Thursday, July 16, 2026 3:34 pm

Waqf Amendment Bill के खिलाफ जंतर मंतर पर हल्ला बोल, AIMIM के नेता होंगे शामिल

नई दिल्ली ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण चल रहा है।मिली जानकारी के मुताबिक, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड समेत अन्य मुस्लिम संगठनों ने जंतर-मंतर पर वक्फ बिल के खिलाफ सड़कों पर उतर गए हैं। देश में मुसलमान पूरी तरह सुरक्षित: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के जिम्मेदार कह रहे हैं कि देश में मुसलमानों को खतरा है, सुरक्षित नहीं हैं। ये सरासर गलत और गुमराह करने वाली बातें हैं। उन्होंने कहा कि देश में मुसलमान पूरी तरह सुरक्षित है। देश में मुसलमान अपने धार्मिक त्योहार, नमाज, रोजा, हज, जकात, जुलूस और उर्स आदि कार्यक्रम आजादी से मनाता है। कोई भी व्यक्ति या हुकूमत इन धार्मिक कार्यक्रमों में कोई भी बाधा नहीं डालती। रमजान का महीना खुदा की इबादत के लिए मौलाना ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड वक्फ संशोधन बिल के विरोध में जंतर-मंतर दिल्ली पर धरना प्रदर्शन करने जा रहा है। धरना प्रदर्शन करना, अपनी आवाज बुलंद करना हर व्यक्ति को संविधान ने यह अधिकार दिए हैं। मगर रमजान का महीना खुदा की इबादत के लिए है, धरना प्रदर्शन के लिए नहीं। साल के 12 महीनों में रमजान के माह में मुसलमान पवित्रता के साथ रोजा रखता है। नमाज पढ़ता है, कुरआन शरीफ की तिलावत करता है। ऐसी स्थिति में रमजान शरीफ के दिनों में धरना-प्रदर्शन का आयोजन करना, लोगों को धार्मिक कार्य से रोककर राजनीतिक काम में लगाना है। साल के 11 महीनों में किसी दिन भी धरना प्रदर्शन किया जा सकता था। रमजान के महीने में ही क्यों आयोजन किया गया। वक्फ क्या होता है? वक्फ कोई भी चल या अचल संपत्ति हो सकती है, जिसे इस्लाम को मानने वाला कोई भी व्यक्ति धार्मिक कार्यों के लिए दान कर सकता है। इस दान की हुई संपत्ति की कोई भी मालिक नहीं होता है। दान की हुई इस संपत्ति का मालिक अल्लाह को माना जाता है। लेकिन, उसे संचालित करने के लिए कुछ संस्थान बनाए गए है। वक्फ कैसे किया जा सकता है? वक्फ करने के अलग-अलग तरीके हो सकते हैं। जैसे- अगर किसी व्यक्ति के पास एक से अधिक मकान हैं और वह उनमें से एक को वक्फ करना चाहता है तो वह अपनी वसीयत में एक मकान को वक्फ के लिए दान करने के बारे में लिख सकता है। ऐसे में उस मकान को संबंधित व्यक्ति की मौत के बाद उसका परिवार इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। उसे वक्फ की संपत्ति का संचालन करने वाली संस्था आगे सामाजिक कार्य में इस्तेमाल करेगी। इसी तरह शेयर से लेकर घर, मकान, किताब से लेकर कैश तक वक्फ किया जा सकता है। सरकार ने जो वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया है वो क्या है? पिछले कई दिनों से चर्चा थी कि सरकार संसद में वक्फ बोर्ड में संशोधन से जुड़ा विधेयक पेश कर सकती है। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने 8 अगस्त को लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 और मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024 पेश किया। 40 से अधिक संशोधनों के साथ, वक्फ (संशोधन) विधेयक में मौजूदा वक्फ अधिनियम में कई भागों को खत्म करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, विधेयक में वर्तमान अधिनियम में दूरगामी परिवर्तन की बात कही गई है। इसमें केंद्रीय और राज्य वक्फ बोर्ड में मुस्लिम महिलाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना भी शामिल है। इसके साथ ही किसी भी  धर्म के लोग इसकी कमेटियों के सदस्य हो सकते हैं। अधिनियम में आखिरी बार 2013 में संशोधन किया गया था।   recent visitors 35

वक्फ संसोधन बिल पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने आपत्ति जताते हुए कहा- जितना हक हिंदुओं का, उतना मुसलमानों का भी

नई दिल्ली वक्फ संसोधन बिल पर बनी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने गुरुवार को अपनी रिपोर्ट संसद में पेश की, लेकिन इस पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कड़ी आपत्ति जताई है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर कहा कि भारत में अपनी जायदाद पर सिखों और हिंदुओं का जितना हक है, उतना ही हक मुस्लिमों का भी है। वक्फ पर मौजूदा कानून भारतीय संविधान के तहत ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने कहा कि वक्फ पर मौजूदा कानून भारतीय संविधान के तहत आता है और यह धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के अंतर्गत है। उन्होंने बताया कि सिख अपनी जायदाद अपने तरीके से चलाते हैं और हिंदू भी स्वतंत्र हैं, इस पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन उनका कहना था कि नए बिल के मुताबिक वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुसलमानों को शामिल किया जाएगा और इस बोर्ड में सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी का मुसलमान होना जरूरी नहीं रहेगा, जिसे बोर्ड ने गलत बताया। हुकूमत से लड़ाई खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने कहा कि यह कहना बेकार है कि एक दिन पूरा देश वक्फ के तहत आ जाएगा, यह सरकार की ओर से फैलाया जा रहा भ्रम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई हिंदू-मुसलमान की नहीं है, बल्कि यह उनकी अपनी संपत्ति और अधिकार की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि संविधान में हमें धार्मिक मामलों को चलाने का हक दिया गया है और वे अपनी इस लड़ाई में न्यायप्रिय हिंदुओं से भी समर्थन की उम्मीद करते हैं। इस तरह, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने वक्फ से जुड़े नए बिल के खिलाफ अपनी स्थिति स्पष्ट की और इसे संविधान के तहत दिए गए अधिकारों का उल्लंघन बताया।   recent visitors 55

Waqf Amendment Bill को लेकर JPC का गठन, ओवैसी समेत इन 31 सांसदों को जगह

नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने वक्फ संशोधन अधिनियम बिल 2024 के लिए आज जेपीसी के सदस्यों के नाम का ऐलान कर दिया। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कुल 31 सदस्यों के नाम का ऐलान किया।  लोकसभा में बहस के बाद बिल को जेपीसी को भेजने का फैसला किया गया था। लोकसभा के 21 सदस्यों के अलावा राज्यसभा के भी 10 सदस्यों के नाम जेपीसी में शामिल किए गए हैं। सरकार ने वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेज दिया। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को विधेयक पेश किया। विपक्षी दलों ने संक्षिप्त चर्चा के दौरान विधेयक की कड़ी आलोचना की। उन्होंने वक्फ कानून में प्रस्तावित बदलावों को 'असंवैधानिक', 'अल्पसंख्यक विरोधी' और 'विभाजनकारी' बताया। विधेयक का उद्देश्य 1995 के वक्फ अधिनियम में संशोधन करना है। इसमें वक्फ संस्थानों के प्रशासन और संपत्तियों की देखभाल के नियमों में व्यापक बदलावों का प्रस्ताव किया गया है। आइए जानते हैं कि अभी वक्फ कानून में क्या है? विधेयक में क्या संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं और ये परिवर्तन महत्वपूर्ण क्यों हैं? वक्फ प्रॉपर्टी क्या होती है? वक्फ मुसलमानों द्वारा धार्मिक, धर्मार्थ या निजी उद्देश्यों के लिए दी गई व्यक्तिगत संपत्ति होती है। संपत्ति के लाभार्थी भिन्न हो सकते हैं, लेकिन संपत्ति का स्वामित्व अल्लाह के पास माना जाता है। वक्फ एक डीड या डॉक्युमेंट के जरिए या मौखिक रूप से बनाया जा सकता है। साथ ही, किसी संपत्ति को तब भी वक्फ माना जा सकता है यदि इसका उपयोग लंबे समय से धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए किया जाता रहा है। एक बार जब किसी संपत्ति को वक्फ घोषित कर दिया जाता है तो उसका स्वरूप हमेशा के लिए बदल जाता है और उसे उलटा नहीं जा सकता है। मतलब अगर कोई संपत्ति वक्फ घोषित हो गई तो वह हमेशा के लिए वक्फ ही रहेगी, वह किसी भी सूरत में अपने पुराने मालिक के पास नहीं जा सकती। वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन कैसे होता है? भारत में वक्फ संपत्तियों को वक्फ अधिनियम, 1995 से मैनेज किया जाता है। हालांकि, भारत में 1913 से वक्फ के शासन के लिए एक कानूनी व्यवस्था रही है, जब मुस्लिम वक्फ मान्यकरण अधिनियम लागू हुआ था। इसके बाद मुस्लिम वक्फ अधिनियम, 1923 आया। स्वतंत्रता के बाद केंद्रीय वक्फ अधिनियम, 1954 पारित किया गया था, जिसे अंततः वक्फ अधिनियम, 1995 से बदल दिया गया था। वक्फ एक्ट, 1995 में आखिरी संशोधन 2013 में हुआ था। तब वक्फ संपत्ति पर अतिक्रमण के लिए दो साल तक की कारावास की सजा का प्रावधान किया गया था। साथ ही, वक्फ संपत्ति की बिक्री, उपहार, विनिमय, बंधक या हस्तांतरण को स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया था। वक्फ कानून एक सर्वेक्षण आयुक्त की नियुक्ति का प्रावधान करता है जो स्थानीय जांच करके, गवाहों को बुलाकर और सार्वजनिक दस्तावेजों की मांग करके सभी वक्फ संपत्तियों की सूची तैयार करता है। मुतवल्ली और ट्रिब्यूनल को समझें वक्फ संपत्ति के प्रबंधन के लिए कानून में मुतवल्ली की व्यवस्था है। मुतवल्ली एक पर्यवेक्षक के रूप में कार्य करता है। वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन उसी तरह से किया जाता है जैसे भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 के तहत न्यासों के अधीन संपत्तियों का प्रबंधन किया जाता है। वक्फ एक्ट में कहा गया है कि वक्फ संपत्तियों से संबंधित किसी भी विवाद का फैसला वक्फ ट्रिब्यूनल करेगा। ट्रिब्यूनल का गठन राज्य सरकार करती है। इसमें तीन सदस्य होते हैं- एक अध्यक्ष जो जिला, सत्र या सिविल न्यायाधीश, प्रथम श्रेणी से कम रैंक का राज्य न्यायिक अधिकारी नहीं होता है; दूसरा राज्य सिविल सेवा का एक अधिकारी; और तीसरा शरीयत का ज्ञान रखने वाला व्यक्ति। कानून में राज्यों में वक्फ बोर्ड, वक्फ परिषद, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओज) के गठन और नियुक्ति के प्रावधान भी हैं। वक्फ बोर्ड में शामिल सीईओ और सांसद मुस्लिम समुदाय से होने चाहिए। वक्फ बोर्ड की शक्तियां वक्फ बोर्ड राज्य सरकार के अधीन एक निकाय है, जो पूरे राज्य में वक्फ संपत्तियों के संरक्षक के रूप में काम करता है। अधिकांश राज्यों में शिया और सुन्नी समुदायों के लिए अलग-अलग वक्फ बोर्ड हैं। देश की लगभग सभी प्रमुख मस्जिदें वक्फ संपत्तियां हैं और राज्य के वक्फ बोर्ड के अधीन हैं। वक्फ बोर्ड का नेतृत्व अध्यक्ष करता है और इसमें राज्य सरकार मुस्लिम विधायकों और सांसदों, राज्य बार काउंसिल के मुस्लिम सदस्यों, इस्लामी धर्मशास्त्र के मान्यता प्राप्त विद्वानों और 1 लाख रुपये या उससे अधिक की वार्षिक आय वाले वक्फ के मुतवल्ली में से एक या दो को नामित करती है। वक्फ बोर्ड को कानून के तहत संपत्ति का प्रशासन करने और वक्फ की खोई हुई संपत्तियों की वसूली के उपाय करने और बिक्री, उपहार, बंधक, विनिमय या पट्टे के माध्यम से वक्फ की किसी भी अचल संपत्ति के हस्तांतरण को मंजूरी देने की शक्तियां प्राप्त हैं। हालांकि, मंजूरी तब तक नहीं दी जाएगी जब तक कि वक्फ बोर्ड के कम से कम दो-तिहाई सदस्य ऐसे लेन-देन के पक्ष में मतदान न करें। वक्फ कानून में क्या-क्या बदलने का प्रस्ताव, लिस्ट देख लीजिए विधेयक में वक्फ कानून के मौजूदा ढांचे को काफी हद तक बदलने के प्रस्ताव किए गए हैं। प्रस्तावित संशोधन में वक्फ को नियंत्रित करने की शक्ति को बोर्ड और ट्रिब्यूनल से हटाकर राज्य सरकारों को देने की बात कही गई है। अभी वक्फ बोर्ड और ट्रिब्यूनल में बड़े पैमाने पर मुस्लिम समुदाय के सदस्य होते हैं। विधेयक में वक्फ अधिनियम, 1995 का नाम बदलने का भी प्रस्ताव है। नया नाम एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास अधिनियम, 1995 करने का प्रस्ताव है। विधेयक के जरिए वक्फ एक्ट में मुख्य रूप से तीन बदलावों के प्रस्ताव किए गए हैं… ➤ पहला, विधेयक की धारा 3ए में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति तब तक कोई संपत्ति को वक्फ को दान नहीं कर सकता जब तक कि वह संपत्ति का वैध मालिक न हो और ऐसी संपत्ति को हस्तांतरित या समर्पित करने के लिए न सक्षम हो। इस प्रावधान से वैसी संपत्तियों पर वक्फ पर कब्जे रुकेंगे जो किसी के नाम से दर्ज नहीं हैं। ➤ दूसरा, विधेयक की धारा 3सी(1) में कहा गया है कि 'इस अधिनियम के प्रारंभ से पहले या बाद में वक्फ संपत्ति के रूप में पहचानी … Read more