भोपाल की अरेरा कॉलोनी में फर्जी पुलिस बनकर किडनैपिंग और लूट की वारदात

Kidnapping and robbery by posing as police in Bhopal’s Arera Colony भोपाल। भोपाल के पाश इलाके अरेरा कॉलोनी में पुलिस बनकर आए बदमाशों ने लूट व अपहरण की सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया। हबीबगंज थाना क्षेत्र के ई-7 सेक्टर स्थित मेघना अपार्टमेंट में 11 जनवरी की शाम करीब साढ़े सात बजे 5-6 बदमाश फ्लैट में घुसे व खुद को पुलिसकर्मी बताया। उन्होंने फ्लैट में मौजूद राहुल गुप्ता, अनिमेष वर्मा, अनुराग और नरेंद्र परमार को एनडीपीएस केस में फंसाने की धमकी दी और मारपीट की। डर के मारे युवकों ने विरोध नहीं किया। बदमाशों ने उनसे 79,800 रुपये नकद और तीन कीमती घड़ियां लूट लीं। फिर बदमाशों ने चारों को उनकी ही कार में जबरन बैठाया और मिसरोद बाइपास टोल रोड की ओर ले गए। वहां और रुपये मांगे। राहुल ने परिचित आनंद रघुवंशी को फोन कर मदद मांगी। आनंद होशंगाबाद से एक लाख रुपये लेकर भोपाल पहुंचे। बदमाशों ने उन्हें पांच नंबर पेट्रोल पंप के पास बुलाया। वहां आनंद ने बदमाशों से फोन छीन लिया और शोर मचाया कि वह असली पुलिस के साथ है। पकड़े जाने के डर से बदमाश पीड़ितों के हाथ से मोबाइल छीनकर भाग निकले। घबराए युवक हबीबगंज थाने पहुंचे, लेकिन किरकिरी से बचने पुलिस ने मामला चार दिन तक दबाए रखा। बाद में पहचान होने पर चार बदमाशों को गिरफ्तार किया गया। recent visitors 65

मुनाफा छुपाने का खेल, मप्र में बिजली कंपनी ने दिखाया 6044 करोड़ का ‘काल्पनिक’ घाटा, दाम बढ़ाने की तैयारी

मुनाफा छुपाने का खेल, मप्र में बिजली कंपनी ने दिखाया 6044 करोड़ का ‘काल्पनिक’ घाटा, दाम बढ़ाने की तैयारी

A game of profit concealment, Madhya Pradesh power company shows ‘fictitious’ loss of 6044 crores, prepares to increase prices जबलपुर। बिजली कंपनियों ने प्रदेश में बिजली के दाम औसत 10.19 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव मप्र विद्युत नियामक आयोग को भेजा है। आयोग ने याचिका पर सुझाव और आपत्ति बुलाई है। इसमें बिजली विशेषज्ञों का दावा है कि बिजली कंपनी ने 6044 करोड़ का घाटा बताया है जबकि 9204 करोड़ रुपये के मनमाने आंकड़े आयोग के सामने रखकर इस घाटे को दर्शाया गया है ताकि बिजली की दर को बढ़ाया जा सके। बिजली मामलों के जानकार एडवोकेट राजेंद्र अग्रवाल ने आयोग को जो आपत्ति दी है उसमें दावा किया है कि 9204 करोड़ रुपये के आंकड़े गलत और तथ्यहीन है। विद्युत नियामक आयोग यदि इन आंकड़ों से जुड़े दस्तावेजों का परीक्षण करेगी तो निश्चित ही घाटे की जगह मुनाफा नजर आएगा। 9204 करोड़ के फर्जी आंकड़े सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी काल्पनिक खर्च को बताकर बिजली कंपनियों का घाटा बताया है। उनके अनुसार पावर मैनजमेंट कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2014-15 से 2022-23 तक की सत्यापन याचिका में खारिज 3450.63 करोड़ रुपये पूरक बिजली खरीदी लागत की पुन: असंवैधानिक मांग की गई है। इसके अलावा 832.96 करोड़ रुपये अन्य लागत जो कि स्टेशन आधार पर आवंटित नहीं की जा सकी थी उसकी असंवैधानिक मांग की है। राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि ताप गृह से बिजली खरीदी का व्यय अलग है लेकिन अन्य व्यय का एक मुश्त यह राशि क्यों और किस लिए मांगी गई इसका कोई ब्यौरा नहीं है। पूरक बिल के नाम पर 2185 करोड़ रुपये मांगा है जबकि मप्र विद्युत नियामक आयोग ने पहले ही साफ किया है कि पूर्ण वितरण दस्तावेज सहित प्रस्तुत नहीं करने पर यह राशि स्वीकृति नहीं होगी। अग्रवाल का कहना है कि विद्युत चोरी के कारण हुए नुकसान को उपभोक्ता से 696 करोड़ रुपये वसूल करने की तैयारी की गई है। इसके अलावा मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी पिछले दस साल की वार्षिक राजस्व आवश्यक्ता में पूंजीकरण में संसोधन के तहत 623 करोड़ के अवैधानिक मांग की है। वहीं याचिका में मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी का कार्य मात्र विद्युत वितरण कंपनी के लिए बिजली खरीद कर उपलबध कराना है किंतु मैनेजमेंट कंपनी समानांतर रूप से अवैधानिक रूप से बिजली खरीदी के लिए 438 करोड़ रुपये मांगे है।इसके साथ ही पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने जो राशि नहीं मांगी वो भी उल्लेखित है 5.15 करोड़ रुपये की मांग की गई है। मैनेजमेंट कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं पर दो वर्ष के ब्याज कि रुप में 774 करोड़ रुपये की मांग की है आपत्तिकर्ता ने इसे गलत मांग बताया है। इसके साथ ही स्मार्ट मीटर के लिए 197 करोड़ रुपये की मांग की है। राजेंद्र अग्रवाल ने आयोग को भेजे पत्र में दावा किया है कि अभी तक बिजली वितरण कंपनियों ने स्मार्ट मीटर के नाम पर राशि का भुगतान ही नहीं किया है ऐसे में यह राशि वसूल करना गलत है। 25 जनवरी तक आपत्ति-सुझाव मप्र विद्युत नियामक आयोग ने बिजली टैरिफ याचिका को लेकर 25 जनवरी तक आपत्ति और सुझाव आमंत्रित किए हैं। इसके बाद मप्र विद्युत नियामक आयोग आपत्ति और सुझाव के आधार पर प्रदेश के तीन शहर जबलपुर, भोपाल और इंदौर में जनसुनवाई का आयोजन करेगा।राजेंद्र अग्रवाल ने आयोग से मांग की है कि इस बार आनलाइन की बजाए फिजिकल जनसुनवाई की जाए ताकि लोग अपनी बात बेहतर तरीके से कह सके। recent visitors 60

राज्य सरकार एआई को नागरिक केंद्रित, पारदर्शी और कुशल शासन की आधारशिला के रूप में कर रही है स्थापित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

राज्य सरकार एआई को नागरिक केंद्रित, पारदर्शी और कुशल शासन की आधारशिला के रूप में कर रही है स्थापित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

The State Government is establishing AI as the cornerstone of citizen-centric, transparent and efficient governance: Chief Minister Dr. Yadav भोपाल ! मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार एआई को नागरिक-केंद्रित, पारदर्शी और कुशल शासन की आधारशिला के रूप में स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है। एआई आधारित प्रशासनिक व्यवस्था और प्रबंधन, तकनीक-प्रौद्योगिकी और अकादमिक क्षेत्र में एआई आधारित नवाचार विकसित भारत@ 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में प्रभावी रूप से सहायक होंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हर क्षेत्र में भारत को आगे बढ़ाने के लिए कार्य कर रहे हैं। मध्यप्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण का अध्ययन केंद्र और शंकराचार्य की साधना का केंद्र भी है। राज्य सरकार मानवीय संवेदनाओं के साथ आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार सभी विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए एआई का उपयोग कर रही है। एआई वर्तमान समय में शासन, उद्योग और समाज के लिए एक परिवर्तनकारी शक्ति है। हमारा राज्य जल्द ही एआई नीति भी लाएगा और एआई के लिए मिशन मोड पर व्यापक रूप से कार्य किया जाएगा। प्रदेश के माइनिंग और हेल्थ सेक्टर में एआई के उपयोग की बड़ी संभावनाएं हैं। मध्यप्रदेश अपार संभावनाओं वाला राज्य है, जिसमें आगे बढ़ने की पर्याप्त क्षमता है। विकसित भारत के लक्ष्य प्राप्ति में हमारी सरकार हर कदम पर प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को भोपाल के ताज लेक फ्रंट में ‘मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कांफ्रेंस-2026’ का शुभारंभ कर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एआई लिटरेसी मिशन के तहत फ्यूचर स्किल्स फॉर एआई पावर्ड भारत के लिए कौशल रथ को झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश स्पेस टेक नीति-2026 लांच की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में विभिन्न समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन सिंहस्थ-2028 के संचालन के लिए आयोजित उज्जैन महाकुंभ हैकाथॉन और मध्यप्रदेश इनोटेक प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया। अपर मुख्य सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी श्री संजय दुबे ने “एआई फॉर पीपल, प्लेनेट एंड प्रोग्रेस-मध्यप्रदेश रोडमैप टू इंपैक्ट” पर राज्य का प्रमुख एआई विजन प्रस्तुत किया। एआई को राष्ट्रीय आंदोलन बनाने के उद्देश्य से एआई लिटरेसी मिशन के अंतर्गत आरंभ युवा एआई फॉर ऑॅल पर लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। एम.पी. राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम लिमिटेड के महाप्रबंधक आशीष वशिष्ठ ने कॉन्फ्रेंस के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत एमपीएसईडीसी प्रदेश में एआई इंफ्रॉस्ट्रक्चर स्थापित करने के लिए नोडल एजेंसी है। स्पेस टेक नीति – अंतरिक्ष आधारित अनुप्रयोगों को बढ़ावा देने की पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रीजनल एआई इंपैक्ट कॉन्फ्रेंस में प्रदेश की स्पेस टेक नीति लांच की। उन्होंने कहा कि नीति राज्य को भारत के उभरते अंतरिक्ष क्षेत्र में एक अग्रणी और भविष्य-उन्मुख केंद्र के रूप में स्थापित करेगी। नीति के तहत स्पेस टेक स्टार्ट-अप्स, एमएसएमई और उद्योगों को वित्तीय, अवसंरचनात्मक और अनुसंधान सहयोग प्रदान कर कृषि, आपदा प्रबंधन, जल संसाधन एवं शहरी नियोजन जैसे क्षेत्रों में अंतरिक्ष-आधारित अनुप्रयोगों को बढ़ावा दिया जाएगा। यह नीति निवेश, नवाचार और राष्ट्रीय अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र में मध्यप्रदेश की भूमिका को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। नवाचार और कौशल विकास के लिए हुए 7 एमओयू पर हस्ताक्षर मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 6 समझौता ज्ञापन-यंगोवेटर (आंसर फाउंडेशन), सीईईडब्ल्यू (कॉउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर), गूगल, नैसकॉम, एआईएसईसीटी और भाषिणी के साथ किए गए। ये समझौते शैक्षणिक संस्थानों में नवाचार एवं रोबोटिक्स को बढ़ावा देने, जलवायु परिवर्तन व सतत विकास से जुड़े क्षेत्रों में एआई आधारित शोध एवं निर्णय सहयोग विकसित करने, शासकीय विभागों में एआई और क्लाउड तकनीक के उपयोग को प्रोत्साहित करने, राज्य में एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना एवं कौशल विकास को गति देने, राष्ट्रीय एआई मिशन से जुड़कर कंप्यूटर एवं डेटा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, ग्रामीण एवं वंचित क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और एआई जागरूकता बढ़ाने और एआई आधारित शासन को सक्षम करने के उद्देश्य से किए गए हैं। इसके अलावा इंडिया एआई और तकनीकी शिक्षा,कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के मध्य एक समझौता ज्ञापन हुआ। उच्च गुणवत्ता वाली एआई शिक्षा तक पहुंच को व्यापक बनाने के लिए इंडिया एआई मिशन देश के टियर-2 एवं टियर-3 शहरों में 570 डेटा एवं एआई लैब्स की स्थापना कर रहा है। तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग, मध्य प्रदेश सरकार के सहयोग से मध्यप्रदेश में 30 डेटा एवं एआई लैब्स स्थापित की जाएंगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल तकनीक नहीं, नीति, समाज और अर्थव्यवस्था से जुड़ा एक सशक्त माध्यम बना : मुख्य सचिव जैन मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा है कि एआई के उपयोग से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और निर्णय प्रक्रिया अधिक तेज, सटीक व नागरिक-केंद्रित होगी। मुख्य सचिव जैन ने बताया कि यह कांफ्रेंस आगामी इंडिया एआई इंपैक्ट समिट-2026 से पूर्व देश में एआई इको सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा निर्धारित सतत आर्थिक विकास लक्ष्य को प्राप्त करने में गवर्नेंस में एआई की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने उद्योग और अकादमिक संस्थानों के सहयोग, स्किलिंग व री-स्किलिंग की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि भविष्य रिसर्च, इनोवेशन और नॉलेज आधारित होगा। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने यूपीआई को भारत की वैश्विक पहचान बताया। मध्यप्रदेश में समग्र आईडी जैसी पहलों के माध्यम से डेटा-आधारित और परिवार-केंद्रित शासन को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्य सचिव जैन ने कहा कि ऐसे मंच नवाचार और सहयोग को नई दिशा देते हैं। मध्यप्रदेश इस राष्ट्रीय प्रयास में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। एआई के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये राज्य ने बनाये 4 प्रमुख स्तंभ : एसीएस दुबे अपर मुख्य सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संजय दुबे ने कहा कि प्रदेश सरकार ने “AI for People, Planet, and Progress” के सिद्धांत पर आधारित एक स्पष्ट और दीर्घकालिक एआई रोडमैप तैयार किया है। राज्य का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब प्रयोगात्मक तकनीक नहीं, बल्कि शासन की एक मुख्य क्षमता बन चुकी है। एआई के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य 4 प्रमुख सक्षम स्तंभों—अवसंरचना, डेटा, प्रतिभा और रणनीति को सुदृढ़ कर रहा है। … Read more

मध्य प्रदेश में फिर तेज हुई दलित-आदिवासी राजनीति, कांग्रेस साधने के लिए मुद्दों को दे रही हवा

Dalit-tribal politics has once again intensified in Madhya Pradesh, with the Congress raising issues to gain traction. भोपाल। मध्य प्रदेश में एक बार फिर दलित-आदिवासी राजनीति केंद्र में आ गई है। भले ही विधानसभा चुनाव 2028 में होने हैं, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से इन वर्गों को साधने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। खासकर कांग्रेस दलित और आदिवासी समाज को फिर से अपने पाले में लाने के लिए आक्रामक रुख अपनाती दिख रही है। ग्वालियर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा स्थापना को लेकर हुए विवाद से लेकर आदिवासी संगठनों के मुद्दों तक, कांग्रेस लगातार संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह इन वर्गों के साथ खड़ी है। हाल ही में ग्वालियर हाई कोर्ट खंडपीठ परिसर में डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा लगाने को लेकर हुए विवाद ने दलित राजनीति को नया मुद्दा दे दिया। कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया समेत कई नेता खुलकर दलित संगठनों के समर्थन में सामने आए। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर प्रशासन और सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए दलित अस्मिता से जोड़कर इसे बड़ा राजनीतिक प्रश्न बना दिया। ग्वालियर-चंबल अंचल में अनुसूचित जाति वर्ग की निर्णायक भूमिका को देखते हुए कांग्रेस का यह रुख महज संयोग नहीं माना जा रहा। विधानसभा गणित और दलित-आदिवासी महत्वप्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा में अनुसूचित जाति के लिए 35 और अनुसूचित जनजाति के लिए 47 सीटें आरक्षित हैं। इसके अलावा करीब 40 सामान्य सीटों पर भी इन वर्गों का प्रभाव निर्णायक माना जाता है। यही कारण है कि कांग्रेस और भाजपा, दोनों ही दल इन मतदाताओं को नजरअंदाज नहीं कर सकते। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दों और असंतोष के चलते दलित-आदिवासी मतदाताओं का झुकाव कांग्रेस की ओर रहा, जिससे 15 वर्षों बाद कमल नाथ के नेतृत्व में कांग्रेस सत्ता में लौटी। हालांकि 2023 में समीकरण बदले और भाजपा ने एससी-एसटी सीटों पर बेहतर प्रदर्शन करते हुए पूर्ण बहुमत की सरकार बना ली। आदिवासी मुद्दों पर कांग्रेस की रणनीतिकांग्रेस का मौजूदा फोकस सिर्फ दलित नहीं, बल्कि आदिवासी समाज पर भी है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का अधिकांश राजनीतिक जोर आदिवासी क्षेत्रों पर दिखाई देता है। हाल के दिनों में आइएएस अधिकारी संतोष वर्मा के विवादित बयान को लेकर कांग्रेस की चुप्पी को भी इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। वर्मा आदिवासी समाज से आते हैं और अजाक्स के अध्यक्ष हैं, जिसे कांग्रेस का पारंपरिक समर्थन रहा है। वर्मा को दिए गए कारण बताओ नोटिस के विरोध में जय युवा आदिवासी संगठन (जयस) समेत कई आदिवासी संगठन एकजुट हैं, जबकि ब्राह्मण समाज सरकार की निष्क्रियता से नाराज है। दिग्विजय सिंह और दलित एजेंडाप्रदेश में दलित राजनीति को धार देने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की अगुआई में नया दलित एजेंडा तैयार किया जा रहा है। अगले एक वर्ष तक प्रदेश सहित अन्य राज्यों में इस एजेंडे को लेकर गतिविधियां चलाई जाएंगी और 13 जनवरी 2027 को इसे औपचारिक रूप से घोषित किया जाएगा। इससे पहले वर्ष 2002 में भी दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्री रहते दलित एजेंडा लागू हुआ था, हालांकि उसके बाद हुए चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। भाजपा का पलटवारभाजपा कांग्रेस की इस सक्रियता को महज “एजेंडा की राजनीति” बता रही है। प्रदेश के मंत्री रजनीश अग्रवाल का कहना है कि कांग्रेस का इतिहास एससी-एसटी वर्ग के विकास का नहीं रहा है। उनके अनुसार कांग्रेस ने जाति को जाति से लड़ाने का काम किया, जबकि भाजपा सामाजिक समरसता और विकास की राजनीति करती है। 2028 से पहले सियासी तापमानकुल मिलाकर, 2028 के चुनाव से काफी पहले ही मध्य प्रदेश में दलित-आदिवासी राजनीति का तापमान बढ़ने लगा है। कांग्रेस जहां इन वर्गों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा अपने विकास और समरसता के एजेंडे पर भरोसा जता रही है। आने वाले महीनों में यह राजनीति और तेज होने के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं। recent visitors 59

70वें जन्मदिन पर मायावती का बड़ा राजनीतिक संदेश, अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान

70वें जन्मदिन पर मायावती का बड़ा राजनीतिक संदेश, अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान

Mayawati sends a major political message on her 70th birthday, announcing she will contest the elections alone. लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने 70वें जन्मदिन के मौके पर राजनीतिक विरोधियों पर जमकर हमला बोला। पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज को किसी का चोखा-बाटी नहीं, बल्कि सम्मान चाहिए, और बसपा ने हमेशा सभी जातियों व धर्मों को बराबरी का सम्मान दिया है। सरकारें बसपा की योजनाओं का नाम बदलकर चला रहीं मायावती ने कहा कि केंद्र और राज्यों की सरकारें बसपा सरकार के दौरान शुरू की गई योजनाओं को सिर्फ नाम बदलकर चला रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोधी दलों ने भ्रम फैलाकर बसपा को कमजोर और तोड़ने की कोशिश की, लेकिन वे अपने मंसूबों में सफल नहीं होंगे। कांग्रेस-बीजेपी पर हमला बसपा सुप्रीमो ने कहा कि कांग्रेस, बीजेपी और अन्य जातिवादी पार्टियां अलग-अलग हथकंडे अपनाकर बसपा को नुकसान पहुंचाना चाहती हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि इन पार्टियों को मुंहतोड़ जवाब देकर उत्तर प्रदेश में पांचवीं बार बसपा सरकार बनाई जाए। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य समाज का पूरा ध्यान रखेगी बसपा मायावती ने कहा कि बसपा सरकार में ब्राह्मणों को पूरी भागीदारी दी गई।उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा— “ब्राह्मणों को किसी का चोखा-बाटी नहीं चाहिए, उन्हें सम्मान चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य समाज के हितों का बसपा सरकार में पूरा ध्यान रखा जाएगा। बसपा ऐसी पार्टी है जिसने हमेशा सभी जातियों और धर्मों का सम्मान किया है। कांशीराम को राष्ट्रीय शोक न दिए जाने पर नाराजगी मायावती ने आरोप लगाया कि कांशीराम के निधन पर राष्ट्रीय शोक घोषित नहीं किया गया, जो उनके साथ उपेक्षा थी। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज सहित कई वर्गों के साथ अन्याय हुआ है, जबकि बसपा सरकार के कार्यकाल में दंगे-फसाद नहीं हुए और सभी समाजों का ध्यान रखा गया, जिसमें यादव समाज भी शामिल है। सभी चुनाव अकेले लड़ेगी बसपा आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर मायावती ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि— उन्होंने कहा कि जब भविष्य में अपर कास्ट का भरोसेमंद समर्थन मिलेगा, तभी गठबंधन पर विचार किया जाएगा, लेकिन इसमें अभी समय लगेगा। EVM और SIR को लेकर जताई चिंता मायावती ने ईवीएम में धांधली और बेईमानी की चर्चाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इस व्यवस्था को लेकर सजग रहने की जरूरत है। उन्होंने SIR (Special Intensive Revision) को लेकर भी कई शिकायतें होने की बात कही। शॉर्ट सर्किट से मची अफरा-तफरी, प्रेस कॉन्फ्रेंस रोकी गई मायावती की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शॉर्ट सर्किट हो गया, जिससे कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। सुरक्षा कारणों से प्रेस कॉन्फ्रेंस को तत्काल रोक दिया गया और सुरक्षाकर्मी बसपा सुप्रीमो को बाहर लेकर चले गए। recent visitors 66

बीएसएल-4 बायो-कंटेनमेंट फैसिलिटी लैब का केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने किया शिलान्यास

Union Home Minister Shah laid the foundation stone for the BSL-4 Bio-Containment Facility Lab.  गांधी नगर। पुणे के बाद देश की सबसे बड़ी लैब यानि गुजरात बायोटेक्नॉलजी रिसर्च सेंटर की बीएसएल-4 बायो-कंटेनमेंट फैसिलिटी गांधीनगर में बनेगी। जहां संक्रामक व घातक वासरस पर शोध होगा। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार को इसका गांधी नगर में शिलान्यास किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल और उप-मुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी उपस्थित थे। केन्द्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा कि इस क्षेत्र में काम करने वाले युवाओं ने दिखाया है कि हमारा युवा जॉब सीकर नहीं बल्कि जॉब क्रिएटर है। शाह ने कहा कि पुणे की वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट के बाद यह भारत की दूसरी उच्च स्तरीय लैब होगी। एक विशाल कॉम्प्लेक्स में 362 करोड़ रुपये की लागत से 11 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में देश की जैविक सुरक्षा का एक मजबूत किला बनने जा रहा है। उन्होंने कहा कि हम दुनिया में हो रहे अत्याधुनिक रिसर्च से कई साल तक पिछड़े हुए थे, लेकिन बीएसएल-4 बायो-कंटेनमेंट फैसिलिटी से बायो-टेक्नॉलजी क्षेत्र में काम करने वाले युवाओं को नए मौके मिलेंगे। यह सुविधा वैज्ञानिकों को अत्यंत संक्रामक और घातक वायरस पर एक सुरक्षित वातावरण में शोध करने का प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराएगी। मंत्री शाह ने कहा कि इस बीएसएल लैब्स में पशुओं से होकर मानव तक पहुंचने वाले रोगों का भी अध्ययन की विश्वस्तरीय व्यवस्था होगी। शाह ने कहा कि एक अध्ययन के अनुसार 60 से 70 प्रतिशत बीमारियां पशुओं से होकर इंसान तक पहुंचती हैं, इसलिए भारत मानव और पशु दोनों की सुरक्षा पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि अब हमारे वैज्ञानिकों को खतरनाक वायरस के सैंपल जांचने के लिए विदेश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।  शाह ने कहा कि बीते 11 साल में बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास हुआ है। 2014 में भारत की बायो इकोनॉमी 10 बिलियन डॉलर की थी और 2024 का वित्त वर्ष समाप्त होने पर यह 166 बिलियन डॉलर तक पहुँच चुकी है। उन्होंने कहा कि 10 साल के अंदर 17 गुना विकास हुआ। उन्होंने कहा कि 2014 में बायोटेक क्षेत्र में काम करने वाले स्टार्टअप्स की संख्या 500 से कम थी, जो 2025 में बढ़कर 10 हजार से अधिक हो चुकी है। बायो इंक्यूबेटर्स वर्ष 2014 में 6 थे, जो 2025 में 95 हो चुके हैं। हमारे पास इंक्यूबेशन स्पेस 60 हजार वर्ग फुट था, जो 15 गुना बढ़कर आज 9 लाख वर्ग फुट हो गया है। बाजार में केवल यो उत्पाद थे, अब 800 से ज्यादा प्रोडक्ट्स बाजार में लॉन्च किया जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि 2014 में इस क्षेत्र में भारत के 125 पेटेंट फाइल हुए थे और 2025 में हम 1300 तक पहुंच चुके हैं। प्राइवेट फंडिंग पहले 10 करोड़ रुपए थी, अब इस क्षेत्र में 7 हजार करोड़ का निवेश हो चुका है। शाह ने कहा कि हमने बायोटेक पॉलिसी के तहत 20 हजार करोड़ रुपये के निवेश और 1 लाख रोजगार का लक्ष्य रखा है। recent visitors 72

मध्यप्रदेश में दलित-आदिवासी मुख्यमंत्री बने तो मुझे खुशी होगी: दिग्विजय सिंह

मध्यप्रदेश में दलित-आदिवासी मुख्यमंत्री बने तो मुझे खुशी होगी: दिग्विजय सिंह

I will be happy if a Dalit-tribal becomes the Chief Minister of Madhya Pradesh: Digvijay Singh भोपाल। साल 2002 में दिग्विजय सरकार में लागू किए गए भोपाल डिक्लेरेशन के 25 साल पूरे होने से पहले राजधानी भोपाल में आयोजित भोपाल डिक्लेरेशन-2 की ड्राफ्टिंग बैठक और उसके बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में दलित एजेंडे को लेकर खुली बहस देखने को मिली।एक ओर पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने 2002 के दलित एजेंडे के अधूरा रह जाने के लिए अफसरशाही को जिम्मेदार ठहराया। वहीं दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने दलित-आदिवासी नेतृत्व को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया।प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब दिग्विजय सिंह से पूछा गया कि अगर उनकी सरकार बनती है तो क्या दलित या आदिवासी मुख्यमंत्री बनेगा, तो उन्होंने कहा—कांग्रेस पार्टी ने पहले भी आदिवासी समाज के राजा नरेशचंद्र सिंह और अजीत जोगी को मुख्यमंत्री बनाया है।अगर अनुसूचित जाति या जनजाति का मुख्यमंत्री बनता है तो मुझे खुशी होगी। उन्होंने कहा कि नेतृत्व में सामाजिक प्रतिनिधित्व लोकतंत्र को मजबूत करता है।सज्जन वर्मा बोले- एजेंडा पवित्र था, लेकिन अफसरों ने फेल किया : पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा ने कहा कि 2002 में जब भोपाल डिक्लेरेशन (दलित एजेंडा) लागू हुआ, तब वे दिग्विजय सिंह की कैबिनेट में मंत्री थे।उन्होंने कहा- दलित एजेंडा पवित्र मन से लाया गया था, लेकिन वह अधकचरा रह गया। अधिकारियों, खासकर तहसीलदारों और पटवारियों ने उसे फेल करने में बड़ी भूमिका निभाई।सज्जन वर्मा के मुताबिक, गरीब दलित-आदिवासी परिवार जहां बसे थे, वहीं जमीन देने की शुरूआत की गई थी, लेकिन कई जगह पैसे लेकर पट्टे बनाए गए और आज भी कई परिवारों को मालिकाना हक नहीं मिल पाया। recent visitors 70