Friday, July 17, 2026 9:17 am

खाड़ी में बढ़ा खतरा: होर्मुज में तेल टैंकर निशाने पर, भारतीय क्रू की चिंता बढ़ी

ईरान मिडिल ईस्ट में इजरायल-ईरान के बीच जारी जंग से तनाव चरम पर पहुंच गया है। अली खामेनेई की मौत से दुनियाभर के कई देशों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इस बीच, ओमान ने रविवार को कहा कि स्ट्रेटेजिक होर्मुज स्ट्रेट में एक ऑयल टैंकर पर हमला हुआ, जिसमें उसमें सवार चार नाविक घायल हो गए। इसमें सवार क्रू के सदस्य भारतीय भी थे। सरकारी न्यूज एजेंसी ने कहा कि हमला पलाऊ के झंडे वाले स्काइलाइट नाम के जहाज को निशाना बनाकर किया गया। इसने क्रू के सदस्यों को भारतीय और ईरानी बताया। हालांकि, यह साफ नहीं है कि जहाज पर किसने हमला किया, लेकिन यह तब हुआ जब अधिकारियों ने कहा कि जब से अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया है, ईरान रेडियो के जरिए स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को धमकी दे रहा है। यह स्ट्रेट इतना महत्वपूर्ण है कि यहीं से दुनियाभर को लगभग 20 फीसदी तेल जाता है। समुद्री अधिकारियों और ईयू नेवल मिशन के एक अधिकारी के मुताबिक, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने जहाजों को चेतावनी दी है कि स्ट्रेटेजिक होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की इजाजत नहीं है। इस पतले पानी के रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को, जो दुनिया के तेल एक्सपोर्ट का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है, रेडियो ट्रांसमिशन मिले हैं जिसमें उन्हें ईरान पर हाल ही में हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों के बाद बढ़ते संघर्ष के बीच ट्रांजिट से बचने के लिए कहा गया है। हालांकि तेहरान ने औपचारिक रूप से बंद करने की घोषणा नहीं की है, लेकिन इंश्योरेंस कंपनियां युद्ध-जोखिम प्रीमियम बढ़ा रही हैं, और बड़ी शिपिंग कंपनियों ने शिपमेंट रोक दिए हैं। ग्लोबल एनर्जी मार्केट और समुद्री सुरक्षा अब काफी दबाव में हैं। recent visitors 29

सर्वेक्षण में एक्सपर्ट्स की सबसे बड़ी आशंका विश्वयुद्ध, परमाणु युद्ध और अंतरिक्ष की लड़ाई , कई एक्सपर्ट्स जलवायु परिवर्तन को लेकर भी चेतावनी दे रहे

वॉशिंगटन  दुनिया में जियो-पॉलिटिकल हालात काफी खतरनाक रास्ते पर मुड़ चला है। यूक्रेन युद्ध के बाद दुनिया कई बार परमाणु युद्ध के मुहाने पर पहुंच चुकी है। लेकिन आगे हालात और भयावह होने वाले हैं। वाशिंगटन में वैश्विक मामलों के थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल की तरफ से किए गये एक सर्वेक्षण से बता चला है कि तीसरा विश्वयुद्ध निश्चित है और ये अगले 10 सालों में शुरू हो सकता है। इस सर्वेक्षण में दुनिया के 300 से ज्यादा एक्सपर्ट्स ने भाग लिया था। इस दौरान इस मुद्दे पर बात की गई कि आखिर अगले 10 सालों में दुनिया कैसे दिखेगी। कई एक्सपर्ट्स ने भविष्यवाणी की है कि 2035 तक अमेरिका, चीन और रूस जैसी वैश्विक शक्तियों के बीच युद्ध छिड़ सकता है। वहीं कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगले 10 सालों में जलवायु परिवर्तन दुनिया के लिए बहुत बड़ा खतरा होगा। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक इस सर्वेक्षण में 357 राजनीतिक रणनीतिकारों ने हिस्सा लिया था, जिन्होंने अगले 10 सालों में दुनिया की बदलती परिस्थितियों और हालातों को लेकर भविष्यवाणियां की हैं। इस दौरान 10 में से चार एक्सपर्ट्स ने भविष्यवाणी की है कि अगले 10 सालों में अमेरिका, चीन और रूस जैसी शक्तियों के बीच विश्वयुद्ध शुरू हो सकता है। उन्होंने आशंका जताई है कि ये लड़ाई सिर्फ पृथ्वी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि युद्ध की आग अंतरिक्ष तक पहुंचेगी। 10 सालों में दुनिया कितनी होगी खतरनाक? सर्वेक्षण के दौरान 10 में से 3 एक्सपर्ट्स ने कहा कि 2035 तक दुनिया के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द जलवायु परिवर्तन होगा। जबकि करीब 1.7 प्रतिशत एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगले 10 सालों में कोई महामारी दुनिया में दस्तक दे सकती है। वहीं 5.1 प्रतिशत एक्सपर्ट्स का कहना है कि वित्तीय ऋण अगले 10 सालों में दुनिया को पंगु बना सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि युद्ध का अंत यूक्रेन के लिए अच्छा नहीं होगा और यूक्रेन युद्ध खत्म होने के बाद अमेरिका की आर्थिक और कूटनीतिक वर्चस्व में भारी कमी आएगी। एक्सपर्ट्स इस बात पर अभी भी एकमत हैं कि दुनिया में परमाणु युद्ध का खतरा बना हुआ है। अटलांटिक काउंसिल की टीम ने कहा, "यह भयावह पूर्वानुमान निश्चित तौर पर एक अंधकारमय वैश्विक परिदृश्य के मुताबिक है, जिसमें 62 प्रतिशत एक्सपर्ट्स ने अनुमान लगाया है कि एक दशक बाद दुनिया आज की तुलना में बदतर होगी। इस दौरान सिर्फ 38 प्रतिशत ने अनुमान लगाया है कि यह बेहतर होगी।" इस सर्वेक्षण के दौरान एक्सपर्ट्स के लिए सबसे ज्यादा चिंताजनक बात परमाणु युद्ध का खतरा था। लेकिन कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि परमाणु युद्ध जैसा ही खतरनाक स्थिति जलवायु परिवर्तन से भी बन सकते हैं। 10 में से तीन एक्सपर्ट्स ने जलवायु परिवर्तन को 2025 और 2035 के बीच दुनिया में होने वाले विकास के लिए सबसे बड़ा खतरा माना। recent visitors 42

हिज्बुल्लाह के खात्मे तक चलता रहेगा ऑपरेशन, 10 हजार इजरायली सैनिक लेबनान के अंदर

बेरुत इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में 130 कस्बों और गांवों से हिज्बुल्लाह आतंकियों को भगा दिया है. यानी इतनी जगहों पर इजरायल का ग्राउंड ऑपरेशन चल रहा है. इस बीच, उत्तरी सीमा पर हुए एक मोर्टार हमले में दो इजरायली रिजर्व सैनिकों की मौत हो गई है. जिसके बाद इजरायल ने लेबनान में और सैनिकों को भेजने की तैयारी कर ली है. इसका मतलब ये है कि बहुत जल्द लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ प्रचंड युद्ध होगा. इजरायल की मिलिट्री ने और सैनिकों को लेबनान के अंदर ग्राउंड ऑपरेशन के लिए उतारा है. यानी हिज्बुल्लाह आतंकियों के सफाए के लिए लेबनान में भारी गोलीबारी होगी. हिज्बुल्लाह भी इस बीच लगातार उत्तरी इजरायल की तरफ रॉकेट दाग रहा है. वेस्ट बैंक सीमा पर ओरानित में 25 वर्षीय मास्टर सार्जेंट एते अजुले और हेरत इलाके में वारंट ऑफिसर अवीव मेगन मोर्टार हमले में मारे गए. दोनों ही इजरायली डिफेंस फोर्सेस की एलीट 5515 कॉम्बैट मोबिलिटी यूनिट के सदस्य थे. एक तीसरा सैनिक भी बुरी तरह से जख्मी हुआ है. फिलहाल उसका इलाज चल रहा है. हिज्बुल्लाह के खात्मे तक चलता रहेगा ऑपरेशन इजरायल ने सीमित, लोकल और टारगेटेड हमले वाला मिलिट्री ऑपरेशन शुरू किया था. ताकि सीमा के आसपास लेबनान के अंदर मौजूद हिज्बुल्लाह के ठिकानों को खत्म किया जा सके. इसके लिए इजरायल ने पहले ही लेबनानी लोगों को शहर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने को कह दिया था. इजरायली सेना ने साफ कहा है कि अगर जरूरत बढ़ती रही तो हम सैनिकों की संख्या और मिलिट्री ऑपरेशन की तीव्रता को बढ़ाते रहेंगे. ये काम अगले ही कुछ हफ्तों में हो जाएगा. अभी एकदम ताजा निर्देश अवाली नदी के पास मौजूद दो दर्जन गांवों के लिए है, ताकि वो अपने घरों को खाली करके चले जाएं. 10 हजार इजरायली सैनिक लेबनान के अंदर 6 अक्टूबर 2024 की रात में लेबनान में तीसरी इजरायली डिविजन भी घुस चुकी है. दो डिविजन पहले से मौजूद थी. हजारों इजरायली सैनिक लेबनान में ग्राउंड ऑपरेशन में लगे हैं. इस समय करीब 10 हजार इजरायली सैनिक लेबनान के अंदर ग्राउंड क्लियरेंस में लगे हैं. इजरायली डिफेंस फोर्सेस के 98वें और 36वें डिविजन के सात 91वीं गैलीली रीजनल डिविजन लेबनान के अंदर मिशन कर रही है. गैलीली रीजनल डिविजन ही लेबनान सीमा की सुरक्षा करती आई है. लेबनान के दक्षिणी इलाके में हिज्बुल्लाह के छोड़े हुए हथियारों का बड़ा जखीरा इजरायल को मिला है. इजरायल को आशंका है कि हिज्बुल्लाह फिर से 7 अक्टूबर जैसा हमला करने की साजिश कर रहा है.   recent visitors 62