गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया – अभी तक 5 लाख 17 हजार 632 किसानों ने पंजीयन कराया

भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि अभी तक 5 लाख 17 हजार 632 किसानों ने पंजीयन कराया है। किसान 31 मार्च तक पंजीयन करा सकते हैं। मंत्री श्री राजपूत ने किसानों से आग्रह किया है कि गेहूँ की बिक्री के लिए समय-सीमा में पंजीयन जरूर करायें। उन्होंने बताया है कि गेहूँ की खरीदी उपार्जन केन्द्रों में 15 मार्च से 5 मई तक होगी। गेहूँ की खरीदी 2600 रूपये प्रति क्विंटल की दर से की जायेगी। इसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रूपये है और 175 रूपये प्रति क्विंटल राज्य सरकार द्वारा बोनस दिया जा रहा है। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूँ की बिक्री के लिए जिला बुरहानपुर में 31, खरगौन में 1616, बड़वानी में 99, अलीराजपुर में 46, खंडवा में 6079, धार में 15,940, झाबुआ में 2850, इंदौर में 27,075, मंदसौर 11,275, नीमच 3768, आगर-मालवा में 14,469, देवास में 26,904, रतलाम में 12,908, शाजापुर में 35,346, उज्जैन में 56,805, अशोकनगर में 1276, शिवपुरी में 1670, ग्वालियर में 1612, दतिया में 2288, गुना में 2199, भिंड में 2266, श्योपुर में 3260, मुरैना में 1025, जबलपुर 1471, बालाघाट 112, कटनी में 2093, पांढुर्णा 19, डिंडौरी में 658, छिंदवाड़ा में 3054, सिवनी में 8530, नरसिंहपुर में 6286, मंडला में 4598, हरदा में 1610, बैतूल में 3413, नर्मदापुरम में 27,222, विदिशा में 30,556, रायसेन में 31,197, राजगढ़ में 31,171, भोपाल में 17,182, सीहोर में 59,141, सतना में 2811, रीवा में 1894, सिंगरौली में 369, मऊगंज 94, मैहर में 924, सीधी में 1382, अनूपपुर में 103, उमरिया में 1447, शहडोल में 2246, पन्ना में 2416, निवाड़ी में 431, दमोह में 7636, टीकमगढ़ में 2705, छतरपुर में 3676 और सागर में 20,378 किसानों ने पंजीयन कराया है।   recent visitors 64

बिक्रम सिंह मजीठिया को 17 मार्च को एसआईटी के समक्ष पेश होने का आदेश दिया

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पूर्व मंत्री और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को उनके खिलाफ ड्रग्स मामले की जांच कर रही एसआईटी के सामने पेश होने का निर्देश दिया। जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने मजीठिया को 17 मार्च को सुबह करीब 11 बजे एसआईटी के समक्ष पेश होने का आदेश दिया है। जांच में सहयोग करना जमानत की अनिवार्य शर्त यह आदेश पंजाब सरकार द्वारा यह कहे जाने के बाद आया कि मजीठिया जांच में सहयोग करने से इन्कार कर रहे हैं। मजीठिया ने कहा कि उन्हें राजनीतिक कारणों से परेशान किया जा रहा है और उन्होंने कोर्ट से पूछताछ के लिए तारीखें तय करने को कहा। पंजाब के महाधिवक्ता गुरमिंदर सिंह ने कहा कि जांच में सहयोग करना जमानत के लिए एक अनिवार्य शर्त है और मजीठिया को इसका पालन करना होगा। पंजाब सरकार की याचिका पर हुई सुनवाई सुप्रीम कोर्ट पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा मजीठिया को 10 अगस्त, 2022 को जमानत दिए जाने के आदेश के खिलाफ पंजाब सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। हाई कोर्ट ने यह मानने के लिए उचित आधार का उल्लेख किया कि वह दोषी नहीं है, लेकिन अपनी टिप्पणी को केवल जमानत याचिका के निर्णय तक सीमित रखा। 5 महीने से अधिक समय तक जेल में रहे मजीठिया सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ट्रायल कोर्ट को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ना चाहिए। इस मामले में मजीठिया पांच महीने से अधिक समय तक पटियाला जेल में रहने के बाद बाहर आए। वह शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के रिश्तेदार और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल के भाई हैं। मजीठिया पर राज्य में ड्रग रैकेट की जांच कर रहे एंटी ड्रग स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की 2018 की रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज किया गया था। recent visitors 47

एम्स भोपाल में जल्द ही मिलेगा सटीक इलाज, एआई से होगी कैंसर स्क्रीनिंग

भोपाल एम्स भोपाल में जल्द ही एआइ (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित कैंसर स्क्रीनिंग मशीन स्थापित की जाएगी। यह मशीन करीब 40 लाख रुपये की लागत से खरीदी जा रही है, जिससे कैंसर की पहचान अधिक सटीक और त्वरित होगी। एम्स प्रबंधन के मुताबिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक न केवल कैंसर की शुरुआती पहचान में मदद करेगी, बल्कि यह कीमोथेरेपी के दुष्प्रभावों को कम करने में भी सहायक होगी। पारंपरिक तरीकों की तुलना में एआइ आधारित मशीन तेजी से कैंसर की पहचान कर सकेगी, जिससे मरीजों का इलाज जल्द शुरू किया जा सकेगा। इससे दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले मरीजों को भी लाभ मिलेगा क्योंकि इस तकनीक के जरिए कैंसर की स्क्रीनिंग को अधिक सुलभ बनाया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कैंसर के मामलों को समय रहते रोका जा सकेगा और मरीजों को लंबी एवं स्वस्थ जिंदगी देने में मदद मिलेगी। पहले चरण में स्क्रीनिंग पर होगा फोकस इस तकनीक को प्रारंभिक चरण में कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए उपयोग किया जाएगा। एआइ तकनीक मशीन लर्निंग एल्गोरिदम का उपयोग कर आनुवांशिकी और जीवनशैली के आधार पर कैंसर के जोखिम का अनुमान भी लगा सकती है। अब ये मशीनें आएंगी     आप्टास्कैन अल्ट्रा – बड़ी प्रयोगशालाओं के लिए उपयुक्त है, जो एक बार में 80 से 480 स्लाइड स्कैन कर सकती है।     आप्टास्कैन लाइट – इसे छोटी प्रयोगशालाओं के लिए डिजाइन किया है, जिसकी क्षमता 15 स्लाइड स्कैन तक है। महंगे सीटी स्कैन और एमआरआई की जरूरत कम होगी कम     अंकोलाजी के प्रो. जगत आर. कंवर ने बताया कि एआई के उपयोग से कैंसर का इलाज अधिक व्यक्तिगत और प्रभावी होगा।     इस तकनीक से महंगे सीटी स्कैन और एमआरआई की जरूरत कम हो जाएगी, जिससे मरीजों को कम लागत में अधिक सटीक इलाज मिल सकेगा।     यह तकनीक रोगियों के लिए अधिक सुलभ, किफायती और प्रभावी होगी, जिससे मरीजों को बेहतर उपचार और तेज रिकवरी का लाभ मिलेगा।   recent visitors 46

प्रदेश सरकार ने रिजर्व बैंक के मुंबई कार्यालय के माध्यम से बाजार से फिर छह हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया

भोपाल प्रदेश सरकार ने 15 दिनों में दूसरी बार छह हजार करोड़ का कर्ज लिया है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआइएस) से पहले राज्य सरकार ने 18 फरवरी को ही छह हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। अब मंगलवार को रिजर्व बैंक के मुंबई कार्यालय के माध्यम से बाजार से फिर छह हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया है। इस वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार कुल 41 हजार करोड़ रुपये का कर्ज बाजार से ले चुकी है। नया छह हजार करोड़ रुपये का कर्ज मिलाकर यह राशि 47 हजार करोड़ रुपये हो जाएगी। राज्य का बजट 3.65 लाख करोड़ रुपये है लेकिन राज्य पर कर्ज का कुल भार इस समय चार लाख 22 हजार करोड़ रुपये पहुंच गया है। नया कर्ज उठाने के लिए राज्य सरकार ने अपनी आर्थिक स्थिति अच्छी बताई है। मुफ्तखोरी की योजनाओं को पूरा करने में जा रहा कर्ज का एक बड़ा हिस्सा वर्तमान वित्त वर्ष में राज्य सरकार अगस्त 2024 से अमूमन हर माह नियमित रूप से बाजार से कर्ज उठा रही है। वित्त विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आर्थिक गतिविधियों और विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए कर्ज लिया जा रहा है। यह राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम में निर्धारित सीमा के भीतर है। सरकार राज्य सकल घरेलू उत्पाद के अनुपात में तीन प्रतिशत तक कर्ज ले सकती है। आधा प्रतिशत और कर्ज बिजली सहित अन्य क्षेत्रों में अधोसंरचना सुधार के काम करने पर लिया जा सकता है। राज्य सरकार द्वारा लिए जाने वाले कर्ज का एक बड़ा हिस्सा मुफ्त की योजनाओं को पूरा करने में ही चला जाता है। वर्ष 2024-25 में सरकार 65 हजार करोड़ रुपये तक कर्ज ले सकती है। वित्तीय वर्ष 24-25 में लिया कर्ज वर्ष- कर्ज (राशि करोड़ में) 06 अगस्त 2024- 5,000 27 अगस्त 2024- 5,000 24 सितंबर 2024- 5,000 08 अक्टूबर 2024-5,000 26 नवंबर 2024 – 5,000 24 दिसंबर 2024 -5,000 31 दिसंबर 2024 – 5,000 18 फरवरी 2025 -6,0000 4 मार्च 2025- 6,000 कुल – 47 हजार करोड़ रुपये recent visitors 63

महिला दिवस से पहले महिलाओं के खाते में सीधे तीन हजार रुपये डाले जाएंगे: महाराष्ट्र सरकार

मुंबई 8 मार्च विश्व महिला दिवस से पहले महिलाओं को सरकार बड़ा तोहफा देने जा रही हैं. महाराष्ट्र सरकार की तरफ से शुरू की गई लाड़की बहिन योजना की दो महीनों की किस्त एक साथ महिलाओं के खाते में डाली जाएगी. इस योजना के तहत महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये दिए जाते हैं, यानी महिला दिवस से पहले महिलाओं के खाते में सीधे तीन हजार रुपये डाले जाएंगे.   महाराष्ट्र सरकार की तरफ से बजट सत्र के दौरान एक साथ फरवरी और मार्च की किस्त जारी करने का ऐलान किया गया. महाराष्ट्र सरकार में मंत्री अदिती तटकरे ने बताया है कि लाडकी बहिन योजना की दो महीने की किस्त महिला दिवस के मौके पर जारी की जाएगी, जो उनके लिए एक बड़े तोहफे की तरह होगा. महाराष्ट्र के अलावा झारखंड में मंईयां सम्मान योजना की किस्त भी इसी दिन जारी हो सकती है. वहीं दिल्ली में बीजेपी सरकार ने ऐलान किया है कि 8 मार्च से महिला समृद्धि योजना की शुरुआत होगी, जिसके तहत दिल्ली की महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये मिलेंगे. इसके अलावा छत्तीसगढ़ में भी महतारी वंदन योजना की राशि महिला दिवस के अवसर पर जारी की जाएगी. बता दें कि महाराष्ट्र सरकार की महत्वकाक्षी योजना लाड़की बहिन योजना से नौ लाख महिलाएं बाहर हो गई हैं. योजना के तहत कई ऐसे आवेदन भी पाए गए हैं, जो फर्जी हैं. ऐसे में कई महिलाओं के नाम भी काटे गए हैं. अनियमितता की जांच के दौरान यह सामने आया था कि कुछ लोगों के नाम पर कई खाते थे. इसके अलावा कुछ पुरुष भी इस योजना का लाभ ले रहे थे. अब उनके नाम योजना से हटा दिए गए हैं. वहीं जिन महिलाओं ने फर्जी तरीके से पैसे लिए हैं उनसे वसूली की तैयारी भी की जा रही है. recent visitors 39

दिसंबर 2024 तक, 27 मिलियन महिलाएं अपने क्रेडिट की निगरानी कर रही , पिछले वर्ष की तुलना में 42 प्रतिशत की वृद्धि

नईदिल्ली नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम द्वारा जारी की गई रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत में अधिक महिलाएं ऋण लेना चाहती हैं और सक्रिय रूप से वे अपने क्रेडिट स्कोर की निगरानी कर रही हैं। दिसंबर 2024 तक, 27 मिलियन महिलाएं अपने क्रेडिट की निगरानी कर रही थीं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 42 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है और ये बढ़ती वित्तीय जागरूकता का संकेत देता है। “उधारकर्ताओं से निर्माणकर्ताओं तक: भारत की वित्तीय विकास की कहानी में महिलाओं की भूमिका” नामक शीर्षक से इस रिपोर्ट को ट्रांसयूनियन सीआईबीआईएल, नीति आयोग के महिला उद्यमिता मंच (डब्ल्यूईपी) और माइक्रोसेव कंसल्टिंग (एमएससी) द्वारा प्रकाशित किया गया है। लॉन्च के दौरान, नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने महिला उद्यमियों को सशक्त बनाने में वित्त तक पहुंच की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “सरकार मानती है कि वित्त तक पहुंच महिला उद्यमिता के लिए एक बुनियादी प्रवर्तक है। महिला उद्यमिता मंच (डब्ल्यूईपी) का एक समावेशी इको-सिस्टम बनाने की दिशा में काम करना जारी है, जो वित्तीय साक्षरता, ऋण तक पहुंच, परामर्श और बाजार लिंकेज को बढ़ावा देता है। हालांकि, न्यायसंगत वित्तीय पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है। महिलाओं की जरूरतों के अनुरूप समावेशी उत्पादों को डिज़ाइन करने में वित्तीय संस्थानों की भूमिका, साथ ही संरचनात्मक बाधाओं को संबोधित करने वाली नीतिगत पहलें, इस गति को बढ़ाने में सहायक होंगी। सुब्रह्मण्यम ने डब्ल्यूईपी के तत्वावधान में इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, फाइनेंसिंग वूमेन कोलैबोरेटिव (एफडब्ल्यूसी) का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि वित्तीय क्षेत्र के और अधिक हितधारक एफडब्ल्यूसी से जुड़ें और इस मिशन में अपना योगदान दें। नीति आयोग के अनुसार 2019 से, व्यवसाय ऋण उत्पत्ति में महिलाओं की हिस्सेदारी में 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और गोल्ड लोन में उनकी हिस्सेदारी 6 प्रतिशत बढ़ी है, दिसंबर 2024 तक व्यवसाय उधारकर्ताओं में महिलाओं की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत थी। हालांकि, ऋण से बचने, खराब बैंकिंग अनुभव, ऋण तत्परता में बाधाएं और कलैटरल् और गारंटर के साथ समस्याएं जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। बढ़ती ऋण जागरूकता और बेहतर स्कोर के साथ, वित्तीय संस्थानों के पास महिलाओं की अनूठी आवश्यकताओं के अनुरूप जैंडर-स्मार्ट वित्तीय उत्पाद पेश करने का अवसर है। रिपोर्ट उजागर करती है कि कुल स्व-निगरानी आधार में महिलाओं की हिस्सेदारी दिसंबर 2024 में बढ़कर 19.43 प्रतिशत हो गई, जो 2023 में 17.89 प्रतिशत थी। गैर-मेट्रो क्षेत्रों की महिलाएं, मेट्रो क्षेत्रों की तुलना में, अपने ऋण की सक्रिय रूप से स्वयं निगरानी कर रही हैं, गैर-मेट्रो क्षेत्रों में 48 प्रतिशत और मेट्रो क्षेत्रों में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 2024 में, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना में सभी स्व-निगरानी महिलाओं का 49 प्रतिशत हिस्सा होगा, जिसमें दक्षिणी क्षेत्र 10.2 मिलियन के साथ सबसे आगे है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित उत्तरी और मध्य राज्यों में पिछले पांच वर्षों में सक्रिय महिला उधारकर्ताओं में सबसे अधिक चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) देखी गई। नीति आयोग की प्रमुख आर्थिक सलाहकार और डब्ल्यूईपी की मिशन निदेशक अन्ना रॉय ने कहा, “महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करना भारत के कार्यबल में प्रवेश करने वाली महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर सुनिश्चित करने का एक तरीका है। यह समान आर्थिक विकास को गति देने के लिए एक व्यवहार्य रणनीति के रूप में भी काम करता है। महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने से 150 से 170 मिलियन लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं और साथ ही इससे श्रम बल में महिलाओं की अधिक भागीदारी को बढ़ावा मिल सकता है। recent visitors 49

उत्तर प्रदेश में बड़े स्तर पर धर्मांतरण की कोशिशें चल रही, सुरक्षा एजेंसियों ने कड़ी की निगरानी, सामने आया पूरा मामला

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में बड़े स्तर पर धर्मांतरण की कोशिशें चल रही हैं। इसको लेकर कई गैंग मिशन मोड में काम कर रहे हैं। इस बीच धर्मांतरण कराने वालों का रेट कार्ड भी सामने आया है। मिली जानकारी के मुताबिक, पूरे परिवार का धर्मांतरण कराने वाले एजेंट को 20 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था की गई है। वहीं, युवती का धर्म बदल कर शादी कराने की स्थिति में 15 हजर रुपये अतिरिक्त बोनस का प्रावधान किया गया है। मिशनरियों के धर्मांतरण के इस खेल में चर्चित स्कूल से लेकर प्रतिष्ठित संस्थान तक शामिल हैं। ये हवाला एजेंट की तर्ज पर मिशनरियों को बड़ी मात्रा में धनराशि उपलब्ध करा रहे हैं। पैसे की कमी नहीं होने से ग्रामीण स्तर तक धर्मांतरण गैंग का जाल फैल गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, धर्मांतरण एजेंट प्रचारक के तौर पर अपनी गतिविधियों को अंजाम देने में जुटे हुए हैं। ऐसे काम करता है गैंग धर्मांतरण गैंग के प्रचारक बनकर गांव-गांव तैनात किए गए हैं। ये जरूरतमंदों को टारगेट करते हैं। उनके निशाने पर पैसे की तंगी से जूझ रहे और बीमार लोग होते हैं। ऐसे लोगों को प्रार्थना सभाओं में लाने का जिम्मा प्रचारकों का होता है। मिशनरियों की ओर से हर वर्ग को ध्यान में रखते हुए प्रचारकों की नियुक्ति की गई है। ऐसे में प्रचारक अपने वर्ग के लोगों को समझाने और धर्म परिवर्तन के लिए राजी करने में कामयाब होते हैं। इस पूरे अभियान को प्रचारक, पास्टर और पदारी के माध्यम चलाया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि धर्मांतरण गैंग को कुछ चर्चों से भी पैसे मिलने की जानकारी सामने आई है। आईबी के एक पूर्व अधिकारी का दावा है कि जोशुआ प्रोजेक्ट की वेबसाइट धर्मांतरण के पूरे जाल को समझा जा सकता है। स्टडी के नाम पर धर्मांतरण के बढ़ावा दिया जा रहा है। श्रावस्ती में आया मामला श्रावस्ती में धर्मांतरण के प्रयास का मामला सामने आया है। इसमें पंजाब मॉडल की बात सामने आ रही है। इकौना इलाके में रविवार को धर्मांतरण मामले में हरीश सिंह का नाम आया। उसने पांच साल पहले ही पंजाब में धर्म परिवर्तन कर लिया था। गांव लौटने के बाद झोपड़ी में प्रार्थना सभा आयोजित करने लगा। सुरक्षा एजेंसियों की दबिश के बाद वह गायब हो गया। एसपी घनश्याम चौरसिया ने इस मामले में सीओ के नेतृत्व में टीम का गठन किया है। नेपाल सीमा से सटे इलाकों में इस प्रकार के गिरोह के सक्रिय होने की बात सामने आई है। देवीपाटन मंडल के श्रावस्ती, बहराइच, बलरामपुर और गोंडा जैसे संवेदनशील जिलों में पुलिस को कंवर्जन का मामला आते ही कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में आईजी अमित पाठक का कहना है कि चारों जिलों के एसपी को इस प्रकार के मामलों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। जिला स्तर पर सक्रिय है टीमें धर्मांतरण के लिए जिला स्तर पर गैंगों को सक्रिय किया गया है। मिशनरियां अब मिशन मुस्लिम चला रही हैं। इसके लिए सबसे अधिक 443 सक्रिय टीम के संगम नगरी प्रयागराज में काम करने की बात सामने आई है। इसके अलावा महराजगंज में 398, बहराइच में 378, श्रावस्ती में 320, बलरामपुर में 330 और गोंडा में 340 टीमों के सक्रिय होने की जानकारी सामने आई है। धर्मांतरण का नेटवर्क फैलाने में प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या में 333 टमों के जुटे होने की जानकारी सामने आई है। वहीं, अंबेडकरनगर में 347, सीतापुर में 326, सिद्धार्थनगर में 345, अमेठी में 317, रायबरेली में 323 और पीलीभीत में 346 सक्रिय टीमें अभियान में जुटी हैं। यह सब तब है, जब यूपी में धर्मांतरण के मामलों में कठोर कार्रवाई का नियम लागू है।   recent visitors 74