हमारी कोशिश कि रजत जयंती वर्ष के स्थापना दिवस पर डाटा सेंटर पार्क का लोकार्पण भी हो सके : मुख्यमंत्री

छत्तीसगढ़ की एआई क्रांति देश के लिए मॉडल बनेगी: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री ने नवा रायपुर में एआई डाटा सेंटर पार्क का किया शिलान्यास हमारी कोशिश कि रजत जयंती वर्ष के स्थापना दिवस पर डाटा सेंटर पार्क का लोकार्पण भी हो सके : मुख्यमंत्री पूरी परियोजना में एक हजार करोड़ रुपए का होगा निवेश छत्तीसगढ़ के विकास को गति और युवा प्रतिभा को मिलेगा वैश्विक मंच रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शनिवार को नवा रायपुर अटल नगर के सेक्टर-22 में मेसर्स रैक बैंक के एआई डाटा सेंटर पार्क का शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई उद्योग नीति के कारण कम समय में ही देश विदेश से स्थापना हेतु उद्योग आ रहे हैं, यही गति रही तो बहुत जल्द विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत का निर्माण हो जाएगा। यह वर्ष छत्तीसगढ़ की स्थापना का रजत जयंती वर्ष है, हमारी कोशिश रहेगी कि इसी साल स्थापना दिवस पर डाटा सेंटर का लोकार्पण हो जाये। मुख्यमंत्री साय ने एआई डाटा सेंटर की स्थापना करने जा रहे मेसर्स रैक बैंक प्रबंधन के प्रति बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि एआई डाटा सेंटर छत्तीसगढ़ के लिए सूचना और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति लेकर आया है। यह हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के जय विज्ञान, जय अनुसंधान के मंत्र को साकार करेगा और विकसित छत्तीसगढ़ की बुनियाद बनेगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि देश का ग्रोथ इंजन छत्तीसगढ़ अपने कोयला, स्टील, आयरन ओर, ऊर्जा के लिए पहचाना ही जाता है। अब एआई, सेमीकंडक्टर और सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री से हमें वैश्विक पहचान मिल रही है। विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि हम एक ऐसा छत्तीसगढ़ बना रहे हैं, जहां के युवा सेमीकंडक्टर भी तैयार करेंगे और एआई सेवाएं भी देंगे। एआई डेटा सेंटर से प्रदेश में एआई आधारित सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा। उद्योग और व्यापार जगत के साथ इसका सीधा लाभ लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में मिलेगा। केंद्र सरकार के एआई मिशन का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने पिछले साल इंडिया एआई मिशन को मंजूरी दी थी। हमें गर्व है कि साल भर के भीतर हमने एआई को लेकर मोदी जी के विजन पर ठोस काम करके दिखाया है। आज कई सारे उद्योग डाटा से संचालित होते हैं। मोबाइल क्रांति के बाद अब एआई का दौर है। हमारे जीवन के हर क्षेत्र को एआई प्रभावित कर रहा है। ऐसे में छत्तीसगढ़ की एआई क्रांति देश के लिए मॉडल बनेगी। एआई डाटा सेंटर की स्थापना से एजुकेशन, चिकित्सा, मनोरंजन हो या कारखानों में होने वाला उत्पादन सभी को मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि एआई डाटा सेंटर की स्थापना से 500 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। जब कोई उद्योग लगता है तो रोजगार के कई दूसरे अवसर भी सृजित होते हैं। मेसर्स रैक बैंक द्वारा स्थापित यह एआई डाटा सेंटर 5 मेगावाट क्षमता का है। इस पूरी परियोजना में लगभग एक हजार करोड़ रुपए का निवेश होगा। एआई डाटा सेंटर में ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट लगाई जाएंगी। इससे एआई पर चलने वाले कंप्यूटर इंफ्रास्ट्रक्चर, सेमीकंडक्टर निर्माण को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि हम नवा रायपुर को आईटी मेडिसिटी और फार्मास्युटिकल हब के रूप में विकसित कर रहे हैं। डिजिटल कौशल को बढ़ावा देने के कैबिनेट में लिए गए निर्णय पर मुख्यमंत्री ने कहा कि दो दिन पहले ही हमारी कैबिनेट ने डिजिटल कौशल को बढ़ावा देने के लिए नवा रायपुर अटल नगर में स्टेट ऑफ आर्ट  नाइलिट (State of Art NIELIT) की स्थापना के राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (नाइलिट) को लगभग 10 एकड़ जमीन निःशुल्क आबंटित की है। आज एआई डाटा सेंटर के लिए भूमिपूजन हो या फिर कुछ दिनों पहले सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्टरिंग यूनिट का शिलान्यास। इससे पता चलता है कि हमारी सरकार ईज ऑफ डुईंग बिजनेस से स्पीड ऑफ बिजनेस की ओर कैसे आगे बढ़ रही है। कुछ महीने पहले ही हम नई औद्योगिक नीति लेकर आए। इस नई नीति का कमाल देखिए पांच महीने में प्रदेश को साढ़े चार लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश मिल चुका है। नवा रायपुर की इस धरती पर आज हम जिस एआई डाटा सेंटर की नींव रख रहे हैं वह नई औद्यगिक नीति के कारण संभव हुआ है। क्योंकि अब प्रदेश में उद्योग लगाने के लिए निवेशकों को अलग-अलग विभाग में चक्कर नहीं काटने पड़ते। राज्य में कोई बड़ा उद्योग लगाना हो या स्टार्टअप शुरू करना होगा, सिर्फ एक क्लिक करने पर ही कई सरकारी विभागों की मंजूरियां मिल जाती हैं। नई औद्योगिक नीति के जरिए हमने अगले पांच साल में लगभग चार लाख नये रोजगार पैदा करने का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारा प्रदेश ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में देश का नेतृत्व कर सकता है। हमारे पास आईटी, इंजीनियरिंग से जुड़े बेहतरीन संस्थान हैं। एनआईटी के साथ ही अब तो प्रदेश के आईटीआई में एआई आधारित पाठ्यक्रम पढ़ाए जा रहे हैं। एआई डाटा सेंटर परियोजनाओं के लिए बिजली की उपलब्धता काफी अहम होती है। सौभाग्य से हमारा प्रदेश पावर प्लस स्टेट है। मेसर्स रैक बैंक द्वारा अपनी इस परियोजना में सौर ऊर्जा का भी काफी इस्तेमाल किया जाएगा। ऐसे में प्रदेश का यह पहला एआई डाटा सेंटर देश में मॉडल बनेगा। पिछले दिनों मुझे मुंबई, दिल्ली, बैंगलुरु में इनवेस्टर मीट में शामिल होने का अवसर मिला। देशभर के उद्योगपति अब छत्तीसगढ़ में निवेश को लेकर उत्सुक हैं। एआई डाटा सेंटर छत्तीसगढ़ के विकास को गति देने के साथ युवा प्रतिभाओं की योग्यता को वैश्विक मंच प्रदान करेगा। इस अवसर पर उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, सीएसआईडीसी के चेयरमैन राजीव अग्रवाल, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, उद्योग सचिव रजत कुमार उपस्थित रहे । recent visitors 30

टैगिंग व रेडियम बेल्ट से पशुओं की पहचान हुई आसान

समवेत प्रयासों से जिले में आवारा पशुओं का हो रहा बेहतर प्रबंधन सड़कों पर अब कम दिखाई देते हैं जानवर, दुर्घटना में आई कमी टैगिंग व रेडियम बेल्ट से पशुओं की पहचान हुई आसान गांव-गांव में चौपाल लगाकर लोगों को किया जा रहा जागरूक जोगीपुर में तेजी से विकसित हो रहा गो अभ्यारण्य रोस्टर बनाकर अधिकारी रोज कर रहे पशुओं की निगरानी बिलासपुर  मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर जिला प्रशासन के समन्वित प्रयासों से आवारा पशुओं के प्रबंधन में काफी हद तक कामयाबी मिली है। सड़कों पर पशुओं का सामूहिक कब्जा अब कम देखने को मिलता है। दुर्घटना भी अब नहीं के बराबर नोट की जा रही है। पशुओं की टैगिंग और गले में रेडियम बेल्ट पहनाए जाने से पशुओं की पहचान आसान हुई है। टैगिंग से पशु मालिक का पता चल जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे के ग्रामों में आयोजित जन चौपाल से मालिकों में जागरूकता आई है। वे अपने पशुओं की ठीक से निगरानी कर रहे हैं। कलेक्टर अवनीश शरण हर रोज इसकी नियमित समीक्षा करते हैं। इसके अलावा राजस्व, नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीम सड़कों पर पशुओं की निगरानी भी कर रहे हैं। इस बीच जोगीपुर में गो अभ्यारण्य भी तेजी से विकसित हो रहा है। पशुओ के प्रबंधन के लिए 354 वॉलेन्टियर्स भी बनाए गए हैं जो पशु प्रबंधन में मदद कर रहे हैं। बैगा, बिरहोर आदिवासियों को अब तक 300 जोड़ी बैल वितरित प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत बैगा, बिरहोर आदिवासियों को निःशुल्क बैल जोड़ी वितरित किया गया। अब तक 300 आदिवासी किसान परिवारों को बैल जोड़ी बांटा जा चुका है। खेती-किसानी की उन्नति में वे इन बैल जोड़ियों का उपयोग करेंगे। ये वे घूमंतु बैल हैं जिन्हें सड़क से उठाकर मोपका गोठान में रखा गया था। उनके मालिकों को सूचना देने के बावजूद उनके द्वारा नहीं ले जाया गया इसलिए इन बैलों को जब्त कर बैगा आदिवासियों को इन बैलों का वितरण किया गया। जनचौपाल का सिलसिला लगातार जारी माननीय उच्च न्यायालय के आदेश एवं मुख्य सचिव के निर्देश पर जिले के प्रमुख नेशनल और स्टेट राजमार्गों में घुमन्तू पशुओं के कारण होने वाली आकस्मिक दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जिले में निरंतर प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए पशुपालकों को प्रेरित करने एवं उनके व्यवहार में परिवर्तन लाने हेतु जिले के चिन्हांकित क्षेत्रों में जनचौपाल का भी आयोजन किया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा जिले के राष्ट्रीय राजमार्ग क. 130 अंतर्गत दर्रीघाट वि.खं. मस्तूरी एवं सेंदरी विखं बिल्हा को चिन्हित किया गया है। यहां जनचौपाल का आयोजन कर पशुपालकों को समझाईश देते हुए इस संबंध में विस्तार से जानकारी दी जा रही है। अब तक  202 जन चौपाल का आयोजन किया गया है। इसी प्रकार अन्य जनचौपाल के लिए तिथियां निर्धारित कर ली गई है।           जनचौपाल के तहत  जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पशुपालकों की उपस्थिति में जनचौपाल का आयोजन किया जा रहा है जिसमें पशुपालकों को घुमन्तू पशुओं को सड़क पर छोड़े जाने से होने वाले समस्याओं से अवगत कराने के साथ साथ पशुओं को सड़कों पर नहीं छोड़ने हेतु अपील एवं समझाईश दिया गया, जिससे घुमन्तू पशुओं के कारण सड़कों में होने वाली समस्याओं में कमी आ आई है। इस संबंध में सभी संबंधित विभाग के अधिकारियों के द्वारा विभागीय योजनाओं के लाभ तथा इससे आवारा पशु नियंत्रण में प्रभावी उपयोग पर जानकारी दी जा रही है, जिसका सकारात्मक प्रभाव ग्रामीणों एवं पशुपालकों पर पड़ा तथा आवारा पशुओं के नियंत्रण के संबंध में ग्रामीणों द्वारा सुझाव भी दिये गये । तेजी से आकार ले रहा है जोगीपुर गो अभ्यारण्य जोगीपुर में डेढ़ सौ एकड़ क्षेत्र में गो अभ्यारण्य तेजी से आकार ले रहा है। कोटा विकासखण्ड के ग्राम जोगीपुर में विशाल गो अभयारण्य विकसित किया जा रहा है। लगभग 154 एकड़ भूमि इसके लिए चिन्हांकित की गई है। जिला मुख्यालय से कोई 30 किमी दूर नदी,नालों,तालाबों और हरियाली से भरपूर यह इलाका अभयारण्य के लिए बेहद अनुकूल जगह है। बीमार, अपाहिज, आवारा एवं सड़कों से हटाये गए जानकारों को यहां पनाह दिया जायेगा। उनकी देखरेख एवं चारा पानी की समुचित व्यवस्था इस अभयारण्य में रहेगी। अभी यहां समतलीकरण कार्य एवं शेड निर्माण किया जा रहा है। मनरेगा, पशुधन विकास सहित विभिन्न योजनाओं के अभिसरण से इसका विकास किया जायेगा। इसके नजदीक सोलर चालित पम्प एवं बोर की व्यवस्था जल्द ही की जाएगी। चारे की निरंतर उपलब्धता के लिए 24 एकड़ में चारागाह विकसित किया जायेगा। आवारा मवेशियों में जियो टैगिंग सड़कों पर घूमने वाले आवारा घूमने वाले मवेशियों की टैगिंग की जा रही है। उन्हें गले में रेडियम बेल्ट भी पहनाए जा रहे हैं। 1207 पशुओं को ईयर टैगिंग और 7284 पशुओं में रेडियम कॉलर बेल्ट लगाया जा चुका है। इस कार्य से पशुओं की पहचान आसान हुई है। टैगिंग से पशु मालिक का पता चल जा रहा है। recent visitors 55