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मेरठ
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की ओर से घोषित सेमेस्टर परीक्षाओं के आनलाइन परिणामों में व्यापक स्तर पर विसंगतियां सामने आई हैं। इससे छात्रों में गहरा असंतोष है। एक चौंकाने वाले मामले में, एक छात्र के पूर्व में जारी परिणाम में एक विषय में बाहरी परीक्षा में 26 और आंतरिक मूल्यांकन में 10 अंक दर्शाए गए थे, जिसके कुल 36 अंकों के साथ उसे उत्तीर्ण घोषित किया गया था।

वहीं, हाल ही में जारी संशोधित परिणाम में उसी सेमेस्टर और विषय कोड के लिए अन्य छात्र को बाहरी परीक्षा में 23 और आंतरिक मूल्यांकन में 10 अंक दिए गए हैं, जिससे उसके कुल प्राप्तांक 33 हो गए हैं और उसे अनुत्तीर्ण घोषित कर दिया गया है।

पीजी सेमेस्टर परिणामों में भी गड़बड़ी
इसी तरह, स्नातकोत्तर (पीजी) सेमेस्टर के परिणामों में भी गड़बड़ी देखने को मिली है। एक छात्र को थ्योरी परीक्षा में 17 अंक प्राप्त होने पर फेल कर दिया गया है, जबकि उसी परीक्षा में दूसरे छात्र को मात्र 11 अंक प्राप्त होने पर उत्तीर्ण घोषित किया गया है।
 
इसके अतिरिक्त, एक अन्य अनियमितता में, एक छात्र के पूर्व में घोषित परिणाम में उल्लिखित विषय कोड को नई एजेंसी की ओर से जारी परिणाम में पूरी तरह से बदल दिया गया है। इस तरह की गलतियां विश्वविद्यालय के बहुत से छात्रों के परीक्षा परिणामों में की है जिससे उनकी शैक्षणिक भविष्य अधर में लटक गया है।

20 फरवरी को जारी रिजल्ट में एक छात्र के सभी विषयों में पास दिखाते हुए फाइनेंसियल एकाउंटिंग में 26 प्लस 10 को मिलाकर कुल 36 अंक मिले। अब दोबारा परिणाम निकालने पर उसी छात्र के फाइनेंसियल एकाउंटिंग के अंक 23 प्लस 10 अंक मिलाकर 33 अंक दिख रहा और फेल दिखाया गया है। छात्रों ने इन अनियमितताओं पर कड़ी आपत्ति जताई है।
 
उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन और परीक्षा परिणाम के लिए अधिकृत एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। छात्रों के अनुसार इस प्रकार की लापरवाही छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और विश्वविद्यालय प्रशासन को इन त्रुटियों को तुरंत सुधारना चाहिए और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। छात्रों ने जानबूझकर किए कृत्य की आशंका से निष्पक्ष जांच कराने और संशोधित परिणाम जारी करने की मांग की है।

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