय बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) दो दिवसीय मौद्रिक नीति समिति की बैठक के नतीजों का ऐलान करते हुए कहा कि इस बार भी नीतिगत दरों (Repo Rate) में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यानी आपके लोन की ईएमआई न बढ़ेगी और न ही घटने वाली है. ये लगातार 10वीं बार है जबकि रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है. इसके बाद रेपो रेट 6.50% पर बरकरार है. जबकि रिवर्स रेपो रेट 3.35% पर और बैंक रेट 6.75% पर स्थिर रखा गया है. 6 में से 5 सदस्य बदलाव के पक्ष में नहीं RBI गवर्नर ने 7 अक्टूबर को शुरू हुई MPC Meet में लिए गए फैसलों के बारे में बताते हुए कहा कि इस बार एमपीसी में 3 नए सदस्य जुड़े हैं और ग्लोबल हालातों समेत अन्य पहलुओं पर विचार करने के बाद बैठक के दौरान 6 में से 5 सदस्यों ने ब्याज दरों को यथावत रखने पर अपना वोट दिया. इसके साथ ही आरबीआई गवर्नर ने कहा कि पॉलिसी का रुख विद्ड्रॉल ऑफ अकमॉन्डेशन से चेंज करते हुए अब Neutral कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर बने उतार-चढ़ाव भरे हालातों के बावजूद देश में महंगाई (Inflation) को काबू में रखने में हम कामयाब रहे हैं और इसके साथ ही Economic Growth को भी गति मिली है. Repo Rate का EMI पर असर RBI की MPC की बैठक हर दो महीने में होती है और इसमें शामिल रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांत दास समेत छह सदस्य महंगाई समेत अन्य मुद्दों और बदलावों (Rule Changes) पर चर्चा करते हैं. यहां बता दें कि रेपो रेट का सीधा कनेक्शन बैंक लोन लेने वाले ग्राहकों से होता है. इसके कम होने से लोन की ईएमआई घट जाती है और इसमें इजाफा होने से ये बढ़ जाती है. दरअसल, रेपो रेट (Repo Rate) वह दर है जिस पर किसी देश का केंद्रीय बैंक धन की किसी भी कमी की स्थिति में वाणिज्यिक बैंकों को पैसा उधार देता है. रेपो रेट का उपयोग मौद्रिक अधिकारियों द्वारा इंफ्लेशन को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है. जब लगातार बढ़ाया गया था रेपो रेट Repo Rate फिलहाल 6.5 फीसदी पर बना हुआ है. इससे पहले जब देश में महंगाई बेकाबू हो गई थी और 7 फीसदी के पार पहुंच गई थी. तब इसे काबू में लाने के लिए RBI ने लगातार रेपो रेट बढ़ाया था. इसमें मई 2022 से फरवरी 2023 तक कई बार बढ़ोतरी की गई थी और ये 2.5 फीसदी बढ़ा था. हालांकि, इसके बाद से ही केंद्रीय बैंक की ओर से किसी भी तरह का कोई बदलाव रेपो रेट में नहीं किया गया था. GDP को लेकर आरबीआई का अनुमान एमपीसी बैठक के नतीजों के बारे में जानकारी देते हुए केंद्रीय बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने FY2025 की दूसरी तिमाही के लिए GDP अनुमान 7.2 फीसदी से घटाकर 7 फीसदी करने का ऐलान किया, तो वहीं तीसरी तिमाही के लिए ये 7.3 फीसदी से बढ़ाकर 7.4 फीसदी करने की जानकारी दी है. चौथी तिमाही के लिए भी जीडीपी ग्रोथ रेट को पहले के 7.2 फीसदी से बढ़ाकर 7.4 फीसदी किया गया है. इसके अलावा RBI ने अगले साल 2026 की पहली तिमाही के लिए जीडीपी 7.3 फीसदी की दर से बढ़ने की उम्मीद जाहिर की है. महंगाई को लेकर गवर्नर ने क्या कहा? रेपो रेट को लगातार 10वीं बार स्थिर रखने के ऐलान के साथ ही रिजर्व बैंक के गवर्नर ने FY25 के लिए रिटेल महंगाई के अनुमान के बारे में भी बताया और कहा कि ये 4.5 फीसदी पर बरकरार रखा गया है. Q2 के लिए अनुमान 4.1 फीसदी, Q3 के लिए 4.8 फीसदी और Q4 के लिए 4.2 फीसदी रखा गया है. वहीं अगले साल की पहली तिमाही में ये 4.3 फीसदी रहने का अनुमान है. इधर नतीजों का ऐलान उधर बाजार ने लगाई दौड़ आरबीआई ने लगातार 10वीं बार रेपो रेट को स्थिर रखने का ऐलान किया, तो इस खबर का असर सीधे शेयर बाजार पर दिखाई दिया. मिडिल ईस्ट में तनाव के माहौल के बीच Repo Rate स्थिर रखने का फैसला बाजार को पसंद आया और करीब 150 अंक की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा BSE Sensex अचानक दौड़ लगाते हुए 411 अंक चढ़कर 82,046.48 के लेवल पर पहुंच गया. BSE Nifty की बात करें, तो 25,190 के पार निकल गया.   recent visitors 81

अभी भी लोगो के पास है 2000 रुपये के 7,117 करोड़ रुपये के नोट, RBI ने दी जानकारी

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बताया कि 2000 रुपये के 98% नोट वापस आ चुके हैं, जबकि अभी भी 7,117 करोड़ रुपये के नोट लोगों के पास बचे हुए हैं। अक्टूबर 2024 में जारी आंकड़ों के अनुसार, नोटों की वापसी की रफ्तार धीमी हो गई है। प्रमुख बातें: कब और क्यों बंद हुए: 19 मई 2023 को क्लीन नोट पॉलिसी के तहत 2000 रुपये के नोट वापस लेने का निर्णय लिया गया था। वापसी की समयसीमा: 23 मई से 30 सितंबर 2023 तक नोट जमा करने की समयसीमा थी, लेकिन इसे कई बार बढ़ाया गया। अभी भी जमा कर सकते हैं नोट: 2000 रुपये के नोट अब सिर्फ आरबीआई की 19 क्षेत्रीय शाखाओं और डाकघरों में जमा कराए जा सकते हैं। नोट वापसी के आंकड़े: मई 2023 में बाजार में: 3.56 लाख करोड़ रुपये के नोट थे। सितंबर 2024 तक: 7,000 करोड़ रुपये के नोट वापस नहीं हुए हैं। आरबीआई ने 2018-19 से 2000 रुपये के नोटों की छपाई बंद कर दी थी क्योंकि बाजार में अन्य मूल्यवर्ग के नोट पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो चुके थे। recent visitors 76

आरबीआई ने लिया बड़ा फैसला- चेक का निपटान अब कुछ ही घंटों में हो जाएगा, अब नहीं लगेंगे दो से तीन दिन

नई दिल्ली चेक का निपटान (क्लियरिंग) अब कुछ ही घंटों में हो जाएगा। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चेक समशोधन में लगने वाले समय को कुछ घंटे करने और उससे जुड़े जोखिम कम करने के मकसद से कदम उठाने की घोषणा की है। वर्तमान में चेक जमा करने (cheque clearance) से लेकर राशि आने तक दो दिन का समय लग जाता है। लेकिन नई व्यवस्था में चेक जमा करने के कुछ ही घंटों में यह ‘क्लियर’ हो जाएगा। RBI ने क्या कहा? आरबीआई के गवर्नर शक्तिकान्त दास ने गुरुवार को चालू वित्त वर्ष की तीसरी मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा करते हुए कहा, ‘‘चेक समाशोधन को दुरुस्त करने, निपटान जोखिम कम करने और ग्राहकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के मकसद से चेक ट्रंकेशन सिस्टम (सीटीएस) की वर्तमान प्रक्रिया में बदलाव का प्रस्ताव है।’’ उन्होंने कहा कि इसके तहत मौजूदा सीटीएस व्यवस्था के तहत ‘बैच’ में प्रसंस्करण की जगह कारोबारी समय में निरंतर आधार पर समाशोधन की व्यवस्था की जाएगी। नई व्यवस्था में कैसे होगा काम आरबीआई के अनुसार, ‘‘नई व्यवस्था में चेक को ‘स्कैन’ किया जाएगा, उसे प्रस्तुत किया जाएगा और कुछ घंटों में समाशोधन किया जाएगा। इससे चेक का समाशोधन कुछ घंटे में हो जाएगा जबकि अभी दो दिन तक का समय (टी प्लस 1) लगता है। दास ने कहा कि इस संबंध में विस्तृत दिशानिर्देश जल्दी ही जारी किए जाएंगे। इसके अलावा, आरबीआई ने बैंकों की तरफ से अपने ग्राहकों के बारे में ‘क्रेडिट’ सूचना कंपनियों को दी जाने वाली रिपोर्ट हर पखवाड़े देने का प्रस्ताव किया है। वर्तमान में महीने में एक बार यह रिपोर्ट दी जाती है। नौंवी बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं RBI ने आर्थिक गतिविधियों में जारी तेजी का हवाला देते हुये एवं महंगाई पर कड़ी नजर रखते हुये लगातार नौवीं बार नीतिगत दरों को यथावत रखने का फैसला किया है जिससे ब्याज दरों में कमी की उम्मीद लगाये आम लोगों को निराशा हाथ लगी है। मई 2022 से 250 आधार अंकों तक लगातार छह बार दर वृद्धि के बाद पिछले वर्ष अप्रैल में दर वृद्धि चक्र को रोक दिया गया था और यह अभी भी इसी स्तर पर है। recent visitors 75