अमेरिका में काम करने वाले मजदूरों को अच्छा वेतन मिलता है, खासकर कंस्ट्रक्शन मजदूरों को, जानकर हो जाएंगे हैरान

वाशिंगटन अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश है, जिसकी कुल अर्थव्यवस्था लगभग 28 ट्रिलियन डॉलर की है। यह दुनिया की हर बड़ी कंपनी का घर भी है और यहां की कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री भी काफी विकसित है। अमेरिका में काम करने वाले मजदूरों को अच्छा वेतन मिलता है, खासकर कंस्ट्रक्शन मजदूरों को, जो अपने दिन-प्रतिदिन के काम से अमेरिका के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती प्रदान करते हैं। अगर हम अमेरिका में कंस्ट्रक्शन मजदूर की सैलरी की बात करें तो एक औसत मजदूर को हर महीने लगभग $4000 (लगभग 3 लाख रुपये) तक सैलरी मिलती है। हालांकि, यह आंकड़ा अलग-अलग राज्यों और काम के प्रकार के अनुसार भिन्न हो सकता है। कंस्ट्रक्शन मजदूर के काम की प्रकृति कंस्ट्रक्शन मजदूरों का काम कई प्रकार का होता है। ये वे लोग होते हैं जो घरों, बिल्डिंगों, दुकानों और अन्य संरचनाओं को बनाने का काम करते हैं। अमेरिका में लगभग 10 लाख लोग कंस्ट्रक्शन मजदूरी के तौर पर काम करते हैं। इनमें से कुछ मजदूर भवन निर्माण, सड़क निर्माण, पेंटिंग, और दूसरी असंरचित श्रेणियों में काम करते हैं। कंस्ट्रक्शन मजदूर को प्रति घंटा कितनी सैलरी मिलती है? एक कंस्ट्रक्शन मजदूर को औसतन $23.69 प्रति घंटा की दर से वेतन मिलता है। इसका मतलब यह है कि यदि कोई कंस्ट्रक्शन मजदूर सप्ताह में 40 घंटे काम करता है तो वह एक महीने में लगभग $4000 (लगभग 3 लाख रुपये) कमा सकता है। इसके अलावा, कंस्ट्रक्शन मजदूर का औसतन सलाना वेतन लगभग $49,280 (लगभग 37 लाख रुपये) होता है। यह वेतन अमेरिकी कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री के लिए एक आम आंकड़ा है, लेकिन इसमें कई भिन्नताएं हो सकती हैं जैसे कि व्यक्ति की कौशल स्तर, अनुभव, और काम की कठिनाई के आधार पर। अमेरिका में कंस्ट्रक्शन मजदूर के फायदे अमेरिका में कंस्ट्रक्शन मजदूरों को कई प्रकार के लाभ मिलते हैं, जैसे कि: स्वास्थ्य बीमा: कई कंपनियां अपने कर्मचारियों को स्वास्थ्य बीमा प्रदान करती हैं। पेंशन और रिटायरमेंट फंड: कामकाजी जीवन के अंत में कर्मचारियों के लिए पेंशन और रिटायरमेंट योजनाएं होती हैं। अवकाश लाभ: छुट्टियों और स्वास्थ्य अवकाश का लाभ भी दिया जाता है।   recent visitors 24

65 जमीन मालिकों के चलते रुका बिलासपुर-उरगा राष्ट्रीय राजमार्ग

बिलासपुर केंद्र सरकार के भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत बिलासपुर-उरगा राष्ट्रीय राजमार्ग -130 ए भूमि बटांकन विवाद के कारण अधर में लटका हुआ है। 1,520 करोड़ रुपये की इस परियोजना का काम वर्ष 2022 में शुरू हुआ था और इसे 2025 जून तक पूरा किया जाना है। बटांकन विवाद और प्रशासनिक ढिलाई के चलते अब तक काम ठप है। प्रधानमंत्री कार्यालय इस पर लगातार नजर रखे हुए है। बिलासपुर के ढेका गांव से उरगा तक 70 किलोमीटर लंबी इस सड़क परियोजना का काम ढेका की लगभग आधा किलोमीटर की भूमि पर बटांकन विवाद के चलते रुका हुआ है। कमिश्नर कोर्ट से नहीं आया है फैसला लगभग 65 जमीन मालिकों की भूमि योजना के चलते प्रभावित हो रही है। यही जमीन बटांकन में विभाजन को लेकर असहमति बनी हुई है। कई लोगों ने बटांकन प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होने और अनियमितता के आरोप लगाए हैं। मामला आयुक्त न्यायालय में चल रहा है। कमिश्नर कोर्ट से अंतिम फैसला आने तक काम शुरू नहीं हो सकता। जमीन बटांकन को लेकर चल रहे विवाद की जानकारी लगते ही कलेक्टर अवनीश शरण लगभग दो माह पूर्व ढेका-उरगा नेशनल हाइवे 130 ए परियोजना क्षेत्र का निरीक्षण किया था। उन्होंने एसडीएम को जल्द से जल्द बटांकन विवाद को सुझाने व प्रोजक्ट को तय समय सीमा में पूरा करने निर्देश दिए थे। जून 2025 तक पूरा करना था प्रोजेक्ट का काम बिलासपुर-उरगा एनएच 130 ए परियोजना 2022 में शुरू हुई थी और 2025 जून तक पूरी होने की समय-सीमा है। प्रोजेक्ट बटांकन विवाद व आयुक्त न्याय प्रशासन की सुस्ती के चलते काम अधर में लटका है। प्रशासन ने समय रहते विवाद सुलझाया होता, तो यह सड़क अब तक बनकर तैयार होने की कगार पर होती। इस देरी के कारण न सिर्फ लागत बढ़ेगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास भी प्रभावित होगा। भारतमाला परियोजना के फायदे     बिलासपुर से कोरबा सिर्फ एक घंटा में पहुंच सकेंगे।     बेहतर परिवहन से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।     स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।     पिछड़े क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होगा।   recent visitors 31

आतंकियों को पनाह देने वालों पर गिरी गाज, NIA ने जम्मू में 12 ठिकानों पर मारी रेड

नई दिल्ली राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पाकिस्तान से जुड़े आतंकवादियों की घुसपैठ की घटनाओं पर संज्ञान लेते हुए बड़ा एक्शन लिया है। बीते दिनों सीमा पार से घुसपैठ की घटनाओं में इजाफा होने के बाद NIA ने जम्मू में 12 ठिकानों पर रेड किया है। अधिकारियों ने बताया है कि जिन लोगों के खिलाफ एक्शन लिया गया है उनमें आतंकवादी समूहों को मदद करने वाले ओवरग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) शामिल हैं जो भारत में आने वाले आतंकवादियों को लॉजिस्टिक्स, सुरक्षित ठिकाने और रास्ता मुहैया कराने में मदद करते हैं। इससे पहले NIA ने पिछले साल 24 अक्टूबर को हुए घुसपैठ से संबंधित घटनाओं में इन लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए थे जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय सीमा और LOC के जरिए भारत में लश्कर और जैश से जुड़े सक्रिय आतंकवादियों को मदद पहुंचाई थी। एनआईए के एक अधिकारी के मुताबिक, “जम्मू क्षेत्र के गांवों में रहने वाले ओजीडब्ल्यू और अन्य आतंकी गुटों ने इन घुसपैठियों की मदद की थी। इन्होंने आतंकवादियों को खाना पीना, शरण और पैसे भी दिए थे।” अधिकारी ने बताया कि संदिग्ध हाइब्रिड आतंकवादी और ओजीडब्ल्यू प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों की शाखाओं से जुड़े हुए हैं। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस साल अब तक जम्मू-कश्मीर पर केंद्रित तीन सुरक्षा समीक्षा बैठक कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने सुरक्षा बलों को आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का निर्देश दिया है। recent visitors 26

देश अपने हितों की रक्षा के लिए इनका इस्तेमाल करते हैं, पसंद हो या न हो, टैरिफ वॉर पर जयशंकर की दो टूक

नई दिल्ली विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक व्यापार में बढ़ते शुल्क (टैरिफ) और प्रतिबंधों की प्रवृत्ति को एक सच्चाई बताते हुए कहा कि विभिन्न देश अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि “चाहे हमें यह पसंद हो या न हो, टैरिफ और प्रतिबंध आज एक हकीकत हैं, और देश अपने हितों की रक्षा के लिए इनका इस्तेमाल करते हैं।” उनके इस बयान को हाल के वैश्विक घटनाक्रमों के संदर्भ में देखा जा रहा है, जहां व्यापार और वित्त को रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति बढ़ी है। जयशंकर ने यह टिप्पणी नई दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग के दौरान "कमिसार्स एंड कैपिटलिस्ट्स: पॉलिटिक्स, बिजनेस एंड न्यू वर्ल्ड ऑर्डर" नामक पैनल चर्चा में की। आर्थिक गतिविधियों का बढ़ता सैन्यीकरण जयशंकर ने कहा, "टैरिफ और प्रतिबंध आज की हकीकत हैं, देश इनका उपयोग करते हैं। यदि हम पिछले एक दशक पर नजर डालें, तो हमने देखा है कि किसी भी प्रकार की क्षमता या आर्थिक गतिविधि का बड़े पैमाने पर सैन्यीकरण किया गया है। इसमें वित्तीय प्रवाह, ऊर्जा आपूर्ति और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि व्यापार केवल लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रोजगार और समग्र राष्ट्रीय शक्ति से भी जुड़ा हुआ है। जयशंकर ने कहा, "आप अपने व्यवसाय के लिए लड़ते हैं, क्योंकि यह आपके रोजगार और समग्र राष्ट्रीय शक्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।" अंतरराष्ट्रीय संबंधों में आ रही "कम प्रतिबंधित संस्कृति" जयशंकर ने बताया कि आज अंतरराष्ट्रीय संबंध पहले की तुलना में कम प्रतिबंधित हो गए हैं। उन्होंने कहा, "आज विभिन्न डोमेन के बीच विभाजन की रेखाएं मिट रही हैं। अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भी यह बदलाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। यदि हम एक दशक पहले की स्थिति देखें, तो आज की तुलना में वह ज्यादा संतुलित थी।" अमेरिका-भारत व्यापारिक तनाव पर व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने भारत सहित विभिन्न देशों से आयातित वस्तुओं पर नए टैरिफ लगाने की घोषणा की है। इससे पहले, 13 मार्च को व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने अमेरिका पर विभिन्न देशों द्वारा लगाए गए टैरिफ पर चिंता जताई थी। उन्होंने भारत द्वारा अमेरिकी शराब और कृषि उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ का विशेष रूप से उल्लेख किया। प्रेस वार्ता के दौरान लेविट ने कहा, "मेरे पास विभिन्न देशों द्वारा लगाए गए टैरिफ का एक चार्ट है। अगर आप कनाडा की बात करें तो अमेरिकी पनीर और मक्खन पर लगभग 300% शुल्क है।" उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप निष्पक्ष और संतुलित व्यापार नीति में विश्वास रखते हैं और जवाबी (रेसिप्रोसिटी) के सिद्धांत का पालन करना चाहते हैं। वैश्विक व्यापार में शक्ति संतुलन की नई दिशा जयशंकर के बयान इस बात की ओर संकेत करते हैं कि आज के दौर में व्यापार केवल आर्थिक गतिविधि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भू-राजनीतिक और राष्ट्रीय शक्ति समीकरण का भी अहम हिस्सा बन चुका है। ऐसे में आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। recent visitors 32

सऊदी अरब ने इस टी20 लीग के लिए 500 मिलियन यूएस डॉलर का निवेश करने का फैसला किया, शुरू करना चाहता है मेगा T20 लीग

नई दिल्ली इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल की लोकप्रियता को देखते हुए दुनियाभर में टी20 लीग शुरू हो गई हैं। हालांकि, जो औहदा इस समय आईपीएल का है, उसका कोई तोड़ नहीं है। ऐसे में एक नई सोच के साथ सऊदी टी20 लीग की नींव रखी जा रही है। खुद सऊदी अरब ने इस टी20 लीग के लिए 500 मिलियन यूएस डॉलर का निवेश करने का फैसला किया है। जिस तरह टेनिस में ग्रैंड स्लैम खेले जाते हैं। उसी तरह की ये लीग बनाने की योजना है। फाइनल सऊदी अरब में खेला जाएगा। चार अलग-अलग स्थानों पर मैच आयोजित कराने का प्लान है। हालांकि, इस पर इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड यानी ईसीबी अड़ंगा डाल सकता है। सऊदी अरब की एसआरजे स्पोर्ट्स इन्वेस्टमेंट्स ने इस लीग में निवेश करने का फैसला किया। ये देश के 1 ट्रिलियन डॉलर सॉवरेन वेल्थ फंड (पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड) की सहायक कंपनी है। यह कॉन्सेप्ट नील मैक्सवेल के दिमाग की उपज है, जो एक पूर्व फर्स्ट क्लास क्रिकेटर हैं, जिन्होंने न्यू साउथ वेल्स और विक्टोरिया का प्रतिनिधित्व किया है और ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पैट कमिंस के वर्तमान प्रबंधक हैं। मैक्सवेल ने ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर्स एसोसिएशन और क्रिकेट न्यू साउथ वेल्स के बोर्ड में भी प्रमुख पदों पर कार्य किया है। इस लीग का मुख्य उद्देश्य है कि इससे जो कमाई होगी, वह उन देशों को सपोर्ट करेगी, जो टेस्ट क्रिकेट में पीछे हैं। इस लीग में सबसे बड़ी समस्या खिलाड़ियों की उपलब्धता होगी, क्योंकि खिलाड़ी पहले से ही बिजी शेड्यूल का हिस्सा हैं। इस टूर्नामेंट के लिए शेड्यूल और स्लॉट निकालना सभी के लिए चुनौती भरा होगा। बीसीसीआई अपने खिलाड़ियों को किसी भी ओवरशीज लीग में खेलने की अनुमति नहीं देती है। इसके अलावा इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड यानी ईसीबी ने इस लीग से अपना समर्थन वापस ले लिया है। सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड को ईसीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिचर्ड गॉल्ड ने कहा है कि इंग्लिश क्रिकेट बोर्ड लीग का समर्थन नहीं करेगा। इसका कारण है कि इसके लिए समय नहीं है। उन्होंने कहा, "व्यस्त इंटरनेशनल कैलेंडर, दुनिया भर में स्थापित फ्रेंचाइजी लीगों की मेजबानी और खिलाड़ियों के कार्यभार के बारे में मौजूदा चिंताओं को देखते हुए, इस तरह के विचार की कोई गुंजाइश या मांग नहीं है। यह ऐसी बात नहीं है जिसका हम समर्थन करेंगे।" रिपोर्ट के अनुसार, ईसीबी द हंड्रेड लीग को बचाने के लिए उत्सुक है, जिसने हाल ही में निजी निवेशकों को फ्रेंचाइजी हिस्सेदारी बेची है। बीसीसीआई और सीए भी अपनी-अपनी टी20 लीग को सुरक्षित रखने के लिए उत्सुक होंगे। recent visitors 42

भाषण ने इलाके में सांप्रदायिक तनाव को भड़काया, जिससे हिंसा भड़क उठी, फहीम खान निकला मास्टरमाइंड

नागपुर नागपुर में सोमवार रात हुई हिंसा के बाद स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन शहर के कई संवेदनशील इलाकों में कर्फ्यू जारी है। इस बीच नागपुर पुलिस ने बुधवार को फहीम शमीम खान की पहली फोटो जारी की है। फहीम 17 मार्च को शहर में हुए सांप्रदायिक हिंसा का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। इस हिंसा में कई लोग घायल हो गए थे।फहीम खान एमडीपी का नगर अध्यक्ष है और नागपुर के यशोधरा नगर में संजय बाग कॉलोनी में रहता है। सांप्रदायिक झड़पों के सिलसिले में दर्ज की गई एफआईआर में उसका नाम आधिकारिक तौर पर शामिल किया गया है। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि फहीम खान ने झड़प शुरू होने से कुछ समय पहले कथित तौर पर भड़काऊ भाषण दिया था। पुलिस अधिकारियों ने दावा किया कि उनके भाषण ने इलाके में सांप्रदायिक तनाव को भड़काया, जिससे हिंसा भड़क उठी। गडकरी के खिलाफ लड़ा था चुनाव फहीम खान ने 2024 के लोकसभा चुनाव में नागपुर सीट से अल्पसंख्यक डेमोक्रेटिक पार्टी (MDP) के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। बीजेपी के दिग्गज नेता और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से 6.5 लाख से अधिक वोटों के बड़े अंतर से हार गया था। नागपुर के पुलिस आयुक्त रविंद्र कुमार सिंघल ने बताया कि दोपहर बाद स्थिति की समीक्षा की जाएगी। वहीं, एक अन्य अधिकारी ने बताया कि संवेदनशील इलाकों में दो हजार से अधिक सशस्त्र पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। उन्होंने कहा कि इसी तरह, त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी) और दंगा नियंत्रण पुलिस (आरसीपी) द्वारा पुलिस उपायुक्त रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में गश्त की जा रही है। औरंगजेब की कब्र को लेकर हुई थी झड़प सोमवार रात साढ़े सात बजे के करीब मध्य नागपुर में हिंसा भड़क गई थी और पुलिस पर पथराव किया गया था। अधिकारियों ने बताया कि यह हिंसा इस अफवाह के बाद फैली कि औरंगजेब की कब्र हटाने के लिए एक दक्षिणपंथी संगठन द्वारा किए गए प्रदर्शन के दौरान एक समुदाय के धार्मिक ग्रंथ को जला दिया गया। हिंसा में 34 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। इसके बाद शहर के संवेदनशील इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया, जिससे लोगों और वाहनों की आवाजाही पर रोक लग गई। पुलिस के अनुसार, अब कोतवाली, गणेशपेठ, तहसील, लकडगंज, पाचपावली, शांति नगर, सक्करदरा, नंदनवन, इमामवाडा, यशोधरा नगर और कपिल नगर पुलिस थाना क्षेत्र में आने वाले इलाकों में कर्फ्यू प्रभावी है। पुलिस के द्वारा कहा गया कि कर्फ्यू के दौरान संबंधित इलाकों के पुलिस उपायुक्त सड़कों पर वाहनों की आवाजाही के बारे में निर्णय लेंगे। अधिकारियों के अनुसार, सोमवार रात हुई हिंसा में तीन पुलिस उपायुक्तों समेत 12 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। पथराव और आगजनी के सिलसिले में अब तक करीब 50 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। recent visitors 38

पत्नी की गला घोंटकर हत्या, रातभर हत्या को आत्महत्या दर्शाने की करता रहा कोशिश , पुलिस से बोला- पंखे में फंस गई थी साड़ी

इंदौर लसूड़िया थाना क्षेत्र में पति ने विवाद के बाद पत्नी की गला घोंटकर हत्या कर डाली। रातभर हत्या को आत्महत्या दर्शाने की कोशिश करता रहा। छोटे बच्चों को भी उसने झूठे बयान रटाए। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने बच्चे से अकेले में पूछताछ की, तो टूट गया। पुलिस ने आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया है। चौकीदारी करता था परिवार, झोपड़ी में रहता था टीआई तारेश सोनी के मुताबिक, 46 वर्षीय शीला निवासी सिद्ध विहार कॉलोनी की मौत हुई है। शीला और उसका पति मदन ज्ञानशीला कॉलोनी में चौकीदारी करते है। दोनों झोपड़ी बनाकर दो बच्चों के साथ कॉलोनी में ही रहते हैं। शीला मजदूरी भी करती थी। सोमवार रात रुपयों को लेकर विवाद हो गया। ठेकेदार से रुपए न लेने की बात पर मदन ने शीला के साथ मारपीट कर डाली। गुस्से में उसने शीला का गला घोंट दिया। दम घुटने से शीला की मौत हो गई। मदन रात भर हत्या को आत्महत्या बताने में जुट गया। सबसे पहले वह खुद ऑटो रिक्शा से एक डॉक्टर के पास दिखाने ले गया। मृत बताने पर घर लेकर आया और शव को पलंग पर लिटा दिया। मदन के दो बेटे हैं। एक की उम्र 8 साल और दूसरे की 5 साल है। उसने बच्चों से कहा कि पुलिस पूछताछ करेगी। तुम बता देना कि मम्मी की साड़ी पंखे में अटक गई थी। उजाला होने पर मदन ने कॉलोनी के रहवासियों को बुलाया और कहा कि उसकी पत्नी मर गई। झोपड़ी में पंखा नीचे है। गलती से साड़ी पंखे में अटक गई और दम घुटने से शीला की मौत हो गई।   recent visitors 33