Saturday, July 11, 2026 4:00 am

सरकार को गेहूं की खरीदी करनी होगी तो उसे एमएसपी भी बढ़ानी होगी: एक्सपर्ट

शहडोल खरीफ सीजन में मध्य प्रदेश में जहां धान की खेती सबसे बड़े रकबे में की जाती है, तो वहीं रबी सीजन में गेहूं सबसे ज्यादा रकबे में उगाया जाता है. दरअसल, साल भर गेहूं की खूब डिमांड रहती है. इन दिनों गेहूं के दाम आसमान छू रहे हैं, जो आम आदमी के पर्स पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है. लेकिन किसानों के नजरिए से देखें तो ये उनके लिए आने वाले समय के लिए राहत की खबर है. करीब 2 महीने बाद नया गेहूं आ जाएगा. इससे किसानों को मुनाफा होगा. गेहूं के दाम छू रहे आसमान वर्तमान में गेहूं के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे आम आदमी परेशान है, लेकिन किसानों के लिए यह अच्छी खबर है. कारोबारी ने बताते हैं कि "गेहूं अलग-अलग क्वालिटी में 30 रुपए से लेकर के 38 रुपए किलो तक मिल रहा है. मार्केट में नया गेहूं आने से पहले इसका दाम कम नहीं होगा. अगर गेहूं के दाम बढ़े हुए हैं, तो यह तय बात है कि आटे के दाम भी बढ़ेंगे.इस समय नॉर्मल आटे का खुदरा मूल्य 40 रुपए प्रति किलो है. वहीं, किसी ब्रांड का आटा 45 रुपए से लेकर 50 रुपए प्रति किलो मिल रहा है. सरकार को बढ़ाना पड़ सकती है MSP जानकारों के मुताबिक, गेहूं के बढ़े हुए दाम सरकार की परेशानी बढ़ा सकते हैं. क्योंकि अगर सरकार को गेहूं की खरीदी करनी होगी तो उसे एमएसपी भी बढ़ानी होगी. अगर गेहूं का बाजार भाव यही रहा और सरकार ने एमएसपी नहीं बढ़ाई तो कोई भी किसान घाटा सहकर सरकार को अपनी उपज नहीं बेचेगा. पिछली बार सरकार ने 2275 रुपए प्रति क्विंटल एमएसपी की दर से गेहूं की खरीद की थी. प्रदेश सरकार ने इस बार 125 रुपए प्रति क्विंटल की दर से किसानों को बोनस देने की बात भी कही है. गेहूं का यही रेट रहा तो किसानों को होगा फायदा अगर पिछले साल के रेट और बोनस को मिलाकर देखे तो गेहूं का मूल्य 2400 रुपए प्रति क्विंटल होता है. ऐसे में अगर वर्तमान बाजार मूल्य थोड़ी बहुत टूट के साथ भी बरकरार रहा तो सरकार को गेहूं खरीद के लिए एमएसपी बढ़ानी होगी. बशर्ते गेहूं का बाजार मूल्य यही बना रहे. लेकिन सामान्यतः नई उपज आने के बाद गेहूं का मूल्य धड़ाम हो जाता है. recent visitors 25

प्रदेश में खूब बिक रहा गेहूं का बिजवारा, अब तक हो चुकी 50 फीसदी बोवनी, लोकवन पूर्णा, 513 जैसी किस्म का जोर

उज्जैन  इस वर्ष मालवा की माटी में गेहूं की बंपर पैदावार होने की संभावना है। करीब 4.5 लाख हेक्टेयर में बोवनी की जा रही है। चने की बोवनी का रकबा कम बताया जा रहा है। किसान तेजस, पोषक, 322 किस्म के गेहूं का बीज ज्यादा पसंद कर रहे हैं। बीते तीन वर्षों से किसानों को सोयाबीन भाव ठीक नहीं मिल रहे हैं, जबकि गेहूं के भाव काफी अच्छे मिल रहे हैं। यही कारण है कि किसानों का रुझान चने की बनिस्बत गेहूं की बोवनी पर अधिक है। अब तक हो चुकी 50 फीसदी बोवनी     कृषि विभाग के अनुसार, इस वर्ष 4.50 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बोवनी की जा रही है। अब तक 50 फीसद बोवनी हो चुकी है। किसान अधिक उत्पादन के किस्म का गेहूं अधिक बो रहे हैं।     व्यापारी अखिलेश जैन के अनुसार, किसानों ने पोषक, तेजस, 322 किस्म का बिजवारा अधिक खरीदा। इस किस्म के गेहूं का उत्पादन काफी अच्छा बताया जा रहा है।     बीज कंपनी से लेकर व्यापारिक क्षेत्र में यह गेहूं 3300 से 4500 रुपया क्विंटल तक बिक गया। इसके बाद किसानों ने पर्याप्त पानी के चलते लोकवन पूर्णा, 513 जैसी किस्म को बोया है। इनके भाव भी ऊंचे में 4000 रुपया क्विंटल तक रहे। देशावर में खूब बिक रहा गेहूं का बिजवारा इस वर्ष देशावर में गेहूं के बीज की आपूर्ति मालवा क्षेत्र से हो रही है। 322, लोकवन, पूर्णा, पोषक गेहूं के बीजवारे की मांग महाराष्ट्र, पंजाब, बिहार में काफी चल रही है। इस कारण गेहूं के भाव भी ऊंचे हैं। शरबती की बोवनी नगण्य किसी समय में मालवा की माटी का शरबती की मिठास देश के महानगरों में काफी पसंद की जाती थी। मुंबई में इस गेहूं की कीमत 5 से 8 हजार रुपये क्विंटल तक होती थी, लेकिन जिले के सभी क्षेत्र में पानी पर्याप्त मात्रा में होने से किसानों ने शरबती गेहूं की बोवनी से किनारा कर लिया। बता दें इस किस्म का गेहूं काफी कम पानी की पैदावार है। उत्पादन भी अन्य गेहूं की बनिस्बत कम है। अब अधिक उत्पादन पर किसान ध्यान देता है। recent visitors 106