Friday, July 10, 2026 4:41 am

जेलेंस्की के खिलाफ रूसी राष्ट्रपति के बयान पर भड़के ट्रंप, मॉस्को को दे डाली बड़ी धमकी

वॉशिंगटन यूक्रेन के राष्ट्र्पति वोलोदिमिर जेलेंस्की को लेकर पुतिन की टिप्पणी पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भड़क गए हैं। ट्रंप ने रविवार को कहा कि वह जेलेंस्की की आलोचना से बहुत नाराज हैं। इसके साथ ही ट्रंप ने धमकी दी कि अगर रूसी राष्ट्रपति युद्ध विराम के लिए सहमत नहीं होते हैं तो वे मॉस्को के तेल निर्यात पर टैरिफ लगा देंगे। एनबीसी न्यूज के साथ फोन पर दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने 50% टैरिफ लगाने की बात कही, जो रूसी तेल खरीदने वाले देशों को प्रभावित करेगा। उन्होंने यूक्रेन में जंग न रोकने के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराने की बात कही। उन्होंने कहा, 'अगर रूस और मैं यूक्रेन में खून-खराबे को रोकने के लिए कोई समझौता करने में असमर्थ हैं और अगर मुझे लगता है कि यह रूस की गलती थी, जो कि शायद न हो- तो मैं रूस से आने वाले सभी तेल पर सेकेंडरी टैरिफ लगाने जा रहा हूं।' पुतिन को लेकर ट्रंप की टिप्पणी रूसी नेता को लेकर उनके पिछले रुख से अलग है। जेलेंस्की को हटाने की मांग पर भड़के ट्रंप पुतिन को लेकर ट्रंप का गुस्सा तब आया, जब रूसी राष्ट्रपति ने यूक्रेन में जेलेंस्की को हटाकर एक नई सरकार बनाने की मांग की। एनबीसी के साथ फोन पर ट्रंप ने कहा, 'यह सही जगह पर नहीं जा रहा है।' इसके पहले ट्रंप ने जेलेंस्की को लेकर निराशा जाहिर की थी और उन्हें तानाशाह तक कह दिया था। लेकिन अब वह रूस के खिलाफ सीधे बोल रहे हैं। ट्रंप ने कहा, मैं बहुत गुस्सा था, नाराज था, जब पुतिन ने जेलेंस्की की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना शुरू कर दिया, क्योंकि यह सही जगह पर नहीं जा रहा था, आप समझते हैं?' रूस की अर्थव्यवस्था को धमकी अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूस की अर्थव्यवस्था को झटका देने की चेतावनी दी और कहा कि सभी रूस तेल पर टैरिफ 25 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी किया जा सकता है। इसका मतलब यह होगा कि अगर आप रूस से तेल खरीदते हैं तो अमेरिका में व्यापार नहीं कर सकते। हालांकि, ट्रंप ने दोनों नेताओं के बीच सुलह का भी संकेत दिया और कहा, 'पुतिन जानते हैं कि मैं गुस्से में हूं, लेकिन गुस्सा जल्दी खत्म हो जाता है, अगर वह सही काम करते हैं।' क्या कह रहे विश्लेषक अब ऐसे में सवाल उठता है कि अगर रूस ने यूक्रेन युद्ध विराम समझौते पर अपनी सहमति नहीं दी और ट्रंप ने रूसी तेल निर्यात पर 25 से 50 फीसदी की टैरिफ लगाया तो किन-किन देशों को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके जवाब में विश्लेषकों और अधिकारियों का कहना है कि अगर डोनाल्ड ट्रम्प रूसी तेल खरीदने वाले देशों के खिलाफ 25-50% टैरिफ लगाते हैं, तो चीन और भारत इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। दरअसल, 2022 में यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध छिड़ने के बाद अमेरिका समेत तमाम पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे। उसके तेल खरीदने पर भी बैन लगा दिया गया था लेकिन भारत और चीन के अलावा कुछ और देशों ने रूस से तेल खरीदना चालू रखा। ऐसे में अमेरिका द्वारा सीधे खरीददारों पर सेकंडरी टैरिफ लगाने से न केवल पुतिन की तेल राजस्व तक पहुंच कम हो सकती है बल्कि जो देश इसका उल्लंघन करेंगे उन्हें भी आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ सकता है। रूस के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में शामिल न होने के बावजूद, चीन इसका उल्लंघन करने के बारे में सावधान रहा है, क्योंकि उसे सेकंडरी टैरिफ का डर सताता रहा है। उदाहरण के लिए, कुछ चीनी बैंकों ने अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग प्रणाली से प्रतिबंधित होने के डर से रूसी कंपनियों के साथ लेन-देन कम कर दिया है। चीन को भारत ने छोड़ा पीछे मल्टीनेशनल इन्वेस्टमेंट बैंक और वित्तीय सेवा उपलब्ध कराने वाली कंपनी UBS के विश्लेषक जियोवानी स्टानोवो ने द गार्डियन से कहा, "जैसा कि ट्रम्प ने वेनेजुएला के तेल के मामले में किया है, वैसा ही रूस के मामले में खरीदारों को लक्षित करने के लिए कर सकते हैं। इस कदम से चीन और भारत प्रभावित हो सकता है। हालांकि, हमें यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में क्या घोषणा होती है। बता दें कि भारत चीन को पीछे छोड़ते हुए समुद्री रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया है। भारत-चीन के अलावा और किन देशों पर असर 2024 में भारत के कुल कच्चे तेल के आयात का लगभग 35% रूसी कच्चा तेल था। यूक्रेन युद्ध की शुरुआत से ही भारत रूसी तेल खरीदता रहा है लेकिन अब अमेरिकी टैरिफ की चिंता होने लगी है। भारत और चीन के अलावा तुर्किए भी रूसी तेल का बड़ा खरीदार है। इसके अलावा बुल्गारिया,इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया, स्लोवाकिया, हंगरी भी रूसी तेल खरीदने में आगे रहा है। पाकिस्तान ने भी रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए डील किया है। recent visitors 57

राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में दी इफ्तार पार्टी, गेस्ट के तौर इन्हें बुलाया और हो गया कांड, Not Trump Iftar के लगे नारे

वाशिंगटन डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर व्हाइट हाउस में पहली इफ्तार (Iftar) पार्टी की मेजबानी की. लेकिन ट्रंप की यह इफ्तार पार्टी विवादों में घिर गई है. अमेरिकी मुस्लिम इस इफ्तार डिनर पर भड़के हुए हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में इफ्तार डिनर की मेजबानी करते हुए कहा कि मैं आप सभी का व्हाइट हाउस के इफ्तार डिनर में स्वागत करता हूं. हम इस्लाम के पवित्र महीने रमजान का जश्न मना रहे हैं. यह बहुत बेहतरीन महीना है. दुनियाभर के मुस्लिमों को रमजान मुबारक. हम दुनिया के बेहतरीन धर्मों में से एक धर्म का सम्मान करते हैं. उन्होंने कहा कि इस पवित्र महीने के दौरान मुस्लिम सुबह से शाम तक रोजा रखते हैं. खुदा की इबादत करते हैं. इसके बाद पूरी दुनिया के मुसलमान हर रात परिवारों और दोस्तों के साथ एकजुट होकर ईश्वर का धन्यवाद करते हैं और इफ्तार करते हैं. हम सभी पूरी दुनिया में शांति चाहते हैं. ट्रंप ने कहा कि 2024 राष्ट्रपति चुनाव में जीत के लिए मुस्लिम अमेरिकी समुदाय का आभार भी जताया. बता दें कि व्हाइट हाउस में इफ्तार पार्टी आयोजित करने की दो दशक पुरानी परंपरा है. लेकिन आरोप हैं कि इस बार अमेरिकी मुस्लिम सांसदों और समुदाय से जुड़े नेताओं को इसमें शामिल होने का न्योता नहीं दिया गया. इसके बजाए मुस्लिम देशों के विदेशी राजदूतों को इफ्तार डिनर में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया था. व्हाइट हाउस के बाहर कई मुस्लिम सिविल राइट्स ग्रुप ने Not Trump's Iftar प्रोटेस्ट किया. इस दौरान एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि यह डोनाल्ड ट्रंप का एक तरह का पाखंड है. वह एक तरफ देश में मुस्लिमों के प्रवेश पर बैन लगाते हैं तो दूसरी तरफ इफ्तार पार्टी का आयोजन करते हैं. बता दें कि इससे पहले 2017 में ट्रंप ने राष्ट्रपति के तौर पर अपने पहले कार्यकाल के दौरान व्हाइट हाउस की इफ्तार पार्टी को रद्द कर दिया था. दरअसल 1996 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के कार्यकाल के दौरान व्हाइट हाउस में इफ्तार पार्टी की शुरुआत की गई थी, जिसे बाद के राष्ट्रपतियों जॉर्ज बुश और बराक ओबामा ने भी जारी रखा. इस इफ्तार पार्टी में मुस्लिम समुदाय के प्रतिष्ठित सदस्यों के साथ ही मुस्लिम देशों के राजनयिक और सीनेटर शामिल होते रहे हैं.   recent visitors 57

वो हमपर टैक्स लगाएंगे, तो हम भी लगाएंगे… ट्रंप ने भारत को अधिक टैरिफ पर दी चेतावनी

न्यूयॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित कर रहे हैं. ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले संयुक्त सत्र में कई बड़े मसलों पर बात की. उन्होंने फ्री स्पीच पर जोर दिया और टैरिफ के फैसले का खुलकर बचाव किया. उन्होंने भारत का भी जिक्र किया और कहा, चीन, कनाडा, मेक्सिको और भारत हम पर बहुत ज्यादा टैक्स लगाते हैं. ट्रंप का कहना था कि भारत जो टैक्स लगाता है, वो उचित नहीं है. ट्रंप ने भाषण में दो बार भारत का नाम लिया. उन्होंने ऐलान किया कि 2 अप्रैल से रेसिप्रोकल टैक्स लगाया जाएगा. अमेरिका राष्ट्रपति ने कहा कि कनाडा, मेक्सिको, भारत, ब्राजील और दक्षिण कोरिया बहुत ज्यादा टैरिफ लगाते हैं. ये अच्छी बात नहीं है. जो भी देश हम पर टैरिफ चार्ज लगाएंगे, हम भी उन पर चार्ज लागू करेंगे. हम दो अप्रैल से कनाडा, मेक्सिको, चीन और भारत पर रेसिप्रोकल टैक्स लगाएंगे. टैरिफ से अमेरिका को फिर से अमीर बनाना है. ट्रंप ने कहा, हमारा प्रशासन अमेरिका की जरूरत के अनुसार बदलाव लाने के लिए प्रयास कर रहा है. यह बड़े सपने देखने और साहसिक कार्रवाई का समय है. हमने सभी पर्यावरणीय प्रतिबंधों को समाप्त कर दिया है जो हमारे देश को कम सुरक्षित और पूरी तरह से अप्रभावी बना रहे थे. ट्रंप ने कहा, हमने 43 दिन में जो किया है, वो कई सरकारें अपने 4 या 8 साल के कार्यकाल में भी नहीं कर पाई हैं. ट्रंप ने जो बाइडेन पर भी तंज कसा और उन्हें इतिहास का सबसे खराब राष्ट्रपति बताया. भारत और चीन के खिलाफ रेसिप्रोकल टैरिफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका 2 अप्रैल को भारत और चीन समेत अन्य देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाएगा. उन्होंने कहा, वे हम पर जो भी टैरिफ लगाएंगे, हम उन पर टैरिफ लगाएंगे. अन्य देशों ने दशकों से हमारे खिलाफ टैरिफ का इस्तेमाल किया है और अब हमारी बारी है कि हम उन अन्य देशों के खिलाफ टैरिफ का इस्तेमाल करना शुरू करें. यूरोपीय संघ, चीन, ब्राजील, भारत और अनगिनत अन्य देश हमसे बहुत ज्यादा टैरिफ वसूलते हैं. यह बहुत अनुचित है. भारत हमसे 100 प्रतिशत टैरिफ वसूलता है. यह सिस्टम अमेरिका के लिए उचित नहीं है. यह कभी नहीं था. उन्होंने कहा, 2 अप्रैल से पारस्परिक टैरिफ लागू हो जाएंगे. यदि वे हमें अपने बाजार से बाहर रखने के लिए नॉन मोनेटरी टैरिफ लगाते हैं, तो हम उन्हें अपने बाजार से बाहर रखने के लिए नॉन मोनेटरी टैरिफ लागू करेंगे. ट्रंप के संबोधन की बड़ी बातें यहां पढ़ें:- – अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि हम यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की दिशा में काम कर रहे हैं. इस युद्ध में हजारों लोग मारे गए हैं इसलिए इसे रोकना होगा. – ट्रंप ने संसद को संबोधित करते हुए कहा कि मेरी सरकार पनामा नहर पर दोबारा कब्जा करेगी और हमने इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया है. ट्रंप ने कहा कि हम ग्रीनलैंड के लोगों के अधिकार का सम्मान करते हैं कि उन्हें अपने भविष्य का सम्मान करने का हक है. लेकिन हम चाहते हैं कि ग्रीनलैंड हमारा हिस्सा बने. हम आपको समृद्ध बनाएंगे इसलिए आप हमसे हाथ मिला लें वरना हम किसी न किसी तरीके से ऐसा कर ही लेंगे. लेकिन यकीन दिलाते हैं कि हम आपको सुरक्षित रखेंगे. – संसद को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि हम जल्द ही एक एग्जिक्यूटिव ऑर्डर पर साइन करेंगे, जिसके बाद पुलिस अधिकारी किसी हत्या करने पर मौत की सजा का प्रावधान होगा. – ट्रंप ने कहा कि टैरिफ की रकम से अमेरिका फिर से समृद्ध होगा. इससे अमेरिका दोबारा ग्रेट और अमीर बनेगा और यह हो रहा है. – राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को अब अवैध प्रवासियों से छुटकारा चाहिए. हमारे देश के कुछ कब्जों में इन अवैध प्रवासियों का कब्जा है. हमें इनसे छुटकारा चाहिए और हम इन्हें देश से बाहर निकालकर रहेंगे. – ट्रंप ने कहा कि यह समय बड़े सपनों और बोल्ड फैसलों का है. लेकिन अब हमारा मकसद अमेरिका को फिर से अफोर्डेबल बनाना है. अब हमारा देश Woke नहीं रहेगा. – अमेरिका राष्ट्रपति ने कहा कि कनाडा, मेक्सिको, भारत और दक्षिण कोरिया बहुत टैरिफ लगाते हैं. हम दो अप्रैल से कनाडा, मेक्सिको, चीन और भारत पर रेसिप्रोकल टैक्स लगाएंगे. जो हम पर टैक्स लगाएंगे, हम भी उन पर उतना ही टैक्स लगाएंगे. – डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हमसे उगाहे गए पैसों को वसूल कर देश की महंगाई को काबू में करेंगे. मैं अभी तक बाइडेन की असफल नीतियों को दुरुस्त करने में लगा हुआ है. – अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के संबोधन के बीच डेमोक्रेट सांसद Al Green को संसद से बाहर का रास्ता दिखाया गया. उन्हें राष्ट्रपति के संबोधन में व्यवधान डालने के लिए बाहर किया गया. – ट्रंप ने कहा कि अब सिर्फ दो ही जेंडर होंगे महिला और पुरुष. मैंने पुरुषों के महिला खेल खेलने पर प्रतिबंध लगा दिया है. – अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने संबोधन में फ्री स्पीच की भी बात की. ट्रंप ने कहा कि मैंने कुछ दिन पहले अंग्रेजी भाषा को एकमात्र आधिकारिक भाषा बनाया. गल्फ ऑफ मेक्सिको को गल्फ ऑफ अमेरिका किया. – अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि हमने फैसला किया है कि हर एक नया फैसला लेने पर पुराने 100 फैसलों को रद्द किया जाएगा. – ट्रंप ने कहा कि यह बड़े सपनों और बोल्ड एक्शन का समय है. DOGE इसमें बेहतरीन काम कर रहा है. हमने बेहूदा नीतियों को खत्म कर दिया है. भ्रष्ट हेल्थ पॉलिसी को भी खत्म कर दिया है. बाइडेन सरकार की उन नीतियों को तुरंत प्रभाव से खत्म किया है, जिससे देश को फायदा नहीं हो रहा था. – ट्रंप ने कहा कि अमेरिका मोमेंटम वापस आ गया है. हमारी रूह वापस आ गई है. हमारा गौरव वापस आ गया है. हमारा विश्वास लौट आया है और अब अमेरिकी लोग अपने सपने पूरे कर पाएंगे. – ट्रंप ने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि हमने सिर्फ 43 दिनों में वह कर दिखाया है, जो पिछली सरकारों ने चार साल में भी नहीं किया. – राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि America is Back. – … Read more

ट्रंप ने यूक्रेन की आर्मी मदद पर लगाई रोक, अब पुतिन से कैसे लोहा लेंगे जेलेंस्की

न्यूयॉर्क रूस और यूक्रेन के बीच लगभग तीन साल से युद्ध चल रहा है। इस दौरान अमेरिका ने यूक्रेन को हर तरह से मदद दी है। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत के बाद हालात पूरी तरह से बदल गए हैं। हाल ही में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने अमेरिका का दौरा किया और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात की थी। लेकिन इस दौरान दोनों के बीच जमकर बहस हुई, जिसके बाद जेलेंस्की व्हाइट हाउस से बिना प्रेस वार्ता के निकल गए। अब राष्ट्रपति ट्रम्प ने जेलेंस्की को झटका देते हुए यूक्रेन को मिलने वाली मिलिट्री मदद पर रोक लगा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति निवास व्हाइट हाउस ने इस संबंध में जानकारी दी है। व्हाइट हाउस का कहना है कि पिछले सप्ताह यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की केसाथ तीखी बहस के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन को मिलने वाली सभी तरह की मिलिट्री मदद पर रोक लगा दी है। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक अमेरिका अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ तौर पर कह दिया है कि उनका ध्यान शांति पर है। हमें चाहिए कि हमारे साझेदार भी उस लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध हों। हम अपनी सहायता रोक रहे हैं, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह समाधान में योगदान दे रही है। ट्रंप का यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। इसके मुताबिक ऐसी मदद से जो अमेरिका से अभी तक यूक्रेन नहीं पहुंची है, उसे भी रोक दिया गया है। इसमें पोलैंड तक पहुंच चुका सामान भी शामिल है। यूक्रेन और अमेरिका ने नहीं दिया जवाब व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के मुताबिक, यूक्रेन को रोकी गई मदद तब तक बहाल नहीं की जाएगी। जब तक राष्ट्रपति ट्रंप को यह यकीन नहीं हो जाता कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की वास्तव में शांति चाहते हैं। यूक्रेन को सैन्य मदद रोके जाने को लेकर फिलहाल अमेरिकी रक्षा विभाग और न ही राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से कोई टिप्पणी आई है। वहीं अमेरिकी सहायता रोके जाने पर यूक्रेन राष्ट्रपति जेलेंस्की की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। ट्रंप प्रशासन के एक अधिकारी का कहना है कि इस सहायता पर रोक लगाना पूरी तरह से स्थाई नहीं है। यह एक विराम है। एक अरब डॉलर की मदद रुकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे एक अरब डॉलर के हथियार और गोला-बारूद संबंधी मदद पर असर पड़ सकता है। इन्हें जल्द ही यूक्रेन को डिलीवर किया जाना था। इधर यूक्रेनी अधिकारियों का कहना है कि उसके पास सिर्फ गर्मियों तक रूस से लड़ने के लिए आपूर्ति है। ऐसे में रूस से लडाई के लिए यूक्रेन संसाधनों की कमी से जूझ सकता है। यूरोपीय देशों पर बढ़ेगा यूक्रेन की मदद का दबाव रूस के खिलाफ युद्ध में अब अमेरिका के यूक्रेन की मदद नहीं करने से यूरोपीय देशों पर यूक्रेन की मदद का दबाव बनेगा। अब तक कई यूरोपीय देशों ने इस युद्ध में यूक्रेन की मदद की है, लेकिन उतनी नहीं जितनी अमेरिका ने की है। अमेरिका ने इस युद्ध की शुरुआत से ही यूक्रेन को वित्तीय सहायता के साथ ही सैन्य सहायता भी मुहैया कराई है। लेकिन अब इस पर रोक लगा दी गई है। जिससे यूरोपीय देशों पर इस युद्ध में यूक्रेन को कमजोर न पड़ने देने का दबाव बनेगा। रूस को मिलेगा अमेरिका का सीधा समर्थन ट्रंप और जेलेंस्की की बहस के बाद अमेरिका और यूक्रेन में तकरार आ गई है। इस बहस का सीधा फायदा रूस को मिलेगा। ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अच्छे दोस्त हैं। ट्रंप के फिर से राष्ट्रपति बनने के बाद से ही उनका झुकाव रूस की ओर रहा है। अब इस युद्ध में अमेरिका की तरफ से रूस को सीधा समर्थन मिल सकता है। हालांकि अमेरिका, रूस की इस युद्ध में कोई मदद नहीं करेगा, लेकिन अमेरिका की तरफ से रूस को समर्थन जरूर मिलेगा। व्हाइट हाउस की तरफ से कहा गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप का मकसद शांति स्थापित करना है। हम चाहते हैं कि हमारा सहयोगी भी शांति के लिए प्रतिबद्ध हो। आज हम अपनी सहायता को रोक रहे हैं और उसकी समीक्षा कर रहे हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह समाधान में सहयोग दे रही है। इधर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यूक्रेन की मदद करने पर पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन और उनके प्रशासन की भी जमकर आलोचना की है। अमेरिका और यूक्रेन के बीच खनिज सौदे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, '…यह हमारे लिए बहुत बड़ी बात है क्योंकि बाइडेन ने बहुत ही मूर्खतापूर्ण तरीके से एक देश को युद्ध लड़ने के लिए 350 बिलियन डॉलर दे दिए… हमें कुछ नहीं मिला… हम 350 बिलियन डॉलर से अपनी पूरी अमेरिकी नौसेना का पुनर्निर्माण कर सकते थे…' recent visitors 46

अमेरिका ने यूक्रेन का समर्थन करने से किया इनकार

न्यूयॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को यूक्रेन युद्ध पर एक नया रुख अपनाया, जब वॉशिंगटन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में यूक्रेन पर आक्रमण की निंदा करने वाले प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद ये पहली बार है जब अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र के अंदर कीव को समर्थन देने से इनकार कर दिया। संघर्ष के तीन साल पूरे होने पर यूरोपीय समर्थन वाले प्रस्ताव को महासभा ने 93 वोटों के साथ स्वीकार कर लिया। लेकिन अमेरिका के प्रस्ताव का विरोध करने की चर्चा सबसे ज्यादा है, जो ट्रंप के नेतृत्व में वॉशिंगटन की विदेश नीति में बड़े बदलाव को दर्शाता है। प्रस्ताव के खिलाफ 18 सदस्य देशों ने मतदान किया, जबकि 65 सदस्यों ने इसमें हिस्सा नहीं लिया। वॉशिंगटन ने मतदान के दौरान मॉस्को और रूस के सहयोगियों उत्तर कोरिया और सूडान जैसे देशों का साथ दिया। नए पारित प्रस्ताव में युद्ध में कमी लाने, शत्रुता को शीघ्र समाप्त करने और यूक्रेन के विरुद्ध युद्ध का शांतिपूर्ण समाधान करने का आह्वान किया गया है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नागरिक आबादी समेत भारी विनाश और मानवीय पीड़ा शामिल है। भारत ने लिया किसका पक्ष ? यह प्रस्ताव यूक्रेन के लिए जीत के रूप में सामने आया है, लेकिन यह कीव के कम होते समर्थन को भी दिखाता है। इसे पिछले प्रस्तावों की तुलना में बहुत कम समर्थन मिला है। वहीं, भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मसौदा प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा नहीं लिया। भारत उन 65 संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों में शामिल था, जिन्होंने प्रस्ताव पर मतदान से परहेज किया। अमेरिका ने पेश किया अलग प्रस्ताव इस बीच अमेरिका ने भी एक प्रतिद्वंद्वी प्रस्ताव तैयार किया, जिसे संयुक्त राष्ट्र में रूसी राजदूत ने सही दिशा में एक कदम कहा था। लेकिन वॉशिंगटन के सहयोगी फ्रांस ने अमेरिकी पाठ में संशोधन पेश किया और महासभा को बताया कि पेरिस, ब्रिटेन समेत अन्य यूरोपीय देशों के साथ मौजूदा स्वरूप में इसका समर्थन नहीं कर पाएगा। अपने ही पाठ से पीछे हटा अमेरिका इन देशों ने अमेरिकी पाठ को फिर से लिखने के लिए दबाव डाला। इन परिवर्तनों ने यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता के प्रति प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की, जिसे अमेरिकी पाठ से हटा दिया गया था। अमेरिकी प्रस्ताव में इतना अधिक संशोधन किया गया कि वॉशिंगटन ने आखिरकार अपने खुद के पाठ पर मतदान से परहेज किया, जबकि सभा ने इसे पास कर दिया। recent visitors 69

ट्रंप का कहना है कि हम गाजा पट्टी को अपने अधिकार क्षेत्र में लेंगे, गाजा खाली कराना और पुनर्निर्माण काम कराना है फोकस

वाशिंगटन इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलने व्हाइट हाउस पहुंचे. इस दौरान दोनों नेताओं के बीच लंबी बातचीत हुई. इसी साल 20 जनवरी को कार्यालय में लौटने के बाद ट्रंप की यह किसी विदेशी नेता के साथ पहली बैठक थी. बैठक के बाद दोनों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हम चाहते हैं कि अमेरिका गाजा पट्टी का स्वामित्व ले और इसका विकास करे. उन्होंने कहा कि अमेरिका देश युद्धग्रस्त फिलिस्तीनी क्षेत्र गाजा पट्टी पर कब्जा करेगा और इसका विकास करेगा. साथ ही इसका मालिकाना हक रखेगा. वहीं ट्रंप के साथ बोलते हुए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि रिपब्लिकन नेता का विचार ऐसा है जो इतिहास बदल सकता है और ट्रंप गाजा के लिए एक अलग भविष्य की कल्पना करते हैं. गाजा के लोगों को नौकरियां और घर देंगे: ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "हम गाजा पर अपना अधिकार जताएंगे और साइट पर मौजूद सभी खतरनाक बमों और अन्य हथियारों को नष्ट करने की जिम्मेदारी लेंगे. हम नष्ट हो चुकी इमारतों को गिरा देंगे और एक ऐसा आर्थिक विकास करेंगे जो क्षेत्र के लोगों को असीमित संख्या में नौकरियां और आवास प्रदान करेगा." क्षेत्र में किसी भी सुरक्षा शून्यता को भरने के लिए सैनिकों को तैनात करने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "हम वही करेंगे जो आवश्यक है. यदि यह आवश्यक है, तो हम ऐसा करेंगे". ट्रंप ने कहा कि वह अपनी विकास योजना के बाद गाजा में दुनिया भर के लोगों के रहने की कल्पना करते हैं. उन्होंने कहा कि वह मध्य पूर्व की अपनी भावी यात्रा के दौरान गाजा, इज़राइल और सऊदी अरब जाने की योजना बना रहे हैं. हालांकि, उन्होंने कोई समय निर्दिष्ट नहीं किया. 'गाजा पूरी तरह विध्वंस स्थल' जब उनसे उनके प्रस्ताव पर फिलिस्तीनी और अरब नेताओं की प्रतिक्रिया के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "गाजा की बात कभी कामयाब नहीं हुई. यह पूरी तरह विध्वंस स्थल है. अगर हम सही ज़मीन का टुकड़े को ढूंढ़ सकें और उस क्षेत्र में बहुत सारा पैसा लगाकर कुछ बहुत अच्छी जगहें बना सकें, तो यह पक्का है. मुझे लगता है कि यह गाजा वापस जाने से कहीं बेहतर होगा. यहां के लोग गाजा छोड़ना पसंद करेंगे. मुझे लगता है कि वे रोमांचित होंगे. मुझे नहीं पता कि वे (फिलिस्तीनी) कैसे रहना चाहेंगे." राष्ट्रपति से जब इस क्षेत्र पर अमेरिका के लंबे समय तक नियंत्रण के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "मैं दीर्घकालिक स्वामित्व की स्थिति देखता हूं." ट्रंप ने सुझाव दिया कि अमेरिका द्वारा ऐसा करने से क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा और उन्होंने कहा, "यह कोई हल्के में लिया गया निर्णय नहीं है. मैंने जिन लोगों से बात की है, वे सभी इस विचार से खुश हैं कि संयुक्त राज्य अमेरिका के पास उस भूमि का एक टुकड़ा हो." गाजा को लेकर ट्रंप का 5 प्वॉइन्ट प्लान? इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से व्हाइट हाउस में मुलाकात के बाद प्रेस को संबोधित करते हुए ट्रंप ने एक बार फिर गाजा पट्टी को खाली करवाने की बात दोहराई. गाजा खाली कराना और पुनर्निर्माण काम कराना है फोकस उन्होंने कहा कि फिलिस्तीनियों को गाजा पट्टी खाली करनी होगी. उन्हें मिस्र, जॉर्डन और अन्य देशों में स्थाई तौर पर बस जाना चाहिए. अब गाजा रहने लायक नहीं रहा. मैंने सुना है कि गाजा उनके लिए बदकिस्मत है. वे वहां नरक की तरह रहते हैं. वे नरक में रह रहे हैं. गाजा के भविष्य में फिलिस्तीनी नहीं हैं. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने कई महीनों से गाजा की स्टडी की है. बहुत करीब से स्टडी की है. गाजा में फिलिस्तीनियों के पास कोई विकल्प नहीं है. उनके पास क्या है? वहां बस मलबा है. फिलिस्तीनियों को गाजा के बजाए किसी खूबसूरत जगह शिफ्ट हो जाना चाहिए. हम गाजा पर नियंत्रण हासिल कर वहां मौजूद सभी खतरनाक बिना फटे बमों और अन्य हथियारों को नष्ट करने से लेकर साइट को समतल करने और नष्ट इमारतों का मलबा हटाने की जिम्मेदारी निभाएंगे. गाजा Riviera of Middle East में होगा तब्दील ट्रंप ने कहा कि गाजा को खाली करवाने के बाद यहां पर जोर-शोर से पुनर्निर्माण का कार्य करवाया जाएगा. हम गाजा को Riviera of Middle East में तब्दील कराएंगे. ट्रंप ने कहा कि यह फैसला पूरी गंभीरता से लिया गया है. मैंने जिनसे भी इस ब्लूप्रिंट के बारे में बात की,उन्हें यह पसंद आया है. गाजा पर अमेरिकी कब्जे के बाद इस क्षेत्रा के पुनर्निर्माण और फिर यहां रोजगार के हजारों मौके उपलब्ध कराकर इसका विकास किया जाएगा. गाजा दुनियाभर के लोगों का घर बन सकता है. ट्रंप ने कहा कि हम गाजा को मिडिल ईस्ट का रिवेरा बनाने पर फोकस करेंगे. रिवेरा दरअसल इटली का एक शब्द है, जिसका मतलब है कोस्टलाइन यानी समुद्री तट. फ्रेंच रिवेरा और इटैलियन रिवेरा दुनियाभर में अपने पर्यटन के लिए मशहूर है. इसी तर्ज पर ट्रंप गाजा को पर्यटन हब के तौर पर विकसित करना चाहते हैं. हमास का खात्मा ट्रंप ने कहा कि इजरायल पर हमास के हमले ने कई निर्दोष लोगों की जिंदगियां छिनी है. आज फिलिस्तीनियों ने जो कीमत चुकाई है, उसका जिम्मेदार हमसा ही है. ऐसे में गाजा को आतंक से मुक्त करना होगा. इसके लिए जरूरी है कि गाजा को खाली कराया जाए. ईरान भी है ट्रंप की हिटलिस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति के गाजा को लेकर 5 प्वॉइन्ट ब्लूप्रिंट में ईरान भी है. ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरान ने उन्हें मारने की कोशिश की तो उसे इसका अंजाम भुगतना होगा. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपने सलाहकारों को निर्देश दिया है कि अगर ईरान उनके ऊपर हमला करता है तो उसे तबाह कर दिया जाए. ट्रंप ने ईरान की कमर तोड़ने के लिए एक एक्जीक्यूटिव ऑर्डर पर दस्तखत भी किए हैं जिसमें अमेरिकी सरकार को ईरान पर अधिकतम दबाव बनाने के लिए कहा गया है. बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात के बाद इजरायली पीएम नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल पहले कभी इतना ताकतवर नहीं रहा जबकि ईरान कभी इतना कमजोर नहीं रहा. मैंने राष्ट्रपति ट्रंप से हमारे इलाके में शांति लाने और हमारे भविष्य को बचाने पर चर्चा की. … Read more

राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को खुली धमकी दी कहा अगर ईरान ने मुझे मारने की कोशिश की तो मैं उस देश को खत्म कर दूंगा

वॉशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकी दे दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान ने उन्हे मारने की कोशिश की तो वह देश को खत्म कर देंगे। अमेरिका ने ये भी संकेत दिए है कि अगर ईरान ने परमाणु हथियार से जुड़े परियोजनाओं को बंद नहीं किया तो अमेरिका उसपर और भी प्रतिबंध लगाएगा। ट्रंप ने ईरान पर और भी अधिक दबाव डालने के आदेश पर हस्ताक्षर भी किए। ईरान को ट्रंप की खुली धमकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने अपने सलाहकारों को निर्देश दिया है कि अगर ईरान उनके ऊपर हमला करता है तो उसे तबाह कर दिया जाए। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान ने मुझे मारने की कोशिश की तो मैं उसे खत्म कर दूंगा। उन्होंने कहा कि ईरान के पास ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकता है। हालांकि, ट्रंप ने ईरान के समकक्ष से मुलाकात की इच्छा भी जाहिर की। ट्रंप पर हो चुका है जानलेवा हमला बता दें कि ट्रंप को कई बार ईरान की ओर से धमकी मिल चुकी है। हाल ही में एक चुनावी रैली के दौरान ट्रंप पर जानलेवा हमला भी हुआ था। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का कहना था कि वह नहीं मानते की हत्या का प्रयास ईरान ने किया था। साल 2020 में ट्रंप ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर की एलीट शाखा कुद्स फोर्स का नेतृत्व करने वाले कासिम सुलेमानी की हत्या का आदेश दिया था। इसके बाद से ही ट्रंप की सुरक्षा को लेकर अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी काफी अलर्ट रहती है। आशंका जताई जा रही है कि ट्रंप, ईरान की मुश्किलें बढ़ाने वाले हैं। ईरान आर्थिक संकट से जूझ रहा है। साल 2015 में अमेरिका से जब ईरान का परमाणु समझौता हुआ था, लेकिन 2018 में ट्रंप ने ईरान से परमाणु समझौता तोड़ दिया था। इसके बाद ईरान और अमेरिका के बीच रिश्ते काफी खराब हो गए। ईरान के राष्ट्रपति से मिलने की जताई इच्छा उन्होंने कहा कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकता है, लेकिन साथ ही उम्मीद जताई की तेहरान के साथ समझौता किया जा सकता है। ट्रंप ने ईरान के अपने समकक्ष से मिलने की इच्छा जताई, ताकि तेहरान को यह समझाने की कोशिश की जा सके कि वह परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश छोड़ दे। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन पर तेल-निर्यात प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करने में विफल रहने का आरोप लगाया है। ट्रंप के ऊपर खतरा अमेरिकी अधिकारी वर्षों से ट्रंप और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ ईरानी धमकियों पर नजर रख रहे हैं। ट्रंप ने 2020 में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर की एलीट शाखा कुद्स फोर्स का नेतृत्व करने वाले कासिम सुलेमानी की हत्या का आदेश दिया था। न्याय विभाग ने बीते साल नवम्बर में घोषणा की थी कि राष्ट्रपति चुनाव से पहले ट्रंप को मारने की ईरानी साजिश की नाकाम किया गया है। विभाग ने आरोप लगाया कि ईरानी अधिकारियों ने सितम्बर में 51 वर्षीय फरहाद शकेरी को ट्रंप की निगरानी करने और उनकी हत्या के लिए योजना बनाने का निर्देश दिया गया था। recent visitors 55