ईरान-इजराइल टकराव का प्रभाव: जयपुर से उड़ान भरने वाले यात्रियों को झटका, खाड़ी रूट बाधित

जयपुर ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में लगाई गई अस्थायी बंदिशों का असर अब जयपुर से संचालित अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी दिखने लगा है। जयपुर से खाड़ी देशों के लिए उड़ान भरने वाली कई फ्लाइट्स को अगले आदेश तक रद्द कर दिया गया है, जिससे यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय हालात बिगड़ने के बाद Etihad Airways की अबू धाबी जाने वाली फ्लाइट EY-327 रद्द कर दी गई है। इसी तरह Air Arabia की शारजाह के लिए उड़ान G9436 और Air India Express की दुबई जाने वाली फ्लाइट IX-195 भी कैंसिल कर दी गई है। इसके अलावा SpiceJet की दुबई जाने वाली फ्लाइट SG-57 भी रद्द की गई है। एयरपोर्ट प्रशासन की एडवाइजरी मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए जयपुर एयरपोर्ट प्रशासन ने यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी की है। प्रबंधन के अनुसार मिडिल ईस्ट क्षेत्र, खासकर इजराइल-ईरान संघर्ष के चलते कई अंतरराष्ट्रीय एयरस्पेस में अस्थायी प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिससे उड़ानों के समय और रूट में बदलाव संभव है। यात्रियों से अपील की गई है कि वे एयरपोर्ट पहुंचने से पहले अपनी संबंधित एयरलाइन से फ्लाइट की ताजा स्थिति की पुष्टि जरूर कर लें। बिना जानकारी के एयरपोर्ट आने से बचें और यात्रा की योजना एयरलाइन से संपर्क में रहकर ही बनाएं। एयरस्पेस बंद होने के कारण देरी, रद्दीकरण या रूट परिवर्तन जैसी स्थितियां बन सकती हैं, इसलिए अतिरिक्त समय और वैकल्पिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यात्रा करने की सलाह दी गई है। दुबई और शारजाह रूट सबसे ज्यादा प्रभावित सूत्रों के मुताबिक दुबई और शारजाह रूट पर संचालित उड़ानों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। हालात सामान्य होने तक आने वाले दिनों में भी उड़ानों के संचालन में बदलाव की संभावना बनी हुई है। recent visitors 30

Gold की चमक से चमकेगा दुबई! रिकॉर्ड तोड़ कीमतों के बीच UAE के शेख का अनोखा कारनामा

एक तरफ जहां सोने की कीमत लगातार नए-नए रिकॉर्ड बना रही है, वहीं दूसरी तरफ दुबई ने इन्फ्लुएंसर हॉटस्पॉट में अपने लेटेस्ट शानदार आकर्षण के तौर पर, दुनिया की पहली सोने से बनी सड़क बनाने की योजना का एलान किया है। ये शानदार और बड़ा प्लान अमीरात की ज्वेलरी इंडस्ट्री के लिए खास तौर पर बनाए गए एक डेवलपमेंट का हिस्सा हैं, जिसे ‘द गोल्ड डिस्ट्रिक्ट’ कहा जाता है। टूरिस्ट, शॉपर्स और प्रोफेशनल्स को लुभाने के लिए डिजाइन की जाने वाली यह ग्लैमरस जगह एक मुख्य आकर्षण बनने वाली है, क्योंकि यहां सोने से बनी सड़क तैयार होगी। दुनिया की पहली गोल्ड स्ट्रीट मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दुबई में सोने से बनने वाली सड़क अपनी तरह की दुनिया में पहली होगी। इस सड़क का मकसद दुबई को सोने और ज्वैलरी के कारोबार में दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र बनाना है। गोल्ड स्ट्रीट की घोषणा प्रॉपर्टी डेवलपर इथरा दुबई द्वारा दुबई गोल्ड डिस्ट्रिक्ट के ऑफिशियल लॉन्च के हिस्से के तौर पर की गई। इस खास तौर पर बनाए गए डिस्ट्रिक्ट में गोल्ड, ज्वेलरी, परफ्यूमरी, कॉस्मेटिक्स और लाइफस्टाइल कैटेगरी में 1,000 से ज्यादा रिटेल शॉप्स शामिल होंगी। भारतीय रिटेलर भी होंगे शामिल रिटेलर्स में जवहारा ज्वेलरी, मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स, अल रोमाइजन और तनिष्क ज्वेलरी शामिल होंगे, और जोयलुक्कास ने 24,000 स्क्वायर फुट के अपने सबसे बड़े फ्लैगशिप स्टोर की योजना की घोषणा की है, जो मिडिल ईस्ट में उसका सबसे बड़ा स्टोर होगा। यहां पर छह होटल में 1,000 से ज्यादा गेस्ट रूम भी बनाए जाएंगे, जिससे अंतरराष्ट्रीय मेहमानों, खरीदारों और ट्रेड पार्टनर्स को आसानी से आने-जाने की सुविधा मिलेगी। कहां होगी ये स्ट्रीट? गोल्ड से तैयार होने वाली स्ट्रीट दुबई के डेरा इलाके में होगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दुबई डिपार्टमेंट ऑफ इकॉनमी एंड टूरिज्म (DET) के अंडर आने वाले दुबई फेस्टिवल्स एंड रिटेल एस्टैब्लिशमेंट (DFRE) के CEO अहमद अल खाजा के मुताबिक, “सोना दुबई की सांस्कृतिक और कमर्शियल पहचान का एक अहम हिस्सा है, जो हमारी विरासत, समृद्धि और एंटरप्राइज की स्थायी भावना का प्रतीक है।” खाजा ने कहा है कि इस खास जगह के जरिए, हम न सिर्फ उस विरासत का जश्न मनाएंगे, बल्कि क्रिएटिविटी और सस्टेनेबिलिटी से बने एक नए युग के लिए इसे फिर से नया रूप भी देंगे। घूमने, रहने और काम करने के लिए बेस्ट खाजा के अनुसार, “जैसे-जैसे हम अपने टूरिज्म और रिटेल सेक्टर को डाइवर्सिफाई कर रहे हैं, दुबई गोल्ड डिस्ट्रिक्ट इंटरनेशनल विजिटर्स को आकर्षित करने, इन्वेस्टमेंट लाने और दुनिया के सबसे अच्छे शहर के तौर पर हमारी पहचान को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा, जहाँ घूमने, रहने और काम करने के लिए सबसे अच्छी जगह है।” recent visitors 27

दुबई में मस्जिदों को विज्ञान से जोड़ने की कोशिश, अग्रेजी में होगी जुमे की नमाज

दुबई  रमजान की शुरूआत से ठीक पहले दुबई ने एक साथ 55 नई मस्जिदों के निर्माण का ऐलान किया है। दुबई प्रशासन की तरफ से कहा गया है कि एक साथ 55 नई मस्जिदों के निर्माण के साथ अमीरात की 70 प्रतिशत से ज्यादा मस्जिदों में शुक्रवार के उपदेश का अंग्रेजी में अनुवाद किया जाएगा। यानि अंग्रेजी में भी इस्लाम को लेकर प्रवचन दिए जाएंगे। इस्लामिक अफेयर्स एंड चैरिटेबल एक्टिविटीज डिपार्टमेंट (IACAD) ने नई मस्जिदों के निर्माण को लेकर कई घोषणाएं की हैं। जिसमें कहा गया है की ये मस्जिदें भव्य होंगी और इनमें आधुनिकता को समाहित किया जाएगा। इसके अलावा मस्जिदों में वास्तुकला का शानदार परिचय दिया जाएगा, जिसमें इस्लामी वास्तुकला की विरासत से दुनिया को वाकिफ करवाया जाएगा। आपको बता दें कि पिछले साल भी 174 मिलियन दिरहम की लागत से 24 मस्जिदों का उद्घाटन किया गया था, जिसमें एक साथ 13 हजार 911 इस्लामिक उपासकों के रहने की व्यवस्था की गई थी। अब 55 नई मस्जिदों का निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए 475 मिलियन दिरहम जारी किए गये हैं। इसमें एक साथ 40 हजार 961 इस्लामिक उपासक रह सकेंगे। इसके अलावा भविष्य में नई मस्जिदों के निर्माण के लिए 54 नये भूखंडों की भी पहचान की गई है। सात सितारे मस्जिदों का निर्माण IACAD ने कहा है कि ये मस्जिदें सात सितारा सुविधाएं वाली होंगी। इसके अलावा विभाग एक मस्जिद गाइड भी तैयार कर रहा है, जिसका मकसद मस्जिदों में स्थिरता के लिए 7-सितारा रेटिंग हासिल करना है। विभाग ने कगा है कि मस्जिदों का निर्माण इस तरह से किया जा रहा है, ताकि दुबई के पर्यावरण पर कोई निगेटिव असर ना पड़े। पिछले साल दुबई में एक आत्मनिर्भर मस्जिद का भी उद्घाटन किया गया था, जिसे 18.15 मिलियन दिरहम की लागत से बनाया गया था। इस मस्जिद में 500 उपासक रह सकते हैं। इस मस्जिद ने दुबई में मस्जिदों के कार्बन फुटप्रिंट को 5% तक कम करने में मदद की, जो शुरुआती लक्ष्यों के मुकाबले अच्छा है। इसके अलावा दुबई में 3D-प्रिंटेड मस्जिदों के निर्माण के लिए भी काम शुरू कर दिए हैं, जिसे 2026 में खोला जाना है। इस मस्जिद के जरिए मुसलमानों को टेक्नोलॉजी से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। हालांकि फिलहाल पानी में तैरने वाली मस्जिद को लेकर कोई नई जानकारी नहीं दी गई है। फ्लोटिंग मस्जिद की घोषणा साल 2023 में की गई थी, जिसकी अनुमानित लागत 55 मिलियन दिरहम है। रमज़ान से पहले, दुबई पहले ही दो नई मस्जिदों का उद्घाटन कर चुका है। मिर्डिफ़ में इब्राहिम अली अल गरगावी मस्जिद करीब 2,226 वर्ग मीटर में फैली हुई है। इसमें 544 उपासक बैठ सकते हैं। इसी तरह, अल बरशा (अर्जन) में अता अल-रहमान मस्जिद का उद्घाटन किया गया है, जो 1,275 वर्ग मीटर में बनी है। IACAD ने कहा है कि अमेरिकी विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर इन मस्जिदों के लिए डिजाइन कर रहा है। recent visitors 62

सऊदी अरब ने इस साल 100 से ज्यादा विदेशियों को मौत की सजा दी, सबसे ज्यादा पाकिस्तानी

दुबई  सऊदी अरब ने इस साल 100 से ज्यादा विदेशियों को मौत की सजा दी है। इसे सऊदी अरब में दिए जाने वाले मृत्युदंड के आंकड़ों में अभूतपूर्व वृद्धि के तौर पर देखा जा रहा है। आधिकारिक सऊदी प्रेस एजेंसी ने बताया कि शनिवार को दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र नज़रान में एक यमनी नागरिक को मौत की सजा दी गई, जो देश में ड्रग्स की तस्करी करने का दोषी था। राज्य मीडिया रिपोर्टों से जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, 2024 में अब तक मारे गए विदेशियों की संख्या 101 हो गई है। एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, यह 2023 और 2022 के आंकड़ों से लगभग तिगुना है, जब सऊदी अधिकारियों ने हर साल 34 विदेशियों को मौत की सजा दी थी। सऊदी अरब ने तोड़े रिकॉर्ड बर्लिन स्थित यूरोपीय-सऊदी मानवाधिकार संगठन (ईएसओएचआर) ने कहा कि इस साल की सजाओं ने पहले ही रिकॉर्ड तोड़ दिया है। समूह के कानूनी निदेशक ताहा अल-हज्जी ने कहा, "यह एक साल में विदेशियों को दी गई सबसे बड़ी संख्या है। सऊदी अरब ने कभी भी एक साल में 100 विदेशियों को फांसी नहीं दी है।" सऊदी अरब को मृत्युदंड के अपने इस्तेमाल को लेकर लगातार आलोचना का सामना करना पड़ा है, जिसकी मानवाधिकार समूहों ने अत्यधिक और अपनी छवि को नरम करने तथा अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों और निवेशकों का स्वागत करने के प्रयासों के साथ तालमेल न रखने के रूप में निंदा की है। मौत की सजा देने वाले टॉप 3 देशों में शामिल एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, तेल समृद्ध सऊदी अरब 2023 में चीन और ईरान के बाद दुनिया में तीसरे सबसे अधिक संख्या में कैदियों को फांसी देने वाले देशों में शामिल है। सितंबर में, एएफपी ने बताया कि सऊदी अरब ने तीन दशकों से अधिक समय में सबसे अधिक संख्या में फांसी दी है। यह आंकड़ा 2022 में 196 और 1995 में 192 के अपने पिछले उच्चतम स्तर को पार कर गया है। तब से फांसी की सजाएं तेजी से जारी हैं। रिपोर्ट के अनुसार,  इस साल कुल 274 लोगों को फांसी दी गई। इन देशों के नागरिकों को दी गई फांसी की सजा   फांसी पाने वाले विदेशी नागरिकों में पाकिस्तान, यमन, सीरिया, नाइजीरिया, मिस्र, जॉर्डन और इथियोपिया के नागरिक शामिल हैं।  पाकिस्तान से 21, यमन से 20, सीरिया से 14, नाइजीरिया से 10, मिस्र से नौ, जॉर्डन से आठ और इथियोपिया से सात शामिल हैं। सूडान, भारत और अफगानिस्तान से तीन-तीन और श्रीलंका, इरिट्रिया और फिलीपींस से एक-एक व्यक्ति को फांसी दी गई। राजनयिकों और कार्यकर्ताओं का कहना है कि विदेशी प्रतिवादियों की निष्पक्ष सुनवाई नहीं हो पाती। सजा पाने वाले विदेशी नागरिक बड़े ड्रग डीलरों के शिकार बन जाते हैं। गिरफ्तारी के समय से लेकर फांसी तक आरोपियों को अपनी बात कोर्ट के सामने रखने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। recent visitors 100

पैदल चलने पर दुबई में कई लोगों पर लगा हजारों का जुर्माना, पढ़िए आखिर गलती क्या थी?

दुबई दुबई एक ऐसा शहर है जो अपनी चकाचौंध, लग्जरी लाइफस्टाइल, ऊंची-ऊंची इमारतों और बेशुमार दौलत के लिए दुनिया भर में मशहूर है. लेकिन इन सबके अलावा, यह शहर अपने सख्त कानूनों के लिए भी जाना जाता है. कई बार इसके कानून इतने सख्त होते हैं कि जब दूसरे देशों के लोग इसके बारे में सुनते हैं, तो वे हैरान रह जाते हैं. ऐसा ही एक मामला दुबई में ट्रैफिक कानून की सख्ती को लेकर सामने आया है. हैरानी की बात यह है कि जहां आमतौर पर लोग गलत ड्राइविंग या ट्रैफिक नियमों की अनदेखी पर चालान और जुर्माने का सामना करते हैं, वहीं दुबई में पैदल चलने वालों पर भी ट्रैफिक नियमों का सख्त पालन करने का दबाव होता है. गल्फ न्यूज के मुताबिक, दुबई पुलिस स्टेशन ने 37 लोगों को खतरनाक तरीके से सड़क पार करने और ट्रैफिक सिग्नल की अनदेखी करने पर जुर्माना लगाया है. उनके ऊपर 400 यूएई दिरहम का जुर्माना लगाया गया है. ध्यान रखें, नहीं तो लगेगा भारी जुर्माना! इस साल की शुरुआत से अब तक, दुबई के ट्रैफिक कानून के तहत, बिना अनुमति वाली जगह से सड़क पार करने या ट्रैफिक सिग्नल तोड़ने पर 400 यूएई दिरहम का जुर्माना लगता है. दुबई का कानून जे-वॉकिंगपर सख्त है. जयवॉकिंग यानी बिना अनुमति या निर्धारित स्थान के सड़क पार करना. जब कोई शख्स ट्रैफिक सिग्नल या जेबरा क्रॉसिंग की अनदेखी करके सड़क के बीच से या ऐसी जगह से सड़क पार करता है जहां से क्रॉसिंग की अनुमति नहीं है, तो इसे जयवॉकिंग कहा जाता है. पिछले साल के आंकड़े डराने वाले! दुबई पुलिस ने बार-बार चेतावनी दी है कि जयवॉकिंग के घातक नतीजे हो सकते हैं. पिछले साल, जे-वॉकिंग की वजह से आठ लोगों की मौत हो गई और 339 लोग घायल हुए. गल्फ न्यूज के मुताबिक, 2023 में 44,000 से ज्यादा लोगों पर जे-वॉकिंग का जुर्माना लगा है. दुबई पुलिस ने साफ कहा है कि सड़क पार करते समय यातायात नियमों का पालन करना जरूरी है.उन्होंने लोगों से अपील की है कि वो क्रॉसिंग का सही तरीका अपनाएं और सड़क पर गाड़ियां न होने पर ही सड़क पार करें. बता दें, दुबई ट्रैफिक कोर्ट ने अरब ड्राइवर को ट्रैफिक नियम न मानने पर 2000 यूएई दिरहम का जुर्माना लगाया, जबकि एशियाई पैदल चलने वालों पर बिना अनुमति वाली जगह से सड़क पार करने के लिए 400 यूएई दिरहम  का जुर्माना लगाया है.     recent visitors 88

मॉल से कमाए पैसों से 50 मस्जिदें बनवाएगा ये इस्लामिक देश, होश उड़ा देंगी सुविधाएं, सुर्खियों में दुबई की नई पहल

दुबई दुनिया भर में अपनी भव्यता और शानदार प्रोजेक्ट्स के लिए जाना जाने वाला शहर दुबई एक नई और अनोखी पहल के साथ फिर से सुर्खियों में है। यहां एक ऐसे मॉल का निर्माण हो रहा है, जो न केवल पर्यावरण के अनुकूल होगा बल्कि इससे होने वाली आय का उपयोग अमीरात में मस्जिदों के निर्माण के लिए किया जाएगा। यह कोई साधारण शॉपिंग सेंटर नहीं होगा, बल्कि एक ऐसा स्थल होगा जो सामुदायिक और धार्मिक समर्थन में अहम भूमिका निभाएगा। इस मॉल में सुविधाएं किसी स्वर्ग से कम नहीं होंगी। दुबई स्थित एंडोमेंट्स एंड माइनर्स अफेयर्स ट्रस्ट फाउंडेशन (अवकाफ) की इस परियोजना के अंतर्गत अल खवानीज में 1,65,000 स्क्वायर फीट के क्षेत्र में फैले मॉल में 29 दुकानें, एक बड़ा शॉपिंग सेंटर, मेडिकल सेंटर, रेस्तरां, और फिटनेस सेंटर जैसी सुविधाएं होंगी। इसके अलावा यहां की अन्य सेवा सुविधाओं में सड़कें, पार्क, पार्किंग लॉट, और पुरुषों और महिलाओं के लिए दो प्रार्थना कक्ष भी शामिल होंगे। इस मॉल का निर्माण अंतरराष्ट्रीय हरित भवन मानकों के अनुसार किया जा रहा है, जिसमें पर्यावरण के अनुकूल सामग्रियों और निर्माण तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। सौर और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करके ऊर्जा का उत्पादन, प्रबंधन और पुनर्चक्रण भी इस मॉल की विशेषता होगी। रिपोर्ट के अनुसार, मॉल के निर्माण की अनुमानित लागत 40 मिलियन दिरहम है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 91 करोड़ 19 लाख रुपये के बराबर है। इस मॉल के पूरा होने के बाद, इसकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा उन 50 मस्जिदों के निर्माण में लगेगा, जिन्हें पर्याप्त दान प्राप्त नहीं होता। मॉल से हर साल लगभग 8 मिलियन दिरहम, यानी लगभग 18 करोड़ रुपये इन मस्जिदों की जरूरतों को पूरा करने के लिए खर्च किए जाएंगे। इस परियोजना के तहत मॉल का निर्माण दुबई के 'मस्जिद बंदोबस्ती' अभियान का हिस्सा है, जो दुबई मस्जिद बंदोबस्ती कोष को सहायता प्रदान करता है। अवकाफ दुबई के महासचिव अली मोहम्मद अल मुतावा और उनकी टीम ने हाल ही में मॉल के निर्माण स्थल का दौरा किया और प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने इस अभियान में योगदान देने के लिए सरकारी और निजी संस्थाओं, संगठनों और व्यक्तियों से अपील की है।   recent visitors 112