विष्णुदेव साय का दिल्ली का घर कहलाता था मिनी एम्स, मरीज के परिजनों के लिए करता था खाने की व्यवस्था

रायपुर  दस साल की उम्र में पिता को खोने के बाद छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णु देव साय के पास खेल-कूद और मौज-मस्ती के लिए समय ही नहीं था। चार भाइयों में सबसे बड़े होने के कारण उन्होंने तुरंत परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली थी। सीएम साय ने बताया कि शायद इसीलिए वह कभी व्यक्तिगत रूचियों पर ध्यान नहीं दे पाए और अब उन्हें केवल सामाजिक कार्यों में ही सुकून मिलता है। 26 साल की उम्र में बने सरपंच छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने परिवार और अपनी राजनीतिक यात्रा के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि युवावस्था में ही वह गांव के पंच चुन लिए गए थे और पांच साल बाद वह 1990 में 26 साल की उम्र में सरपंच बन गए। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं सरपंच बनूंगा।’’ हालांकि, इसके बाद उनका राजनीतिक सफर आगे बढ़ता रहा। साय तीन बार विधायक और चार बार सांसद चुने गए। साल 2023 में वह सत्ता के शिखर पर पहुंचे, जब उन्हें छत्तीसगढ़ का पहला आदिवासी मुख्यमंत्री चुना गया। उन्होंने कहा, ‘‘पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को भी आदिवासी मुख्यमंत्री कहा जाता है लेकिन उनके निधन तक उनका आदिवासी दर्जा विवाद में रहा।’’ 10 साल की उम्र में हो गया था निधन सीएम साय ने बताया कि ‘‘बचपन में मुझे खेल-कूद का मौका नहीं मिला क्योंकि 10 साल की उम्र में मेरे पिता का निधन हो गया था। उनके निधन के बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर आ गई क्योंकि मैं चार भाइयों में सबसे बड़ा था। मेरा सबसे छोटा भाई तब दो महीने का था। मेरे पिता के तीन भाई थे और वे सभी अलग-अलग गांवों में रहते थे। मुझे अपने छोटे भाइयों और मां की देखभाल के साथ-साथ हमारे गांव बगिया में खेती-किसानी का काम भी करना था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘तब मैंने खेती-किसानी करके अपने भाइयों को शिक्षित करने का फैसला किया ताकि वे जीवन में सफल हो सकें। मैंने कभी सरपंच बनने के बारे में नहीं सोचा था।’’ साय ने कहा कि उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई छोड़ दी और स्थानीय ग्रामीणों के कहने पर अपने गांव के पंच बन गए। उन्होंने कहा, ‘‘गांव के कुछ लोगों ने मुझे पंच बनने के लिए कहा और मैंने यह जिम्मेदारी संभाल ली। पांच साल तक मेरा काम देखने के बाद उन्होंने 1990 में मुझे निर्विरोध सरपंच चुन लिया।’’ बीजेपी ने दिया टिकट उन्होंने कहा कि सरपंच बनने के छह महीने के भीतर ही राज्य में विधानसभा चुनाव हुआ और भाजपा के उम्मीदवार के रूप में चुनाव में उतारा गया। उन्होंने कहा, ‘‘मैं तब 25-26 साल का था और सीख रहा था। मैंने पार्टी से कहा कि ‘मैं विधायक बनने के लायक नहीं हूं।’ मैंने 1990 में तत्कालीन मध्य प्रदेश के जशपुर जिले की तपकारा सीट से चुनाव लड़ा और जीता। यह विधायक के रूप में मेरी यात्रा की शुरुआत थी।’’ साय 1993 में लगातार दूसरी बार तपकारा से चुने गए। 1998 में, उन्होंने पड़ोस के पत्थलगांव सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। बाद में वह लगातार चार बार – 1999, 2004, 2009 और 2014 में रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए। 2014 में केंद्र में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार बनने के बाद, उन्हें केंद्रीय इस्पात और खान राज्य मंत्री नियुक्त किया गया। मौजूदा विधानसभा में वह कुनकुरी सीट से विधायक हैं। कैसा रहा राजनीति सफर उन्होंने 2006 से 2010 तक और फिर जनवरी 2014 से उसी वर्ष अगस्त तक छत्तीसगढ़ बीजेपी के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। राज्य में 2018 में भाजपा की सत्ता जाने के बाद, उन्हें 2020 में फिर से प्रदेश अध्यक्ष के रूप में पार्टी का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने राजनीति में ‘जनसेवा’ के लिए प्रवेश किया। लोगों की बात सुनना और उनकी समस्याओं को हल करने का प्रयास करना अच्छा लगता है। जब मैं बीमार लोगों की मदद करता हूं तब मुझे बहुत संतुष्टि मिलती है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं राजनेता बनूंगा। मुझे जो भी जिम्मेदारी सौंपी गईं, मैंने उन्हें पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाया।’’ दिल्ली का घर कहलाता था मिनी एम्स सांसद रहते हुए दिल्ली में अपने आवास को ‘‘मिनी एम्स’’ कहे जाने को याद करते हुए, साय ने कहा, ‘‘दिवंगत भाजपा नेता दिलीप सिंह जूदेव दिल्ली में मेरे फ्लैट पर आते थे और वहां एम्स दिल्ली में भर्ती लोगों के रिश्तेदारों को ठहरा हुआ देखकर कहते थे कि आपने अपना घर ‘मिनी एम्स’ बना लिया है।’’ मरीज के परिजनों के लिए करता था खाने की व्यवस्था उन्होंने कहा, ‘‘जब मैं केंद्र में राज्य मंत्री था, तब मैं रोजाना 70-80 लोगों के भोजन की व्यवस्था करता था, जिनके परिजन अस्पताल में भर्ती होते थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी मैंने यहां कुनकुरी सदन की स्थापना की है, जहां राज्य भर से इलाज के लिए रायपुर आने वाले लोगों को विभिन्न प्रकार की सहायता और मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है।’’ परिवार के कई सदस्य राजनीति में साय राजनीतिक परिवार से आते हैं। उन्होंने बताया, ‘‘मेरा परिवार शुरू से ही राजनीति में रहा है। आजादी के बाद, मेरे दादा दिवंगत बुधनाथ साय 1947 से 1952 तक मनोनीत विधायक थे। मेरे चाचा (दादा के छोटे भाई के बेटे) दिवंगत नरहरि प्रसाद साय ने तीन बार विधायक के रूप में कार्य किया और सांसद (1977-79) भी चुने गए। उन्होंने जनता पार्टी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। बाद में मेरे चचेरे भाई रोहित साय भी विधायक चुने गए।’’ मुख्यमंत्री ने बताया कि उनके पिता के बड़े भाई दिवंगत केदारनाथ साय भी जनसंघ सदस्य के रूप में तपकारा से विधायक चुने गए थे। recent visitors 38

मुख्यमंत्री ने आज सहसपुर ग्राम पंचायत आयुष्मान आरोग्य मंदिर का औचक निरीक्षण किया

रायपुर प्रदेश में सुशासन और जनहितकारी योजनाओं के प्रभाव को धरातल पर परखने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय इन दिनों लगातार प्रदेश के विभिन्न इलाकों के दौरे पर हैं। इसी क्रम में आज उन्होंने जिला बेमेतरा के सहसपुर ग्राम पंचायत स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर का औचक निरीक्षण किया। बिना पूर्व सूचना के पहुंचे मुख्यमंत्री ने केंद्र में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं का जायजा लिया और वहां इलाज करा रहे मरीजों से सीधे संवाद कर उनकी स्थिति जानी। मुख्यमंत्री ने मितानिन दीदियों से चर्चा करते हुए संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सुरक्षित मातृत्व और नवजात के स्वास्थ्य के लिए यह आवश्यक है कि सभी प्रसव स्वास्थ्य संस्थानों में हों। मितानिनों को गांव-गांव जाकर महिलाओं को जागरूक करने और उन्हें अस्पताल में प्रसव के लिए प्रोत्साहित करने को कहा गया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने चिकित्सा स्टाफ को निर्देशित किया कि गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए दवाइयों और उपचार सामग्रियों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही नहीं होनी चाहिए और आमजन को समय पर, गुणवत्तापूर्ण उपचार मिले, यही राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि सरकार लगातार स्वास्थ्य सेवाओं को विस्तार देने का काम कर रही है। उन्होंने सभी स्वास्थ्य केंद्रों को और अधिक सशक्त बनाने की बात भी कही। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री साय सुशासन तिहार के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याण की बुनियादी संस्थाओं का निरीक्षण कर रहे हैं। उनका उद्देश्य है कि योजनाओं का वास्तविक लाभ हर अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और जमीनी स्तर की कमियों को तुरंत दूर किया जाए।   इस मौके पर विधायक ईश्वर साह, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद मौजूद रहे। recent visitors 64

धान के अतिरिक्त अन्य लाभप्रद फसलों की ओर बढें किसान- मुख्यमंत्री साय

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज सुशासन तिहार के तहत औचक निरीक्षण पर बेमेतरा जिले के ग्राम सहसपुर आये। इस दौरान वे सहसपुर ग्राम के उत्कृष्ट किसान रोहित साहू के खेत में भी पहुंचे। मुख्यमंत्री को साहू ने बताया कि वे पिछले 9 साल से केला और पपीता की खेती कर रहे हैं, जिससे वे लाखों का मुनाफा कमा रहे हैं और 15-20 लोगों को अपने खेत में रोजगार भी दे रहे हैं। मुख्यमंत्री साय को कृषक साहू ने अपने खेत के ताजे केला और पपीता भेंट किये। मुख्यमंत्री को उन्होंने बताया कि वे 5 एकड़ में केला और साढ़े तीन एकड़ में पपीता की खेती कर रहे हैं। जिससे वे केले से प्रति एकड़ डेढ़ लाख रुपये व पपीता से 1 लाख रुपये तक का मुनाफा कमा रहे हैं। मुख्यमंत्री को साहू ने बताया कि केला और पपीता की खेती से वे धान के मुकाबले अधिक मुनाफा कमा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि धान के अतिरिक्त अन्य लाभप्रद फसलों की ओर भी किसानों को बढ़ने की जरूरत है। छत्तीसगढ़ की मिट्टी बहुत उर्वरा है। इस तरह किसान कृषि से और लाभ कमा पाएंगे। मुख्यमंत्री ने कृषक साहू की सराहना करते हए कहा कि उनकी खेती सभी किसानों के लिए प्रेरणादायी है। recent visitors 40

मुख्यमंत्री ने बरगद की छांव में खाट पर बैठ जाना ग्रामीणों का हाल-चाल, विद्युत सब स्टेशन, हायर सेकंडरी स्कूल भवन और प्राचीन मंदिर के सौंदर्यीकरण की घोषणा

रायपुर : मुख्यमंत्री अचानक पहुंचे बेमेतरा के सहसपुर, लिया ग्रामीणों से सीधा फीडबैक मैं आप लोगों की दुख-तकलीफ जानने आया हूँ- मुख्यमंत्री साय गांव में सहसा गूंजी हेलीकॉप्टर की आवाज तो अचंभित ग्रामीण निकले घरों से अपने मुखिया से मिलने उमड़ी भीड़ मुख्यमंत्री ने बरगद की छांव में खाट पर बैठ जाना ग्रामीणों का हाल-चाल, विद्युत सब स्टेशन, हायर सेकंडरी स्कूल भवन और प्राचीन मंदिर के सौंदर्यीकरण की घोषणा रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सुशासन तिहार के तीसरे चरण के दूसरे दिन हेलीकॉप्टर से अचानक बेमेतरा जिले के सहसपुर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से योजनाओं का सीधा फीडबैक लिया। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से कहा कि मैं आप लोगों के बीच आपकी दुख-तकलीफ जानने आया हूँ। ग्राम- सहसपुर में मुख्यमंत्री के आने की कोई पूर्वयोजना नहीं थी। ऐसे में जब गांव में सहसा हेलीकॉप्टर की आवाज गूंजी तो अचंभित ग्रामीण अपने घरों से निकले। अपने मुखिया से मिलने लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। ग्रामीणों ने खुशी में कहा- राम-राम जी गा मुख्यमंत्री जी ! और सदाबहार फूल की माला और चंदन-आरती के साथ उनका स्वागत किया।   बरगद की छांव में लगी मुख्यमंत्री की चौपाल मुख्यमंत्री साय ने ग्राम- सहसपुर में ग्रामीणों से पुराने बरगद की छांव में खाट पर बैठ संवाद किया। उन्होंने लोगों से शासन की योजनाओं प्रधानमंत्री आवास योजना, महतारी वंदन योजना, नल जल योजना, धान खरीदी, स्कूल में बच्चों की शिक्षा सहित अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार को अभी डेढ़ साल हुए हैं इस अवधि में हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कई गारंटी को पूरा किया है। सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट में हमने 18 लाख आवास को स्वीकृति दी।किसानों को 2 साल का बकाया बोनस दिया। 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी भी की जा रही है।   मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार का ये तीसरा चरण है। शुरुआती चरणों में लोगों से उनकी समस्याओं के सम्बंधित आवेदन लिए गए। इन आवेदनों का अधिकारियों द्वारा लगातार निराकरण किया जा रहा है। अब मैं स्वयं आप सभी के बीच सरकार के अधिकारियों के साथ पहुंचा हूँ ताकि आप सीधे मुझ तक अपनी बात पहुंचा सकें। पूनम साहू ने कहा- महतारी वंदन से मिली बड़ी मदद मुख्यमंत्री साय के चौपाल में महतारी वंदन से मिल रही सहायता पर श्रीमती पूनम साहू ने अपनी बात रखी।  पूनम ने कहा कि महतारी वंदन योजना से मिली राशि से परिवार और बच्चों की जरूरतों को पूरी करने में बड़ी मदद मिलती है। हर माह महतारी वंदन योजना की राशि नियमित रूप से मिलती है। सहसपुर ग्राम पंचायत में मुख्यमंत्री ने की घोषणाएं मुख्यमंत्री ने सहसपुर में ग्रामीणों से बरगद के नीचे खाट पर बैठकर संवाद किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों की मांग पर गांव के हायर सेकेंडरी स्कूल के लिए नए भवन को स्वीकृति दी। साथ ही उन्होंने 13 वीं-14 वीं शताब्दी में फणी नागवंशी राजाओं द्वारा निर्मित शिव मंदिर व हनुमान मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करेंगे। महाशिवरात्रि के मेले में मैं खुद आऊंगा। मुख्यमंत्री साय ने सहसपुर में 33 केव्ही विद्युत सब स्टेशन की भी घोषणा की।   इस अवसर पर विधायक ईश्वर साहू, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह और मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानन्द उपस्थित थे। recent visitors 35

देश के पहले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डेटा सेंटर पार्क की नींव नवा रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रखी

भारत का पहला एआई डेटा सेंटर पार्क नवा रायपुर में डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम। देश के पहले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डेटा सेंटर पार्क की नींव नवा रायपुर  में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने रखी रायपुर देश के पहले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डेटा सेंटर पार्क की नींव आज छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर के सेक्टर-22 में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने रखी। यह डेटा सेंटर पार्क 13.5 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है, जिसमें 2.7 हेक्टेयर हिस्सा विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) के रूप में विकसित होगा। रैक बैंक डेटा सेंटर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित यह परियोजना पूरी तरह एआई सेवाओं को समर्पित होगी। पहले चरण में 5 मेगावाट क्षमता से शुरू होकर इसे 150 मेगावाट तक विस्तारित किया जाएगा। भविष्य में इस परियोजना में लगभग 2000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश संभावित है। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस डेटा सेंटर को हरित और ऊर्जा दक्ष तकनीक के अनुरूप डिजाइन किया गया है। यहां से न केवल स्टोरेज और प्रोसेसिंग की सुविधा उपलब्ध होगी, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), हेल्थटेक, डिफेंस, फिनटेक और डेटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में अत्याधुनिक सेवाएं भी दी जाएंगी। पार्क में GPU आधारित हाई-एंड कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, रिकॉर्डिंग, लाइव डेटा स्ट्रीमिंग, और AI प्रॉसेसिंग जैसी विश्व स्तरीय सुविधाएं होंगी। इस परियोजना के जरिए लगभग 500 प्रत्यक्ष और 1500 अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर तैयार होंगे। खास बात यह है कि इसमें स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे छत्तीसगढ़ न केवल तकनीकी क्षेत्र में अग्रणी बनेगा बल्कि युवाओं के लिए नई संभावनाएं भी खुलेगीं। इस सेंटर के जरिए GPU आधारित हाई-एंड कंप्यूटिंग, लाइव डेटा स्ट्रीमिंग, एआई प्रोसेसिंग और डेटा एनालिटिक्स जैसी वैश्विक स्तर की सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी। इसका असर हेल्थटेक, फिनटेक, स्मार्ट एग्रीकल्चर और रक्षा क्षेत्र में बड़े बदलावों के रूप में दिखाई देगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि यह सिर्फ एक तकनीकी परियोजना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के भविष्य की नींव है। उन्होंने इसे राज्य के युवाओं, किसानों और आदिवासी समुदाय के लिए परिवर्तनकारी बताया। उन्होंने विश्वास जताया कि छत्तीसगढ़ अब डिजिटल भारत की धड़कन बनेगा। छत्तीसगढ़ के लिए क्या बदलेगा? * रोजगार की नई राहें: यह डाटा सेंटर पार्क आईटी, डाटा एनालिटिक्स, और तकनीकी रखरखाव जैसे क्षेत्रों में हजारों नौकरियां पैदा करेगा। छत्तीसगढ़ के युवा अब दिल्ली-मुंबई जाए बिना अपने घर पर ही तकनीकी करियर बना सकेंगे। * किसानों की मदद: AI तकनीक से किसानों को स्मार्ट खेती, मौसम की सटीक जानकारी, और फसल प्रबंधन में मदद मिलेगी। इससे उनकी मेहनत का ज्यादा फल मिलेगा। * आदिवासियों को डिजिटल ताकत: दूरदराज के आदिवासी इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य, और सरकारी सेवाएं डिजिटल रूप से आसानी से पहुंचेंगी। * आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़: यह पार्क राष्ट्रीय और वैश्विक डाटा ट्रैफिक को संभालेगा, जिससे सरकारी सेवाएं तेज होंगी और राज्य डिजिटल रूप से आत्मनिर्भर बनेगा। recent visitors 32

शिक्षकों ने कहा – मुख्यमंत्री ने निभाई मुखिया की भूमिका: सुशासन और संवेदनशीलता का दिया उदाहरण

 हर युवा के चेहरे की चिंता हमने पढ़ी, हर परिवार की पीड़ा हमने समझी और उसका समाधान करने का किया प्रयास : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री साय की पहल से छत्तीसगढ़ के बर्खास्त बीएड शिक्षकों के जीवन में लौटी खुशियाँ: 26 सौ से अधिक युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने का ऐतिहासिक निर्णय शिक्षकों ने कहा – मुख्यमंत्री ने निभाई मुखिया की भूमिका: सुशासन और संवेदनशीलता का दिया उदाहरण मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का सहायक शिक्षकों ने जताया आभार रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल से छत्तीसगढ़ के 26 सौ से अधिक बीएड अर्हताधारी बर्खास्त सहायक शिक्षकों के जीवन में खुशियां लौट आई है। प्रदेश सरकार ने बर्खास्त शिक्षकों को सहायक शिक्षक विज्ञान (प्रयोगशाला) के पद पर समायोजन करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस फैसले से राज्य के 2600 से अधिक युवाओं का भविष्य एक बार फिर संवर गया है।       मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज मुख्यमंत्री निवास में बर्खास्त सहायक शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात कर उनका आभार व्यक्त किया। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को ग़जमाला पहनाकर उनके प्रति कृतज्ञता जताई।        मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस मौके पर सभी शिक्षकों को शुभकामनाएं दीं और उनसे अपने दायित्व का निर्वहन पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बच्चों का और देश का भविष्य गढ़ना शिक्षकों का सबसे बड़ा कर्तव्य है। आप सभी अपने दायित्व के प्रति सचेत हों और इस भूमिका में सर्वोच्च योगदान दें।       मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार ने शिक्षकों की चिंता पहले दिन से की थी। आप हमारे प्रदेश के बच्चें है और आपके भविष्य को सुरक्षित करने का संकल्प हमने पहले से ले लिया था। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह कदम छत्तीसगढ़ के भविष्य निर्माताओं को नया संबल देगा और शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाएगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि ये युवा शिक्षक आने वाले वर्षों में प्रदेश की नई पीढ़ी को दिशा देंगे और छत्तीसगढ़ को विकास के पथ पर अग्रसर करने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। यह निर्णय शिक्षकों के   उज्जवल, सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य की एक नई शुरुआत है।      उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी के साथ आपके नौकरी के संबंध में लगातार चर्चा होती थी। हमारे मुखिया इतने संवेदनशील है कि उन्होंने पहले ही दिन कहा था कि जितना भी आर्थिक बोझ पड़े राज्य सरकार अपने युवाओं के भविष्य को खतरे में नहीं डालेगी। उन्होंने कहा कि आपके परिजन भी लगातार हमसे संपर्क कर अपनी चिंता व्यक्त करते थे और आज मुख्यमंत्री ने उन सभी की चिंता को दूर करते हुए अपना वादा निभाया। मुख्यमंत्री जी ने न केवल अपना वादा निभाया है बल्कि अपनी इच्छा शक्ति से सुशासन को स्थापित करने का कार्य किया है। उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री साय के इस ऐतिहासिक निर्णय ने पूरे देश में मिसाल कायम की है।        इस अवसर पर युवाओं ने कहा कि नौकरी जाने के बाद वे अपने भविष्य को लेकर गहरी आशंका में थे और लगातार मानसिक पीड़ा झेल रहे थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री साय की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता ने उन्हें संबल दिया। शिक्षकों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने हर बार उनकी बात सुनी और भरोसा दिलाया कि सरकार उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने हमसे वादा किया था कि हमारे बेटे-बेटियों का भविष्य सुरक्षित किया जाएगा और आज उन्होंने अपना वादा निभाकर एक अभिभावक की जिम्मेदारी पूरी की है। प्रतिनिधिमंडल में शामिल युवा शिक्षकों ने कहा कि मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में सरकार ने वास्तव में सुशासन और संवेदनशीलता का परिचय दिया है। हमें गर्व है कि आज हमारे प्रदेश में ऐसी सरकार है जो हमारी पीड़ा को समझती है और संवेदनशीलता के साथ हमारी समस्याओं का समाधान करती है। recent visitors 54

श्रमिकों की आशा बने मुख्यमंत्री साय जिले में हो रही बदलाव की नई बयार

रायपुर अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस, एक मई, एक ऐसा दिन है जो श्रम की महत्ता, मेहनतकश हाथों के सम्मान और सामाजिक न्याय की भावना को उजागर करता है। यह दिवस न केवल इतिहास में दर्ज है बल्कि 1886 के शिकागो आंदोलन को भी याद दिलाता है, जिसमें मजदूरों ने 8 घंटे काम, 8 घंटे विश्राम और 8 घंटे आत्म विकास के अधिकार की मांग की थी, बल्कि यह आज भी उस संघर्ष को व्यक्त करता है जो श्रमिक अपने अधिकारों, सम्मान और सुरक्षा के लिए हर दिन करते हैं । एमसीबी जिले में श्रमिक कल्याण योजनाओं का दिख रहा प्रभाव छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला जो छत्तीसगढ़ के नए जिलों में से एक है, यहाँ के मेहनतकश श्रमिकों की मेहनत और लगन इस क्षेत्र की आर्थिक धड़कन बन चुकी है। इस जिले की सड़कों से लेकर निर्माण स्थलों तक, खेतों से लेकर खदानों तक श्रमिकों का पसीना इस इलाके की तरक्की में संजीवनी की तरह काम करता है। जब हम इस क्षेत्र में पंजीकृत श्रमिकों की संख्या को देखते हैं, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि यह जिला श्रमिक शक्ति का केंद्र बन चुका है। मंडल स्तर पर भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल (BOC) के अंतर्गत 30,534 श्रमिक पंजीकृत हैं और असंगठित कर्मकार कल्याण मंडल में 30,118 श्रमिकों का नाम दर्ज है। जिला गठन के बाद भी भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल में 6,257 और असंगठित क्षेत्र में 4,601 श्रमिकों का पंजीकरण हुआ है। कुल मिलाकर 71,510 श्रमिकों का पंजीकरण होना इस बात का प्रमाण है कि सरकार की योजनाएं लोगों तक पहुँच रही हैं और श्रमिक अपने हक के प्रति जागरूक हो रहे हैं। ब्लॉक स्तर पर बात करें तो मनेंद्रगढ़ में 26,065 श्रमिक पंजीकृत हैं, वहीं खड़गवां ब्लाक में 22,847 और भरतपुर ब्लाक में 10,739 श्रमिक पंजीकृत है, ये आँकड़े न केवल प्रशासनिक सक्रियता को दर्शाते हैं बल्कि यह भी प्रमाणित करते हैं कि श्रमिकों की सामाजिक और आर्थिक भागीदारी कितनी अहम है। इसी उद्देश्य से छत्तीसगढ़ शासन और भारत सरकार के संयुक्त प्रयासों से अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। श्रमिकों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की कई महत्वपूर्ण योजनाएं है लागू छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा श्रमिकों के लिए संचालित योजनाएं श्रम की गरिमा को बढ़ावा देने और जीवन स्तर सुधारने की दिशा में सराहनीय पहल हैं। महतारी जतन योजना के तहत अब तक 1,351 श्रमिक महिलाएं लाभान्वित हो चुकी हैं। यह योजना गर्भवती महिलाओं को पोषण और प्रसवपूर्व देखभाल हेतु वित्तीय सहायता देती है, ताकि मातृत्व और शिशु जीवन सुरक्षित और स्वस्थ रह सके। मुख्यमंत्री सायकल सहायता योजना के तहत 2,672 विद्यार्थियों को साइकिल प्रदान की गई है, जिससे उन्हें स्कूल जाने में सुविधा हो और शिक्षा बाधित न हो। मुख्यमंत्री श्रमिक औजार सहायता योजना के अंतर्गत 1,887 श्रमिकों को उनके कार्य के अनुरूप औजार उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे वे आत्मनिर्भर होकर कार्य में दक्षता ला सकें। मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना के तहत 306 महिलाओं को स्वरोजगार हेतु सिलाई मशीन दी गई है, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त बन रही है। वहीं श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना शुरू की गई, जिसके तहत 3,536 बच्चों को छात्रवृत्ति मिली है। इससे शिक्षा की ओर रुझान बढ़ा है और भविष्य की राहें खुली हैं। मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना में 211 छात्र-छात्राओं को बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक लाने पर प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। इसके साथ ही मुख्यमंत्री निर्माण मजदूर कौशल विकास योजना में 1,031 श्रमिकों को प्रशिक्षण देकर उन्हें नई तकनीकों और कार्य दक्षता की जानकारी दी गई है, जिससे वे बेहतर रोज़गार के अवसर प्राप्त कर सकें। सुरक्षा उपकरण सहायता योजना के अंतर्गत 1,230 निर्माण श्रमिकों को हेलमेट, जैकेट, सेफ्टी शूज़ आदि दिए गए, जिससे उनके कार्यस्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। वही मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना के अंतर्गत 78 श्रमिक परिवारों को राहत दी गई, जिनके सदस्य या तो दिव्यांग हुए या जिनकी मृत्यु कार्य के दौरान हो गई हो । मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण योजना के तहत 494 लड़कियों को विवाह, शिक्षा या स्वरोजगार हेतु आर्थिक सहायता दी गई। वृद्ध श्रमिकों को भी सरकार ने नहीं भुलाया, उन्हें मुख्यमंत्री श्रमिक सियान सहायता योजना के अंतर्गत पेंशन स्वरूप 56 लाभार्थियों को सहायता दी जा रही है । इसके अतिरिक्त बच्चों को निःशुल्क गणवेश एवं पुस्तक कॉपी सहायता योजना से 507 छात्र लाभान्वित हुए, जिससे वे गरिमामय तरीके से शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे श्रमिक बच्चों को निःशुल्क कोचिंग सहायता योजना के अंतर्गत 8 छात्रों को संसाधन व मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया है। निर्माण श्रमिकों को आवास हेतु मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना के तहत 7 श्रमिकों को घर बनाने में मदद मिली है । केंद्र सरकार की श्रमिक कल्याण योजना से भी हो रहे है लाभान्वित केंद्र सरकार की योजनाओं की बात करें तो प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के अंतर्गत 709 श्रमिकों को नाममात्र प्रीमियम पर 2 लाख का जीवन बीमा कवर प्रदान किया गया है। वहीं प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत 1,412 श्रमिकों को दुर्घटना बीमा का लाभ मिला है, जिसमें आकस्मिक मृत्यु या स्थायी विकलांगता की स्थिति में 2 लाख तक की सहायता दी जाती है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार की एक और उल्लेखनीय पहल है “शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न सहायता योजना“ जिसका शुभारंभ 29 मार्च 2025 को मनेंद्रगढ़ नगर पालिका परिषद परिसर में किया गया। इस योजना के अंतर्गत प्रतिदिन 200 से 250 श्रमिकों को मात्र 05 रुपए में भरपेट भोजन उपलब्ध कराया जाता है। यह न केवल भूख की समस्या का समाधान है, बल्कि यह श्रमिकों को आत्मसम्मान और गरिमा के साथ जीवन जीने की राह भी देता है। छत्तीसगढ़ सरकार विशेषकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में श्रमिकों के कल्याण हेतु प्रतिबद्ध है। इस अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर हम सभी का कर्तव्य बनता है कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करें, उन्हें सम्मान दें और उनके जीवन को बेहतर बनाने में सहभागी बनें। क्योंकि जब श्रमिक मुस्कुराता है, तो समाज मुस्कुराता है। जब श्रमिक सुरक्षित होता है, तो राष्ट्र सशक्त होता है। और जब श्रमिक प्रगति करता है, तो देश आगे बढ़ता है। recent visitors 38