Friday, July 10, 2026 6:01 am

ट्रंप का बड़ा दावा, ‘सोमालिया की गुफाओं में छिपे कई आतंकी अमेरिकी एयर स्ट्राइक में ढेर’

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार को घोषणा की कि अमेरिकी सेना ने सोमालिया में ISIS के ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं, जिसके परिणामस्वरूप कई आतंकवादी मारे गए हैं. ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि आज सुबह मैंने ISIS के सीनियर अटैकर और उसके द्वारा सोमालिया में भर्ती किए गए आतंकवादियों पर सटीक सैन्य एयर स्ट्राइक का आदेश दिया था. ये हत्यारे गुफाओं में छिपे हुए थे, लेकिन हमने इन पर सटीक हमला किया. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और हमारे सहयोगियों के लिए ये खतरा थे. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने हवाई हमलों से उन गुफाओं को तबाह कर दिया है. जिनमें आतंक छिपे हुए थे और नागरिकों को किसी भी तरह से नुकसान पहुंचाए बिना कई आतंकवादियों को मार गिराया. हम तुम्हें ढूंढ लेंगे और मार देंगे: ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि हमारी सेना ISIS हमले की योजना बनाने वाले आतंकी को कई साल से टारगेट कर रही थी. लेकिन बाइडेन और उनके साथी काम को पूरा करने के लिए इतनी जल्दी एक्शन नहीं लेते, लेकिन मैंने इसे कर दिखाया. ISIS और अमेरिकियों पर हमला करने वाले अन्य सभी लोगों के लिए संदेश ये है कि हम तुम्हें ढूंढ लेंगे, और हम तुम्हें मार देंगे. सत्ता में लौटने के बाद से अमेरिकी सेना द्वारा की गई पहली सैन्य कार्रवाई थी. 'हमलों में किसी भी नागरिक को नुकसान नहीं पहुंचा' वहीं, रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिकी सेना की अफ्रीका कमान द्वारा किए गए हमलों का निर्देशन ट्रंप ने किया था और सोमालिया की सरकार के साथ समन्वय किया गया था. पेंटागन द्वारा किए गए शुरुआती आकलन से पता चलता है कि कई आतंकी इस हवाई हमले में मारे गए हैं. पेंटागन ने कहा कि हमलों में किसी भी नागरिक को नुकसान नहीं पहुंचा है. कैल मिस्काट पहाड़ों में छिपे हैं आतंकी दरअसल, ISIS-सोमालिया अफ्रीकी देश में कई हमलों के लिए जिम्मेदार रहा है. अंतरराष्ट्रीय ग्रुप्स के अनुसार सोमालिया में ISIS आतंकवादियों की संख्या सैकड़ों में होने का अनुमान है, जो ज्यादातर पुंटलैंड के बारी क्षेत्र में कैल मिस्काट पहाड़ों में बिखरे हुए हैं. recent visitors 34

‘चीनी हस्तक्षेप से मुक्त व सभी के व्यापार के लिए खुली है’, पनामा नहर प्रशासक ने ट्रंप के बयान को किया ख़ारिज

वाशिंगटन। डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद से दुनियाभर में पनामा नहर का मामला चर्चा में है। अब पनामा नहर के प्रशासक ने साफ कर दिया है कि पनामा नहर के अमेरिका कब्जे में जाने की कोई संभावना नहीं है और नहर का प्रशासन पनामा के हाथों में ही रहेगा। साथ ही उन्होंने उन दावों को भी खारिज कर दिया कि चीन नहर के संचालन को नियंत्रित कर रहा है। पनामा के नहर के प्रशासक रिकौर्टे वास्केज ने कहा कि पनामा नहर सभी देशों के लिए खुली रहेगी। रिकौर्टे वास्केज ने नहर पर चीन के नियंत्रण के दावों पर कहा कि नहर के दोनों छोर पर बंदरगाहों में काम करने वाली चीनी कंपनियां हांगकांग की है और उन्होंने साल 1997 में बोली प्रक्रिया में यह अधिकार हासिल किया था। उन्होंने कहा कि अमेरिकी और ताइवान की कंपनियां नहर के किनारे के अलावा अन्य बंदरगाहों का भी संचालन कर रही हैं। पनामा के राष्ट्रपति जोस राउल मुलिनो ने भी स्पष्ट रूप से कहा है कि नहर का प्रशासन पनामा के हाथों में ही रहेगा। अमेरिका को पनामा नहर का नियंत्रण देने से इनकार अमेरिका के पनामा नहर पर कब्जा करने की आशंका पर वैस्केज ने कहा कि 'इस तरह की उम्मीद का कोई आधार नहीं है। मैं बस यही कह सकता हूँ।' वैस्केज ने इस बात पर जोर दिया कि पनामा नहर सभी देशों के व्यापार के लिए खुली है। वैस्केज ने कहा कि तटस्थता संधि के कारण पनामा नहर प्रशासन अमेरिकी ध्वज वाले जहाजों को विशेष सुविधा नहीं दे सकता। स्थापित नियमों के तहत ही नहर का संचालन होगा। उन्होंने कहा कि नहर संचालन की प्रक्रिया स्पष्ट है और इसमें मनमाने बदलाव नहीं हो सकते। पनामा और अमेरिका के बीच की संधि में एकमात्र अपवाद अमेरिकी युद्धपोतों को तुरंत मार्ग देने का नियम ही है। ज्यादा शुल्क के आरोपों को लेकर दी ये सफाई डोनाल्ड ट्रंप ने पनामा नहर पर लगने वाले शुल्क को बहुत ज्यादा बताया था। इस पर वैस्केज ने कहा कि शुल्क में कोई भेदभाव नहीं है। शुल्क बढ़ने पर वैस्केज ने कहा कि नहर अपने लॉक को संचालित करने के लिए जलाशयों पर निर्भर करती है, लेकिन पिछले दो वर्षों के दौरान सूखे से जलाशय बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। जिसके कारण जहाजों को पार करने के लिए दैनिक स्लॉट की संख्या में काफी कमी करनी पड़ी है। कम जहाजों की संख्या की वजह से प्रशासकों ने स्लॉट आरक्षित करने के लिए फीस बढ़ा दी है। पनामा नहर की वजह से जहाजों को केप हॉर्न के आसपास लंबी और महंगी यात्रा से मुक्ति मिलती है। ट्रंप ने कही थी नहर पर कब्जे की बात डोनाल्ड ट्रंप ने बीते दिनों पनामा नहर को लेकर कहा था कि अगर पनामा स्वीकार्य तरीके से पनामा नहर का प्रबंधन नहीं करता है तो फिर अमेरिका फिर से इस पर अपना कब्जा कर सकता है। उन्होंने कहा था कि हम पनामा नहर को 'गलत हाथों' में नहीं जाने देंगे। ट्रंप का इशारा चीन की तरफ माना जा रहा था। उन्होंने लिखा था कि पनामा नहर का प्रबंधन चीन के द्वारा नहीं किया जाना चाहिए। ट्रंप ने पनामा नहर पर कब्जे को लेकर सैन्य शक्ति के इस्तेमाल से भी इनकार नहीं किया। पनामा नहर से अमेरिका का 70 फीसदी समुद्री यातायात गुजरता है और रणनीतिक रूप से भी यह अमेरिका के लिए अहम है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने तटों के बीच वाणिज्यिक और सैन्य जहाजों की आवाजाही को सुविधा जनक बनाने के 1900 के दशक की शुरुआत में पनामा नहर का निर्माण किया था। वॉशिंगटन ने साल 1977 में हुई एक संधि के तहत 31 दिसंबर, 1999 को पनामा नहर पर अपना नियंत्रण छोड़कर पनामा को इसका नियंत्रण दे दिया था। recent visitors 105

आयोजन समिति ने अब तक जुटाए 170 मिलियन डॉलर, ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह के लिए चंदा देने की होड़

वासिंगटन। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 20 जनवरी को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह को लेकर तैयारियां तेजी से चल रही हैं। बड़े-बड़े अरबपति, कारोबारी और तकनीकी विशेषज्ञ इस समारोह में अपनी सहभागिता के साथ आर्थिक सहयोग भी कर रहे हैं। समारोह के लिए चंदा देने की होड़ है। एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह के लिए आयोजन समिति को अब तक 170 मिलियन डॉलर का चंदा मिल चुका है। जोकि एक रिकॉर्ड है। इस चंदे के लिए अमेरिका के बड़े-बड़े कारोबारियों और हस्तियों ने बड़े चेक लिखे हैं। व्यक्तिगत तौर पर चंदा वसूलने वाले एक व्यक्ति ने समारोह के लिए अब तक मिले चंदे की पुष्टि की। उसने कहा कि आयोजन समिति को उम्मीद है कि वह समारोह होने तक 200 मिलियन डॉलर चंदा जुटा लेगी। हालांकि वह सार्वजनिक तौर पर इस बारे में बात नहीं कर सकता है। वहीं आयोजन समिति ने भी इसे दावे पर कोई जवाब नहीं दिया। साथ ही यह जानकारी भी नहीं दी गई है कि वह चंदे को कैसे खर्च करेगी। ट्रंप के राष्ट्रपति पुस्तकालय में होगा बची हुई रकम का उपयोग अमेरिका के नियमों के मुताबिक व्यक्तिगत चंदे से मिली रकम का उपयोग आमतौर पर शपथ ग्रहण समारोह किया जाता है। इसमें शपथ ग्रहण समारोह से जुड़ी लागतें, परेड और शानदार उद्घाटन समारोह। बताया जाता है कि आयोजन समिति समारोह के बाद बचने वाले पैसे का उपयोग ट्रंप राष्ट्रपति पुस्तकालय में करेगी। बाइडन को मिला था 62 मिलियन डॉलर का चंदा अमेरिकी चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह की आयोजन समिति ने अब तक सबसे ज्यादा चंदा जुटाया है। यह चार साल पहले राष्ट्रपति जो बाइडन को मिले चंदे के दोगुने से भी अधिक है। बाइडन को लगभग 62 मिलियन डॉलर चंदा मिला था। वहीं 2016 में ट्रंप के प्रथम शपथ ग्रहण समारोह में भी लगभग 107 मिलियन डॉलर का चंदा प्राप्त हुआ था, जिसने एक रिकार्ड स्थापित किया था। राष्ट्रपति के साथ संबंध सुधारने की कवायद नवंबर में राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप और कांग्रेस के दोनों सदनों में रिपब्लिकन के नियंत्रण के बाद तकनीकी कंपनियां सहित प्रमुख लोग बड़े चेक लिख रहे हैं। ताकि वे नए राष्ट्रपति के साथ अपने संबंध सुधार सकें। फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा और अमेजन ने पिछले महीने कहा था कि वे ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह के कोष में एक मिलियन डॉलर का चंदा देंगे। ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने भी कहा कि एक मिलियन डॉलर का चंदा देने की बात कही थी। recent visitors 81

ताजा पोस्ट से भड़की सरकार और बढ़ा तनाव, कनाडा को अमेरिका का हिस्सा बनाने पर तुले ट्रंप

वाशिंगटन। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हाथ धोकर कनाडा के पीछे पड़ गए हैं। ट्रंप, कनाडा को आर्थिक ताकत के बल पर अमेरिका का हिस्सा बनाने की इच्छा व्यक्त कर चुके हैं। अब एक ताजा सोशल मीडिया पोस्ट में कनाडा और अमेरिका का साझा नक्शा पोस्ट किया और उसे संयुक्त राज्य अमेरिका लिखा। ट्रंप के इस पोस्ट पर कई कनाडाई नेताओं ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। गौरतलब है कि ट्रंप ने फ्लोरिडा स्थित अपने आवास में मीडिया से बात करते हुए कनाडा को अमेरिका में मिलाने और उसे अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की इच्छा व्यक्त की थी। कनाडा के पीएम ने जताई नाराजगी अब कनाडा और अमेरिका का साझा नक्शा पोस्ट कर उसे संयुक्त राज्य अमेरिका बताने वाली ट्रंप की पोस्ट पर कनाडा के नेताओं ने नाराजगी जताई। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने ट्रंप के बयान पर कहा कि कनाडा के अमेरिका का हिस्सा बनने की कोई संभावना नहीं है। कनाडा की विदेश मंत्री मेलानी जॉली ने कहा कि ट्रंप का बयान 'कनाडा को एक मजबूत देश बनाने वाली चीजों के बारे में समझ की कमी को दिखाती है। हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत है। हमारे लोग मजबूत हैं।' उन्होंने कहा, 'हम खतरों के सामने कभी पीछे नहीं हटेंगे।' ट्रंप के बयानों से बढ़ा तनाव उल्लेखनीय है कि ट्रंप ने पनामा नहर और ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए सैन्य बल के इस्तेमाल की संभावना से भी इनकार नहीं किया। उन्होंने दोनों पर अमेरिका के नियंत्रण को अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया। ट्रंप ने कहा कि पनामा नहर हमारे देश के लिए महत्वपूर्ण है। हमें राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों के लिए ग्रीनलैंड की भी जरूरत है।' गौरतलब है कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक स्वायत्त क्षेत्र है, जो लंबे समय से अमेरिका का सहयोगी और नाटो का संस्थापक सदस्य है। ट्रम्प ने डेनमार्क पर टैरिफ लगाने का भी प्रस्ताव दिया है कि अगर डेनमार्क, ग्रीनलैंड को खरीदने के उनके प्रस्ताव को अस्वीकार करता है तो वे डेनमार्क पर टैरिफ लगा सकते हैं। डोनाल्ड ट्रंप के बयानों पर पनामा और डेनमार्क ने दी प्रतिक्रिया पनामा के विदेश मंत्री जेवियर मार्टिनेज-आचा ने ट्रम्प की धमकी को दृढ़ता से खारिज करते हुए कहा, 'नहर पनामा के नियंत्रण में है, और यह हमारे ही नियंत्रण में रहेगी।' वहीं डेनमार्क ने भी दृढ़ता से कहा कि ग्रीनलैंड 'बिक्री के लिए नहीं है।' डेनमार्क के प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने मंगलवार रात कहा, 'मुझे नहीं लगता कि जब हम करीबी सहयोगी और साझेदार हैं, तो वित्तीय मुद्दों पर एक दूसरे पर टकराना अच्छी बात नहीं है।' recent visitors 83

क्या शपथ से पहले ट्रंप को होगी जेल? पोर्न स्टार मामले में सुनाई जाएगी सजा; 10 जनवरी को कोर्ट में पेशी

न्यूयॉर्क न्यूयॉर्क के जज जुआन मर्चेन ने शुक्रवार (3 जनवरी) को घोषणा की कि अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 10 जनवरी 2025 को सजा सुनाई जाएगी, जो उनके शपथ ग्रहण से 10 दिन पहले होगी. AFP की रिपोर्ट के मुताबिक ये सजा हश मनी के उस मामले से जुड़ी है, जिसमें उन्होंने पोर्न स्टार स्टॉर्मी डेनियल्स को चुप रहने के लिए पैसे दिए थे. इस पर मर्चेन ने संकेत दिया कि वे ट्रंप को जेल की सजा देने के पक्ष में नहीं हैं और बिना शर्त रिहाई की ओर झुकाव दिखाया है. इसका मतलब है कि ट्रंप किसी शर्त के अधीन नहीं होंगे, लेकिन वे दोषी के रूप में व्हाइट हाउस में प्रवेश करेंगे. 78 वर्षीय ट्रंप को 34 मामलों में दोषी ठहराया गया था, जिनमें 2016 के चुनाव से पहले पोर्न स्टार स्टॉर्मी डेनियल्स को चुप रहने के लिए पैसे का भुगतान करने के लिए व्यवसाय रिकॉर्ड में हेराफेरी शामिल है. ट्रंप को चार साल तक की जेल की सजा हो सकती है, लेकिन कानूनी विशेषज्ञों को उम्मीद है कि उन्हें जेल नहीं भेजा जाएगा. ट्रंप ने इस मामले में अपील करने की योजना बनाई है, जिससे सजा में देरी हो सकती है. ट्रंप के वकीलों ने इसे सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले और अन्य न्यायिक निर्णयों के आधार पर खारिज करने की मांग की थी, जिसमें कहा गया था कि पूर्व राष्ट्रपतियों को पद पर रहते हुए कई आधिकारिक कृत्यों के लिए अभियोजन से छूट प्राप्त है. शपथ ग्रहण के बाद ट्रंप को मिल जाएगी छूट हालांकि, न्यायाधीश ने इस तर्क को खारिज कर दिया लेकिन कहा कि शपथ ग्रहण के बाद ट्रंप को अभियोजन से छूट मिल जाएगी. ट्रंप के प्रवक्ता स्टीवन चेउंग ने इस सजा के फैसले की आलोचना की और इसे सुप्रीम कोर्ट के प्रतिरक्षा निर्णय का उल्लंघन बताया. चेउंग ने कहा कि यह मामला कभी लाया ही नहीं जाना चाहिए था और इसे तुरंत खारिज किया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप तब तक लड़ते रहेंगे जब तक ये सभी मामले खत्म नहीं हो जाते. दो संघीय मामलों का सामना कर रहे ट्रंप ट्रंप अभी भी विशेष वकील जैक स्मिथ द्वारा लाए गए दो संघीय मामलों का सामना कर रहे हैं, लेकिन उन मामलों को न्याय विभाग की नीति के तहत खारिज कर दिया गया, जो एक बैठे राष्ट्रपति पर मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं देती है. ट्रंप पर 2020 के चुनाव परिणामों को पलटने की साजिश और गोपनीय दस्तावेज हटाने के आरोप भी लगे हैं, लेकिन राष्ट्रपति के रूप में उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन मामलों को बंद कर दिया जाएगा. राष्ट्रपति के आपराधिक अभियोजन के संबंध में कानून अमेरिकी संविधान में राष्ट्रपति के आपराधिक अभियोजन के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से यह नहीं माना है कि राष्ट्रपति को अभियोजन से छूट है. यह अवधारणा न्याय विभाग की व्याख्या पर आधारित है, खासकर उसके कानूनी परामर्शदाता कार्यालय (OLC) की तरफ से दी गई सलाह के तहत. OLC का मानना है कि आपराधिक अभियोग, अभियोजन और सजा राष्ट्रपति पद को अक्षम कर सकते हैं, जिससे राष्ट्रपति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में असमर्थ हो सकते हैं. OLC यह भी मानता है कि किसी कार्यरत राष्ट्रपति को इस तरह से अक्षम करना असंवैधानिक होगा. इसके लिए संविधान में महाभियोग या 25वां संशोधन जैसे प्रावधान मौजूद हैं. महाभियोग के माध्यम से राष्ट्रपति को पद से हटाया जा सकता है, जबकि 25वें संशोधन के तहत किसी अक्षम राष्ट्रपति को पद से हटाया जा सकता है. recent visitors 59

ट्रंप शासन में होगा भारतवंशियों का दबदबा, जानें कौन-कौन

नई दिल्ली. अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को संघीय जांच ब्यूरो (FBI) के डायरेक्टर पद के लिए अपने निकट सहयोगी एवं विश्वासपात्र काश पटेल को नामित किया। यह सेलेक्शन ट्रंप के इस दृष्टिकोण के अनुरूप है कि सरकार की कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों में आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता है। साथ ही ट्रंप ने अपने विरोधियों के विरुद्ध प्रतिशोध की इच्छा जताई है। ऐसे में इस पद के लिए पटेल का चयन मायने रखता है। इस तरह ट्रंप के नए प्रशासन एक और भारतवंशी को महत्वपूर्ण स्थान मिला है। जानते हैं ट्रंप प्रशासन में किन भारतीय-अमेरिकी को अहम जिम्मेदारी मिल चुकी है। काश पटेल काश पटेल की नियुक्ति ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही। पटेल अमेरिका में कानून व्यवस्था और नेशनल सिक्योरिटी को मजबूत करने पर फोकस करेंगे। 44 वर्षीय पटेल 2017 में तत्कालीन ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के अंतिम कुछ हफ्तों में अमेरिका के कार्यवाहक रक्षा मंत्री के ‘चीफ ऑफ स्टाफ’ के रूप में भी काम कर चुके हैं। पेशे से वकील पटेल का संबंध गुजरात में वडोदरा से रहा है। पटेल भारत में अयोध्या में बने राम मंदिर को लेकर दिए बयान की वजह से भी चर्चा में रहे थे। विवेक रामास्वामी निर्वाचित राष्ट्रपति ट्रंप ने विवेक रामास्वामी को नए डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (डीओजीई) के लिए चुना है। बिजनेसमैन रामास्वामी का काम सरकार को सलाह देना होगा। भारतवंशी रामास्वामी करोड़पति शख्स हैं और एक दवा कंपनी के फाउंडर भी हैं। विवेक रामास्वामी राष्ट्रपति पद के लिए रिपब्लिकन पार्टी का उम्मीदवार बनने की दौड़ में शामिल थे लेकिन बाद में उन्होंने अपनी दावेदारी वापस ले ली। इसके बाद उन्होंने ट्रंप का समर्थन करने का फैसला किया था। भारतीय प्रवासी के 39 वर्षीय पुत्र रामास्वामी पहले भारतीय-अमेरिकी हैं जिन्हें ट्रंप ने अपने प्रशासन में शामिल किया है। उनके पिता वी गणपति रामास्वामी पेश से इंजीनियर हैं, जबकि उनकी माता गीता रामास्वामी मनोचिकित्सक हैं। उनके माता-पिता केरल से अमेरिका चले गए थे। सिनसिनाटी, ओहियो में जन्मे और पले-बढ़े, भारतीय मूल के बिजनेसमैन राष्ट्रीय स्तर के टेनिस खिलाड़ी थे। उन्होंने हार्वर्ड से बायोलॉजी में ग्रेजुएशन की। इसके बाद उन्होंने अपनी खुद की बायोटेक कंपनी, ‘रोइवेंट साइंसेज’ शुरू की। बायोटेक बिजनेसमैन की शादी अपूर्वा से हुई है, जो गले की सर्जन हैं। वे ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी वेक्सनर मेडिकल सेंटर में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। वे कोलंबस, ओहियो में रहते हैं और उनके दो बेटे हैं। तुलसी गबार्ड डेमोक्रेटिक पार्टी की पूर्व सदस्य तुलसी गबार्ड ‘डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस’ (डीएनआई) के रूप में सेवाएं देंगी। गबार्ड चार बार सांसद रह चुकी हैं। वह 2020 में वह राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए उम्मीदवार भी थीं। गबार्ड के पास पश्चिम एशिया और अफ्रीका के संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में तीन बार तैनाती का अनुभव है। वह हाल ही में डेमोक्रेटिक पार्टी को छोड़कर रिपब्लिकन पार्टी में शामिल हुई थीं। जय भट्टाचार्य ट्रंप ने भारतीय-अमेरिकी वैज्ञानिक जय भट्टाचार्य को देश के टॉप हेल्थ रिसर्च एवं वित्त पोषण संस्थानों में से एक, 'नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ' (एनआईएच) के निदेशक के रूप में चुना है। इसके साथ ही भट्टाचार्य, ट्रंप द्वारा शीर्ष प्रशासनिक पद के लिए नामित होने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी बन गए हैं। डॉ. भट्टाचार्य रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर के साथ मिलकर राष्ट्र के मेडिकल रिसर्च की दिशा में मार्गदर्शन करेंगे। उषा वेंस भारतीय-अमेरिकी वकील उषा चिलुकुरी वेंस उस समय चर्चा में आईं, जब उनके पति जे डी वेंस को रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति पद उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार नामित किया गया। ट्रंप-वेंस की जीत के साथ, 38 साल की उषा अमेरिका की सेकंड लेडी बनने वाली हैं। इस भूमिका में उषा पहली भारतीय-अमेरिकी होंगी। उषा, ओहियो के सीनेटर जे डी वेंस (39) के साथ खड़ी थीं, जब ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव में जीत के बाद समर्थकों को संबोधित किया। भारतीय प्रवासियों की बेटी उषा सैन डिएगो उपनगर में पली-बढ़ीं। उनके माता-पिता का पैतृक गांव आंध्र प्रदेश के पश्चिमी गोदावरी जिले में वडलुरु है। पढ़ाई में होनहार छात्रा रहीं और किताबों से लगाव रखने वाली उषा ने आगे चलकर नेतृत्व के गुण दिखाए। उषा का जुड़ाव कैम्ब्रिज, येल यूनिवर्सिटी से भी रहा है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न सदस्यों के लिए भी काम किया। उनकी आखिरी नौकरी मुंगर, टोल्स एंड ओल्सन एलएलपी में दीवानी मुकदमे की वकील के रूप में थी। उषा और वेंस की मुलाकात येल लॉ स्कूल में पढ़ाई के दौरान हुई थी। बाद में 2014 में केंटकी में उनकी शादी हुई। वेंस के तीन बच्चे हैं। बेटे इवान और विवेक साथ ही एक बेटी जिसका नाम मिराबेल है। recent visitors 71

श्रीलंका में इस्राइली पर्यटकों को निशाना बनाने का ईरानी को दिया जिम्मा, ट्रंप की हत्या की साजिश में सनसनीखेज खुलासा

वॉशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में बंपर जीत दर्ज करने वाले डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की एक और साजिश का खुलासा हाल ही में हुआ। मामले में अमेरिकी खुफिया विभाग ने फरहाद शकेरी नाम के ईरानी नागरिक पर आरोप लगाए हैं। अब एक और बड़ा दावा किया जा रहा कि इस शख्स को ईरानियों ने श्रीलंका में इस्राइली पर्यटकों को निशाना बनाने का काम सौंपा था। एफबीआई ने 51 वर्षीय सदस्य फरहाद शकेरी पर आरोप लगाया, जिसके बारे में माना जाता है कि वह ईरान में रहता है। इसके अलावा, दो आरोपियों कार्लिस्ले रिवेरा (49) और जोनाथन लोडहोल्ट (36) को गुरुवार को न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन और स्टेटन द्वीप से गिरफ्तार किया गया था। आईआरजीसी का सदस्य शकेरी एफबीआई के मुताबिक, फरहाद शकेरी एक ‘ईरानी एसेट’ है और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्स (IRGC) का सदस्य है । फरहाद को सात अक्तूबर को ईरान ने ट्रंप की हत्या की योजना बनाने का काम सौंपा था। एफबीआई का कहना है कि इसके लिए आईआरजीसी ने समयसीमा भी तय की थी। एफबीआई को पहले ही मिल गई थी जानकारी मैनहट्टन की संघीय अदालत में शिकायत के अनुसार, एफबीआई को इस योजना की जानकारी हो गई थी, जिसके बाद इसे नाकाम कर दिया गया। शकेरी ने एफबीआई को बताया कि ईरानी रिपब्लिकन गार्ड के अधिकारी ने उसे पिछले सितंबर में निर्देश दिया था कि वह अपने बाकी काम छोड़कर सात दिनों के भीतर ट्रंप की निगरानी करने और उन्हें मारने की योजना तैयार करे। अक्तूबर में सामूहिक गोलीबारी की योजना… संघीय अदालत में दायर दस्तावेजों के अनुसार, शकेरी को आईआरजीसी द्वारा श्रीलंका में इस्राइली पर्यटकों को निशाना बनाने और इस साल की अक्तूबर में सामूहिक गोलीबारी की योजना बनाने के लिए कहा गया था। 23 अक्तूबर के आसपास दी गई थी चेतावनी 23 अक्टूबर को या उसके आसपास, संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्राइल की सरकारों ने सार्वजनिक रूप से यात्रियों को अरुगम खाड़ी क्षेत्र में पर्यटक स्थलों को निशाना बनाकर किए जाने वाले हमले के खतरों के बारे में चेतावनी दी थी और अगले ही दिन श्रीलंकाई अधिकारियों ने धमकी के संबंध में तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार करने की सूचना दी थी। न्याय विभाग ने कहा कि 28 अक्तूबर को, संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्राइल की सरकारों द्वारा जारी सार्वजनिक यात्रा चेतावनियों के बाद और श्रीलंकाई अधिकारियों द्वारा दो लोगों की गिरफ्तारी के बाद, शकेरी ने एफबीआई को बताया कि उसने पहले दोनों लोगों को श्रीलंका में इस्राइली वाणिज्य दूतावास की निगरानी का काम सौंपा था। शकेरी ने बताया कि उसने और गिरफ्तार किए गए लोगों ने एक साथ जेल में समय बिताया था। यह निगरानी आईरजीसी अधिकारी-I को दी गई थी। शकेरी के अनुसार, इस्राइली वाणिज्य दूतावास पर निगरानी किए जाने के बाद आईआरजीसी अधिकारी-I ने उससे दूसरे लक्ष्य की पहचान करने के लिए कहा। recent visitors 73