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Tuesday, April 14, 2026 4:30 am

भोपाल

 व्यापमं घोटाले की जांच के बाद सीबीआई ने डॉ सुधीर शर्मा को चार प्रकरण में आरोपी बनाते हुए न्यायालय में उनके खिलाफ चार्जशीट पेश की थी। इसे चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में चार याचिकाएं दायर की गयी थी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने दायर याचिकाओं की संयुक्त रूप से सुनवाई करते हुए चारों एफआईआर को निरस्त करने के आदेश जारी किए है। विस्तृत आदेश फिलहाल प्रतिक्षित है।

एसआईटी ने सुधीर शर्मा को जांच में पाया था दोषी

दरअसल, व्यापमं घोटाले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने डॉ सुधीर शर्मा को प्रारंभिक जांच में दोषी माना था। इसके बाद चार मामलों में दोषी पाते हुए उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया था। इसके बाद व्यापमं घोटाले की जांच सीबीआई को सौंप दी गयी थी।

चार परीक्षाओं से जुड़े थे केस
सुधीर शर्मा पर व्यापमं घोटाले के तहत वर्ष 2011 से 2013 के बीच हुई विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं- संविदा शिक्षक वर्ग-2 (2011), उप निरीक्षक भर्ती परीक्षा (2012), पुलिस कांस्टेबल परीक्षा (2012) और वनरक्षक परीक्षा (2013) में हुई कथित अनियमितताओं को लेकर चार अलग-अलग केस दर्ज किए गए थे।
दो साल जेल में रहे थे सुधीर शर्मा
बता दें कि व्यापमं घोटाले का खुलासा वर्ष 2013 में हुआ था। आरोपी बनाए जाने के बाद खनन कारोबारी और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सुधीर शर्मा ने जुलाई 2014 में भोपाल जिला अदालत में आत्मसमर्पण किया था। करीब दो वर्षों तक जेल में रहने के बाद उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया था। शर्मा का संबंध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और विज्ञान भारती जैसे संगठनों से भी रहा है।

CBI को सौंपी गई थी जांच
व्यापमं घोटाले की शुरुआती जांच विशेष जांच टीम (SIT) कर रही थी, लेकिन बढ़ते दबाव और राष्ट्रीय स्तर पर मामला गूंजने के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। शर्मा पर परीक्षा नियंत्रक पंकज त्रिवेदी की नियुक्ति में सिफारिश करने और परीक्षा प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे थे, लेकिन कोर्ट ने पाया कि इन आरोपों के समर्थन में कोई निर्णायक साक्ष्य नहीं हैं।

इन मामलों में बनाया था आरोपी

सीबीआई ने उनके खिलाफ सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2012, पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा 2012, संविदा शाला शिक्षक भर्ती वर्ग 2 परीक्षा 2011 और वन रक्षक भर्ती परीक्षा 2013 में हुई धांधली में आरोपी बनाते हुए न्यायालय के समक्ष चालान प्रस्तुत किया था। जिसे चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी।

याचिकाकर्ता के वकील की दलील

याचिकाकर्ता की तरफ से पैरवी करते हुए अधिवक्ता कपिल शर्मा ने युगलपीठ को बताया कि याचिकाकर्ता ने सभी चार मामलों में किसी भी व्यक्ति से आर्थिक संव्यवहार नहीं किया गया है। सीबीआई की चार्जशीट और एक्सेल शीट में इस बात का कहीं उल्लेख नहीं किया गया है। याचिकाकर्ता ने किसी तरह का आर्थिक लाभ अर्जित किया है। दर्ज किए गए प्रकरण कुछ गवाहों के मेमोरेंडम के आधार पर दर्ज किए गए हैं। आर्थिक लाभ अर्जित करने के कोई साक्ष्य नहीं होने के कारण दर्ज एफआईआर निरस्त करने के योग्य है। युगलपीठ ने प्रकरण में साक्ष्यों के अभाव में चारों प्रकरण में एफआईआर निरस्त करने के आदेश जारी किए हैं।

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