उप्र में दो ट्रेनों को डिरेल करने की साजिश हुई नाकाम, लोको पायलट की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा

हरदोई उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में अराजकतत्वों द्वारा दो ट्रेनों को डिरेल करने की बड़ी साजिश को लोको पायलट की सजगता से नाकाम कर दिया गया है. यह पूरी घटना दलेलनगर और उमरताली स्टेशन के बीच घटी है. वहीं घटना की सूचना मिलते ही एसपी ने मौके पर पहुंच कर घटनास्थल का निरीक्षण किया और आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए हैं. दोनों ट्रेनों को डिरेल करने की यह घटना दलेलनगर और उमरताली स्टेशन के बीच की है. यहाx राजधानी एक्सप्रेस (20504) जब लखनऊ की ओर जा रही थी तभी अराजकतत्वों ने डाउन ट्रैक पर अर्थिंग वायर से लकड़ी का गुटखा बांधकर ट्रेन को पटरी से उतारने की कोशिश की लेकिन लोको पायलट ने समय रहते खतरे को देखते हुए इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक दिया और ट्रैक से अवरोध हटाने के बाद रेल अधिकारियों को सूचना दी. इसके बाद जब राजधानी एक्सप्रेस सकुशल गुजर गई तो पीछे आ रही काठगोदाम एक्सप्रेस (15044) को भी डिरेल करने की कोशिश की गई है. हालांकि, इस बार भी लोको पायलट की सूझबूझ और तत्परता से हादसा टल गया. घटना की सूचना मिलते ही जीआरपी,आरपीएफ और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई है. फिलहाल पूरे मामले की छानबीन जारी है. इस मामले में पुलिस ने प्रेस नोट जारी करते हुए बताया है कि कछौना थाना क्षेत्र के दलेलनगर और उमर ताली रेलवे स्टेशन के बीच ट्रेन की पटरी पर लकड़ी का टुकड़ा पड़े होने की सूचना प्राप्त हुई थी सूचना पर जीआरपी वह स्थानीय पुलिस द्वारा घटनास्थल पर पहुंचकर निरीक्षण किया गया. जांच करने के दौरान लकड़ी का एक टुकड़ा लोहे की पट्टी से बना हुआ था प्रकरण के संबंध में रेलवे विभाग स्थानिक पुलिस द्वारा घटना के समस्त बिंदुओं पर गहनता से जांच की जा रही है साथी ही पुलिस अधीक्षक नीरज कुमार जादौन के द्वारा भी घटनास्थल का निरीक्षण किया गया और आसपास के रहने वाले व्यक्तियों से घटना के संबंध में जानकारी ली गई एवं संबंधित को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए हैं.   recent visitors 58

ट्रेन के टॉयलेट में आधा घंटे तक फंसी रही महिला, रेलवे चुकाएगा 40 हजार का जुर्माना

भोपाल  ट्रेन में यात्रा के दौरान हुई असुविधा के लिए यात्री की शिकायत की अनदेखी रेलवे को भारी पड़ गई। इस पर भोपाल के जिला उपभोक्ता आयोग ने रेलवे को आदेश दिया है कि वह सेवा में कमी के लिए उपभोक्ता को 40 हजार रुपये का हर्जाना अदा करे। उपभोक्ता ने आयोग में परिवाद कर शिकायत की थी कि यात्रा के दौरान ट्रेन के दरवाजों में तकनीकी खराबी की वजह से उसकी पत्नी करीब आधे घंटे तक टॉयलेट में बंद रह गई थीं। कन्याकुमारी से भोपाल आ रहे थे राजधानी के रविदास नगर के उमेश पांडेय ने जिला उपभोक्ता आयोग में भारतीय रेल प्रबंधक के खिलाफ परिवाद दायर किया था। उनका कहना था कि 20 अप्रैल 2022 को वह त्रिकुल एक्सप्रेस से थर्ड एसी में कन्याकुमारी से भोपाल के लिए परिवार के साथ रवाना हुए थे। इस दौरान उनकी बर्थ फटी हुई थी, टॉयलेट की सीट टूटी थी। उनकी पत्नी टॉयलेट गई तो गेट अंदर से लॉक हो गया। उनके पास मोबाइल भी नहीं था। इस कारण वह करीब आधे घंटे तक उसमें बंद रहीं। ऑनलाइन शिकायत की लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ सहयात्रियों की मदद से उन्हें किसी तरह बाहर निकाला जा सका। उन्होंने रेलवे में ऑनलाइन शिकायत की लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। उपभोक्ता आयोग को उन्होंने कोच के फोटोग्राफ, अपने टिकट की छायाप्रति, रेलवे को की गई शिकायत और वहां से आए जवाब की प्रति भी सौंपी थी। रेलवे ने कस्टमर मानने से ही किया इनकार सुनवाई के दौरान रेलवे ने पहले तो यात्री को कस्टमर मानने से इन्कार कर दिया। यह भी तर्क दिया कि टिकट में यात्रा का अधिकार मिलता है, सुविधाओं का नहीं। टॉयलेट की सुविधा निश्शुल्क होती है, जिस कारण इस मामले को निरस्त किया जाए। जवाब में रेलवे ने यह भी कहा कि शिकायत के बाद मदुरई स्टेशन पर मैकेनिक ने टॉयलेट सीट को सुधारने का प्रयास किया, लेकिन उसे निर्धारित समय पर ठीक नहीं किया जा सका और ट्रेन को अधिक देर तक नहीं रोका जा सकता था। इस तर्क को आयोग ने खारिज कर दिया और रेलवे पर सेवा में कमी का हर्जाना लगाया। recent visitors 43

09039/09040 उधना-गया-उधना साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन

09039/09040 उधना-गया-उधना साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन   भोपाल मंडल  के इटारसी स्टेशन पर ठहराव भोपाल    रेल प्रशासन द्वारा समर के दौरान अतिरिक्त यात्री यातायात को क्लियर करने और उनकी यात्रा मांग को पूरा करने के उद्देश्य से 09039/09040 उधना-गया-उधना साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन विशेष किराये पर 06-06 ट्रिप चलाने का निर्णय लिया गया है। इस गाड़ी में शयनयान श्रेणी एवं सामान्य श्रेणी के कोच रहेंगे। यह स्पेशल ट्रेन पश्चिम मध्य रेल के इटारसी, जबलपुर, कटनी एवं सतना स्टेशनों से होकर गन्तव्य को जाएगी। उधना-गया-उधना साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन (12 सेवाएं)  गाड़ी संख्या 09039 उधना-गया साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन दिनांक 23 मई से 27 जून 2025 तक प्रत्येक शुक्रवार को उधना स्टेशन से रात 22:00 बजे प्रस्थान कर, अगले दिन इटारसी सुबह 08:30 बजे, जबलपुर 11:50 बजे, कटनी दोपहर 13:20 बजे, सतना 14:30 बजे पहुँचकर, अन्य स्टेशनों से होते हुए तीसरे दिन रविवार 03:15 बजे गया स्टेशन पहुंचेगी। (06 ट्रिप)   गाड़ी संख्या 09040 गया-उधना साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन दिनांक 25 मई से 29 जून 2025 तक प्रत्येक रविवार को गया स्टेशन से सुबह 07:10 बजे प्रस्थान कर, सतना सायं 18:40 बजे, कटनी रात 20:00 बजे, अगले दिन जबलपुर 21:50 बजे, पहुँचकर अगले दिन इटारसी मध्यरात्रि 01:20 बजे,अन्य स्टेशनों से होते हुए सोमवार दोपहर 14:00 बजे उधना स्टेशन पहुंचेगी। (06 ट्रिप) ठहराव: चलथान, बारडोली, नंदुरबार, अमलनेर, जलगांव, भुसावल, खंडवा, इटारसी, जबलपुर, कटनी, सतना, मानिकपुर, प्रयागराज छिवकी, मिर्ज़ापुर, पं. दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, सासाराम और डेहरी ऑन सोन। रेल यात्रियों से अनुरोध है कि समर स्पेशल ट्रेन की विस्तृत जानकारी स्टेशन, रेल मदद 139 अथवा ऑनलाइन वेबसाइड से प्राप्त कर सकते हैं। recent visitors 36

दिव्यांग यात्रियों के लिए : किराये में 25% से 75% तक की विशेष छूट

दिव्यांग यात्रियों के लिए : किराये में 25% से 75% तक की विशेष छूट भोपाल मंडल द्वारा अब तक जारी किए गए 1315 दिव्यांग रियायत कार्ड, जानिए कैसे उठाएं लाभ भोपाल भारतीय रेलवे, विशेष रूप से भोपाल मंडल, दिव्यांग यात्रियों को सुलभ, सुरक्षित और किफायती यात्रा का अनुभव प्रदान करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ कटारिया के नेतृत्व में नवंबर 2023 से अब तक कुल 1315 दिव्यांग रियायत कार्ड जारी किए जा चुके हैं। यह पहल दिव्यांगजनों को मुख्यधारा से जोड़ने तथा उन्हें रेल यात्रा में अधिक सुविधा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। दिव्यांग रियायत प्रमाणपत्र के प्रारूप में बदलाव : अब दृष्टिहीन यात्रियों के लिए अलग प्रारूप भोपाल मंडल दिव्यांग सेल की प्रभारी डॉ. ज्योति तिवारी के अनुसार, रेलवे द्वारा दिव्यांग यात्रियों को 25% से लेकर 75% तक किराये में छूट प्रदान की जाती है। यह छूट विशेष रूप से दृष्टिहीन, मानसिक रूप से अस्वस्थ, श्रवण एवं वाणी बाधित तथा ऑर्थोपेडिकली हैंडिकैप्ड यात्रियों के लिए लागू है। पूर्व में इन चारों श्रेणियों के लिए रेलवे रियायत प्रमाणपत्र हेतु एक ही प्रारूप (फॉर्म) का उपयोग होता था। परन्तु वर्ष 2025 से रेलवे ने दृष्टिहीन यात्रियों के लिए अलग प्रारूप (एनेक्सचर-1) तथा मानसिक रूप से अस्वस्थ, श्रवण एवं वाणी बाधित तथा ऑर्थोपेडिकली हैंडिकैप्ड यात्रियों के लिए अलग प्रारूप (एनेक्सचर-2) जारी किया है। विशेष रूप से अब दृष्टिहीनता की 90% या उससे अधिक स्तर पर भी रियायत का प्रावधान किया गया है, जो दृष्टिबाधित यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत है। महत्वपूर्ण बात यह भी है कि यदि दिव्यांग यात्री के साथ एक सहयोगी (एस्कॉर्ट) यात्रा करता है, तो उसे भी समान रियायत मिलती है। जारी किए गए रियायत कार्ड की जानकारी रेलवे के सॉफ़्टवेयर में अपडेट कर दी जाती है, जिससे टिकट बुकिंग के समय कार्ड की फोटो कॉपी प्रस्तुत कर आसानी से छूट का लाभ लिया जा सकता है। यह सुविधा ई-टिकट बुकिंग पर भी उपलब्ध है। दिव्यांग रियायत कार्ड बनवाने की प्रक्रिया अब दिव्यांगजन आसानी से ऑनलाइन माध्यम से रियायत कार्ड बनवा सकते हैं। इसके लिए आवश्यक दस्तावेज हैं: * जिला चिकित्सा अस्पताल द्वारा जारी दिव्यांग प्रमाणपत्र (डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट) * रेलवे रियायत प्रमाण पत्र जो कि पश्चिम मध्य रेल के अंतर्गत आने वाले सरकारी अस्पताल से जारी किया गया हो, जिसमें यह उल्लेख हो कि यात्री बिना सहायक (एस्कॉर्ट) के यात्रा करने में असमर्थ है। (इसका प्रारूप भारतीय रेलवे की वेबसाइट https://divyangjanid.indianrail.gov.in से डाउनलोड किया जा सकता है) * आधार कार्ड एवं जन्म प्रमाणपत्र * पासपोर्ट साइज फोटो इन दस्तावेजों को भारतीय रेलवे की वेबसाइट पर अपलोड करना होता है। सत्यापन के बाद कार्ड जारी कर दिया जाता है और आवेदक को इसकी जानकारी SMS के माध्यम से दी जाती है। आवेदन करते समय सभी जानकारी सही-सही भरना अत्यंत आवश्यक है। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ कटारिया ने बताया, "हमारा प्रयास है कि दिव्यांगजन यात्रियों को सहज, पारदर्शी और सरल प्रक्रिया के माध्यम से रेलवे की सुविधाओं का लाभ मिले। रियायत कार्ड बनने की प्रक्रिया को सरल बनाकर हम उनकी यात्रा को अधिक सम्मानजनक और आत्मनिर्भर बना रहे हैं। हमारा उद्देश्य है कि प्रत्येक दिव्यांगजन स्वयं को समाज की मुख्यधारा से जुड़ा हुआ महसूस करे।" दिव्यांग रियायत कार्ड से संबंधित जानकारी या सहायता के लिए यात्री भोपाल मंडल यात्री हेल्पलाइन नंबर 9630951262 पर संपर्क कर सकते हैं। भोपाल मंडल का यह प्रयास भविष्य में और भी अधिक दिव्यांगजनों तक पहुँच बनाने के लिए जारी रहेगा, जिससे "सबका साथ, सबका विकास" की भावना सशक्त हो। recent visitors 48

04817 जोधपुर–तिरुपति एक तरफा विशेष ट्रेन (01 ट्रिप)

04817 जोधपुर–तिरुपति एक तरफा विशेष ट्रेन (01 ट्रिप) भोपाल मंडल के भोपाल एवं इटारसी स्टेशनों से होकर गुजरेगी भोपाल गर्मी के मौसम में यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को ध्यान में रखते हुए रेल प्रशासन द्वारा एक तरफा विशेष ट्रेन का संचालन किया जा रहा है। इसी क्रम में, गाड़ी संख्या 04817 जोधपुर – तिरुपति एक तरफा विशेष ट्रेन (01 ट्रिप) चलाई जा रही है, जो भोपाल मंडल के भोपाल एवं इटारसी स्टेशनों पर ठहरकर गंतव्य तक जाएगी। गाड़ी संख्या 04817 जोधपुर – तिरुपति एक तरफा विशेष ट्रेन (01 ट्रिप): गाड़ी संख्या 04817 विशेष ट्रेन दिनांक 15 मई 2025 (गुरुवार) को जोधपुर स्टेशन से दोपहर 14:30 बजे प्रस्थान कर, अगले दिन मार्ग के अन्य स्टेशनों से होते हुए सुबह 09:40 बजे भोपाल, 11:40 बजे इटारसी एवं अन्य स्टेशनों पर ठहराव के बाद तीसरे दिन शाम 18:00 बजे तिरुपति स्टेशन पहुंचेगी। गाड़ी के हाल्ट: रास्ते में यह गाड़ी जोधपुर जं., मेड़ता रोड जं., डेगाना जं., मकराना जं., कुचामन सिटी, नवां सिटी, फुलेरा, जयपुर जं., दुर्गापुरा, सवाई माधोपुर जं., डकनिया तालाब, रामगंज मंडी, नागदा जं., उज्जैन जं., शुजालपुर, भोपाल जं., इटारसी जं., बैतूल, नागपुर जं., वरोरा, बल्हारशाह, सिरपुर कागज़नगर, बेलमपल्ली, मंचेरियल, रामगुंडम, वारंगल, विजयवाड़ा जं., ओंगोल, गुडूर जं., रेणीगुंटा जं., तिरुपति स्टेशनों पर रुकेगी। यात्रियों से अनुरोध है कि यात्रा प्रारंभ करने से पूर्व रेलवे की अधिकृत पूछताछ सेवा NTES/139 के माध्यम से गाड़ी की सटीक स्थिति की जानकारी प्राप्त करें। विस्तृत समय-सारणी एवं ठहराव विवरण हेतु कृपया www.enquiry.indianrail.gov.in पर जाएं या NTES ऐप डाउनलोड करें।   recent visitors 34

एक मई से नमो भारत रैक का शताब्दीनगर स्टेशन से मोदीपुरम तक ट्रायल शुरू

मेरठ एक मई से नमो भारत रैक का शताब्दीनगर (जागरण चौराहा) स्टेशन से मोदीपुरम तक ट्रायल शुरू हो गया है। शीघ्र मेरठ सेंट्रल ( फुटबाल चौक) स्टेशन से मोदीपुरम तक मेट्रो रैक का ट्रायल शुरू होगा। अभी तक मेरठ साउथ से फुटबाल चौक स्टेशन तक मेट्रो रैक का ट्रायल जारी है। मेरठ मेट्रो कारिडोर की कुल लंबाई 23 किलोमीटर है। जिसमें 18 किमी एलिवेटेड और पांच किमी हिस्सा अंडरग्राउंड है। तीन अंडरग्राउंड समेत कुल 13 स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इन सभी स्टेशन पर मेरठ मेट्रो की सेवाएं मिलेगी। मेरठ साउथ के बाद शताब्दी नगर, बेगमपुल (अंडरग्राउंड) और मोदीपुरम स्टेशनों पर नमो भारत की सेवाएं मिलेंगी। इन स्टेशनों को एक प्रमुख ट्रांजिट हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। जहां से नमो भारत और मेट्रो के अलावा आटो, टैक्सी और बस तक की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। पहला स्‍टेशन मेरठ सेंट्रल दिल्ली से मेरठ की दिशा में आगे बढ़ते हुए मेरठ में अंडरग्राउंड सेक्शन का पहला स्टेशन मेरठ सेंट्रल है जहां केवल मेट्रो का स्टॉप होगा। ये स्टेशन फुटबॉल चौक के नजदीक है, जिसके बाद भैसाली और बेगमपुल स्टेशन भी अंडरग्राउंड सेक्शन का हिस्सा हैं। बेगमपुल स्टेशन पर नमो भारत और मेरठ मेट्रो की सेवाएं मिलेंगी, बाकी दोनों स्टेशनों पर केवल मेरठ मेट्रो का स्टॉप होगा। टैंक चौराहे (बेगमपुल के नजदीक) से फिर मेरठ में एलिवेटेड सेक्शन शुरू होता है, जिसमें एमईएस कॉलोनी, दौरली, मेरठ नॉर्थ और मोदीपुरम स्टेशन शामिल हैं। इनमें से मोदीपुरम स्टेशन पर नमो भारत का स्टॉप होगा, बाकी तीन स्टेशन केवल मेरठ मेट्रो के हैं। मेरठ मेट्रो कॉरिडोर की कुल लंबाई 23 किमी इससे पहले मेरठ साउथ से शताब्दी नगर तक नमो भारत के सफल ट्रायल रन किए गए। वहीं, मेरठ सेंट्रल तक के सेक्शन में मेरठ मेट्रो का ट्रायल रन भी जारी हैं। भारत में पहली बार सेमी हाई स्पीड नमो भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर पर ही, मेरठ में स्थानीय मेट्रो का परिचालन किया जाएगा। मेरठ मेट्रो कॉरिडोर की कुल लंबाई 23 किलोमीटर है, जिसमें 18 किमी एलिवेटेड और 5 किमी हिस्सा अंडरग्राउंड है। इसके लिए तीन अंडरग्राउंड समेत कुल 13 स्टेशन बनाए जा रहे हैं। ट्रांजिट हब के रूप में विकसित हो रहे स्‍टेशन मेरठ में मेरठ साउथ के बाद शताब्दी नगर, बेगमपुल (अंडरग्राउंड) और मोदीपुरम स्टेशनों पर नमो भारत और मेरठ मेट्रो दोनों की सेवाएं मिलेंगी। इन स्टेशनों को एक प्रमुख ट्रांजिट हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां से नमो भारत और मेट्रो के अलावा ऑटो, टैक्सी और बस तक की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। फिलहाल 55 किमी रूट पर चल रहा नमो भारत वर्तमान में नमो भारत ट्रेन न्यू अशोक नगर से मेरठ साउथ के बीच 55 किलोमीटर के सेक्शन पर यात्रियों को सुविधा प्रदान कर रही है। इनमें न्यू अशोक नगर, आनंद विहार, साहिबाबाद, गाज़ियाबाद, गुलधर, दुहाई, दुहाई डिपो, मुरादनगर, मोदी नगर साउथ, मोदी नगर नॉर्थ और मेरठ साउथ समेत 11 स्टेशन शामिल हैं। दिल्ली-मेरठ के बीच 82 किलोमीटर संपूर्ण नमो भारत कॉरिडोर के परिचालित होने से ये दूरी महज 55 मिनट में पूरी हो जाएगी। मेरठ मेट्रो समेत इस पूरी परियोजना को इसी साल संचालित करने का लक्ष्य है। recent visitors 44

पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल से गुजरने वाले ट्रेनें अब सिग्नल के इंतजार में लेट नहीं होंगी, ऑप्टिकल फाइबर सिग्नल सिस्टम शुरू

भोपाल पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल ने रेल सिग्नल प्रणाली को और अधिक सुरक्षित और तेज बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल की है. गौरतलब है कि भारतीय रेल में पहली बार भोपाल मंडल के निशातपुरा यार्ड में ऐसी तकनीक शुरू की गई है, जिसमें सिग्नल ऑपरेशन अब तारों की बजाय ऑप्टिकल फाइबर के जरिए किया जाएगा. अब तक जो सिग्नल प्रणाली चल रही थी, उसमें अलग-अलग तारों के ज़रिए सिग्नलों को कंट्रोल किया जाता था. लेकिन इसमें समय लगता था और कई बार खराबी की संभावना भी रहती थी. यह नई तकनीक ऑप्टिकल फाइबर केबल पर आधारित है, जो पारंपरिक संकेत प्रणाली की तुलना में अधिक तेज, सुरक्षित और विश्वसनीय मानी जा रही है. नई तकनीक में 'लैम्प आउटपुट मॉड्यूल' नाम का एक यंत्र लगाया गया है, जो सीधे कंट्रोल रूम से सिग्नल तक ऑप्टिकल फाइबर के ज़रिए सिग्नल भेजता है. यह क्या है? • यह एक नई सिग्नल तकनीक है, जिसमें रेलवे ट्रैक पर लगे सिग्नल अब फाइबर लाइन से सीधा कंट्रोल होंगे. • इसमें कोई भारी वायरिंग नहीं होगी, सब कुछ फाइबर के ज़रिए होगा, जिससे सिग्नल तेज़ी से और बिना रुकावट के काम करेगा. इसका फायदा क्या है? • सिग्नल कभी 'ब्लैंक' नहीं होंगे, यानी अगर एक सिग्नल गड़बड़ करे तो भी ट्रेन को सिग्नल का आस्पेक्ट दिखाई देगा. • ट्रेनें ज़्यादा सुरक्षित और समय पर चलेंगी. • सिस्टम के साथ स्वचालित पंखा भी जुड़ा है जो ज़रूरत पड़ने पर खुद चालू होकर मशीन को गर्म होने से बचाता है. • अगर एक लाइन खराब हो जाए तो दूसरी फाइबर लाइन से काम चलता रहेगा – यानी सिस्टम कभी नहीं रुकेगा. • सिग्नल का रख-रखाव आसान और कम खर्चीला होगा. खराबी की आशंका होगी कम सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने बताया, अभी जो सिग्नल प्रणाली थी, उसमें तारों से सिग्नल कंट्रोल करते थे। इसमें समय लगता था। खराबी की आशंका रहती थी। अब नहीं रहेगी। नई तकनीक ऑप्टिकल फाइबर केबल आधारित है। यह ज्यादा विश्वसनीय और तेज है। इनका कहना वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया ने बताया कि इस तकनीक की शुरुआत S/SH-15 और S/SH-16 नाम के दो सिग्नलों पर निशातपुरा यार्ड में की गई है. भोपाल से बीना के मध्य रेलखंड पर इस तकनीक को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का कार्य प्रारंभ हो चुका है. योजना के अनुसार, जून 2026 तक पूरे रेलखंड में यह उन्नत प्रणाली सक्रिय कर दी जाएगी. यह तकनीक आगे चलकर देशभर की रेलवे लाइनों को और सुरक्षित और आधुनिक बनाने में अहम भूमिका निभाएगी.   recent visitors 37