अधेड़ उम्र की महिला महानदी में गिर गई, 60 किलोमीटर दूर जिंदा मिली, मछुआरों ने बचाया

रायपुर छत्तीसगढ़ की एक महिला ने महानदी के तेज बहाव के साथ-साथ मौत को भी चकमा दे दिया है। यहां के एक गांव की एक अधेड़ उम्र की महिला महानदी में गिर गई। जहां से बचने की कोई उम्मीद नहीं थी वहां वह बहकर 60 किलोमीटर दूर पहुंच गई और स्थानीय मछुवारों को जिंदा मिली। गुरुवार को उसे झारसुगुड़ा जिले में मछुआरों ने बचाया। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि वह नदी में कैसे गिरी। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के पोरथ की सरोजिनी रणबीर बुधवार शाम को तेज बहाव में बह गई। पिछले कुछ दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण नदी अपने पूरे उफान पर थी। गुरुवार की सुबह झारसुगुड़ा जिले में महानदी के किनारे पलसीडा गांव के कुछ मछुआरों ने उसे देखा और उसकी जान बचाई। उसके पैर में लोहे की जंजीरें बंधी हुई थी। रेंगाली पुलिस थाने के प्रभारी निरीक्षक अभिमन्यु दुर्गा ने बताया कि महिला मानसिक रूप से विक्षिप्त लग रही थी। हालांकि पूछताछ करने पर उसने अपने भाई और गांव का नाम बताया। उन्होंने कहा, "शुरुआती पूछताछ में पता चला कि मानसिक बीमारी के कारण उसके पति ने उसे छोड़ दिया था और वह अपने भाई के साथ रहती थी। ऐसा लगता है कि उसके परिवार ने उसके पैरों में बेड़ियां डाल दी थी। लेकिन यह अविश्वसनीय है कि 60 किलोमीटर तक नदी में बहने के बाद भी महिला कैसे बच गई।" बाद में महिला की मेडिकल कराई गई और उसके पैरों की बेड़ियां खोली गई। पुलिस ने कहा है कि महिला के भाई को झारसुगुड़ा बुलाया गया है।   recent visitors 106

शिव के रुद्राभिषेक में क्या करें और क्या न करे

भगवान शिव का रुद्राभिषेक करना बहुत ही लाभकारी होता है। रुद्राभिषेक से साधक में शिवत्व का उदय होता है। साथ ही व्यक्ति को रुद्राभिषेक करने से भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता और सभी मनोरथपूर्ण होती हैं। लेकिन, रुद्राभिषेक कुछ खास तिथियों पर नहीं करनी चाहिए। यदि आप ऐसा करते हैं तो व्यक्ति को मृत्युतुल्य कष्ट मिलता है। दरअसल, विभिन्न तिथियों पर शिवजी का निवास अलग-अलग जगह होता है। इसलिए रुद्राभिषेक तभी करें, जब शिवजी का निवास करना मंगलकारी होता है। कृष्णपक्ष की प्रतिपदा, अष्टमी अमावस्या और शुक्लपक्ष की द्वितीया पर भगवान शिव का निवास अलग-अलग जगह होता है। रुद्राभिषेक तभी करें, जब शिवजी का निवास मंगलकारी हो। आइए जानते हैं किस दिन भगवान शिव का तिथि अनुसार रुद्राभिषेक करने से क्या लाभ मिलता है। इन तिथियों पर अभिषेक करने से आती है सुथ समृद्धि कृष्णपक्ष की प्रतिपदा, अष्टमी, अमावस्या व शुक्लपक्ष की द्वितीया और नवमी पर भगवान शिव माता गौरी के साथ रहते हैं। इन तिथियों पर रुद्राभिषेक करने से सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। जबकि कृष्णपक्ष की चतुर्थी, एकादशी और शुक्लपक्ष की पंचमी और द्वादशी तिथि को भगवान शिव का निवास कैलाश पर्वत पर होता है। इन तिथियों पर रुद्राभिषेक करने से सुख और परिवार में आनंद और मंगल की प्राप्ति होती है। प्रतिपदा सहित इन तिथियों पर भगवान शिव का अभिषेक करना लाभकारी कृष्णपक्ष की पंचमी एवं द्वादशा तिथि और शुक्लपक्ष की षष्ठी एवं त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव नंदी पर सवार होकर माता पार्वती के साथ पृथ्वी का भ्रमण करते हैं। इन तिथियों पर रुद्राभिषेक करने से अभीष्ट सिद्धि और विशेष मनोकामना की प्राप्ति होती है। कृष्णपक्ष की सप्तमी व चतुर्दशी और शुक्लपक्ष की प्रतिपदा, अष्टमी और पूर्णिमा को शिवजी श्मशान में समाधिस्थ होते हैं। इस समय शिवजी का यदि कोई आवाहन करता है तो उस व्यक्ति को पर मृत्युतुल्य कष्ट दूर होते हैं। इन तिथियों पर भगवान शिव का अभिषेक करने से मिलता है दुख कृष्णपक्ष की द्वितीया व नवमी और शुक्लपक्ष की तृतीया और दशमी को शिवजी देवताओं की समस्या सुनते हैं। इन तिथियों पर रुद्राभिषेक से दुःख मिलता है। कृष्णपक्ष की तृतीया और दशमी और शुक्लपक्ष की चतुर्थी और एकादशी को शिवजी क्रीड़ारत रहते हैं। इन तिथियों पर रुद्राभिषेक करने से संतान को कष्ट होता है। इसलिए इस दिन भगवान शिव का अभिषेक आदि करने से बचना चाहिए। षष्ठी तिथि पर भी न करें भगवान शिव का अभिषेक मिलती है पीड़ा कृष्णपक्ष की षष्ठी व त्रयोदशी और शुक्लपक्ष की सप्तमी व चतुर्दशी को महादेवजी भोजन करते हैं। इन तिथियों पर रुद्राभिषेक करने से पीड़ा मिलती है। इसके अलावा महाशिवरात्रि, प्रदोष और श्रावण सोमवार को रुद्राभिषेक किया जा सकता है। श्रावण मास रुद्राक्ष धारण करने के लिए सर्वोत्तम होता है। recent visitors 369

मॉल से कमाए पैसों से 50 मस्जिदें बनवाएगा ये इस्लामिक देश, होश उड़ा देंगी सुविधाएं, सुर्खियों में दुबई की नई पहल

दुबई दुनिया भर में अपनी भव्यता और शानदार प्रोजेक्ट्स के लिए जाना जाने वाला शहर दुबई एक नई और अनोखी पहल के साथ फिर से सुर्खियों में है। यहां एक ऐसे मॉल का निर्माण हो रहा है, जो न केवल पर्यावरण के अनुकूल होगा बल्कि इससे होने वाली आय का उपयोग अमीरात में मस्जिदों के निर्माण के लिए किया जाएगा। यह कोई साधारण शॉपिंग सेंटर नहीं होगा, बल्कि एक ऐसा स्थल होगा जो सामुदायिक और धार्मिक समर्थन में अहम भूमिका निभाएगा। इस मॉल में सुविधाएं किसी स्वर्ग से कम नहीं होंगी। दुबई स्थित एंडोमेंट्स एंड माइनर्स अफेयर्स ट्रस्ट फाउंडेशन (अवकाफ) की इस परियोजना के अंतर्गत अल खवानीज में 1,65,000 स्क्वायर फीट के क्षेत्र में फैले मॉल में 29 दुकानें, एक बड़ा शॉपिंग सेंटर, मेडिकल सेंटर, रेस्तरां, और फिटनेस सेंटर जैसी सुविधाएं होंगी। इसके अलावा यहां की अन्य सेवा सुविधाओं में सड़कें, पार्क, पार्किंग लॉट, और पुरुषों और महिलाओं के लिए दो प्रार्थना कक्ष भी शामिल होंगे। इस मॉल का निर्माण अंतरराष्ट्रीय हरित भवन मानकों के अनुसार किया जा रहा है, जिसमें पर्यावरण के अनुकूल सामग्रियों और निर्माण तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। सौर और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करके ऊर्जा का उत्पादन, प्रबंधन और पुनर्चक्रण भी इस मॉल की विशेषता होगी। रिपोर्ट के अनुसार, मॉल के निर्माण की अनुमानित लागत 40 मिलियन दिरहम है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 91 करोड़ 19 लाख रुपये के बराबर है। इस मॉल के पूरा होने के बाद, इसकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा उन 50 मस्जिदों के निर्माण में लगेगा, जिन्हें पर्याप्त दान प्राप्त नहीं होता। मॉल से हर साल लगभग 8 मिलियन दिरहम, यानी लगभग 18 करोड़ रुपये इन मस्जिदों की जरूरतों को पूरा करने के लिए खर्च किए जाएंगे। इस परियोजना के तहत मॉल का निर्माण दुबई के 'मस्जिद बंदोबस्ती' अभियान का हिस्सा है, जो दुबई मस्जिद बंदोबस्ती कोष को सहायता प्रदान करता है। अवकाफ दुबई के महासचिव अली मोहम्मद अल मुतावा और उनकी टीम ने हाल ही में मॉल के निर्माण स्थल का दौरा किया और प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने इस अभियान में योगदान देने के लिए सरकारी और निजी संस्थाओं, संगठनों और व्यक्तियों से अपील की है।   recent visitors 114

हेल्थ सही नहीं तो नाखूनों में लक्षण नजर आने लगते है, तुरंत डॉक्टर के पास जाने की जरूरत

वाशिंगटन नाखून से इंसान की सेहत का पता लगाया जा सकता है। डॉक्टर के अलावा आप भी अपने नाखून देखकर अपनी सेहत के बारे में जान सकते हैं। दरअसल, नाखून शरीर का अहम हिस्सा होते हैं जो सेहत का राज बताते हैं। जिसकी हेल्थ सही नहीं रहती, उसके नाखूनों में कुछ लक्षण नजर आने लगते हैं। इसका मतलब है कि नाखून आपको संकेत दे रहे हैं कि आपके शरीर में कुछ तो गड़बढ़ है और तुरंत डॉक्टर के पास जाने की जरूरत है। नाखून विटामिन की कमी से लेकर कैंसर तक की जानकारी दे सकते हैं। अगर आपके नाखून में भी नीचे बताए हुए संकेत नजर आते हैं तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। नाखूनों का पीलापन बहुत लंबे समय तक नेल पॉलिश लगाने के कारण भी हो सकते हैं लेकिन नाखून के आसपास के अन्य बदलावों पर भी ध्यान देना काफी जरूरी है। यदि नाखूनों के आसपास की त्वचा पीली होती है तो वह थायरॉयड की निशानी भी हो सकते हैं। थायरॉइड के कारण नाखून मोटे, सूखे, टूटने वाले हो सकते हैं। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी एसोसिएशन के मुताबिक, सूजी हुई उंगलियां, घुमावदार नाखून, नाखून के ऊपर की त्वचा का मोटा होना थायरॉयड की निशानी हो सकता है। नाखूनों पर लकीर : नाखूनों पर लकीर दिखना सबसे गंभीर लक्षणों में से एक है। नाखूनों पर दिखने वाली लकीर मेलेनोमा का संकेत हो सकता है जो कि नाखूनों के नीचे होने वाला एक प्रकार का स्किन कैंसर है। यह पैर और हाथों की उंगलियों में भी हो सकता है। लोग अक्सर नाखून पर दिखनी वाली लकीर को अनदेखा कर देते हैं लेकिन इसे अनदेखा करना गलत हो सकता है। नाखून में काले या भूरे रंग की लकीर दिखें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। लकीरों के साथ नाखून से खून आ सकता है, नाखून में दरार आ सकती है और आसपास की त्वचा भी काली हो सकती है। मेलेनोमा, स्किन कैंसर का सबसे खतरनाक रूप है जो आमतौर पर यूवी किरणों के संपर्क में आने से होता है। इसे मेलानोनीचिया भी कहा जाता है जो अफ्रीकी, अमेरिकी, हिस्पैनिक, भारतीय, जापानी और अन्य गहरे रंग की स्किन वाले लोगों में हो सकता है।  कैंसर रिसर्च यूके के अनुसार, कोई भी जानलेवा बीमारी वाले लगभग 35 प्रतिशत लोगों के नाखून नरम हो जाते हैं और नाखून के बगल की त्वाचा सामान्य से अधिक घुमावदार हो जाती है। साथ ही साथ उंगलियों के सिरे सामान्य से बड़े हो जाते हैं। इस स्थिति को नाखून या फिंगर क्लबिंग कहते हैं। फिंगर क्लबिंग कई गंभीर स्थितियों जैसे सिस्टिक फाइब्रोसिस, हार्ट डिसीज, कैंसर या अन्य आनुवांशिक बीमारियों के कारण हो सकता है। एक्सपर्ट बताते हैं कि फेफड़े के कैंसर में लगभग 80 से 90 प्रतिशत मामलों में फिंगर क्लबिंग जिम्मेदार होता है। गुर्दे या थायरॉयड की समस्या होने पर होरिजोंटल लकीरें रेखाएं नाखून पर बन जाती हैं। साथ ही साथ यह तेज बुखार, कोविड, मम्बल, खसरा या निमोनिया के कारण भी हो सकती हैं। जो लोग डाइट में पर्याप्त प्रोटीन और जिंक का सेवन नहीं करते उनके नाखूनों में भी होरिजोंटल लकीरें दिखाई देती हैं। यह स्थिति एक्जिमा या सोरायसिस का साइड इफेक्ट भी हो सकता है। पीले और मोटे नाखून डायबिटीज का संकेत हैं। डायबिटीज वाले लोगों के नाखून पीले और मोटे हो जाते हैं। डायबिटीज वाले लोगों में काफी पहले से ये लक्षण नाखूनों पर नजर आने लगते हैं। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, अगर किसी को सोरायसिस (त्वचा की स्थिति) की शिकायत होती है तो नाखून टूट सकते हैं। इस स्थिति के अन्य लक्षण कोहनी, घुटनों और खोपड़ी पर भी नजर आने लगते हैं। सोरायसिस वाले आधे से अधिक लोगों की हाथ और पैरों की उंगुलियों के नाखूनों में इसके लक्षण नजर आने लगते हैं। पिटिंग की स्थिति में आपके नाखूनों में गहरे छेद हो सकते हैं या वे अधिक नुकीले हो सकते हैं।     recent visitors 104

ईरानी नेताओं को सिर्फ औरतों पर सारे कानून बनाना और जुल्म ढहाना आता है- पूर्व मंत्री चौधरी

इस्लामाबाद  हमास नेता इस्माइल हानिया की ईरान की राजधानी में हत्या पर पाकिस्तान के पूर्व मंत्री फवाद चौधरी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। चौधरी ने इजरायल को तुरंत जवाब ना देने के लिए ईरान सरकार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने पूछा है कि ईरानी नेताओं को सिर्फ औरतों के लिए ही सारे कानून बनाना आता है। हानिया की बुधवार तड़के तेहरान में उनके ठिकाने पर हमला कर हत्या कर दी गई थी। वह ईरान के राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण के लिए तेहरान में थे। हमास और ईरान का मानना है कि हमले के पीछे इजरायल है। दूसरी ओर इजरायल ने इस पर चुप्पी साध रखी है। पाकिस्तान में इमरान खान की सरकार में सूचना मंत्री रहे फवाद चौधरी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में ईरान में महिलाओं के लिए अनिवार्य हिजाब और दूसरे कानूनों की ओर इशारा करते हुए लिखा, 'ईरान के मुल्ला मोरल पुलिसिंग के खिलाफ प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को तो मार सकते हैं और उन पर अत्याचार कर सकते हैं लेकिन जब बात इजरायल की बात आती है तो वे किसी बूचड़खाने के मेमना बनकर दुबक जाते हैं।' ईरान ने कही है बदला लेने की बात ईरान की ओर से अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है लेकिन काफी सख्त संदेश इजरायल को दिया गया है। ईरान ने जामकरण मस्जिद में लाल रंग का झंडा लगा लिया है। इस मस्जिद पर लाल झंडे का मतलब जंग के ऐलान से है। मस्जिद के ऊपर लाल रंग का ये झंडा उस वक्त फहराया जाता है, जब ईरान किसी हमले का बदला लेने का ऐलान करता है। इस लाल झंडे के फहरने को युद्ध के ऐलान की तरह माना जाता है। कुछ मीडिया रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया है कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खुमैनी ने तेहरान में इस्माइल हानिया की हत्या के बदले के तौर पर इजरायल पर हमले का आदेश दिया है। खुमैनी ने बुधवार सुबह ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की एक आपातकालीन बैठक में यह आदेश दिया। ईरान ने हनिया की हत्या बाद इसे किसी कीमत पर बर्दाश्त ना करने की बात कहते हुए बदला लेने का ऐलान किया है। recent visitors 113

कंपनी उपभोक्ताओं को जनसंचार माध्यम से मिलने वाली सूचनाओं के अलावा सोशल मीडिया से भी उपलब्ध कराई जा रही

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी कार्यक्षेत्र के भोपाल, ग्वालियर, नर्मदापुरम एवं चंबल संभाग के 16 जिलों के अंतर्गत आने वाले बिजली उपभोक्ताओं को बिजली क्षेत्र से जुड़ी नवीनतम योजनाएं, तकनीकी जानकारी, विभिन्न प्रमाणिक सूचनाएं सोशल मीडिया के माध्यम से आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। कंपनी द्वारा बिजली उपभोक्ताओं को अन्य जनसंचार माध्यम से मिलने वाली सूचनाओं के अलावा सोशल मीडिया के माध्यम से फेसबुक, एक्स एवं यूट्यूब चैनल से भी उपलब्ध कराई जा रही हैं मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बताया है कि कंपनी कार्य क्षेत्र के बिजली उपभोक्ता कंपनी के अधिकृत सोशल मीडिया के फेसबुक पेज फॉलो करने लिए के लिए https://www.facebook.com/mpcz.bhopal तथा एक्स से जुड़ने के लिए https://x.com/mpczDiscom एवं यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करने लिए www.youtube.com/@jansamparkMPCZ दिए गए लिंक पर क्लिक कर निरंतर विद्युत से जुड़ी तमाम योजनाएं, खबरों, शटडाउन आदि से अपडेट हो सकेंगे। इससे उपभोक्ताओं को घर बैठे ही विद्युत संबंधी सभी जानकारियां अपने मोबाइल पर भी आसानी से मिल सकेंगी। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बिजली उपभोक्ताओं से अपील की है कि कंपनी की विद्युत से जुड़ी तमाम जानकारियों से अपडेट रहने के लिए एवं सुझाव अथवा शिकायतों के निराकरण लिए कंपनी के सोशल मीडिया के फेसबुक, एक्स एवं यूट्यूब चैनल को लाइक और सब्सक्राइब करें एवं घर बैठे सूचनाएं प्राप्त करें।   recent visitors 103

शुगर कंट्रोल से बाहर हुई तो नसों को भी डैमेज करने लगती है – शोध

वाशिंगटन  यदि ब्लड शुगर कंट्रोल से बाहर हो गया तो यह शुगर शरीर की नसों को भी डैमेज करने लगता है। इस बीमारी को डायबेटिक न्यूरोपैथी कहते हैं। इसमें मरीज के शरीर के किसी भी हिस्से में नर्व डैमेज होने लगती है। लगभग 50 प्रतिशत डायबिटीज के मरीजों को नर्व डैमेज होने की समस्या होती है। इसलिए समय पर डायबिटीज को कंट्रोल करना बहुत जरूरी है। जानकारी के मुताबिक चार तरह के डायबेटिक न्यूरोपैथी की बीमारी होती है जिनमें कमोबेश एक ही तरह के लक्षण दिखते हैं। डायबेटिक न्यूरोपैथी के लक्षण सबसे पहले हाथ और पैर की नसों में देखने को मिलता है। इस कारण हाथ और पैर पहले से सुन्न होने लगता है। सबसे पहले हाथ में सुन्नापन आता है। हाई ब्लड शुगर के कारण खून की छोटी-छोटी नलिकाओं की दीवाल कमजोर होने लगती है। इसलिए इसके कहीं भी रिसने का डर रहता है। जिससे ऑक्सीजन और अन्य पोषक तत्वों का अंगों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। डायबिटीज से बचने के सिंपल सूत्र हैं फिजिकल एक्टिविटी, हेल्दी डाइट, पर्याप्त पानी पीना, वजन कम करें, सिगरेट-शराब से दूर रहे, स्ट्रैस मैनेजमेंट और पर्याप्त नींद ले। विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे पहले हर वयस्क इंसान को अपने जीवन में नियमित रूप से एक्सरसाइज को शामिल कर लेना चाहिए। एक्सरसाइज के लिए जिम जाने की जरूरत नहीं है बल्कि इसके लिए ब्रिस्क एक्सरसाइज ही काफी है। यानी तेजी के साथ वॉक, साइक्लिंग, स्विमिंग, डांस, रस्सी कूद, हाई जंप, लॉन्ग जंप जैसी गतिविधियां यदि आप आधे से पौन घंटे तक करते हैं तो डायबिटीज होने की आशंका बहुत कम हो जाएगी। इतना ही नहीं इससे कई और बीमारियां भी नहीं होंगी। हेल्दी डाइट से पहले यह समझ लें कि क्या न खाएं। पिज्जा, बर्गर, तली-भुनी चीजें, फास्ट फूड, जंक फूड, पैकेटबंद चीजें, प्रोसेस्ड फूड, रेड मीट, ज्यादा मीठी चीजें, ज्यादा नमकीन चीजें, शराब, सिगरेट का सेवन जितना कम करेंगे, उतना ही डायबिटीज को होने का खतरा कम होगा। इसके साथ ही हेल्दी भोजन करें। जिस भोजन को शुद्ध रूप से कुदरती तरीके से पकाया गया हो और इसमें तेल, नमक का कम इस्तेमाल किया गया हो। जितना हो सके, सीजनल हरी सब्जियां, पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल, एंटीऑक्सीडेंट्स वाले कलरफुल सब्जी और फ्रूट्स का सेवन करना चाहिए। रोजना पर्याप्त पानी पीना न सिर्फ आपको डायबिटीज से बचा सकता है बल्कि कई अन्य बीमारियों से भी बचा सकता है। इसलिए रोजाना पर्याप्त पानी पीएं। हालांकि कितना पानी पीया जाए इसका कोई तय पैमाना नहीं है। लेकिन आप दिन भर में दो लीटर पानी पीएं। डायबिटीज न हो, इसके लिए हर हाल में वजन कम करें। क्योंकि मोटापा के कारण डायबिटीज भी हो सकता है। ज्यादा वजन कई बीमारियों की जड़ है। इसलिए हर हाल में वजन कम करें। अगर एक्सरसाइज, नियंत्रित खान पान से वजन कम नहीं हो रहा है तो एक्सपर्ट की सलाह लें। वजन कम करना न कोई मैजिक है और न ही यह एक-आध महीने में होने वाला है। इसके लिए एक साथ कई चीजों को मैनेज करना पड़ता है। सिगरेट, शराब न सिर्फ डायबिटीज बल्कि कई घातक बीमारियों को बढ़ाता है। इसलिए जितना संभव हो सके अल्कोहल का सेवन न करें। सिगरेट तो पीएं ही नहीं या किसी भी तरह के तंबाकू वाली चीजों का सेवन न करें। तनाव शरीर में 1600 से ज्यादा केमिकल रिएक्शन को प्रभावित करता है। जैसे ही तनाव वाला कॉर्टिसोल हार्मोन ज्यादा रिलीज होने लगता है तो यह मेटाबोलिज्म को बुरी तरह प्रभावित करता है। इसलिए तनाव को भगाने के लिए योगा, मेडिटेशन, वॉकिंग, रनिंग आदि का सहारा लें। हर तरह की बीमारी से बचने के लिए पर्याप्त नींद जरूरी है। यदि रात में सुकून भरी नींद नहीं आएगी तो कई तरह की मुश्किलें होंगी। नींद कम आने के कारण डायबिटीज भी हो सकता है। एक्सपटर्स की माने तो डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है जिसमें पैंक्रियाज से इंसुलिन हार्मोन कम बनता है या बनता ही नहीं है या इंसुलिन रेजिस्ट हो जाता है। चूंकि इंसुलिन ही शुगर को पचाता है और इससे एनर्जी बनती है। इसलिए जब इंसुलिन की कमी होती है तो खून में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है। यह ऐसी बीमारी है जिसमें शुरुआत में बिल्कुल भी पता नहीं चलता।   recent visitors 112